राजस्थान के जनजातीय मेले, नृत्य एवं त्योहार
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स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।
राजस्थान के जनजातीय मेले, नृत्य एवं त्योहार
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⚡ Quick Answer: राजस्थान के प्रमुख जनजातीय मेले — बेणेश्वर (डूंगरपुर, माघ पूर्णिमा — ‘आदिवासियों का कुंभ’), सीताबाड़ी (बारां, ज्येष्ठ — ‘सहरियों का कुंभ’), मनखां रो मेलो (सियावा, सिरोही — गरासिया), घोटिया अंबा (बांसवाड़ा, चैत्र अमावस्या — भील), गौतमेश्वर (अरणोद, प्रतापगढ़, वैशाख पूर्णिमा — मीणा), मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा — गोविंद गुरु), कोटेश्वर व चेतर-विचितर (गरासिया-भील)। प्रमुख नृत्य — भील: गवरी, घूमर, गैर, हाथीमना, युद्ध, द्विचक्री; गरासिया: वालर, मोरिया, गौर, कूद; सहरिया: सहरिया स्वांग। सबसे बड़ा त्योहार — होली; मेवाड़ के भीलों का 40 दिन का अनुष्ठान — गवरी।
1. जनजातीय मेले, नृत्य और त्योहार — क्यों विशेष?
जनजातीय समाज में मेला केवल पूजा या खरीदारी का अवसर नहीं — यह जीवनसाथी चुनने, रिश्ते तय करने, विवाद सुलझाने, नृत्य-गीत और सामुदायिक एकता का मंच है। “राजस्थान के जनजातीय मेले कौन-से हैं” और “किस जनजाति का कौन-सा नृत्य है” — ये प्रश्न जनजाति अध्याय में सबसे अधिक पूछे जाते हैं। सामान्य मेलों की मास-वार सूची के लिए राजस्थान के मेले — महीना, स्थान, देवता, विशेषता देखें; यह लेख केवल जनजातीय दृष्टि से है।
2. प्रमुख जनजातीय मेले — मास्टर तालिका
| मेला | स्थान | समय | जनजाति | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| बेणेश्वर | नवाटापरा, डूंगरपुर (सोम-माही-जाखम संगम) | माघ पूर्णिमा | भील व अन्य | ‘आदिवासियों का कुंभ’; मावजी से संबंध |
| सीताबाड़ी | केलवाड़ा, शाहबाद (बारां) | ज्येष्ठ | सहरिया | ‘सहरियों का कुंभ’; सात कुंड |
| मनखां रो मेलो (सियावा) | आबूरोड (सिरोही) | वैशाख (शुक्ल पक्ष) | गरासिया | सबसे बड़ा गरासिया मेला; जीवनसाथी-चयन |
| घोटिया अंबा | बांसवाड़ा | चैत्र अमावस्या | भील | भीलों का प्रमुख मेला |
| गौतमेश्वर | अरणोद (प्रतापगढ़) | वैशाख पूर्णिमा | मीणा | भूरिया बाबा |
| मानगढ़ धाम | बांसवाड़ा | मार्गशीर्ष पूर्णिमा | भील | गोविंद गुरु; 1913 का बलिदान |
| सीतामाता | सीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़) | ज्येष्ठ अमावस्या | भील-मीणा | वन-क्षेत्र का मेला |
| ऋषभदेव (केसरियाजी) | धुलेव (उदयपुर) | चैत्र कृष्ण 8 | भील | ‘काला जी’ की आस्था |
| कोटेश्वर | अंबाजी (गुजरात सीमा) | — | गरासिया-भील | सीमावर्ती जनजातीय मेला |
| चेतर-विचितर | देवला क्षेत्र | — | गरासिया-भील | बड़े जनजातीय मेलों में एक |
| गणगौर मेला | गोगुंदा (उदयपुर) | चैत्र | गरासिया | गौर नृत्य |
विस्तृत लेख: बेणेश्वर मेला | सहरिया जनजाति की संस्कृति | गरासिया जनजाति की संस्कृति
ट्रिक: “माघ-बेणेश्वर, ज्येष्ठ-सीताबाड़ी, वैशाख-मनखां व गौतमेश्वर, चैत्र-घोटिया अंबा”।
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‘सहरियों का कुंभ’, ‘आदिवासियों का कुंभ’, ‘वालर किसका’, ‘हाथीमना कब’ — ऐसे प्रश्न पटवारी, VDO, पुलिस, CET व RAS में बार-बार आते हैं। मॉक टेस्ट दें:
- राजस्थान पटवारी 2026 टेस्ट सीरीज़
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3. जनजाति-वार नृत्य तालिका
