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राजस्थान के लोकदेवता एवं लोकदेवियाँ: संपूर्ण Master Guide

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
12 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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राजस्थान के लोकदेवता एवं लोकदेवियाँ: संपूर्ण Master Guide

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⚡ Quick Answer: राजस्थान के लोकदेवता वे वीर, संत या लोकनायक हैं जिन्होंने गौरक्षा, शरणागत-रक्षा, अस्पृश्यता-निवारण, सर्प-दंश से मुक्ति और लोक-कल्याण के लिए जीवन समर्पित किया और मृत्यु के बाद जनमानस ने उन्हें देवता रूप में पूजा। सबसे प्रसिद्ध पंचपीर हैं — पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया और गोगाजी। अन्य प्रमुख लोकदेवता — तेजाजी, देवनारायण जी, मल्लीनाथ जी, कल्लाजी, देवबाबा, तल्लीनाथ जी। प्रमुख लोकदेवियाँ — करणी माता (देशनोक), जीण माता (सीकर), कैला देवी (करौली), शिला देवी (आमेर), आई माता (बिलाड़ा), शीतला माता (चाकसू)। इनकी पूजा थान/देवरा पर, भोपों के माध्यम से, फड़-वाचन, जागरण और मेलों द्वारा होती है।

1. लोकदेवता किसे कहते हैं?

राजस्थान की धरती पर ऐसे अनेक महापुरुष हुए जिन्होंने अपने समय में समाज की रक्षा के लिए असाधारण साहस या त्याग दिखाया — किसी ने गायों को छुड़ाने में प्राण दिए, किसी ने दलितों को गले लगाया, किसी ने वचन निभाने के लिए विवाह के फेरे अधूरे छोड़ दिए। जनता ने इन्हें ‘लोकदेवता’ का दर्जा दिया। शास्त्रीय देवताओं (शिव, विष्णु) से भिन्न, लोकदेवता ऐतिहासिक मनुष्य थे, जिनकी पूजा लोक-परंपरा से विकसित हुई।

विशेषताविवरण
मूलऐतिहासिक वीर/संत, जिनका देवत्व लोक-आस्था से बना
पूजा-स्थलथान, देवरा, चबूतरा, मेढ़ी — प्रायः खेजड़ी या नीम के नीचे
पुजारीभोपा (कई जगह ‘घोड़ला’), जिस पर ‘भाव’ आना माना जाता है
प्रतीकघोड़े पर सवार, हाथ में भाला/तलवार; नेजा (ध्वजा), पगल्ये (चरण-चिह्न)
आराधना रूपजागरण (जम्मा, रातीजगा), फड़-वाचन, पवाड़े, लोकगीत, मेले
सामाजिक संदेशगौरक्षा, शरणागत-वत्सलता, वचन-पालन, समानता, नारी-सम्मान, प्रकृति-रक्षा

2. लोकदेवताओं का वर्गीकरण (Exam-Friendly)

वर्गलोकदेवतापहचान
पंचपीरपाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया, गोगाजीहिंदू-मुस्लिम दोनों द्वारा पूज्य; मारवाड़ के
गौरक्षक वीरपाबूजी, तेजाजी, गोगाजी, बिग्गाजी, देवनारायण जीगायों को छुड़ाने में वीरगति
सर्प-दंश से रक्षकगोगाजी, तेजाजी‘सांपों के देवता’; थान पर तांती बाँधना
समाज-सुधारक संतरामदेवजीअस्पृश्यता-विरोध, कामड़िया पंथ
अवतारी लोकदेवतादेवनारायण (विष्णु), रामदेवजी (कृष्ण), पाबूजी (लक्ष्मण), कल्लाजी (शेषनाग)पौराणिक अवतार से जोड़ा गया
पशु मेलों से जुड़ेतेजाजी (परबतसर), मल्लीनाथ जी (तिलवाड़ा), गोगाजी (गोगामेड़ी), रामदेवजी (नागौर/रामदेवरा)बड़े पशु मेले
जनजातीय/क्षेत्रीयकल्लाजी (वागड़), भूरिया बाबा (मीणा), केसरियानाथ (भील), देवबाबा (गुर्जर-ग्वाले)विशेष समुदाय-आधारित
प्रकृति-रक्षकतल्लीनाथ जी (पांचोटा, जालौर)ओरण में पेड़ काटना वर्जित

