राजस्थान की अन्य जनजातियाँ: डामोर, कथौड़ी, कंजर, सांसी — RAS/CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: भील, मीणा, गरासिया और सहरिया के अलावा राजस्थान की परीक्षाओं में चार समुदाय बार-बार पूछे जाते हैं — डामोर, कथौड़ी, कंजर और सांसी। इनमें डामोर और कथौड़ी संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश की राजस्थान सूची में अनुसूचित जनजाति (ST) हैं, जबकि कंजर और सांसी परीक्षा-पुस्तकों के जनजाति अध्याय में पढ़ाए जाते हैं पर राजस्थान की ST सूची में नहीं हैं। डामोर — मुख्यतः डूंगरपुर (सीमलवाड़ा क्षेत्र) व बांसवाड़ा; मुखिया मुखी; पुरुष भी आभूषण पहनते हैं; मेले — छैला बावजी (पंचमहल, गुजरात) व ग्यारस की रेवाड़ी (डूंगरपुर)। कथौड़ी — उदयपुर (कोटड़ा, झाड़ोल, सराड़ा क्षेत्र); मूलतः महाराष्ट्र से आए, खैर वृक्ष से कत्था बनाने का पारंपरिक काम; मुखिया नायक; नृत्य — मावलिया (नवरात्रि, पुरुष) व होली नृत्य (स्त्रियाँ); वाद्य — तारपी, पावरी, थाली। कंजर — हाड़ौती व मेवाड़ अंचल; मुखिया पटेल; नृत्य — चकरी (स्त्रियाँ) व धाकड़ (पुरुष); देवी — चौथ माता, जोगणिया माता; हाकम राजा का प्याला पीकर शपथ। सांसी — मुख्यतः भरतपुर; उत्पत्ति सांसमल से; दो वर्ग बीजा व माला; कुकड़ी की रस्म; आराध्य भाखर बावजी। केंद्र की PVTG सूची में राजस्थान से केवल सहरिया हैं — कथौड़ी नहीं।
संक्षिप्त उत्तर
बिंदु | डामोर | कथौड़ी | कंजर | सांसी |
|---|---|---|---|---|
राजस्थान ST सूची में? | हाँ (डामोर, डामरिया) | हाँ (कथौड़ी, कातकरी आदि) | नहीं | नहीं |
मुख्य क्षेत्र | डूंगरपुर (सीमलवाड़ा), बांसवाड़ा | उदयपुर (कोटड़ा, झाड़ोल, सराड़ा) | कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, टोंक, अजमेर | भरतपुर (सर्वाधिक) |
उत्पत्ति मान्यता | स्वयं को राजपूत वंश से जोड़ते हैं; गुजरात से आगमन | महाराष्ट्र से आगमन | "काननचर" (वन में घूमने वाले) से नाम की व्याख्या | सांसमल नामक पूर्वज से |
मुखिया | मुखी | नायक | पटेल | जाति पंचायत (नाम पर एकरूपता नहीं) |
सबसे पूछा जाने वाला तथ्य | पुरुष भी आभूषण पहनते हैं | कत्था बनाना; मावलिया नृत्य | चकरी नृत्य; हाकम राजा का प्याला | कुकड़ी की रस्म; बीजा-माला |
प्रमुख मेला/देवता | छैला बावजी, ग्यारस की रेवाड़ी | डूंगरदेव, वाघदेव, कंसारी माता | चौथ माता, जोगणिया माता | भाखर बावजी |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
RAS, राजस्थान CET, पटवारी और REET के "राजस्थान की कला एवं संस्कृति" खंड में जनजातियों पर प्रायः 1–3 प्रश्न आते हैं। भील, मीणा, गरासिया और सहरिया पर प्रश्न सबसे अधिक होते हैं, पर विकल्पों में डामोर, कथौड़ी, कंजर, सांसी लगभग हमेशा रहते हैं — "किस जनजाति में पुरुष भी आभूषण पहनते हैं?", "चकरी नृत्य किस समुदाय का है?", "कुकड़ी की रस्म किससे संबंधित है?" जैसे प्रश्न सीधे इसी नोट से बनते हैं। यह नोट इन्हीं चार समुदायों पर केंद्रित है; चार प्रमुख जनजातियों का विस्तृत अध्ययन अलग-अलग नोट्स में है (खंड 3 देखें)।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★☆
RAS प्रारंभिक व मुख्य — जनजातियों की सामाजिक व्यवस्था, विकास योजनाएँ, PVTG
राजस्थान CET (12वीं व स्नातक) — नृत्य, मुखिया, मेले का मिलान
पटवारी, VDO, SI — एक-पंक्ति तथ्य
REET — राजस्थान की संस्कृति (सामान्य अध्ययन)
प्रश्न कैसे आते हैं?
