पुष्कर मेला 2026: इतिहास, धार्मिक महत्व, PYQ | राजस्थान GK

भूमिका
राजस्थान अपने रंग-बिरंगे लोक-जीवन, धार्मिक आस्था और पशुधन-व्यापार परंपरा के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, और इस पहचान का सबसे चमकदार उदाहरण है पुष्कर मेला। अजमेर जिले की पुष्कर तहसील में प्रतिवर्ष कार्तिक माह में लगने वाला यह मेला विश्व के सबसे बड़े ऊँट व्यापार मेलों में गिना जाता है, और साथ ही यह भारत के सबसे पवित्र तीर्थ-स्थलों में से एक भी है। यही दोहरा स्वरूप — एक ओर आस्था और तीर्थाटन, दूसरी ओर पशु-व्यापार और लोक-उत्सव — पुष्कर मेले को राजस्थान जीके और कला-संस्कृति खंड में परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना देता है। RPSC, RAS, RSMSSB, पटवारी, ग्राम सेवक जैसी लगभग सभी राजस्थान-स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में पुष्कर मेले से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
इस लेख में हम पुष्कर मेले के भौगोलिक स्थान, पौराणिक कथा, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, धार्मिक महत्व, पशु-मेले के स्वरूप, सांस्कृतिक आयोजनों, तथा परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी तथ्यों को विस्तार से समझेंगे।
पुष्कर: स्थान और भौगोलिक परिचय
पुष्कर, अजमेर जिले में अरावली पर्वत श्रृंखला की नाग पहाड़ी (नाग पर्वत) की तलहटी में बसा एक छोटा-सा कस्बा है। यह अजमेर शहर से लगभग 11-14 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। पुष्कर की विशेष पहचान यहाँ स्थित पुष्कर झील से है, जिसे राजस्थान की सबसे पवित्र झीलों में गिना जाता है। इस झील के चारों ओर 52 घाट बने हुए हैं, जहाँ देश-विदेश से आए श्रद्धालु स्नान करते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य (परीक्षा दृष्टि से):
- जिला: अजमेर
- स्थिति: अरावली पर्वतमाला की तलहटी, नाग पहाड़ के पास
- झील के घाटों की संख्या: 52 (मान्यता अनुसार)
- नजदीकी प्रमुख शहर: अजमेर
सत्यापन सलाह: घाटों की संख्या को लेकर विभिन्न स्रोतों में 52 का उल्लेख सबसे अधिक प्रचलित है, परंतु स्थानीय प्रशासनिक दस्तावेज़ों और RPSC पाठ्यक्रम-अनुमोदित सामग्री से इसकी अंतिम पुष्टि अवश्य कर लें, क्योंकि कुछ लोकप्रिय स्रोतों में यह संख्या भिन्न भी बताई गई है।
पौराणिक कथा: ब्रह्मा जी और पुष्कर की उत्पत्ति
पुष्कर से जुड़ी सबसे प्रचलित पौराणिक कथा भगवान ब्रह्मा से संबंधित है। मान्यता है कि एक बार भगवान ब्रह्मा के हाथ से एक कमल पुष्प (पद्म) पृथ्वी पर तीन स्थानों पर गिरा, और जहाँ-जहाँ यह पुष्प गिरा वहाँ झीलें बन गईं — इनमें से एक स्थान पुष्कर कहलाया। "पुष्कर" शब्द ही "पुष्प" (कमल) और "कर" (हाथ) से मिलकर बना माना जाता है, अर्थात "जो हाथ से गिरा कमल पुष्प"।
एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने यहाँ एक महायज्ञ करने का निश्चय किया, परंतु यज्ञ के लिए निर्धारित समय पर उनकी पत्नी सावित्री यज्ञ स्थल पर समय से नहीं पहुँच पाईं। यज्ञ को बिना पत्नी के संपन्न नहीं किया जा सकता था, अतः ब्रह्मा जी ने स्थानीय गुर्जर/गुर्जरी अथवा गायत्री कन्या से विवाह कर यज्ञ पूर्ण किया। इससे क्रुद्ध होकर सावित्री ने ब्रह्मा को श्राप दिया कि उनकी पूजा पृथ्वी पर केवल पुष्कर में ही होगी, अन्यत्र कहीं नहीं। यही कारण बताया जाता है कि विश्व में ब्रह्मा जी के मंदिर अत्यंत विरल हैं, और पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर उनमें सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध माना जाता है।
