राजस्थान की जनजातियाँ एवं जनजातीय क्षेत्र: भील, मीणा, गरासिया, सहरिया एवं TSP क्षेत्र — सम्पूर्ण मास्टर गाइड

प्रस्तावना
राजस्थान भारत के उन राज्यों में शामिल है जहाँ जनजातीय जनसंख्या का अनुपात राष्ट्रीय औसत के आसपास है, और यहाँ की जनजातियाँ न केवल जनसांख्यिकीय दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। RPSC RAS, RSMSSB, पटवारी, ग्राम सेवक, REET और SI जैसी लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा में "राजस्थान की जनजातियाँ" खंड से प्रत्यक्ष प्रश्न पूछे जाते हैं — विशेषकर भील, मीणा, गरासिया और सहरिया जनजातियों की तुलना, उनका भौगोलिक वितरण, सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताएँ तथा जनजातीय उपयोजना (TSP) क्षेत्र से जुड़े तथ्य। इस लेख में हम इन सभी बिंदुओं को व्यवस्थित एवं परीक्षा-केंद्रित तरीके से समझेंगे।
जनजाति की परिभाषा एवं संवैधानिक वर्गीकरण
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) घोषित किया जाता है। किसी समुदाय को जनजाति के रूप में मान्यता देने हेतु सामान्यतः निम्न मापदंड अपनाए जाते हैं:
- भौगोलिक एकांतता (मुख्यधारा से दूर, वन/पहाड़ी क्षेत्रों में निवास)
- विशिष्ट संस्कृति, भाषा एवं रीति-रिवाज
- सामाजिक व आर्थिक पिछड़ापन
- संकोची स्वभाव (मुख्यधारा समाज से सीमित संपर्क)
- आदिम लक्षणों (Primitive traits) की उपस्थिति
राजस्थान में वर्तमान में अनुसूचित जनजातियों की सूची में भील, मीणा, गरासिया, सहरिया, डामोर, कठोड़ी, कोकना, कोली-ढोर, नायकड़ा, पटेलिया, भील-मीणा तथा कुछ अन्य उप-समूह शामिल हैं। इनमें भील और मीणा संख्या की दृष्टि से सबसे बड़ी जनजातियाँ हैं।
सत्यापन सलाह: जनजातीय जनसंख्या के प्रतिशत, कुल अनुसूचित जनजातियों की संख्या तथा जिलावार आँकड़े जनगणना 2011 पर आधारित हैं और समय-समय पर संशोधित होते रहते हैं। परीक्षा से पूर्व कृपया RPSC के आधिकारिक सिलेबस, राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल की सामग्री तथा जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग (TAD) की नवीनतम रिपोर्ट से आँकड़े अवश्य क्रॉस-चेक करें।
राजस्थान में जनजातीय जनसंख्या का सामान्य परिदृश्य
जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों का अनुपात लगभग 13-14% के आसपास बताया जाता है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। राज्य की जनजातीय जनसंख्या मुख्यतः दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान — उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सिरोही संभाग तथा सवाई माधोपुर, दौसा, अलवर, करौली और बारां जिलों में केंद्रित है। इस क्षेत्र को व्यापक रूप से "वागड़" और "मेवाड़-दक्षिण" के जनजातीय बहुल भू-भाग के रूप में जाना जाता है।
जनजातियों में भील सबसे बड़ी जनजाति मानी जाती है, इसके पश्चात मीणा जनजाति का स्थान आता है। शेष जनजातियाँ — गरासिया, सहरिया, डामोर, कठोड़ी आदि — संख्या की दृष्टि से अपेक्षाकृत छोटी हैं परंतु सांस्कृतिक एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हैं, विशेषकर सहरिया जनजाति जिसे विशेष संरक्षित जनजाति (PVTG) का दर्जा प्राप्त है।
भील जनजाति
भील जनजाति को राजस्थान की सबसे प्राचीन एवं सबसे बड़ी जनजाति माना जाता है। इन्हें "धनुष-बाण के धनी" के रूप में जाना जाता है क्योंकि परंपरागत रूप से भील तीरंदाजी में अत्यंत निपुण रहे हैं। भीलों का मुख्य संकेंद्रण दक्षिणी राजस्थान — उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सिरोही एवं चित्तौड़गढ़ जिलों में है। यह क्षेत्र "भोमट" या "भील प्रदेश" के नाम से भी जाना जाता है।
