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राजस्थान इतिहास

मारवाड़ के प्रमुख शासक: राव जोधा से अजीत सिंह तक Timeline

Sudhir Dhaka (इतिहास विशेषज्ञ)
1 सितंबर 2026
7 मिनट पठन
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मारवाड़ के प्रमुख शासक: राव जोधा से अजीत सिंह तक Timeline

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मारवाड़ के प्रमुख शासकों का कालक्रम, शासनकाल, प्रमुख घटनाएँ और RPSC/RAS/Rajasthan CET के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

मारवाड़ के इतिहास में राठौड़ वंश का विशेष स्थान है। आधुनिक राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित मारवाड़ की राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से मंडोर और बाद में जोधपुर को केंद्र बनाकर विकसित हुई। राठौड़ शासकों ने मेवाड़, गुजरात, दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य जैसी शक्तियों के साथ अलग-अलग समय पर संघर्ष, संधि और राजनीतिक संबंध बनाए।

मारवाड़ के इतिहास को समझने के लिए केवल राव जोधा, राव मालदेव या महाराजा जसवंत सिंह की अलग-अलग जीवनी पढ़ना पर्याप्त नहीं है। परीक्षा की दृष्टि से यह जानना भी जरूरी है कि कौन शासक कब आया, उसका प्रमुख राजनीतिक रुख क्या था और उसके शासनकाल में कौन-सी महत्वपूर्ण घटना हुई।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में भी मारवाड़ के राठौड़ वंश के प्रमुख शासकों में राव धूड़, राव रणमल, राव जोधा, राव मालदेव, राव चन्द्रसेन, मोटा राजा उदयसिंह और महाराजा जसवंतसिंह प्रथम को विशेष रूप से शामिल किया गया है। (Rajasthan Education Board)

इस लेख में राव जोधा से अजीत सिंह तक मारवाड़ के प्रमुख शासकों का क्रमबद्ध अध्ययन किया गया है।


एक नजर में मारवाड़ के प्रमुख शासकों की Timeline

क्रम

शासक

शासनकाल

प्रमुख पहचान

1

राव जोधा

1438–1489 ई.

जोधपुर की स्थापना, मेहरानगढ़ की नींव

2

राव सातल

1489–1492 ई.

राव जोधा के उत्तराधिकारी

3

राव सूजा

1492–1515 ई.

राठौड़ सत्ता का निरंतर विस्तार

4

राव गंगा

1515–1532 ई.

राणा सांगा के समय का शासक

5

राव मालदेव

1532–1562 ई.

मारवाड़ के सबसे शक्तिशाली शासकों में से एक

6

राव चन्द्रसेन

1562–1581 ई.

अकबर के विरुद्ध लंबे प्रतिरोध के लिए प्रसिद्ध

7

मोटा राजा उदयसिंह

1583–1595 ई.

मुगल अधीनता स्वीकार करने वाला प्रमुख मारवाड़ शासक

8

महाराजा सूरसिंह

1595–1619 ई.

मुगल सेवा और दक्षिणी अभियानों में भूमिका

9

महाराजा गजसिंह प्रथम

1619–1638 ई.

मुगल दरबार में प्रभावशाली राठौड़ शासक

10

महाराजा जसवंत सिंह प्रथम

1638–1678 ई.

मुगल उत्तराधिकार संघर्ष और मारवाड़ की राजनीति

11

महाराजा अजीत सिंह

1679–1724 ई.

मारवाड़ की पुनर्स्थापना और मुगल विरोधी संघर्ष

ध्यान दें: विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों में कुछ शासकों के शासनकाल की तिथियों में मामूली अंतर मिल सकता है। परीक्षा में सामान्यतः प्रचलित तिथियों को प्राथमिकता दी जाती है।


मारवाड़ और राठौड़ वंश की पृष्ठभूमि

मारवाड़ के मध्यकालीन इतिहास में राठौड़ वंश का उदय मंडोर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। राव रणमल मारवाड़ के प्रभावशाली राठौड़ शासकों में थे। 1438 ई. में उनकी हत्या के बाद उनके पुत्र राव जोधा ने अपनी शक्ति को संगठित किया और अंततः मारवाड़ की सत्ता को मजबूत किया।

राव जोधा ने 1459 ई. में जोधपुर की स्थापना की और मंडोर से नई राजधानी को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की। राजस्थान पर्यटन विभाग भी जोधपुर की स्थापना को 1459 ई. में राव जोधा से जोड़ता है। (Rajasthan Tourism)

यहीं से मारवाड़ के इतिहास का एक नया चरण शुरू होता है।


1. राव जोधा

शासनकाल: 1438–1489 ई.