नृत्य — जनजाति का मिलान (मावलिया, चकरी, धाकड़)
मुखिया का नाम (मुखी, नायक, पटेल)
मेला/देवता — समुदाय (छैला बावजी, भाखर बावजी, चौथ माता)
"राजस्थान की एकमात्र PVTG" — सहरिया (कथौड़ी विकल्प भ्रम के लिए)
"निम्न में से कौन राजस्थान की अनुसूचित जनजाति नहीं है?" — कंजर/सांसी/कालबेलिया
3. राजस्थान की जनजातियाँ — पृष्ठभूमि
3.1 जनगणना 2011 के प्रमुख तथ्य
बिंदु | तथ्य (जनगणना 2011) |
|---|---|
राजस्थान की कुल ST जनसंख्या | लगभग 92.4 लाख |
राज्य की जनसंख्या में ST का प्रतिशत | लगभग 13.5% |
सबसे बड़ी जनजाति | मीणा |
दूसरी बड़ी जनजाति | भील |
एकमात्र PVTG (विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) | सहरिया (बारां ज़िला — शाहबाद, किशनगंज क्षेत्र) |
3.2 चार प्रमुख जनजातियाँ — पहले से उपलब्ध नोट्स
भील, मीणा, गरासिया और सहरिया पर हमारे अलग विस्तृत नोट्स हैं, इसलिए इस नोट में उन्हें केवल तुलना के लिए छुआ गया है:
जनजातियों का भौगोलिक वितरण और जनजाति उपयोजना (TSP) क्षेत्र राजस्थान की 4 प्रमुख जनजातियाँ व TSP नोट में है।
4. राजस्थान की अनुसूचित जनजाति सूची (12 प्रविष्टियाँ)
संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत जारी संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 (समय-समय पर संशोधित) में राजस्थान के लिए सामान्यतः 12 प्रविष्टियाँ गिनी जाती हैं। एक प्रविष्टि में कई उप-समूह/पर्याय नाम शामिल होते हैं। ध्यान दें: कुछ पुस्तकें उप-समूहों को अलग गिनकर संख्या भिन्न बताती हैं, और संसद संशोधन द्वारा सूची बदल सकती है — परीक्षा में "12" ही प्रचलित उत्तर है, पर अंतिम संदर्भ के लिए वर्तमान सरकारी अधिसूचना देखें।
क्र. | प्रविष्टि (मुख्य नाम) | शामिल प्रमुख उप-समूह/पर्याय |
|---|---|---|
1 | भील | भील गरासिया, ढोली भील, डूंगरी भील, डूंगरी गरासिया, मेवासी भील, रावल भील, तड़वी भील, भगालिया, भिलाला, पावरा, वसावा, वसावे |
2 | भील मीणा | — |
3 | डामोर | डामरिया |
4 | धानका | तड़वी, तेतरिया, वलवी |
5 | गरासिया | (राजपूत गरासिया को छोड़कर) |
6 | कथौड़ी | कातकरी, ढोर कथौड़ी, ढोर कातकरी, सोन कथौड़ी, सोन कातकरी |
7 | कोकना | कोकनी, कुकना |
8 | कोली ढोर | टोकरे कोली, कोलचा, कोलघा |
9 | मीणा | — |
10 | नायकड़ा | नायका, चोलीवाला नायका, कपाड़िया नायका, मोटा नायका, नाना नायका |
11 | पटेलिया | — |
12 | सहरिया | सेहरिया, सहरिया |
याद रखें: इस सूची में कंजर, सांसी, कालबेलिया, बंजारा, गाड़िया लोहार नहीं हैं। "राजपूत गरासिया" को गरासिया ST से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।
4.1 छोटी अनुसूचित जनजातियाँ — संक्षेप में
जनजाति | संक्षिप्त परिचय |
|---|---|
धानका (तड़वी, तेतरिया, वलवी) | मुख्यतः गुजरात-महाराष्ट्र सीमा क्षेत्र की जनजाति; राजस्थान में दक्षिणी ज़िलों में बहुत कम संख्या |
नायकड़ा / नायका | गुजरात से जुड़ी जनजाति; राजस्थान के दक्षिणी भाग में छोटी आबादी |
पटेलिया | गुजरात-मध्य प्रदेश सीमा से जुड़ा समूह; राजस्थान में दक्षिणी सीमावर्ती क्षेत्र में अल्प संख्या |
कोकना / कोकनी / कुकना | मूलतः महाराष्ट्र-गुजरात (कोंकण-डांग क्षेत्र) की जनजाति; राजस्थान में बहुत कम संख्या |
कोली ढोर / टोकरे कोली | महाराष्ट्र-गुजरात मूल; राजस्थान में नगण्य संख्या |
इनकी ज़िलेवार संख्या व रीति-रिवाजों पर पुस्तकों में एकरूपता नहीं है; परीक्षा में प्रायः केवल "ST सूची में है या नहीं" पूछा जाता है।
5. डामोर जनजाति
5.1 क्षेत्र और उत्पत्ति
बिंदु | विवरण |
|---|---|
मुख्य क्षेत्र | डूंगरपुर ज़िला — विशेषकर सीमलवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र; इसके अतिरिक्त बांसवाड़ा |
सीमा-संबंध | गुजरात से लगा क्षेत्र; गुजरात (पंचमहल आदि) में भी डामोर बसते हैं |
उत्पत्ति मान्यता | डामोर स्वयं को राजपूतों का वंशज मानते हैं; परंपरा के अनुसार इनका आगमन गुजरात की ओर से हुआ |