परीक्षा-उपयोगी बिंदु: ब्रह्मा जी की पत्नियों के संदर्भ में सावित्री और गायत्री दोनों नामों का उल्लेख मिलता है — सावित्री को प्रथम पत्नी तथा गायत्री को द्वितीय विवाह से जुड़ा माना जाता है। पुष्कर की पहाड़ियों पर सावित्री माता तथा गायत्री माता के अलग-अलग मंदिर आज भी स्थित हैं, जहाँ रज्जू मार्ग (रोपवे) से भी पहुँचा जा सकता है।
जगतपिता ब्रह्मा मंदिर
पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर, जिसे जगतपिता ब्रह्मा मंदिर कहा जाता है, भारत के उन गिने-चुने मंदिरों में है जो सीधे भगवान ब्रह्मा को समर्पित हैं। सामान्यतः हिंदू धर्म में ब्रह्मा की पूजा-अर्चना का प्रचलन शिव और विष्णु की तुलना में बहुत सीमित है, और यही तथ्य इस मंदिर को अद्वितीय बनाता है।
मंदिर की वास्तुकला में संगमरमर का प्रयोग हुआ है तथा गर्भगृह में ब्रह्मा जी की चतुर्मुखी प्रतिमा स्थापित है, जिसके साथ उनकी पत्नी की प्रतिमा भी विराजमान है। मंदिर के मुख्य द्वार पर हंस (ब्रह्मा जी का वाहन) की आकृति अंकित है, जो इस मंदिर की पहचान चिह्न जैसा है।
सत्यापन सलाह: मंदिर के निर्माण-काल और निर्माता को लेकर लोक-मान्यताओं में मतभेद हैं — कुछ स्रोत इसे प्राचीन (सतयुग/पौराणिक काल से संबद्ध) मानते हैं, जबकि वर्तमान संरचना को लेकर विद्वानों में लगभग 14वीं शताब्दी के आसपास पुनर्निर्माण की बात भी कही जाती है। इस तिथि की पुष्टि RPSC पाठ्यक्रम-अनुमोदित इतिहास ग्रंथों या राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल की सामग्री से अवश्य करें, क्योंकि यह विषय स्रोतों में विवादित है।
पुष्कर झील और स्नान का धार्मिक महत्व
पुष्कर झील को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे "तीर्थराज" अर्थात तीर्थों का राजा कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है, विशेषकर कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान का सर्वाधिक पुण्यफल माना गया है।
धार्मिक दृष्टि से पुष्कर स्नान को चारधाम यात्रा से भी जोड़ा जाता है — लोक-मान्यता है कि चारधाम यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक श्रद्धालु पुष्कर सरोवर में स्नान न कर लें। कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक के पाँच दिनों को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है; इन पाँच दिनों को "भीष्म पंचक" भी कहा जाता है।
मेले की समयावधि
पुष्कर मेला प्रतिवर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास में आयोजित होता है, जिसका समापन कार्तिक पूर्णिमा के दिन होता है। यह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सामान्यतः अक्टूबर के अंत से नवंबर माह के बीच पड़ता है। पशु-व्यापार तथा मेला-गतिविधियाँ कार्तिक एकादशी के आसपास से आरंभ होकर पूर्णिमा तक लगभग 5 से 8 दिनों तक चलती हैं।
सत्यापन सलाह: मेले की सटीक तिथियाँ प्रतिवर्ष चंद्र पंचांग पर आधारित होने के कारण बदलती रहती हैं, अतः किसी विशेष वर्ष की तिथियाँ बताते समय राजस्थान पर्यटन विभाग (RTDC) की आधिकारिक घोषणा से पुष्टि अवश्य करें। परीक्षा में सामान्यतः "कार्तिक पूर्णिमा को समापन" — यह सामान्य तथ्य ही पूछा जाता है, वर्ष-विशेष की तारीख नहीं।