राव जोधा मारवाड़ के सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक राठौड़ शासकों में गिने जाते हैं। वे राव रणमल के पुत्र थे। 1438 ई. में रणमल की हत्या के बाद जोधा को कठिन राजनीतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने अपनी शक्ति को धीरे-धीरे संगठित किया और 1453 ई. के आसपास मंडोर पर पुनः अधिकार स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने मारवाड़ में राठौड़ सत्ता को मजबूत किया।

जोधपुर की स्थापना

राव जोधा की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि 1459 ई. में जोधपुर की स्थापना थी।

उन्होंने मंडोर के दक्षिण में एक रणनीतिक पहाड़ी पर नए दुर्ग का निर्माण शुरू कराया। यह दुर्ग आगे चलकर मेहरानगढ़ दुर्ग के नाम से प्रसिद्ध हुआ। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार राव जोधा ने 1459 ई. में मंडोर से लगभग छह मील दक्षिण में नई राजधानी के लिए दुर्ग का निर्माण शुरू कराया था। (Rajasthan Tourism)

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

  • राव जोधा → जोधपुर के संस्थापक

  • जोधपुर की स्थापना → 1459 ई.

  • मेहरानगढ़ दुर्ग → राव जोधा के समय निर्माण की शुरुआत

  • पुरानी राजधानी → मंडोर

  • राव जोधा → राव रणमल के पुत्र

Exam Trap:
राव जोधा ने बीकानेर की स्थापना नहीं की थी। बीकानेर की स्थापना उनके पुत्र राव बीका ने की थी। बीकानेर नगर के आधिकारिक इतिहास के अनुसार राव बीका ने 1488 ई. के आसपास जांगल प्रदेश में अपना राज्य स्थापित किया। (Urban Rajasthan)


2. राव सातल

शासनकाल: लगभग 1489–1492 ई.

राव जोधा के बाद उनके पुत्र राव सातल मारवाड़ की गद्दी पर बैठे।

उनका शासनकाल बहुत लंबा नहीं रहा। इसलिए मारवाड़ के इतिहास में उनका स्थान राव जोधा या राव मालदेव जितना प्रमुख नहीं है, लेकिन परीक्षा में राठौड़ शासकों के क्रम से संबंधित प्रश्नों में उनका नाम महत्वपूर्ण हो सकता है।

याद रखने योग्य क्रम

जोधा → सातल


3. राव सूजा

शासनकाल: लगभग 1492–1515 ई.

राव सातल के बाद राव सूजा मारवाड़ के शासक बने।

उनके शासनकाल में राठौड़ राज्य की राजनीतिक स्थिति को बनाए रखने का प्रयास जारी रहा। उनके बाद राव गंगा सत्ता में आए।

परीक्षा तथ्य

राव सातल के बाद → राव सूजा


4. राव गंगा

शासनकाल: 1515–1532 ई.

राव गंगा मारवाड़ के महत्वपूर्ण राठौड़ शासकों में थे। उनका समय मेवाड़ के प्रसिद्ध शासक राणा सांगा के काल से जुड़ा हुआ था।

राव गंगा के समय मारवाड़ और मेवाड़ के बीच राजनीतिक संबंध भी महत्वपूर्ण रहे।

खानवा का युद्ध

1527 ई. में बाबर और राणा सांगा के बीच खानवा का युद्ध हुआ। राठौड़ परंपरा और राजस्थान के इतिहास में राव गंगा के संबंध को इस काल की राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ा जाता है।

राव गंगा के बाद उनके पुत्र राव मालदेव मारवाड़ की गद्दी पर बैठे।


5. राव मालदेव

शासनकाल: 1532–1562 ई.

