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कैलादेवी मेला: करौली का प्रसिद्ध धार्मिक मेला

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
8 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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कैलादेवी मेला: करौली का प्रसिद्ध धार्मिक मेला

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⚡ Quick Answer: कैलादेवी मेला करौली जिले में त्रिकूट पर्वत पर, कालीसिल नदी के तट पर स्थित कैलादेवी मंदिर में चैत्र मास के नवरात्र में लगने वाला विशाल धार्मिक मेला है, जिसे श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण ‘लक्खी मेला’ कहा जाता है; मुख्य दिन चैत्र शुक्ल अष्टमी। कैलादेवी करौली के यादव राजवंश की कुलदेवी हैं। मेले की पहचान हैं — लांगुरिया गीत, राजस्थान-मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश से आने वाले पदयात्री, दंडवत करते हुए पहुँचने वाले भक्त और मीणा-गुर्जर समाज की भारी भागीदारी।

1. कैलादेवी मेला — परिचय

“कैलादेवी का मेला कब लगता है” और “लांगुरिया गीत किस देवी से जुड़े हैं” — पूर्वी राजस्थान से जुड़े ये दो प्रश्न परीक्षाओं में बहुत आम हैं। कैलादेवी का मंदिर करौली शहर से लगभग 25 किमी दूर अरावली-विंध्य की पहाड़ियों के बीच स्थित है। चैत्र नवरात्र में यहाँ लगभग पखवाड़े भर चलने वाला मेला उत्तर भारत के सबसे बड़े देवी-मेलों में गिना जाता है।

तथ्यविवरण
स्थानकैलादेवी गाँव, करौली जिला
पर्वत/नदीत्रिकूट पर्वत; कालीसिल नदी का तट
मेला-समयचैत्र मास — नवरात्र; लगभग पखवाड़ा
मुख्य दिनचैत्र शुक्ल अष्टमी
उपनामलक्खी मेला
आराध्यकैलादेवी (महालक्ष्मी/योगमाया रूप); साथ में चामुंडा माता
कुलदेवीकरौली के यादव (जादौन) राजवंश की
पहचानलांगुरिया गीत, पदयात्रा, दंडवत यात्रा
प्रमुख श्रद्धालुमीणा, गुर्जर, यादव; राजस्थान, म.प्र., उ.प्र., हरियाणा, दिल्ली

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2. कैलादेवी मंदिर का इतिहास एवं मान्यताएँ

  • देवी का स्वरूप: कैलादेवी को महालक्ष्मी तथा कृष्ण-कथा की योगमाया का रूप माना जाता है; मंदिर में उनके साथ चामुंडा माता की प्रतिमा भी है।
  • लोककथा: परंपरा के अनुसार केदारगिरि नामक तपस्वी ने इस क्षेत्र में देवी की आराधना की और यहाँ देवी की स्थापना से जुड़ी कथा प्रचलित है।
  • यादव राजवंश: करौली के यादव शासकों ने कैलादेवी को कुलदेवी माना और मंदिर-परिसर का विस्तार व संरक्षण किया।
  • लांगुरिया: ‘लांगुरिया’ देवी का सेवक माना जाता है — लोक-मान्यता में इसे हनुमान (लंगूर) का प्रतीक कहा जाता है; उसी को संबोधित गीत ‘लांगुरिया’ कहलाते हैं।

3. लक्खी मेला — कैसे भरता है?

  1. पदयात्रा: नवरात्र से पहले ही आगरा, भरतपुर, धौलपुर, ग्वालियर, मुरैना, दिल्ली जैसे क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के जत्थे ध्वजा लेकर पैदल चल पड़ते हैं।
  2. दंडवत यात्रा: कई भक्त मन्नत पूरी होने पर कई किलोमीटर तक साष्टांग दंडवत करते हुए मंदिर पहुँचते हैं।
  3. लांगुरिया गीत-नृत्य: यात्री ढोलक-मंजीरे के साथ लांगुरिया गाते-नाचते चलते हैं।
  4. कालीसिल में स्नान: दर्शन से पहले कालीसिल नदी में स्नान।
  5. मुख्य दिन — चैत्र शुक्ल अष्टमी: सबसे अधिक भीड़; विशेष श्रृंगार व आरती।
  6. मेले का बाज़ार: चूड़ियाँ, ध्वजा-नारियल, खिलौने, लोक-वाद्य; पशु-व्यापार भी।

प्रशासन: लाखों श्रद्धालुओं के कारण जिला प्रशासन करौली मेले के दौरान विशेष यातायात, स्वास्थ्य व सुरक्षा व्यवस्था करता है; राजस्थान रोडवेज़ विशेष बसें चलाती है।

