राजस्थान के प्रमुख मेले एवं त्योहार: संपूर्ण सूची
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राजस्थान के प्रमुख मेले एवं त्योहार: संपूर्ण सूची
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⚡ Quick Answer: राजस्थान के मेले एवं त्योहार पाँच वर्गों में समझे जाते हैं — (1) धार्मिक मेले: पुष्कर, कोलायत, कैलादेवी, खाटूश्यामजी, सालासर, श्रीमहावीरजी; (2) लोकदेवता मेले: रामदेवरा (भाद्र शु. 2–11), गोगामेड़ी (भाद्र कृ. 9), परबतसर तेजाजी (भाद्र शु. 10); (3) आदिवासी मेले: बेणेश्वर (माघ पूर्णिमा — ‘आदिवासियों का कुंभ’), सीतामाता, घोटिया अंबा, मानगढ़ धाम; (4) राज्य स्तरीय पशु मेले (10): पुष्कर, तिलवाड़ा, परबतसर, नागौर, गोगामेड़ी आदि; (5) प्रमुख त्योहार: गणगौर, तीज, आखा तीज, शीतलाष्टमी, होली, दीपावली, मकर संक्रांति। पर्यटन विभाग के प्रमुख महोत्सव — मरु महोत्सव (जैसलमेर), ऊँट उत्सव (बीकानेर), मारवाड़ महोत्सव (जोधपुर), मेवाड़ महोत्सव (उदयपुर), हाथी महोत्सव (जयपुर)।
1. राजस्थान के मेले और त्योहार — परिचय
राजस्थान में कहावत है — “सात वार, नौ त्योहार” — यानी सप्ताह में सात दिन और त्योहार नौ! यह कहावत बताती है कि राजस्थान का जनजीवन मेलों और त्योहारों से कितना जुड़ा है। यहाँ के मेले केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पशु-व्यापार, विवाह-संबंध, लोक-कला प्रदर्शन और सामाजिक मेल-जोल के केंद्र भी हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में “राजस्थान के प्रमुख मेले कौन-कौन से हैं”, “कौन-सा मेला कब और कहाँ लगता है” जैसे प्रश्न हर वर्ष पूछे जाते हैं — यह लेख इन्हीं सबका एक-स्थान पर उत्तर है।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| कहावत | ‘सात वार, नौ त्योहार’; ‘तीज तिवारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर’ |
| त्योहारों की शुरुआत | श्रावण की तीज से (त्योहारों का आगमन) |
| त्योहारों का समापन | चैत्र की गणगौर पर |
| सबसे बड़ा धार्मिक-पशु मेला | पुष्कर (कार्तिक पूर्णिमा) |
| ‘आदिवासियों का कुंभ’ | बेणेश्वर मेला (माघ पूर्णिमा) |
| सांप्रदायिक सद्भाव का बड़ा मेला | रामदेवरा (भाद्रपद शुक्ल 2–11) |
| राज्य स्तरीय पशु मेले | 10 — पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित |
| पर्यटन महोत्सव | पर्यटन विभाग, राजस्थान व जिला प्रशासन द्वारा |
मेलों की मास-वार तालिका (महीना–स्थान–देवता–विशेषता) अलग लेख में: राजस्थान के मेले — महीना, स्थान, देवता, विशेषता।
2. राजस्थान के प्रमुख धार्मिक मेले
| मेला | स्थान (जिला) | तिथि/मास | विशेष |
|---|---|---|---|
| पुष्कर मेला | पुष्कर (अजमेर) | कार्तिक पूर्णिमा | ब्रह्मा मंदिर; ऊँटों का अंतरराष्ट्रीय मेला |
| कोलायत मेला | कोलायत (बीकानेर) | कार्तिक पूर्णिमा | कपिल मुनि; दीपदान |
| कैलादेवी (लक्खी) मेला | करौली | चैत्र (शुक्ल अष्टमी के आसपास) | लांगुरिया गीत |
| खाटूश्यामजी मेला | खाटू (सीकर) | फाल्गुन शुक्ल 11–12 | बर्बरीक (श्याम बाबा); निशान यात्रा |
| सालासर बालाजी | सालासर (चूरू) | चैत्र व आश्विन पूर्णिमा | दाढ़ी-मूँछ वाले हनुमान |
| श्रीमहावीरजी मेला | करौली | चैत्र शुक्ल 13 | जैन तीर्थ; रथ-यात्रा |