राव मालदेव को मारवाड़ के सबसे शक्तिशाली शासकों में गिना जाता है।

उनके शासनकाल में मारवाड़ की राजनीतिक और सैन्य शक्ति काफी बढ़ी। उन्होंने राज्य के विस्तार के लिए अनेक अभियान चलाए।

राजस्थान बोर्ड की इतिहास सामग्री में भी राव मालदेव को मारवाड़ के प्रमुख शासकों में शामिल किया गया है। स्रोत के अनुसार उन्होंने खानवा के युद्ध में अपने पिता राव गंगा की ओर से भाग लिया था और 1532 ई. में बहादुर शाह के मेवाड़ पर आक्रमण के समय भी सहायता की थी। (Rajasthan Education Board)

शेरशाह सूरी और मालदेव

राव मालदेव के शासनकाल की सबसे प्रसिद्ध घटना सुमेल/गिरी-सुमेल का युद्ध है।

1544 ई. में राव मालदेव और शेरशाह सूरी की सेनाओं के बीच संघर्ष हुआ। मारवाड़ की सेना ने कड़ा प्रतिरोध किया।

शेरशाह सूरी ने राठौड़ सैनिकों के साहस को देखते हुए मारवाड़ की सेना की वीरता की प्रशंसा की थी। यह घटना राव मालदेव के सैन्य प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

मालदेव का महत्व

राव मालदेव ने मारवाड़ की सीमाओं और राजनीतिक प्रभाव का विस्तार किया। उनके समय मारवाड़ राजस्थान की प्रमुख शक्तियों में शामिल हो गया।

परीक्षा के लिए

  • राव मालदेव → मारवाड़ का शक्तिशाली शासक

  • शासनकाल → 1532–1562 ई.

  • प्रमुख संघर्ष → शेरशाह सूरी

  • प्रमुख युद्ध → सुमेल/गिरी-सुमेल, 1544 ई.

  • उनके बाद → राव चन्द्रसेन


6. राव चन्द्रसेन

शासनकाल: 1562–1581 ई.

राव चन्द्रसेन राव मालदेव के पुत्र थे और मारवाड़ के इतिहास में मुगल विरोधी प्रतिरोध के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

मालदेव की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष हुआ। अंततः 31 दिसंबर 1562 ई. को चन्द्रसेन जोधपुर की गद्दी पर बैठे। राजस्थान बोर्ड की इतिहास सामग्री में भी उनका शासनकाल 1562–1581 ई. दिया गया है। (Rajasthan Education Board)

अकबर के साथ संघर्ष

अकबर ने राजस्थान में अपनी राजनीतिक शक्ति का विस्तार शुरू किया। मारवाड़ भी मुगल विस्तार की नीति से प्रभावित हुआ।

चन्द्रसेन ने अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और लंबे समय तक मुगल शक्ति का विरोध किया।

मुगलों ने चन्द्रसेन के विरुद्ध कई सैन्य अभियान चलाए। चन्द्रसेन ने परिस्थितियों के अनुसार दुर्गों और पहाड़ी क्षेत्रों का उपयोग करते हुए संघर्ष जारी रखा। राजस्थान बोर्ड की सामग्री में सिवाना क्षेत्र में उनके प्रतिरोध और पहाड़ी क्षेत्रों से मुगल सेना के विरुद्ध छापामार शैली के संघर्ष का उल्लेख मिलता है। (Rajasthan Education Board)

चन्द्रसेन का ऐतिहासिक महत्व

राव चन्द्रसेन को राजस्थान के उन शासकों में रखा जाता है जिन्होंने अकबर की विस्तारवादी नीति के सामने स्वतंत्र राजनीतिक स्थिति बनाए रखने का प्रयास किया।

Exam Trap:
राव चन्द्रसेन को अकबर की अधीनता स्वीकार करने वाला शासक नहीं माना जाता। उनके बाद मारवाड़ की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया।


7. मोटा राजा उदयसिंह

शासनकाल: 1583–1595 ई.

