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सहरिया जनजाति की संस्कृति एवं परंपराएँ

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
3 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 3 अक्टूबर 2026
8 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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सहरिया जनजाति की संस्कृति एवं परंपराएँ

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⚡ Quick Answer: सहरिया जनजाति (जनगणना 2011 — 1,11,377) राजस्थान की एकमात्र विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) है, जो मुख्यतः बारां जिले की शाहबाद और किशनगंज तहसीलों में बसती है (कोटा, झालावाड़, सवाई माधोपुर में कम संख्या)। ये हाड़ौती की एक बोली बोलते हैं। सहरियों का सबसे बड़ा मेला सीताबाड़ी (केलवाड़ा के पास, शाहबाद — ज्येष्ठ मास) है, जिसे ‘सहरियों का कुंभ’ कहा जाता है। आराध्य — खेर बाबा, भवानी माता, दुर्गा माता। होली के महीने में होने वाला सहरिया स्वांग प्रसिद्ध लोक-प्रदर्शन है। विवाह में दापा, नाता प्रचलित; आजीविका परंपरागत रूप से वन-उपज पर आधारित रही है।

1. सहरिया जनजाति — परिचय

“राजस्थान की एकमात्र आदिम जनजाति (PVTG) कौन-सी है” — इस अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर है सहरिया। ‘सहरिया’ नाम को ‘सहर’ (जंगल) शब्द से जोड़ा जाता है — अर्थात जंगल में रहने वाले। हाड़ौती के वनों में बसे सहरिया अपनी सरल जीवन-शैली, प्रकृति-पूजा और सामूहिक लोक-प्रदर्शनों के लिए जाने जाते हैं। सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के कारण इन्हें विशेष संरक्षण की श्रेणी (PVTG) में रखा गया है। सहरिया मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र (भिंड, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी) में भी पाए जाते हैं।

तथ्यविवरण
जनसंख्या (2011)1,11,377 (कुल ST का 1.21%)
विशेष दर्जाराजस्थान की एकमात्र PVTG
मुख्य क्षेत्रबारां — शाहबाद, किशनगंज; कोटा, झालावाड़, सवाई माधोपुर में कम संख्या
बोलीहाड़ौती की एक बोली
नामकरण‘सहर’ (जंगल) — जंगल में रहने वाले (परंपरागत व्याख्या)
परिवारपितृसत्तात्मक; बुज़ुर्ग पुरुष निर्णय लेते हैं; स्त्रियाँ कृषि में सक्रिय
विवाहगोत्र-बहिर्विवाह (चौहान, डोडिया आदि गोत्र); दापा; नाता
आराध्यखेर बाबा, भवानी माता, दुर्गा माता; प्रकृति-पूजा
प्रमुख मेलासीताबाड़ी (केलवाड़ा, शाहबाद) — ‘सहरियों का कुंभ’
आजीविकापरंपरागत — वन-उपज (शहद, जड़ी-बूटी, लकड़ी); अब कृषि व मज़दूरी

जनजातीय संस्कृति का समग्र परिचय: राजस्थान की जनजातीय संस्कृति — Master Guide | हाड़ौती बोली: प्रमुख बोलियाँ — मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती

2. PVTG क्या है और सहरिया क्यों?

  • PVTG (Particularly Vulnerable Tribal Group): वे जनजातियाँ जिनमें कृषि-पूर्व तकनीक, बहुत कम साक्षरता, स्थिर या घटती जनसंख्या और आर्थिक पिछड़ापन हो — इन्हें विशेष योजनाओं की आवश्यकता होती है।
  • सहरिया: वन-आश्रित जीवन, कम साक्षरता और आर्थिक पिछड़ेपन के कारण राजस्थान की एकमात्र PVTG।
  • योजनाएँ: राज्य का सहरिया विकास कार्यक्रम; केंद्र सरकार का पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) — 15 नवंबर 2023 को आरंभ, PVTG बस्तियों में आवास, सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य हेतु।
  • जनजातीय योजनाओं के नए तथ्य: डेली करेंट अफेयर्स

🎯 सहरिया — PVTG, सीताबाड़ी, पीएम-जनमन: करेंट + स्टैटिक दोनों प्रश्न

‘राजस्थान की एकमात्र PVTG’, ‘सहरियों का कुंभ’ जैसे प्रश्न RAS, CET, पटवारी, VDO व पुलिस परीक्षाओं में आते हैं। मॉक टेस्ट से अभ्यास करें:

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3. सीताबाड़ी मेला — ‘सहरियों का कुंभ’

तथ्यविवरण
स्थानसीताबाड़ी — केलवाड़ा गाँव के पास, तहसील शाहबाद, जिला बारां
समयज्येष्ठ मास (मई-जून)
उपनाम‘सहरियों का कुंभ’ — सहरिया जनजाति का सबसे बड़ा मेला
धार्मिक मान्यतालोक-परंपरा के अनुसार वनवास के समय माता सीता ने यहीं लव-कुश को जन्म दिया; महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से जुड़ा स्थल
विशेषसात पवित्र कुंड — श्रद्धालु स्नान करते हैं
सामाजिक महत्वसहरिया समुदाय का मिलन-स्थल; विवाह-संबंध, व्यापार, लोक-प्रदर्शन

