राजस्थान के प्रमुख लोक गायक एवं गायिकाएँ
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राजस्थान के प्रमुख लोक गायक एवं गायिकाएँ
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⚡ Quick Answer: राजस्थान के प्रमुख लोक गायक-गायिकाएँ — मांड: अल्लाह जिलाई बाई (बीकानेर, पद्मश्री 1982 — ‘केसरिया बालम’), गवरी देवी (जोधपुर), मांगी बाई आर्य (उदयपुर), जमीला बानो (जोधपुर), बन्नो बेगम (जयपुर); मांगणियार: साकर खाँ (कमायचा, पद्मश्री 2012), अनवर खाँ (पद्मश्री 2020), लाखा खाँ (सिंधी सारंगी, पद्मश्री 2021), मामे खाँ, स्वरूप खाँ, कुटले खाँ; अन्य: इला अरुण (लोक-पॉप), उस्ताद सुल्तान खाँ (सारंगी-गायन, सीकर, पद्मभूषण 2010), अहमद हुसैन-मोहम्मद हुसैन (ग़ज़ल, जयपुर, पद्मश्री 2023), जगजीत सिंह (ग़ज़ल, जन्म श्रीगंगानगर), उस्ताद अल्लादिया खाँ (उनियारा — जयपुर-अतरौली घराना)।
1. राजस्थान की गायक परंपरा — परिचय
राजस्थान में लोक गायन अधिकतर वंशानुगत (Hereditary) परंपरा है — विशेष समुदाय पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने यजमानों (संरक्षकों) के यहाँ जन्म, विवाह, उत्सव और मृत्यु पर गाते रहे हैं। बीसवीं सदी में कोमल कोठारी (रूपायन संस्थान) जैसे शोधकर्ताओं के प्रयासों से ये गायक अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचे।
गायन शैलियों के लिए राजस्थान के प्रमुख लोक गायन और लोकगीतों के लिए राजस्थान के प्रमुख लोकगीत देखें। यह नोट केवल गायक-गायिकाओं, गायक समुदायों और उनके सम्मान पर केंद्रित है।
2. वंशानुगत गायक समुदाय
| समुदाय | क्षेत्र | यजमान/संरक्षक | प्रमुख वाद्य | विशेष |
|---|---|---|---|---|
| मांगणियार | बाड़मेर, जैसलमेर | राजपूत (विशेषकर भाटी) व अन्य हिंदू यजमान | कमायचा, खड़ताल, ढोलक | मुस्लिम गायक, परंतु हिंदू देवी-देवताओं व यजमानों के गीत |
| लंगा | बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर | सिंधी सिपाही (मुस्लिम) यजमान | सिंधी सारंगी, गुजरातण सारंगी, सतारा | सूफ़ियाना व लोक गायन |
| ढाढ़ी | मारवाड़, सिरोही | राजपूत | सारंगी | वीर व प्रेम गाथाएँ — ढोला-मारू |
| मिरासी | मारवाड़, मेवात | विभिन्न | सारंगी, ढोलक | वंशावली-गायन |
| कलावंत | दरबारी | राजा-महाराजा | तानपुरा, पखावज | शास्त्रीय गायन |
| ढोली / दमामी | सम्पूर्ण राजस्थान | ग्राम समुदाय | ढोल, नगाड़ा | मांगलिक अवसरों पर वादन-गायन |
| कामड़ | पाली, जैसलमेर, नागौर | रामदेवजी के भक्त | तंदूरा, मंजीरा | रामदेवजी के भजन; तेरहताली नृत्य |
| भोपे | सम्पूर्ण राजस्थान | लोकदेवता | रावणहत्था, जंतर, डेरू | फड़-वाचन, पवाड़े |
| जोगी (मेव जोगी, नाथ) | मेवात, मारवाड़ | — | भपंग, सारंगी | पंडून का कड़ा, भरथरी |
| कालबेलिया | सपेरा समुदाय | — | पूंगी, खंजरी | कालबेलिया नृत्य-गीत (UNESCO 2010) |
सबसे महत्वपूर्ण अंतर: मांगणियार और लंगा — दोनों पश्चिमी राजस्थान के मुस्लिम गायक समुदाय हैं, परंतु मांगणियार के यजमान हिंदू राजपूत और वाद्य कमायचा; जबकि लंगा के यजमान सिंधी सिपाही (मुस्लिम) और वाद्य सिंधी सारंगी।
3. मांड गायिकाएँ
| गायिका | क्षेत्र | प्रमुख तथ्य |
|---|---|---|
| अल्लाह जिलाई बाई (1902–1992) | बीकानेर | बीकानेर महाराजा गंगासिंह की दरबारी गायिका; ‘केसरिया बालम पधारो म्हारे देश’ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान; पद्मश्री 1982 |
| गवरी देवी | जोधपुर | जोधपुरी मांड की प्रतिष्ठित गायिका |
| मांगी बाई आर्य | उदयपुर | मेवाड़ी (उदयपुरी) मांड |
| जमीला बानो | जोधपुर | मांड गायिका |
| बन्नो बेगम | जयपुर | मांड व ग़ज़ल |