राव चन्द्रसेन की मृत्यु के बाद मारवाड़ की स्थिति कुछ समय के लिए अस्थिर रही। लगभग 1581 से 1583 तक जोधपुर राज्य मुगल नियंत्रण में रहा।

1583 ई. में अकबर ने उदयसिंह को मारवाड़ की गद्दी पर बैठाया।

उदयसिंह को इतिहास में “मोटा राजा” के नाम से जाना जाता है।

राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं में यह बहुत महत्वपूर्ण तथ्य है। राजस्थान के परीक्षा-संबंधी स्रोतों में भी उदयसिंह को “मोटा राजा” बताया गया है और उनका शासनकाल 1583–1595 ई. दिया गया है। (RajasthanGyan)

मुगल संबंध

उदयसिंह ने मुगल सत्ता के साथ सहयोग की नीति अपनाई। उनके समय मारवाड़ और मुगल साम्राज्य के संबंध पहले की तुलना में अधिक सहयोगपूर्ण हुए।

उनकी पुत्री मानमती का विवाह मुगल शहजादे सलीम से हुआ। आगे चलकर यही सलीम सम्राट जहांगीर बना।

परीक्षा के लिए

  • उदयसिंह → मोटा राजा

  • शासनकाल → 1583–1595 ई.

  • मुगल अधीनता स्वीकार करने वाले प्रमुख मारवाड़ शासक

  • पुत्री मानमती → सलीम से विवाह

याद रखने की ट्रिक:
“मोटा राजा = उदयसिंह”


8. महाराजा सूरसिंह

शासनकाल: 1595–1619 ई.

उदयसिंह के बाद उनके पुत्र सूरसिंह मारवाड़ की गद्दी पर बैठे।

उनके शासनकाल में मारवाड़ और मुगल साम्राज्य के बीच सहयोग की नीति आगे बढ़ी। सूरसिंह ने मुगल अभियानों में भाग लिया और मुगल दरबार में अपनी स्थिति मजबूत की।

इस समय तक राठौड़ शासकों और मुगल साम्राज्य के बीच संबंधों का स्वरूप चन्द्रसेन के समय के प्रतिरोध से बदलकर राजनीतिक सहयोग का हो चुका था।

परीक्षा के लिए

उदयसिंह → सूरसिंह

यह क्रम विशेष रूप से याद रखें।


9. महाराजा गजसिंह प्रथम

शासनकाल: 1619–1638 ई.

सूरसिंह के बाद उनके पुत्र गजसिंह प्रथम मारवाड़ के शासक बने।

गजसिंह का शासनकाल मुगल सम्राट जहांगीर और शाहजहाँ के समय से जुड़ा हुआ था। वे मुगल राजनीतिक व्यवस्था में प्रभावशाली राजपूत शासकों में रहे।

उनके शासनकाल में राठौड़-मुगल संबंधों का राजनीतिक महत्व बढ़ा।

अमरसिंह राठौड़

गजसिंह के पुत्रों में अमर सिंह राठौड़ विशेष रूप से प्रसिद्ध हुए। वे अपने शौर्य और स्वतंत्र स्वभाव के लिए जाने जाते हैं।

गजसिंह की मृत्यु के बाद उनके कनिष्ठ पुत्र जसवंत सिंह को मारवाड़ की गद्दी मिली। राजस्थान के कला एवं संस्कृति विभाग के अनुसार शाहजहाँ ने गजसिंह की इच्छा के अनुसार जसवंत सिंह का राजतिलक कराया था। (Jawahar Kala Kendra)


10. महाराजा जसवंत सिंह प्रथम

शासनकाल: 1638–1678 ई.