पुष्कर पशु मेला: विश्व का सबसे बड़ा ऊँट मेला
पुष्कर मेले का व्यावहारिक और आर्थिक पक्ष उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उसका धार्मिक पक्ष। यह मेला मूलतः पशु-व्यापारियों और किसानों के मिलन-स्थल के रूप में विकसित हुआ, जहाँ कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पहले से ही श्रद्धालु और पशुपालक एकत्रित होते थे। धीरे-धीरे यह विश्व के सबसे बड़े ऊँट व्यापार मेलों (Camel Fair) में परिणत हो गया।
इस मेले में हजारों की संख्या में ऊँट, घोड़े और मवेशी लाए जाते हैं, जिनकी खरीद-फरोख्त होती है। मेले के मैदान में पशुपालक अपने पशुओं को सजाकर लाते हैं, और यहीं इस मेले के प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजन भी होते हैं।
मेले के प्रमुख आकर्षण:
- ऊँट श्रृंगार / सौंदर्य प्रतियोगिता (Camel Beauty Contest) — ऊँटों को आभूषणों, कढ़ाई किए हुए साज-सज्जा से सजाया जाता है
- ऊँट दौड़ (Camel Race)
- मूंछ प्रतियोगिता (Longest Moustache Competition)
- मटका फोड़ प्रतियोगिता
- रस्साकशी (Tug of War) — विदेशी बनाम भारतीय प्रतिभागियों के बीच लोकप्रिय आयोजन
- लोक-नृत्य एवं लोक-संगीत के सांस्कृतिक कार्यक्रम
- गुब्बारा (हॉट एयर बैलून) सवारी
- हस्तशिल्प, वस्त्र, आभूषण एवं राजस्थानी व्यंजनों के स्टॉल
राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) इस मेले के सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाता है और प्रतिवर्ष पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु विशेष कार्यक्रमों की व्यवस्था करता है।
आर्थिक एवं सामाजिक महत्व
पुष्कर मेला राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विशेष स्थान रखता है। यह पशुपालकों के लिए अपने पशुधन के व्यापार का प्रमुख मंच है, विशेष रूप से मरुस्थलीय क्षेत्र में ऊँट, जो परिवहन, कृषि-कार्य तथा आजीविका का महत्वपूर्ण साधन रहा है। साथ ही यह मेला हस्तशिल्पियों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों के लिए भी आय का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है।
पर्यटन की दृष्टि से पुष्कर मेला राजस्थान की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले आयोजनों में गिना जाता है, जो प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों पर्यटकों और फोटोग्राफरों को आकर्षित करता है।
राजस्थान के अन्य प्रमुख मेलों से तुलना
राजस्थान में पुष्कर मेले के अतिरिक्त अनेक धार्मिक व सांस्कृतिक मेले प्रसिद्ध हैं। परीक्षा में इन मेलों को आपस में गड्डमड्ड कर पूछा जाता है, अतः तुलनात्मक ज्ञान अत्यंत आवश्यक है।
| मेले का नाम | स्थान/जिला | समर्पित देवता/अवसर | प्रसिद्धि |
|---|---|---|---|
| पुष्कर मेला | अजमेर | ब्रह्मा जी, कार्तिक पूर्णिमा | विश्व का सबसे बड़ा ऊँट मेला |
| बाणेश्वर मेला | डूंगरपुर | शिव जी, माघ पूर्णिमा | आदिवासी (भील) समुदाय का सबसे बड़ा मेला |
| कैला देवी मेला | करौली | कैला देवी | चैत्र माह में लक्खी मेला |
| रामदेवरा मेला | जैसलमेर (पोकरण) | बाबा रामदेव | भाद्रपद माह, लोकदेवता मेला |
| चंद्रभागा मेला | झालावाड़ | चंद्रभागा नदी, शिव | कार्तिक माह, पशु मेला |
| मारवाड़ उत्सव | जोधपुर | लोक संस्कृति | शरद पूर्णिमा के आसपास |
