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मारवाड़ महोत्सव: इतिहास, आयोजन एवं सांस्कृतिक महत्व

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
9 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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मारवाड़ महोत्सव: इतिहास, आयोजन एवं सांस्कृतिक महत्व

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

⚡ Quick Answer: मारवाड़ महोत्सव जोधपुर में हर वर्ष आश्विन मास की शरद पूर्णिमा (सितंबर-अक्टूबर) पर आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव है, जिसका पुराना नाम ‘मांड समारोह’ (Maand Festival) था। यह मारवाड़ के लोकनायकों व वीरों की स्मृति में मनाया जाता है और इसकी मुख्य थीम मांड गायकी व मारवाड़ का लोक संगीत-नृत्य है। आयोजन-स्थल — मेहरानगढ़ दुर्ग, घंटाघर, उम्मेद स्टेडियम, मंडोर व ओसियां के धोरे। आकर्षण — कैमल टैटू शो, मूँछ व साफा बाँधने की प्रतियोगिता, रस्साकशी, मटका दौड़, हस्तशिल्प प्रदर्शनी। आयोजक — पर्यटन विभाग, राजस्थान व जिला प्रशासन।

1. मारवाड़ महोत्सव क्या है?

राजस्थान पर्यटन के वार्षिक कैलेंडर में “मारवाड़ महोत्सव कब मनाया जाता है” और “मारवाड़ महोत्सव का पुराना नाम क्या है” — ये दो प्रश्न परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछे जाते हैं। यह उत्सव सूर्यनगरी जोधपुर की शरद-पूर्णिमा की चाँदनी में मारवाड़ की वीर-परंपरा, संगीत और रंगीन जीवन-शैली को मंच पर उतारता है। मरु महोत्सव जहाँ मरुस्थल के धोरों का उत्सव है, वहीं मारवाड़ महोत्सव किलों, शहर और लोक-संगीत का उत्सव है।

तथ्यविवरण
स्थानजोधपुर (सूर्यनगरी) व आसपास
समयआश्विन शुक्ल पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) — सितंबर/अक्टूबर
अवधिदो दिन
पुराना नाममांड समारोह (Maand Festival)
उद्देश्यमारवाड़ के वीरों व लोकनायकों की स्मृति; लोक-संस्कृति का संरक्षण; पर्यटन
मुख्य थीममांड गायकी; मारवाड़ का लोक संगीत व नृत्य
आयोजन-स्थलमेहरानगढ़, घंटाघर, उम्मेद स्टेडियम, सम्राट अशोक उद्यान, मंडोर, ओसियां के धोरे
आयोजकपर्यटन विभाग, राजस्थान व जिला प्रशासन जोधपुर

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2. इतिहास — ‘मांड समारोह’ से ‘मारवाड़ महोत्सव’ तक

  1. मांड परंपरा: ‘मांड’ राजस्थान की वह शास्त्रीय-लोक गायन शैली है जो राजदरबारों में शासकों के शौर्य, प्रेम और शिष्टाचार का बखान करती थी।
  2. मांड समारोह: इसी गायकी को मंच देने के लिए जोधपुर में शरद पूर्णिमा पर ‘मांड समारोह’ आयोजित होने लगा।
  3. विस्तार: धीरे-धीरे इसमें मारवाड़ के लोकनृत्य, खेल-प्रतियोगिताएँ, सैन्य प्रदर्शन और हस्तशिल्प जुड़ते गए और यह पूर्ण ‘मारवाड़ महोत्सव’ बन गया।
  4. वर्तमान: पर्यटन विभाग इसे राज्य के प्रमुख वार्षिक महोत्सवों में शामिल करता है; केंद्र सरकार के Utsav/Incredible India पोर्टल पर भी यह सूचीबद्ध है।

मांड गायकी व गायिकाओं पर विस्तार: मांड, पावड़ा एवं लोक गायन शैलियाँ | प्रमुख लोक गायक-गायिकाएँ