ST स्थिति | राजस्थान ST सूची की प्रविष्टि "डामोर, डामरिया" |
5.2 बस्ती और सामाजिक संगठन
गाँव का मुखिया "मुखी" कहलाता है; वही सामाजिक विवादों में पंचायत का नेतृत्व करता है।
घर प्रायः खेतों के पास बिखरे रूप में बनते हैं — भील बस्तियों की तरह।
परिवार पितृसत्तात्मक (पितृवंशीय) होता है।
डामोर अन्य जनजातियों की तुलना में वन-उपज पर कम और खेती पर अधिक निर्भर माने जाते हैं; खेती और मज़दूरी मुख्य आजीविका है।
5.3 विवाह और रीति-रिवाज
विवाह में वधू-मूल्य (कन्या पक्ष को दी जाने वाली राशि) की परंपरा पुस्तकों में बताई जाती है।
एक से अधिक विवाह (बहुपत्नी प्रथा) सामाजिक रूप से स्वीकार्य बताया जाता है; नाता प्रथा (पुनर्विवाह) का भी प्रचलन है।
होली डामोर समाज का प्रमुख त्योहार है; कुछ पुस्तकों में होली के अवसर पर "चाडिया" नामक आयोजन का उल्लेख है।
5.4 वेशभूषा और आभूषण — सबसे पूछा जाने वाला तथ्य
डामोर समाज की सबसे विशिष्ट पहचान — पुरुष भी स्त्रियों की तरह आभूषण पहनते हैं। परीक्षा में "राजस्थान की किस जनजाति के पुरुष भी आभूषण पहनने के शौकीन हैं?" — उत्तर डामोर। जनजातीय वस्त्र-आभूषणों की विस्तृत सूची राजस्थान की जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण नोट में है।
5.5 मेले
मेला | स्थान | टिप्पणी |
|---|---|---|
छैला बावजी का मेला | पंचमहल (गुजरात) | डामोर समुदाय का प्रमुख मेला; राजस्थान से बाहर लगता है — यही ट्रैप है |
ग्यारस की रेवाड़ी का मेला | डूंगरपुर | ग्यारस (एकादशी) से जुड़ा मेला; पुस्तकों में इसका समय प्रायः भाद्रपद/सितंबर के आसपास बताया जाता है (माह पर पुस्तकों में मामूली भिन्नता) |
6. कथौड़ी जनजाति
6.1 क्षेत्र और उत्पत्ति
बिंदु | विवरण |
|---|---|
मुख्य क्षेत्र | उदयपुर ज़िला — कोटड़ा, झाड़ोल, सराड़ा पंचायत समिति क्षेत्र; कुछ परिवार डूंगरपुर, बारां आदि में भी बताए जाते हैं |
मूल स्थान | महाराष्ट्र (वहाँ "कातकरी" नाम से प्रसिद्ध) |
राजस्थान आगमन | परंपरागत वर्णन के अनुसार उदयपुर क्षेत्र के कत्था-व्यापारी इन्हें खैर वृक्ष से कत्था बनाने के लिए महाराष्ट्र से लाए |
नाम की व्याख्या | "कथौड़ी"/"कातकरी" शब्द को कत्था (काथ) बनाने के कार्य से जोड़ा जाता है |
ST स्थिति | राजस्थान ST सूची की प्रविष्टि "कथौड़ी, कातकरी, ढोर कथौड़ी, सोन कथौड़ी…" |
6.2 बस्ती, सामाजिक संगठन और आजीविका
मुखिया "नायक" कहलाता है।
घास-फूस और पत्तों से बनी झोपड़ियाँ — पुस्तकों में इन्हें "खोलरा" कहा गया है।
पारंपरिक आजीविका — कत्था बनाना, वन-उपज संग्रह (महुआ, गोंद आदि), लकड़ी काटना, मज़दूरी; वन-कानूनों के बाद कत्था-कार्य घटा और ये आर्थिक रूप से बहुत पिछड़ गए।
महुआ से बनी शराब का प्रचलन पुस्तकों में बताया जाता है।
स्त्रियाँ मराठी ढंग से साड़ी पहनती हैं — पुस्तकों में इसे "फड़का" कहा गया है (महाराष्ट्र मूल का संकेत)।
6.3 देवी-देवता
पुस्तकों में कथौड़ी के देवताओं के रूप में डूंगरदेव (पहाड़ के देवता), वाघदेव (बाघ देवता), गाँवदेव और कंसारी माता (अनाज/फ़सल की देवी) का उल्लेख मिलता है।
6.4 नृत्य और वाद्य
नृत्य/वाद्य | विवरण |
|---|---|
मावलिया नृत्य | नवरात्रि के नौ दिनों में पुरुषों द्वारा ढोलक/वाद्यों की लय पर समूह में गोल घेरा बनाकर किया जाने वाला नृत्य |
होली नृत्य | होली पर स्त्रियों का नृत्य; स्त्रियाँ एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर पिरामिड जैसी आकृति बनाती हैं |
तारपी | सूखी लौकी (तूँबे) से बना सुषिर (फूँक) वाद्य — महाराष्ट्र की वारली/कातकरी परंपरा से जुड़ा |
पावरी | फूँक से बजने वाला वाद्य |
थाली | धातु की थाली — ताल वाद्य के रूप में |
अन्य | ढोलक, घोरिया, टापरा आदि का भी उल्लेख मिलता है |
जनजातीय नृत्यों की पूरी सूची के लिए राजस्थान के जनजातीय मेले, नृत्य एवं त्योहार नोट देखें।
