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रामदेवरा मेला: बाबा रामदेवजी का प्रसिद्ध मेला

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
8 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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रामदेवरा मेला: बाबा रामदेवजी का प्रसिद्ध मेला

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⚡ Quick Answer: रामदेवरा मेला जैसलमेर जिले की पोकरण तहसील के रामदेवरा (रूणेचा) गाँव में लोकदेवता बाबा रामदेवजी की समाधि पर भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (‘बाबे री बीज’) से भाद्रपद शुक्ल एकादशी तक भरता है। यह राजस्थान का सांप्रदायिक सद्भाव का सबसे बड़ा मेला है — हिंदू उन्हें कृष्ण का अवतार और मुस्लिम ‘रामसा पीर’ मानते हैं। लाखों जातरू (पदयात्री) पँचरंगी नेजा लेकर पैदल पहुँचते हैं; चढ़ावे में कपड़े के घोड़े व पगल्ये; रात भर जम्मा जागरण; कामड़ स्त्रियों का तेरहताली नृत्य; दर्शनीय — रामसरोवर, परचा बावड़ी, डालीबाई की समाधि।

1. रामदेवरा मेला — परिचय

“रामदेवरा मेला कब लगता है”, “रामदेवरा किस जिले में है” और “बाबा रामदेव को रामसा पीर क्यों कहते हैं” — राजस्थान GK के ये तीनों प्रश्न इस एक मेले से जुड़े हैं। भादो के महीने में जोधपुर-जैसलमेर मार्ग पर सैकड़ों किलोमीटर तक पैदल चलते, ‘जय बाबा री’ के जयकारे लगाते, ध्वजा उठाए श्रद्धालुओं के जत्थे दिखाई देते हैं — इन्हें ‘जातरू’ कहते हैं। मार्ग में जगह-जगह सेवा-शिविर (भंडारे) लगते हैं। यह मेला आस्था के साथ सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण है।

तथ्यविवरण
स्थानरामदेवरा (रूणेचा), तहसील पोकरण, जिला जैसलमेर
आरंभभाद्रपद शुक्ल द्वितीया — ‘बाबे री बीज’ (रामदेवजी का जन्मोत्सव)
समापनभाद्रपद शुक्ल एकादशी (समाधि-दिवस से जुड़ा)
अवधिलगभग 10 दिन (सितंबर के आसपास)
आराध्यबाबा रामदेवजी — रामसा पीर, रूणेचा रा धणी, पीरों के पीर
श्रद्धालुसभी धर्म-जातियाँ; राजस्थान, गुजरात, म.प्र., महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब
प्रतीकपँचरंगी नेजा, पगल्ये, कपड़े के घोड़े
जागरणजम्मा
नृत्यतेरहताली (कामड़ स्त्रियाँ)
प्रमुख स्थलसमाधि मंदिर, रामसरोवर, परचा बावड़ी, डालीबाई की समाधि

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2. बाबा रामदेवजी — संक्षिप्त परिचय (मेले की पृष्ठभूमि)

  • जन्म — उंडूकाश्मीर (शिव तहसील, बाड़मेर), भाद्रपद शुक्ल द्वितीया; तंवर राजपूत; पिता अजमालजी, माता मैणादे।
  • गुरु — बालीनाथ; पत्नी — नेतलदे; धर्म-बहन — मेघवाल डालीबाई।
  • रूणेचा (रामदेवरा) बसाया; भैरव राक्षस से क्षेत्र को मुक्त कराने की लोककथा।
  • 1458 ई. में भाद्रपद शुक्ल एकादशी को रामदेवरा में जीवित समाधि; एक दिन पूर्व डालीबाई ने समाधि ली।
  • कामड़िया पंथ के प्रवर्तक; रचना — ‘चौबीस बाणियाँ’; अस्पृश्यता-विरोधी समाज-सुधारक।

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3. रामदेवरा मेले की प्रमुख परंपराएँ

परंपराविवरण
जातरू/पदयात्रामहीनों पहले से श्रद्धालु ‘संघ’ बनाकर पैदल निकलते हैं; मार्ग में सेवा-शिविर
नेजा (पँचरंगी ध्वजा)पाँच रंगों की ध्वजा — रामदेवजी का प्रमुख प्रतीक; मंदिर पर चढ़ाई जाती है
पगल्येरामदेवजी के चरण-चिह्न; थानों पर पूजा
कपड़े के घोड़ेबाबा के ‘लीला’ घोड़े के प्रतीक; मन्नत पूरी होने पर चढ़ाए जाते हैं
जम्मारात्रि जागरण — रामदेवजी के भजन, हरजस
तेरहतालीकामड़ जाति की स्त्रियाँ शरीर पर 13 मंजीरे बाँधकर बैठकर नृत्य करती हैं
रिखियारामदेवजी के मेघवाल भक्त