प्रमुख सांस्कृतिक विशेषताएँ:
- भीलों का प्रमुख सामाजिक संस्थान "फाल्या" (छोटी बस्ती/मोहल्ला) है।
- इनका पारंपरिक नृत्य "गवरी" (राई नृत्य से भिन्न) एक धार्मिक-सामाजिक नाट्य परंपरा है, जो लगभग 40 दिनों तक चलती है और भगवान शिव व पार्वती की कथा पर आधारित है।
- भीलों में विवाह पूर्व प्रेम-विवाह की परंपरा "हारना/भगोरिया" के रूप में प्रचलित है — होली के अवसर पर लगने वाला भगोरिया हाट (मेला) युवक-युवतियों को जीवनसाथी चुनने का अवसर देता है (यह विशेष रूप से मध्यप्रदेश-राजस्थान सीमावर्ती क्षेत्र में प्रसिद्ध है)।
- गोदना (टैटू) गुदवाना भील महिलाओं में एक पारंपरिक प्रथा रही है।
- भीलों का प्रमुख अस्त्र धनुष-बाण एवं कुल्हाड़ी है।
- 1913 का "मानगढ़ नरसंहार" भीलों के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना है, जब गोविंद गुरु के नेतृत्व में एकत्रित भीलों पर अंग्रेजी सेना ने गोलीबारी की थी। मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा) आज भीलों के लिए तीर्थ स्थल के समान है।
- भीलों की बोली को "भीली" कहा जाता है।
मीणा (मीना) जनजाति
मीणा जनजाति संख्या की दृष्टि से राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है, परंतु ऐतिहासिक व सांस्कृतिक प्रभाव की दृष्टि से यह अत्यंत प्रभावशाली समुदाय रहा है। मीणाओं का मुख्य संकेंद्रण पूर्वी राजस्थान — सवाई माधोपुर, दौसा, करौली, अलवर, जयपुर तथा उदयपुर के कुछ भागों में है।
प्रमुख वर्गीकरण एवं विशेषताएँ:
- ऐतिहासिक रूप से मीणाओं को दो प्रमुख वर्गों में बाँटा जाता है — जमींदार मीणा (जो कृषि व भूमि-स्वामित्व से जुड़े रहे) और चौकीदार मीणा (जिन्हें ब्रिटिश शासन में "अपराधी जनजाति अधिनियम, 1871" के अंतर्गत रखा गया था)।
- मीणा शब्द की उत्पत्ति "मीन" (मछली) से मानी जाती है — पौराणिक मान्यता के अनुसार मीणा स्वयं को भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से जोड़ते हैं।
- मीणाओं का प्रमुख पर्व "गोगा नवमी" तथा "गणगौर" है, हालांकि गणगौर संपूर्ण राजस्थान में मनाई जाती है।
- ढोल एवं थाली वादन मीणा जनजाति के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रमुख हिस्सा है।
- ऐतिहासिक रूप से आमेर (जयपुर) पर मीणाओं का शासन रहा था, इससे पूर्व कि कछवाहा राजपूतों ने वहाँ अधिकार स्थापित किया।
- राजस्थान में सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या रखने वाले जिलों में उदयपुर व बांसवाड़ा (भील बहुल) के साथ-साथ सवाई माधोपुर व दौसा (मीणा बहुल) प्रमुख हैं।
गरासिया जनजाति
गरासिया राजस्थान की एक विशिष्ट जनजाति है जिसे मानवशास्त्रीय दृष्टि से राजपूत एवं भील समुदाय के मिश्रण से उत्पन्न माना जाता है — अर्थात यह "मिश्रित मूल" (mixed origin) की जनजाति है। गरासिया मुख्यतः सिरोही, उदयपुर एवं पाली जिलों के पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं।
प्रमुख विशेषताएँ:
- गरासियों का प्रसिद्ध लोकनृत्य "लूर नृत्य" है, जो होली के अवसर पर युवक-युवतियों द्वारा किया जाता है और भगोरिया की तरह ही विवाह-चयन से जुड़ा सामाजिक अवसर प्रदान करता है।
- गरासियों में विवाह की एक विशिष्ट प्रथा "मोरबंधिया विवाह" प्रचलित है।
- सामाजिक संगठन में गरासिया समुदाय पितृसत्तात्मक है परंतु इनमें विवाह-पूर्व प्रेम संबंधों को अपेक्षाकृत अधिक सामाजिक स्वीकृति प्राप्त है।
