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नागौर मेला (Nagaur Fair): राजस्थान का प्रसिद्ध पशु मेला

Sudhir Dhaka (इतिहास विशेषज्ञ)
15 अगस्त 2026
7 मिनट पठन
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नागौर मेला (Nagaur Fair): राजस्थान का प्रसिद्ध पशु मेला

Quick Answer Box

नागौर मेला राजस्थान के नागौर जिले में आयोजित होने वाला प्रसिद्ध पशु मेला है। इसे सामान्यतः नागौर पशु मेला / Nagaur Cattle Fair के नाम से जाना जाता है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार यह भारत के प्रमुख और दूसरे सबसे बड़े मेलों में गिना जाता है तथा इसमें बैल, ऊँट और घोड़ों सहित बड़ी संख्या में पशुओं का व्यापार होता है। (Rajasthan Tourism)

तथ्यजानकारी
मेलानागौर मेला
प्रमुख पहचानपशु मेला
स्थाननागौर, राजस्थान
आयोजन का समयसामान्यतः जनवरी–फरवरी
प्रमुख पशुबैल, ऊँट, घोड़े
प्रमुख व्यापारपशु, मसाले, स्थानीय वस्तुएँ, हस्तशिल्प
प्रमुख बाजारमिर्ची बाजार
प्रमुख आकर्षणऊँट नृत्य, घोड़ा नृत्य, पशु प्रतियोगिताएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम
प्रमुख खेल/प्रतियोगिताएँरस्साकशी, पशु प्रतियोगिताएँ आदि
सांस्कृतिक विशेषताराजस्थानी लोक संस्कृति एवं पारंपरिक वेशभूषा
आयोजन से जुड़े विभागपर्यटन विभाग तथा पशुपालन विभाग
परीक्षा में महत्त्वराजस्थान के मेले एवं त्योहार, पशु मेले, लोक संस्कृति
2026 आयोजन24–27 जनवरी 2026

2026 में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के Utsav पोर्टल के अनुसार नागौर पशु मेला 24 से 27 जनवरी 2026 तक आयोजित हुआ। (Utsav)

1. नागौर मेला क्या है?

नागौर मेला राजस्थान के प्रमुख पारंपरिक मेलों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी पहचान पशुओं के व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े आयोजन के रूप में है। नागौर तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालक, किसान, व्यापारी और ग्रामीण समुदाय इस मेले में पशुओं की खरीद-बिक्री तथा विभिन्न गतिविधियों के लिए एकत्रित होते हैं।

राजस्थान पर्यटन विभाग नागौर मेले को भारत के प्रमुख पशु मेलों में गिनता है। मेले में विशेष रूप से बैल, ऊँट और घोड़ों का व्यापार आकर्षण का केंद्र रहता है। पशुओं को मेले में लाने से पहले सजाया जाता है और उनके मालिक भी रंग-बिरंगी पगड़ियों, पारंपरिक वेशभूषा तथा विशिष्ट राजस्थानी रूप में दिखाई देते हैं। (Rajasthan Tourism)

इस कारण नागौर मेला केवल पशुओं की खरीद-बिक्री का बाजार नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन, लोक जीवन, व्यापारिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन भी है।

2. नागौर मेला कहाँ आयोजित होता है?

नागौर मेला नागौर शहर, राजस्थान में आयोजित होता है। मेले के लिए पशु मेला मैदान का उपयोग किया जाता है। भारत सरकार के Utsav पोर्टल पर 2026 के आयोजन का स्थान नागौर तथा आयोजन स्थल पशु मेला मैदान बताया गया है। (Utsav)

नागौर राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित ऐतिहासिक क्षेत्र है और इसका संबंध मारवाड़ क्षेत्र से भी रहा है। नागौर शहर स्वयं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है तथा यहाँ नागौर किला सहित कई ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल हैं।

परीक्षा के लिए याद रखें

नागौर → नागौर मेला → पशु मेला

यह सीधा संबंध राजस्थान GK में अत्यंत उपयोगी है।

3. नागौर मेले का आयोजन कब होता है?

