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राजस्थान की प्रमुख बोलियाँ: मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी एवं हाड़ौती

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
3 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 3 अक्टूबर 2026
9 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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राजस्थान की प्रमुख बोलियाँ: मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी एवं हाड़ौती

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⚡ Quick Answer: राजस्थान की चार सबसे प्रमुख बोलियाँ — मारवाड़ी (पश्चिमी राजस्थान; सबसे अधिक क्षेत्र; साहित्यिक रूप डिंगल), मेवाड़ी (उदयपुर-राजसमंद-चित्तौड़गढ़-भीलवाड़ा; मारवाड़ी के बाद दूसरी महत्वपूर्ण बोली), ढूंढाड़ी/जयपुरी (जयपुर-दौसा-टोंक; ब्रज व गुजराती प्रभाव; दादू पंथ का साहित्य) और हाड़ौती (कोटा-बूंदी-बारां-झालावाड़; ग्रियर्सन के अनुसार ढूंढाड़ी की उपबोली)। व्याकरण की दृष्टि से पूर्वी राजस्थानी (ढूंढाड़ी-हाड़ौती) में सहायक क्रिया ‘छै’ का प्रयोग इसकी प्रमुख पहचान है, जबकि मारवाड़ी-मेवाड़ी में ‘है’ रूप प्रचलित है।

1. चार प्रमुख बोलियाँ — क्यों महत्वपूर्ण?

राजस्थान के चार बड़े ऐतिहासिक-सांस्कृतिक अंचल — मारवाड़, मेवाड़, ढूंढाड़ और हाड़ौती — अपनी-अपनी बोलियों से पहचाने जाते हैं। “मारवाड़ी और ढूंढाड़ी में क्या अंतर है” या “हाड़ौती बोली कहाँ बोली जाती है” जैसे प्रश्न परीक्षा के साथ-साथ आम खोज में भी बहुत पूछे जाते हैं। इन चार बोलियों को समझ लेने से राजस्थानी भाषा-मानचित्र का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा स्पष्ट हो जाता है।

भाषा की उत्पत्ति व ग्रियर्सन का वर्गीकरण: राजस्थान की भाषाएँ एवं बोलियाँ — Master Guide

2. मारवाड़ी — राजस्थान की सबसे व्यापक बोली

तथ्यविवरण
क्षेत्रजोधपुर, फलोदी, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, नागौर, पाली, जालौर, सिरोही; शेखावाटी-बीकानेर तक उपबोलियाँ
ग्रियर्सन वर्गपश्चिमी राजस्थानी
स्थानक्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे अधिक बोली जाने वाली
साहित्यिक रूपडिंगल — चारण कवियों का वीर-काव्य
प्रमुख उपबोलियाँथली (बीकानेरी), शेखावाटी, बागड़ी, ढटकी, गोड़वाड़ी, देवड़ावाटी, खैराड़ी; कई विद्वान मेवाड़ी को भी इसी समूह में रखते हैं
प्रमुख साहित्यवेलि क्रिसन रुकमणी री, ढोला मारू रा दूहा, नैणसी री ख्यात, बांकीदास री ख्यात, विजयदान देथा की ‘बातां री फुलवाड़ी’
  • ध्वनि-विशेषता: ‘ण’ और मूर्धन्य ‘ळ’ का अधिक प्रयोग — पाणी, घणो, काळो।
  • सर्वनाम: म्हैं/म्हूँ (मैं), थूँ (तू), म्हारो (मेरा), थारो (तेरा)।
  • संबंध-सूचक: रो/री/रा (का/की/के) — ‘नैणसी री ख्यात’, ‘बातां री फुलवाड़ी’।
  • प्रवासी मारवाड़ी समाज के कारण यह बोली कोलकाता, मुंबई, असम तक बोली जाती है।