- गरासिया जनजाति की बोली को भी क्षेत्रीय बोलियों का मिश्रित रूप माना जाता है, जिसमें राजपूताना और भीली दोनों प्रभाव मिलते हैं।
सहरिया जनजाति — राजस्थान की एकमात्र आदिम जनजाति (PVTG)
सहरिया जनजाति राजस्थान की एकमात्र ऐसी जनजाति है जिसे भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group – PVTG) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह वर्गीकरण अत्यंत कम जनसंख्या वृद्धि दर, पूर्व-कृषि स्तर की प्रौद्योगिकी, निम्न साक्षरता दर तथा आर्थिक पिछड़ेपन जैसे मापदंडों पर आधारित होता है।
प्रमुख विशेषताएँ:
- सहरिया जनजाति मुख्यतः बारां जिले की किशनगंज एवं शाहबाद तहसीलों में केंद्रित है — इस क्षेत्र को व्यापक रूप से "सहरिया क्षेत्र" या "सहरिया अंचल" कहा जाता है।
- सहरिया शब्द की उत्पत्ति "सहर" (वन) से मानी जाती है, अर्थात "वन में रहने वाले लोग"।
- इनकी बस्तियों को "सहराना" या "सहरोल" कहा जाता है।
- सहरिया जनजाति की आर्थिक गतिविधियों में वनोपज संग्रहण (तेंदू पत्ता, महुआ, गोंद), मजदूरी तथा सीमित कृषि प्रमुख है।
- इनका सामाजिक जीवन अपेक्षाकृत सरल है और यह समुदाय अन्य जनजातियों की तुलना में मुख्यधारा से अधिक दूर रहा है, यही कारण है कि इसे PVTG श्रेणी में रखा गया।
अन्य महत्वपूर्ण जनजातियाँ
- डामोर (Damor): मुख्यतः डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा जिलों में निवास करने वाली यह जनजाति भील संस्कृति से काफी मिलती-जुलती है।
- कठोड़ी (Kathodi): उदयपुर क्षेत्र में पाई जाने वाली यह जनजाति परंपरागत रूप से खैर (कत्था) बनाने के कार्य से जुड़ी रही है — "कठोड़ी" नाम की उत्पत्ति भी "कत्था" से मानी जाती है।
- कोकना/कोकनी: दक्षिणी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में पाई जाने वाली छोटी जनजाति।
- भीलाला: भील और राजपूत मिश्रण से उत्पन्न मानी जाने वाली उप-जनजाति, जो मुख्यतः राजस्थान-मध्यप्रदेश सीमावर्ती क्षेत्र में पाई जाती है।
जनजातीय उपयोजना क्षेत्र (Tribal Sub-Plan – TSP)
जनजातीय उपयोजना (TSP) भारत सरकार की एक विशेष योजनागत रणनीति है जिसका उद्देश्य जनजातीय बहुल क्षेत्रों का सघन एवं लक्षित विकास करना है। राजस्थान में TSP क्षेत्र मुख्यतः राज्य के दक्षिणी एवं दक्षिण-पूर्वी भाग में फैला हुआ है, जहाँ जनजातीय जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक है।
TSP क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रमुख जिले/क्षेत्र (मुख्यतः):
- बांसवाड़ा (सम्पूर्ण जिला)
- डूंगरपुर (सम्पूर्ण जिला)
- उदयपुर (आंशिक क्षेत्र)
- प्रतापगढ़ (आंशिक क्षेत्र)
- सिरोही (आंशिक क्षेत्र)
- चित्तौड़गढ़ (आंशिक क्षेत्र)
- राजसमंद (आंशिक क्षेत्र)
TSP क्षेत्र के प्रशासनिक एवं विकासात्मक कार्यों के समन्वय हेतु राज्य स्तर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग (Tribal Area Development Department – TAD) कार्यरत है, जिसका मुख्यालय उदयपुर में स्थित है। TSP क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वन अधिकार तथा आधारभूत अवसंरचना से संबंधित विशेष योजनाएँ संचालित की जाती हैं।
सत्यापन सलाह: TSP क्षेत्र में शामिल तहसीलों/पंचायत समितियों की सटीक एवं पूर्ण सूची समय-समय पर प्रशासनिक पुनर्गठन के कारण परिवर्तित होती रहती है। परीक्षा उद्देश्य हेतु राज्य सरकार के जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग (TAD) की आधिकारिक अधिसूचना अवश्य देखें।