नागौर मेला सामान्यतः जनवरी और फरवरी के बीच आयोजित किया जाता है। अलग-अलग वर्षों में इसकी वास्तविक तिथियाँ बदल सकती हैं। राजस्थान पर्यटन विभाग भी इसके आयोजन को जनवरी–फरवरी के बीच बताता है। (Rajasthan Tourism)

उदाहरण के लिए:

वर्षआयोजन की तिथि
20171–4 फरवरी 2017
202327–30 जनवरी 2023
202415–18 फरवरी 2024
202624–27 जनवरी 2026
2027राजस्थान पर्यटन कैलेंडर में 12–15 फरवरी 2027

अतः परीक्षा में यदि पूछा जाए कि नागौर मेला किस महीने आयोजित होता है?, तो सबसे उपयुक्त उत्तर होगा:

जनवरी–फरवरी

पुराने स्रोतों में मेले की अवधि अधिक दिनों की बताई गई है, जबकि हाल के सरकारी आयोजन कई बार चार दिवसीय कार्यक्रम के रूप में दर्ज हैं। इसलिए प्रश्न में दी गई विशेष वर्ष की तिथि को प्राथमिकता देनी चाहिए। (Rajasthan Tourism)

4. नागौर मेले की प्रमुख पहचान

नागौर मेले की पहचान मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं से होती है:

  1. पशु व्यापार

  2. बैल, ऊँट और घोड़ों की प्रमुखता

  3. पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा

  4. मिर्ची बाजार

  5. पशु प्रतियोगिताएँ

  6. ऊँट सजावट एवं ऊँट नृत्य

  7. घोड़ा नृत्य

  8. रस्साकशी जैसी ग्रामीण खेल गतिविधियाँ

  9. लोक कलाकारों की प्रस्तुतियाँ

  10. हस्तशिल्प और स्थानीय वस्तुओं का व्यापार

भारत सरकार के Utsav पोर्टल के अनुसार मेले में Turban Tying Competition, Camel Dance, Camel Decoration, Horse Dance तथा Cultural Evenings जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। (Utsav)

5. नागौर मेला और पशु व्यापार

नागौर मेले की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता पशुओं की खरीद-बिक्री है।

राजस्थान के ग्रामीण समाज में पशुधन का आर्थिक एवं सामाजिक महत्व बहुत अधिक रहा है। कृषि कार्य, परिवहन, दूध उत्पादन तथा ग्रामीण जीवन में पशुधन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इसी ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी व्यापारिक परंपरा नागौर मेले में दिखाई देती है।

प्रमुख पशु

  • बैल

  • ऊँट

  • घोड़े

  • गाय

  • भेड़

  • अन्य पशुधन

सरकारी स्रोतों के अनुसार मेले में हजारों पशुओं का व्यापार होता है और विशेष रूप से बैल, ऊँट तथा घोड़े प्रमुख आकर्षण हैं। (Rajasthan Tourism)

कुछ सरकारी पर्यटन सामग्री में लगभग 70,000 बैल, ऊँट और घोड़ों के व्यापार का उल्लेख मिलता है। यह संख्या आयोजन-वर्ष और स्रोत के अनुसार बदल सकती है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षा में बिना संदर्भ के संख्या पूछे जाने पर अधिक सुरक्षित तथ्य है कि नागौर मेला बड़े पैमाने पर पशु व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। (Utsav)

6. नागौरी बैल और नागौर मेले का संबंध

नागौर क्षेत्र की पशुपालन परंपरा के कारण यहाँ के बैलों का विशेष महत्व है। नागौर क्षेत्र से जुड़े पशुधन, विशेषकर बैलों की उपयोगिता और नस्लीय विशेषताओं के कारण पशु व्यापारियों के लिए यह मेला महत्वपूर्ण रहा है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में निम्न प्रकार का संबंध पूछा जा सकता है:

नागौर → पशु मेला → बैल/ऊँट/घोड़े

ध्यान रखें कि प्रश्न में यदि पशु मेले की बात हो और विकल्पों में नागौर दिया हो, तो नागौर एक महत्वपूर्ण उत्तर हो सकता है।

7. मिर्ची बाजार – नागौर मेले की विशेष पहचान

नागौर मेला केवल पशु व्यापार तक सीमित नहीं है। यहाँ मिर्ची बाजार भी एक प्रमुख आकर्षण है।

विशेष रूप से लाल मिर्च के व्यापार और प्रदर्शन के कारण मेले में अलग प्रकार का बाजार दिखाई देता है। राजस्थान पर्यटन विभाग नागौर में लाल मिर्च के व्यापार को मेले की प्रमुख विशेषताओं में गिनाता है। (Rajasthan Tourism)

भारत सरकार के Utsav पोर्टल पर भी मेले में स्थानीय मसालों, विशेष रूप से Red Mathaniya Chilli, के बाजार का उल्लेख किया गया है। (Utsav)