| भर्तृहरि मेला | अलवर | भाद्रपद शुक्ल 8 | नाथ परंपरा |
| शीतला माता मेला | चाकसू (जयपुर) | चैत्र कृष्ण 8 | बैलगाड़ी मेला; बास्योड़ा |
| करणी माता मेला | देशनोक (बीकानेर) | चैत्र व आश्विन नवरात्र | चूहों वाला मंदिर |
| डोल मेला | बारां | भाद्रपद शुक्ल 11 (जलझूलनी) | डोल-यात्रा |
| उर्स | अजमेर | रजब 1–6 | ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती |
विस्तृत लेख: पुष्कर मेला | कोलायत मेला | कैलादेवी मेला (करौली) | खाटूश्यामजी
3. लोकदेवताओं के मेले
| मेला | स्थान | तिथि | लोकदेवता |
|---|---|---|---|
| रामदेवरा मेला | रामदेवरा (जैसलमेर) | भाद्रपद शुक्ल 2–11 | बाबा रामदेवजी |
| गोगामेड़ी मेला | गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) | भाद्रपद कृष्ण 9 (गोगा नवमी) | गोगाजी |
| तेजाजी मेला | परबतसर (डीडवाना-कुचामन) | भाद्रपद शुक्ल 10 (तेजा दशमी) | तेजाजी |
| मल्लीनाथ मेला | तिलवाड़ा (बालोतरा) | चैत्र कृष्ण 11 से | मल्लीनाथ जी |
| पाबूजी मेला | कोलूमंड (फलोदी) | चैत्र अमावस्या | पाबूजी |
| देवनारायण मेला | सवाई भोज (भीलवाड़ा) | भाद्रपद शुक्ल 6–7 | देवनारायण जी |
विस्तृत लेख: रामदेवरा मेला | गोगामेड़ी मेला | लोकदेवताओं की तुलना: लोकदेवताओं का तुलनात्मक अध्ययन — जन्मस्थान, मेला, वाहन, प्रतीक
4. आदिवासी (जनजातीय) मेले
| मेला | स्थान | तिथि | विशेष |
|---|---|---|---|
| बेणेश्वर मेला | नवाटापरा, डूंगरपुर (सोम-माही-जाखम संगम) | माघ पूर्णिमा | ‘आदिवासियों का कुंभ’; मावजी |
| सीतामाता मेला | सीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़) | ज्येष्ठ अमावस्या | भील-मीणा |
| घोटिया अंबा मेला | बांसवाड़ा | चैत्र अमावस्या | भीलों का प्रमुख मेला |
| गौतमेश्वर मेला | अरणोद (प्रतापगढ़) | वैशाख पूर्णिमा | मीणा — भूरिया बाबा |
| मानगढ़ धाम मेला | बांसवाड़ा | मार्गशीर्ष पूर्णिमा | गोविंद गुरु; 1913 का बलिदान |
| ऋषभदेव मेला | धुलेव (उदयपुर) | चैत्र कृष्ण 8 | ‘काला जी’ — भीलों की आस्था |
| चौथ माता मेला | चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर) | माघ कृष्ण 4 | सकट चौथ |
विस्तृत लेख: बेणेश्वर मेला
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5. राज्य स्तरीय पशु मेले (10) — सबसे ज़्यादा पूछी जाने वाली सूची
| पशु मेला | स्थान | मास | प्रमुख नस्ल/विशेष |
|---|---|---|---|
| पुष्कर पशु मेला | पुष्कर (अजमेर) | कार्तिक | गिर नस्ल; ऊँट |
| मल्लीनाथ पशु मेला | तिलवाड़ा (बालोतरा) | चैत्र | थारपारकर, कांकरेज |
| वीर तेजाजी पशु मेला | परबतसर (डीडवाना-कुचामन) | श्रावण-भाद्रपद | नागौरी बैल; राजस्व आय में सबसे बड़ा |
| रामदेव पशु मेला | मानासर, नागौर | माघ | नागौरी बैल |
| बलदेव पशु मेला | मेड़ता सिटी (नागौर) | चैत्र | नागौरी नस्ल |
| गोगामेड़ी पशु मेला | गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) | श्रावण-भाद्रपद | हरियाणवी नस्ल |
| शिवरात्रि पशु मेला | करौली | फाल्गुन | हरियाणवी नस्ल |
| जसवंत पशु मेला | भरतपुर | आश्विन | हरियाणवी नस्ल |
| गोमती सागर पशु मेला | झालरापाटन (झालावाड़) | वैशाख | मालवी नस्ल |