4. मांगणियार गायक — विश्व मंच पर राजस्थान
| गायक | गाँव/जिला | प्रमुख तथ्य |
|---|---|---|
| साकर खाँ (1938–2013) | हमीरा, जैसलमेर | कमायचा के उस्ताद; पद्मश्री 2012 |
| अनवर खाँ मांगणियार | बहिया, बाड़मेर | पद्मश्री 2020; अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ |
| लाखा खाँ | रानेरी, जोधपुर (फलौदी क्षेत्र) | सिंधी सारंगी वादक-गायक; पद्मश्री 2021 |
| मामे खाँ | सत्तो, जैसलमेर | 2022 में कान फ़िल्म महोत्सव के रेड कार्पेट पर चलने वाले प्रथम भारतीय लोक कलाकार |
| स्वरूप खाँ | बाड़मेर | फ़िल्म व टीवी के माध्यम से लोकप्रिय मांगणियार गायक |
| कुटले खाँ | जैसलमेर | लोक-फ़्यूज़न व मंचीय प्रस्तुतियाँ |
कमायचा, खड़ताल व सिंधी सारंगी के वादकों के लिए राजस्थान के लोक वाद्य एवं प्रमुख वादक देखें।
5. अन्य प्रमुख गायक — शास्त्रीय, ग़ज़ल व लोक-पॉप
| गायक | विधा | राजस्थान से संबंध | सम्मान/विशेष |
|---|---|---|---|
| उस्ताद अल्लादिया खाँ (1855–1946) | ख्याल (शास्त्रीय) | जन्म उनियारा (टोंक) | जयपुर-अतरौली घराने के संस्थापक |
| उस्ताद सुल्तान खाँ (1940–2011) | सारंगी व गायन | सीकर | पद्मभूषण 2010; ‘पिया बसंती’ गीत |
| जगजीत सिंह (1941–2011) | ग़ज़ल | जन्म श्रीगंगानगर | पद्मभूषण 2003; ‘ग़ज़ल सम्राट’ |
| अहमद हुसैन – मोहम्मद हुसैन | ग़ज़ल व भजन | जयपुर | पद्मश्री 2023 |
| इला अरुण | लोक-पॉप व अभिनय | जन्म जोधपुर, जयपुर से संबद्ध | राजस्थानी लोकधुनों को फ़िल्मों/पॉप में लोकप्रिय बनाया |
| प्रकाश माली | भजन | बाड़मेर-बालोतरा क्षेत्र | लोक भजन गायक |
6. लोकनृत्य-गायन से जुड़ी प्रमुख कलाकार
| कलाकार | कला | सम्मान/विशेष |
|---|---|---|
| गुलाबो सपेरा | कालबेलिया नृत्य-गायन | पद्मश्री 2016 |
| मांगी बाई (पादरला, पाली) | तेरहताली | तेरहताली को अंतरराष्ट्रीय पहचान |
लोकनृत्यों के लिए कालबेलिया व तेरहताली देखें।
7. लोक गायकों को प्रोत्साहन देने वाली संस्थाएँ
- रूपायन संस्थान, बोरूंदा (जोधपुर) — कोमल कोठारी (पद्मभूषण 2004) व विजयदान देथा; मांगणियार-लंगा को अंतरराष्ट्रीय मंच।
- राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर (1957) — पुरस्कार व फ़ेलोशिप।
- पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर (1986) — शिल्पग्राम उत्सव।
- जोधपुर RIFF (राजस्थान इंटरनेशनल फ़ोक फ़ेस्टिवल) — मेहरानगढ़ में लोक संगीत का अंतरराष्ट्रीय उत्सव।
- जैसलमेर मरु महोत्सव — मांगणियार-लंगा प्रस्तुतियाँ।
8. दरबारी संगीत परंपरा — संरक्षक शासक व संगीत-ग्रंथ
लोक गायकों के साथ-साथ राजस्थान के राज-दरबारों ने शास्त्रीय संगीतज्ञों को भी संरक्षण दिया और संगीत पर महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखवाए। यही दरबारी परंपरा आगे चलकर मांड जैसी अर्द्ध-शास्त्रीय शैलियों की आधारभूमि बनी:
| शासक/संगीतज्ञ | राज्य | संगीत-ग्रंथ / योगदान |
|---|---|---|
| महाराणा कुंभा | मेवाड़ | संगीतराज, संगीत मीमांसा, सूड़ प्रबंध; गीतगोविंद पर ‘रसिकप्रिया’ टीका |
| पुंडरीक विट्ठल | आमेर (कछवाहा दरबार) | सद्रागचंद्रोदय, रागमाला, रागमंजरी, नर्तन निर्णय |
| भावभट्ट | बीकानेर (महाराजा अनूपसिंह) | अनूप संगीत विलास, अनूप संगीत रत्नाकर, अनूपांकुश |
| सवाई प्रतापसिंह | जयपुर | ‘राधा गोविंद संगीत सार’ (देवर्षि ब्रजपाल भट्ट द्वारा संकलित); दरबार में 22 संगीतज्ञों की ‘गंधर्व बाईसी’ |
परीक्षा संकेत: ‘अनूप संगीत रत्नाकर’ (बीकानेर), ‘संगीतराज’ (कुंभा) और ‘गंधर्व बाईसी’ (जयपुर) — ये तीनों तथ्य संगीत-इतिहास के प्रश्नों में बार-बार पूछे जाते हैं।
9. इस टॉपिक को कैसे पढ़ें?