पंचपीर और अन्य लोकदेवताओं के बीच अंतर विस्तार से: पंचपीर एवं अन्य लोकदेवताओं में अंतर।

3. प्रमुख लोकदेवता — संक्षिप्त परिचय

3.1 रामदेवजी — ‘रूणेचा रा धणी’

  • जन्म — उंडूकाश्मीर (शिव तहसील, बाड़मेर), भाद्रपद शुक्ल द्वितीया; तंवर राजपूत; पिता अजमालजी, माता मैणादे; पत्नी नेतलदे; गुरु बालीनाथ।
  • रामदेवरा (रूणेचा), जैसलमेर में जीवित समाधि (1458 ई.); मेला भाद्रपद शुक्ल 2 से 11 — सांप्रदायिक सद्भाव का सबसे बड़ा मेला।
  • उपाधियाँ — रामसा पीर, पीरों के पीर; कृष्ण का अवतार। प्रतीक — पगल्ये, पँचरंगी नेजा; घोड़ा — लीला (नीला)।
  • कामड़िया पंथ; भक्त ‘रिखिया’; जागरण ‘जम्मा’; रचना ‘चौबीस बाणियाँ’; कामड़ स्त्रियों का तेरहताली नृत्य; धर्म-बहन डालीबाई।
  • विस्तार: रामदेवजी

3.2 गोगाजी — ‘जाहर पीर’

  • जन्म — ददरेवा (चूरू), चौहान वंश; पिता जेवरसिंह, माता बाछल; पत्नी केलमदे; गुरु गोरखनाथ।
  • महमूद गजनवी से युद्ध; गजनवी ने ‘जाहर पीर’ कहा। शीर्षमेड़ी — ददरेवा, धुरमेड़ी — गोगामेड़ी (नोहर, हनुमानगढ़)।
  • मेला — भाद्रपद कृष्ण नवमी (गोगा नवमी), गोगामेड़ी; ‘सांपों के देवता’; थान खेजड़ी के नीचे — ‘गाँव-गाँव खेजड़ी, गाँव-गाँव गोगो’।
  • किसान बुवाई पर हल व हाली को 9 गाँठों वाली ‘गोगा राखड़ी’ बाँधते हैं।
  • विस्तार: गोगाजी

3.3 पाबूजी — ‘ऊँटों के देवता’

  • जन्म — कोलू (फलोदी), राठौड़; पिता धांधलजी; पत्नी सुप्यारदे (अमरकोट के सोढ़ा की पुत्री)।
  • विवाह के फेरों के बीच उठकर देवल चारणी की गायें बचाने गए; बहनोई जींदराव खींची से देचूं में युद्ध कर वीरगति।
  • घोड़ी — केसर कालमी; लक्ष्मण का अवतार; मारवाड़ में ऊँट लाने का श्रेय — रेबारी (राइका) समाज के आराध्य; प्लेग-रक्षक।
  • पाबूजी की फड़ — नायक भोपे, रावणहत्था; ‘पाबूजी के पवाड़े’ — माठ वाद्य; ग्रंथ ‘पाबू प्रकाश’ (आशिया मोडजी)।
  • विस्तार: पाबूजी

3.4 तेजाजी — ‘काला-बाला के देवता’

