सर्वोच्च न्यायालय: गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति, योग्यता एवं कार्यकाल
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स्रोत आधार: भारत का संविधान (मूल पाठ व नवीनतम संशोधन), RPSC RAS, UPSC CSE एवं राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं का आधिकारिक पाठ्यक्रम। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सर्वोच्च न्यायालय: गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति, योग्यता एवं कार्यकाल
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⚡ Quick Answer: सर्वोच्च न्यायालय भारत का शीर्ष न्यायालय है — संविधान के भाग 5, अध्याय 4 (अनु. 124–147) में। इसका उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को हुआ; इसने संघीय न्यायालय (1937) और प्रिवी काउंसिल का स्थान लिया। मूल संविधान में 8 (1 मुख्य + 7) न्यायाधीश थे; अब संसद के 2019 के अधिनियम से 34 (1 CJI + 33) हैं। न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं (अनु. 124(2)) — व्यवहार में कॉलेजियम (CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश) की सिफ़ारिश पर। योग्यता — भारत का नागरिक तथा 5 वर्ष उच्च न्यायालय का न्यायाधीश, या 10 वर्ष उच्च न्यायालय का अधिवक्ता, या राष्ट्रपति की राय में प्रख्यात विधिवेत्ता। कार्यकाल 65 वर्ष की आयु तक; हटाना केवल सिद्ध कदाचार या असमर्थता पर संसद के विशेष बहुमत वाले समावेदन से (अनु. 124(4))। वर्तमान (53वें) CJI — न्यायमूर्ति सूर्यकांत।
🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 24 नवंबर 2025 को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली (पूर्ववर्ती — न्यायमूर्ति बी.आर. गवई, 52वें CJI); उनका कार्यकाल 9 फ़रवरी 2027 तक है। स्वीकृत संख्या 34 (17 अक्टूबर 2026 तक)। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा (इलाहाबाद उच्च न्यायालय) के विरुद्ध प्रस्ताव पर अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ने न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम, 1968 के अंतर्गत 3-सदस्यीय जाँच समिति गठित की — इसकी अद्यतन स्थिति करेंट अफेयर्स से जाँचें। संविधान संशोधन व न्यायिक व्याख्याएँ बदलती रहती हैं — परीक्षा से पहले करेंट अफेयर्स से मिलाएँ।
📌 सर्वोच्च न्यायालय का गठन — एक नज़र में
- अनुच्छेद: 124–147 (भाग 5, अध्याय 4)
- उद्घाटन: 28 जनवरी 1950 — प्रथम CJI एच.जे. कानिया
- न्यायाधीश संख्या: 34 (1 CJI + 33) — 2019 का संशोधन अधिनियम
- नियुक्ति: राष्ट्रपति — अनु. 124(2); कॉलेजियम की सिफ़ारिश
- सेवानिवृत्ति: 65 वर्ष की आयु
- हटाना: अनु. 124(4) — सिद्ध कदाचार/असमर्थता, विशेष बहुमत
- आसन: दिल्ली — अनु. 130
- वर्तमान CJI: न्यायमूर्ति सूर्यकांत (53वें)
1. सर्वोच्च न्यायालय: परिचय एवं पृष्ठभूमि
भारत में एकीकृत न्याय व्यवस्था (Integrated Judiciary) है — शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय, उसके नीचे राज्यों में उच्च न्यायालय और उनके नीचे अधीनस्थ न्यायालय। यह व्यवस्था भारत शासन अधिनियम, 1935 से ली गई है, जबकि अमेरिका जैसे संघों में संघीय व राज्य न्यायालयों की दोहरी व्यवस्था है। सर्वोच्च न्यायालय संविधान का अंतिम व्याख्याकार, मौलिक अधिकारों का संरक्षक (Guardian), केंद्र–राज्य विवादों का संघीय न्यायालय तथा देश का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है।
- संघीय न्यायालय (Federal Court): 1935 के अधिनियम के अंतर्गत 1 अक्टूबर 1937 को स्थापित; इसके निर्णयों के विरुद्ध अपील लंदन की प्रिवी काउंसिल में होती थी।
- सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन: 28 जनवरी 1950 — संविधान लागू होने के दो दिन बाद, संसद भवन के ‘चैंबर ऑफ़ प्रिंसेस’ में; 1958 में वर्तमान भवन (तिलक मार्ग) में स्थानांतरित।
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश: हरिलाल जेकिसुनदास कानिया (एच.जे. कानिया)।
- आदर्श-वाक्य: “यतो धर्मस्ततो जयः” (जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है)।
संविधान की एकात्मक–संघात्मक विशेषताओं में एकीकृत न्यायपालिका की भूमिका भारतीय संविधान की विशेषताएँ में देखें।
2. अनुच्छेद 124 से 147 — एक दृष्टि में
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 124 | सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना एवं गठन; नियुक्ति, योग्यता, हटाना |
| 124A–124C | राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (99वाँ संशोधन, 2014) — 2015 में असंवैधानिक घोषित |
| 125 | न्यायाधीशों के वेतन आदि |
| 126 | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति |
| 127 | तदर्थ (Ad hoc) न्यायाधीशों की नियुक्ति |
| 128 | सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति |
| 129 | सर्वोच्च न्यायालय — अभिलेख न्यायालय (Court of Record) |
| 130 | सर्वोच्च न्यायालय का स्थान (आसन) — दिल्ली |
| 131 | मूल (प्रारंभिक) क्षेत्राधिकार |
| 132–134A | अपीलीय क्षेत्राधिकार (संवैधानिक, सिविल, आपराधिक) व प्रमाणपत्र |
| 136 | विशेष अनुमति याचिका (SLP) |
| 137 | अपने निर्णयों का पुनर्विलोकन |
| 139A | मामलों का अंतरण |
| 141 | सर्वोच्च न्यायालय की विधि सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी |
| 142 | पूर्ण न्याय हेतु डिक्री/आदेश |
| 143 | राष्ट्रपति को परामर्श (सलाहकारी क्षेत्राधिकार) |
| 144 | सभी प्राधिकारी सर्वोच्च न्यायालय की सहायता में कार्य करेंगे |
| 145 | न्यायालय के नियम; संविधान पीठ में न्यूनतम 5 न्यायाधीश |
| 146 | अधिकारी व सेवक; व्यय भारत की संचित निधि पर भारित |
| 147 | निर्वचन (व्याख्या) |
क्षेत्राधिकार (अनु. 129–143) का विस्तृत अध्ययन सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र: मूल, अपीलीय व सलाहकारी में करें।
3. गठन: न्यायाधीशों की संख्या का विकास
अनु. 124(1) के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश और संसद द्वारा विधि से निर्धारित संख्या में अन्य न्यायाधीश होंगे — मूल संविधान में अन्य न्यायाधीशों की संख्या 7 थी। संख्या बढ़ाने हेतु संविधान संशोधन आवश्यक नहीं; संसद सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करती है।
| वर्ष | कुल न्यायाधीश (CJI सहित) | आधार |
|---|---|---|
| 1950 | 8 | मूल संविधान |
| 1956 | 11 | न्यायाधीश संख्या अधिनियम, 1956 |
| 1960 | 14 | संशोधन अधिनियम |
| 1977 | 18 | संशोधन अधिनियम |
| 1986 | 26 | संशोधन अधिनियम |
| 2008 | 31 | संशोधन अधिनियम |
| 2019 | 34 | सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 |
पीठें (Benches): एकल पीठ, खंड पीठ (Division Bench — 2 या 3 न्यायाधीश), बड़ी पीठ तथा संविधान पीठ — अनु. 145(3) के अनुसार संविधान के निर्वचन के सारवान विधिक प्रश्न तथा अनु. 143 के संदर्भ की सुनवाई के लिए न्यूनतम 5 न्यायाधीश आवश्यक।
4. न्यायाधीशों की नियुक्ति (अनु. 124(2))
- मुख्य न्यायाधीश: राष्ट्रपति द्वारा, सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालयों के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श के बाद जिन्हें वह आवश्यक समझे। परंपरा — निवर्तमान CJI वरिष्ठतम न्यायाधीश के नाम की सिफ़ारिश करते हैं (प्रक्रिया-ज्ञापन / MoP)।