तुलनात्मक तालिका: प्रमुख जनजातियों का तुलनात्मक विश्लेषण
| विशेषता | भील | मीणा | गरासिया | सहरिया |
|---|---|---|---|---|
| मुख्य क्षेत्र | उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सिरोही | सवाई माधोपुर, दौसा, करौली, अलवर | सिरोही, उदयपुर, पाली | बारां (किशनगंज, शाहबाद) |
| जनसंख्या क्रम | सबसे बड़ी जनजाति | दूसरी सबसे बड़ी जनजाति | मध्यम आकार | अपेक्षाकृत छोटी |
| उत्पत्ति | मूल/प्राचीन जनजाति | पौराणिक रूप से मत्स्य अवतार से संबद्ध | राजपूत-भील मिश्रित मूल | वनवासी मूल |
| प्रमुख नृत्य | गवरी | थाली/ढोल नृत्य | लूर नृत्य | सामान्य लोकनृत्य |
| विशेष प्रथा | भगोरिया हाट (विवाह-चयन मेला) | जमींदार/चौकीदार वर्गीकरण | मोरबंधिया विवाह | सरल वनाश्रित जीवनशैली |
| ऐतिहासिक घटना | मानगढ़ नरसंहार (1913) | आमेर पर पूर्व शासन | — | — |
| विशेष दर्जा | — | — | — | PVTG (एकमात्र आदिम जनजाति) |
🎯 एग्जाम ट्रैप (Exam Trap Section)
- सबसे बड़ी जनजाति vs दूसरी सबसे बड़ी जनजाति: विद्यार्थी प्रायः भूल जाते हैं कि भील राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है जबकि मीणा दूसरी सबसे बड़ी — इन्हें उल्टा याद रखने की गलती बहुत आम है।
- PVTG की पहचान में भ्रम: कई विद्यार्थी सोचते हैं कि भील या मीणा को "आदिम जनजाति (PVTG)" का दर्जा प्राप्त है, जबकि राजस्थान की एकमात्र PVTG सहरिया जनजाति है।
- गरासिया की उत्पत्ति: गरासिया को कई बार "शुद्ध" जनजाति मान लिया जाता है, जबकि यह वास्तव में राजपूत-भील मिश्रित मूल की जनजाति है — यह एक क्लासिक परीक्षा ट्रैप है।
- गवरी बनाम राई नृत्य: गवरी नृत्य भीलों से संबद्ध एक धार्मिक नाट्य-परंपरा है, इसे राई नृत्य (जो कालबेलिया समुदाय से जुड़ा है) के साथ भ्रमित न करें।
- भगोरिया बनाम लूर नृत्य: भगोरिया हाट भीलों की परंपरा है जबकि इसी प्रकार का विवाह-चयन अवसर गरासियों में "लूर नृत्य" के माध्यम से मिलता है — दोनों को एक-दूसरे से बदलकर पूछा जाना बहुत सामान्य ट्रैप है।
- सहरिया का क्षेत्र: सहरिया जनजाति को कभी-कभी दक्षिणी राजस्थान (उदयपुर/बांसवाड़ा) से जोड़ दिया जाता है, जबकि यह वास्तव में बारां जिले (हाड़ौती क्षेत्र) की जनजाति है — यह भौगोलिक दृष्टि से बाकी प्रमुख जनजातियों से बिल्कुल अलग क्षेत्र है।
🧠 मेमोरी ट्रिक (स्मरण तकनीक)
"भील उदय, मीणा सवाई, गरासिया सिरोही जाई, सहरिया बारां छाई"
- भील → उदयपुर-डूंगरपुर-बांसवाड़ा (दक्षिणी राजस्थान)
- मीणा → सवाई माधोपुर-दौसा-करौली (पूर्वी राजस्थान)
- गरासिया → सिरोही -पाली-उदयपुर (मिश्रित मूल)
- सहरिया → बारां (एकमात्र PVTG, हाड़ौती क्षेत्र)
आकार क्रम याद रखने हेतु: "भी-मी-ग-स" (भील > मीणा > गरासिया > सहरिया, जनसंख्या क्रम में घटते हुए)
👩🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
"जनजाति खंड से RPSC व RSMSSB दोनों में लगभग हर वर्ष 2-3 प्रश्न निश्चित रूप से पूछे जाते हैं। विद्यार्थियों को केवल जनजाति के नाम रटने के बजाय जिला-वार वितरण, विशिष्ट सांस्कृतिक प्रथा और ऐतिहासिक घटना — इन तीन बिंदुओं को जोड़कर याद करना चाहिए, क्योंकि प्रश्न प्रायः इन्हीं तीन दृष्टिकोणों से मिश्रित करके (cross-linking) पूछे जाते हैं। विशेष रूप से 'सहरिया = PVTG = बारां' यह त्रिकोण अवश्य याद रखें, क्योंकि यह सबसे अधिक बार पूछा जाने वाला तथ्य है।"
📝 अभ्यास प्रश्न (PYQ/Practice MCQs)
1. राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति कौन-सी है?