  • जन्म — खड़नाल (नागौर), माघ शुक्ल चतुर्दशी (1074 ई.); जाट (धौल्या गोत्र); पिता ताहड़जी, माता रामकुँवरी; पत्नी पेमल (पनेर)।
  • लाछा गूजरी की गायें छुड़ाकर लौटते समय वचन निभाते हुए नाग से जीभ पर डसवाया — सुरसुरा (किशनगढ़, अजमेर) में देहांत।
  • घोड़ी — लीलण (सिणगारी); मेला — परबतसर, भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) — राजस्व आय की दृष्टि से सबसे बड़ा पशु मेला।
  • पुजारी — घोड़ला; खेत में बुवाई के समय ‘तेजा टेर’ गाई जाती है; 2011 में डाक टिकट।
  • विस्तार: तेजाजी

3.5 देवनारायण जी — गुर्जरों के आराध्य

  • जन्म — 1243 ई., मालासेरी डूंगरी (आसींद, भीलवाड़ा); पिता सवाई भोज (बगड़ावत), माता साढू खटाणी; पत्नी पीपलदे।
  • विष्णु का अवतार; घोड़ा — लीलागर; मूर्ति के स्थान पर ईंटों की पूजा, नीम के पत्ते चढ़ते हैं।
  • देहत्याग — देवमाली (ब्यावर) — जिसे 2024 में भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँव चुना गया।
  • सबसे लंबी फड़ — गुर्जर भोपे, जंतर वाद्य; 1992 में इस फड़ पर डाक टिकट।
  • विस्तार: देवनारायण जी

3.6 अन्य लोकदेवता — एक पंक्ति में

  • हड़बूजी: भूंडोल (नागौर), सांखला; रामदेवजी के मौसेरे भाई; बेंगटी (फलोदी) में उनकी गाड़ी की पूजा; वाहन — सियार; शकुन-शास्त्र के ज्ञाता — हड़बूजी सांखला।
  • मेहाजी मांगलिया: मेला बापणी, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी; घोड़ा किरड़ काबरा; जैसलमेर के राणगदेव भाटी से युद्ध — मेहाजी मांगलिया।
  • मल्लीनाथ जी: मालाणी क्षेत्र इन्हीं के नाम पर; तिलवाड़ा (बालोतरा) में चैत्र कृष्ण एकादशी से पशु मेला (थारपारकर, कांकरेज नस्ल); पत्नी रूपादे।
  • वीर कल्लाजी राठौड़: ‘चार हाथों वाले देवता’, शेषनाग के अवतार; चित्तौड़ के तीसरे साके (1567–68) में जयमल को कंधे पर बिठाकर लड़े; मुख्य पीठ सामलिया/रनेला (डूंगरपुर)।
  • देवबाबा: नगला जहाज (भरतपुर); गुर्जर व ग्वालों के; वाहन — भैंसा।
  • तल्लीनाथ जी: पांचोटा (जालौर); ओरण में पेड़ काटना वर्जित — प्रकृति-संरक्षण के लोकदेवता।
  • बिग्गाजी: बीकानेर क्षेत्र के जाखड़ जाट; गौरक्षा में वीरगति।
  • भूरिया बाबा: गौतमेश्वर (अरणोद, प्रतापगढ़); मीणाओं के इष्ट — इनकी झूठी कसम नहीं खाई जाती।
  • मामादेव: बरसात के देवता; मूर्ति नहीं, लकड़ी का कलात्मक तोरण।
  • भोमियाजी: भूमि-रक्षक; झुंझारजी: सिर कटने के बाद भी लड़ने वाले वीर।

🎯 लोकदेवताओं पर तुरंत टेस्ट दें

लोकदेवता राजस्थान GK का सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला टॉपिक है — पटवारी, VDO, पुलिस, LDC से लेकर RAS तक हर परीक्षा में 2–4 प्रश्न। पढ़ते-पढ़ते अभ्यास करें:

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4. प्रमुख लोकदेवियाँ — संक्षिप्त सारणी

