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राजस्थान की प्रमुख लोकदेवियाँ: करणी माता एवं अन्य लोकदेवी परंपराएँ

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
11 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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राजस्थान की प्रमुख लोकदेवियाँ: करणी माता एवं अन्य लोकदेवी परंपराएँ

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⚡ Quick Answer: राजस्थान की लोकदेवियाँ दो रूपों में पूजी जाती हैं — कुलदेवी (किसी वंश/जाति की रक्षक) और लोकदेवी (आम जन की आस्था)। करणी माता (देशनोक, बीकानेर) — बीकानेर राठौड़ों की कुलदेवी, ‘चूहों वाली देवी’; नागणेची — राठौड़ों की; जमवाय माता — कछवाहों की कुलदेवी (आराध्य शिला देवी, आमेर); बाण माता — सिसोदियों की; स्वांगिया/आवड़ माता — भाटियों की; कैला देवी — करौली के यादवों की; जीण माता (रैवासा, सीकर) — चौहानों की। लोक-आस्था की देवियों में शीतला माता (चाकसू; वाहन गधा), आई माता (बिलाड़ा; सीरवी), तनोट माता (जैसलमेर; BSF) और सुगाली माता (आउवा; 1857) प्रमुख हैं।

1. लोकदेवी एवं कुलदेवी — अंतर समझें

राजस्थान में शक्ति-उपासना अत्यंत प्राचीन है। राजवंशों ने युद्ध में विजय और वंश-रक्षा के लिए अपनी-अपनी कुलदेवी स्थापित की, जबकि गाँव-गाँव में रोग-निवारण, संतान-सुख, वर्षा और पशु-रक्षा के लिए लोकदेवियों की पूजा होती रही। कई देवियाँ (जैसे करणी माता) चारण कुल में जन्मी ऐतिहासिक स्त्रियाँ थीं, जिन्हें बाद में देवी का रूप माना गया — राजस्थान में चारण देवियों की यह परंपरा विशेष है।

आधारकुलदेवीलोकदेवी
आराधकविशेष वंश/जातिसभी वर्ग
उद्देश्यवंश-रक्षा, युद्ध-विजयरोग-निवारण, संतान, सुख-समृद्धि
उदाहरणनागणेची (राठौड़), जमवाय (कछवाहा), बाण माता (सिसोदिया)शीतला माता, पथवारी माता, छींक माता
मिश्रितकरणी माता — बीकानेर राठौड़ों की कुलदेवी और जन-जन की लोकदेवी

लोकदेवताओं सहित संपूर्ण परिचय: लोकदेवता एवं लोकदेवियाँ — Master Guide।

2. करणी माता — संक्षिप्त परीक्षा नोट्स

  • जन्म — 1387 ई., सुवाप (जोधपुर क्षेत्र) के चारण परिवार में; पिता मेहाजी चारण, माता देवल; बचपन का नाम ‘रिद्धि बाई’।
  • मुख्य मंदिर — देशनोक (बीकानेर); बीकानेर के राठौड़ों की कुलदेवी; ‘चूहों वाली देवी’ — सफेद चूहे ‘काबा’ का दर्शन शुभ।
  • राव बीका को आशीर्वाद — बीकानेर दुर्ग की नींव; राव जोधा के समय मेहरानगढ़ की नींव भी इन्हीं के हाथों मानी जाती है।
  • मंदिर का वर्तमान स्वरूप — महाराजा गंगासिंह; करणी माता की इष्टदेवी — तेमड़ाराय (आवड़ माता); प्रारंभिक स्थल — नेहड़ी जी।
  • मेला — चैत्र व आश्विन नवरात्र।
  • विस्तार: करणी माता (देशनोक) | राव बीका एवं करणी माता का संबंध