मारवाड़ी में रचित ख्यात: मुहणोत नैणसी | कहानी: विजयदान देथा

3. मेवाड़ी — मेवाड़ अंचल की बोली

तथ्यविवरण
क्षेत्रउदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा; सलूंबर का भाग
स्थानमारवाड़ी के बाद राजस्थान की दूसरी महत्वपूर्ण बोली
वर्गीकरणपश्चिमी राजस्थानी से निकटता; कई विद्वान मारवाड़ी की उपबोली मानते हैं
प्रभावदक्षिण में भीली-वागड़ी, पूर्व में हाड़ौती-मालवी का प्रभाव
साहित्यमेवाड़ दरबार का साहित्य, लोकगीत; परीक्षा-पुस्तकों में महाराणा कुंभा के नाटकों में मेवाड़ी के प्रयोग का उल्लेख
  • मेवाड़ी में ‘ण’ का प्रयोग मारवाड़ी की तरह; शब्द-भंडार में मारवाड़ी से बहुत समानता।
  • भील बहुल पहाड़ी क्षेत्रों में मेवाड़ी पर भीली का स्पष्ट प्रभाव।
  • मेवाड़ की संस्कृति: मेवाड़ चित्रकला | मेवाड़ महोत्सव (उदयपुर)

🎯 बोली–क्षेत्र मिलान: सबसे आम प्रश्न — अभी अभ्यास करें

‘हाड़ौती किस बोली की उपबोली’, ‘ढूंढाड़ी किस क्षेत्र की’, ‘डिंगल किस बोली का साहित्यिक रूप’ — RSMSSB व RPSC परीक्षाओं में बार-बार। मॉक टेस्ट हल करें:

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4. ढूंढाड़ी (जयपुरी) — ढूंढाड़ अंचल की बोली

तथ्यविवरण
क्षेत्रजयपुर, दौसा, टोंक; अजमेर व किशनगढ़ का भाग
अन्य नामजयपुरी, झाड़शाही
ग्रियर्सन वर्गमध्य-पूर्वी राजस्थानी (पूर्व का मानक)
प्रभावब्रजभाषा और गुजराती
उपबोलियाँतोरावाटी, राजावाटी, काठैड़ा, चौरासी, नागरचोल, अजमेरी, किशनगढ़ी
साहित्यदादू पंथ का संत-साहित्य (दादू वाणी, सुंदरदास, रज्जब) ढूंढाड़ी में
  • सहायक क्रिया ‘छै’: ‘म्हूँ जाऊँ छूँ’ (मैं जाता हूँ), ‘वो आवै छै’ — पूर्वी राजस्थानी की सबसे स्पष्ट पहचान।
  • तोरावाटी: तोरावाटी अंचल (जयपुर का उत्तरी-पूर्वी भाग, सीकर-झुंझुनूं का पूर्वी भाग) की उपबोली।
  • नागरचोल: सवाई माधोपुर-टोंक के पश्चिमी भाग की उपबोली।
  • दादू पंथ का साहित्य: दादूदयाल — जीवन, दर्शन एवं साहित्य

5. हाड़ौती — हाड़ा चौहानों के अंचल की बोली

तथ्यविवरण
क्षेत्रकोटा, बूंदी, बारां; झालावाड़ का उत्तरी भाग
नामकरणहाड़ा चौहान शासकों के क्षेत्र ‘हाड़ौती’ के नाम पर
ग्रियर्सन वर्गमध्य-पूर्वी — ढूंढाड़ी की उपबोली
प्रभावदक्षिण में मालवी का प्रभाव
विशेषसहरिया जनजाति हाड़ौती की एक बोली बोलती है
साहित्यबूंदी दरबार के कवि; लोकगीत

6. चारों बोलियों की तुलना — एक तालिका

आधारमारवाड़ीमेवाड़ीढूंढाड़ीहाड़ौती
अंचलमारवाड़मेवाड़ढूंढाड़हाड़ौती
मुख्य जिलेजोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर, नागौरउदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ाजयपुर, दौसा, टोंककोटा, बूंदी, बारां
ग्रियर्सन वर्गपश्चिमीपश्चिमी (निकटता)मध्य-पूर्वीमध्य-पूर्वी (ढूंढाड़ी की उपबोली)
सहायक क्रियाहैहैछैछै/छो
बाहरी प्रभावसिंधी (पश्चिम), पंजाबी (उत्तर)भीली, मालवीब्रज, गुजरातीमालवी
साहित्यिक पहचानडिंगल, ख्यातदरबारी साहित्य, लोकगीतदादू पंथी संत-साहित्यबूंदी दरबार, लोकगीत