3. आयोजन — दो दिन का कार्यक्रम

कार्यक्रमस्थलविवरण
शोभायात्राघंटाघर / भीतरी शहरलोक कलाकार, ऊँट-घोड़े, पारंपरिक वेशभूषा
मांड व लोक संगीत संध्यामेहरानगढ़ / उम्मेद स्टेडियममांड गायन, लंगा-मांगणियार प्रस्तुतियाँ
कैमल टैटू शोउम्मेद स्टेडियमBSF के प्रशिक्षित ऊँटों का प्रदर्शन
प्रतियोगिताएँउम्मेद स्टेडियम / सम्राट अशोक उद्यानमूँछ, साफा बाँधना, रस्साकशी, मटका दौड़, पारंपरिक वेशभूषा
लोकनृत्यविभिन्न मंचघूमर, कालबेलिया, गैर, तेरहताली, कच्छी घोड़ी
धोरों पर समापनओसियांरेत के धोरों पर लोक संध्या
हस्तशिल्प प्रदर्शनीशहरबंधेज, मोजड़ी, लाख, फर्नीचर

विशेष: ‘मारवाड़ महोत्सव मारवाड़ के वीरों की स्मृति में’ — इसलिए गायन-प्रस्तुतियों में पाबूजी, रामदेवजी, तेजाजी, वीर दुर्गादास जैसे लोकनायकों की गाथाएँ प्रमुख रहती हैं।

मारवाड़ के लोकदेवता: पाबूजी | रामदेवजी | तेजाजी

🎯 महोत्सव–स्थान–समय मिलान का अभ्यास करें

‘मांड समारोह’, ‘शरद पूर्णिमा’, ‘मरु श्री’, ‘गणगौर घाट’ — पर्यटन महोत्सवों के इन संकेत-शब्दों पर प्रश्न CET, पटवारी, LDC व RAS में आते हैं। मॉक टेस्ट दें:

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4. आयोजन-स्थलों का ऐतिहासिक महत्व

स्थलऐतिहासिक तथ्य
मेहरानगढ़ दुर्गराव जोधा द्वारा 1459 में; ‘मयूरध्वज गढ़’; चामुंडा माता मंदिर
उम्मेद भवन / उम्मेद स्टेडियममहाराजा उम्मेद सिंह के काल (20वीं सदी पूर्वार्द्ध) के निर्माण
घंटाघर (Clock Tower)भीतरी शहर का केंद्र; सरदार मार्केट
मंडोरमारवाड़ की प्राचीन राजधानी; राठौड़ शासकों की छतरियाँ (देवल)
ओसियांप्रतिहारकालीन मंदिर समूह, सच्चियाय माता; रेत के धोरे

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5. सांस्कृतिक महत्व

  1. मांड गायकी का संरक्षण: दरबारी परंपरा से जुड़ी शैली को जन-मंच।
  2. लोक कलाकारों को आजीविका: लंगा, मांगणियार, कालबेलिया, ढोली कलाकारों को अवसर।
  3. वीर-परंपरा की स्मृति: नई पीढ़ी को मारवाड़ के इतिहास से जोड़ना।
  4. पर्यटन: शरद ऋतु में पर्यटक-सीज़न की शुरुआत; होटल-हस्तशिल्प को लाभ।
  5. सामुदायिक भागीदारी: मूँछ, साफा, मटका दौड़ जैसी प्रतियोगिताओं में स्थानीय लोग।

6. मारवाड़ महोत्सव बनाम अन्य महोत्सव

महोत्सवस्थानसमयपहचान
मारवाड़ महोत्सवजोधपुरशरद पूर्णिमा (आश्विन)मांड समारोह; मारवाड़ के वीर
मेवाड़ महोत्सवउदयपुरगणगौर (चैत्र)पिछोला में नाव सवारी
मरु महोत्सवजैसलमेरमाघ पूर्णिमामरु श्री; सम के धोरे
ऊँट उत्सवबीकानेरजनवरीऊँट सजावट व नृत्य
जोधपुर RIFFमेहरानगढ़, जोधपुरअक्टूबर (शरद पूर्णिमा के आसपास)अंतरराष्ट्रीय लोक संगीत उत्सव (निजी-ट्रस्ट आयोजन)