Exam Fact

नागौर मेला → मिर्ची बाजार

यह संबंध Rajasthan Art & Culture तथा Rajasthan GK के लिए याद रखना उपयोगी है।

8. पशुओं की सजावट

नागौर मेले में पशुओं को आकर्षक ढंग से सजाने की परंपरा मेले को विशिष्ट बनाती है।

ऊँट, घोड़े और बैल रंगीन सजावटी वस्तुओं, पारंपरिक कपड़ों तथा आभूषणों से सजाए जाते हैं। इससे पशु केवल व्यापार की वस्तु नहीं रहते, बल्कि वे मेले की सांस्कृतिक प्रस्तुति का भी हिस्सा बन जाते हैं।

भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार पशुओं को सजाया जाता है और उनके मालिक भी रंगीन पगड़ियों तथा पारंपरिक रूप में दिखाई देते हैं। (Utsav)

9. नागौर मेला और राजस्थानी पगड़ी

नागौर मेले में ग्रामीण राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा विशेष आकर्षण पैदा करती है।

विशेषकर पुरुषों की:

  • रंग-बिरंगी पगड़ी

  • लंबी मूँछें

  • पारंपरिक ग्रामीण पोशाक

मेले की दृश्य पहचान बनती है।

इसी सांस्कृतिक वातावरण के कारण नागौर मेला राजस्थान के ग्रामीण जीवन को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

10. मूँछ प्रतियोगिता

नागौर मेले के विभिन्न आयोजनों में मूँछ प्रतियोगिता भी आकर्षण का केंद्र रही है।

राजस्थान पर्यटन विभाग की पुरानी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में मेले के दूसरे दिन Moustache Competition का उल्लेख मिलता है। उसी कार्यक्रम में ऊँट सजावट प्रतियोगिता भी आयोजित की गई थी। (Rajasthan Tourism)

यह प्रतियोगिता राजस्थान की पारंपरिक पुरुष वेशभूषा और ग्रामीण सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी है।

परीक्षा संकेत

यदि प्रश्न में:

मूँछ प्रतियोगिता + नागौर मेला

दिया जाए, तो दोनों का संबंध याद रखें।

11. ऊँट सजावट प्रतियोगिता

ऊँट राजस्थान के मरुस्थलीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नागौर जैसे पश्चिमी राजस्थान से जुड़े क्षेत्र में ऊँट का आर्थिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व रहा है।

मेले में Camel Decoration Competition आयोजित की जाती है। इसमें ऊँटों को पारंपरिक एवं आकर्षक तरीके से सजाया जाता है।

2026 के सरकारी कार्यक्रम में भी Camel Decoration और Camel Dance को प्रमुख गतिविधियों में शामिल किया गया था। (Utsav)

12. ऊँट नृत्य और घोड़ा नृत्य

नागौर मेले में पशुओं से संबंधित मनोरंजक प्रतियोगिताएँ और प्रदर्शन भी आयोजित किए जाते हैं।

प्रमुख हैं:

  • ऊँट नृत्य

  • घोड़ा नृत्य

  • ऊँट सजावट

  • पशु प्रतियोगिताएँ

भारत सरकार के Utsav पोर्टल में Camel Dance, Camel Decoration और Horse Dance का स्पष्ट उल्लेख है। (Utsav)

इसलिए Rajasthan GK में यदि प्रश्न हो:

निम्न में से किस मेले में ऊँट नृत्य/घोड़ा नृत्य जैसी गतिविधियाँ होती हैं?

तो नागौर मेला एक महत्वपूर्ण उत्तर है।

13. ग्रामीण खेल और प्रतियोगिताएँ

नागौर मेला ग्रामीण जीवन और मनोरंजन को भी प्रदर्शित करता है।

मेले में समय-समय पर निम्न प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित की जाती रही हैं:

  • रस्साकशी

  • पशु प्रतियोगिताएँ

  • ऊँट दौड़

  • बैल संबंधी प्रतियोगिताएँ

  • ऊँट नृत्य

  • घोड़ा नृत्य

पुराने पर्यटन स्रोतों में Camel Race, Bullock Race तथा Tug-of-War जैसी गतिविधियों का भी उल्लेख मिलता है। (Utsav)

यहाँ एक परीक्षा सावधानी जरूरी है:

हर वर्ष सभी प्रतियोगिताएँ बिल्कुल समान रूप में हों, यह आवश्यक नहीं है।

इसलिए किसी विशेष वर्ष के आयोजन से जुड़े प्रश्न में उस वर्ष की आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता दें।