लोकदेवीस्थानस्मरणीय तथ्य
करणी मातादेशनोक (बीकानेर)बीकानेर राठौड़ों की कुलदेवी; ‘चूहों वाली देवी’; सफेद चूहे — ‘काबा’
जीण मातारैवासा (सीकर)चौहानों की कुलदेवी; भाई हर्ष; अष्टभुजी प्रतिमा; सबसे लंबा लोकगीत
कैला देवीकरौली (त्रिकूट पर्वत)यादवों की कुलदेवी; लांगुरिया गीत; चैत्र लक्खी मेला
शिला देवीआमेर (जयपुर)कछवाहों की आराध्य; मानसिंह प्रथम बंगाल से लाए
जमवाय माताजमवारामगढ़ (जयपुर)कछवाहों की कुलदेवी
नागणेची मातानागाणा (बालोतरा)राठौड़ों की कुलदेवी; 18 भुजाएँ
आई माताबिलाड़ा (जोधपुर)सीरवी समाज; दीपक की ज्योति से केसर; मंदिर ‘बडेर’
शीतला माताचाकसू (जयपुर)चेचक की देवी; वाहन गधा; बास्योड़ा; कुम्हार पुजारी
तनोट मातातनोट (जैसलमेर)‘थार की वैष्णो देवी’; BSF द्वारा पूजा
त्रिपुरा सुंदरीतलवाड़ा (बांसवाड़ा)‘तुरताई माता’; अठारह भुजाएँ

सभी लोकदेवियों, कुलदेवियों और उनसे जुड़े मेलों का विस्तृत अध्ययन: राजस्थान की प्रमुख लोकदेवियाँ एवं कुलदेवियाँ | करणी माता पर पूरा लेख: करणी माता (देशनोक)

5. कालक्रम — कौन पहले, कौन बाद में? (Timeline)

काल (लगभग)लोकदेवता/देवी
10वीं–11वीं सदीगोगाजी (महमूद गजनवी का समकालीन)
11वीं सदी (1074 ई. जन्म)तेजाजी
13वीं सदीपाबूजी, देवनारायण जी (1243 ई.)
14वीं सदीमल्लीनाथ जी (1358 ई. जन्म), करणी माता (1387 ई. जन्म)
14वीं–15वीं सदीरामदेवजी (समाधि 1458 ई.), हड़बूजी (राव जोधा के समकालीन)
16वीं सदीवीर कल्लाजी राठौड़ (1567–68 चित्तौड़ साका)

ट्रिक: “गो-ते-पा-दे-म-रा-क” — गोगा, तेजा, पाबू, देवनारायण, मल्लीनाथ, रामदेव, कल्लाजी (प्राचीन से नवीन)।

6. क्षेत्र-वार वितरण (Map Revision)

अंचललोकदेवता/देवी
मारवाड़ (जोधपुर-फलोदी-नागौर-बाड़मेर-जैसलमेर)पाबूजी, रामदेवजी, हड़बूजी, मेहाजी, तेजाजी, मल्लीनाथ जी, आई माता, नागणेची
उत्तर (चूरू-हनुमानगढ़-बीकानेर)गोगाजी, बिग्गाजी, करणी माता
शेखावाटी (सीकर-झुंझुनूं)जीण माता, खाटूश्यामजी, राणी सती, सकराय माता
मेवाड़-भीलवाड़ादेवनारायण जी, केसरियानाथ (धुलेव), बाण माता
वागड़ (डूंगरपुर-बांसवाड़ा)कल्लाजी (रनेला), त्रिपुरा सुंदरी
पूर्वी (जयपुर-करौली-भरतपुर-अलवर)शिला देवी, जमवाय माता, कैला देवी, देवबाबा, नारायणी माता, शीतला माता

