तीज पर्व: राजस्थान में हरियाली तीज एवं कजली तीज
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स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।
तीज पर्व: राजस्थान में हरियाली तीज एवं कजली तीज
सुयोग AI गुरु
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⚡ Quick Answer: राजस्थान में दो तीज सबसे प्रसिद्ध हैं — हरियाली तीज (छोटी तीज/श्रावणी तीज) — श्रावण शुक्ल तृतीया, जिसकी सबसे प्रसिद्ध शाही सवारी जयपुर में निकलती है; और कजली तीज (बड़ी तीज/सातुड़ी तीज/बूढ़ी तीज) — भाद्रपद कृष्ण तृतीया, जिसका प्रसिद्ध मेला व सवारी बूंदी में होती है। तीज में तीज माता (पार्वती) की पूजा होती है; स्त्रियाँ लहरिया पहनती हैं, झूला झूलती हैं, घेवर बनता है और एक दिन पहले सिंजारा मनाया जाता है। कजली तीज पर सातु (सत्तू) व नीमड़ी माता की पूजा कर चंद्र-दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। कहावत — “तीज तिवारां बावड़ी”: त्योहारों का आगमन तीज से माना जाता है।
1. तीज पर्व — अर्थ एवं परिचय
भीषण गर्मी के बाद जब सावन की पहली फुहारें मरुधरा को हरा करती हैं, तब राजस्थान की स्त्रियाँ तीज मनाती हैं। यह पर्व शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है — मान्यता है कि पार्वती ने कठोर तप से इसी तिथि को शिव को पति रूप में पाया। इसलिए तीज माता (पार्वती) की पूजा कर स्त्रियाँ अखंड सौभाग्य और कन्याएँ मनचाहा वर माँगती हैं। “हरियाली तीज और कजली तीज में क्या अंतर है” — यह परीक्षा और सामान्य खोज, दोनों में सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है, जिसका उत्तर इस लेख की तुलना तालिका में है।
| तथ्य | हरियाली तीज | कजली तीज |
|---|---|---|
| अन्य नाम | छोटी तीज, श्रावणी तीज, सिंधारा तीज | बड़ी तीज, सातुड़ी तीज, बूढ़ी तीज |
| तिथि | श्रावण शुक्ल तृतीया | भाद्रपद कृष्ण तृतीया |
| प्रसिद्ध स्थान | जयपुर (शाही सवारी) | बूंदी (सवारी व मेला) |
| आराध्य | तीज माता (पार्वती) | तीज माता + नीमड़ी माता |
| विशेष भोजन | घेवर, मालपुआ | सातु (सत्तू) |
| विशेष परंपरा | झूला, लहरिया, मेहंदी | चंद्र-दर्शन के बाद व्रत खोलना, कजली गीत |
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2. हरियाली तीज — जयपुर की शाही सवारी
- सिंजारा (श्रावण शुक्ल 2): विवाहित बेटियों के ससुराल से या मायके से वस्त्र, श्रृंगार, मेहंदी, घेवर भेजे जाते हैं — इसे ‘सिंजारा’ या ‘सिंधारा’ कहते हैं।
- श्रृंगार: तीज के दिन स्त्रियाँ लहरिया (लहरदार रंगाई वाली ओढ़नी/साड़ी) पहनती हैं; हाथों में मेहंदी।
- झूला: नीम-पीपल पर झूले डालकर सावन के गीत गाए जाते हैं।
- तीज माता की पूजा: दोपहर में पूजा; कई जगह निर्जल व्रत।
- जयपुर की सवारी: सिटी पैलेस की ज़नानी ड्योढ़ी से तीज माता की शाही सवारी त्रिपोलिया बाज़ार होते हुए तालकटोरा की ओर निकलती है; सजे हुए हाथी-घोड़े, लोक कलाकार; दो दिन (तीज व अगले दिन ‘बूढ़ी तीज’ की सवारी)।
लहरिया व अन्य वस्त्र-कला के लिए राजस्थान के प्रमुख हस्तशिल्प और सांगानेरी-बगरू छपाई देखें।
3. कजली तीज — बूंदी की प्रसिद्ध परंपरा
- तिथि: भाद्रपद कृष्ण तृतीया — रक्षाबंधन के तीन दिन बाद।
- सातु: चना, गेहूँ, जौ या चावल के आटे को घी-शक्कर में मिलाकर ‘सातु’ बनाया जाता है; सातु के पिंड की पूजा होती है — इसलिए ‘सातुड़ी तीज’।
- नीमड़ी माता: नीम की टहनी की पूजा; दीपक व जल-पात्र में चंद्रमा का प्रतिबिंब देखना।