6.5 कथौड़ी और PVTG — सबसे बड़ा भ्रम
बिंदु | स्थिति |
|---|---|
केंद्र सरकार की PVTG सूची (75 समूह) में राजस्थान से | केवल सहरिया |
कथौड़ी/कातकरी PVTG कहाँ? | महाराष्ट्र (कातकरी/कथौड़ी) और गुजरात (कथौड़ी) की PVTG सूची में |
भ्रम का कारण | कथौड़ी आर्थिक रूप से सबसे पिछड़ी जनजातियों में है और राजस्थान सरकार का जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग इनके लिए सहरिया की तरह विशेष योजनाएँ चलाता है; पड़ोसी राज्यों में ये PVTG हैं |
परीक्षा उत्तर | "राजस्थान की एकमात्र आदिम (PVTG) जनजाति" — सहरिया |
7. कंजर समुदाय
7.1 परिचय और ST स्थिति
कंजर परंपरागत रूप से घुमंतू (खानाबदोश) समुदाय रहा है। परीक्षा-पुस्तकें इसे "जनजाति" अध्याय में पढ़ाती हैं, पर कंजर राजस्थान की अनुसूचित जनजाति सूची में नहीं हैं; राज्य में इन्हें प्रायः अनुसूचित जाति सूची में गिना जाता है। औपनिवेशिक काल में आपराधिक जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act), 1871 के अंतर्गत कई घुमंतू समुदायों को "अपराधी जनजाति" घोषित किया गया था; स्वतंत्रता के बाद 1952 में यह अधिनियम निरस्त हुआ और ऐसे समुदाय विमुक्त (Denotified) जनजातियाँ कहलाए। नीचे दिए कुछ रिवाज पुस्तकों के परंपरागत/ऐतिहासिक वर्णन हैं — आज के पूरे समुदाय पर इन्हें लागू मानना उचित नहीं।
7.2 मुख्य तथ्य
बिंदु | विवरण |
|---|---|
क्षेत्र | हाड़ौती व मेवाड़ अंचल — कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, टोंक, अजमेर, उदयपुर |
नाम की व्याख्या | "कंजर" शब्द को संस्कृत "काननचर" (जंगल में घूमने वाला) से जोड़ा जाता है |
मुखिया | पटेल |
आराध्य देवी | चौथ माता (चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर) और जोगणिया माता; हनुमानजी की उपासना का भी उल्लेख |
शपथ | "हाकम राजा का प्याला" पीकर ली गई शपथ के बाद कंजर झूठ नहीं बोलते — पुस्तकों का प्रसिद्ध तथ्य |
पाती माँगना | किसी काम (पुस्तकों के अनुसार चोरी/अभियान) पर निकलने से पहले देवता से आशीर्वाद/अनुमति माँगने की परंपरा |
घर | पुस्तकों के अनुसार घरों में पीछे की ओर भी दरवाज़ा/निकास रखा जाता था |
मृत्यु संस्कार | पुस्तकों में मृतक को गाड़ने और मृतक के मुँह में शराब डालने का उल्लेख |
7.3 नृत्य — कंजर समुदाय की पहचान
नृत्य | कौन करता है | विशेषता |
|---|---|---|
चकरी नृत्य | कंजर स्त्रियाँ (बालिकाएँ/युवतियाँ) | ढप-ढोलक की तेज़ लय पर लगातार चक्कर (फिरकी की तरह) काटना; घेरदार लहँगा फैलकर चक्र जैसा दिखता है; हाड़ौती (कोटा, बूंदी, बारां) में प्रसिद्ध |
धाकड़ नृत्य | कंजर पुरुष | युद्ध-शैली का शौर्य नृत्य; हथियार (ढाल, फरसा आदि) लेकर; पुस्तकों के अनुसार यह झालापाव की बोरा पर विजय की स्मृति में किया जाता है |
लोक नृत्यों की तुलनात्मक तालिका नृत्य–समुदाय–क्षेत्र–अवसर तालिका में देखें।
8. सांसी समुदाय
8.1 परिचय और ST स्थिति
सांसी भी परंपरागत रूप से घुमंतू समुदाय है और औपनिवेशिक काल में "आपराधिक जनजाति" सूची में रखे गए समुदायों में था (बाद में विमुक्त)। परीक्षा-पुस्तकों में इसे जनजाति अध्याय में रखा जाता है, पर सांसी राजस्थान की अनुसूचित जनजाति सूची में नहीं हैं; राज्य में इन्हें प्रायः अनुसूचित जाति सूची में गिना जाता है।
8.2 मुख्य तथ्य
बिंदु | विवरण |
|---|---|
मुख्य क्षेत्र | भरतपुर (सर्वाधिक); अन्य ज़िलों में भी बिखरी आबादी |
उत्पत्ति | सांसमल नामक पूर्वज से मानी जाती है |
दो वर्ग | बीजा (संपन्न वर्ग) और माला (निर्धन वर्ग) |
आराध्य | पहाड़ी देवता भाखर बावजी (भाखर = पहाड़) |
सामाजिक संगठन | जाति पंचायत विवाद निपटाती है; मुखिया के विशिष्ट नाम पर पुस्तकों में एकरूपता नहीं, इसलिए यहाँ नहीं दिया गया |
आजीविका | परंपरागत रूप से घुमंतू जीवन, पशु-व्यापार, मज़दूरी; अब अधिकांश स्थायी बस्तियों में |
8.3 विवाह-संबंधी रिवाज
