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राजस्थान के जनजातीय मेले, नृत्य एवं त्योहार

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
3 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 3 अक्टूबर 2026
8 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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राजस्थान के जनजातीय मेले, नृत्य एवं त्योहार

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⚡ Quick Answer: राजस्थान के प्रमुख जनजातीय मेले — बेणेश्वर (डूंगरपुर, माघ पूर्णिमा — ‘आदिवासियों का कुंभ’), सीताबाड़ी (बारां, ज्येष्ठ — ‘सहरियों का कुंभ’), मनखां रो मेलो (सियावा, सिरोही — गरासिया), घोटिया अंबा (बांसवाड़ा, चैत्र अमावस्या — भील), गौतमेश्वर (अरणोद, प्रतापगढ़, वैशाख पूर्णिमा — मीणा), मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा — गोविंद गुरु), कोटेश्वर व चेतर-विचितर (गरासिया-भील)। प्रमुख नृत्य — भील: गवरी, घूमर, गैर, हाथीमना, युद्ध, द्विचक्री; गरासिया: वालर, मोरिया, गौर, कूद; सहरिया: सहरिया स्वांग। सबसे बड़ा त्योहार — होली; मेवाड़ के भीलों का 40 दिन का अनुष्ठान — गवरी।

1. जनजातीय मेले, नृत्य और त्योहार — क्यों विशेष?

जनजातीय समाज में मेला केवल पूजा या खरीदारी का अवसर नहीं — यह जीवनसाथी चुनने, रिश्ते तय करने, विवाद सुलझाने, नृत्य-गीत और सामुदायिक एकता का मंच है। “राजस्थान के जनजातीय मेले कौन-से हैं” और “किस जनजाति का कौन-सा नृत्य है” — ये प्रश्न जनजाति अध्याय में सबसे अधिक पूछे जाते हैं। सामान्य मेलों की मास-वार सूची के लिए राजस्थान के मेले — महीना, स्थान, देवता, विशेषता देखें; यह लेख केवल जनजातीय दृष्टि से है।

2. प्रमुख जनजातीय मेले — मास्टर तालिका

मेलास्थानसमयजनजातिविशेषता
बेणेश्वरनवाटापरा, डूंगरपुर (सोम-माही-जाखम संगम)माघ पूर्णिमाभील व अन्य‘आदिवासियों का कुंभ’; मावजी से संबंध
सीताबाड़ीकेलवाड़ा, शाहबाद (बारां)ज्येष्ठसहरिया‘सहरियों का कुंभ’; सात कुंड
मनखां रो मेलो (सियावा)आबूरोड (सिरोही)वैशाख (शुक्ल पक्ष)गरासियासबसे बड़ा गरासिया मेला; जीवनसाथी-चयन
घोटिया अंबाबांसवाड़ाचैत्र अमावस्याभीलभीलों का प्रमुख मेला
गौतमेश्वरअरणोद (प्रतापगढ़)वैशाख पूर्णिमामीणाभूरिया बाबा
मानगढ़ धामबांसवाड़ामार्गशीर्ष पूर्णिमाभीलगोविंद गुरु; 1913 का बलिदान
सीतामातासीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़)ज्येष्ठ अमावस्याभील-मीणावन-क्षेत्र का मेला
ऋषभदेव (केसरियाजी)धुलेव (उदयपुर)चैत्र कृष्ण 8भील‘काला जी’ की आस्था
कोटेश्वरअंबाजी (गुजरात सीमा)—गरासिया-भीलसीमावर्ती जनजातीय मेला
चेतर-विचितरदेवला क्षेत्र—गरासिया-भीलबड़े जनजातीय मेलों में एक
गणगौर मेलागोगुंदा (उदयपुर)चैत्रगरासियागौर नृत्य

विस्तृत लेख: बेणेश्वर मेला | सहरिया जनजाति की संस्कृति | गरासिया जनजाति की संस्कृति

ट्रिक: “माघ-बेणेश्वर, ज्येष्ठ-सीताबाड़ी, वैशाख-मनखां व गौतमेश्वर, चैत्र-घोटिया अंबा”।