- अन्य न्यायाधीश: राष्ट्रपति द्वारा, परंतु मुख्य न्यायाधीश से परामर्श अनिवार्य (अनु. 124(2) का परंतुक)।
- कॉलेजियम प्रणाली: द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993) में ‘परामर्श’ का अर्थ ‘सहमति’ माना गया; तृतीय न्यायाधीश मामला (1998) में कॉलेजियम = CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश। सरकार सिफ़ारिश एक बार पुनर्विचार हेतु लौटा सकती है; दोबारा भेजने पर नियुक्ति बाध्यकारी।
- NJAC: 99वें संशोधन (2014) से बना राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग चौथे न्यायाधीश मामले (2015) में न्यायिक स्वतंत्रता (मूल ढाँचा) के उल्लंघन के आधार पर निरस्त — कॉलेजियम पुनः बहाल।
| मामला | वर्ष | निष्कर्ष |
|---|---|---|
| प्रथम न्यायाधीश मामला (एस.पी. गुप्ता) | 1981 | ‘परामर्श’ का अर्थ ‘सहमति’ नहीं — कार्यपालिका की प्रधानता |
| द्वितीय न्यायाधीश मामला (SC एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन) | 1993 | प्रथम मामला पलटा; CJI की राय को प्रधानता — कॉलेजियम का जन्म |
| तृतीय न्यायाधीश मामला (राष्ट्रपति का संदर्भ, अनु. 143) | 1998 | कॉलेजियम = CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश |
| चतुर्थ न्यायाधीश मामला (NJAC मामला) | 2015 | 99वाँ संशोधन व NJAC अधिनियम असंवैधानिक |
कॉलेजियम की कार्यप्रणाली, स्थानांतरण व आलोचना का विस्तृत विश्लेषण न्यायिक स्वतंत्रता एवं कॉलेजियम प्रणाली में है।
🎯 सर्वोच्च न्यायालय का गठन — अभ्यास
अनु. 124 की योग्यताएँ, 34 न्यायाधीश, 65 वर्ष और महाभियोग प्रक्रिया RAS, CET व व्याख्याता परीक्षाओं के सर्वाधिक पूछे जाने वाले तथ्य हैं:
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
- Rajasthan CET (स्नातक) फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- RPSC प्रथम श्रेणी व्याख्याता 2026 टेस्ट सीरीज़
- RAS Prelims फाइनल रिवीजन टेस्ट सीरीज़
सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स
5. न्यायाधीश बनने की योग्यता (अनु. 124(3))
सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए व्यक्ति को —
- भारत का नागरिक होना चाहिए; तथा
- (क) किसी उच्च न्यायालय (या लगातार दो या अधिक उच्च न्यायालयों) में कम से कम 5 वर्ष तक न्यायाधीश रहा हो; या
- (ख) किसी उच्च न्यायालय (या लगातार दो या अधिक) में कम से कम 10 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो; या
- (ग) राष्ट्रपति की राय में प्रख्यात विधिवेत्ता (Distinguished Jurist) हो।
ध्यान दें: संविधान में न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं है। ‘प्रख्यात विधिवेत्ता’ श्रेणी से अब तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हेतु ‘प्रख्यात विधिवेत्ता’ का विकल्प नहीं है — वहाँ 10 वर्ष न्यायिक पद या 10 वर्ष अधिवक्ता की शर्त है।
| आधार | सर्वोच्च न्यायालय (अनु. 124(3)) | उच्च न्यायालय (अनु. 217(2)) |
|---|---|---|
| न्यायिक अनुभव | HC न्यायाधीश — 5 वर्ष | भारत में न्यायिक पद — 10 वर्ष |
| अधिवक्ता अनुभव | HC अधिवक्ता — 10 वर्ष | HC अधिवक्ता — 10 वर्ष |
| प्रख्यात विधिवेत्ता | हाँ | नहीं |
| सेवानिवृत्ति आयु | 65 वर्ष | 62 वर्ष |
| शपथ दिलाने वाला | राष्ट्रपति (या नामित व्यक्ति) | राज्यपाल (या नामित व्यक्ति) |
| त्यागपत्र | राष्ट्रपति को | राष्ट्रपति को |
6. शपथ, कार्यकाल एवं त्यागपत्र