कुकड़ी की रस्म — विवाह के बाद वधू के चरित्र-परीक्षण की परंपरा (पुस्तकों का प्रसिद्ध तथ्य)। यह परंपरागत रिवाज के रूप में पढ़ाया जाता है; आज ऐसी प्रथाएँ सामाजिक सुधार और क़ानून की दृष्टि से आलोचना के विषय हैं।
पुस्तकों के अनुसार सांसी समाज में विधवा विवाह का प्रचलन नहीं रहा।
सगाई/विवाह के निर्णय में जाति पंचायत की भूमिका प्रमुख रहती है।
9. घुमंतू व विमुक्त समुदाय: कालबेलिया, बंजारा, गाड़िया लोहार
ये समुदाय राजस्थान की संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, पर इनमें से कोई भी राजस्थान की अनुसूचित जनजाति सूची में नहीं है। आरक्षण-श्रेणी (SC/OBC आदि) के लिए राज्य की वर्तमान सरकारी सूची देखें — पुस्तकों में इस पर एकरूपता नहीं है।
समुदाय | परंपरागत पहचान | परीक्षा-तथ्य |
|---|---|---|
कालबेलिया | सपेरे; नाथ सम्प्रदाय के कानीफ़नाथ के अनुयायी माने जाते हैं | कालबेलिया नृत्य — 2010 में UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में; प्रसिद्ध कलाकार गुलाबो; वाद्य पूंगी; इंडोणी, शंकरिया, पणिहारी नृत्य भी |
बंजारा | बैलों के कारवाँ से नमक-अनाज आदि ढोने वाले पारंपरिक घुमंतू व्यापारी | बंजारी स्त्रियों की रंगीन कढ़ाई-काँच युक्त वेशभूषा; कारवाँ को "टांडा" कहा जाता है |
गाड़िया लोहार | बैलगाड़ी पर घूमते हुए लोहे के औज़ार बनाने वाले कारीगर | प्रचलित परंपरा — चित्तौड़ छूटने पर महाराणा प्रताप के समय स्थायी घर न बनाने का प्रण; 1955 में नेहरू द्वारा चित्तौड़ में आयोजित कार्यक्रम का उल्लेख पुस्तकों में मिलता है |
विस्तार के लिए कालबेलिया लोकनृत्य नोट देखें।
10. मास्टर तुलना तालिका
आधार | डामोर | कथौड़ी | कंजर | सांसी |
|---|---|---|---|---|
श्रेणी (राजस्थान) | ST | ST (PVTG नहीं) | ST नहीं (प्रायः SC) | ST नहीं (प्रायः SC) |
क्षेत्र | डूंगरपुर (सीमलवाड़ा), बांसवाड़ा | उदयपुर (कोटड़ा, झाड़ोल, सराड़ा) | हाड़ौती-मेवाड़ | भरतपुर |
मूल/उत्पत्ति | राजपूत वंश की मान्यता; गुजरात से | महाराष्ट्र से | काननचर (शब्द-व्याख्या) | सांसमल |
मुखिया | मुखी | नायक | पटेल | जाति पंचायत |
जीवन-शैली | स्थायी कृषक | वन-आधारित, कत्था-निर्माण | परंपरागत घुमंतू | परंपरागत घुमंतू |
नृत्य | — (होली-उत्सव) | मावलिया, होली नृत्य | चकरी, धाकड़ | — |
देवता/मेला | छैला बावजी (पंचमहल), ग्यारस की रेवाड़ी (डूंगरपुर) | डूंगरदेव, वाघदेव, कंसारी माता | चौथ माता, जोगणिया माता | भाखर बावजी |
विशिष्ट रिवाज | पुरुष भी आभूषण पहनते हैं | स्त्रियों का पिरामिड होली नृत्य; तारपी वाद्य | हाकम राजा का प्याला; पाती माँगना | कुकड़ी की रस्म; बीजा-माला वर्ग |
चारों प्रमुख जनजातियों (भील, मीणा, गरासिया, सहरिया) की ऐसी ही तुलना राजस्थान की जनजातियाँ: संस्कृति तुलना नोट में है।
11. मिलान तालिका: नृत्य / देवता / मुखिया
11.1 मुखिया — समुदाय
मुखिया का नाम | समुदाय |
|---|---|
मुखी | डामोर |
नायक | कथौड़ी |
पटेल | कंजर |
गमेती / पालवी (गाँव स्तर के नाम) | भील (विस्तार भील नोट में) |
कोतवाल | सहरिया (पंचायत का मुखिया) |
11.2 नृत्य — समुदाय
नृत्य | समुदाय | कौन/कब |
|---|---|---|
मावलिया | कथौड़ी | पुरुष, नवरात्रि |
होली नृत्य (पिरामिड) | कथौड़ी | स्त्रियाँ, होली |
चकरी | कंजर | स्त्रियाँ |
धाकड़ | कंजर | पुरुष, शौर्य नृत्य |
वालर | गरासिया | स्त्री-पुरुष |
गवरी | भील | पुरुष, भाद्रपद |
कालबेलिया/इंडोणी/शंकरिया | कालबेलिया | — |
11.3 देवता/मेला — समुदाय
देवता/मेला | समुदाय |
|---|---|
छैला बावजी (पंचमहल, गुजरात) | डामोर |
ग्यारस की रेवाड़ी (डूंगरपुर) | डामोर |
भाखर बावजी | सांसी |
चौथ माता, जोगणिया माता | कंजर |
डूंगरदेव, वाघदेव, कंसारी माता | कथौड़ी |
सीताबाड़ी मेला (बारां) | सहरिया |
बेणेश्वर मेला (डूंगरपुर) | भील (आदिवासियों का कुंभ) |
जनजातीय मेलों की विस्तृत सूची जनजातीय मेले, नृत्य एवं त्योहार नोट में है।
