राजस्थान के वन्यजीव अभ्यारण्य, राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ परियोजनाएं: संपूर्ण प्रामाणिक मास्टर-नोट्स

परिचय: राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण का वैचारिक व विधिक ढाँचा
जैव विविधता (Biodiversity) और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में वन्यजीवों की भूमिका सर्वोपरि है। राजस्थान अपने थार मरुस्थल से लेकर अरावली के सघन वनों तक अत्यंत अनूठी और विविध पशु-पक्षी प्रजातियों की शरणस्थली है। राज्य में वन्यजीवों के वैज्ञानिक संरक्षण के लिए एक त्रिस्तरीय मजबूत नेटवर्क कार्य करता है, जिसमें राष्ट्रीय उद्यान (National Parks), वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuaries), और संरक्षण आरक्षित क्षेत्र (Conservation Reserves) शामिल हैं।
- विधिक पृष्ठभूमि: भारत में वन्यजीवों की सुरक्षा को कानूनी आधार देने के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 लागू किया गया था। इसी के तहत राज्य के संकटग्रस्त जीवों (जैसे— गोडावण, बाघ, तेंदुआ, घड़ियाल) के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। वर्तमान में राजस्थान में कुल 3 राष्ट्रीय उद्यान, 26 वन्यजीव अभ्यारण्य, और 5 क्रियान्वित बाघ परियोजनाएं (Tiger Reserves) राष्ट्रीय गौरव का केंद्र हैं।
🚨 2026 परीक्षा विशेष नोट (New Districts Impact): राजस्थान के प्रशासनिक पुनर्गठन (50 जिले और 10 संभाग) के बाद कई अभ्यारण्यों की भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति बदल चुकी है। उदाहरण के लिए— भड़ला और बीठड़ी की तरह ही तालछापर अब चुरू में है, परंतु टॉडगढ़ रावली अभ्यारण्य अब अजमेर के स्थान पर मुख्य रूप से ब्यावर, पाली और राजसमंद जिलों में विस्तृत है; भानगढ़ और सरिस्का का कुछ भाग अब नवगठित कोटपुतली-बहरोड़ और खैरथल संस्तर को प्रभावित करता है। इस मास्टर-नोट्स में इन सभी लाइव 2026 अपडेट्स को शामिल किया गया है।
🛠️ पीयर-टू-पीयर सुधार नोट (Factual Corrections for RPSC Standard)
⚠️ प्रिय विद्यार्थियों, इंटरनेट और स्थानीय गाइडबुक्स में छपी इन दो भ्रामक गलतियों को तुरंत सुधारें:
- गलती 1: कुंभलगढ़ अभ्यारण्य भेड़ियों (Indian Wolves) के प्राकृतिक प्रजनन के लिए संपूर्ण भारत में विख्यात है, न कि भेड़ों के लिए।
- गलती 2: मुख्य सरिस्का अभ्यारण्य (अलवर) का क्षेत्रफल लगभग 273 वर्ग किमी है। राजस्थान का सबसे छोटा वन्यजीव अभ्यारण्य सरिस्का ‘अ’ (Sariska ‘A’) है, जिसका गठन 2012 में हुआ था और इसका क्षेत्रफल मात्र 3.01 वर्ग किलोमीटर है।
1. राजस्थान के 5 सक्रिय टाइगर रिजर्व (बाघ परियोजनाएं)
भारत के प्रोजेक्ट टाइगर (1973) के अंतर्गत राजस्थान में वर्तमान में 5 आधिकारिक बाघ अभ्यारण्य क्रियान्वित हैं:
- रणथंभौर टाइगर रिजर्व (سवाई माधोपुर): यह 1973 में स्थापित राजस्थान की प्रथम और सबसे प्रसिद्ध बाघ परियोजना है। इसे ‘बाघों का घर’ कहा जाता है।
- सरि斯का टाइगर रिजर्व (अलवर): 1978 में स्थापित राज्य की दूसरी बाघ परियोजना, जो हरे कबूतरों के लिए भी प्रसिद्ध है।
- मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (कोटा-झालावाड़): 2013 में स्थापित राज्य की तीसरी बाघ परियोजना।
- रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व (बूंदी): मई 2022 में घोषित यह भारत का 52वाँ और राजस्थान का 4वाँ आधिकारिक टाइगर रिजर्व है। यह मुख्य रणथंभौर और मुकुंदरा के बाघों के लिए एक प्राकृतिक गलियारे (Corridor) का कार्य करता है।
- धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व: यह अगस्त 2023 में स्वीकृत संपूर्ण भारत की 54वीं और राजस्थान की 5वीं (नवीनतम) बाघ परियोजना है, जिसके तहत चंबल के डांग क्षेत्रों के वनों को संरक्षित किया गया है।
2. राजस्थान के प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्यों का विस्तृत जिला-वार विश्लेषण
(1) राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर व बाड़मेर)
- क्षेत्रफल का रिकॉर्ड: इसका कुल क्षेत्रफल 3162 वर्ग किलोमीटर है (1900 वर्ग किमी जैसलमेर में तथा 1262 वर्ग किमी बाड़मेर में)। यह क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा वन्यजीव अभ्यारण्य है।
- आकल वुड फॉसिल पार्क (Akaal Wood Fossil Park): इस उद्यान के भीतर स्थित यह पार्क 18 करोड़ वर्ष प्राचीन जीवाश्मों (लकड़ी के पत्थरीकृत अवशेषों) का वैश्विक केंद्र है, जो जुरासिक काल की वनस्पति को सिद्ध करता है।
- मुख्य जीव: राजस्थान का अत्यंत दुर्लभ और संकटग्रस्त राज्य पक्षी गोडावण (Great Indian Bustard) का यह मुख्य प्राकृतिक आवास है। इसके अतिरिक्त यहाँ राज्य पशु चिंकारा और पीवणा सांप प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
(2) सीतामाता वन्यजीव अभ्यारण्य (प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ व उदयपुर)
- प्रमुख विशिष्टता: यह अरावली, विंध्याचल और मालवा के पठार के मिलन बिंदु पर स्थित सघन सागवान वनों का क्षेत्र है, जिसे “चीतल की मातृभूमि” कहा जाता है।
- उड़न गिलहरी का स्वर्ग: महुआ के वृक्षों के कोटरों में रहने वाली उड़न गिलहरी (Flying Squirrel) यहाँ का मुख्य वैश्विक आकर्षण है, जो केवल सूर्यास्त के बाद महुआ के फल खाने के लिए एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर तैरती हुई (ग्लाइडिंग) दिखाई देती है।
- भौगोलिक कड़ियाँ: यहाँ हिमालय के बाद सर्वाधिक औषधीय वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। इस अभ्यारण्य से जाखम और करमोई नदियाँ गुजरती हैं, और यहीं पर प्रतापगढ़ में स्थित राजस्थान का सबसे ऊँचा जाखम बांध (81 मीटर) अवस्थित है। यहाँ ‘लव-कुश’ नामक दो प्राकृतिक ठंडे और गर्म पानी के झरने स्थित हैं।
(3) कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य (राजसमंद, उदयपुर व पाली)
- प्रजाति संकेंद्रीकरण: यह अरावली के दुर्गम पर्वतीय संस्तर पर फैला अभ्यारण्य है, जो पूरे भारत में “भारतीय भेड़ियों” (Indian Wolves) की सबसे बड़ी प्राकृतिक प्रजनन स्थली के रूप में विख्यात है।
- दर्शनीय स्थल: इसके भीतर ऐतिहासिक कुंभलगढ़ दुर्ग अवस्थित है तथा मथाई नदी के मुहाने पर स्थित शिल्पकला के बेजोड़ नक्काशीदार खंभों वाला रणकपुर जैन मंदिर इसी अभ्यारण्य की गोद में स्थित है। यह चौसिंगा (एंटीलोप) मृग के लिए भी प्रसिद्ध है जिसे स्थानीय भाषा में ‘भेडल’ कहते हैं।
(4) माउंट आबू वन्यजीव अभ्यारण्य (सिरोही)
- भौगोलिक रिकॉर्ड: समुद्र तल से अत्यधिक ऊँचाई पर स्थित यह राजस्थान का एकमात्र पर्वतीय वन्यजीव अभ्यारण्य है।
- विशिष्ट जीव व वनस्पति: यह पूरे राज्य में “जंगली मुर्गों” (Grey Jungle Fowl) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से, संपूर्ण विश्व में केवल इसी आबू पर्वत पर पाई जाने वाली अत्यंत दुर्लभ डिक्लिपटेरा आबूएन्सिस (Dicliptera abuensis) नामक औषधीय झाड़ी यहीं उगती है। सुंदर नक्की झील इसी के प्रभाव क्षेत्र में है।
(5) तालछापर वन्यजीव अभ्यारण्य (चुरू)
- भौगोलिक अवस्थिति: सुजानगढ़ (चुरू) के समतल मैदानी भाग में स्थित एक अनूठा अभ्यारण्य।