खाटूश्यामजी पर पूरा लेख: खाटूश्यामजी।

7. पूजा-पद्धति एवं लोक-परंपराएँ

  • थान/देवरा: गाँव में चबूतरे पर लोकदेवता की प्रतिमा या चिह्न; प्रायः खेजड़ी/नीम के नीचे।
  • भोपा: लोकदेवता का पुजारी; ‘भाव’ आने पर समस्याओं का समाधान बताने की लोक-मान्यता। तेजाजी के पुजारी ‘घोड़ला’ कहलाते हैं।
  • जागरण: रामदेवजी का ‘जम्मा’, स्त्रियों का ‘रातीजगा’, भजन-हरजस।
  • फड़-वाचन: कपड़े पर चित्रित लोकदेवता की गाथा को भोपा-भोपी रात भर गाकर सुनाते हैं।
  • तांती/राखड़ी: सर्पदंश या रोग में गोगाजी/तेजाजी के नाम का धागा।
  • मेले: रामदेवरा, गोगामेड़ी, परबतसर, तिलवाड़ा, कोलूमंड — धार्मिक के साथ व्यापार और पशु-विनिमय के केंद्र।

फड़, भोपों के प्रकार और लोकगाथा परंपरा पर विस्तृत लेख: लोकदेवता एवं लोकगाथाएँ — फड़, भोपे एवं लोक परंपरा।

8. लोकदेवताओं का सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व

  1. सामाजिक समरसता: रामदेवजी ने मेघवाल डालीबाई को धर्म-बहन बनाया; पंचपीर हिंदू-मुस्लिम दोनों के पूज्य।
  2. पशुधन-संरक्षण: गौरक्षक लोकदेवता और पशु मेले — मरुस्थल की पशुपालक अर्थव्यवस्था के आधार।
  3. पर्यावरण-चेतना: खेजड़ी के नीचे थान, तल्लीनाथ जी का ओरण, देवनारायण की नीम-पूजा।
  4. नैतिक मूल्य: वचन-पालन (तेजाजी, पाबूजी), शरणागत-रक्षा।
  5. लोक-कला का संरक्षण: फड़ चित्रकला, रावणहत्था-जंतर वादन, तेरहताली नृत्य, लोकगाथाएँ।
  6. अर्थव्यवस्था: मेलों से स्थानीय व्यापार, धार्मिक पर्यटन (रामदेवरा, देवमाली, देशनोक)।

📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)

  1. पंचपीर — पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया, गोगाजी
  2. ‘रूणेचा रा धणी’ — रामदेवजी
  3. ‘जाहर पीर’ — गोगाजी
  4. ‘ऊँटों के देवता’ — पाबूजी
  5. ‘काला-बाला के देवता’ — तेजाजी
  6. ‘चार हाथों वाले देवता’ — कल्लाजी
  7. ईंटों की पूजा — देवनारायण जी
  8. सबसे लंबी फड़ — देवनारायण जी
  9. ‘चूहों वाली देवी’ — करणी माता
  10. राठौड़ों की कुलदेवी — नागणेची माता
  11. कछवाहों की कुलदेवी — जमवाय माता
  12. लांगुरिया गीत — कैला देवी
  13. वाहन गधा — शीतला माता
  14. तेजाजी के पुजारी — घोड़ला
  15. भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँव 2024, देवनारायण से जुड़ा — देवमाली (ब्यावर)

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • लोकदेवता = ऐतिहासिक वीर/संत; लोक-आस्था से देवत्व।
  • पंचपीर मारवाड़ के; दोहा — ‘पाबू, हड़बू, रामदे, मांगलिया मेहा…’।
  • मेले की तिथियाँ: रामदेवरा (भाद्र शु. 2–11), गोगामेड़ी (भाद्र कृ. 9), परबतसर (भाद्र शु. 10), तिलवाड़ा (चैत्र कृ. 11)।
  • कुलदेवियाँ: राठौड़–नागणेची, कछवाहा–जमवाय, बीकानेर राठौड़–करणी, यादव–कैला देवी, चौहान–जीण/आशापुरा।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • तीन ‘मेहाजी’ — मेहाजी मांगलिया (पंचपीर), मेहाजी सांखला (हड़बूजी के पिता), मेहाजी चारण (करणी माता के पिता)।
  • तेजाजी पंचपीर में नहीं — ‘सांपों के देवता’ होने के कारण गोगाजी से भ्रमित न हों।
  • शिला देवी कछवाहों की आराध्य हैं, कुलदेवी जमवाय माता।
  • गोगामेड़ी हनुमानगढ़ में, जन्मस्थान ददरेवा चूरू में।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“पा-ह-रा-मे-गो” → पाबू, हड़बू, रामदेव, मेहा, गोगा = पंचपीर।