A) मीणा B) भील C) गरासिया D) सहरिया
उत्तर: B) भील — भील संख्या की दृष्टि से राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है।
2. राजस्थान की एकमात्र आदिम जनजाति (PVTG) कौन-सी है?
A) भील B) मीणा C) सहरिया D) गरासिया उत्तर: C) सहरिया — यह बारां जिले में केंद्रित है और भारत सरकार द्वारा PVTG घोषित है।
3. सहरिया जनजाति मुख्यतः किस जिले में पाई जाती है?
A) बांसवाड़ा B) उदयपुर C) बारां D) डूंगरपुर
उत्तर: C) बारां (किशनगंज एवं शाहबाद तहसील)
4. गरासिया जनजाति की उत्पत्ति किन दो समुदायों के मिश्रण से मानी जाती है?
A) भील और मीणा B) राजपूत और भील C) मीणा और सहरिया D) राजपूत और मीणा
उत्तर: B) राजपूत और भील
5. भीलों का प्रसिद्ध धार्मिक-सामाजिक नृत्य नाट्य कौन-सा है?
A) घूमर B) गवरी C) कालबेलिया D) लूर
उत्तर: B) गवरी
6. 1913 का मानगढ़ नरसंहार किस जनजाति से संबंधित है?
A) मीणा B) गरासिया C) भील D) सहरिया
उत्तर: C) भील (गोविंद गुरु के नेतृत्व में)
7. गरासिया जनजाति का प्रसिद्ध विवाह-चयन नृत्य कौन-सा है?
A) भगोरिया B) लूर नृत्य C) गवरी D) गणगौर
उत्तर: B) लूर नृत्य
8. मीणाओं में ऐतिहासिक रूप से किए गए दो प्रमुख वर्गीकरण कौन-से हैं?
A) उच्च मीणा और निम्न मीणा B) जमींदार मीणा और चौकीदार मीणा C) वन मीणा और ग्राम मीणा D) पूर्वी मीणा और पश्चिमी मीणा
उत्तर: B) जमींदार मीणा और चौकीदार मीणा
9. भगोरिया हाट किस अवसर पर आयोजित होता है?
A) दीपावली B) होली C) गणगौर D) तीज
उत्तर: B) होली
10. जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग (TAD) का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
A) जयपुर
B) उदयपुर
C) बांसवाड़ा
D) कोटा
उत्तर: B) उदयपुर
11. TSP (जनजातीय उपयोजना) क्षेत्र मुख्यतः राजस्थान के किस भाग में स्थित है?
A) उत्तर-पश्चिम B) दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व C) उत्तर-पूर्व D) मध्य राजस्थान
उत्तर: B) दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व
12. कठोड़ी जनजाति परंपरागत रूप से किस कार्य से जुड़ी रही है?
A) वस्त्र निर्माण B) कत्था (खैर) निर्माण C) मिट्टी के बर्तन D) आभूषण निर्माण
उत्तर: B) कत्था (खैर) निर्माण
13. निम्न में से कौन-सा जिला भील जनजाति के प्रमुख संकेंद्रण क्षेत्रों में शामिल नहीं है?