सावधान: मेहरानगढ़ में होने वाला Jodhpur RIFF (राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल) और मारवाड़ महोत्सव अलग आयोजन हैं, भले ही दोनों का समय लगभग एक साथ पड़ता है।

अन्य महोत्सव: मेवाड़ महोत्सव (उदयपुर) | जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल (मरु महोत्सव)

7. मारवाड़ अंचल की लोक-संस्कृति — एक नज़र में

मारवाड़ महोत्सव में जिन कलाओं की झलक मिलती है, वे पूरे मारवाड़ अंचल (जोधपुर, पाली, नागौर, बाड़मेर, जालौर, फलोदी, बालोतरा) की पहचान हैं:

क्षेत्रमारवाड़ की पहचान
लोकनृत्यघूमर, डांडिया (मारवाड़), घुड़ला, गैर, अग्नि नृत्य (बीकानेर से सटे क्षेत्र), तेरहताली (पाली)
लोक गायनमांड, लंगा-मांगणियार गायकी, पाबूजी के पवाड़े
लोकदेवतापाबूजी (कोलू), रामदेवजी, तेजाजी (खड़नाल), मल्लीनाथ जी (तिलवाड़ा)
हस्तशिल्पबंधेज, मोजड़ी (जूतियाँ), लाख का काम, लकड़ी का फर्नीचर, बादला (जस्ते के जलपात्र)
चित्रकलामारवाड़ (जोधपुर) शैली — वीर व प्रेम-कथाओं के चित्र
स्थापत्यमेहरानगढ़, उम्मेद भवन, मंडोर की छतरियाँ, ओसियां के मंदिर

डांडिया नृत्य: डांडिया — मारवाड़ का लोकनृत्य | हस्तशिल्प: राजस्थान के प्रमुख हस्तशिल्प

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मारवाड़ महोत्सव कब मनाया जाता है?

मारवाड़ महोत्सव हर वर्ष आश्विन मास की शरद पूर्णिमा पर जोधपुर में दो दिन के लिए मनाया जाता है, जो सामान्यतः सितंबर-अक्टूबर में पड़ता है।

मारवाड़ महोत्सव का पुराना नाम क्या है?

मारवाड़ महोत्सव का पुराना नाम ‘मांड समारोह’ (Maand Festival) था, क्योंकि इसकी मूल थीम मांड गायकी थी।

मारवाड़ महोत्सव किसकी याद में मनाया जाता है?

मारवाड़ महोत्सव मारवाड़ के वीरों और लोकनायकों की स्मृति में मनाया जाता है; इसकी प्रस्तुतियों में उनकी गाथाएँ गाई जाती हैं।

मारवाड़ महोत्सव कहाँ-कहाँ आयोजित होता है?

मेहरानगढ़ दुर्ग, घंटाघर, उम्मेद स्टेडियम, सम्राट अशोक उद्यान, मंडोर और ओसियां के रेतीले धोरों पर इसके कार्यक्रम होते हैं।

मारवाड़ महोत्सव और मरु महोत्सव में क्या अंतर है?

मारवाड़ महोत्सव जोधपुर में शरद पूर्णिमा पर मांड गायकी व वीर-परंपरा का उत्सव है, जबकि मरु महोत्सव जैसलमेर में माघ पूर्णिमा पर रेगिस्तानी संस्कृति (मरु श्री, ऊँट दौड़, सम के धोरे) का उत्सव है।

📝 One-Liner Revision (12 प्रश्न)