महाराजा जसवंत सिंह प्रथम मारवाड़ के सबसे प्रसिद्ध शासकों में से एक थे।

वे गजसिंह प्रथम के पुत्र थे। 1638 ई. में वे मारवाड़ के शासक बने। राजस्थान के इतिहास संबंधी शैक्षणिक स्रोतों में भी उनका शासनकाल 1638–1678 ई. दिया गया है। (VMOU Assets)

शाहजहाँ ने उन्हें “महाराजा” की उपाधि प्रदान की।

मुगल उत्तराधिकार संघर्ष

1657 ई. में शाहजहाँ के बीमार पड़ने के बाद उसके पुत्रों के बीच उत्तराधिकार संघर्ष शुरू हुआ।

जसवंत सिंह ने प्रारंभ में दाराशिकोह का पक्ष लिया।

1658 ई. में धरमत का युद्ध हुआ, जिसमें औरंगजेब और मुराद की सेना का सामना दारा पक्ष की सेना से हुआ। जसवंत सिंह की सेना को पराजय का सामना करना पड़ा।

बाद में राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार जसवंत सिंह मुगल सेवा में बने रहे।

दक्षिण और अफगान क्षेत्र में भूमिका

जसवंत सिंह ने मुगल साम्राज्य के विभिन्न सैन्य अभियानों में भाग लिया। बाद में उन्हें अफगान क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।

1678 ई. में जमरूद में उनकी मृत्यु हो गई।

उनकी मृत्यु के बाद मारवाड़ के सामने उत्तराधिकार का गंभीर संकट पैदा हुआ।


11. महाराजा अजीत सिंह

शासनकाल: 1679–1724 ई.

महाराजा अजीत सिंह, जसवंत सिंह के पुत्र थे। उनके जन्म के समय से ही मारवाड़ की राजनीति में उत्तराधिकार का प्रश्न महत्वपूर्ण बन गया था।

जसवंत सिंह की मृत्यु 1678 ई. में जमरूद में हुई। उनके पीछे तत्काल कोई वयस्क उत्तराधिकारी नहीं था। इसी परिस्थिति का लाभ उठाकर औरंगजेब ने मारवाड़ पर मुगल नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया।

अजीत सिंह का जीवन इसी संघर्ष के बीच आगे बढ़ा।


अजीत सिंह और मारवाड़ की स्वतंत्रता का संघर्ष

अजीत सिंह की रक्षा और मारवाड़ की राजनीतिक स्वतंत्रता के संघर्ष में दुर्गादास राठौड़ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

दुर्गादास ने अजीत सिंह को मुगल नियंत्रण से बचाने और राठौड़ सत्ता को पुनः स्थापित करने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया।

NCERT की कला इतिहास सामग्री में भी अजीत सिंह के 1679–1724 ई. के शासनकाल को औरंगजेब के साथ लंबे संघर्ष के बाद मारवाड़ की पुनर्स्थापना से जोड़ा गया है और दुर्गादास राठौड़ की भूमिका का उल्लेख मिलता है। (Sathee)

1707 के बाद स्थिति

1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य में उत्तराधिकार संघर्ष शुरू हुआ।

इस राजनीतिक स्थिति का लाभ राजपूत राज्यों ने उठाया।

अजीत सिंह ने मारवाड़ पर अपने अधिकार को मजबूत किया और अंततः जोधपुर पर राठौड़ सत्ता की पुनर्स्थापना हुई।

देवरी समझौता

1708 ई. का देवरी समझौता राजस्थान के इतिहास में महत्वपूर्ण है। इसमें मारवाड़ के अजीत सिंह, मेवाड़ के अमर सिंह द्वितीय और जयपुर के सवाई जयसिंह द्वितीय के बीच राजनीतिक संबंधों को नया स्वरूप मिला।

अजीत सिंह के शासनकाल में मारवाड़ की राजनीतिक स्थिति काफी मजबूत हुई।

अजीत सिंह और मुगल संबंध

बाद के समय में अजीत सिंह ने मुगल दरबार के साथ भी राजनीतिक संबंध बनाए। उन्होंने अपनी पुत्री इंद्रकंवर का विवाह मुगल सम्राट फर्रुखसियर से किया।

अजीत सिंह की मृत्यु 1724 ई. में हुई।


राव जोधा से अजीत सिंह तक पूरा कालक्रम

इसे परीक्षा से पहले एक बार जरूर revise करें:

राव जोधा

राव सातल

राव सूजा

राव गंगा

राव मालदेव

राव चन्द्रसेन

मोटा राजा उदयसिंह

महाराजा सूरसिंह

महाराजा गजसिंह प्रथम

महाराजा जसवंत सिंह प्रथम

महाराजा अजीत सिंह


मारवाड़ के शासकों की प्रमुख घटनाओं की Timeline

वर्ष

घटना

संबंधित शासक

1438 ई.