- कृष्णमृग का गढ़: यह पूरे भारत में “काले हिरणों” (Black Bucks) और ‘कुर्जा’ (प्रवासी पक्षी) की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध शरणस्थली है।
- प्राकृतिक घास: यहाँ काले हिरणों का सबसे पसंदीदा नरम और सुपाच्य ‘मोथिया घास’ (Cyperus rotundus) प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक रूप से उगती है। महाभारत काल में इसे गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम (द्रोणपुर) माना जाता था।
(6) दर्रा वन्यजीव अभ्यारण्य / मुकुंदरा हिल्स (कोटा व झालावाड़)
- प्रमुख जीव: यह अभ्यारण्य “गागरोनी तोते” (Alexandrine Parakeet / हीरामन तोता) के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है, जो इंसानों की हूबहू आवाज की नकल करने के लिए जाना जाता है। प्राचीन काल में इसे गुप्त संदेशों के लिए प्रयुक्त किया जाता था।
- ऐतिहासिक कड़ियाँ: इसके भीतर प्रसिद्ध यूनेस्को धरोहर गागरोन का जल दुर्ग और कोटा की प्रसिद्ध ‘अबली मीणी का महल’ स्थित है, जिसे हाड़ौती का ताजमहल कहा जाता है। यहाँ धोकड़ा वनों की सघन प्रचुरता है।
(7) टॉडगढ़ रावली अभ्यारण्य (ब्यावर, पाली व राजसमंद)
- 🚨 2026 प्रशासनिक अपडेट: पूर्व में यह अभ्यारण्य अजमेर, पाली और राजसमंद के त्रिकोण पर था। परंतु अजमेर से ब्यावर के नए जिला बनने के बाद अब इसका मुख्य भाग ब्यावर (Beawar), पाली और राजसमंद के अरावली संस्तर में विस्तृत है।
- ऐतिहासिक महत्व: इसका नाम कर्नल जेम्स टॉड के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने यहाँ ‘टॉडगढ़ किले’ का निर्माण कराया था। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय महान क्रांतिकारी विजय सिंह पथिक और राव गोपाल सिंह खरवा को अंग्रेजों ने इसी अभ्यारण्य के भीतर स्थित टॉडगढ़ जेल में कैद करके रखा था, जहाँ से पथिक जी चकमा देकर भाग निकले थे।
(8) राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य (कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर)
- अंतर-राजकीय विस्तार: यह भारत का एकमात्र ऐसा अनूठा अभ्यारण्य है जो तीन राज्यों— राजस्थान, मध्य प्रदेश, और उत्तर प्रदेश के संयुक्त चंबल नदी जल क्षेत्र में फैला हुआ है।
- घड़ियालों का संसार: यह नदीय जल क्षेत्र “घड़ियालों और मगरमच्छों” के प्राकृतिक संरक्षण का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय हब है। इसके स्वच्छ पानी में सुसु (Gangetic Dolphin) नामक दुर्लभ नदीय डॉल्फिन भी पाई जाती है।
(9) जयसमंद वन्यजीव अभ्यारण्य (उदयपुर)
- प्रमुख उपनाम: जयसमंद मीठे पानी की कृत्रिम झील के चारों ओर अरावली की कटी-फटी पहाड़ियों पर फैले होने के कारण इसे “जलचरों की बस्ती” कहा जाता है। यह मुख्य रूप से बघेरें (Leopards) और तेंदुए के सफल संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
(10) सज्जनगढ़ एवं नाहरगढ़ जैविक उद्यान (Biological Parks)
- सज्जनगढ़ अभ्यारण्य (उदयपुर): यह राजस्थान का दूसरा सबसे छोटा अभ्यारण्य है, जिसके भीतर 12 अप्रैल 2015 को राज्य का पहला आधिकारिक ‘बायोलॉजिकल पार्क’ (जैविक उद्यान) जनता के लिए खोला गया था।
- नाहरगढ़ अभ्यारण्य (जयपुर): इसके भीतर 4 जून 2016 को राज्य का दूसरा और सबसे आधुनिक जैविक उद्यान (Biological Park) स्थापित किया गया, जहाँ वन्यजीवों को खुले बाड़ों में सफारी के रूप में देखा जा सकता है।
(11) शेरगढ़ अभ्यारण्य (बारां)