| श्री महावीरजी मेला | करौली | जैन तीर्थंकर महावीर | चैत्र माह |
| गणगौर | उदयपुर/जयपुर | गणगौर (शिव-पार्वती) | चैत्र माह, स्त्रियों का पर्व |
याद रखने योग्य अंतर: पुष्कर मेला और चंद्रभागा मेला दोनों ही कार्तिक माह में लगते हैं और दोनों में पशु-व्यापार होता है — यह बिंदु परीक्षा में भ्रम पैदा करने के लिए प्रयोग किया जाता है। पुष्कर मेला अजमेर में ब्रह्मा जी से संबंधित है, जबकि चंद्रभागा मेला झालावाड़ में शिव जी व चंद्रभागा नदी से संबंधित है।
एग्जाम ट्रैप — सामान्य भ्रांतियाँ जो छात्र अक्सर करते हैं
- भ्रांति: पुष्कर झील राजस्थान की सबसे बड़ी झील है। तथ्य: पुष्कर झील अपनी पवित्रता के लिए प्रसिद्ध है, आकार के लिए नहीं। राजस्थान की सबसे बड़ी झीलों में जयसमंद झील (उदयपुर) आदि आती हैं। पुष्कर झील को आकार की दृष्टि से पूछे जाने वाले प्रश्नों में उत्तर के रूप में न चुनें।
- भ्रांति: पुष्कर मेला केवल एक धार्मिक मेला है। तथ्य: पुष्कर मेला एक साथ धार्मिक तीर्थाटन और विश्व-प्रसिद्ध पशु (ऊँट) व्यापार मेला — दोनों है। परीक्षा में प्रायः इसे केवल "पशु मेला" या केवल "धार्मिक मेला" बताकर भ्रमित किया जाता है।
- भ्रांति: भारत में अनेक ब्रह्मा मंदिर हैं। तथ्य: भगवान ब्रह्मा के मंदिर भारत में अत्यंत विरल हैं; पुष्कर का जगतपिता ब्रह्मा मंदिर इस दृष्टि से विश्व के गिने-चुने और सबसे प्रमुख ब्रह्मा मंदिरों में से एक माना जाता है।
- भ्रांति: पुष्कर मेला जयपुर जिले में लगता है। तथ्य: पुष्कर, अजमेर जिले में स्थित है, जयपुर में नहीं। यह त्रुटि छात्रों में सामान्यतः राजस्थान के अन्य प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों (जयपुर) के साथ भ्रम के कारण होती है।
- भ्रांति: मेला केवल कार्तिक पूर्णिमा के एक दिन का आयोजन है। तथ्य: मेला सामान्यतः 5 से 8 दिनों तक चलता है, जिसका पवित्र समापन कार्तिक पूर्णिमा को होता है; पूरा मेला एक दिन का नहीं होता।
- भ्रांति: सावित्री माता मंदिर और गायत्री माता मंदिर एक ही हैं। तथ्य: ये दोनों अलग-अलग पहाड़ियों पर स्थित पृथक मंदिर हैं — सावित्री माता मंदिर और गायत्री माता मंदिर — दोनों ब्रह्मा जी की पत्नियों से संबद्ध हैं परंतु भिन्न स्थानों पर स्थित हैं।
याद रखने की युक्तियाँ (मेमोरी ट्रिक्स)
- "पुष्कर = पुष्प + कर" — याद रखें: कमल पुष्प (पद्म) ब्रह्मा जी के हाथ (कर) से गिरा, इसलिए नाम पड़ा "पुष्कर"।
- "ब्रह्मा की तीन नारी, तीन पहाड़ी" — सावित्री माता, गायत्री माता के मंदिर अलग-अलग पहाड़ियों पर हैं, जबकि मुख्य ब्रह्मा मंदिर सरोवर के किनारे स्थल पर।
- "52 घाट, 500 मंदिर" — पुष्कर की पहचान को याद रखने के लिए यह लोकप्रिय संख्या-सूत्र प्रयोग होता है (घाटों व मंदिरों की सटीक संख्या स्रोत अनुसार सत्यापित करें)।
- जिला याद रखने का सूत्र: "अजमेर की नाग पहाड़ी पर पुष्कर" — अजमेर और नाग पर्वत को साथ जोड़कर याद रखें ताकि जयपुर से भ्रम न हो।
- समय याद रखने का सूत्र: "एकादशी से पूर्णिमा तक" — देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक के पाँच दिन (भीष्म पंचक) पुष्कर के लिए सर्वाधिक पवित्र हैं।
PYQ ब्लॉक — पूर्व वर्षों में पूछे गए एवं संभावित प्रश्न (20 प्रश्न)
प्रश्न 1. विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला राजस्थान के किस जिले में आयोजित होता है?