A) बांसवाड़ा B) डूंगरपुर C) सवाई माधोपुर D) सिरोही
उत्तर: C) सवाई माधोपुर (यह मीणा बहुल क्षेत्र है)
14. मीणा जनजाति ऐतिहासिक रूप से राजस्थान के किस प्रमुख दुर्ग/नगर पर शासन करती थी, इससे पूर्व कि कछवाहा राजपूतों ने अधिकार किया? A) चित्तौड़गढ़ B) आमेर C) मेहरानगढ़ D) रणथंभौर
उत्तर: B) आमेर
15. डामोर जनजाति मुख्यतः किन जिलों में पाई जाती है?
A) बारां-कोटा B) डूंगरपुर-बांसवाड़ा C) अलवर-भरतपुर D) जोधपुर-नागौर
उत्तर: B) डूंगरपुर-बांसवाड़ा
16. "सहरिया" शब्द की उत्पत्ति किस शब्द से मानी जाती है?
A) सहर (शहर) B) सहर (वन) C) सहरा (रेगिस्तान) D) सहज
उत्तर: B) सहर (वन) — अर्थात वन में रहने वाले लोग
17. गोविंद गुरु किस आंदोलन से जुड़े थे?
A) भील आंदोलन (मानगढ़) B) किसान आंदोलन C) प्रजामंडल आंदोलन D) बिजोलिया आंदोलन
उत्तर: A) भील आंदोलन (मानगढ़)
18. निम्न में से कौन-सी जनजाति संख्या की दृष्टि से राजस्थान में तीसरे स्थान पर मानी जाती है (भील व मीणा के पश्चात, सामान्यतः)?
A) सहरिया B) गरासिया C) कठोड़ी D) कोकना
उत्तर: B) गरासिया
19. सहरिया जनजाति की बस्तियों को क्या कहा जाता है?
A) फाल्या B) सहराना/सहरोल C) ढाणी D) मजरा
उत्तर: B) सहराना/सहरोल
20. भीलों की मुख्य बोली क्या कहलाती है?
A) मेवाड़ी B) भीली C) वागड़ी D) मालवी
उत्तर: B) भीली
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
भील राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है, जबकि मीणा दूसरी सबसे बड़ी जनजाति मानी जाती है।
सहरिया जनजाति, जो बारां जिले की किशनगंज व शाहबाद तहसीलों में केंद्रित है, को उसकी अपेक्षाकृत कम विकसित सामाजिक-आर्थिक स्थिति के कारण PVTG घोषित किया गया है।
क्योंकि मानवशास्त्रीय अध्ययनों के अनुसार गरासिया जनजाति की उत्पत्ति राजपूत एवं भील समुदायों के अंतर्मिश्रण से मानी जाती है।
मुख्यतः बांसवाड़ा, डूंगरपुर (पूर्ण रूप से) तथा उदयपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, चित्तौड़गढ़, राजसमंद (आंशिक रूप से) TSP क्षेत्र में शामिल हैं। सटीक सूची हेतु TAD विभाग की अधिसूचना देखें।
भगोरिया हाट भील जनजाति की होली पर आयोजित विवाह-चयन परंपरा है, जबकि लूर नृत्य इसी प्रकार का सामाजिक अवसर गरासिया जनजाति में प्रदान करता है — दोनों अलग-अलग जनजातियों की समान उद्देश्य वाली परंतु भिन्न परंपराएँ हैं।
मानगढ़ नरसंहार वर्ष 1913 में हुआ था, जब गोविंद गुरु के नेतृत्व में एकत्रित भीलों पर अंग्रेजी सेना ने गोलीबारी की थी।
यह वर्गीकरण ब्रिटिश काल में सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर हुआ था — जमींदार मीणा कृषि/भूमि-स्वामित्व से जुड़े थे, जबकि चौकीदार मीणा को औपनिवेशिक प्रशासन ने "अपराधी जनजाति अधिनियम, 1871" के अंतर्गत रखा था।
TAD विभाग राजस्थान के TSP क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वन अधिकार एवं आधारभूत अवसंरचना से जुड़ी विशेष विकास योजनाओं के क्रियान्वयन एवं समन्वय हेतु उत्तरदायी है।