| चंद्रभागा पशु मेला | झालरापाटन (झालावाड़) | कार्तिक | मालवी नस्ल |
ट्रिक: नागौर जिले में दो (रामदेव, बलदेव), झालावाड़ में दो (गोमती सागर, चंद्रभागा) पशु मेले। गायों की नस्लों के लिए राजस्थान की गोवंश नस्लें देखें। नागौर पशु मेले पर: नागौर मेला
6. राजस्थान के प्रमुख त्योहार — तिथि एवं परंपरा
| त्योहार | तिथि | राजस्थानी विशेषता |
|---|---|---|
| गणगौर | चैत्र कृष्ण 1 से चैत्र शुक्ल 3 (18 दिन) | ईसर-गौर पूजा; जयपुर-उदयपुर की सवारी |
| हरियाली तीज (छोटी तीज) | श्रावण शुक्ल 3 | जयपुर तीज सवारी; लहरिया, घेवर, झूले |
| कजली तीज (बड़ी तीज) | भाद्रपद कृष्ण 3 | बूंदी की तीज सवारी; सातु, नीमड़ी पूजा |
| आखा तीज (अक्षय तृतीया) | वैशाख शुक्ल 3 | बीकानेर स्थापना दिवस; पतंगबाज़ी; अबूझ सावा |
| शीतलाष्टमी | चैत्र कृष्ण 8 | बास्योड़ा (ठंडा भोजन) |
| मकर संक्रांति | 14/15 जनवरी | जयपुर की पतंगबाज़ी |
| होली | फाल्गुन पूर्णिमा | बरसाना जैसी लठमार होली (भरतपुर-करौली), डोलची होली (बीकानेर), पत्थरमार होली (बाड़मेर) |
| दशहरा | आश्विन शुक्ल 10 | कोटा का राष्ट्रीय दशहरा मेला |
| दीपावली | कार्तिक अमावस्या | माँडणे, हीड़ (बच्चों का दीपक-पात्र) |
| रक्षाबंधन | श्रावण पूर्णिमा | भील क्षेत्र में अगले दिन से गवरी आरंभ |
विस्तृत लेख: गणगौर पर्व | तीज पर्व — हरियाली व कजली तीज
7. पर्यटन विभाग के प्रमुख महोत्सव (Tourism Festivals)
| महोत्सव | स्थान | समय | मुख्य आकर्षण |
|---|---|---|---|
| ऊँट उत्सव (Camel Festival) | बीकानेर | जनवरी | ऊँट सजावट, ऊँट नृत्य |
| मरु महोत्सव (Desert Festival) | जैसलमेर | माघ पूर्णिमा (फरवरी) | मरु श्री, सम के धोरे |
| थार महोत्सव | बाड़मेर | फरवरी-मार्च | मरुस्थलीय लोक संस्कृति |
| हाथी महोत्सव | जयपुर | होली की पूर्व संध्या | सजे हुए हाथी |
| ब्रज महोत्सव | भरतपुर | होली से पूर्व | रासलीला |
| मेवाड़ महोत्सव | उदयपुर | गणगौर (चैत्र शुक्ल 3) | पिछोला में गणगौर की नाव सवारी |
| ग्रीष्म महोत्सव | माउंट आबू | बुद्ध पूर्णिमा (मई-जून) | हिल स्टेशन उत्सव |
| मारवाड़ महोत्सव | जोधपुर | शरद पूर्णिमा (अक्टूबर) | मांड गायन, मेहरानगढ़ |
| बूंदी उत्सव | बूंदी | कार्तिक | हाड़ौती संस्कृति |
| शीतकालीन महोत्सव | माउंट आबू | दिसंबर | नक्की झील |
विस्तृत लेख: जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल (मरु महोत्सव) | मारवाड़ महोत्सव (जोधपुर) | मेवाड़ महोत्सव (उदयपुर) | पर्यटन नीति व सर्किट: राजस्थान पर्यटन — सर्किट, योजनाएँ एवं महोत्सव
8. राजस्थानी मेलों की प्रमुख विशेषताएँ
- धर्म + व्यापार: धार्मिक आस्था के साथ पशु-व्यापार, हस्तशिल्प बिक्री।
- लोक-कला का मंच: गैर, घूमर, कालबेलिया, तेरहताली, ख्याल, फड़-वाचन।
- सामाजिक मेल-जोल: आदिवासी मेलों में विवाह-संबंध तय होना (बेणेश्वर, सीतामाता)।
- पंचांग आधारित: अधिकांश मेले हिंदी मास की तिथि पर — इसलिए अंग्रेज़ी तारीख हर वर्ष बदलती है।
- सांप्रदायिक सद्भाव: रामदेवरा, गोगामेड़ी, अजमेर उर्स में सभी धर्मों के श्रद्धालु।
- पर्यटन व अर्थव्यवस्था: पुष्कर, मरु महोत्सव में विदेशी पर्यटक।
🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)
राजस्थान का सबसे बड़ा मेला कौन-सा है?