“गो-ते-पा-दे” गायों के रक्षक → गोगा, तेजा, पाबू, देवनारायण।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

लोकदेवता खंड में प्रश्न चार प्रकार से आते हैं — (1) उपाधि/प्रतीक से पहचान, (2) जन्मस्थान-मेला मिलान, (3) वाहन/पत्नी/पिता, (4) फड़-भोपा-वाद्य। यह Master Guide पहले पूरी पढ़ें, फिर तुलनात्मक तालिका वाले लेख से रिवीजन करें। RAS मुख्य परीक्षा में ‘लोकदेवताओं का सामाजिक महत्व’ पर भाग 8 के छह बिंदु सीधे उपयोगी हैं।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

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पूरी कला एवं संस्कृति इकाई के नोट्स: राजस्थान कला एवं संस्कृति — सभी नोट्स | परीक्षा में आने वाले नए सांस्कृतिक तथ्य (पुरस्कार, महोत्सव, GI टैग): करेंट अफेयर्स

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’ (लोकदेवता-लोकदेवियाँ अध्याय)।
  • डॉ. गोपीनाथ शर्मा — ‘राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा’।
  • पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार — Best Tourism Villages 2024 (देवमाली, ब्यावर)।
  • पशुपालन विभाग, राजस्थान — राज्य स्तरीय पशु मेले (परबतसर, तिलवाड़ा, गोगामेड़ी, रामदेवरा)।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान के लोकदेवता एवं लोकदेवियाँ: संपूर्ण Master Guide

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: लोकदेवताओं की जन्म-तिथियाँ व वर्ष परंपरागत स्रोतों पर आधारित हैं, जिनमें पुस्तकों के अनुसार अंतर मिलता है; परीक्षा में सर्वाधिक प्रचलित तथ्य दिए गए हैं। जिलों के नाम 2023–24 के प्रशासनिक पुनर्गठन के अनुसार हैं।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. निम्नलिखित में से कौन पंचपीरों में शामिल नहीं है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. ‘ईंटों की पूजा’ किस लोकदेवता के मंदिरों में की जाती है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. ‘चार हाथों वाले लोकदेवता’ के रूप में कौन प्रसिद्ध हैं?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. राठौड़ों की कुलदेवी कौन हैं?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. 2024 में भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँव चुना गया देवमाली किस लोकदेवता से संबंधित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (करेंट अफेयर्स + कला-संस्कृति) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

राजस्थान के पंचपीर हैं — पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया और गोगाजी। ये सभी मारवाड़ क्षेत्र से जुड़े हैं और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा पूजे जाते हैं।

लोकदेवता वे ऐतिहासिक वीर या संत पुरुष हैं जिन्होंने गौरक्षा, शरणागत-रक्षा, समाज-सुधार या लोक-कल्याण के लिए जीवन समर्पित किया और जनता ने उन्हें देवता रूप में पूजना शुरू किया।

देवनारायण जी की फड़ सबसे लंबी है। इसका वाचन गुर्जर भोपे जंतर वाद्य के साथ करते हैं और 1992 में इस पर डाक टिकट जारी हुआ।

राठौड़ों की कुलदेवी नागणेची माता (नागाणा) और कछवाहों की कुलदेवी जमवाय माता (जमवारामगढ़) हैं। कछवाहों की आराध्य देवी आमेर की शिला देवी हैं।

लोकदेवताओं के पूजा-स्थल को थान या देवरा कहा जाता है, जो प्रायः गाँव में खेजड़ी या नीम के पेड़ के नीचे चबूतरे के रूप में होता है।

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