- पहले समुदाय (मांगणियार, लंगा, ढाढ़ी, कामड़, भोपे) को उनके वाद्य व यजमान के साथ याद करें।
- फिर मांड गायिकाओं को क्षेत्र के साथ (बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, जयपुर)।
- इसके बाद पद्म सम्मानित कलाकार वर्ष सहित।
- अंत में शास्त्रीय/ग़ज़ल गायकों का राजस्थान से संबंध (जन्म-स्थान)।
📝 One-Liner Revision — लोक गायक (22 प्रश्न)
- प्रश्न: ‘केसरिया बालम’ की प्रसिद्ध गायिका?
उत्तर: अल्लाह जिलाई बाई - प्रश्न: अल्लाह जिलाई बाई किस जिले से?
उत्तर: बीकानेर - प्रश्न: अल्लाह जिलाई बाई को पद्मश्री?
उत्तर: 1982 - प्रश्न: जोधपुरी मांड गायिका?
उत्तर: गवरी देवी - प्रश्न: उदयपुरी मांड गायिका?
उत्तर: मांगी बाई आर्य - प्रश्न: मांगणियार का प्रमुख वाद्य?
उत्तर: कमायचा - प्रश्न: लंगा का प्रमुख वाद्य?
उत्तर: सिंधी सारंगी - प्रश्न: मांगणियार के यजमान?
उत्तर: हिंदू राजपूत - प्रश्न: लंगा के यजमान?
उत्तर: सिंधी सिपाही (मुस्लिम) - प्रश्न: साकर खाँ को पद्मश्री?
उत्तर: 2012 - प्रश्न: साकर खाँ का गाँव?
उत्तर: हमीरा (जैसलमेर) - प्रश्न: अनवर खाँ मांगणियार को पद्मश्री?
उत्तर: 2020 - प्रश्न: लाखा खाँ का वाद्य?
उत्तर: सिंधी सारंगी (पद्मश्री 2021) - प्रश्न: कान रेड कार्पेट पर प्रथम भारतीय लोक कलाकार?
उत्तर: मामे खाँ (2022) - प्रश्न: जयपुर-अतरौली घराने के संस्थापक?
उत्तर: उस्ताद अल्लादिया खाँ - प्रश्न: अल्लादिया खाँ का जन्म?
उत्तर: उनियारा (टोंक) - प्रश्न: सारंगी के उस्ताद सुल्तान खाँ किस जिले से?
उत्तर: सीकर - प्रश्न: जगजीत सिंह का जन्म?
उत्तर: श्रीगंगानगर - प्रश्न: जयपुर के ग़ज़ल गायक बंधु?
उत्तर: अहमद हुसैन – मोहम्मद हुसैन - प्रश्न: ढोला-मारू गाने वाला समुदाय?
उत्तर: ढाढ़ी - प्रश्न: रामदेवजी के भजन गाने वाला समुदाय?
उत्तर: कामड़ - प्रश्न: रूपायन संस्थान के संस्थापक?
उत्तर: कोमल कोठारी व विजयदान देथा - प्रश्न: ‘संगीतराज’ के रचयिता?
उत्तर: महाराणा कुंभा - प्रश्न: ‘अनूप संगीत रत्नाकर’ किसके दरबार में रचा गया?
उत्तर: बीकानेर के महाराजा अनूपसिंह (भावभट्ट) - प्रश्न: ‘गंधर्व बाईसी’ किस दरबार से?
उत्तर: सवाई प्रतापसिंह, जयपुर - प्रश्न: ‘सद्रागचंद्रोदय’ के रचयिता?
उत्तर: पुंडरीक विट्ठल - प्रश्न: कालबेलिया नृत्य UNESCO सूची में कब?