3. राजवंशों की कुलदेवियाँ — सबसे महत्वपूर्ण तालिका

वंश/जातिकुलदेवीमुख्य मंदिरस्मरणीय तथ्य
राठौड़ (मारवाड़)नागणेची मातानागाणा (बाड़मेर-बालोतरा क्षेत्र)राव धूहड़ कर्नाटक से मूर्ति लाए; 18 भुजाएँ; राठौड़ नीम नहीं काटते
राठौड़ (बीकानेर)करणी मातादेशनोक (बीकानेर)चूहों वाली देवी
कछवाहा (आमेर-जयपुर)जमवाय माताजमवारामगढ़ (जयपुर)दुल्हेराय ने मंदिर बनवाया
कछवाहा — आराध्यशिला देवीआमेर किलामानसिंह प्रथम बंगाल (जसोर) से लाए
सिसोदिया (मेवाड़)बाण माता (बायण माता)मेवाड़गुहिल-सिसोदियों की कुलदेवी
भाटी (जैसलमेर)स्वांगिया/आवड़ मातातेमड़ेराय (जैसलमेर)प्रतीक — सुगनचिड़ी
चौहानआशापुरा माता / जीण माता / शाकंभरीनाडोल (पाली), रैवासा (सीकर), सांभरहाड़ा-सोनगरा चौहानों की आशापुरा
यादव (करौली)कैला देवीकरौली (त्रिकूट पर्वत)लांगुरिया गीत
खंगारोत कछवाहाज्वाला माताजोबनेर (जयपुर)—
चंपावत राठौड़ (आउवा)सुगाली माताआउवा (पाली)1857 के क्रांतिकारियों की आराध्य
ओसवालसच्चियाय माताओसियां (जोधपुर)प्रतिहारकालीन मंदिर समूह
दाधीच ब्राह्मणदधिमति मातागोठ-मांगलोद (नागौर)प्राचीन मंदिर
खंडेलवालसकराय माताउदयपुरवाटी (झुंझुनूं)शाकंभरी का रूप
नाई समाजनारायणी माताबरवा डूंगरी, राजगढ़ (अलवर)मीणा समाज भी पूजता है
सीरवी समाजआई माताबिलाड़ा (जोधपुर)दीपक की ज्योति से केसर

ट्रिक: “राठौड़ नाग, कछवाहा जम, सिसोदिया बाण, भाटी स्वांग, यादव कैला”।

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4. प्रमुख लोकदेवियाँ — विस्तृत परिचय

4.1 जीण माता — रैवासा (सीकर)

  • चौहानों की कुलदेवी; भाई हर्ष (हर्षनाथ) से रूठकर तपस्या — भाई-बहन के प्रेम की लोककथा।
  • मंदिर का निर्माण पृथ्वीराज चौहान प्रथम के काल में (973 ई. के शिलालेख का उल्लेख); अष्टभुजी प्रतिमा।
  • लोककथा — औरंगज़ेब की सेना पर भंवरों (मधुमक्खियों) का आक्रमण; इसलिए ‘भंवरों की देवी’ भी।
  • देवी को ढाई प्याला शराब चढ़ाने की परंपरा; जीण माता का लोकगीत राजस्थानी का सबसे लंबा लोकगीत माना जाता है (करुण रस; कनफटे जोगी गाते हैं)।
  • मेला — चैत्र व आश्विन नवरात्र।

4.2 कैला देवी — करौली

  • करौली के यादव राजवंश की कुलदेवी; मंदिर त्रिकूट पर्वत पर, कालीसिल नदी के तट पर।
  • भक्त ‘लांगुरिया’ गीत गाते हैं (लांगुरिया = देवी का सेवक, हनुमान का प्रतीक)।
  • चैत्र मास (शुक्ल अष्टमी के आसपास) में विशाल लक्खी मेला — मीणा, गुर्जर व पूर्वी राजस्थान के श्रद्धालु।

4.3 शिला देवी — आमेर

  • कछवाहों की आराध्य देवी (कुलदेवी जमवाय माता); आमेर किले में स्थित।
  • राजा मानसिंह प्रथम बंगाल के जसोर के राजा केदार को हराकर यह प्रतिमा लाए; महिषासुरमर्दिनी अष्टभुजी रूप।
  • यहाँ भी ढाई प्याला शराब चढ़ाने की परंपरा; पहले पशु-बलि होती थी, जो बाद में बंद हुई।

4.4 शीतला माता — चाकसू (जयपुर)

  • मंदिर — शील की डूंगरी, चाकसू; निर्माण सवाई माधोसिंह प्रथम।
  • चेचक की देवी, बच्चों की रक्षक; अन्य नाम — सेढ़ल माता, महामाई।
  • वाहन — गधा; पुजारी — कुम्हार; खंडित प्रतिमा की पूजा होने वाली एकमात्र प्रमुख देवी।
  • चैत्र कृष्ण अष्टमी (शीतलाष्टमी) — ठंडा भोजन ‘बास्योड़ा’; चाकसू में बैलगाड़ियों वाला मेला।

4.5 आई माता — बिलाड़ा (जोधपुर)

  • सीरवी समाज की कुलदेवी; रामदेवजी की शिष्या मानी जाती हैं; ‘आई पंथ’ के 11 नियम।
  • मंदिर ‘बडेर’ कहलाता है; मूर्ति नहीं — अखंड दीपक की ज्योति से केसर टपकने की मान्यता।

4.6 तनोट माता — जैसलमेर

  • आवड़ माता का रूप; भारत-पाक सीमा पर स्थित; पूजा BSF करती है।
  • 1965 के युद्ध में मंदिर परिसर में गिरे बम न फटने की घटना प्रसिद्ध; 1971 युद्ध के बाद विजय स्तंभ।
  • उपाधि — ‘थार की वैष्णो देवी’।