- प्राकृतिक शरणस्थली: परवन नदी के तट पर स्थित यह अभ्यारण्य पूरे राजपूताना में “सांपों की शरणस्थली” (Sanctuary of Snakes) के रूप में विख्यात है, जहाँ रसेल वाइपर और कोबरा की दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसके भीतर ऐतिहासिक शेरगढ़ (कोशवर्द्धन) दुर्ग स्थित है।
(12) बंध बारैठा अभ्यारण्य (भरतपुर)
- पक्षियों का घर: बंद बारैठा झील के जल भराव क्षेत्र में स्थित होने के कारण इसे “परिंदों का घर” या पक्षी प्रेमियों का दूसरा स्वर्ग कहा जाता है, जो केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के निकट मुख्य कूटनीतिक बर्ड माइग्रेशन रूट पर स्थित है।
📊 संपूर्ण वन्यजीव अभ्यारण्यों का विश्लेषणात्मक वैचारिक मैट्रिक्स
यह क्विक रिवीजन सारणी परीक्षाओं में सीधे कूट मिलान वाले कठिन प्रश्नों को हल करने के लिए अचूक है:
| अभ्यारण्य का नाम | वर्तमान जिला (2026 Updates) | कुल क्षेत्रफल / स्थिति | मुख्य संरक्षित जीव / वनस्पति | परीक्षा उपयोगी विशिष्ट ऐतिहासिक व भौगोलिक तथ्य |
| राष्ट्रीय मरु उद्यान | जैसलमेर व बाड़मेर | 3162 वर्ग किमी (सबसे बड़ा) | गोडावण (राज्य पक्षी), चिंकारा | आकल वुड फॉसिल पार्क (18 करोड़ वर्ष प्राचीन जुरासिक जीवाश्म)। |
| सीतामाता अभ्यारण्य | प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर | सघन सागवान वन बेल्ट | उड़न गिलहरी, चीतल की मातृभूमि | हिमालय के बाद सर्वाधिक औषधियां; जाखम बांध व लव-कुश झरने। |
| कुंभलगढ़ अभ्यारण्य | राजसमंद, उदयपुर, पाली | अरावली जरगा संस्तर | भारतीय भेड़िए (Wolves), चौसिंगा | रणकपुर जैन मंदिर (मथाई नदी) इसके अंतः क्षेत्र में अवस्थित। |
| तालछापर अभ्यारण्य | चुरू | सुजानगढ़ समतल मैदान | काले हिरण (Black Bucks), कुर्जा | मोथिया घास का मुख्य केंद्र; द्रोणाचार्य का प्राचीन आश्रम। |
| दर्रा / मुकुंदरा हिल्स | कोटा व झालावाड़ | मुकुंदरा पर्वत श्रृंखला | गागरोनी तोते (हीरामन तोता) | गागरोन जल दुर्ग और अबली मीणी का महल (हाड़ौती का ताजमहल)। |
| टॉडगढ़ रावली | ब्यावर, पाली, राजसमंद | अरावली मध्य संस्तर | रीछ, जरख, पैंथर | कर्नल टॉड द्वारा निर्मित किला; विजय सिंह पथिक की ऐतिहासिक कैदगाह। |
| सरिस्का ‘अ’ (Sariska A) | अलवर | मात्र 3.01 वर्ग किमी (सबसे छोटा) | रीछ, चीतल, कटीली झाड़ियाँ | मुख्य सरिस्का से अलग राज्य का सबसे छोटा वन्यजीव अभ्यारण्य (2012)। |
| शेरगढ़ अभ्यारण्य | बारां | परवन नदी तट | सांपों की शरणस्थली | इसके भीतर मध्यकालीन कोषवर्द्धन (शेरगढ़) दुर्ग अवस्थित है। |
| राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल | कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, धौलपुर | अंतर-राजकीय चंबल जल क्षेत्र | घड़ियाल, मगरमच्छ, गांगेय डॉल्फिन | तीन राज्यों (राज, मप्र, उप्र) में फैला एकमात्र नदीय अभ्यारण्य। |
| रामगढ़ विषधारी | बूंदी | अरावली-विंध्याचल संक्रांति | बाघ, बघेरा, जरख | मई 2022 में घोषित राजस्थान का 4वाँ टाइगर रिजर्व। |
| जयसमंद अभ्यारण्य | उदयपुर | जयसमंद झील बेल्ट | बघेरें, तेंदुए, जलीय पक्षी | स्थानीय जनमानस में इसे ‘जलचरों की बस्ती’ कहा जाता है। |
📝 विगत वर्षों के महत्वपूर्ण प्रश्न (Exam-Targeted PYQs with Explanations)
यहाँ RPSC और RSMSSB परीक्षाओं के पिछले 15 वर्षों के 20 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के पूर्ण प्रामाणिक उत्तर और व्याख्याएँ दी जा रही हैं:
Q1. राजस्थान के नवीन प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद, ‘टॉडगढ़ रावली अभ्यारण्य’ का मुख्य भाग अब किस नए जिले के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत पढ़ा जाता है?
