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राजस्थान की जनजातीय संस्कृति: संपूर्ण Master Guide

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
3 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 3 अक्टूबर 2026
9 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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राजस्थान की जनजातीय संस्कृति: संपूर्ण Master Guide

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⚡ Quick Answer: जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की अनुसूचित जनजाति जनसंख्या 92,38,534 है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 13.48% है। राज्य में 12 अनुसूचित जनजातियाँ हैं। जनसंख्या के आधार पर मीणा (43.45 लाख, लगभग 47%) सबसे बड़ी और भील (41 लाख, लगभग 44%) दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है; भील राजस्थान के प्राचीनतम निवासी माने जाते हैं। सहरिया (बारां) राज्य की एकमात्र विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) है। जनजातीय संस्कृति की पहचान — गवरी, वालर, घूमर, गैर जैसे नृत्य; बेणेश्वर, सीताबाड़ी, मनखां रो मेलो जैसे मेले; दापा (वधू-मूल्य), नाता (पुनर्विवाह) जैसी प्रथाएँ; गोदना, मांदल-थाली वादन और प्रकृति-पूजा।

1. राजस्थान की जनजातीय संस्कृति — परिचय

अरावली की पहाड़ियों, दक्षिणी राजस्थान के वनों और हाड़ौती के पठार में बसे जनजातीय समुदायों ने राजस्थान की संस्कृति को प्रकृति-केंद्रित, सामूहिक और उत्सवधर्मी रंग दिया है। “राजस्थान की जनजातियों की संस्कृति कैसी है” — इसका उत्तर है: नृत्य-गीत में जीवन, प्रकृति में देवता, समुदाय में न्याय और मेलों में मेल-जोल। यह लेख राजस्थान की जनजातीय संस्कृति का सार-संग्रह (Master Guide) है; हर जनजाति की विस्तृत संस्कृति के लिए अलग लेख दिए गए हैं।

जनजातियों का भौगोलिक वितरण, जनसंख्या व TSP क्षेत्र: राजस्थान की जनजातियाँ — भील, मीणा, गरासिया, सहरिया

2. राजस्थान की 12 अनुसूचित जनजातियाँ — जनगणना 2011

जनजातिजनसंख्या (2011)कुल ST का %मुख्य क्षेत्र
मीणा (मीना)43,45,52847.04%जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली, उदयपुर आदि
भील (उपसमूहों सहित)41,00,26444.38%बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, प्रतापगढ़
गरासिया3,14,1943.41%सिरोही, उदयपुर, पाली
सहरिया1,11,3771.21%बारां (शाहबाद, किशनगंज)
भील मीणा1,05,3931.14%दक्षिणी राजस्थान
धानका (संबद्ध समूह)96,7371.04%—
डामोर91,4630.99%डूंगरपुर, बांसवाड़ा
नायकड़ा8,3550.09%—
कथौड़ी (कातकरी)4,8330.05%उदयपुर
कोली ढोर, पटेलिया, कोकनाअल्प संख्या——

कुल ST जनसंख्या: 92,38,534 (राज्य का 13.48%)। ध्यान दें: जनगणना 2011 के आँकड़ों में मीणा संख्या में सबसे बड़ी जनजाति है; अनेक पुरानी पुस्तकें भील को सबसे बड़ी बताती हैं — परीक्षा में प्रश्न का आधार-वर्ष देखकर उत्तर दें।

3. जनजातीय संस्कृति की सामान्य विशेषताएँ

  1. प्रकृति-पूजा: वृक्ष, पहाड़ (डूंगर देव), नदी, पशु — सब पूज्य; टोटम व कुल-देवताओं की आराधना।
  2. सामूहिकता: खेती, निर्माण और उत्सव में सामूहिक सहयोग — गरासियों की ‘हारी-भावरी’ (सामूहिक कृषि) इसका उदाहरण।
  3. स्व-शासन: गाँव-पंचायत और मुखिया (भील — गमेती; मीणा — पटेल; गरासिया — पटेल) द्वारा विवाद-निपटारा।
  4. विवाह-प्रथाएँ: वधू-मूल्य (दापा), पुनर्विवाह (नाता), गोत्र-बहिर्विवाह; विवाह-विच्छेद की सामाजिक स्वीकृति (भील — ‘छेड़ा फाड़ना’)।
  5. नृत्य-संगीत: हर अवसर पर सामूहिक नृत्य; मांदल, ढोल, थाली, नगाड़ा प्रमुख वाद्य।
  6. गोदना: शरीर पर स्थायी चित्र — पहचान, सौंदर्य और आस्था का प्रतीक (मीणा, भील, गरासिया, कथौड़ी)।
  7. मेले: धार्मिक आस्था के साथ विवाह-संबंध तय करने और सामाजिक मेल-जोल के केंद्र।

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4. प्रमुख जनजातियाँ — संस्कृति का सार