तेरहताली नृत्य: तेरहताली — कामड़ जाति का नृत्य

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रामदेवरा, गोगामेड़ी, परबतसर — भाद्रपद के तीन बड़े मेलों की तिथि व स्थान मिलान हर RSMSSB परीक्षा में आता है। मॉक टेस्ट दें:

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4. रामदेवरा के दर्शनीय स्थल

स्थलमहत्व
रामदेवजी का समाधि मंदिरमुख्य पूजा-स्थल; पगल्ये व प्रतिमा
डालीबाई की समाधिरामदेवजी की धर्म-बहन; पास में ‘डालीबाई का कंगन’ — पत्थर की गोलाकार संरचना, जिसमें से निकलना शुभ माना जाता है
रामसरोवर तालाबलोक-मान्यता: रामदेवजी द्वारा खुदवाया गया; श्रद्धालु स्नान करते हैं
परचा बावड़ी‘परचा’ (चमत्कार) से जुड़ी बावड़ी
पंच पीपलीरामदेवरा के निकट — मक्का के पाँच पीरों की परीक्षा की लोककथा का स्थल

5. सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक

  1. हिंदू आस्था: रामदेवजी कृष्ण के अवतार; ‘द्वारकाधीश’ का रूप।
  2. मुस्लिम आस्था: ‘रामसा पीर’; लोककथा में मक्का के पीरों ने उन्हें ‘पीरों का पीर’ कहा।
  3. जाति-भेद का अंत: मेघवाल डालीबाई को बहन मानना; मेले में सभी जातियाँ साथ-साथ।
  4. सेवा-भाव: सैकड़ों किलोमीटर लंबे मार्ग पर निःशुल्क भोजन-जल-चिकित्सा शिविर।

6. रामदेवजी से जुड़े अन्य मेले — भ्रम से बचें

मेलास्थानसमयप्रकृति
रामदेवरा मेलारामदेवरा (जैसलमेर)भाद्रपद शुक्ल 2–11धार्मिक
रामदेव पशु मेलामानासर, नागौरमाघराज्य स्तरीय पशु मेला (नागौरी बैल)
मसूरिया पहाड़ीजोधपुरभाद्रपदरामदेवजी का मंदिर
छोटा रामदेवराजूनागढ़ (गुजरात)—गुजरात में रामदेवजी का प्रमुख स्थल

नागौर पशु मेले पर विस्तृत लेख: नागौर मेला

7. पोकरण-रामदेवरा क्षेत्र — अन्य परीक्षा तथ्य

  • पोकरण: 1974 (‘स्माइलिंग बुद्धा’) और 1998 (‘ऑपरेशन शक्ति’) के परमाणु परीक्षण।
  • रामदेवरा रेलवे स्टेशन: जोधपुर-जैसलमेर रेलमार्ग पर; मेले में विशेष ट्रेनें।
  • पोकरण: लाल पत्थर, मृण्पात्र (टेराकोटा) के लिए प्रसिद्ध।

8. रामदेवरा मेले का सामाजिक-आर्थिक महत्व

  1. सेवा-शिविर परंपरा: जोधपुर-पोकरण मार्ग सहित कई मार्गों पर ग्राम-समितियाँ और व्यापारी जातरुओं के लिए निःशुल्क भोजन, जल, विश्राम व चिकित्सा की व्यवस्था करते हैं — यह राजस्थान की ‘सेवा-संस्कृति’ का बड़ा उदाहरण है।
  2. अंतर्राज्यीय श्रद्धा: गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब से श्रद्धालु — रामदेवजी की आस्था राजस्थान से बाहर तक।
  3. स्थानीय अर्थव्यवस्था: प्रसाद, कपड़े के घोड़े, नेजा, पूजा-सामग्री, परिवहन व होटल व्यवसाय को बड़ा लाभ।
  4. दलित-वंचित समाज की आस्था: मेघवाल व अन्य समुदायों के लिए रामदेवजी सम्मान और समानता के प्रतीक।
  5. प्रशासनिक प्रबंधन: जिला प्रशासन, रेलवे (विशेष ट्रेनें) व रोडवेज़ की विशेष व्यवस्थाएँ — बड़े जन-आयोजन का मॉडल।

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रामदेवरा मेला कब लगता है?

रामदेवरा मेला हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (बाबे री बीज) से भाद्रपद शुक्ल एकादशी तक लगता है, जो सामान्यतः अगस्त-सितंबर में पड़ता है।

रामदेवरा किस जिले में है?

रामदेवरा (रूणेचा) राजस्थान के जैसलमेर जिले की पोकरण तहसील में स्थित है।

बाबा रामदेव को रामसा पीर क्यों कहते हैं?