  1. मारवाड़ महोत्सव — जोधपुर
  2. समय — शरद पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा)
  3. अवधि — दो दिन
  4. पुराना नाम — मांड समारोह
  5. मुख्य थीम — मांड गायकी
  6. किसकी स्मृति में — मारवाड़ के वीर/लोकनायक
  7. ऊँटों का प्रदर्शन — कैमल टैटू शो
  8. धोरों पर कार्यक्रम — ओसियां
  9. मेहरानगढ़ के निर्माता — राव जोधा (1459)
  10. मारवाड़ की प्राचीन राजधानी — मंडोर
  11. आयोजक — पर्यटन विभाग, राजस्थान
  12. मेहरानगढ़ का अंतरराष्ट्रीय लोक उत्सव — Jodhpur RIFF

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • जोधपुर, शरद पूर्णिमा, 2 दिन, पुराना नाम मांड समारोह।
  • थीम: मांड गायकी + मारवाड़ के वीर।
  • स्थल: मेहरानगढ़, घंटाघर, उम्मेद स्टेडियम, मंडोर, ओसियां।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • मारवाड़ महोत्सव — शरद पूर्णिमा; मेवाड़ महोत्सव — गणगौर; मरु महोत्सव — माघ पूर्णिमा।
  • मांड समारोह = मारवाड़ महोत्सव; ‘मरु महोत्सव का पुराना नाम’ वाला विकल्प गलत।
  • ओसियां जोधपुर में है — इसके धोरे मारवाड़ महोत्सव से, जबकि सम के धोरे मरु महोत्सव (जैसलमेर) से जुड़े हैं।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“मारवाड़ में मांड, शरद की चाँदनी में”।

“म-म-म” → मारवाड़ = मांड = मेहरानगढ़।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

पर्यटन महोत्सवों पर प्रश्न अब कला-संस्कृति के साथ भूगोल (पर्यटन) खंड में भी आते हैं। तीन महोत्सवों — मारवाड़, मेवाड़, मरु — के स्थान, समय और ‘पहचान-शब्द’ (मांड, नाव सवारी, मरु श्री) को एक तालिका में याद रखें। प्रश्नकर्ता प्रायः इन्हीं तीनों के समय आपस में बदलकर विकल्प बनाते हैं।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

मारवाड़ महोत्सव व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • पर्यटन विभाग, राजस्थान — Marwar Festival, Jodhpur।
  • Utsav portal (utsav.gov.in), भारत सरकार — Marwar Festival।
  • Incredible India — Marwar Festival (Mehrangarh, Umaid Stadium, Osian)।
  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: मारवाड़ महोत्सव: इतिहास, आयोजन एवं सांस्कृतिक महत्व

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: आयोजन-स्थल और कार्यक्रम हर वर्ष पर्यटन विभाग के निर्णय से थोड़े बदल सकते हैं; यहाँ आधिकारिक पोर्टलों पर दर्शाए नियमित कार्यक्रम दिए गए हैं।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. मारवाड़ महोत्सव किस अवसर पर आयोजित होता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. ‘मांड समारोह’ किस महोत्सव का पुराना नाम है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. मारवाड़ महोत्सव का आयोजन किस शहर में होता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. मारवाड़ महोत्सव के दौरान रेत के धोरों पर कार्यक्रम कहाँ होता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. सुमेलित कीजिए — (a) मारवाड़ महोत्सव (b) मेवाड़ महोत्सव (c) मरु महोत्सव | (i) माघ पूर्णिमा (ii) शरद पूर्णिमा (iii) गणगौर

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

मारवाड़ महोत्सव जोधपुर में हर वर्ष आश्विन मास की शरद पूर्णिमा पर दो दिन के लिए मनाया जाता है।

मारवाड़ महोत्सव का पुराना नाम ‘मांड समारोह’ था।

मांड गायकी व मारवाड़ का लोक संगीत-नृत्य, कैमल टैटू शो, मूँछ व साफा प्रतियोगिता, मटका दौड़ और ओसियां के धोरों पर लोक संध्या इसके मुख्य आकर्षण हैं।

यह महोत्सव मारवाड़ के वीरों व लोकनायकों की स्मृति में मनाया जाता है।

मारवाड़ महोत्सव का आयोजन पर्यटन विभाग, राजस्थान और जिला प्रशासन जोधपुर मिलकर करते हैं।

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