| जनजाति/समुदाय | नृत्य | अवसर/विशेषता |
|---|---|---|
| भील | गवरी (राई) | रक्षाबंधन के अगले दिन से 40 दिन; शिव-भस्मासुर कथा; केवल पुरुष |
| भील | घूमर | स्त्रियों का सामूहिक घेरदार नृत्य |
| भील | गैर | होली पर पुरुषों का डंडा-नृत्य |
| भील | हाथीमना | विवाह पर पुरुषों का नृत्य |
| भील | युद्ध नृत्य | हथियारों के साथ ओजपूर्ण नृत्य |
| भील | द्विचक्री | विवाह पर स्त्री-पुरुषों के दो घेरे |
| गरासिया | वालर | ‘गरासियों का घूमर’; बिना वाद्य; दो घेरे |
| गरासिया | मोरिया | विवाह पर पुरुषों का नृत्य |
| गरासिया | गौर | गणगौर पर |
| गरासिया | कूद | स्त्री-पुरुषों का सामूहिक नृत्य |
| सहरिया | सहरिया स्वांग | होली के महीने में टोलियों द्वारा गाँव-गाँव; ढोल, नगाड़ी, मटकी |
| कालबेलिया (घुमंतू) | कालबेलिया, इंडोणी, शंकरिया, पणिहारी | बीन-पूँगी; 2010 से UNESCO सूची में कालबेलिया नृत्य-गीत |
विस्तार: गवरी लोकनाट्य | वालर नृत्य | कालबेलिया नृत्य | लोकनृत्यों की तालिका: नृत्य–समुदाय–क्षेत्र–अवसर
4. गवरी — जनजातीय अनुष्ठान का सबसे बड़ा उदाहरण
- कौन: मेवाड़ (उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा) के भील पुरुष।
- कब: रक्षाबंधन के अगले दिन (भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा) से 40 दिन।
- क्या: शिव-पार्वती व भस्मासुर की कथा के साथ सामाजिक प्रसंगों का नृत्य-नाट्य; गाँव-गाँव घूमकर प्रस्तुति।
- पात्र: राईबुडिया (शिव), राई (पार्वती), कुटकुड़िया (सूत्रधार), पाट भोपा।
- वाद्य: मांदल, थाली।
- नियम: 40 दिन तक कलाकार संयम का पालन करते हैं; राजस्थान का सबसे प्राचीन लोकनाट्य माना जाता है।
5. जनजातीय त्योहार
| त्योहार | समय | जनजातीय विशेषता |
|---|---|---|
| होली | फाल्गुन | भील-गरासियों का सबसे बड़ा त्योहार; गैर नृत्य; सहरिया स्वांग; मेलों में जीवनसाथी-चयन |
| गवरी | भाद्रपद (40 दिन) | भीलों का धार्मिक अनुष्ठान |
| गणगौर | चैत्र | गरासिया — गौर नृत्य; गोगुंदा मेला |
| दीपावली | कार्तिक | पशु-पूजा, लोकगीत |
| आखा तीज | वैशाख | कृषि-वर्ष का आरंभ; विवाह के शुभ दिन |
| नक्की झील अस्थि-विसर्जन | वैशाख | गरासिया — माउंट आबू; बाद में गीत-नृत्य |
6. जनजातीय मेलों का सामाजिक महत्व
- जीवनसाथी-चयन: गरासिया (मनखां रो मेलो) व भील मेलों में युवक-युवती स्वयं साथी चुनते हैं।
- सामुदायिक न्याय: मेलों में पंचायतें विवाद सुलझाती हैं।
- आर्थिक लेन-देन: पशु, अनाज, आभूषण, घरेलू सामान का क्रय-विक्रय।
- सांस्कृतिक निरंतरता: नृत्य, गीत, वेशभूषा, गोदना — परंपराओं का अगली पीढ़ी तक हस्तांतरण।
- धार्मिक-ऐतिहासिक स्मृति: मानगढ़ जैसे स्थल जनजातीय बलिदान व चेतना के प्रतीक।
जनजातीय उत्सव-कैलेंडर (मास-क्रम)
| मास | जनजातीय मेले/उत्सव |
|---|---|
| चैत्र | घोटिया अंबा (अमावस्या), ऋषभदेव (कृष्ण 8), गणगौर (गोगुंदा) |
| वैशाख | गौतमेश्वर (पूर्णिमा), मनखां रो मेलो (शुक्ल पक्ष), नक्की झील अस्थि-विसर्जन |
| ज्येष्ठ | सीताबाड़ी, सीतामाता (अमावस्या) |
| भाद्रपद | गवरी आरंभ (रक्षाबंधन के अगले दिन से 40 दिन) |
| मार्गशीर्ष | मानगढ़ धाम (पूर्णिमा) |
| माघ | बेणेश्वर (पूर्णिमा) |
| फाल्गुन | होली — गैर, सहरिया स्वांग |
📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — यह विषय परीक्षा में कैसे पूछा जाता है?
