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भील जनजाति की संस्कृति: नृत्य, त्योहार, वेशभूषा एवं परंपराएँ

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
3 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 3 अक्टूबर 2026
9 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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भील जनजाति की संस्कृति: नृत्य, त्योहार, वेशभूषा एवं परंपराएँ

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⚡ Quick Answer: भील राजस्थान के प्राचीनतम निवासी और जनगणना 2011 के अनुसार दूसरी सबसे बड़ी जनजाति (41 लाख) हैं, जो मुख्यतः बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, प्रतापगढ़ में बसते हैं। बस्तियाँ — बड़ी ‘पाल’, छोटी ‘फला’; मुखिया — गमेती; घर — टापरा/कू। विवाह में वधू-मूल्य ‘दापा’, विवाह-विच्छेद ‘छेड़ा फाड़ना’। प्रमुख नृत्य — गवरी (40 दिन का नृत्य-नाट्य), घूमर, गैर, हाथीमना, युद्ध नृत्य, द्विचक्री; प्रमुख मेले — बेणेश्वर, घोटिया अंबा, मानगढ़। स्त्रियों के वस्त्र — नांदणा, कछाबू, पिरिया; पुरुष — ढेपाड़ा, खोयतू, पोतिया। समाज-सुधारक गोविंद गुरु और मानगढ़ (1913) भील इतिहास के गौरव हैं।

1. भील जनजाति — परिचय

“भील जनजाति की संस्कृति क्या है” — यह प्रश्न राजस्थान GK के सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों में है। ‘भील’ शब्द को द्रविड़ शब्द ‘बिल’ (धनुष) से जोड़ा जाता है — और सचमुच तीर-कमान भीलों की पहचान रहा है। मेवाड़ के इतिहास में भीलों का योगदान अमिट है — हल्दीघाटी युद्ध में राणा पूंजा के नेतृत्व में भील योद्धाओं ने महाराणा प्रताप का साथ दिया, और मेवाड़ के राजचिह्न में एक ओर भील योद्धा अंकित है। गवरी जैसे अनूठे नृत्य-नाट्य से लेकर गोविंद गुरु के सुधार-आंदोलन तक भील संस्कृति राजस्थान की आत्मा का हिस्सा है।

तथ्यविवरण
जनसंख्या (2011)41,00,264 (कुल ST का 44.38%) — दूसरी सबसे बड़ी
विशेषताराजस्थान के प्राचीनतम निवासी
मुख्य जिलेबांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, प्रतापगढ़; सिरोही, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा का भाग
बस्तीपाल (बड़ी), फला (छोटी — 5-6 घरों का समूह)
मुखियागमेती
घरटापरा, कू; बरामदा — ढालिया
वधू-मूल्यदापा
विवाह-विच्छेदछेड़ा फाड़ना
बोलीभीली; वागड़ क्षेत्र में वागड़ी
प्रमुख नायकराणा पूंजा (हल्दीघाटी), गोविंद गुरु (मानगढ़)

जनजातीय संस्कृति का समग्र परिचय: राजस्थान की जनजातीय संस्कृति — Master Guide | भौगोलिक वितरण: राजस्थान की जनजातियाँ — भील, मीणा, गरासिया, सहरिया

2. सामाजिक संरचना

  • पितृसत्तात्मक परिवार: पिता परिवार का प्रमुख; एकल परिवार अधिक।
  • बस्ती-संरचना: घर बिखरे हुए, पहाड़ियों पर; कुछ घरों का समूह ‘फला’, कई फलों से बड़ी बस्ती ‘पाल’।
  • गमेती: पाल का मुखिया — विवाद-निपटारा, सामाजिक नियमों का पालन।
  • गोत्र: गोत्र-बहिर्विवाह; टोटम (पशु-पक्षी-वृक्ष) से जुड़े गोत्र।
  • घर: मिट्टी-बाँस-खपरैल के ‘टापरा’ व ‘कू’; आगे बरामदा ‘ढालिया’।