🎯 जनजातीय मेले-नृत्य: तिथि, स्थान, जनजाति — अभी अभ्यास करें

‘सहरियों का कुंभ’, ‘आदिवासियों का कुंभ’, ‘वालर किसका’, ‘हाथीमना कब’ — ऐसे प्रश्न पटवारी, VDO, पुलिस, CET व RAS में बार-बार आते हैं। मॉक टेस्ट दें:

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3. जनजाति-वार नृत्य तालिका

जनजाति/समुदायनृत्यअवसर/विशेषता
भीलगवरी (राई)रक्षाबंधन के अगले दिन से 40 दिन; शिव-भस्मासुर कथा; केवल पुरुष
भीलघूमरस्त्रियों का सामूहिक घेरदार नृत्य
भीलगैरहोली पर पुरुषों का डंडा-नृत्य
भीलहाथीमनाविवाह पर पुरुषों का नृत्य
भीलयुद्ध नृत्यहथियारों के साथ ओजपूर्ण नृत्य
भीलद्विचक्रीविवाह पर स्त्री-पुरुषों के दो घेरे
गरासियावालर‘गरासियों का घूमर’; बिना वाद्य; दो घेरे
गरासियामोरियाविवाह पर पुरुषों का नृत्य
गरासियागौरगणगौर पर
गरासियाकूदस्त्री-पुरुषों का सामूहिक नृत्य
सहरियासहरिया स्वांगहोली के महीने में टोलियों द्वारा गाँव-गाँव; ढोल, नगाड़ी, मटकी
कालबेलिया (घुमंतू)कालबेलिया, इंडोणी, शंकरिया, पणिहारीबीन-पूँगी; 2010 से UNESCO सूची में कालबेलिया नृत्य-गीत

विस्तार: गवरी लोकनाट्य | वालर नृत्य | कालबेलिया नृत्य | लोकनृत्यों की तालिका: नृत्य–समुदाय–क्षेत्र–अवसर

4. गवरी — जनजातीय अनुष्ठान का सबसे बड़ा उदाहरण

  • कौन: मेवाड़ (उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा) के भील पुरुष।
  • कब: रक्षाबंधन के अगले दिन (भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा) से 40 दिन।
  • क्या: शिव-पार्वती व भस्मासुर की कथा के साथ सामाजिक प्रसंगों का नृत्य-नाट्य; गाँव-गाँव घूमकर प्रस्तुति।
  • पात्र: राईबुडिया (शिव), राई (पार्वती), कुटकुड़िया (सूत्रधार), पाट भोपा।
  • वाद्य: मांदल, थाली।
  • नियम: 40 दिन तक कलाकार संयम का पालन करते हैं; राजस्थान का सबसे प्राचीन लोकनाट्य माना जाता है।

5. जनजातीय त्योहार

त्योहारसमयजनजातीय विशेषता
होलीफाल्गुनभील-गरासियों का सबसे बड़ा त्योहार; गैर नृत्य; सहरिया स्वांग; मेलों में जीवनसाथी-चयन
गवरीभाद्रपद (40 दिन)भीलों का धार्मिक अनुष्ठान
गणगौरचैत्रगरासिया — गौर नृत्य; गोगुंदा मेला
दीपावलीकार्तिकपशु-पूजा, लोकगीत
आखा तीजवैशाखकृषि-वर्ष का आरंभ; विवाह के शुभ दिन
नक्की झील अस्थि-विसर्जनवैशाखगरासिया — माउंट आबू; बाद में गीत-नृत्य

6. जनजातीय मेलों का सामाजिक महत्व

  1. जीवनसाथी-चयन: गरासिया (मनखां रो मेलो) व भील मेलों में युवक-युवती स्वयं साथी चुनते हैं।
  2. सामुदायिक न्याय: मेलों में पंचायतें विवाद सुलझाती हैं।
  3. आर्थिक लेन-देन: पशु, अनाज, आभूषण, घरेलू सामान का क्रय-विक्रय।
  4. सांस्कृतिक निरंतरता: नृत्य, गीत, वेशभूषा, गोदना — परंपराओं का अगली पीढ़ी तक हस्तांतरण।
  5. धार्मिक-ऐतिहासिक स्मृति: मानगढ़ जैसे स्थल जनजातीय बलिदान व चेतना के प्रतीक।