धार्मिक-पशु मेले के रूप में पुष्कर मेला (कार्तिक पूर्णिमा) सबसे प्रसिद्ध है; श्रद्धालुओं की संख्या में रामदेवरा (भाद्रपद) और आदिवासी मेलों में बेणेश्वर (माघ पूर्णिमा) सबसे बड़े हैं।
राजस्थान में त्योहारों की शुरुआत और अंत किस त्योहार से माना जाता है?
कहावत ‘तीज तिवारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर’ के अनुसार त्योहारों का आगमन श्रावण की तीज से और समापन चैत्र की गणगौर से माना जाता है।
राजस्थान में राज्य स्तरीय पशु मेले कितने हैं?
राजस्थान में पशुपालन विभाग 10 राज्य स्तरीय पशु मेले आयोजित करता है — पुष्कर, तिलवाड़ा, परबतसर, नागौर (रामदेव), मेड़ता (बलदेव), गोगामेड़ी, करौली (शिवरात्रि), भरतपुर (जसवंत), झालरापाटन (गोमती सागर व चंद्रभागा)।
‘आदिवासियों का कुंभ’ किस मेले को कहते हैं?
डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम (सोम-माही-जाखम संगम) पर माघ पूर्णिमा को भरने वाले मेले को ‘आदिवासियों का कुंभ’ कहा जाता है।
मेलों की अंग्रेज़ी तारीख हर साल क्यों बदलती है?
राजस्थान के अधिकांश मेले हिंदू पंचांग की तिथि (जैसे भाद्रपद शुक्ल दशमी) पर लगते हैं; चंद्र-मास और सौर कैलेंडर में अंतर के कारण अंग्रेज़ी तारीख हर वर्ष बदल जाती है।
📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)
- ‘सात वार, नौ त्योहार’ — राजस्थान की कहावत
- त्योहारों का आगमन — तीज; समापन — गणगौर
- पुष्कर मेला — कार्तिक पूर्णिमा
- बेणेश्वर मेला — माघ पूर्णिमा
- रामदेवरा मेला — भाद्रपद शुक्ल 2–11
- तेजा दशमी मेला — परबतसर
- कैलादेवी लक्खी मेला — चैत्र, करौली
- खाटूश्यामजी मेला — फाल्गुन शुक्ल 11–12
- श्रीमहावीरजी मेला — चैत्र शुक्ल 13
- गौतमेश्वर मेला — अरणोद (प्रतापगढ़)
- राज्य स्तरीय पशु मेले — 10
- चंद्रभागा पशु मेला — झालरापाटन, कार्तिक
- आखा तीज — बीकानेर स्थापना दिवस
- डोल मेला — बारां
- हाथी महोत्सव — जयपुर, होली की पूर्व संध्या
✅ मुख्य बिंदु (Key Points)
- 5 वर्ग: धार्मिक, लोकदेवता, आदिवासी, पशु मेले, त्योहार + पर्यटन महोत्सव।
- भाद्रपद = लोकदेवताओं के मेले; कार्तिक पूर्णिमा = पुष्कर, कोलायत, चंद्रभागा।
- 10 राज्य स्तरीय पशु मेले — नागौर व झालावाड़ में दो-दो।
- तीज से त्योहार शुरू, गणगौर पर समाप्त।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- चंद्रभागा (कार्तिक) और गोमती सागर (वैशाख) — दोनों झालरापाटन में; मास देखकर उत्तर दें।
- रामदेव पशु मेला नागौर (मानासर) में, जबकि रामदेवरा धार्मिक मेला जैसलमेर में।
- श्रीमहावीरजी करौली में है, कैलादेवी के साथ; दोनों ‘चैत्र’ — तिथि से अंतर करें।
- कोलायत और पुष्कर दोनों कार्तिक पूर्णिमा — जिला (बीकानेर/अजमेर) से अंतर।
🧠 मेमोरी ट्रिक
“भादो में देवता, कार्तिक में तीर्थ, माघ में आदिवासी, चैत्र में देवी” → भाद्रपद = रामदेवरा-गोगामेड़ी-तेजाजी; कार्तिक = पुष्कर-कोलायत; माघ = बेणेश्वर-मरु महोत्सव; चैत्र = कैलादेवी-शीतला-गणगौर।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
मेले-त्योहार खंड में प्रश्न लगभग हमेशा ‘मेला–स्थान’, ‘मेला–तिथि’ या ‘पशु मेला–नस्ल’ के मिलान से आते हैं। इस लेख को पहले वर्ग-वार पढ़ें, फिर मास-वार तालिका वाले लेख से दोहराएँ — दो अलग कोणों से पढ़ने पर याददाश्त पक्की होती है। पर्यटन महोत्सवों से जुड़े नए तथ्य (नई तिथियाँ, नए आयोजन) करेंट अफेयर्स में भी आते हैं।
✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़
राजस्थान के मेले एवं त्योहार व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:
- राजस्थान के प्रमुख मेले — अभ्यास क्विज़
- राजस्थान कला एवं संस्कृति प्रश्नोत्तरी
- राजस्थान लोकदेवता अभ्यास क्विज़
- राजस्थान पटवारी 2026 टेस्ट सीरीज़
- राजस्थान पुलिस कांस्टेबल 2026 टेस्ट सीरीज़
- राजस्थान VDO फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- राजस्थान LDC / कनिष्ठ सहायक 2026 टेस्ट सीरीज़
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
पूरी कला एवं संस्कृति इकाई के नोट्स: राजस्थान कला एवं संस्कृति — सभी नोट्स | परीक्षा में आने वाले नए सांस्कृतिक तथ्य (पुरस्कार, महोत्सव, GI टैग): करेंट अफेयर्स
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- राजस्थान के मेले — महीना, स्थान, देवता, विशेषता
- गणगौर पर्व
- तीज पर्व — हरियाली व कजली तीज
- रामदेवरा मेला
- गोगामेड़ी मेला
- कैलादेवी मेला (करौली)
- जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल (मरु महोत्सव)
- मारवाड़ महोत्सव (जोधपुर)
- मेवाड़ महोत्सव (उदयपुर)
- पुष्कर मेला
- बेणेश्वर मेला
- कोलायत मेला
- नागौर मेला
📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार — फेयर एवं फेस्टिवल कैलेंडर।
- पशुपालन विभाग, राजस्थान — राज्य स्तरीय पशु मेलों की सूची।
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’ (मेले एवं त्योहार)।
- Incredible India / Utsav portal (भारत सरकार) — राजस्थान के महोत्सव।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. ‘आदिवासियों का कुंभ’ किस मेले को कहा जाता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. चंद्रभागा पशु मेला कहाँ आयोजित होता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. जसवंत पशु मेला किस जिले में लगता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. श्रीमहावीरजी का मेला किस तिथि को भरता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. निम्नलिखित में से असुमेलित युग्म है —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
पुष्कर, कोलायत, रामदेवरा, गोगामेड़ी, तेजाजी (परबतसर), कैलादेवी, खाटूश्यामजी, बेणेश्वर, श्रीमहावीरजी, शीतला माता (चाकसू) और करणी माता (देशनोक) राजस्थान के प्रमुख मेले हैं।
राजस्थान में 10 राज्य स्तरीय पशु मेले हैं, जिन्हें पशुपालन विभाग आयोजित करता है; इनमें पुष्कर, तिलवाड़ा, परबतसर, नागौर, गोगामेड़ी और झालरापाटन के चंद्रभागा मेले प्रमुख हैं।
गणगौर, हरियाली तीज, कजली तीज, आखा तीज, शीतलाष्टमी, होली, दीपावली, दशहरा और मकर संक्रांति राजस्थान के प्रमुख त्योहार हैं।
मरु महोत्सव (जैसलमेर), ऊँट उत्सव (बीकानेर), मारवाड़ महोत्सव (जोधपुर), मेवाड़ महोत्सव (उदयपुर), हाथी महोत्सव (जयपुर), ब्रज महोत्सव (भरतपुर) और माउंट आबू के ग्रीष्म-शीतकालीन महोत्सव प्रमुख हैं।
इस कहावत का अर्थ है कि राजस्थान में त्योहारों का सिलसिला श्रावण की तीज से शुरू होता है और चैत्र की गणगौर के साथ समाप्त हो जाता है।
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