3. विवाह-प्रथाएँ

प्रथाअर्थ
मोर बंधियापारंपरिक रीति से (फेरे सहित) होने वाला विवाह
दापावर-पक्ष द्वारा वधू-पक्ष को दिया जाने वाला वधू-मूल्य
सेवा विवाहवधू-मूल्य के बदले वर द्वारा ससुराल में सेवा
विनिमय विवाहपरिवारों के बीच कन्याओं का आदान-प्रदान
हरण विवाहपरंपरागत रूप से कन्या को ले जाकर विवाह (सामाजिक स्वीकृति के साथ)
छेड़ा फाड़नाविवाह-विच्छेद — पति द्वारा पत्नी की ओढ़नी का पल्लू फाड़कर संबंध समाप्ति का प्रतीक
नाताविधवा/परित्यक्ता का पुनर्विवाह

नोट: भीलों में सामान्यतः एक-विवाह (monogamy) प्रचलित है। परीक्षा-पुस्तकों में विवाह के समय घर की दीवार पर कुल-देवी का चित्र ‘भराड़ी’ बनाने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है।

🎯 भील संस्कृति — RAS से पटवारी तक सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला टॉपिक

‘गमेती’, ‘छेड़ा फाड़ना’, ‘हाथीमना’, ‘चिमाता-वालरा’ जैसे शब्दों पर प्रश्न RAS, CET, VDO व पटवारी में आते हैं। मॉक टेस्ट से अभ्यास करें:

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4. भीलों के नृत्य

नृत्यविशेषता
गवरी (राई)रक्षाबंधन के अगले दिन से 40 दिन का धार्मिक नृत्य-नाट्य; शिव-भस्मासुर कथा; केवल पुरुष; मांदल-थाली
घूमरभील स्त्रियों का सामूहिक घेरदार नृत्य
गैरहोली पर पुरुषों का डंडों के साथ घेरे में नृत्य (मेवाड़-वागड़)
हाथीमनाविवाह के अवसर पर पुरुषों का नृत्य
युद्ध नृत्यहथियारों के साथ ओजपूर्ण नृत्य
द्विचक्रीविवाह-उत्सव पर स्त्री-पुरुषों का दो घेरों में नृत्य

गवरी पर विस्तृत लेख: गवरी लोकनाट्य | गैर नृत्य: गैर नृत्य

5. त्योहार एवं मेले

त्योहार/मेलास्थान/समयविशेष
होलीफाल्गुनभीलों का सबसे बड़ा त्योहार — गैर नृत्य, गीत
गवरीभाद्रपद (रक्षाबंधन के बाद 40 दिन)मेवाड़ के भीलों का अनुष्ठान
बेणेश्वर मेलाडूंगरपुर, माघ पूर्णिमा‘आदिवासियों का कुंभ’
घोटिया अंबा मेलाबांसवाड़ा, चैत्र अमावस्याभीलों का प्रमुख मेला
मानगढ़ धामबांसवाड़ागोविंद गुरु व 1913 के बलिदान की स्मृति
ऋषभदेव (केसरियाजी)धुलेव, उदयपुरभील ‘काला जी’ के रूप में पूजते हैं

सभी जनजातीय मेले: जनजातीय मेले, नृत्य एवं त्योहार | बेणेश्वर: बेणेश्वर मेला

6. धर्म एवं आस्था

  • देवी-देवता: माता जी (देवी), पार्वती, कालाजी-गोराजी, धराल, लसोड़िया महाराज; गोविंद गुरु को श्रद्धा से पूजा जाता है।
  • प्रकृति-पूजा: पहाड़, वृक्ष, नदी — पूजनीय।
  • भोपा: देवता के ‘भाव’ से रोग-समस्या का समाधान बताने की लोक-मान्यता।
  • ऋषभदेव: भील केसरियानाथ (ऋषभदेव) की आस्था से जुड़े हैं।