जनजातिबस्ती/मुखियाप्रमुख नृत्यप्रमुख मेला/पर्वविशेष पहचान
भीलपाल, फला; गमेतीगवरी, घूमर, हाथीमना, युद्ध नृत्य, द्विचक्रीबेणेश्वर, गवरीप्राचीनतम निवासी; तीर-कमान; गोविंद गुरु
मीणापटेल; चौरासी पंचायत; पंच पटेल—गौतमेश्वर (अरणोद)जनसंख्या में सबसे बड़ी; गोदना; मत्स्य अवतार की पूजा
गरासियाघेर (घर), फलिया/फला, पाल; पटेलवालर, गैर, मोरिया, गौरमनखां रो मेलो (सियावा), कोटेश्वर, चेतर-विचितरहारी-भावरी; सोहरी; राजपूत-भील मिश्रित मूल
सहरिया—सहरिया स्वांग (होली)सीताबाड़ी (बारां)राज्य की एकमात्र PVTG; हाड़ौती बोली
डामोरबिखरे गाँव—बेणेश्वरवागड़ी बोली; पुरुष भी आभूषण पहनते
कथौड़ीखोलरा (घर); नायक——दूध वर्जित; कंसारी माता, डूंगर देव

विस्तृत लेख: भील जनजाति की संस्कृति | मीणा जनजाति की संस्कृति | गरासिया जनजाति की संस्कृति | सहरिया जनजाति की संस्कृति

5. धर्म, आस्था एवं लोकदेवता

  • प्रकृति व कुल-देवता: डूंगर देव (पहाड़), भाखर बावजी, घोड़ा बावजी (गरासिया), खेर बाबा (सहरिया)।
  • देवियाँ: भवानी माता, दुर्गा, काली, कंसारी माता (कथौड़ी), आमजा माता (भील — केलवाड़ा)।
  • लोकदेवता: देवनारायण (गरासिया, डामोर), कल्लाजी-गोराजी (भील), भूरिया बाबा (मीणा)।
  • संत-नायक: गोविंद गुरु (भील), मावजी (वागड़)।
  • भोपा: देवता के ‘भाव’ से समस्या-समाधान की लोक-मान्यता।

लोकदेवियाँ: राजस्थान की प्रमुख लोकदेवियाँ एवं कुलदेवियाँ | लोकदेवता: लोकदेवता एवं लोकदेवियाँ — Master Guide

6. जनजातीय अर्थव्यवस्था एवं जीवन-शैली

पक्षविवरण
कृषिमक्का, ज्वार; भीलों में पहाड़ी ढलान की खेती ‘चिमाता’, मैदानी खेती ‘दजिया’, स्थानांतरित खेती ‘वालरा’
वन-उपजमहुआ, तेंदूपत्ता, शहद, जड़ी-बूटी, लकड़ी (विशेषकर सहरिया)
पशुपालनगाय, बकरी, मुर्गी
सामूहिक श्रमगरासिया — हारी-भावरी (सामूहिक खेती); अनाज भंडारण — सोहरी/कोठी
आवासभील — टापरा, कू (बरामदा ‘ढालिया’); गरासिया — घेर; कथौड़ी — खोलरा
वर्तमानमज़दूरी, प्रवास (गुजरात, महाराष्ट्र), सरकारी योजनाएँ, शिक्षा में वृद्धि

7. संवैधानिक संरक्षण एवं संस्थाएँ

  • अनुच्छेद 342: राष्ट्रपति द्वारा अनुसूचित जनजातियों की अधिसूचना।
  • पाँचवीं अनुसूची: राजस्थान के दक्षिणी जनजातीय जिले अनुसूचित क्षेत्र में — बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ पूर्णतः; उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ आदि आंशिक रूप से।
  • जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग (TAD): उदयपुर मुख्यालय — जनजातीय उपयोजना (TSP) का क्रियान्वयन।
  • माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान, उदयपुर: जनजातीय संस्कृति का शोध व दस्तावेज़ीकरण।
  • PVTG हेतु योजना: केंद्र सरकार का पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) — 15 नवंबर 2023 (जनजातीय गौरव दिवस) को आरंभ; सहरिया इसके लाभार्थी।
  • जनजातीय योजनाओं से जुड़े नए तथ्य: डेली करेंट अफेयर्स

8. जनजातीय आंदोलन — सांस्कृतिक चेतना

  • गोविंद गुरु: भीलों में समाज-सुधार (‘सम्प सभा’); मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा) पर 1913 का बलिदान।
  • मोतीलाल तेजावत: ‘एकी आंदोलन’ — भील-गरासियों में अन्यायपूर्ण करों के विरुद्ध चेतना।
  • विस्तार: राजस्थान के प्रमुख जनजातीय आंदोलन

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राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति कौन-सी है?

जनगणना 2011 के अनुसार मीणा (43.45 लाख) जनसंख्या में राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है; भील (41 लाख) दूसरी सबसे बड़ी और राज्य के प्राचीनतम निवासी माने जाते हैं।

राजस्थान में कितनी अनुसूचित जनजातियाँ हैं?

राजस्थान में 12 अनुसूचित जनजातियाँ अधिसूचित हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 2011 में 92,38,534 (13.48%) थी।

राजस्थान की एकमात्र PVTG कौन-सी है?

बारां जिले की सहरिया जनजाति राजस्थान की एकमात्र विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) है।

जनजातियों में ‘दापा’ क्या है?