राव रणमल की हत्या

राव जोधा

1453 ई.

मंडोर पर पुनः अधिकार

राव जोधा

1459 ई.

जोधपुर की स्थापना एवं मेहरानगढ़ निर्माण की शुरुआत

राव जोधा

1489 ई.

राव जोधा की मृत्यु

राव सातल उत्तराधिकारी

1515 ई.

राव गंगा का शासन शुरू

राव गंगा

1527 ई.

खानवा का युद्ध

राव गंगा का काल

1532 ई.

राव मालदेव सत्ता में आए

राव मालदेव

1544 ई.

सुमेल/गिरी-सुमेल का युद्ध

राव मालदेव

1562 ई.

चन्द्रसेन मारवाड़ की गद्दी पर

राव चन्द्रसेन

1570 के दशक

मुगलों के विरुद्ध चन्द्रसेन का संघर्ष

राव चन्द्रसेन

1581–83 ई.

जोधपुर पर मुगल नियंत्रण

अकबर

1583 ई.

उदयसिंह को मारवाड़ की गद्दी

मोटा राजा उदयसिंह

1595 ई.

सूरसिंह शासक बने

सूरसिंह

1619 ई.

गजसिंह प्रथम शासक बने

गजसिंह

1638 ई.

जसवंत सिंह शासक बने

जसवंत सिंह

1658 ई.

धरमत का युद्ध

जसवंत सिंह

1678 ई.

जसवंत सिंह की जमरूद में मृत्यु

जसवंत सिंह

1679 ई.

अजीत सिंह का जन्म/उत्तराधिकार संकट

अजीत सिंह

1679–1707 ई.

मारवाड़ की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष

अजीत सिंह व दुर्गादास

1707 ई.

औरंगजेब की मृत्यु

अजीत सिंह

1708 ई.

देवरी समझौता

अजीत सिंह

1724 ई.

अजीत सिंह की मृत्यु

अजीत सिंह


मारवाड़ के शासकों की तुलना

शासक

मुख्य पहचान

मुगलों के प्रति नीति

राव जोधा

जोधपुर की स्थापना

स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति

राव मालदेव

राज्य का विस्तार, सुमेल युद्ध

स्वतंत्र शक्ति

राव चन्द्रसेन

अकबर के विरुद्ध संघर्ष

मुगल विरोध

मोटा राजा उदयसिंह

मुगल अधीनता स्वीकार

सहयोग

सूरसिंह

मुगल सेवा

सहयोग

गजसिंह

मुगल दरबार में प्रभाव

सहयोग

जसवंत सिंह

मुगल सेवा + राजनीतिक स्वायत्तता

परिस्थितिनुसार सहयोग/तनाव

अजीत सिंह

मारवाड़ की पुनर्स्थापना

प्रारंभिक संघर्ष, बाद में राजनीतिक समझौते


राव चन्द्रसेन और अजीत सिंह में अंतर

दोनों को मारवाड़ के मुगल विरोधी इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन दोनों की परिस्थितियाँ अलग थीं।

आधार

राव चन्द्रसेन

अजीत सिंह

काल

16वीं शताब्दी

17वीं–18वीं शताब्दी

प्रमुख मुगल शासक

अकबर

औरंगजेब एवं उसके उत्तराधिकारी

मुख्य उद्देश्य

मारवाड़ की स्वतंत्रता बनाए रखना

राठौड़ सत्ता की पुनर्स्थापना

प्रमुख सहयोगी/योद्धा

राठौड़ सरदार

दुर्गादास राठौड़

संघर्ष का स्वरूप

मुगल विस्तार का प्रतिरोध

उत्तराधिकार एवं राज्य पुनः प्राप्ति का संघर्ष

इसलिए “चन्द्रसेन = अकबर के विरुद्ध प्रतिरोध” और “अजीत सिंह = मारवाड़ की पुनर्स्थापना” को अलग-अलग याद करना चाहिए।