सभी जनजातीय मेले: जनजातीय मेले, नृत्य एवं त्योहार | मास-वार मेले: राजस्थान के मेले — महीना, स्थान, देवता, विशेषता

4. लोक-कला — सहरिया स्वांग एवं नृत्य

  • सहरिया स्वांग: होली के महीने में सहरिया पुरुषों की टोलियाँ विभिन्न रूप (स्वांग) धरकर गाँव-गाँव घूमती हैं; ढोल, नगाड़ी और मटकी की थाप पर नृत्य-गायन।
  • लहंगी (लहकी) नृत्य: सहरियों का सामूहिक लोकनृत्य।
  • तेजाजी के गीत: सहरिया समाज में तेजाजी की गाथा पर आधारित लोक-गायन की परंपरा।
  • प्रकृति-आधारित गीत: वन, वर्षा, खेती से जुड़े लोकगीत।

स्वांग परंपरा: स्वांग लोकनाट्य — राजस्थान | तेजाजी: तेजाजी

5. सामाजिक जीवन एवं प्रथाएँ

पक्षविवरण
परिवारपितृसत्तात्मक; निर्णय बुज़ुर्ग पुरुषों द्वारा
स्त्रियों की भूमिकाकृषि व वन-उपज संग्रह में सक्रिय
विवाहगोत्र-बहिर्विवाह; जनजाति के भीतर विवाह; वर-पक्ष द्वारा वधू के पिता को दापा
पुनर्विवाहनाता प्रथा
मृत्यु-संस्कारमृत्यु-भोज की परंपरा
आभूषणस्त्रियाँ चाँदी के आभूषण, चूड़ियाँ, पायजेब पहनती हैं
वेशभूषास्त्रियाँ — रेजा (विवाहिताओं का वस्त्र), रेनसाई (काली ज़मीन पर लाल-भूरी बूटियों का लहंगा)

जनजातीय वेशभूषा: जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण

6. आजीविका एवं चुनौतियाँ

  • परंपरागत: शहद, जड़ी-बूटी, ईंधन-लकड़ी, कंद-मूल जैसी वन-उपज का संग्रह; शिकार।
  • वर्तमान: छोटी कृषि, दैनिक मज़दूरी, ईंट-भट्ठे व निर्माण कार्य।
  • चुनौतियाँ: कुपोषण, कम साक्षरता, भूमिहीनता, बँधुआ श्रम की ऐतिहासिक समस्या, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी।
  • समाधान के प्रयास: PVTG योजनाएँ, आवासीय विद्यालय, पोषण कार्यक्रम, वनाधिकार।

सहरिया समाज में बदलाव

  • आवासीय विद्यालयों और छात्रवृत्तियों से नई पीढ़ी में साक्षरता बढ़ रही है।
  • वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत भूमि-पट्टों से खेती में स्थिरता आई है।
  • पोषण व स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कारण कुपोषण पर नियंत्रण के प्रयास।
  • सहरिया स्वांग जैसी लोक-परंपराओं को सांस्कृतिक मंचों पर पहचान मिल रही है।

📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — यह विषय परीक्षा में कैसे पूछा जाता है?

प्रश्न का प्रकारउदाहरणहल करने की कुंजी
विशेष दर्जाराजस्थान की एकमात्र PVTG?सहरिया
मेला‘सहरियों का कुंभ’?सीताबाड़ी (बारां)
क्षेत्रसहरिया किन तहसीलों में?शाहबाद, किशनगंज
करेंट से जोड़PVTG हेतु 2023 का अभियान?पीएम-जनमन

सहरिया जनजाति — अध्ययन-सूत्र

  1. दर्जा: राजस्थान की एकमात्र PVTG।
  2. क्षेत्र: बारां — शाहबाद, किशनगंज।
  3. मेला: सीताबाड़ी — ‘सहरियों का कुंभ’ (ज्येष्ठ)।
  4. लोक-कला: सहरिया स्वांग (होली)।
  5. आस्था: खेर बाबा, भवानी माता, दुर्गा माता।

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राजस्थान की एकमात्र PVTG जनजाति कौन-सी है?

बारां जिले की सहरिया जनजाति राजस्थान की एकमात्र विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) है।

सहरियों का कुंभ किसे कहते हैं?

बारां जिले की शाहबाद तहसील में केलवाड़ा के पास ज्येष्ठ मास में लगने वाले सीताबाड़ी मेले को ‘सहरियों का कुंभ’ कहा जाता है।

सहरिया जनजाति कहाँ रहती है?

सहरिया जनजाति मुख्यतः बारां जिले की शाहबाद और किशनगंज तहसीलों में रहती है; कोटा, झालावाड़ और सवाई माधोपुर में भी कुछ आबादी है।

सहरिया स्वांग क्या है?