12. सरकारी विकास और जनजाति उपयोजना (TSP)
बिंदु | विवरण |
|---|---|
जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग (TAD) | राजस्थान में जनजातीय विकास का नोडल विभाग; मुख्यालय उदयपुर |
TSP / अनुसूचित क्षेत्र | दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ (पूर्ण) तथा उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, पाली, सिरोही (आंशिक) — 2018 के विस्तार के बाद की स्थिति; विवरण भूगोल नोट में |
डामोर | डूंगरपुर-बांसवाड़ा के अनुसूचित क्षेत्र में होने से TSP योजनाओं के लाभार्थी |
कथौड़ी | उदयपुर के अनुसूचित क्षेत्र में; राज्य सरकार की विशेष योजनाएँ (आवास, पोषण, शिक्षा) — पर केंद्र की PVTG सूची में नहीं |
सहरिया | राजस्थान की एकमात्र PVTG; बारां ज़िले के शाहबाद-किशनगंज क्षेत्र के लिए सहरिया क्षेत्र विकास कार्यक्रम |
कंजर, सांसी, घुमंतू समुदाय | ST योजनाओं के बजाय SC/विमुक्त-घुमंतू समुदायों से संबंधित योजनाओं के दायरे में |
नोट: अनुसूचित क्षेत्र की ज़िलेवार सीमा अधिसूचना पर निर्भर है; ज़िलों के पुनर्गठन के बाद नए ज़िलों के हिस्से भी इसमें आते हैं। परीक्षा में "पूर्णतः अनुसूचित क्षेत्र वाले ज़िले" वाले प्रश्न का उत्तर देते समय प्रश्न का संदर्भ-वर्ष देखें।
13. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: कंजर और सांसी ST नहीं हैं
पुस्तकों के जनजाति अध्याय में होने के बावजूद कंजर व सांसी राजस्थान की ST सूची में नहीं हैं। "निम्न में से कौन राजस्थान की अनुसूचित जनजाति नहीं है?" — विकल्प में डामोर/कथौड़ी/पटेलिया हों तो उत्तर कंजर या सांसी।
Trap 2: PVTG — सहरिया, कथौड़ी नहीं
राजस्थान की एकमात्र PVTG सहरिया। कथौड़ी महाराष्ट्र व गुजरात में PVTG हैं, राजस्थान में नहीं।
Trap 3: छैला बावजी का मेला राजस्थान में नहीं
डामोरों का छैला बावजी मेला पंचमहल (गुजरात) में भरता है; राजस्थान में डामोरों का मेला ग्यारस की रेवाड़ी (डूंगरपुर)।
Trap 4: भाखर बावजी बनाम छैला बावजी
भाखर बावजी — सांसी; छैला बावजी — डामोर। दोनों "बावजी" होने से विकल्पों में उलटे दिए जाते हैं।
Trap 5: चकरी स्त्रियाँ, धाकड़ पुरुष
कंजर समुदाय में चकरी स्त्रियों का और धाकड़ पुरुषों का नृत्य है। कथौड़ी में भी उलटा — मावलिया पुरुष, होली नृत्य स्त्रियाँ।
Trap 6: मुखिया-नाम — मुखी, नायक, पटेल
डामोर — मुखी; कथौड़ी — नायक; कंजर — पटेल। "नायक" को "नायकड़ा जनजाति" से न मिलाएँ — नायकड़ा अलग ST प्रविष्टि है।
Trap 7: कथौड़ी का मूल महाराष्ट्र, डामोर का गुजरात
दोनों बाहर से आए माने जाते हैं, पर कथौड़ी महाराष्ट्र से (कत्था-कार्य हेतु) और डामोर परंपरा के अनुसार गुजरात की ओर से।
Trap 8: कालबेलिया — UNESCO नृत्य, पर ST नहीं
कालबेलिया नृत्य 2010 में UNESCO सूची में आया; समुदाय राजस्थान की ST सूची में नहीं है।
Trap 9: "12 जनजातियाँ" = 12 प्रविष्टियाँ
12 संख्या प्रविष्टियों की है; प्रत्येक प्रविष्टि में कई उप-समूह हैं। "भील मीणा" और "मीणा" दो अलग प्रविष्टियाँ हैं।
14. Most-Asked रिवीज़न तालिका (20 तथ्य)
क्र. | प्रश्न-बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
1 | राजस्थान ST सूची की प्रविष्टियाँ (प्रचलित) | 12 |
2 | ST सूची का संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 342; ST आदेश 1950 |
3 | एकमात्र PVTG | सहरिया |
4 | डामोर का मुख्य क्षेत्र | डूंगरपुर — सीमलवाड़ा |
5 | डामोर मुखिया | मुखी |
6 | पुरुष भी आभूषण पहनते हैं | डामोर |
7 | छैला बावजी मेला | पंचमहल (गुजरात) — डामोर |
8 | ग्यारस की रेवाड़ी मेला | डूंगरपुर — डामोर |
9 | कथौड़ी का मुख्य ज़िला | उदयपुर (कोटड़ा, झाड़ोल, सराड़ा) |
10 | कथौड़ी का मूल राज्य | महाराष्ट्र |
11 | कथौड़ी का पारंपरिक कार्य | खैर से कत्था बनाना |
12 | कथौड़ी मुखिया | नायक |