14. सांस्कृतिक कार्यक्रम

नागौर मेला राजस्थान की लोक संस्कृति का भी महत्वपूर्ण मंच है।

मेले के दौरान सांस्कृतिक संध्याएँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें लोक कलाकार और पारंपरिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ देते हैं।

पुरानी राजस्थान पर्यटन प्रेस विज्ञप्ति में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को मेले के पहले तीन दिनों की विशेष आकर्षण गतिविधियों में शामिल किया गया था। (Rajasthan Tourism)

मेले से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों में:

  • लोक संगीत

  • लोक नृत्य

  • कठपुतली

  • पारंपरिक मनोरंजन

  • कथावाचन

  • स्थानीय कला-प्रदर्शन

जैसी गतिविधियाँ देखने को मिल सकती हैं।

15. कुचामनी ख्याल और नागौर मेला

नागौर की सांस्कृतिक पहचान में कुचामनी ख्याल का विशेष स्थान है।

भारत सरकार के Utsav पोर्टल पर नागौर मेले की सांस्कृतिक संध्याओं के संदर्भ में Kuchamani Khyal को स्थानीय कला के प्रमुख आकर्षणों में बताया गया है। (Utsav)

इसलिए Rajasthan Art & Culture के विद्यार्थियों के लिए यह संबंध महत्वपूर्ण है:

कुचामनी ख्याल → नागौर क्षेत्र

और

नागौर मेला → लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम

16. कठपुतली, बाजीगर और कथावाचक

नागौर मेले में पारंपरिक मनोरंजन की विभिन्न शैलियाँ भी देखने को मिलती हैं।

सरकारी पर्यटन स्रोतों में नागौर मेले के साथ:

  • Jugglers — बाजीगर

  • Puppeteers — कठपुतली कलाकार

  • Storytellers — कथावाचक

का उल्लेख किया गया है। (Utsav)

इससे मेला राजस्थान की केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था ही नहीं बल्कि लोक मनोरंजन परंपरा का भी प्रतिनिधित्व करता है।

17. नागौर मेला और स्थानीय हस्तशिल्प

पशुओं के अलावा मेले में स्थानीय वस्तुओं की बिक्री भी होती है।

प्रमुख वस्तुओं में:

  • लकड़ी की वस्तुएँ

  • लोहे की वस्तुएँ

  • ऊँट की चमड़े से बनी वस्तुएँ

  • पशुओं के आभूषण

  • पारंपरिक वस्त्र

  • स्थानीय उपयोगी सामान

  • मसाले

शामिल हैं। (Utsav)

इस प्रकार नागौर मेला एक बहुआयामी ग्रामीण बाजार के रूप में भी कार्य करता है।

18. नागौर मेले का आर्थिक महत्व

नागौर मेले का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक पक्ष पशुधन व्यापार है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशु:

  • कृषि कार्य

  • दूध उत्पादन

  • परिवहन

  • प्रजनन

  • पशुपालन आधारित आय

के स्रोत रहे हैं।

ऐसे में पशु मेले ग्रामीण उत्पादकों और खरीदारों को एक साझा मंच प्रदान करते हैं।

नागौर मेले में दूर-दूर से पशुपालक और व्यापारी आते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर:

  • व्यापार बढ़ता है,

  • परिवहन गतिविधि बढ़ती है,

  • स्थानीय दुकानदारों को लाभ मिलता है,

  • हस्तशिल्प एवं खाद्य वस्तुओं की बिक्री बढ़ती है,

  • पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।

इसलिए नागौर मेला पशुपालन + व्यापार + पर्यटन + लोक संस्कृति का संगम है।

19. नागौर मेला और पर्यटन

राजस्थान की पर्यटन अर्थव्यवस्था में मेलों और त्योहारों का महत्वपूर्ण योगदान है।

नागौर मेला पर्यटकों को राजस्थान के ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करता है। यहाँ पर्यटक केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं देखते, बल्कि पशुपालन, स्थानीय व्यापार, ग्रामीण बाजार और पारंपरिक जीवनशैली को भी करीब से देख सकते हैं।

राजस्थान पर्यटन विभाग नागौर मेले को नागौर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल करता है। (Rajasthan Tourism)

20. नागौर मेले का प्रशासनिक आयोजन

नागौर मेले के आयोजन में राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों की भूमिका रहती है।

सरकारी पर्यटन पोर्टल के आयोजन विवरण में Tourism Department तथा Animal Husbandry Department का उल्लेख मिलता है। (Utsav)