(अ) जयपुर (ब) अजमेर (स) पाली (द) नागौर
उत्तर: (ब) अजमेर व्याख्या: पुष्कर, अजमेर जिले की तहसील है और यहीं यह मेला आयोजित होता है।
प्रश्न 2. पुष्कर मेले का समापन किस पावन तिथि को होता है?
(अ) माघ पूर्णिमा (ब) कार्तिक पूर्णिमा (स) चैत्र पूर्णिमा (द) शरद पूर्णिमा
उत्तर: (ब) कार्तिक पूर्णिमा व्याख्या: मेला कार्तिक माह में आयोजित होकर कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र स्नान के साथ समाप्त होता है।
प्रश्न 3. पुष्कर मेला मुख्यतः किस प्रकार के पशु-व्यापार के लिए विश्व-विख्यात है?
(अ) घोड़ा (ब) बैल (स) ऊँट (द) भेड़
उत्तर: (स) ऊँट व्याख्या: पुष्कर को विश्व का सबसे बड़ा ऊँट मेला (Camel Fair) कहा जाता है।
प्रश्न 4. पुष्कर स्थित प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर किस नाम से भी जाना जाता है?
(अ) जगन्नाथ मंदिर (ब) जगतपिता ब्रह्मा मंदिर (स) चतुर्भुज मंदिर (द) रंगनाथ मंदिर
उत्तर: (ब) जगतपिता ब्रह्मा मंदिर
प्रश्न 5. पौराणिक मान्यता अनुसार पुष्कर की उत्पत्ति किस वस्तु के गिरने से हुई?
(अ) त्रिशूल (ब) कमल पुष्प (स) चक्र (द) शंख
उत्तर: (ब) कमल पुष्प व्याख्या: ब्रह्मा जी के हाथ से कमल पुष्प (पद्म) गिरने से पुष्कर की उत्पत्ति की कथा जुड़ी है।
प्रश्न 6. पुष्कर झील के चारों ओर घाटों की पारंपरिक मान्यता प्राप्त संख्या कितनी बताई जाती है?
(अ) 42 (ब) 52 (स) 108 (द) 27
उत्तर: (ब) 52 नोट: इस संख्या को आधिकारिक स्रोत से सत्यापित अवश्य करें।
प्रश्न 7. भगवान ब्रह्मा की पत्नी, जिन्हें यज्ञ में समय पर न पहुँचने के कारण श्राप की कथा से जोड़ा जाता है?
(अ) गायत्री (ब) सावित्री (स) लक्ष्मी (द) सरस्वती
उत्तर: (ब) सावित्री
प्रश्न 8. राजस्थान में विश्व के गिने-चुने ब्रह्मा मंदिरों में से एक स्थित है —
(अ) उदयपुर (ब) पुष्कर (अजमेर) (स) जोधपुर (द) बीकानेर
उत्तर: (ब) पुष्कर (अजमेर)
प्रश्न 9. पुष्कर मेले में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध प्रतियोगिताओं में शामिल नहीं है —
(अ) मूंछ प्रतियोगिता (ब) मटका फोड़ (स) कुश्ती दंगल (द) ऊँट सौंदर्य प्रतियोगिता
उत्तर: (स) कुश्ती दंगल व्याख्या: मूंछ प्रतियोगिता, मटका फोड़ और ऊँट सौंदर्य प्रतियोगिता पुष्कर मेले के प्रसिद्ध आयोजन हैं; कुश्ती दंगल इसकी मुख्य पहचान नहीं है।
प्रश्न 10. पुष्कर, किस पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित है?
(अ) विंध्याचल (ब) सतपुड़ा (स) अरावली (द) हिमालय
उत्तर: (स) अरावली
प्रश्न 11. पुष्कर के निकट स्थित पहाड़ी को क्या कहा जाता है?
(अ) नाग पहाड़ (ब) तारागढ़ (स) मेहरानगढ़ (द) माउंट आबू
उत्तर: (अ) नाग पहाड़
प्रश्न 12. राजस्थान पर्यटन विकास निगम का संक्षिप्त नाम क्या है, जो पुष्कर मेले के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाता है?
(अ) RSRTC (ब) RTDC (स) RIICO (द) RUIDP
उत्तर: (ब) RTDC
प्रश्न 13. देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक के पाँच दिनों को क्या कहा जाता है?