- शपथ (अनु. 124(6)): राष्ट्रपति या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष, तीसरी अनुसूची में दिए प्रारूप में — संविधान व विधि के प्रति श्रद्धा, भारत की प्रभुता-अखंडता बनाए रखना, बिना भय/पक्षपात/राग-द्वेष के कर्तव्य पालन।
- कार्यकाल: संविधान में निश्चित अवधि नहीं — 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक पद पर। आयु संबंधी विवाद संसद द्वारा उपबंधित प्राधिकारी व रीति से निर्धारित (अनु. 124(2A), 15वाँ संशोधन 1963)।
- पद-रिक्ति के तरीके: (i) 65 वर्ष पूर्ण होना, (ii) राष्ट्रपति को लिखित त्यागपत्र, (iii) संसद की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जाना, (iv) मृत्यु।
- सेवानिवृत्ति के बाद प्रतिबंध (अनु. 124(7)): भारत के किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष वकालत/कार्य नहीं कर सकता। (उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय व अन्य उच्च न्यायालयों में वकालत कर सकते हैं — अनु. 220।)
सबसे लंबा कार्यकाल (CJI): वाई.वी. चंद्रचूड़ (1978–85, लगभग 7 वर्ष); सबसे छोटा: कमल नारायण सिंह (1991, 17 दिन)। प्रथम महिला न्यायाधीश: न्यायमूर्ति एम. फ़ातिमा बीवी (1989)। वरिष्ठता क्रम के अनुसार न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना 2027 में प्रथम महिला CJI बन सकती हैं (संभावित, अल्प कार्यकाल)।
7. न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया (अनु. 124(4), 124(5))
न्यायाधीश को केवल सिद्ध कदाचार (proved misbehaviour) या असमर्थता (incapacity) के आधार पर, संसद के प्रत्येक सदन द्वारा एक ही सत्र में विशेष बहुमत (सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित व मतदान करने वालों का दो-तिहाई) से पारित समावेदन (address) पर राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है। प्रक्रिया न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम, 1968 से विनियमित है —
- प्रस्ताव पर हस्ताक्षर — लोकसभा में 100 या राज्यसभा में 50 सदस्य।
- अध्यक्ष/सभापति प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।
- स्वीकार होने पर 3-सदस्यीय जाँच समिति — (i) CJI या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश, (ii) किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, (iii) प्रख्यात विधिवेत्ता।
- समिति न्यायाधीश को दोषी पाए तो सदन प्रस्ताव पर विचार करता है; दोनों सदनों से विशेष बहुमत से पारित होने पर समावेदन राष्ट्रपति को।
- राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं।
| न्यायाधीश | वर्ष | परिणाम |
|---|---|---|
| न्या. वी. रामास्वामी (SC) | 1991–93 | जाँच समिति ने दोषी पाया; लोकसभा में प्रस्ताव पारित नहीं (सत्ता पक्ष अनुपस्थित) — पहला महाभियोग प्रयास |
| न्या. सौमित्र सेन (कलकत्ता HC) | 2011 | राज्यसभा में पारित; लोकसभा में मतदान से पहले त्यागपत्र |
| न्या. पी.डी. दिनाकरन (सिक्किम HC) | 2011 | जाँच के दौरान त्यागपत्र |
| न्या. दीपक मिश्रा (CJI) | 2018 | राज्यसभा सभापति ने प्रस्ताव अस्वीकार किया |
| न्या. यशवंत वर्मा (इलाहाबाद HC) | 2025 | लोकसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव स्वीकार कर जाँच समिति बनाई (अगस्त 2025) |
महत्वपूर्ण: स्वतंत्र भारत में अब तक किसी भी न्यायाधीश को महाभियोग से हटाया नहीं गया। संविधान में ‘महाभियोग’ शब्द केवल राष्ट्रपति (अनु. 61) के लिए है — न्यायाधीशों हेतु ‘हटाना (removal)’ प्रयुक्त है। विशेष बहुमत की अवधारणा संविधान संशोधन प्रक्रिया: अनु. 368 से तुलना करें।
8. वेतन, भत्ते एवं सेवा-सुरक्षा