- व्रत: दिन भर निर्जल व्रत; रात में चंद्र-दर्शन व अर्घ्य के बाद सातु खाकर व्रत खोलना।
- कजली गीत: वर्षा व विरह से जुड़े ‘कजली’ गीत गाए जाते हैं।
- बूंदी की सवारी व मेला: बूंदी में तीज माता की भव्य सवारी व कई दिन का मेला — हाड़ौती का प्रमुख आयोजन।
3.1 बूंदी में तीज की प्रतिमा की लोककथा
लोक-परंपरा के अनुसार बूंदी के गोठड़ा ठिकाने के हाड़ा सरदार बलवंत सिंह ने जयपुर की तीज सवारी से तीज माता की प्रतिमा छीन ली और बूंदी ले आए। तभी से बूंदी में कजली तीज पर तीज माता की सवारी निकलती है। यह कथा जयपुर-बूंदी के ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता की स्मृति भी है। परीक्षा में इसे “बूंदी की कजली तीज क्यों प्रसिद्ध है” के रूप में पूछा जा सकता है।
🎯 चार ‘तीज’ और गणगौर — तिथियों में भ्रम तो नहीं? टेस्ट से जाँचें
‘श्रावण शुक्ल 3, भाद्रपद कृष्ण 3, चैत्र शुक्ल 3, वैशाख शुक्ल 3’ — इन तिथियों को त्योहार से मिलाने वाले प्रश्न हर परीक्षा में आते हैं। अभ्यास करें:
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4. राजस्थान की चार ‘तीज’ — तुलनात्मक तालिका
| तीज | तिथि | मुख्य पहचान |
|---|---|---|
| आखा तीज (अक्षय तृतीया) | वैशाख शुक्ल 3 | अबूझ सावा (विवाह), बीकानेर स्थापना दिवस, पतंगबाज़ी, किसान शुभ शकुन देखते हैं |
| हरियाली तीज | श्रावण शुक्ल 3 | जयपुर की सवारी, लहरिया, घेवर, झूला |
| कजली तीज | भाद्रपद कृष्ण 3 | बूंदी, सातु, नीमड़ी, चंद्र-दर्शन |
| हरतालिका तीज | भाद्रपद शुक्ल 3 | पार्वती की सखियों द्वारा हरण की कथा; उत्तर भारत में अधिक प्रचलित |
ट्रिक: “वैशाख में आखा, श्रावण में हरा, भादो के अंधेरे में कजली, भादो के उजाले में हरतालिका”।
5. तीज का सांस्कृतिक पक्ष
- लहरिया: जयपुर की बंधेज (टाई-डाई) की लहरदार रंगाई; सावन में पहनना शुभ।
- घेवर: जयपुर, सांभर व अलवर का प्रसिद्ध घेवर — तीज-गणगौर की पहचान।
- झूले व लोकगीत: सावन के गीत, कजली; नवविवाहिताओं की पहली तीज मायके में मनाने की परंपरा।
- चित्रकला: बूंदी-कोटा शैली में वर्षा, झूले और तीज की सवारी के चित्र प्रसिद्ध।
- पर्यटन: पर्यटन विभाग जयपुर की तीज सवारी को ‘तीज महोत्सव’ के रूप में प्रचारित करता है।
बूंदी चित्रकला में वर्षा-दृश्य: बूंदी चित्रकला
6. तीज बनाम गणगौर
| आधार | तीज | गणगौर |
|---|---|---|
| ऋतु | वर्षा (सावन-भादो) | बसंत (चैत्र) |
| क्रम | त्योहारों का आरंभ | त्योहारों का समापन |
| अवधि | 1–2 दिन | 18 दिन |
| आराध्य | तीज माता (पार्वती) | ईसर-गौर |
| बूढ़ी सवारी | बूढ़ी तीज (जयपुर, अगले दिन); कजली को भी ‘बूढ़ी तीज’ कहते हैं | बूढ़ी गणगौर (जयपुर) |
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हरियाली तीज और कजली तीज में क्या अंतर है?
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है और जयपुर की सवारी के लिए प्रसिद्ध है; कजली तीज भाद्रपद कृष्ण तृतीया को आती है और बूंदी की सवारी, सातु व नीमड़ी पूजा के लिए प्रसिद्ध है।
राजस्थान में तीज कहाँ की प्रसिद्ध है?
हरियाली तीज की शाही सवारी जयपुर की और कजली (बड़ी) तीज की सवारी व मेला बूंदी के प्रसिद्ध हैं।
तीज पर लहरिया क्यों पहना जाता है?
लहरिया की लहरदार रंगाई सावन की हरियाली और वर्षा का प्रतीक मानी जाती है, इसलिए तीज पर स्त्रियाँ लहरिया पहनना शुभ मानती हैं।
कजली तीज को सातुड़ी तीज क्यों कहते हैं?