महाराजा जसवंत सिंह और अजीत सिंह का संबंध

यह प्रश्न कई बार भ्रम पैदा करता है।

जसवंत सिंह → पिता
अजीत सिंह → पुत्र

जसवंत सिंह की मृत्यु 1678 ई. में जमरूद में हुई। इसके बाद अजीत सिंह के उत्तराधिकार को लेकर मारवाड़ और मुगल सत्ता के बीच संघर्ष हुआ।

इसी संघर्ष के दौरान दुर्गादास राठौड़ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई।


मारवाड़ के इतिहास में दुर्गादास राठौड़ की भूमिका

अजीत सिंह के इतिहास को दुर्गादास राठौड़ से अलग करके नहीं पढ़ा जा सकता।

दुर्गादास ने मुगल सत्ता के विरुद्ध राठौड़ हितों की रक्षा की और अजीत सिंह के अधिकार को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजस्थान बोर्ड की सामग्री के अनुसार दुर्गादास जसवंत सिंह की सेवा में थे और जसवंत सिंह ने उनके शौर्य को पहचाना था। जसवंत सिंह की 1678 ई. में जमरूद में मृत्यु के बाद मारवाड़ की राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल गई। (Rajasthan Education Board)

इसलिए परीक्षा में यह संबंध याद रखें:

जसवंत सिंह → अजीत सिंह → दुर्गादास राठौड़ → मारवाड़ की पुनर्स्थापना


परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले तथ्य

1. जोधपुर की स्थापना किसने की?

राव जोधा ने।

2. जोधपुर की स्थापना कब हुई?

1459 ई.

राजस्थान पर्यटन विभाग भी जोधपुर की स्थापना को 1459 ई. में राव जोधा से जोड़ता है। (Rajasthan Tourism)

3. राव जोधा किसके पुत्र थे?

राव रणमल के।

4. मारवाड़ का शक्तिशाली शासक किसे कहा जाता है?

राव मालदेव को मारवाड़ के सबसे शक्तिशाली मध्यकालीन शासकों में माना जाता है।

5. सुमेल का युद्ध किसके बीच हुआ?

राव मालदेव और शेरशाह सूरी के बीच, 1544 ई. में।

6. अकबर का प्रमुख मारवाड़ विरोधी कौन था?

राव चन्द्रसेन।

7. मोटा राजा किसे कहा जाता है?

उदयसिंह।

8. उदयसिंह का शासनकाल क्या था?

1583–1595 ई.

9. महाराजा जसवंत सिंह का शासनकाल?

1638–1678 ई.

10. जसवंत सिंह की मृत्यु कहाँ हुई?

जमरूद।

11. अजीत सिंह किसके पुत्र थे?

महाराजा जसवंत सिंह प्रथम के।

12. अजीत सिंह के संघर्ष में प्रमुख राठौड़ योद्धा कौन थे?

दुर्गादास राठौड़।

13. अजीत सिंह का शासनकाल?

1679–1724 ई.


Exam Trap: इन तथ्यों में गलती न करें

राव जोधा और राव बीका

दोनों को एक ही वंश से होने के कारण विद्यार्थी अक्सर भ्रमित करते हैं।

  • राव जोधा → जोधपुर

  • राव बीका → बीकानेर

राव बीका, राव जोधा के पुत्र थे और उन्होंने जांगल प्रदेश में बीकानेर राज्य की स्थापना की। (Urban Rajasthan)