- वेतन (अनु. 125): संसद द्वारा निर्धारित — CJI ₹2,80,000 तथा अन्य न्यायाधीश ₹2,50,000 प्रतिमाह (उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्तें) संशोधन अधिनियम, 2018)।
- भारित व्यय: वेतन, भत्ते, पेंशन तथा न्यायालय के प्रशासनिक व्यय भारत की संचित निधि पर भारित (अनु. 112(3)(d), 146(3)) — संसद में मतदान नहीं, केवल चर्चा।
- अलाभकारी परिवर्तन नहीं: नियुक्ति के बाद वेतन, अवकाश, पेंशन आदि में अहितकर परिवर्तन नहीं — अपवाद: वित्तीय आपातकाल (अनु. 360(4))।
- आचरण पर चर्चा वर्जित: संसद (अनु. 121) व राज्य विधानमंडल (अनु. 211) में न्यायाधीश के आचरण पर चर्चा नहीं — केवल हटाने के प्रस्ताव के समय।
9. कार्यवाहक CJI, तदर्थ एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश
| प्रावधान | अनुच्छेद | कौन नियुक्त करता है | शर्त |
|---|---|---|---|
| कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश | 126 | राष्ट्रपति | CJI का पद रिक्त हो, या CJI अनुपस्थित/कर्तव्य पालन में असमर्थ हो |
| तदर्थ (Ad hoc) न्यायाधीश | 127 | CJI — राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से व संबंधित HC के CJ से परामर्श कर | कोरम (गणपूर्ति) पूरा न हो; HC का न्यायाधीश जो SC न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता हो |
| सेवानिवृत्त न्यायाधीश | 128 | CJI — राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से | सेवानिवृत्त SC (या योग्य HC) न्यायाधीश की सहमति आवश्यक |
आसन (अनु. 130): सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली में बैठता है, किंतु CJI राष्ट्रपति के अनुमोदन से अन्य स्थान/स्थानों पर भी बैठक कर सकते हैं — क्षेत्रीय पीठों की माँग इसी आधार पर उठती रहती है, पर अब तक स्थायी क्षेत्रीय पीठ नहीं बनी।
10. प्रमुख मुख्य न्यायाधीश एवं वरिष्ठता परंपरा
| क्रम/नाम | विशेष तथ्य |
|---|---|
| 1 — एच.जे. कानिया | प्रथम CJI (1950–51); पद पर रहते निधन |
| 14 — ए.एन. रे | 1973 — 3 वरिष्ठ न्यायाधीशों का अधिक्रमण (केशवानंद भारती के बाद) |
| 15 — एम.एच. बेग | 1977 — न्या. एच.आर. खन्ना का अधिक्रमण (ADM जबलपुर में असहमति) |
| 16 — वाई.वी. चंद्रचूड़ | सर्वाधिक लंबा कार्यकाल |
| 22 — कमल नारायण सिंह | सबसे छोटा कार्यकाल (17 दिन) |
| 37 — के.जी. बालकृष्णन | प्रथम दलित CJI (2007) |
| 50 — डी.वाई. चंद्रचूड़ | 2022–24; पिता वाई.वी. चंद्रचूड़ भी CJI — पिता-पुत्र जोड़ी |
| 52 — बी.आर. गवई | मई–नवंबर 2025; प्रथम बौद्ध CJI |
| 53 — सूर्यकांत | 24 नवंबर 2025 से; हरियाणा से प्रथम CJI |
न्यायपालिका की शक्तियों के साथ राष्ट्रपति की भूमिका राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शक्तियाँ में तथा भारत सरकार के विधि अधिकारी की भूमिका भारत के महान्यायवादी (अनु. 76) में देखें।
संबंधित: सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र | न्यायिक स्वतंत्रता एवं कॉलेजियम प्रणाली | उच्च न्यायालय: अनुच्छेद 214–231 | न्यायिक पुनरावलोकन, सक्रियता व PIL
📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण | हल करने की कुंजी |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | अनु. 124, 126, 127, 128, 130 | खंड 2 व 9 |
| संख्या | मूल 8, अब 34 | खंड 3 |
| योग्यता | 5/10 वर्ष, प्रख्यात विधिवेत्ता | खंड 5 |
| हटाना | 100/50 हस्ताक्षर, विशेष बहुमत | खंड 7 |
| व्यक्ति/प्रथम | प्रथम CJI, प्रथम महिला न्यायाधीश | खंड 1 व 10 |
🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)
सर्वोच्च न्यायालय में कुल कितने न्यायाधीश हैं?
मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 34 — सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के बाद। मूल संविधान में यह संख्या 8 थी।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?
राष्ट्रपति, अनु. 124(2) के अंतर्गत — व्यवहार में CJI और 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों के कॉलेजियम की सिफ़ारिश पर।
सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए?
भारत का नागरिक हो और 5 वर्ष उच्च न्यायालय का न्यायाधीश, या 10 वर्ष उच्च न्यायालय का अधिवक्ता, या राष्ट्रपति की राय में प्रख्यात विधिवेत्ता हो। न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को कैसे हटाया जाता है?
सिद्ध कदाचार या असमर्थता पर — संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत से पारित समावेदन पर राष्ट्रपति के आदेश से (अनु. 124(4)); प्रक्रिया न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम, 1968 में।
भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश कौन हैं?
न्यायमूर्ति सूर्यकांत — 53वें CJI, 24 नवंबर 2025 से (कार्यकाल 9 फ़रवरी 2027 तक)।
📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)
सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना एवं गठन का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
(A) अनु. 214 (B) अनु. 124 (C) अनु. 131 (D) अनु. 143
✅ उत्तर: (B) अनु. 124 — अनु. 214 — प्रत्येक राज्य हेतु उच्च न्यायालय।
वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या है —
(A) 31 (B) 30 (C) 34 (D) 26
✅ उत्तर: (C) 34 — 2019 के संशोधन अधिनियम से 33 + 1 = 34।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु है —
(A) 62 वर्ष (B) 60 वर्ष (C) 70 वर्ष (D) 65 वर्ष
✅ उत्तर: (D) 65 वर्ष — उच्च न्यायालय — 62 वर्ष।
सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में न्यूनतम अनुभव —
(A) 10 वर्ष (B) 5 वर्ष (C) 7 वर्ष (D) 12 वर्ष
✅ उत्तर: (A) 10 वर्ष — न्यायाधीश के रूप में 5 वर्ष या अधिवक्ता के रूप में 10 वर्ष (अनु. 124(3))।
सर्वोच्च न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?
(A) राष्ट्रपति (B) मुख्य न्यायाधीश — राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से (C) कानून मंत्री (D) कॉलेजियम
✅ उत्तर: (B) मुख्य न्यायाधीश — राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से — अनु. 127 — कोरम के अभाव में।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के प्रस्ताव पर लोकसभा में न्यूनतम कितने सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं?
(A) 50 (B) 100 (C) 150 (D) 1/10 सदस्य
✅ उत्तर: (B) 100 — राज्यसभा में 50 — न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम, 1968।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपना त्यागपत्र किसे सौंपते हैं?
(A) मुख्य न्यायाधीश (B) प्रधानमंत्री (C) राष्ट्रपति (D) विधि मंत्री
✅ उत्तर: (C) राष्ट्रपति — अनु. 124(2)(a)।
सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन कब हुआ?
(A) 26 जनवरी 1950 (B) 28 जनवरी 1950 (C) 15 अगस्त 1947 (D) 26 नवंबर 1949
✅ उत्तर: (B) 28 जनवरी 1950 — संघीय न्यायालय (1937) का स्थान लिया।
सर्वोच्च न्यायालय के दिल्ली के अतिरिक्त अन्य स्थान पर बैठने का निर्णय कौन करता है?
(A) संसद (B) राष्ट्रपति (C) CJI — राष्ट्रपति के अनुमोदन से (D) केंद्रीय मंत्रिमंडल
✅ उत्तर: (C) CJI — राष्ट्रपति के अनुमोदन से — अनु. 130।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन किस पर भारित है?