ट्रिक: “पश्चिम ‘है’, पूरब ‘छै’” — मारवाड़ी-मेवाड़ी में ‘है’, ढूंढाड़ी-हाड़ौती में ‘छै’।

7. चारों बोलियों में कुछ सामान्य राजस्थानी शब्द

राजस्थानी शब्दहिंदी अर्थ
छोरो / छोरीलड़का / लड़की
म्हारो / थारोमेरा / तेरा
कठै / अठै / बठैकहाँ / यहाँ / वहाँ
जद / कदजब / कब
कोनीनहीं
घणोबहुत
पाणीपानी
बातकहानी (जैसे ‘बातां री फुलवाड़ी’)

नोट: ये शब्द लगभग पूरे राजस्थान में समझे जाते हैं; उच्चारण और रूप में क्षेत्र के अनुसार हल्का अंतर होता है।

8. चारों बोलियों के अध्ययन की रणनीति

  1. मानचित्र से शुरू करें: राजस्थान के खाली नक्शे पर मारवाड़ (पश्चिम), मेवाड़ (दक्षिण), ढूंढाड़ (पूर्व) और हाड़ौती (दक्षिण-पूर्व) के अंचल रंग से भरें — बोली अपने आप याद होगी।
  2. वर्ग याद करें: मारवाड़ी-मेवाड़ी पश्चिमी; ढूंढाड़ी-हाड़ौती मध्य-पूर्वी — इसी से ‘है/छै’ का अंतर भी याद रहता है।
  3. साहित्य जोड़ें: मारवाड़ी = डिंगल व ख्यात; ढूंढाड़ी = दादू साहित्य; हाड़ौती = बूंदी दरबार (सूर्यमल्ल मिश्रण)।
  4. उपबोलियों को ‘परिवार’ में बाँटें: मारवाड़ी परिवार (थली, ढटकी, गोड़वाड़ी, देवड़ावाटी, शेखावाटी) और ढूंढाड़ी परिवार (तोरावाटी, नागरचोल, काठैड़ा, हाड़ौती)।
  5. अंत में तालिका: परीक्षा से पहले केवल भाग 6 की तुलना तालिका दोहराएँ।

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राजस्थान की चार प्रमुख बोलियाँ कौन-सी हैं?

मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी और हाड़ौती राजस्थान की चार प्रमुख बोलियाँ मानी जाती हैं।

मारवाड़ी और ढूंढाड़ी में क्या अंतर है?

मारवाड़ी पश्चिमी राजस्थान की बोली है जिसका साहित्यिक रूप डिंगल है और जिसमें सहायक क्रिया ‘है’ प्रचलित है; ढूंढाड़ी जयपुर क्षेत्र की मध्य-पूर्वी बोली है जिस पर ब्रज-गुजराती प्रभाव है और जिसमें ‘छै’ का प्रयोग होता है।

हाड़ौती बोली कहाँ बोली जाती है?

हाड़ौती बोली कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के उत्तरी भाग में बोली जाती है।

ढूंढाड़ी को और किस नाम से जाना जाता है?

ढूंढाड़ी को जयपुरी और झाड़शाही भी कहा जाता है।

मेवाड़ी बोली का क्षेत्र क्या है?

मेवाड़ी उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा क्षेत्र में बोली जाती है।

📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)

  1. सबसे अधिक क्षेत्र वाली बोली — मारवाड़ी
  2. मारवाड़ी का साहित्यिक रूप — डिंगल
  3. मारवाड़ी के बाद दूसरी महत्वपूर्ण बोली — मेवाड़ी
  4. ढूंढाड़ी के अन्य नाम — जयपुरी, झाड़शाही
  5. ढूंढाड़ी पर प्रभाव — ब्रज व गुजराती
  6. दादू पंथ का साहित्य किस बोली में — ढूंढाड़ी
  7. हाड़ौती किसकी उपबोली — ढूंढाड़ी (ग्रियर्सन)
  8. हाड़ौती का क्षेत्र — कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़
  9. पूर्वी राजस्थानी की सहायक क्रिया — छै
  10. तोरावाटी — ढूंढाड़ी की उपबोली
  11. नागरचोल — सवाई माधोपुर-टोंक
  12. थली — बीकानेर क्षेत्र
  13. ढटकी — बाड़मेर-जैसलमेर सीमांत
  14. गोड़वाड़ी — पाली-जालौर (गोड़वाड़)
  15. देवड़ावाटी — सिरोही