13 | मावलिया नृत्य | कथौड़ी पुरुष, नवरात्रि |
14 | पिरामिड बनाकर होली नृत्य | कथौड़ी स्त्रियाँ |
15 | तारपी वाद्य | कथौड़ी (लौकी से बना सुषिर वाद्य) |
16 | कंजर मुखिया | पटेल |
17 | हाकम राजा का प्याला | कंजर (शपथ) |
18 | चकरी नृत्य | कंजर स्त्रियाँ (हाड़ौती) |
19 | धाकड़ नृत्य | कंजर पुरुष — झालापाव की बोरा पर विजय |
20 | कुकड़ी की रस्म / भाखर बावजी | सांसी |
15. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
नीचे दिए नमूना प्रश्न इस नोट के लिए बनाए गए अभ्यास-उदाहरण हैं, किसी विशेष पिछले पेपर के प्रश्न नहीं।
सुमेलन: सूची-I — मावलिया, चकरी, कुकड़ी की रस्म, छैला बावजी; सूची-II — कथौड़ी, कंजर, सांसी, डामोर। संकेत: क्रम सीधा है।
कथन-आधारित: "1. कथौड़ी राजस्थान की PVTG है। 2. डामोर राजस्थान की अनुसूचित जनजाति है।" — केवल कथन 2 सही।
"सही नहीं है": "कंजर — मुखिया पटेल; डामोर — मुखिया मुखी; कथौड़ी — मुखिया कोतवाल" — तीसरा गलत (कथौड़ी — नायक)।
अभिकथन-कारण: A — कथौड़ी उदयपुर क्षेत्र में बसे हैं। R — इन्हें कत्था बनाने के लिए महाराष्ट्र से लाया गया था। — A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या (परंपरागत वर्णन के अनुसार)।
एक-पंक्ति: "किस समुदाय के लोग हाकम राजा का प्याला पीकर शपथ लेते हैं?" — कंजर।
16. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. मुखिया सूत्र — "डा-मु, क-ना, कं-प": डामोर-मुखी, कथौड़ी-नायक, कंजर-पटेल।
2. "कथौड़ी — कत्था, कोटड़ा, कोंकण (महाराष्ट्र)": तीनों "क" — काम (कत्था), क्षेत्र (कोटड़ा, उदयपुर), मूल (महाराष्ट्र का कोंकण क्षेत्र)।
3. "छैला डामोर गुजरात में, भाखर सांसी भरतपुर में": छैला बावजी — डामोर (पंचमहल); भाखर बावजी — सांसी (भरतपुर — दोनों "भ")।
4. "चकरी चक्कर, धाकड़ धाक": चकरी — स्त्रियाँ चक्कर लगाती हैं; धाकड़ — पुरुषों का शौर्य (धाक)। दोनों कंजर।
5. "सांसी के बीजा-माला": बीजा = बड़े (संपन्न), माला = मामूली (निर्धन)।
6. "स से सहरिया, स से सिर्फ़ एक": राजस्थान में PVTG केवल एक — सहरिया; कथौड़ी को राज्य की विशेष योजनाएँ मिलती हैं, PVTG दर्जा नहीं।
17. कथन अभ्यास
डामोर जनजाति के पुरुष भी आभूषण पहनते हैं। — सही।
छैला बावजी का मेला डूंगरपुर में भरता है। — गलत (पंचमहल, गुजरात)।
कथौड़ी जनजाति मूलतः महाराष्ट्र से आई। — सही।
कथौड़ी राजस्थान की एकमात्र PVTG है। — गलत (सहरिया)।
मावलिया नृत्य कथौड़ी स्त्रियाँ होली पर करती हैं। — गलत (पुरुष, नवरात्रि)।
चकरी नृत्य कंजर स्त्रियों का नृत्य है। — सही।
कंजर राजस्थान की अनुसूचित जनजाति सूची में हैं। — गलत।
कालबेलिया नृत्य 2010 में UNESCO सूची में शामिल हुआ। — सही।
18. संबंधित नोट्स
राजस्थान की जनजातियाँ: संस्कृति, नृत्य, वेशभूषा एवं त्योहार तुलना
भील जनजाति की संस्कृति · मीणा जनजाति · गरासिया जनजाति · सहरिया जनजाति
19. एक दिन पहले — 12 रेखाएँ
राजस्थान ST सूची — प्रचलित 12 प्रविष्टियाँ (अनुच्छेद 342, ST आदेश 1950)
डामोर, कथौड़ी, धानका, नायकड़ा, पटेलिया, कोकना, कोली ढोर — ST; कंजर, सांसी, कालबेलिया, बंजारा, गाड़िया लोहार — ST नहीं
एकमात्र PVTG — सहरिया; कथौड़ी PVTG नहीं (महाराष्ट्र-गुजरात में है)
डामोर — डूंगरपुर (सीमलवाड़ा), बांसवाड़ा; राजपूत वंश की मान्यता; मुखी
डामोर पुरुष भी आभूषण पहनते हैं
डामोर मेले — छैला बावजी (पंचमहल, गुजरात), ग्यारस की रेवाड़ी (डूंगरपुर)
कथौड़ी — उदयपुर (कोटड़ा, झाड़ोल, सराड़ा); महाराष्ट्र से; कत्था; नायक; खोलरा
कथौड़ी नृत्य — मावलिया (पुरुष, नवरात्रि), होली (स्त्रियाँ, पिरामिड); वाद्य — तारपी, पावरी, थाली
कंजर — काननचर; पटेल; चौथ माता, जोगणिया माता; हाकम राजा का प्याला; पाती माँगना
कंजर नृत्य — चकरी (स्त्रियाँ), धाकड़ (पुरुष)
सांसी — भरतपुर; सांसमल; बीजा-माला; कुकड़ी की रस्म; भाखर बावजी