(A) अजमेर
(B) ब्यावर
(C) फलोदी
(D) खैरथल
- सटीक उत्तर: (B) ब्यावर
- परीक्षा संदर्भ: आरपीएससी का हालिया अपडेटेड प्रश्न
- विस्तृत व्याख्या: पूर्व में टॉडगढ़ रावली अजमेर, पाली और राजसमंद में फैला था। 2026 के नवीन ढांचे के अनुसार, अजमेर से अलग होकर ब्यावर स्वतंत्र जिला बन चुका है और इस अभ्यारण्य का मुख्य भाग अब ब्यावर, पाली और राजसमंद के त्रिकोण पर स्थित है।
Q2. राजस्थान का वह कौन सा वन्यजीव अभ्यारण्य है जो पूरे भारत में “भारतीय भेड़ियों” (Indian Wolves) के प्राकृतिक प्रजनन के लिए सर्वोच्च केंद्र माना जाता है?
(A) तालछापर अभ्यारण्य
(B) कुंभलगढ़ अभ्यारण्य
(C) सीतामाता अभ्यारण्य
(D) राष्ट्रीय मरु उद्यान
- सटीक उत्तर: (B) कुंभलगढ़ अभ्यारण्य
- परीक्षा संदर्भ: RPSC RAS Pre (कई बार दोहराया गया)
- विस्तृत व्याख्या: छात्र अक्सर ‘भेड़’ और ‘भेड़िए’ में भ्रमित होते हैं। कुंभलगढ़ अभ्यारण्य भेड़ियों (Wolves) के संरक्षण और प्रजनन के लिए संपूर्ण देश में विख्यात है। यहाँ चौसिंगा मृग (भेडल) भी पाया जाता है।
Q3. क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से राजस्थान का सबसे बड़ा और सबसे छोटा वन्यजीव अभ्यारण्य क्रमशः कौन सा है? (RPSC II Grade)
(A) सीतामाता अभ्यारण्य एवं सज्जनगढ़
(B) राष्ट्रीय मरु उद्यान एवं सरिस्का ‘अ’
(C) रणथंभौर एवं नाहरगढ़
(D) कुंभलगढ़ एवं तालछापर
- सटीक उत्तर: (B) राष्ट्रीय मरु उद्यान एवं सरिस्का ‘अ’
- परीक्षा संदर्भ: RPSC वरिष्ठ अध्यापक परीक्षा
- विस्तृत व्याख्या: सबसे बड़ा अभ्यारण्य राष्ट्रीय मरु उद्यान (3162 वर्ग किमी) है जो जैसलमेर-बाड़मेर में फैला है। वहीं सबसे छोटा अभ्यारण्य अलवर का सरिस्का ‘अ’ (3.01 वर्ग किमी) है, जिसकी स्थापना 2012 में हुई थी (मुख्य सरिस्का बहुत बड़ा है, छात्र भ्रम दूर रखें)।
Q4. “उड़न गिलहरी” (Flying Squirrel) का स्वर्ग राजस्थान के किस वन्यजीव अभ्यारण्य को कहा जाता है और यहाँ कौन से मुख्य वन पाए जाते हैं? (REET Exam)
(A) माउंट आबू अभ्यारण्य; सदाबहार वन
(B) सीतामाता अभ्यारण्य; सघन सागवान वन
(C) तालछापर अभ्यारण्य; घास के मैदान
(D) दर्रा अभ्यारण्य; धोकड़ा वन
- सटीक उत्तर: (B) सीतामाता अभ्यारण्य; सघन सागवान वन
- परीक्षा संदर्भ: RSMSSB पटवारी मुख्य परीक्षा
- विस्तृत व्याख्या: प्रतापगढ़-चित्तौड़गढ़ में विस्तृत सीतामाता अभ्यारण्य उड़न गिलहरी के लिए प्रसिद्ध है, जो महुआ के पेड़ों पर रहती है। यह राज्य का एकमात्र ऐसा अभ्यारण्य है जहाँ प्राकृतिक रूप से सघन सागवान (Teak) के वन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
Q5. जून 2013 में यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए गए राजस्थान के 6 पहाड़ी दुर्गों में से ‘गागरोन का जल दुर्ग’ किस अभ्यारण्य के भीतर अवस्थित है?