सहरिया स्वांग होली के महीने में सहरिया पुरुषों की टोलियों द्वारा विभिन्न रूप धरकर गाँव-गाँव किया जाने वाला लोक-प्रदर्शन है, जिसमें ढोल, नगाड़ी और मटकी बजाई जाती है।

सहरिया जनजाति के आराध्य कौन हैं?

सहरिया जनजाति खेर बाबा, भवानी माता और दुर्गा माता की पूजा करती है तथा प्रकृति-पूजा में विश्वास रखती है।

📝 One-Liner Revision (12 प्रश्न)

  1. राजस्थान की एकमात्र PVTG — सहरिया
  2. सहरिया जनसंख्या (2011) — 1,11,377
  3. मुख्य जिला — बारां
  4. मुख्य तहसीलें — शाहबाद, किशनगंज
  5. बोली — हाड़ौती
  6. ‘सहरियों का कुंभ’ — सीताबाड़ी मेला
  7. सीताबाड़ी मेले का मास — ज्येष्ठ
  8. सीताबाड़ी से जुड़ी लोक-मान्यता — लव-कुश का जन्मस्थान
  9. होली का लोक-प्रदर्शन — सहरिया स्वांग
  10. आराध्य — खेर बाबा, भवानी माता
  11. PVTG हेतु केंद्रीय अभियान — पीएम-जनमन (15 नवंबर 2023)
  12. ‘सहरिया’ शब्द का संबंध — सहर (जंगल)

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • एकमात्र PVTG; बारां (शाहबाद, किशनगंज); हाड़ौती बोली।
  • सीताबाड़ी — सहरियों का कुंभ (ज्येष्ठ)।
  • सहरिया स्वांग, लहंगी, तेजाजी गायन; खेर बाबा।
  • दापा, नाता, मृत्यु-भोज; वन-उपज आधारित आजीविका।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • सीताबाड़ी (बारां, सहरिया) और सीतामाता (प्रतापगढ़, अभयारण्य व मेला) — अलग स्थान।
  • सहरिया PVTG है; कथौड़ी की जनसंख्या कम है पर वह राजस्थान में PVTG के रूप में अधिसूचित नहीं।
  • सहरिया हाड़ौती बोली बोलते हैं, वागड़ी नहीं।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“बारां के सहर (जंगल) में सहरिया — सीताबाड़ी में कुंभ, होली में स्वांग”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

सहरिया पर सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य ‘एकमात्र PVTG’ है; इसके बाद ‘सीताबाड़ी — सहरियों का कुंभ’। पीएम-जनमन जैसी नई योजनाएँ करेंट अफेयर्स से जुड़कर प्रश्न बनाती हैं, इसलिए स्टैटिक और करेंट दोनों को साथ याद रखें।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

सहरिया जनजाति की संस्कृति व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:

पूरी कला एवं संस्कृति इकाई के नोट्स: राजस्थान कला एवं संस्कृति — सभी नोट्स | परीक्षा में आने वाले नए सांस्कृतिक तथ्य (पुरस्कार, महोत्सव, GI टैग): करेंट अफेयर्स

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • जनगणना 2011 — सहरिया (1,11,377)।
  • RajRAS — ‘Rajasthan Tribes’: सहरिया — PVTG, क्षेत्र, हाड़ौती बोली, विवाह, दापा, नाता, खेर बाबा, सीताबाड़ी।
  • भारतकोश (bharatdiscovery.org) — सीताबाड़ी मेला (केलवाड़ा, शाहबाद; ज्येष्ठ; ‘सहरियों का कुंभ’)।
  • NVLI (भारत सरकार) — ‘सहरिया स्वांग’ प्रलेखन।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: सहरिया जनजाति की संस्कृति एवं परंपराएँ

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: सीताबाड़ी से जुड़ी लव-कुश की कथा लोक-परंपरा पर आधारित है; ‘सहरिया’ शब्द की व्युत्पत्ति परंपरागत व्याख्या है। योजना-संबंधी तथ्य सरकारी घोषणाओं के अनुसार हैं।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 3 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. राजस्थान की एकमात्र PVTG जनजाति कौन-सी है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. ‘सहरियों का कुंभ’ किस मेले को कहते हैं?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. सहरिया जनजाति मुख्यतः किस जिले में निवास करती है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. सीताबाड़ी मेला किस तहसील में लगता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. सहरिया जनजाति कौन-सी बोली बोलती है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में सहरिया जनजाति की जनसंख्या 1,11,377 है।

सीताबाड़ी मेला बारां जिले की शाहबाद तहसील में केलवाड़ा गाँव के पास ज्येष्ठ मास में लगता है।

सहरिया जनजाति हाड़ौती की एक बोली बोलती है।

PVTG का पूरा नाम Particularly Vulnerable Tribal Group (विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) है।

पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) 15 नवंबर 2023 को जनजातीय गौरव दिवस पर PVTG समुदायों के विकास हेतु शुरू किया गया।

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