(A) भारत की संचित निधि (B) भारत की आकस्मिकता निधि (C) लोक लेखा (D) राज्यों की संचित निधि
✅ उत्तर: (A) भारत की संचित निधि — अनु. 112(3)(d) — संसद में मतदान नहीं।
⚡ One-Liner Revision (Key Facts)
- सर्वोच्च न्यायालय — अनुच्छेद — 124–147
- उद्घाटन — 28 जनवरी 1950
- प्रथम CJI — एच.जे. कानिया
- कुल न्यायाधीश — 34
- सेवानिवृत्ति — 65 वर्ष
- तदर्थ न्यायाधीश — अनु. 127
- सेवानिवृत्त न्यायाधीश की उपस्थिति — अनु. 128
- आसन — दिल्ली — अनु. 130
- हटाने हेतु हस्ताक्षर — लोकसभा 100 / राज्यसभा 50
- 53वें CJI — न्या. सूर्यकांत
✅ परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु (Key Points)
- न्यायाधीश संख्या बढ़ाने हेतु संविधान संशोधन नहीं — संसद का साधारण कानून पर्याप्त।
- अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में CJI से परामर्श संविधानतः अनिवार्य।
- न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं; ‘प्रख्यात विधिवेत्ता’ श्रेणी केवल सर्वोच्च न्यायालय हेतु।
- हटाने के आधार दो ही — सिद्ध कदाचार व असमर्थता।
- सेवानिवृत्त SC न्यायाधीश भारत के किसी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकते।
- वेतन में कटौती केवल वित्तीय आपातकाल में।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- तदर्थ न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति नहीं, CJI करते हैं (राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से)।
- कार्यवाहक CJI की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं — अनु. 126।
- हटाने के लिए विशेष बहुमत — केवल दो-तिहाई नहीं, कुल सदस्य संख्या का बहुमत भी।
- न्यायाधीश शपथ राष्ट्रपति के समक्ष लेते हैं, CJI के समक्ष नहीं।
- अब तक किसी न्यायाधीश को हटाया नहीं गया — रामास्वामी प्रस्ताव लोकसभा में गिरा।
🧠 याद रखने की ट्रिक (Memory Tricks)
- “124 से शुरू, 147 पर पूरा” — सर्वोच्च न्यायालय का अध्याय।
- संख्या यात्रा — “8-11-14-18-26-31-34”।
- योग्यता — “5 जज, 10 वकील, या विधिवेत्ता”।
- “126 राष्ट्रपति, 127-128 CJI” — कार्यवाहक बनाम तदर्थ/सेवानिवृत्त।
- हटाना — “100 लोक, 50 राज्य, 3 जज-समिति”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
इस टॉपिक से सबसे अधिक प्रश्न तीन तालिकाओं से बनते हैं — योग्यता (SC बनाम HC तुलना, खंड 5), अनु. 126/127/128 (कौन नियुक्त करता है, खंड 9) और हटाने की प्रक्रिया (खंड 7)। ‘तदर्थ न्यायाधीश — राष्ट्रपति नियुक्त करता है’ जैसा भ्रामक विकल्प लगभग हर परीक्षा में आता है।
✍️ अभ्यास करें — टेस्ट सीरीज़, क्विज़ व करेंट अफेयर्स
सर्वोच्च न्यायालय: गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति, योग्यता एवं कार्यकाल पर अपनी तैयारी परखने के लिए:
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- उच्च न्यायालय: अनुच्छेद 214–231
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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- भारत का संविधान — अनु. 112, 121, 124–147, 360(4); तीसरी अनुसूची।
- सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 व संशोधन अधिनियम, 2019।
- न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम, 1968; उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्तें) संशोधन अधिनियम, 2018।
- एस.पी. गुप्ता (1981), SC एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड (1993), विशेष संदर्भ (1998), NJAC मामला (2015)।
- sci.gov.in — मुख्य न्यायाधीशों की सूची व न्यायाधीशों का विवरण।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना एवं गठन का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या है —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु है —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में न्यूनतम अनुभव —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. सर्वोच्च न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
अनु. 124 से 147 (भाग 5, अध्याय 4)।
CJI सहित 34।
65 वर्ष।
CJI, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से — अनु. 127।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत (24 नवंबर 2025 से)।
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