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण | हल करने की कुंजी |
|---|---|---|
| मेला–जनजाति | गौतमेश्वर किस जनजाति का? | मीणा |
| उपनाम | दोनों ‘कुंभ’ कौन-से? | बेणेश्वर (आदिवासी), सीताबाड़ी (सहरिया) |
| नृत्य–जनजाति | मोरिया/हाथीमना? | गरासिया / भील |
| तिथि | घोटिया अंबा कब? | चैत्र अमावस्या |
याद रखने का सूत्र
- दो कुंभ: बेणेश्वर (आदिवासियों का, डूंगरपुर, माघ) और सीताबाड़ी (सहरियों का, बारां, ज्येष्ठ)।
- दो सीता: सीताबाड़ी (बारां) और सीतामाता (प्रतापगढ़)।
- दो विवाह-नृत्य: हाथीमना (भील) और मोरिया (गरासिया)।
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राजस्थान के प्रमुख जनजातीय मेले कौन-से हैं?
बेणेश्वर (डूंगरपुर), सीताबाड़ी (बारां), मनखां रो मेलो (सिरोही), घोटिया अंबा (बांसवाड़ा), गौतमेश्वर (प्रतापगढ़), मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा), कोटेश्वर और चेतर-विचितर राजस्थान के प्रमुख जनजातीय मेले हैं।
‘आदिवासियों का कुंभ’ और ‘सहरियों का कुंभ’ में क्या अंतर है?
‘आदिवासियों का कुंभ’ डूंगरपुर का बेणेश्वर मेला (माघ पूर्णिमा) है, जबकि ‘सहरियों का कुंभ’ बारां का सीताबाड़ी मेला (ज्येष्ठ) है।
भीलों के प्रमुख नृत्य कौन-से हैं?
गवरी, घूमर, गैर, हाथीमना, युद्ध नृत्य और द्विचक्री भीलों के प्रमुख नृत्य हैं।
गरासियों के प्रमुख नृत्य कौन-से हैं?
वालर, मोरिया, गौर, गैर और कूद गरासियों के प्रमुख नृत्य हैं।
घोटिया अंबा मेला कब और कहाँ लगता है?