मुस्लिम समुदाय बाबा रामदेवजी को पीर के रूप में पूजता है; लोककथा के अनुसार मक्का से आए पाँच पीरों ने उनके चमत्कार से प्रभावित होकर उन्हें ‘पीरों का पीर’ कहा, इसलिए वे ‘रामसा पीर’ कहलाते हैं।

‘बाबे री बीज’ क्या है?

भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को रामदेवजी के जन्मोत्सव के रूप में ‘बाबे री बीज’ कहा जाता है; इसी दिन से रामदेवरा मेला आरंभ होता है।

रामदेवरा मेले में कपड़े के घोड़े क्यों चढ़ाए जाते हैं?

कपड़े के घोड़े बाबा रामदेवजी के ‘लीला’ घोड़े के प्रतीक हैं; श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर इन्हें चढ़ाते हैं।

📝 One-Liner Revision (12 प्रश्न)

  1. रामदेवरा — पोकरण, जैसलमेर
  2. मेला आरंभ — भाद्रपद शुक्ल 2 (बाबे री बीज)
  3. मेला समापन — भाद्रपद शुक्ल 11
  4. पदयात्री कहलाते हैं — जातरू
  5. रामदेवजी की ध्वजा — नेजा (पँचरंगी)
  6. रात्रि जागरण — जम्मा
  7. मेले का नृत्य — तेरहताली
  8. मेघवाल भक्त — रिखिया
  9. रामदेवजी की धर्म-बहन — डालीबाई
  10. रामदेवजी की समाधि — 1458 ई.
  11. रामदेव पशु मेला — नागौर (माघ)
  12. मुस्लिम श्रद्धालुओं में नाम — रामसा पीर

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • रामदेवरा (पोकरण, जैसलमेर) — भाद्रपद शुक्ल 2 से 11।
  • जातरू, नेजा, पगल्ये, कपड़े के घोड़े, जम्मा, तेरहताली।
  • सांप्रदायिक सद्भाव का सबसे बड़ा मेला।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • रामदेवजी का जन्म बाड़मेर (उंडूकाश्मीर) में, पर मेला जैसलमेर (रामदेवरा) में।
  • रामदेवरा मेला (भाद्रपद) ≠ रामदेव पशु मेला (नागौर, माघ)।
  • भाद्रपद शुक्ल पक्ष — गोगा नवमी कृष्ण पक्ष में है; दोनों भादो के, पक्ष अलग।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“बीज से ग्यारस, बाबा का मेला” → भाद्रपद शुक्ल 2 (बीज) से 11 (ग्यारस)।

“जन्म बाड़मेर, समाधि जैसलमेर”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

रामदेवरा मेले पर प्रश्न लगभग हर परीक्षा में आता है — सबसे ज़्यादा ‘तिथि’ और ‘जिला’। कथन-आधारित प्रश्नों में ‘रामदेव पशु मेला’ को मिलाकर भ्रम पैदा किया जाता है, इसलिए भाग 6 की तालिका याद रखें। RAS मुख्य परीक्षा में ‘राजस्थान में सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक मेले’ पर रामदेवरा, गोगामेड़ी और अजमेर उर्स — तीनों का उदाहरण दें।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

रामदेवरा मेला व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • देवस्थान विभाग, राजस्थान — रामदेवरा मेला।
  • जिला प्रशासन जैसलमेर — रामदेवरा मेला व्यवस्थाएँ।
  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’ (लोकदेवता, मेले)।
  • डॉ. गोपीनाथ शर्मा — ‘राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा’।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: रामदेवरा मेला: बाबा रामदेवजी का प्रसिद्ध मेला

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: डालीबाई का कंगन, पंच पीपली और रामसरोवर से जुड़ी बातें लोक-मान्यता पर आधारित हैं। मेले की अंग्रेज़ी तारीख हर वर्ष पंचांग अनुसार बदलती है।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
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Sudhir Sirइतिहास विशेषज्ञलेखक परिचय
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. रामदेवरा मेला किस तिथि से आरंभ होता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. रामदेवरा किस जिले में स्थित है?

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Q3. रामदेवजी के मेघवाल भक्तों को क्या कहा जाता है?

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Q4. रामदेवरा मेले में कौन-सा नृत्य किया जाता है?

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Q5. रामदेव पशु मेला कहाँ आयोजित होता है?

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

रामदेवरा मेला भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (बाबे री बीज) से भाद्रपद शुक्ल एकादशी तक भरता है।

रामदेवरा (रूणेचा) जैसलमेर जिले की पोकरण तहसील में स्थित है।

रामदेवरा मेले में पैदल आने वाले श्रद्धालुओं को ‘जातरू’ कहा जाता है।

रामदेवजी के रात्रि जागरण को ‘जम्मा’ कहा जाता है।

रामदेवरा मेले में कामड़ जाति की स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला तेरहताली नृत्य प्रसिद्ध है।

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