यह स्वाभाविक भी है क्योंकि मेले का प्रमुख हिस्सा पशुधन से संबंधित है, जबकि सांस्कृतिक एवं पर्यटन गतिविधियों के लिए पर्यटन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है।

याद रखने का आसान तरीका

नागौर मेला = पर्यटन विभाग + पशुपालन विभाग

21. नागौर मेला और पुष्कर मेला

राजस्थान के दो प्रसिद्ध पशु मेलों की तुलना परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी है।

आधारनागौर मेलापुष्कर मेला
स्थाननागौरपुष्कर, अजमेर
प्रमुख पहचानपशु मेलापशु मेला + धार्मिक/सांस्कृतिक महत्त्व
प्रमुख पशुबैल, ऊँट, घोड़ेऊँट, घोड़े आदि
प्रमुख समयजनवरी–फरवरीसामान्यतः कार्तिक काल
प्रमुख बाजार/आकर्षणमिर्ची बाजारपुष्कर तीर्थ एवं पशु मेला
प्रमुख सांस्कृतिक पक्षग्रामीण एवं लोक संस्कृतिधार्मिक, सांस्कृतिक एवं पशु व्यापार
राजस्थान GK में पहचानप्रसिद्ध पशु मेलाप्रसिद्ध धार्मिक एवं पशु मेला

राजस्थान पर्यटन नागौर मेले की तुलना पुष्कर के पशु मेले से करता है और नागौर को भारत के प्रमुख पशु मेलों में रखता है। (Rajasthan Tourism)

Exam Trap

पुष्कर = अजमेर

नागौर = नागौर

दोनों को आपस में न मिलाएँ।

22. नागौर मेले की प्रमुख गतिविधियाँ – सारणी
गतिविधिमहत्त्व
पशु व्यापारमेले की मुख्य पहचान
ऊँट सजावटप्रमुख सांस्कृतिक आकर्षण
ऊँट नृत्यमनोरंजन एवं प्रतियोगिता
घोड़ा नृत्यप्रमुख आकर्षण
पशु प्रतियोगितापशुधन की प्रदर्शनी/प्रतियोगिता
मूँछ प्रतियोगिताराजस्थानी पुरुष संस्कृति
पगड़ी प्रतियोगितापारंपरिक वेशभूषा
मिर्ची बाजारस्थानीय व्यापार
हस्तशिल्प बाजारग्रामीण एवं स्थानीय उत्पाद
लोक संगीतसांस्कृतिक कार्यक्रम
कठपुतलीलोक मनोरंजन
कुचामनी ख्यालस्थानीय सांस्कृतिक कला

इन गतिविधियों में से कई का उल्लेख सरकारी पर्यटन पोर्टलों और राजस्थान पर्यटन की सामग्री में मिलता है। (Utsav)

23. नागौर मेले की चार-दिवसीय आयोजन संरचना

हाल के सरकारी आयोजन को समझने के लिए 2026 का कार्यक्रम उपयोगी उदाहरण है।

24 जनवरी 2026

मेले का प्रारंभिक दिवस।

25 जनवरी 2026

पशु एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार।

26 जनवरी 2026

मेला गतिविधियाँ एवं प्रतियोगिताएँ।

27 जनवरी 2026

मेले का समापन।

भारत सरकार के Utsav पोर्टल के अनुसार 2026 का नागौर पशु मेला 24–27 जनवरी 2026 को आयोजित किया गया था। (Utsav)

ध्यान दें: अलग-अलग वर्षों में कार्यक्रम की तिथियाँ और गतिविधियाँ बदल सकती हैं।

24. नागौर मेले से जुड़े प्रमुख तथ्य

एक नजर में

नागौर मेला कहाँ लगता है?
नागौर, राजस्थान।

नागौर मेला किस प्रकार का मेला है?
प्रमुख पशु मेला।

कब लगता है?
सामान्यतः जनवरी–फरवरी।

किस पशु का व्यापार प्रमुख है?
बैल, ऊँट और घोड़े।

प्रमुख बाजार कौन-सा है?
मिर्ची बाजार।

प्रमुख प्रतियोगिताएँ?
ऊँट सजावट, ऊँट नृत्य, घोड़ा नृत्य, पगड़ी/मूँछ प्रतियोगिताएँ आदि।

किस संस्कृति की झलक मिलती है?
राजस्थानी ग्रामीण एवं लोक संस्कृति।

आयोजन से जुड़े प्रमुख विभाग?
पर्यटन विभाग और पशुपालन विभाग।

2026 की तिथि?
24–27 जनवरी 2026। (Utsav)

