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भारत के महान्यायवादी (Attorney General): अनुच्छेद 76 एवं कार्य

योगेश जांगिड़योगेश जांगिड़ (सॉफ्टवेयर इंजीनियर और लेखक)
14 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 14 अक्टूबर 2026
12 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं का संबंधित आधिकारिक पाठ्यक्रम। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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भारत के महान्यायवादी (Attorney General): अनुच्छेद 76 एवं कार्य

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

⚡ Quick Answer: भारत का महान्यायवादी (Attorney General, अनु. 76) भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी है। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं; योग्यता सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने जैसी है। कार्यकाल संविधान में निश्चित नहीं — वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहता है और पारिश्रमिक भी राष्ट्रपति तय करते हैं। उसके कार्य हैं — सरकार को विधिक सलाह देना, सर्वोच्च न्यायालय में सरकार का प्रतिनिधित्व और राष्ट्रपति संदर्भ (अनु. 143) में पैरवी। उसे भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार है, वह संसद में बोल सकता है पर मत नहीं दे सकता (अनु. 88) और संसद सदस्यों जैसे विशेषाधिकार पाता है (105(4))। वह मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं है। प्रथम महान्यायवादी एम.सी. सीतलवाड़ थे।

🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): रिपोर्टों के अनुसार आर. वेंकटरमणी 1 अक्टूबर 2022 से भारत के 16वें महान्यायवादी हैं और 2025 में उनका कार्यकाल आगे बढ़ाया गया; तुषार मेहता सॉलिसिटर जनरल हैं (14 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति — नवीनतम हेतु विधि एवं न्याय मंत्रालय की अधिसूचना देखें)। संविधान संशोधन व न्यायिक व्याख्याएँ बदलती रहती हैं — परीक्षा से पहले करेंट अफेयर्स से मिलाएँ।

📌 महान्यायवादी — एक दृष्टि — एक नज़र में

  1. अनुच्छेद: 76 (भाग 5, अध्याय 1)
  2. पद: भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी
  3. नियुक्ति: राष्ट्रपति (केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर)
  4. योग्यता: सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने योग्य
  5. कार्यकाल: निश्चित नहीं — राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत
  6. संसद: बोल सकता है, मत नहीं (अनु. 88)

1. महान्यायवादी — भारत सरकार का प्रथम विधि अधिकारी

संविधान का अनु. 76 भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) के पद का प्रावधान करता है। वह भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी और मुख्य विधिक सलाहकार है तथा सर्वोच्च न्यायालय में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। रोचक तथ्य यह है कि वह संघ की कार्यपालिका (भाग 5, अध्याय 1 — राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद के साथ) का भाग है, फिर भी वह मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं होता — सरकार में विधिक मामलों के लिए अलग से विधि एवं न्याय मंत्री होता है। राज्य स्तर पर इसके समकक्ष पद महाधिवक्ता (अनु. 165) है — राजस्थान का विवरण राजस्थान के महाधिवक्ता (Advocate General) में देखें।

2. नियुक्ति, योग्यता, कार्यकाल व पारिश्रमिक

पहलूप्रावधान
नियुक्तिराष्ट्रपति द्वारा (अनु. 76(1)) — व्यवहार में केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर
योग्यतासर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने योग्य — भारत का नागरिक तथा 5 वर्ष किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश या 10 वर्ष उच्च न्यायालय में अधिवक्ता या राष्ट्रपति की राय में ‘प्रख्यात विधिवेत्ता’
कार्यकालसंविधान में निश्चित नहीं; राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (अनु. 76(4)) — कोई आयु-सीमा भी नहीं
हटानाराष्ट्रपति कभी भी हटा सकते हैं; हटाने की प्रक्रिया व आधार संविधान में नहीं
त्यागपत्रराष्ट्रपति को; परंपरा से सरकार बदलने पर त्यागपत्र देता है, क्योंकि नियुक्ति सरकार की सलाह पर होती है
पारिश्रमिकराष्ट्रपति द्वारा निर्धारित (संविधान में नियत नहीं)

ध्यान दें: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की ‘प्रख्यात विधिवेत्ता’ वाली योग्यता के कारण कोई भी विख्यात विधि-विशेषज्ञ महान्यायवादी बन सकता है। महान्यायवादी पूर्णकालिक सरकारी सेवक नहीं है, इसलिए उसे निजी वकालत से वंचित नहीं किया गया।

🎯 महान्यायवादी — अभ्यास

AG बनाम महाधिवक्ता बनाम CAG के अनुच्छेद RAS, पटवारी, CET व पुलिस परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं:

सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स

3. कर्तव्य एवं कार्य (अनु. 76(2))