(A) शेरगढ़ अभ्यारण्य
(B) दर्रा वन्यजीव अभ्यारण्य (मुकुंदरा हिल्स)
(C) बंध बारैठा अभ्यारण्य
(D) कैलादेवी अभ्यारण्य
- सटीक उत्तर: (B) दर्रा वन्यजीव अभ्यारण्य (मुकुंदरा हिल्स)
- परीक्षा संदर्भ: RPSC स्कूल व्याख्याता परीक्षा
- विस्तृत व्याख्या: कोटा-झालावाड़ में फैला दर्रा अभ्यारण्य गागरोनी तोतों के लिए प्रसिद्ध है। इसी अभ्यारण्य के परिसर में आहू और कालीसिंध के संगम पर बना प्रसिद्ध गागरोन का किला और अबली मीणी का महल स्थित है।
Q6. मरुभूमि के सुप्रसिद्ध “काले हिरणों” (Black Bucks) के संरक्षण के लिए विख्यात ‘तालछापर अभ्यारण्य’ में उगने वाली उस विशेष सुपाच्य घास का वैज्ञानिक नाम क्या है?
- उत्तर: मोथिया घास (Cyperus rotundus)। यह एक विशेष प्रकार की कोमल और सुगंधित कंदयुक्त घास होती है, जिसे काले हिरण अत्यधिक चाव से खाते हैं।
Q7. भारत सरकार और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा अगस्त 2023 में स्वीकृत की गई राजस्थान की 5वीं (नवीनतम) बाघ परियोजना कौन सी है?
- उत्तर: धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व (Dholpur-Karauli Tiger Reserve)। यह संपूर्ण भारत का 54वाँ और राजस्थान का 5वाँ नवीनतम बाघ अभ्यारण्य है।
Q8. स्वतंत्रता संग्राम के समय प्रसिद्ध क्रांतिकारी विजय सिंह पथिक को अंग्रेजों ने किस वन्यजीव अभ्यारण्य के भीतर स्थित जेल में नजरबंद करके रखा था?
- उत्तर: टॉडगढ़ रावली अभ्यारण्य (ब्यावर-पाली-राजसमंद) के भीतर स्थित टॉडगढ़ दुर्ग की ऐतिहासिक जेल में।
Q9. संपूर्ण विश्व का वह एकमात्र पर्वतीय स्थल कौन सा है जहाँ अत्यंत दुर्लभ औषधीय वनस्पति झाड़ी ‘डिक्लिपटेरा आबूएन्सिस’ प्राकृतिक रूप से उगती है?
- उत्तर: माउंट आबू वन्यजीव अभ्यारण्य (सिरोही) की ऊँची चोटियों पर। यह अभ्यारण्य जंगली मुर्गों के लिए भी प्रसिद्ध है।
Q10. राजस्थान का वह कौन सा एकमात्र नदीय अभ्यारण्य है जो भारत के तीन राज्यों में संयुक्त रूप से विस्तृत है? (Patwari Exam)
- उत्तर: राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य। यह राजस्थान, मध्य प्रदेश, और उत्तर प्रदेश के चंबल नदी जल क्षेत्र में घड़ियालों के संरक्षण के लिए फैला हुआ है।
Q11. 18 करोड़ वर्ष प्राचीन जुरासिक काल के पत्थरीकृत लकड़ी के जीवाश्मों से समृद्ध ‘आकल वुड फॉसिल पार्क’ किस अभ्यारण्य का हिस्सा है?
- उत्तर: राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर-बाड़मेर) का। यह मरुभूमि के प्राचीन वानस्पतिक इतिहास का वैश्विक साक्ष्य है।
Q12. उदयपुर के किस सुप्रसिद्ध वन्यजीव अभ्यारण्य को स्थानीय पारिस्थितिक भाषा में “जलचरों की बस्ती” कहा जाता है? (Gram Cevak)
- उत्तर: जयसमंद वन्यजीव अभ्यारण्य को। यह जयसमंद झील के इर्द-गिर्द फैला हुआ है और बघेरों (Leopards) के लिए प्रसिद्ध है।
Q13. राजस्थान के किस अभ्यारण्य को “सांपों की शरणस्थली” कहा जाता है और इसके भीतर से कौन सी नदी गुजरती है?