🎯 पूर्वी राजस्थान के मेलों पर टेस्ट दें

कैलादेवी, श्रीमहावीरजी, शिवरात्रि पशु मेला (करौली), जसवंत पशु मेला (भरतपुर) — पूर्वी राजस्थान के मेलों पर प्रश्न VDO, पटवारी, पुलिस व LDC में आते हैं। अभ्यास करें:

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4. लांगुरिया गीत — लोक-संस्कृति की पहचान

  • लांगुरिया पूर्वी राजस्थान (करौली, धौलपुर, भरतपुर, सवाई माधोपुर) और ब्रज क्षेत्र की लोकगीत-शैली है।
  • गीतों में भक्त ‘लांगुर’ को संबोधित कर देवी के प्रति प्रेम, शिकायत, मन्नत और हास्य व्यक्त करते हैं।
  • संगत में ढोलक, मंजीरा, झाँझ; गायन के साथ सामूहिक नृत्य।
  • परीक्षा में प्रश्न का रूप — “लांगुरिया गीत किस देवी की आराधना में गाए जाते हैं?” — उत्तर: कैलादेवी।

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5. करौली — मेले की पृष्ठभूमि

तथ्यविवरण
राजवंशयादव (जादौन) — कैलादेवी कुलदेवी
प्रमुख मंदिरकैलादेवी, मदनमोहनजी (गौड़ीय), श्रीमहावीरजी (जैन — चैत्र शुक्ल 13 का मेला)
पशु मेलाशिवरात्रि पशु मेला (फाल्गुन) — राज्य स्तरीय
अभयारण्यकैलादेवी वन्यजीव अभयारण्य — रणथंभौर बाघ परियोजना से जुड़ा क्षेत्र
प्रसिद्धलाल बलुआ पत्थर

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6. कैलादेवी मेला बनाम अन्य देवी-मेले

मेलास्थानसमयपहचान
कैलादेवी (लक्खी मेला)करौलीचैत्र नवरात्र (शुक्ल 8)लांगुरिया, यादव कुलदेवी
करणी मातादेशनोक (बीकानेर)चैत्र व आश्विन नवरात्रचूहे (काबा)
जीण मातारैवासा (सीकर)चैत्र व आश्विन नवरात्रचौहान कुलदेवी; भंवरों की देवी
शीतला माताचाकसू (जयपुर)चैत्र कृष्ण 8बैलगाड़ी मेला, बास्योड़ा
चौथ माताचौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर)माघ कृष्ण 4सकट चौथ

करणी माता: करणी माता (देशनोक)

7. कैलादेवी मेले का सामाजिक-आर्थिक महत्व

  1. अंतर्राज्यीय सांस्कृतिक सेतु: राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और हरियाणा के श्रद्धालुओं का संगम — ब्रज, चंबल और ढूंढाड़ की संस्कृतियों का मेल।
  2. जनजातीय-ग्रामीण सहभागिता: मीणा व गुर्जर समाज की बड़ी भागीदारी; लांगुरिया जैसे लोकगीतों का संरक्षण।
  3. स्थानीय अर्थव्यवस्था: पखवाड़े भर के मेले से पूजा-सामग्री, चूड़ी, खिलौने, भोजनालय, परिवहन व्यवसाय को आय।
  4. सेवा-परंपरा: पदयात्रा मार्गों पर भंडारे, जल-सेवा व चिकित्सा शिविर — सामुदायिक सहयोग का उदाहरण।
  5. धार्मिक पर्यटन: करौली के मदनमोहनजी, श्रीमहावीरजी और रणथंभौर से जुड़ा पर्यटन-परिपथ।

8. कैलादेवी से जुड़े लोक-विश्वास

  • नवविवाहित जोड़े और नवजात शिशु की प्रथम ‘जात’ (धोक) कैलादेवी पर देने की परंपरा।
  • मन्नत पूरी होने पर ध्वजा, नारियल व चुनरी चढ़ाना तथा बच्चों का मुंडन संस्कार।
  • पदयात्रा या दंडवत यात्रा का संकल्प — भक्ति के साथ सामूहिक अनुशासन का प्रतीक।
  • मेले से लौटते समय श्रद्धालु देवी का प्रसाद, ध्वजा और लाल चुनरी घर ले जाते हैं, जिसे गाँव के देवी-थान पर अर्पित कर पूरे गाँव में प्रसाद बाँटा जाता है — इस तरह मेला गाँव-गाँव तक पहुँचता है।

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कैलादेवी का मेला कब लगता है?

कैलादेवी का लक्खी मेला चैत्र मास के नवरात्र में लगभग पखवाड़े भर भरता है; मुख्य दिन चैत्र शुक्ल अष्टमी है, जो सामान्यतः मार्च-अप्रैल में पड़ता है।

कैलादेवी मंदिर कहाँ स्थित है?