दापा जनजातीय विवाह में वर-पक्ष द्वारा वधू-पक्ष को दिया जाने वाला वधू-मूल्य है; यह भील, गरासिया, सहरिया, डामोर आदि में प्रचलित है।

‘नाता’ प्रथा क्या है?

नाता प्रथा में विवाहित स्त्री या विधवा का सामाजिक स्वीकृति के साथ दूसरे पुरुष से पुनर्विवाह होता है; यह कई जनजातियों में प्रचलित है।

📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)

  1. राजस्थान की कुल ST जनसंख्या (2011) — 92,38,534
  2. राज्य की जनसंख्या में ST % — 13.48%
  3. अनुसूचित जनजातियों की संख्या — 12
  4. जनसंख्या में सबसे बड़ी जनजाति (2011) — मीणा
  5. प्राचीनतम जनजाति — भील
  6. एकमात्र PVTG — सहरिया
  7. भीलों का मुखिया — गमेती
  8. मीणा पंचायत — चौरासी
  9. वधू-मूल्य — दापा
  10. भीलों में विवाह-विच्छेद — छेड़ा फाड़ना
  11. गरासियों की सामूहिक खेती — हारी-भावरी
  12. सहरियों का प्रमुख मेला — सीताबाड़ी
  13. गरासियों का सबसे बड़ा मेला — मनखां रो मेलो
  14. जनजातीय शोध संस्थान — माणिक्यलाल वर्मा, उदयपुर
  15. PVTG हेतु केंद्रीय अभियान — पीएम-जनमन (2023)

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • 12 ST; 92.38 लाख; 13.48%; मीणा सबसे बड़ी (2011), भील प्राचीनतम, सहरिया PVTG।
  • प्रकृति-पूजा, सामूहिकता, स्व-शासन, दापा-नाता, नृत्य-मेले, गोदना।
  • पाँचवीं अनुसूची, TAD, TSP, माणिक्यलाल वर्मा संस्थान, पीएम-जनमन।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • ‘सबसे बड़ी’ बनाम ‘प्राचीनतम’ — जनगणना 2011 में मीणा सबसे बड़ी; भील प्राचीनतम। पुरानी पुस्तकों के आधार पर ‘भील सबसे बड़ी’ भी मिलता है — प्रश्न का संदर्भ देखें।
  • सहरिया PVTG है, भील या गरासिया नहीं।
  • गमेती (भील) और पटेल (मीणा, गरासिया) — मुखिया के नाम न मिलाएँ।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“मीणा सबसे ज़्यादा, भील सबसे पुराने, सहरिया सबसे कमज़ोर (PVTG)”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

जनजातीय संस्कृति पर प्रश्न अब शब्दावली-आधारित (दापा, नाता, गमेती, चौरासी, हारी-भावरी) अधिक आते हैं। हर जनजाति के लिए ‘बस्ती–मुखिया–नृत्य–मेला–विशेष’ — पाँच कॉलम की तालिका (भाग 4) याद करें। RAS मुख्य परीक्षा में ‘जनजातीय संस्कृति की विशेषताएँ’ पर भाग 3 के सात बिंदु उत्तर का ढाँचा बनाते हैं।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

राजस्थान की जनजातीय संस्कृति व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:

पूरी कला एवं संस्कृति इकाई के नोट्स: राजस्थान कला एवं संस्कृति — सभी नोट्स | परीक्षा में आने वाले नए सांस्कृतिक तथ्य (पुरस्कार, महोत्सव, GI टैग): करेंट अफेयर्स

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • जनगणना 2011 — राजस्थान की अनुसूचित जनजातियाँ (List of Scheduled Tribes in Rajasthan, en.wikipedia.org पर संकलित आँकड़े)।
  • RajRAS — ‘Rajasthan Tribes’ (भील, मीणा, गरासिया, सहरिया, डामोर, कथौड़ी की सांस्कृतिक विशेषताएँ)।
  • जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग (TAD), राजस्थान सरकार।
  • माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान, उदयपुर।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान की जनजातीय संस्कृति: संपूर्ण Master Guide

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: जनसंख्या-आँकड़े जनगणना 2011 के हैं। जनजातीय शब्दावली (बस्ती, मुखिया, प्रथाएँ) क्षेत्र के अनुसार बदलती है; यहाँ प्रकाशित संदर्भों में दर्ज रूप दिए गए हैं। अनुसूचित क्षेत्र की सटीक सीमा हेतु नवीनतम अधिसूचना देखें।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 3 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत है —

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Q2. राजस्थान की एकमात्र PVTG जनजाति है —

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Q3. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. जनजातीय विवाह में वधू-मूल्य को क्या कहा जाता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान कहाँ स्थित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की अनुसूचित जनजाति जनसंख्या 92,38,534 है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 13.48% है।

जनगणना 2011 के अनुसार मीणा जनजाति (43,45,528) राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है।

भील जनजाति को राजस्थान के प्राचीनतम निवासी माना जाता है।

बारां जिले की सहरिया जनजाति राजस्थान की एकमात्र विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) है।

भील जनजाति के गाँव के मुखिया को गमेती कहा जाता है।

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