चन्द्रसेन और उदयसिंह

  • चन्द्रसेन → मुगल विरोध

  • उदयसिंह → मुगल अधीनता/सहयोग

जसवंत सिंह और अजीत सिंह

  • जसवंत सिंह → पिता

  • अजीत सिंह → पुत्र

मालदेव और चन्द्रसेन

  • मालदेव → पिता

  • चन्द्रसेन → पुत्र


Quick Revision Chart

राव जोधा
→ 1459 में जोधपुर की स्थापना

राव मालदेव
→ मारवाड़ का विस्तार
→ 1544 सुमेल युद्ध

राव चन्द्रसेन
→ अकबर का विरोध
→ मुगल विरोधी प्रतिरोध

मोटा राजा उदयसिंह
→ 1583 में सत्ता
→ मुगल अधीनता स्वीकार

सूरसिंह
→ मुगल सेवा

गजसिंह प्रथम
→ मुगल दरबार में प्रभाव

जसवंत सिंह प्रथम
→ 1638–1678
→ मुगल उत्तराधिकार संघर्ष
→ 1678 जमरूद में मृत्यु

अजीत सिंह
→ 1679–1724
→ दुर्गादास के साथ संघर्ष
→ मारवाड़ की पुनर्स्थापना


याद रखने की आसान ट्रिक

शासकों के क्रम को इस तरह याद करें:

“जोधा-सातल-सूजा-गंगा, मालदेव-चन्द्रसेन-अुदय; सूर-गज-जसवंत-अजीत”

या छोटे रूप में:

जो → सा → सू → गं → मा → चं → उ → सू → ग → ज → अ

जहाँ:

  • जो = जोधा

  • सा = सातल

  • सू = सूजा

  • गं = गंगा

  • मा = मालदेव

  • चं = चन्द्रसेन

  • उ = उदयसिंह

  • सू = सूरसिंह

  • ग = गजसिंह

  • ज = जसवंत सिंह

  • अ = अजीत सिंह


RPSC और Rajasthan CET के लिए सबसे महत्वपूर्ण 10 तथ्य

  1. जोधपुर की स्थापना - राव जोधा - 1459 ई.

  2. राव जोधा - राव रणमल के पुत्र।

  3. राव मालदेव - 1532–1562 ई.

  4. सुमेल का युद्ध - 1544 ई.

  5. सुमेल का युद्ध - राव मालदेव बनाम शेरशाह सूरी।

  6. राव चन्द्रसेन - अकबर के विरुद्ध संघर्ष।

  7. मोटा राजा - उदयसिंह।

  8. उदयसिंह - 1583–1595 ई.

  9. जसवंत सिंह - 1638–1678 ई., मृत्यु जमरूद में।

  10. अजीत सिंह - 1679–1724 ई., दुर्गादास राठौड़ के संघर्ष से जुड़ा।


निष्कर्ष

राव जोधा से अजीत सिंह तक मारवाड़ का इतिहास केवल शासकों की सूची नहीं है। यह राज्य निर्माण, क्षेत्रीय विस्तार, मुगल सत्ता के साथ संघर्ष और सहयोग तथा अंततः राठौड़ सत्ता की पुनर्स्थापना की कहानी है।

राव जोधा ने 1459 ई. में जोधपुर की स्थापना करके मारवाड़ को एक मजबूत राजनीतिक केंद्र दिया। राव मालदेव के समय मारवाड़ की शक्ति अपने चरम पर पहुँची। राव चन्द्रसेन ने अकबर की विस्तारवादी नीति के सामने प्रतिरोध किया, जबकि मोटा राजा उदयसिंह के समय मारवाड़ और मुगल साम्राज्य के संबंधों में सहयोग का दौर शुरू हुआ।

सूरसिंह, गजसिंह और जसवंत सिंह के समय राठौड़ शासक मुगल राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बने, लेकिन जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद स्थिति फिर बदल गई। अजीत सिंह और दुर्गादास राठौड़ के संघर्ष ने मारवाड़ की राजनीतिक स्वतंत्रता और राठौड़ सत्ता की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसलिए परीक्षा के लिए इस पूरे अध्याय को एक लाइन में ऐसे याद किया जा सकता है:

राव जोधा = जोधपुर की स्थापना → मालदेव = विस्तार → चन्द्रसेन = मुगल विरोध → उदयसिंह = मुगल अधीनता → जसवंत सिंह = मुगल राजनीति → अजीत सिंह = मारवाड़ की पुनर्स्थापना

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स्रोत: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इतिहास सामग्री, राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार के आधिकारिक स्रोत तथा NCERT/SATHEE सामग्री। (Rajasthan Education Board)

अंतिम संशोधन (Last Updated): 1 सितंबर 2026
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