7. अर्थव्यवस्था एवं कृषि

शब्दअर्थ
चिमातापहाड़ी ढलानों पर की जाने वाली खेती
दजियामैदानी भाग में की जाने वाली खेती
वालरास्थानांतरित (झूम जैसी) खेती — वन काटकर कुछ वर्ष खेती

मुख्य फसल — मक्का; साथ में वन-उपज (महुआ, तेंदूपत्ता), पशुपालन और मज़दूरी। तीर-कमान से शिकार परंपरागत कौशल रहा है।

8. वेशभूषा, आभूषण एवं गोदना

  • स्त्रियाँ: नांदणा (नीला प्राचीन वस्त्र), कछाबू (घुटनों तक घाघरा), लूगड़ा, सिंदूरी (विवाह की लाल साड़ी), पिरिया (दुल्हन का पीला लहंगा), जामसाई।
  • पुरुष: ढेपाड़ा (तंग धोती), खोयतू (लंगोटी), सिर पर पोतिया।
  • आभूषण: बाँह भर चूड़ियाँ, हँसली, चाँदी-पीतल के कड़े, कौड़ी-मनके।
  • गोदना: स्त्रियों के हाथ, ठोड़ी, माथे पर।
  • विस्तार: जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण

9. इतिहास एवं आंदोलन

  • राणा पूंजा: हल्दीघाटी (1576) में महाराणा प्रताप के सहयोगी भील सरदार; मेवाड़ के राजचिह्न में भील योद्धा।
  • मेवाड़ भील कोर: 1841 में खेरवाड़ा में अंग्रेज़ों द्वारा गठित।
  • गोविंद गुरु: भीलों में समाज-सुधार — नशा-मुक्ति, शिक्षा; ‘सम्प सभा’; 1913 में मानगढ़ पहाड़ी पर एकत्र भीलों पर अंग्रेज़ी सेना की गोलीबारी।
  • मोतीलाल तेजावत: एकी आंदोलन — भील-गरासियों को संगठित किया।
  • विस्तार: राजस्थान के प्रमुख जनजातीय आंदोलन | एकी आंदोलन — मोतीलाल तेजावत

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भील जनजाति के मुखिया को क्या कहते हैं?

भील जनजाति में पाल (बस्ती) के मुखिया को गमेती कहा जाता है।

भीलों में ‘छेड़ा फाड़ना’ क्या है?

‘छेड़ा फाड़ना’ भील समाज में विवाह-विच्छेद की प्रथा है, जिसमें पति पत्नी की ओढ़नी का पल्लू फाड़कर संबंध समाप्ति का संकेत देता है।

भीलों की बस्ती को क्या कहते हैं?

भीलों की बड़ी बस्ती ‘पाल’ और कुछ घरों का छोटा समूह ‘फला’ कहलाता है।

भीलों का प्रमुख नृत्य कौन-सा है?

गवरी भीलों का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक नृत्य-नाट्य है; इसके अतिरिक्त घूमर, गैर, हाथीमना, युद्ध नृत्य और द्विचक्री भी प्रमुख हैं।

‘वालरा’ खेती क्या है?

वालरा भीलों की स्थानांतरित खेती है, जिसमें वन का भाग साफ़ कर कुछ वर्षों तक खेती की जाती है।

📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)

  1. भील जनसंख्या (2011) — 41,00,264
  2. प्राचीनतम जनजाति — भील
  3. बड़ी बस्ती — पाल; छोटी — फला
  4. मुखिया — गमेती
  5. घर — टापरा, कू; बरामदा — ढालिया
  6. वधू-मूल्य — दापा
  7. विवाह-विच्छेद — छेड़ा फाड़ना
  8. पहाड़ी ढलान की खेती — चिमाता
  9. मैदानी खेती — दजिया
  10. स्थानांतरित खेती — वालरा
  11. 40 दिन का नृत्य-नाट्य — गवरी
  12. विवाह का पुरुष नृत्य — हाथीमना
  13. हल्दीघाटी के भील सरदार — राणा पूंजा
  14. मेवाड़ भील कोर — 1841, खेरवाड़ा
  15. मानगढ़ धाम — गोविंद गुरु (1913)