25. नागौर मेला: महत्वपूर्ण टाइमलाइन
अवधि/वर्षघटना/तथ्य
पारंपरिक कालनागौर क्षेत्र में पशुधन व्यापार एवं ग्रामीण बाजार की परंपरा
आधुनिक पर्यटन आयोजनराजस्थान पर्यटन द्वारा मेले को प्रमुख पर्यटन आयोजन के रूप में बढ़ावा
2017राजस्थान पर्यटन की प्रेस विज्ञप्ति में 1–4 फरवरी का आयोजन दर्ज
202327–30 जनवरी का सरकारी आयोजन
202415–18 फरवरी का आयोजन
202624–27 जनवरी का आयोजन
2027राजस्थान पर्यटन कैलेंडर में 12–15 फरवरी निर्धारित

2017 की राजस्थान पर्यटन प्रेस विज्ञप्ति में नागौर मेले को “Shri Ramdeo Cattle Fair” के नाम से भी संदर्भित किया गया था। (Rajasthan Tourism)

26. परीक्षा में नागौर मेले से क्या पूछा जाता है?

Rajasthan CET, RPSC, Rajasthan Police, REET, शिक्षक भर्ती, पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी तथा अन्य राजस्थान-केंद्रित परीक्षाओं में मेले और त्योहारों से सामान्यतः निम्न प्रकार के प्रश्न बनाए जा सकते हैं:

प्रश्न प्रकार 1 – स्थान

नागौर मेला कहाँ आयोजित होता है?

उत्तर: नागौर

प्रश्न प्रकार 2 – प्रकृति

नागौर मेला किस प्रकार का मेला है?

उत्तर: पशु मेला

प्रश्न प्रकार 3 – समय

नागौर मेला सामान्यतः किस अवधि में आयोजित होता है?

उत्तर: जनवरी–फरवरी

प्रश्न प्रकार 4 – पशु

नागौर मेले में प्रमुख रूप से किन पशुओं का व्यापार होता है?

उत्तर: बैल, ऊँट और घोड़े

प्रश्न प्रकार 5 – बाजार

नागौर मेला किस बाजार के लिए भी प्रसिद्ध है?

उत्तर: मिर्ची बाजार

प्रश्न प्रकार 6 – प्रतियोगिता

नागौर मेले में कौन-सी प्रतियोगिता आयोजित होती है?

उत्तर: ऊँट सजावट/ऊँट नृत्य/घोड़ा नृत्य आदि।

27. Exam Trap – नागौर मेला

Trap 1: नागौर और पुष्कर

गलत: नागौर मेला अजमेर में लगता है।
सही: नागौर मेला नागौर में लगता है।

पुष्कर मेला अजमेर जिले के पुष्कर में आयोजित होता है।

Trap 2: महीना

गलत: नागौर मेला मुख्यतः नवंबर में लगता है।

नागौर मेले की सामान्य पहचान जनवरी–फरवरी से है। राजस्थान पर्यटन विभाग भी इसे जनवरी–फरवरी के बीच आयोजित होने वाला मेला बताता है। (Rajasthan Tourism)

Trap 3: मिर्ची बाजार

यदि विकल्पों में:

  • जयपुर – ब्लू पॉटरी

  • जोधपुर – पत्थर कला

  • नागौर – मिर्ची बाजार

  • उदयपुर – पिचवाई

जैसा प्रश्न हो, तो नागौर – मिर्ची बाजार संबंध याद रखें।

Trap 4: ऊँट मेला बनाम पशु मेला

नागौर को केवल ऊँट मेला कहना अधूरा है।

नागौर मेला व्यापक रूप से पशु मेला है, जिसमें बैल, ऊँट और घोड़ों का व्यापार प्रमुख है। (Utsav)

Trap 5: तिथि हर साल समान नहीं

यह मान लेना गलत है कि नागौर मेला हर वर्ष एक ही तारीख को लगता है।

आयोजन की वास्तविक तारीख वर्ष के अनुसार बदलती है। उदाहरण के लिए 2024 में 15–18 फरवरी और 2026 में 24–27 जनवरी का आयोजन दर्ज है। (Utsav)

28. नागौर मेला क्यों महत्वपूर्ण है?