घोटिया अंबा मेला बांसवाड़ा जिले में चैत्र अमावस्या को लगता है और यह भीलों का प्रमुख मेला है।
📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)
- ‘आदिवासियों का कुंभ’ — बेणेश्वर (माघ पूर्णिमा)
- ‘सहरियों का कुंभ’ — सीताबाड़ी (ज्येष्ठ)
- गरासियों का सबसे बड़ा मेला — मनखां रो मेलो
- घोटिया अंबा — बांसवाड़ा, चैत्र अमावस्या
- गौतमेश्वर — अरणोद, वैशाख पूर्णिमा (मीणा)
- मानगढ़ धाम — गोविंद गुरु
- सीतामाता मेला — प्रतापगढ़, ज्येष्ठ अमावस्या
- गवरी — भील, 40 दिन
- गवरी में शिव का पात्र — राईबुडिया
- भीलों का विवाह-नृत्य — हाथीमना
- गरासियों का घूमर — वालर
- गरासियों का विवाह-नृत्य — मोरिया
- सहरियों का होली प्रदर्शन — सहरिया स्वांग
- गोगुंदा का मेला — गणगौर (गरासिया)
- जनजातियों का सबसे बड़ा त्योहार — होली
✅ मुख्य बिंदु (Key Points)
- मेले: बेणेश्वर, सीताबाड़ी, मनखां रो मेलो, घोटिया अंबा, गौतमेश्वर, मानगढ़, सीतामाता, ऋषभदेव, कोटेश्वर, चेतर-विचितर।
- नृत्य: भील — गवरी, घूमर, गैर, हाथीमना, युद्ध, द्विचक्री; गरासिया — वालर, मोरिया, गौर, कूद; सहरिया — स्वांग।
- त्योहार: होली (सबसे बड़ा), गवरी, गणगौर, आखा तीज।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- दो ‘कुंभ’ — बेणेश्वर (आदिवासी, डूंगरपुर) और सीताबाड़ी (सहरिया, बारां) — उल्टा न करें।
- सीताबाड़ी (बारां) ≠ सीतामाता (प्रतापगढ़)।
- हाथीमना (भील) और मोरिया (गरासिया) — दोनों विवाह-नृत्य, जनजाति अलग।
🧠 मेमोरी ट्रिक
“भील के गवरी-गैर-हाथी, गरासिया के वालर-मोरिया-गौर, सहरिया का स्वांग”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
जनजातीय मेले-नृत्य पर प्रश्न लगभग हमेशा ‘मिलान’ के रूप में आते हैं — मेला–स्थान–जनजाति या नृत्य–जनजाति। दोनों ‘कुंभ’ और दोनों ‘सीता’ (सीताबाड़ी-सीतामाता) सबसे बड़े भ्रम हैं; इन्हें अलग से याद करें।
✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़
जनजातीय मेले, नृत्य एवं त्योहार व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:
- राजस्थान के प्रमुख मेले — अभ्यास क्विज़
- राजस्थान लोकनृत्य अभ्यास क्विज़
- राजस्थान लोककला एवं संस्कृति अभ्यास
- राजस्थान पटवारी 2026 टेस्ट सीरीज़
- राजस्थान VDO फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- राजस्थान पुलिस कांस्टेबल 2026 टेस्ट सीरीज़
- Rajasthan CET (स्नातक) फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
पूरी कला एवं संस्कृति इकाई के नोट्स: राजस्थान कला एवं संस्कृति — सभी नोट्स | परीक्षा में आने वाले नए सांस्कृतिक तथ्य (पुरस्कार, महोत्सव, GI टैग): करेंट अफेयर्स
📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)
- राजस्थान की जनजातीय संस्कृति — Master Guide
- भील जनजाति की संस्कृति
- गरासिया जनजाति की संस्कृति
- सहरिया जनजाति की संस्कृति
- मीणा जनजाति की संस्कृति
- जनजातियों की संस्कृति — तुलना
- बेणेश्वर मेला
- गवरी लोकनाट्य
- राजस्थान के मेले — महीना, स्थान, देवता, विशेषता
📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- RajRAS — ‘Rajasthan Tribes’ (भील — गवरी, घूमर, हाथीमना, युद्ध, द्विचक्री; गरासिया — वालर, गैर, मोरिया, गौर; मेले)।
- भारतकोश (bharatdiscovery.org) — सीताबाड़ी मेला; गरासिया जनजाति (सियावा/मनखां रो मेलो)।
- NVLI (भारत सरकार) — सहरिया स्वांग।
- UNESCO — Kalbelia folk songs and dances of Rajasthan (2010)।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. घोटिया अंबा मेला किस जिले में लगता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. ‘सहरियों का कुंभ’ है —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. हाथीमना नृत्य किस जनजाति का है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. मनखां रो मेलो किस जिले में लगता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम पर माघ पूर्णिमा को लगने वाले मेले को ‘आदिवासियों का कुंभ’ कहते हैं।
बारां जिले का सीताबाड़ी मेला सहरियों का सबसे बड़ा मेला है, जिसे ‘सहरियों का कुंभ’ कहते हैं।
प्रतापगढ़ के अरणोद में वैशाख पूर्णिमा को लगने वाला गौतमेश्वर मेला मीणा जनजाति से जुड़ा है।
मोरिया गरासिया पुरुषों द्वारा विवाह के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य है।
जनजातीय मेले जीवनसाथी-चयन, पंचायत द्वारा विवाद-निपटारे, व्यापार और नृत्य-गीत की परंपराओं के संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
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