- उत्तर: शेरगढ़ अभ्यारण्य (बारां) को। इसके भीतर से पवित्र परवन नदी गुजरती है और इसमें कोषवर्द्धन दुर्ग स्थित है।
Q14. भरतपुर जिले में स्थित वह कौन सा अभ्यारण्य है जिसे बर्ड माइग्रेशन रूट के कारण “परिंदों का घर” कहा जाता है?
- उत्तर: बंध बारैठा अभ्यारण्य (भरतपुर)। यह केवलादेव घाना पक्षी विहार के बाद पक्षियों की सर्वाधिक विविधता वाला केंद्र है।
Q15. राजस्थान का पहला आधिकारिक ‘बायोलॉजिकल पार्क’ (जैविक उद्यान) किस अभ्यारण्य के भीतर और किस वर्ष खोला गया था?
- उत्तर: सज्जनगढ़ अभ्यारण्य (उदयपुर) के भीतर 12 अप्रैल 2015 को राज्य का पहला जैविक उद्यान जनता के लिए समर्पित किया गया था।
Q16. सुप्रसिद्ध “हीरामन तोता” या गागरोनी तोता, जो इंसानों की बोली की हूबहू नकल करने के लिए प्रसिद्ध है, किस अभ्यारण्य की मुख्य विशेषता है?
- उत्तर: दर्रा वन्यजीव अभ्यारण्य / मुकुंदरा हिल्स (कोटा-झालावाड़) का। इसे वैज्ञानिक भाषा में ‘अलेक्जेंड्रिन पेराकिट’ कहते हैं।
Q17. मई 2022 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा घोषित ‘रामगढ़ विषधारी’ राजस्थान का कौन सा टाइगर रिजर्व बना था?
- उत्तर: यह राजस्थान का 4वाँ और भारत का 52वाँ आधिकारिक टाइगर रिजर्व बना था, जो बूंदी जिले में स्थित है।
Q18. “मिश्रित लाल-काली मिट्टी” और “ताम्रवती नगरी आहड़” की तरह ही ‘सीतामाता अभ्यारण्य’ में स्थित दो बारहमासी प्राकृतिक झरनों के नाम क्या हैं?
- उत्तर: लव और कुश झरने। इनमें से एक झरने से कड़ाके की ठंड में भी गुनगुना गर्म पानी तथा दूसरे से शीतल जल अनवरत बहता है।
Q19. राजस्थान का वह कौन सा अभ्यारण्य है जिसके अंतः क्षेत्र में 1444 नक्काशीदार खंभों वाला सुप्रसिद्ध रणकपुर जैन मंदिर स्थित है?
- उत्तर: कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य (पाली की सीमा पर मथाई नदी के तट पर)।
Q20. जयपुर के निकट स्थित वह कौन सा अभ्यारण्य है जिसमें 4 जून 2016 को राज्य के दूसरे सबसे बड़े जैविक उद्यान (Biological Park) का उद्घाटन हुआ था?
- उत्तर: नाहरगढ़ अभ्यारण्य (जयपुर)। यहाँ वर्तमान में शेर और लायन सफारी का सफल संचालन किया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
Q1. “राष्ट्रीय मरु उद्यान” के नाम में ‘राष्ट्रीय’ शब्द जुड़ा होने के बावजूद यह विधिक रूप से राष्ट्रीय उद्यान (National Park) क्यों नहीं है?
उत्तर: यह परीक्षाओं का एक बहुत बड़ा तकनीकी भ्रम है। ‘राष्ट्रीय मरु उद्यान’ इसका केवल नाम है। विधिक रूप से भारत सरकार के वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत इसे वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) की ही श्रेणी प्राप्त है, क्योंकि इसके भीतर कई मानवीय बस्तियाँ और राजस्व गाँव स्थित हैं। राजस्थान में केवल 3 ही विधिक राष्ट्रीय उद्यान हैं— रणथंभौर, केवलादेव, और मुकुंदरा हिल्स।
Q2. मुख्य ‘सरिस्का अभ्यारण्य’ और ‘सरिस्का अ’ (Sariska A) के मध्य क्षेत्रफल और विधिक स्थिति का क्या अंतर है?
उत्तर: * मुख्य सरिस्का अभ्यारण्य: इसका क्षेत्रफल लगभग 273 वर्ग किमी है और यह 1978 से एक प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व (बाघ परियोजना) है।
सरिस्का ‘अ’: इसका गठन वर्ष 2012 में मुख्य सरिस्का के कुछ हिस्सों को काटकर किया गया था। इसका क्षेत्रफल मात्र 3.01 वर्ग किलोमीटर है और यह राजस्थान का सबसे छोटा वन्यजीव अभ्यारण्य है।
Q3. ‘कुंभलगढ़ अभ्यारण्य’ को भेड़ियों का गढ़ क्यों कहते हैं और इसके संरक्षण की क्या वैश्विक स्थिति है?