नागौर मेले का महत्व चार प्रमुख आयामों में समझा जा सकता है:

1. आर्थिक महत्व

यह पशुधन व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र है।

2. सामाजिक महत्व

यह ग्रामीण समुदायों और व्यापारियों को एक मंच प्रदान करता है।

3. सांस्कृतिक महत्व

यह राजस्थानी लोक संस्कृति, वेशभूषा, संगीत और मनोरंजन को प्रदर्शित करता है।

4. पर्यटन महत्व

देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को राजस्थान के ग्रामीण जीवन और पारंपरिक मेले का अनुभव मिलता है।

29. नागौर मेला और राजस्थान की ग्रामीण संस्कृति

राजस्थान की संस्कृति केवल राजमहलों और किलों तक सीमित नहीं है। गाँवों में विकसित हुई पशुपालन, कृषि, लोक संगीत, वेशभूषा और बाजार की परंपराएँ भी राजस्थान की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

नागौर मेला इस ग्रामीण संस्कृति का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

यहाँ:

  • पशुपालक दिखाई देते हैं,

  • ग्रामीण व्यापारी आते हैं,

  • पशुओं का व्यापार होता है,

  • पगड़ी और मूँछें पारंपरिक पहचान बनती हैं,

  • लोक कलाकार प्रदर्शन करते हैं,

  • हस्तशिल्प बिकते हैं,

  • स्थानीय मसालों का व्यापार होता है।

इसलिए नागौर मेला जीवंत ग्रामीण संस्कृति का उत्सव कहा जा सकता है।

30. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 15 सबसे महत्वपूर्ण तथ्य
  1. नागौर मेला राजस्थान के नागौर में आयोजित होता है।

  2. यह प्रमुख पशु मेला है।

  3. सामान्यतः इसका आयोजन जनवरी–फरवरी में होता है।

  4. बैल, ऊँट और घोड़े मेले के प्रमुख पशु हैं।

  5. मेले में पशुओं का बड़े पैमाने पर व्यापार होता है।

  6. नागौर मेला भारत के प्रमुख बड़े मेलों में शामिल है।

  7. मेला मिर्ची बाजार के लिए भी प्रसिद्ध है।

  8. लाल मिर्च का व्यापार मेले का प्रमुख आकर्षण है।

  9. ऊँट सजावट प्रतियोगिता आयोजित होती है।

  10. ऊँट नृत्य मेले की प्रमुख गतिविधियों में शामिल है।

  11. घोड़ा नृत्य भी प्रमुख आकर्षण है।

  12. पगड़ी एवं मूँछ प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा सकती हैं।

  13. मेले में लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

  14. कुचामनी ख्याल नागौर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है।

  15. आयोजन में पर्यटन तथा पशुपालन विभाग की भूमिका रहती है। (Utsav)

31. नागौर मेला याद करने की ट्रिक

एक छोटी-सी mnemonic से पूरा विषय याद किया जा सकता है:

“नागौर = पशु + मिर्च + मूँछ + ऊँट + घोड़ा”

  • पशु → पशु मेला

  • मिर्च → मिर्ची बाजार

  • मूँछ → मूँछ प्रतियोगिता

  • ऊँट → ऊँट सजावट/ऊँट नृत्य

  • घोड़ा → घोड़ा नृत्य

यदि ये पाँच शब्द याद हैं, तो नागौर मेले के अधिकांश प्रश्न हल किए जा सकते हैं।

32. नागौर मेला और राजस्थान Art & Culture Syllabus

राजस्थान Art & Culture के syllabus में नागौर मेला निम्न विषयों के अंतर्गत महत्वपूर्ण है:

राजस्थान के मेले एवं त्योहार → पशु मेले → नागौर मेला

इसके साथ निम्न टॉपिक्स को भी जोड़कर पढ़ना चाहिए:

  • पुष्कर मेला

  • बेणेश्वर मेला

  • रामदेवरा मेला

  • गोगाजी मेला

  • कैलादेवी मेला

  • तेजाजी मेला

  • सीताबाड़ी मेला

  • कैला देवी मेला

  • ऊँट उत्सव

  • बीकानेर कैमल फेस्टिवल

इस प्रकार केवल नागौर मेले को अलग से याद करने के बजाय राजस्थान के प्रमुख मेलों की comparative table बनाकर पढ़ना अधिक प्रभावी होगा।

33. Syllabus Weight / परीक्षा प्राथमिकता

प्राथमिकता: ⭐⭐⭐⭐☆ उच्च

नागौर मेला राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए High Priority Static GK टॉपिक है।

विशेष रूप से:

परीक्षासंभावित उपयोगिता
RPSCउच्च
Rajasthan CETउच्च
Rajasthan Policeउच्च
REETमध्यम–उच्च
Patwariउच्च
VDOउच्च
शिक्षक भर्तीमध्यम–उच्च
राजस्थान सामान्य ज्ञान आधारित परीक्षाएँउच्च

सबसे पहले क्या पढ़ें?