कैलादेवी मंदिर राजस्थान के करौली जिले में त्रिकूट पर्वत पर कालीसिल नदी के किनारे, करौली शहर से लगभग 25 किमी दूर स्थित है।

कैलादेवी किसकी कुलदेवी हैं?

कैलादेवी करौली के यादव (जादौन) राजवंश की कुलदेवी हैं।

कैलादेवी मेले को लक्खी मेला क्यों कहते हैं?

इस मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए इसे लक्खी (लाखों का) मेला कहा जाता है।

लांगुरिया गीत क्या हैं?

लांगुरिया पूर्वी राजस्थान व ब्रज क्षेत्र के भक्ति लोकगीत हैं, जो कैलादेवी की आराधना में ‘लांगुर’ (देवी के सेवक) को संबोधित करके गाए जाते हैं।

📝 One-Liner Revision (12 प्रश्न)

  1. कैलादेवी मंदिर — करौली
  2. पर्वत — त्रिकूट
  3. नदी — कालीसिल
  4. मेला — चैत्र नवरात्र
  5. मुख्य दिन — चैत्र शुक्ल अष्टमी
  6. उपनाम — लक्खी मेला
  7. लोकगीत — लांगुरिया
  8. किसकी कुलदेवी — यादव (करौली)
  9. मंदिर में साथ में — चामुंडा माता
  10. करौली का राज्य स्तरीय पशु मेला — शिवरात्रि पशु मेला
  11. करौली का जैन तीर्थ — श्रीमहावीरजी
  12. करौली के गौड़ीय मंदिर — मदनमोहनजी

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • करौली + त्रिकूट + कालीसिल + चैत्र नवरात्र + लक्खी मेला।
  • लांगुरिया गीत; यादव कुलदेवी; पदयात्रा व दंडवत।
  • करौली के अन्य: मदनमोहनजी, श्रीमहावीरजी, शिवरात्रि पशु मेला।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • कैलादेवी करौली में; चौथ माता सवाई माधोपुर में — दोनों पूर्वी राजस्थान, भ्रम आम।
  • कालीसिल नदी — ‘कालीसिंध’ (हाड़ौती की नदी) से भ्रमित न करें।
  • लांगुरिया — कैलादेवी; चिरजा — सामान्य देवी-गीत; विकल्पों में दोनों आते हैं।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“करौली की कैला, लांगुर का मेला, लाखों का रेला” → करौली, लांगुरिया, लक्खी मेला।

“त्रिकूट पर कैला, कालीसिल में स्नान”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

कैलादेवी पर प्रश्न ‘स्थान’, ‘लांगुरिया’ और ‘यादव कुलदेवी’ — इन तीन संकेतों से बनते हैं। लोकदेवी, लोकगीत और मेले — तीनों अध्याय एक ही उत्तर पर आते हैं, इसलिए यह विषय कम पढ़ाई में अधिक अंक देता है। भूगोल में कालीसिल नदी और कैलादेवी अभयारण्य भी पूछे जा सकते हैं।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

कैलादेवी मेला व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • देवस्थान विभाग, राजस्थान — कैलादेवी मंदिर एवं मेला।
  • जिला प्रशासन करौली — लक्खी मेला व्यवस्थाएँ।
  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’ (लोकदेवियाँ, मेले)।
  • पर्यटन विभाग, राजस्थान — करौली पर्यटन।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: कैलादेवी मेला: करौली का प्रसिद्ध धार्मिक मेला

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: मंदिर-स्थापना व केदारगिरि से जुड़ी कथा लोक-परंपरा पर आधारित है। मेले की अंग्रेज़ी तारीख चैत्र नवरात्र के अनुसार हर वर्ष बदलती है।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. कैलादेवी का मंदिर किस जिले में स्थित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. कैलादेवी की आराधना में गाए जाने वाले गीत कहलाते हैं —

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Q3. कैलादेवी मंदिर किस नदी के किनारे स्थित है?

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Q4. कैलादेवी का लक्खी मेला किस मास में लगता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. कैलादेवी किस राजवंश की कुलदेवी मानी जाती हैं?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

कैलादेवी मेला राजस्थान के करौली जिले में त्रिकूट पर्वत पर कालीसिल नदी के तट पर स्थित कैलादेवी मंदिर में लगता है।

कैलादेवी मेला चैत्र नवरात्र में लगभग पखवाड़े भर भरता है; इसका मुख्य दिन चैत्र शुक्ल अष्टमी है।

श्रद्धालुओं की लाखों की संख्या के कारण कैलादेवी मेले को ‘लक्खी मेला’ कहा जाता है।

लांगुरिया गीत करौली की कैलादेवी की आराधना में गाए जाते हैं।

कैलादेवी करौली के यादव (जादौन) राजवंश की कुलदेवी हैं।

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