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • मारवाड़ी — पश्चिमी, सबसे व्यापक, डिंगल।
  • मेवाड़ी — दूसरी महत्वपूर्ण, मेवाड़।
  • ढूंढाड़ी — जयपुरी, ब्रज-गुजराती प्रभाव, दादू साहित्य, उपबोलियाँ।
  • हाड़ौती — ढूंढाड़ी की उपबोली, कोटा-बूंदी-बारां।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • हाड़ौती ढूंढाड़ी की उपबोली है (ग्रियर्सन), मारवाड़ी या मालवी की नहीं।
  • दादू पंथ का साहित्य ढूंढाड़ी में; डिंगल मारवाड़ी आधारित।
  • तोरावाटी ढूंढाड़ी की उपबोली है, शेखावाटी की नहीं — भले क्षेत्र पास-पास हों।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“मार-मेवा पश्चिम, ढूंढा-हाड़ा पूरब”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

चार प्रमुख बोलियों में सबसे अधिक प्रश्न ‘क्षेत्र’ और ‘उपबोली किसकी’ पर आते हैं। ‘छै/है’ वाली व्याकरणिक पहचान RPSC हिंदी प्रश्नपत्रों में भाषा-विज्ञान के प्रश्नों में उपयोगी है। तालिका 6 को अलग पन्ने पर बनाकर एक सप्ताह तक रोज़ दोहराएँ।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

राजस्थान की प्रमुख बोलियाँ व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • G. A. Grierson — Linguistic Survey of India, Vol. IX, Part II (1908)।
  • RajRAS — ‘भाषा एवं साहित्य’।
  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) — ‘राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति’ (भाषा एवं बोलियाँ)।
  • डॉ. हीरालाल माहेश्वरी — ‘राजस्थानी भाषा और साहित्य’।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान की प्रमुख बोलियाँ: मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी एवं हाड़ौती

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: उपबोलियों का वर्गीकरण विद्वानों में भिन्न है (जैसे मेवाड़ी को कुछ विद्वान मारवाड़ी की उपबोली, कुछ स्वतंत्र बोली मानते हैं); व्याकरणिक उदाहरण सामान्य प्रवृत्ति दर्शाते हैं।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 3 अक्टूबर 2026
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Sudhir Sirइतिहास विशेषज्ञलेखक परिचय
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. ग्रियर्सन के अनुसार हाड़ौती किस बोली की उपबोली है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. दादू पंथ का अधिकांश साहित्य किस बोली में रचा गया?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. ‘झाड़शाही’ किस बोली का अन्य नाम है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. मारवाड़ी के बाद राजस्थान की दूसरी महत्वपूर्ण बोली है —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. निम्नलिखित में से कौन ढूंढाड़ी की उपबोली नहीं है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

मारवाड़ी बोली का साहित्यिक रूप डिंगल कहलाता है, जिसमें चारण कवियों ने वीर-रस का काव्य रचा।

ढूंढाड़ी (जयपुरी) बोली पर ब्रजभाषा और गुजराती का प्रभाव है।

ग्रियर्सन के अनुसार हाड़ौती ढूंढाड़ी की उपबोली है और मध्य-पूर्वी राजस्थानी वर्ग में आती है।

मेवाड़ी मारवाड़ी के बाद राजस्थान की दूसरी महत्वपूर्ण बोली मानी जाती है।

तोरावाटी ढूंढाड़ी की उपबोली है, जो तोरावाटी अंचल (जयपुर का उत्तरी-पूर्वी भाग व सीकर-झुंझुनूं का पूर्वी भाग) में बोली जाती है।

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