(अ) पंच पर्व (ब) भीष्म पंचक (स) पुष्कर पंचक (द) कार्तिक व्रत
उत्तर: (ब) भीष्म पंचक
प्रश्न 14. निम्न में से कौन-सा मेला पुष्कर मेले के समान कार्तिक माह में आयोजित होता है परंतु झालावाड़ जिले में लगता है?
(अ) बाणेश्वर मेला (ब) चंद्रभागा मेला (स) कैला देवी मेला (द) रामदेवरा मेला
उत्तर: (ब) चंद्रभागा मेला
प्रश्न 15. पुष्कर मेले में परंपरागत रूप से मुख्य आर्थिक गतिविधि क्या रही है?
(अ) वस्त्र निर्माण (ब) पशु (ऊँट-घोड़ा-मवेशी) क्रय-विक्रय (स) खनन व्यापार (द) अनाज व्यापार
उत्तर: (ब) पशु (ऊँट-घोड़ा-मवेशी) क्रय-विक्रय
प्रश्न 16. पुष्कर झील को हिंदू धर्म में किस उपाधि से संबोधित किया जाता है?
(अ) तीर्थराज (ब) मोक्षद्वार (स) पापनाशिनी (द) देवसरोवर
उत्तर: (अ) तीर्थराज
प्रश्न 17. निम्न में से किस पर्वतीय मंदिर का पुष्कर की पहाड़ियों से सीधा संबंध नहीं है?
(अ) सावित्री माता मंदिर (ब) गायत्री माता मंदिर (स) करणी माता मंदिर (द) दोनों (अ) व (ब)
उत्तर: (स) करणी माता मंदिर व्याख्या: करणी माता मंदिर बीकानेर के देशनोक में स्थित है, पुष्कर से इसका कोई सीधा संबंध नहीं है — यह एक सामान्य भ्रामक विकल्प है।
प्रश्न 18. पुष्कर मेले में पर्यटकों के आकर्षण हेतु आयोजित हवाई सवारी को क्या कहा जाता है?
(अ) पैराग्लाइडिंग (ब) हॉट एयर बैलून राइड (स) बंजी जंपिंग (द) जिपलाइन
उत्तर: (ब) हॉट एयर बैलून राइड
प्रश्न 19. पुष्कर मेले के सांस्कृतिक आयोजनों में विदेशी व भारतीय प्रतिभागियों के बीच सर्वाधिक लोकप्रिय प्रतियोगिता कौन-सी है?
(अ) रस्साकशी (ब) कबड्डी (स) दौड़ (द) शतरंज
उत्तर: (अ) रस्साकशी (Tug of War)
प्रश्न 20. मान्यता अनुसार भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर में कितने दिनों तक यज्ञ किया था (एकादशी से पूर्णिमा तक)?
(अ) 3 दिन (ब) 5 दिन (स) 7 दिन (द) 9 दिन
उत्तर: (ब) 5 दिन
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
पुष्कर मेला प्रतिवर्ष हिंदू पंचांग के कार्तिक मास में आयोजित होता है, जिसका पवित्र समापन कार्तिक पूर्णिमा को होता है। अंग्रेजी कैलेंडर में यह प्रायः अक्टूबर-नवंबर माह में पड़ता है।
पुष्कर मेला राजस्थान के अजमेर जिले में, अरावली पर्वतमाला की तलहटी में स्थित पुष्कर कस्बे में आयोजित होता है।
यह एक साथ विश्व के सबसे बड़े ऊँट व्यापार मेलों में से एक और भारत के सबसे पवित्र तीर्थ-स्नान स्थलों में से एक है, जहाँ ब्रह्मा जी का दुर्लभ मंदिर भी स्थित है।
हिंदू धर्म में ब्रह्मा जी की पूजा-अर्चना का प्रचलन बहुत सीमित है, अतः पुष्कर का जगतपिता ब्रह्मा मंदिर विश्व के गिने-चुने ब्रह्मा-समर्पित मंदिरों में से एक होने के कारण विशेष महत्व रखता है।
ऊँट सौंदर्य प्रतियोगिता, ऊँट दौड़, मूंछ प्रतियोगिता, मटका फोड़, रस्साकशी, तथा लोक-नृत्य व लोक-संगीत के कार्यक्रम पुष्कर मेले की प्रमुख पहचान हैं।