जनजातीय उत्सव-कैलेंडर (मास-क्रम)

मासजनजातीय मेले/उत्सव
चैत्रघोटिया अंबा (अमावस्या), ऋषभदेव (कृष्ण 8), गणगौर (गोगुंदा)
वैशाखगौतमेश्वर (पूर्णिमा), मनखां रो मेलो (शुक्ल पक्ष), नक्की झील अस्थि-विसर्जन
ज्येष्ठसीताबाड़ी, सीतामाता (अमावस्या)
भाद्रपदगवरी आरंभ (रक्षाबंधन के अगले दिन से 40 दिन)
मार्गशीर्षमानगढ़ धाम (पूर्णिमा)
माघबेणेश्वर (पूर्णिमा)
फाल्गुनहोली — गैर, सहरिया स्वांग

📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — यह विषय परीक्षा में कैसे पूछा जाता है?

प्रश्न का प्रकारउदाहरणहल करने की कुंजी
मेला–जनजातिगौतमेश्वर किस जनजाति का?मीणा
उपनामदोनों ‘कुंभ’ कौन-से?बेणेश्वर (आदिवासी), सीताबाड़ी (सहरिया)
नृत्य–जनजातिमोरिया/हाथीमना?गरासिया / भील
तिथिघोटिया अंबा कब?चैत्र अमावस्या

याद रखने का सूत्र

  • दो कुंभ: बेणेश्वर (आदिवासियों का, डूंगरपुर, माघ) और सीताबाड़ी (सहरियों का, बारां, ज्येष्ठ)।
  • दो सीता: सीताबाड़ी (बारां) और सीतामाता (प्रतापगढ़)।
  • दो विवाह-नृत्य: हाथीमना (भील) और मोरिया (गरासिया)।

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राजस्थान के प्रमुख जनजातीय मेले कौन-से हैं?

बेणेश्वर (डूंगरपुर), सीताबाड़ी (बारां), मनखां रो मेलो (सिरोही), घोटिया अंबा (बांसवाड़ा), गौतमेश्वर (प्रतापगढ़), मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा), कोटेश्वर और चेतर-विचितर राजस्थान के प्रमुख जनजातीय मेले हैं।

‘आदिवासियों का कुंभ’ और ‘सहरियों का कुंभ’ में क्या अंतर है?

‘आदिवासियों का कुंभ’ डूंगरपुर का बेणेश्वर मेला (माघ पूर्णिमा) है, जबकि ‘सहरियों का कुंभ’ बारां का सीताबाड़ी मेला (ज्येष्ठ) है।

भीलों के प्रमुख नृत्य कौन-से हैं?

गवरी, घूमर, गैर, हाथीमना, युद्ध नृत्य और द्विचक्री भीलों के प्रमुख नृत्य हैं।

गरासियों के प्रमुख नृत्य कौन-से हैं?

वालर, मोरिया, गौर, गैर और कूद गरासियों के प्रमुख नृत्य हैं।

घोटिया अंबा मेला कब और कहाँ लगता है?

घोटिया अंबा मेला बांसवाड़ा जिले में चैत्र अमावस्या को लगता है और यह भीलों का प्रमुख मेला है।

📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)