उत्तर: 2010 - प्रश्न: गुलाबो सपेरा को पद्मश्री?
उत्तर: 2016 - प्रश्न: तेरहताली की प्रसिद्ध कलाकार मांगी बाई का गाँव?
उत्तर: पादरला (पाली) - प्रश्न: कोमल कोठारी को पद्मभूषण?
उत्तर: 2004 - प्रश्न: मरु महोत्सव कहाँ आयोजित होता है?
उत्तर: जैसलमेर - प्रश्न: RIFF लोक संगीत उत्सव कहाँ होता है?
उत्तर: मेहरानगढ़, जोधपुर
✅ मुख्य बिंदु (Key Points) — एक नज़र में
- मांड — अल्लाह जिलाई बाई (बीकानेर), गवरी देवी (जोधपुर), मांगी बाई (उदयपुर)।
- मांगणियार — कमायचा, राजपूत यजमान; लंगा — सिंधी सारंगी, सिंधी सिपाही यजमान।
- पद्मश्री — साकर खाँ (2012), अनवर खाँ (2020), लाखा खाँ (2021)।
- मामे खाँ — कान रेड कार्पेट (2022)।
- शास्त्रीय/ग़ज़ल — अल्लादिया खाँ (उनियारा), सुल्तान खाँ (सीकर), जगजीत सिंह (श्रीगंगानगर), हुसैन बंधु (जयपुर)।
- संस्थाएँ — रूपायन (बोरूंदा), संगीत नाटक अकादमी (जोधपुर)।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- मांगणियार व लंगा के वाद्य बदलना — मांगणियार = कमायचा; लंगा = सिंधी सारंगी।
- अल्लाह जिलाई बाई को जोधपुर से जोड़ना — वे बीकानेर की थीं।
- मांगी बाई (मांड, उदयपुर) व मांगी बाई (तेरहताली, पादरला) को एक मानना — दो अलग कलाकार।
- जगजीत सिंह को पंजाब का मानना — जन्म श्रीगंगानगर (राजस्थान)।
🧠 मेमोरी ट्रिक
“मांगणियार का कमायचा राजपूत के घर, लंगा की सारंगी सिपाही के घर”।
पद्मश्री क्रम: “साकर 12, अनवर 20, लाखा 21”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
लोक गायकों के प्रश्नों में सबसे अधिक ‘मांगणियार बनाम लंगा’ और ‘मांड गायिका–क्षेत्र’ पूछे जाते हैं। पद्म सम्मान वाले कलाकार करेंट अफेयर्स से भी जुड़ते हैं, इसलिए हर वर्ष की पद्म सूची में राजस्थान के कलाकार अवश्य देखें। दो ‘मांगी बाई’ (मांड और तेरहताली) का भ्रम परीक्षक जानबूझकर पैदा करते हैं — इसे अलग से नोट करें।
📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)
- लोक गायन शैलियाँ — मांड, पवाड़ा
- लोकगीत एवं उनसे जुड़े अवसर
- लोक वाद्य एवं प्रमुख वादक
- लोकगीत, गायक व वाद्य — संपूर्ण तुलना
- कालबेलिया
- राजस्थान के प्रमुख लोकगीत
📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- पद्म पुरस्कार सूची — गृह मंत्रालय, भारत सरकार (padmaawards.gov.in)।
- रूपायन संस्थान — कोमल कोठारी के अध्ययन।
- राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर।
- संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली — कलाकार परिचय।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. मांड गायिका अल्लाह जिलाई बाई किस जिले से संबंधित थीं?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. मांगणियार गायकों का प्रमुख वाद्य है —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. लंगा गायकों के यजमान कौन होते हैं?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. जयपुर-अतरौली घराने के संस्थापक का जन्म-स्थान —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह का जन्म कहाँ हुआ?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
बीकानेर की मांड गायिका अल्लाह जिलाई बाई ने ‘केसरिया बालम’ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई; उन्हें 1982 में पद्मश्री मिला।
मांगणियार के यजमान हिंदू राजपूत हैं और उनका प्रमुख वाद्य कमायचा है, जबकि लंगा के यजमान सिंधी सिपाही (मुस्लिम) हैं और उनका प्रमुख वाद्य सिंधी सारंगी है।
जैसलमेर के हमीरा गाँव के मांगणियार कलाकार साकर खाँ को 2012 में पद्मश्री मिला।
जैसलमेर के मांगणियार गायक मामे खाँ 2022 में कान फ़िल्म महोत्सव के रेड कार्पेट पर चलने वाले प्रथम भारतीय लोक कलाकार बने।
जयपुर-अतरौली घराने के संस्थापक उस्ताद अल्लादिया खाँ का जन्म टोंक जिले के उनियारा में हुआ था।
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