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • प्राचीनतम; 41 लाख; दक्षिणी राजस्थान।
  • पाल-फला-गमेती; टापरा-कू-ढालिया; दापा, छेड़ा फाड़ना, नाता।
  • गवरी, घूमर, गैर, हाथीमना, युद्ध, द्विचक्री; बेणेश्वर, घोटिया अंबा, मानगढ़।
  • चिमाता, दजिया, वालरा; राणा पूंजा, गोविंद गुरु।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • गमेती भील का मुखिया; पटेल मीणा व गरासिया में।
  • चिमाता (ढलान) और दजिया (मैदान) — उल्टा न करें।
  • गवरी भील पुरुषों का नृत्य-नाट्य है; वालर गरासियों का नृत्य।
  • भील जनसंख्या में दूसरी (2011) — ‘सबसे बड़ी’ वाला विकल्प पुराने आँकड़ों पर आधारित है।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“पाल में गमेती, फला में घर, चिमाता पहाड़ पर, दजिया धरती पर, वालरा जंगल में”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

भील संस्कृति पर प्रश्न शब्दावली (गमेती, पाल, फला, दापा, छेड़ा फाड़ना, चिमाता, वालरा), नृत्य (गवरी, हाथीमना) और इतिहास (राणा पूंजा, गोविंद गुरु) — तीनों से आते हैं। भूगोल के ‘जनजातियाँ’ और इतिहास के ‘जनजातीय आंदोलन’ अध्याय के साथ यह लेख पढ़ें।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • जनगणना 2011 — राजस्थान की अनुसूचित जनजातियाँ (भील — 41,00,264)।
  • RajRAS — ‘Rajasthan Tribes’: भील बस्ती (पाल, फला), गमेती, टापरा-कू-ढालिया, विवाह-प्रथाएँ, छेड़ा फाड़ना, नृत्य, चिमाता-दजिया-वालरा।
  • माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान, उदयपुर।
  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: भील जनजाति की संस्कृति: नृत्य, त्योहार, वेशभूषा एवं परंपराएँ

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: ‘भील’ शब्द की व्युत्पत्ति और ‘भराड़ी’ जैसी कुछ परंपराएँ परीक्षा-पुस्तकों/लोक-परंपरा पर आधारित हैं; सामाजिक शब्दावली क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है। जनसंख्या-आँकड़े जनगणना 2011 के हैं।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 3 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. भीलों में गाँव के मुखिया को क्या कहते हैं?

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Q2. भीलों में पहाड़ी ढलानों पर की जाने वाली खेती को कहते हैं —

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Q3. भील समाज में विवाह-विच्छेद की प्रथा कहलाती है —

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Q4. मेवाड़ भील कोर का गठन कहाँ हुआ?

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Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा भीलों का नृत्य नहीं है?

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

भील जनजाति मुख्यतः बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और प्रतापगढ़ में तथा सिरोही, चित्तौड़गढ़, राजसमंद व भीलवाड़ा के कुछ भागों में निवास करती है।

भीलों के घर को टापरा या कू कहा जाता है और घर के आगे के बरामदे को ढालिया कहते हैं।

भीलों में मोर बंधिया, दापा (वधू-मूल्य), सेवा विवाह, विनिमय विवाह और हरण विवाह जैसी प्रथाएँ प्रचलित रही हैं; विवाह-विच्छेद को ‘छेड़ा फाड़ना’ कहते हैं।

हाथीमना भील पुरुषों द्वारा विवाह के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य है।

राणा पूंजा भील सरदार थे, जिन्होंने हल्दीघाटी युद्ध (1576) में महाराणा प्रताप का साथ दिया।

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