कजली तीज पर चना-गेहूँ-जौ के आटे से बने ‘सातु’ की पूजा कर उसे खाकर व्रत खोला जाता है, इसलिए इसे सातुड़ी तीज कहते हैं।
सिंजारा क्या होता है?
तीज या गणगौर से एक दिन पहले बेटियों को मायके या ससुराल से भेजे जाने वाले वस्त्र, श्रृंगार, मेहंदी और मिठाई को सिंजारा कहते हैं; यह दिन भी ‘सिंजारा’ कहलाता है।
📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)
- हरियाली तीज — श्रावण शुक्ल तृतीया
- कजली तीज — भाद्रपद कृष्ण तृतीया
- हरियाली तीज की प्रसिद्ध सवारी — जयपुर
- कजली तीज की प्रसिद्ध सवारी — बूंदी
- कजली तीज के अन्य नाम — बड़ी, सातुड़ी, बूढ़ी तीज
- हरियाली तीज के अन्य नाम — छोटी, श्रावणी तीज
- तीज से एक दिन पहले — सिंजारा
- तीज पर पहनी जाने वाली ओढ़नी — लहरिया
- कजली तीज पर पूजी जाने वाली — नीमड़ी माता
- कजली तीज का व्रत खुलता है — चंद्र-दर्शन के बाद
- आखा तीज — वैशाख शुक्ल तृतीया
- हरतालिका तीज — भाद्रपद शुक्ल तृतीया
- बूंदी में तीज प्रतिमा लाने वाले (लोककथा) — गोठड़ा के बलवंत सिंह हाड़ा
- ‘तीज तिवारां बावड़ी’ — त्योहारों का आगमन तीज से
- तीज-गणगौर की प्रमुख मिठाई — घेवर
✅ मुख्य बिंदु (Key Points)
- हरियाली = श्रावण शुक्ल 3 = जयपुर; कजली = भाद्रपद कृष्ण 3 = बूंदी।
- सिंजारा, लहरिया, घेवर, झूला — हरियाली तीज; सातु, नीमड़ी, चंद्र-दर्शन — कजली तीज।
- चार तीज: आखा, हरियाली, कजली, हरतालिका।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- कजली तीज भाद्रपद कृष्ण पक्ष में है, शुक्ल पक्ष में नहीं (शुक्ल पक्ष की तृतीया हरतालिका है)।
- ‘बड़ी तीज’ कजली है, हरियाली नहीं — नाम से भ्रम न करें।
- बूंदी उत्सव (कार्तिक) और बूंदी की कजली तीज (भाद्रपद) अलग आयोजन हैं।
🧠 मेमोरी ट्रिक
“हरा जयपुर, काला बूंदी” → हरियाली तीज–जयपुर; कजली (काजल = काला) तीज–बूंदी।
“सातु, नीम, चाँद — कजली की पहचान”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
तीज पर प्रश्न लगभग हमेशा ‘तिथि’ या ‘स्थान’ से जुड़े होते हैं — और भ्रम पैदा करने के लिए विकल्पों में गणगौर व आखा तीज की तिथियाँ रखी जाती हैं। चार तीज वाली तालिका (भाग 4) को गणगौर की तिथि (चैत्र शुक्ल 3) के साथ याद करें — पाँचों ‘तृतीया’ एक साथ पक्की हो जाएँगी।
✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़
तीज पर्व व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:
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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- पर्यटन विभाग, राजस्थान — तीज महोत्सव (जयपुर) एवं बूंदी कजली तीज मेला।
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’ (त्योहार)।
- डॉ. गोपीनाथ शर्मा — ‘राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा’।
- जिला प्रशासन बूंदी — कजली तीज मेला।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. कजली तीज किस तिथि को मनाई जाती है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. कजली तीज का प्रसिद्ध मेला कहाँ लगता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. तीज के एक दिन पहले मनाए जाने वाले पर्व को क्या कहते हैं?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. ‘सातुड़ी तीज’ किसे कहा जाता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. आखा तीज किस तिथि को आती है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। इसकी सबसे प्रसिद्ध शाही सवारी जयपुर में निकलती है।
कजली तीज भाद्रपद कृष्ण तृतीया को मनाई जाती है और बूंदी की तीज सवारी व मेला इसके लिए सबसे प्रसिद्ध हैं।
कजली तीज को बड़ी तीज, सातुड़ी तीज और बूढ़ी तीज भी कहा जाता है।
तीज पर तीज माता अर्थात् माता पार्वती की पूजा होती है; कजली तीज पर नीमड़ी माता की भी पूजा की जाती है।
राजस्थान में चार प्रमुख तीज हैं — आखा तीज (वैशाख शुक्ल 3), हरियाली तीज (श्रावण शुक्ल 3), कजली तीज (भाद्रपद कृष्ण 3) और हरतालिका तीज (भाद्रपद शुक्ल 3)।
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