  1. ‘आदिवासियों का कुंभ’ — बेणेश्वर (माघ पूर्णिमा)
  2. ‘सहरियों का कुंभ’ — सीताबाड़ी (ज्येष्ठ)
  3. गरासियों का सबसे बड़ा मेला — मनखां रो मेलो
  4. घोटिया अंबा — बांसवाड़ा, चैत्र अमावस्या
  5. गौतमेश्वर — अरणोद, वैशाख पूर्णिमा (मीणा)
  6. मानगढ़ धाम — गोविंद गुरु
  7. सीतामाता मेला — प्रतापगढ़, ज्येष्ठ अमावस्या
  8. गवरी — भील, 40 दिन
  9. गवरी में शिव का पात्र — राईबुडिया
  10. भीलों का विवाह-नृत्य — हाथीमना
  11. गरासियों का घूमर — वालर
  12. गरासियों का विवाह-नृत्य — मोरिया
  13. सहरियों का होली प्रदर्शन — सहरिया स्वांग
  14. गोगुंदा का मेला — गणगौर (गरासिया)
  15. जनजातियों का सबसे बड़ा त्योहार — होली

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • मेले: बेणेश्वर, सीताबाड़ी, मनखां रो मेलो, घोटिया अंबा, गौतमेश्वर, मानगढ़, सीतामाता, ऋषभदेव, कोटेश्वर, चेतर-विचितर।
  • नृत्य: भील — गवरी, घूमर, गैर, हाथीमना, युद्ध, द्विचक्री; गरासिया — वालर, मोरिया, गौर, कूद; सहरिया — स्वांग।
  • त्योहार: होली (सबसे बड़ा), गवरी, गणगौर, आखा तीज।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • दो ‘कुंभ’ — बेणेश्वर (आदिवासी, डूंगरपुर) और सीताबाड़ी (सहरिया, बारां) — उल्टा न करें।
  • सीताबाड़ी (बारां) ≠ सीतामाता (प्रतापगढ़)।
  • हाथीमना (भील) और मोरिया (गरासिया) — दोनों विवाह-नृत्य, जनजाति अलग।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“भील के गवरी-गैर-हाथी, गरासिया के वालर-मोरिया-गौर, सहरिया का स्वांग”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

जनजातीय मेले-नृत्य पर प्रश्न लगभग हमेशा ‘मिलान’ के रूप में आते हैं — मेला–स्थान–जनजाति या नृत्य–जनजाति। दोनों ‘कुंभ’ और दोनों ‘सीता’ (सीताबाड़ी-सीतामाता) सबसे बड़े भ्रम हैं; इन्हें अलग से याद करें।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • RajRAS — ‘Rajasthan Tribes’ (भील — गवरी, घूमर, हाथीमना, युद्ध, द्विचक्री; गरासिया — वालर, गैर, मोरिया, गौर; मेले)।
  • भारतकोश (bharatdiscovery.org) — सीताबाड़ी मेला; गरासिया जनजाति (सियावा/मनखां रो मेलो)।
  • NVLI (भारत सरकार) — सहरिया स्वांग।
  • UNESCO — Kalbelia folk songs and dances of Rajasthan (2010)।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान के जनजातीय मेले, नृत्य एवं त्योहार

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: मेलों की तिथियाँ हिंदू पंचांग पर आधारित हैं; कोटेश्वर व चेतर-विचितर जैसे सीमावर्ती मेलों की सटीक तिथि स्थानीय परंपरा पर निर्भर है। नृत्यों का जनजाति-वार वर्गीकरण प्रकाशित संदर्भों के अनुसार है।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 3 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. घोटिया अंबा मेला किस जिले में लगता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. ‘सहरियों का कुंभ’ है —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. हाथीमना नृत्य किस जनजाति का है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. मनखां रो मेलो किस जिले में लगता है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम पर माघ पूर्णिमा को लगने वाले मेले को ‘आदिवासियों का कुंभ’ कहते हैं।

बारां जिले का सीताबाड़ी मेला सहरियों का सबसे बड़ा मेला है, जिसे ‘सहरियों का कुंभ’ कहते हैं।

प्रतापगढ़ के अरणोद में वैशाख पूर्णिमा को लगने वाला गौतमेश्वर मेला मीणा जनजाति से जुड़ा है।

मोरिया गरासिया पुरुषों द्वारा विवाह के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य है।

जनजातीय मेले जीवनसाथी-चयन, पंचायत द्वारा विवाद-निपटारे, व्यापार और नृत्य-गीत की परंपराओं के संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

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