Criminal Tribes Act 1871 → 1952 में निरस्त → विमुक्त (Denotified) समुदाय
20. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पेज के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। गलतियाँ होने पर खंड 10 (मास्टर तुलना तालिका) और खंड 11 (मिलान तालिकाएँ) दोहराएँ; "ST है या नहीं" वाले प्रश्नों के लिए खंड 4 की सूची पक्की करें।
21. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
राजस्थान की जनजातीय संस्कृति केवल भील-मीणा तक सीमित नहीं है। डामोर और कथौड़ी जैसी छोटी अनुसूचित जनजातियाँ दक्षिणी राजस्थान की बहुरंगी परंपरा का हिस्सा हैं — एक राजपूत-वंश की मान्यता वाला कृषक समाज, दूसरा महाराष्ट्र से आया वन-आधारित समुदाय। कंजर और सांसी जैसे घुमंतू समुदाय परीक्षा-पुस्तकों में जनजाति अध्याय में पढ़ाए जाते हैं, पर उनकी संवैधानिक श्रेणी अलग है — यही अंतर परीक्षा में सबसे अधिक भ्रम पैदा करता है। तैयारी के लिए तीन चीज़ें पक्की करें: (1) कौन ST है और कौन नहीं, (2) मुखिया-नृत्य-देवता का मिलान, (3) PVTG केवल सहरिया।
डामोर — डूंगरपुर, मुखी, पुरुष-आभूषण, छैला बावजी | कथौड़ी — उदयपुर, महाराष्ट्र, कत्था, नायक, मावलिया | कंजर — पटेल, चकरी-धाकड़, चौथ माता | सांसी — भरतपुर, सांसमल, बीजा-माला, कुकड़ी | PVTG — केवल सहरिया
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“राजस्थान की अन्य जनजातियाँ: डामोर, कथौड़ी, कंजर, सांसी — RAS/CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
डामोर जनजाति मुख्यतः डूंगरपुर ज़िले, विशेषकर सीमलवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र में, तथा बांसवाड़ा में निवास करती है। यह गुजरात से लगा क्षेत्र है।
डामोर जनजाति में पुरुष भी स्त्रियों की तरह आभूषण पहनते हैं। इनका मुखिया 'मुखी' कहलाता है और ये स्वयं को राजपूतों का वंशज मानते हैं।
डामोरों का प्रमुख मेला छैला बावजी का मेला है, जो गुजरात के पंचमहल में भरता है। राजस्थान में डूंगरपुर का ग्यारस की रेवाड़ी का मेला इनसे जुड़ा प्रमुख मेला है।
परंपरागत वर्णन के अनुसार कथौड़ी मूलतः महाराष्ट्र से आए; उदयपुर क्षेत्र के कत्था-व्यापारी इन्हें खैर वृक्ष से कत्था बनाने के लिए लाए। आज ये मुख्यतः उदयपुर के कोटड़ा, झाड़ोल और सराड़ा क्षेत्र में बसे हैं।
नहीं। केंद्र की PVTG सूची में राजस्थान से केवल सहरिया शामिल हैं। कथौड़ी/कातकरी महाराष्ट्र और गुजरात में PVTG हैं; राजस्थान सरकार कथौड़ी के लिए विशेष योजनाएँ चलाती है, इसी से भ्रम होता है।
मावलिया नृत्य कथौड़ी जनजाति के पुरुष नवरात्रि के नौ दिनों में समूह में गोल घेरा बनाकर करते हैं। कथौड़ी स्त्रियाँ होली पर पिरामिड जैसी आकृति बनाकर होली नृत्य करती हैं।
दोनों कंजर समुदाय के नृत्य हैं। चकरी नृत्य कंजर स्त्रियाँ तेज़ लय पर लगातार चक्कर लगाते हुए करती हैं, जबकि धाकड़ नृत्य कंजर पुरुषों का शौर्य नृत्य है जिसे पुस्तकें झालापाव की बोरा पर विजय से जोड़ती हैं।
नहीं। परीक्षा-पुस्तकें इन्हें जनजाति अध्याय में पढ़ाती हैं, पर ये संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश की राजस्थान सूची में नहीं हैं; राज्य में इन्हें प्रायः अनुसूचित जाति सूची में गिना जाता है। वर्तमान स्थिति के लिए सरकारी सूची देखें।
सांसी मुख्यतः भरतपुर में बसे हैं, इनकी उत्पत्ति सांसमल से मानी जाती है, ये बीजा (संपन्न) और माला (निर्धन) दो वर्गों में बँटे हैं, भाखर बावजी इनके आराध्य हैं और विवाह के बाद कुकड़ी की रस्म इनसे जुड़ी है।
संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में राजस्थान के लिए सामान्यतः 12 प्रविष्टियाँ गिनी जाती हैं — भील, भील मीणा, डामोर, धानका, गरासिया, कथौड़ी, कोकना, कोली ढोर, मीणा, नायकड़ा, पटेलिया और सहरिया। उप-समूहों को अलग गिनने पर कुछ पुस्तकों में संख्या भिन्न मिलती है।
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