Tier 1 – अनिवार्य

  • स्थान

  • मेला का प्रकार

  • आयोजन का समय

  • प्रमुख पशु

  • मिर्ची बाजार

Tier 2 – महत्वपूर्ण

  • ऊँट नृत्य

  • घोड़ा नृत्य

  • ऊँट सजावट

  • मूँछ/पगड़ी प्रतियोगिता

  • कुचामनी ख्याल

Tier 3 – अतिरिक्त

  • आयोजन विभाग

  • विभिन्न वर्षों की आयोजन तिथियाँ

  • पर्यटन महत्व

  • स्थानीय हस्तशिल्प

34. FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. नागौर मेला कहाँ लगता है?

उत्तर: नागौर मेला राजस्थान के नागौर शहर में आयोजित होता है।

Q2. नागौर मेला किस नाम से प्रसिद्ध है?

उत्तर: यह मुख्य रूप से नागौर पशु मेला / Nagaur Cattle Fair के नाम से प्रसिद्ध है।

Q3. नागौर मेला कब आयोजित होता है?

उत्तर: सामान्यतः जनवरी और फरवरी के बीच आयोजित होता है। (Rajasthan Tourism)

Q4. नागौर मेले में किन पशुओं का व्यापार होता है?

उत्तर: प्रमुख रूप से बैल, ऊँट और घोड़ों का व्यापार होता है। इसके अलावा अन्य पशुधन भी मेले में आता है। (Utsav)

Q5. नागौर मेला किस बाजार के लिए प्रसिद्ध है?

उत्तर: मिर्ची बाजार नागौर मेले की प्रमुख पहचान है।

Q6. नागौर मेले में कौन-सी प्रतियोगिताएँ होती हैं?

उत्तर: ऊँट सजावट, ऊँट नृत्य, घोड़ा नृत्य, पशु प्रतियोगिताएँ, पगड़ी/मूँछ प्रतियोगिता आदि विभिन्न आयोजनों में आयोजित की जाती हैं। (Utsav)

Q7. नागौर मेला किस विभाग से संबंधित है?

उत्तर: आयोजन में राजस्थान पर्यटन विभाग तथा पशुपालन विभाग की भूमिका रहती है। (Utsav)

Q8. क्या नागौर मेला केवल पशुओं के व्यापार तक सीमित है?

उत्तर: नहीं। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक मनोरंजन, हस्तशिल्प, स्थानीय मसाले और विभिन्न प्रतियोगिताएँ भी शामिल होती हैं।

Q9. नागौर मेले और पुष्कर मेले में क्या अंतर है?

उत्तर: दोनों राजस्थान के प्रसिद्ध पशु मेलों में हैं, लेकिन नागौर मेला नागौर में और पुष्कर मेला पुष्कर, अजमेर में आयोजित होता है।

Q10. 2026 में नागौर पशु मेला कब हुआ?

उत्तर: भारत सरकार के Utsav पोर्टल के अनुसार 24–27 जनवरी 2026। (Utsav)

35. निष्कर्ष

नागौर मेला राजस्थान की ग्रामीण एवं पशुपालक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह केवल पशुओं की खरीद-बिक्री का आयोजन नहीं, बल्कि पशुधन व्यापार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार और पर्यटन को एक साथ जोड़ने वाला बड़ा आयोजन है।

बैल, ऊँट और घोड़ों का व्यापार, मिर्ची बाजार, पशु सजावट, ऊँट नृत्य, घोड़ा नृत्य, मूँछ एवं पगड़ी प्रतियोगिताएँ तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम इसे राजस्थान के विशिष्ट मेलों में स्थान देते हैं। (Utsav)

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण पाँच शब्द हैं:

नागौर – पशु मेला – जनवरी/फरवरी – मिर्ची बाजार – ऊँट/घोड़ा

इन तथ्यों को पुष्कर, बेणेश्वर और अन्य प्रमुख राजस्थान मेलों के साथ comparative तरीके से पढ़ने पर Rajasthan Art & Culture के प्रश्नों की तैयारी और मजबूत हो जाती है।

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अंतिम संशोधन (Last Updated): 15 अगस्त 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. Gangaur Festival, Pushkar Fair, Nagaur Fair and Urs Fair are the popular fairs and festivals of which state?

SSC CGL Tier-I 2024

Q2. 'Nagaur Fair' is held in which of the following states?

SSC CHSL Tier-I 2025

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