उत्तर: अरावली की कंदराओं और पथरीली गुफाओं के कारण कुंभलगढ़ का भूगोल भारतीय धूसर भेड़ियों (Indian Grey Wolves) के छिपने और प्रजनन के लिए पूरे एशिया में सबसे सुरक्षित माना जाता है। संकटग्रस्त प्रजाति होने के कारण ‘इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर’ (IUCN) की रेड डाटा बुक में शामिल इन भेड़ियों के संरक्षण के लिए यहाँ विशेष ब्रीडिंग प्रोजेक्ट्स चलाए जा रहे हैं।
Q4. राजस्थान के वन्यजीव अभ्यारण्यों में पाई जाने वाली ‘पुरवैया’ हवाओं और वनस्पतियों का क्या पारिस्थितिक संबंध है?
उत्तर: जब पूर्व दिशा से ‘पुरवैया’ मानसूनी हवाएँ आती हैं, तो वे अरावली के पूर्वी ढलानों (जैसे कोटा, झालावाड़, अलवर) पर भारी वर्षा करती हैं। इसी उच्च आर्द्रता के कारण इन पूर्वी अभ्यारण्यों में धोकड़ा (Anogeissus pendula) और सागवान के घने वनों का विकास हुआ है, जो बाघ और गागरोनी तोतों को प्राकृतिक आवास देते हैं। इसके विपरीत, पश्चिमी अभ्यारण्य (जैसे मरु उद्यान) सूखे रह जाते हैं जहाँ कटीली झाड़ियाँ ही उग पाती हैं।
Q5. राजस्थान जल संसाधन विभाग के बांधों की तरह ही ‘जाखम बांध’ का ‘सीतामाता अभ्यारण्य’ के जनजीवन पर क्या प्रभाव है?
उत्तर: प्रतापगढ़ में जाखम नदी पर स्थित 81 मीटर ऊँचा जाखम बांध (राजस्थान का सबसे ऊँचा बांध) सीतामाता अभ्यारण्य के बिल्कुल केंद्र में स्थित है। इसका विशाल जल भराव क्षेत्र (Backwater) पूरे अभ्यारण्य के वन्यजीवों, उड़न गिलहरियों और दुर्लभ औषधीय पादपों को वर्षभर प्राकृतिक नमी और पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराता है, जिससे यह राज्य का सबसे समृद्ध ‘बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट’ बना हुआ है।
📚 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत (References & E-E-A-T Seal)
- वन एवं पर्यावरण विभाग, राजस्थान सरकार की वार्षिक वन्यजीव रिपोर्ट (Department of Forest & Wildlife Reports).
- भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून – राजस्थान क्षेत्र के संरक्षित नेटवर्क की तकनीकी निर्देशिका।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), भारत सरकार द्वारा जारी धौलपुर-करौली व रामगढ़ विषधारी राजपत्र अधिसूचना।
- RPSC RAS Pre/Mains, स्कूल व्याख्याता (Grade-I) और RSMSSB परीक्षाओं के विगत 15 वर्षों के हल प्रश्नपत्रों का प्रामाणिक विश्लेषणात्मक संकलन।
- तथ्य जाँच एवं संपादन: सुयोग अकादमी संपादकीय टीम (सुधीर ढाका – BSc-BEd, योगेश जांगिड़ – सॉफ्टवेयर इंजीनियर)।
📚 सुयोग अकादमी: राजस्थान संपूर्ण अध्ययन श्रृंखला
भूगोल (Geography): स्थिति एवं विस्तार | भौतिक स्वरूप | अरावली पर्वत | मैदान व पठार | जलवायु | मिट्टी
जल संसाधन (Water Resources): नदियाँ व अपवाह तंत्र | प्रमुख झीलें | सिंचाई परियोजनाएं
अर्थव्यवस्था (Economy): कृषि एवं जलवायु प्रदेश | खनिज संपदा | ऊर्जा परियोजनाएं | उद्योग | जनसंख्या (2011)
पारिस्थितिकी एवं इतिहास: वन्यजीव अभ्यारण्य | राष्ट्रीय उद्यान | पर्यटन | एकीकरण | प्रमुख दुर्ग