4.7 सुगाली माता — आउवा (पाली)

  • आउवा के चंपावत राठौड़ों की कुलदेवी; दस सिर और चौवन हाथ वाली प्रतिमा।
  • 1857 की क्रांति में ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत के नेतृत्व में क्रांतिकारियों की आराध्य — ‘1857 क्रांति की देवी’।
  • क्रांति दमन के बाद अंग्रेज़ यह प्रतिमा अजमेर ले गए; वर्तमान में यह पाली के संग्रहालय में रखी बताई जाती है।

4.8 त्रिपुरा सुंदरी — तलवाड़ा (बांसवाड़ा)

  • ‘तुरताई माता’; काले पत्थर की अठारह भुजाओं वाली प्रतिमा।
  • पांचाल (लोहार) समाज द्वारा जीर्णोद्धार; वागड़ अंचल का प्रमुख शक्तिपीठ।

5. अन्य लोकदेवियाँ — एक पंक्ति में (One-Liner Bank)

देवीस्थानविशेष तथ्य
राणी सती (नारायणी बाई)झुंझुनूंअग्रवाल समाज; ‘दादीजी’; सती निवारण अधिनियम (1987) के बाद सती-महिमामंडन वाले आयोजन प्रतिबंधित
अंबिका माताजगत (उदयपुर)मंदिर को ‘मेवाड़ का खजुराहो’ कहा जाता है
अर्बुदा देवीमाउंट आबू (सिरोही)‘अधर देवी’
चामुंडा मातामेहरानगढ़ (जोधपुर)राव जोधा द्वारा स्थापित; 2008 का नवरात्र हादसा
लटियाल माताफलोदीकल्ला ब्राह्मणों की कुलदेवी; ‘खेजड़ बेरी राय भवानी’
हर्षत माताआभानेरी (दौसा)चाँद बावड़ी के पास; प्रतिहारकालीन
घेवर माताराजसमंद झील की पालबिना पति के सती होने की लोककथा
बड़ली माताआकोला (चित्तौड़गढ़), बेड़च तटछीपा समाज; बीमार बच्चों को तिबारी से निकालने की परंपरा
भदाणा माताभदाणा (कोटा)‘मूठ’ (टोना) से पीड़ितों का उपचार — लोक-मान्यता
ब्राह्मणी मातासोरसन (बारां)देवी की पीठ की पूजा; गधों का मेला
छींक माताजयपुरमाघ शुक्ल सप्तमी को पूजा
पथवारी मातागाँव-गाँवतीर्थयात्रा की सफलता हेतु
आमजा माताकेलवाड़ा (राजसमंद)भीलों की आराध्य

6. लोकदेवियों के प्रमुख मेले — कैलेंडर

मास/तिथिदेवीस्थान
चैत्र कृष्ण 8 (शीतलाष्टमी)शीतला माताचाकसू (जयपुर)
चैत्र (शुक्ल अष्टमी के आसपास)कैला देवी — लक्खी मेलाकरौली
चैत्र व आश्विन नवरात्रकरणी माता, जीण माता, शिला देवी, नागणेची, तनोटदेशनोक, रैवासा, आमेर, नागाणा, तनोट
माघ शुक्ल 7छींक माताजयपुर

राजस्थान के अन्य प्रमुख मेलों के लिए पुष्कर मेला और बेणेश्वर मेला देखें; मंदिर-स्थापत्य के लिए राजस्थान के प्रमुख मंदिर।

7. अनूठी परंपराएँ — ‘पहचानो कौन’ प्रश्नों के लिए

परंपरा/पहचानदेवी
चूहे (काबा)करणी माता
ढाई प्याला शराबजीण माता, शिला देवी
लांगुरिया गीतकैला देवी
वाहन गधा, कुम्हार पुजारी, खंडित प्रतिमाशीतला माता
दीपक से केसरआई माता
10 सिर, 54 हाथसुगाली माता
बम नहीं फटे, BSF पूजातनोट माता
सबसे लंबा लोकगीतजीण माता
पीठ की पूजाब्राह्मणी माता
सुगनचिड़ीस्वांगिया (आवड़) माता

📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)

  1. करणी माता का मंदिर — देशनोक (बीकानेर)
  2. करणी माता के पिता — मेहाजी चारण
  3. करणी माता की इष्टदेवी — तेमड़ाराय (आवड़ माता)
  4. राठौड़ों की कुलदेवी — नागणेची
  5. कछवाहों की कुलदेवी — जमवाय माता; आराध्य — शिला देवी
  6. शिला देवी की प्रतिमा कौन लाया — मानसिंह प्रथम
  7. सिसोदियों की कुलदेवी — बाण माता
  8. भाटियों की कुलदेवी — स्वांगिया (आवड़) माता
  9. यादवों की कुलदेवी — कैला देवी
  10. जीण माता का भाई — हर्ष
  11. शीतला माता का वाहन — गधा
  12. सीरवी समाज की कुलदेवी — आई माता
  13. ‘थार की वैष्णो देवी’ — तनोट माता
  14. 1857 क्रांतिकारियों की देवी — सुगाली माता (आउवा)
  15. ‘तुरताई माता’ — त्रिपुरा सुंदरी (बांसवाड़ा)