  1. भारत सरकार को ऐसे विधिक विषयों पर सलाह देना जो राष्ट्रपति उसे सौंपें।
  2. राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए विधिक स्वरूप के अन्य कर्तव्य निभाना।
  3. संविधान या किसी अन्य विधि द्वारा प्रदत्त कार्यों का निर्वहन।
  4. राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए कर्तव्य — (i) भारत सरकार से संबंधित सभी मामलों में सर्वोच्च न्यायालय में सरकार की ओर से उपस्थित होना; (ii) राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को किए गए संदर्भ (अनु. 143) में सरकार का प्रतिनिधित्व; (iii) आवश्यकता पड़ने पर भारत सरकार से संबंधित मामलों में किसी उच्च न्यायालय में उपस्थित होना।

4. अधिकार एवं सीमाएँ

अधिकारसीमाएँ
भारत के क्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार (76(3))भारत सरकार के विरुद्ध सलाह या पैरवी नहीं कर सकता
संसद के दोनों सदनों, संयुक्त बैठक व उन समितियों में जिनका वह सदस्य नामित हो — बोलने व भाग लेने का अधिकार (अनु. 88)संसद में मत देने का अधिकार नहीं
संसद सदस्य जैसे विशेषाधिकार व उन्मुक्तियाँ (अनु. 105(4))भारत सरकार की अनुमति बिना आपराधिक मामलों में अभियुक्त का बचाव नहीं
निजी वकालत की अनुमतिसरकार की अनुमति बिना किसी कंपनी/निगम में निदेशक पद स्वीकार नहीं

संसदीय विशेषाधिकार क्या होते हैं — विस्तार हेतु संसदीय विशेषाधिकार एवं विशेषाधिकार भंग देखें।

5. महान्यायवादी बनाम सॉलिसिटर जनरल बनाम महाधिवक्ता

आधारमहान्यायवादी (AG)सॉलिसिटर जनरल (SG)महाधिवक्ता (राज्य)
स्रोतअनु. 76 — संवैधानिकविधि अधिकारी (सेवा शर्तें) नियम, 1987 — वैधानिक/प्रशासनिकअनु. 165 — संवैधानिक
नियुक्तिराष्ट्रपतिकेंद्र सरकार (ACC की स्वीकृति से)राज्यपाल
योग्यतासर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश जैसीनियमों के अनुसार वरिष्ठ अधिवक्ताउच्च न्यायालय न्यायाधीश जैसी
स्थितिप्रथम विधि अधिकारीद्वितीय विधि अधिकारी — AG की सहायताराज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी
विधायिका मेंसंसद में बोल सकता है (88)संसद में अधिकार नहींविधानमंडल में बोल सकता है (177)

सॉलिसिटर जनरल की सहायता हेतु कई अपर सॉलिसिटर जनरल (ASG) होते हैं। AG, SG और ASG मिलकर भारत सरकार के ‘विधि अधिकारी’ (Law Officers) कहलाते हैं।

6. महान्यायवादियों की प्रमुख सूची

क्रमनामकार्यकाल
1एम.सी. सीतलवाड़1950–1963 (सबसे लंबा)
2सी.के. दफ़्तरी1963–1968
3नीरेन डे1968–1977
4एस.वी. गुप्ते1977–1979
7सोली जे. सोराबजी1989–90, 1998–2004 (दो बार)
14मुकुल रोहतगी2014–2017
15के.के. वेणुगोपाल2017–2022
16आर. वेंकटरमणी2022 से (रिपोर्टों के अनुसार कार्यकाल विस्तारित)

रोचक तथ्य: एम.सी. सीतलवाड़ प्रथम विधि आयोग (1955) के भी अध्यक्ष थे। के.के. वेणुगोपाल ने 91 वर्ष की आयु तक सेवा दी — जो दिखाता है कि पद पर कोई आयु-सीमा नहीं है। महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों (जैसे राष्ट्रपति संदर्भ, अनु. 143) में महान्यायवादी की भूमिका केंद्रीय होती है।

7. संवैधानिक महत्व व आलोचना

  • महत्व: सरकार के निर्णयों की विधिक वैधता सुनिश्चित करना; संसद में विधिक प्रश्नों पर मार्गदर्शन; सर्वोच्च न्यायालय में संघ का पक्ष।
  • आलोचना: निश्चित कार्यकाल न होने से स्वतंत्रता पर प्रश्न — सरकार बदलते ही पद बदल जाता है।
  • निजी वकालत की अनुमति से हित-संघर्ष की आशंका व्यक्त की जाती रही है।
  • विधि आयोग व विद्वानों ने ब्रिटेन/अमेरिका के मॉडल पर अधिक स्पष्ट आचरण-संहिता का सुझाव दिया (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार)।

संबंधित: केंद्रीय मंत्रिपरिषद एवं मंत्रिमंडल | राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शक्तियाँ: तुलना | भारतीय संसद: लोकसभा व राज्यसभा की तुलना | राजस्थान के महाधिवक्ता (Advocate General)

📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?