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • कुलदेवी = वंश की रक्षक; लोकदेवी = जन-आस्था।
  • राठौड़–नागणेची, बीकानेर राठौड़–करणी, कछवाहा–जमवाय (आराध्य शिला), सिसोदिया–बाण, भाटी–स्वांगिया, यादव–कैला, चौहान–आशापुरा/जीण।
  • शीतला — गधा, कुम्हार, खंडित प्रतिमा, बास्योड़ा।
  • तनोट — BSF; सुगाली — 1857।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • शिला देवी ≠ कुलदेवी — कछवाहों की कुलदेवी जमवाय माता है।
  • करणी माता ‘पूरे राठौड़ों’ की नहीं, बीकानेर के राठौड़ों की कुलदेवी हैं; मारवाड़ राठौड़ों की नागणेची।
  • जीण माता सीकर में, जमवाय माता जयपुर में — ‘ज’ से भ्रम।
  • कैला देवी करौली में; कैलादेवी अभयारण्य भी करौली में है — भूगोल प्रश्नों में भी जुड़ता है।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“चूहे करणी, भंवरे जीण, गधा शीतला, BSF तनोट”।

“शिला बंगाल से, नागणेची कर्नाटक से” → बाहर से लाई गई दो प्रतिमाएँ।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

लोकदेवियों में सबसे अधिक प्रश्न ‘कुलदेवी’ तालिका (भाग 3) से बनते हैं, उसके बाद ‘अनूठी परंपरा’ (भाग 7) से। तनोट माता और सुगाली माता इतिहास (1965 युद्ध, 1857 क्रांति) से भी जुड़ती हैं, इसलिए इन्हें दोनों विषयों में याद रखें।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

लोकदेवियाँ व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:

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📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)

📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’ (लोकदेवियाँ)।
  • देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार — प्रमुख शक्तिपीठ व मेले।
  • डॉ. गोपीनाथ शर्मा — ‘राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा’।
  • सीमा सुरक्षा बल (BSF) — तनोट माता मंदिर संबंधी जानकारी।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान की प्रमुख लोकदेवियाँ: करणी माता एवं अन्य लोकदेवी परंपराएँ

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: कई देवियों से जुड़ी कथाएँ (भंवरों का आक्रमण, बम न फटना, केसर टपकना) लोक-आस्था पर आधारित हैं और यहाँ सांस्कृतिक परंपरा के रूप में दी गई हैं। सुगाली माता प्रतिमा का वर्तमान स्थान स्थानीय स्रोतों पर आधारित है।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
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Sudhir Sirइतिहास विशेषज्ञलेखक परिचय
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. राठौड़ों की कुलदेवी कौन हैं?

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Q2. आमेर की शिला देवी की प्रतिमा कौन लाया था?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. ‘लांगुरिया’ गीत किस देवी की आराधना में गाए जाते हैं?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. दस सिर और चौवन हाथों वाली प्रतिमा किस देवी की है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. निम्नलिखित में से असुमेलित युग्म है —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

करणी माता बीकानेर के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी हैं। उनका मुख्य मंदिर देशनोक (बीकानेर) में है, जो सफेद चूहों (काबा) के कारण ‘चूहों वाली देवी’ के मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।

कछवाहों की कुलदेवी जमवाय माता (जमवारामगढ़) हैं, जबकि उनकी आराध्य देवी आमेर किले की शिला देवी हैं, जिनकी प्रतिमा मानसिंह प्रथम बंगाल से लाए थे।

शीतला माता का प्रमुख मंदिर चाकसू (जयपुर) की शील की डूंगरी पर है। उनका वाहन गधा है, पुजारी कुम्हार होते हैं और शीतलाष्टमी पर बास्योड़ा (ठंडा भोजन) खाया जाता है।

जैसलमेर की तनोट माता को ‘थार की वैष्णो देवी’ कहा जाता है। मंदिर की पूजा सीमा सुरक्षा बल (BSF) करता है।

आउवा (पाली) की सुगाली माता चंपावत राठौड़ों की कुलदेवी हैं और 1857 की क्रांति में ठाकुर कुशाल सिंह के नेतृत्व में क्रांतिकारियों की आराध्य थीं। उनकी प्रतिमा में दस सिर और चौवन हाथ हैं।

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