प्रश्न का प्रकारउदाहरणहल करने की कुंजी
नियुक्ति व योग्यता6 पहलूखंड 2
कार्यअनु. 76(2)खंड 3
अधिकार/सीमाएँ88, 105(4)खंड 4
AG/SG/AdvGenतुलनाखंड 5
सूचीसीतलवाड़खंड 6

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भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति कौन करता है?

राष्ट्रपति, अनु. 76(1) के अंतर्गत — व्यवहार में केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर।

महान्यायवादी का कार्यकाल कितना होता है?

संविधान में निश्चित नहीं — वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहता है; कोई आयु-सीमा भी नहीं।

क्या महान्यायवादी संसद में मत दे सकता है?

नहीं — वह दोनों सदनों व समितियों में बोल सकता है और कार्यवाही में भाग ले सकता है, पर मत नहीं दे सकता (अनु. 88)।

महान्यायवादी और सॉलिसिटर जनरल में क्या अंतर है?

महान्यायवादी संवैधानिक पद (अनु. 76) और प्रथम विधि अधिकारी है; सॉलिसिटर जनरल वैधानिक/प्रशासनिक पद है जो उसकी सहायता करता है।

भारत के प्रथम महान्यायवादी कौन थे?

एम.सी. सीतलवाड़ (1950–63) — जिनका कार्यकाल अब तक सबसे लंबा रहा।

📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)

  1. भारत के महान्यायवादी (Attorney General) का प्रावधान —

    (A) अनु. 148 (B) अनु. 124 (C) अनु. 76 (D) अनु. 165

    ✅ उत्तर: (C) अनु. 76 — राज्य के महाधिवक्ता — अनु. 165।

  2. महान्यायवादी बनने हेतु योग्यता —

    (A) संसद सदस्य (B) सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने योग्य (C) उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने योग्य (D) 10 वर्ष का कोई भी अधिवक्ता

    ✅ उत्तर: (B) सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने योग्य — अनु. 76(1)।

  3. महान्यायवादी का कार्यकाल —

    (A) 5 वर्ष (B) 65 वर्ष की आयु तक (C) 6 वर्ष (D) संविधान में निश्चित नहीं — राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत

    ✅ उत्तर: (D) संविधान में निश्चित नहीं — राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत — अनु. 76(4)।

  4. महान्यायवादी संसद में —

    (A) केवल लोकसभा में बोल सकता है (B) बोल सकता है, मत नहीं दे सकता (C) बोल व मत दोनों (D) प्रवेश नहीं कर सकता

    ✅ उत्तर: (B) बोल सकता है, मत नहीं दे सकता — अनु. 88 — दोनों सदन, संयुक्त बैठक व समितियाँ।

  5. भारत के प्रथम महान्यायवादी —

    (A) सी.के. दफ़्तरी (B) सोली सोराबजी (C) नीरेन डे (D) एम.सी. सीतलवाड़

    ✅ उत्तर: (D) एम.सी. सीतलवाड़ — 1950–63 — सबसे लंबा कार्यकाल।

  6. भारत के क्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार किसे है?

    (A) सॉलिसिटर जनरल (B) महाधिवक्ता (C) CAG (D) महान्यायवादी

    ✅ उत्तर: (D) महान्यायवादी — अनु. 76(3)।

  7. सॉलिसिटर जनरल का पद —

    (A) अनु. 76 में (B) अनु. 165 में (C) अनु. 148 में (D) वैधानिक/प्रशासनिक — संविधान में नहीं

    ✅ उत्तर: (D) वैधानिक/प्रशासनिक — संविधान में नहीं — विधि अधिकारी (सेवा शर्तें) नियम, 1987।

  8. महान्यायवादी के संबंध में असत्य कथन —

    (A) उसका पारिश्रमिक राष्ट्रपति तय करता है (B) वह केंद्रीय मंत्रिमंडल का सदस्य है (C) वह निजी वकालत कर सकता है (D) उसे संसद सदस्यों जैसे विशेषाधिकार हैं

    ✅ उत्तर: (B) वह केंद्रीय मंत्रिमंडल का सदस्य है — वह मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं; विधि मंत्री होता है।

  9. महान्यायवादी को संसद सदस्यों जैसे विशेषाधिकार किस अनुच्छेद से?

    (A) अनु. 105(4) (B) अनु. 88 (C) अनु. 76(4) (D) अनु. 194

    ✅ उत्तर: (A) अनु. 105(4) — 105(4)।

  10. महान्यायवादी का पारिश्रमिक कौन निर्धारित करता है?

    (A) मुख्य न्यायाधीश (B) राष्ट्रपति (C) संसद (D) प्रधानमंत्री

    ✅ उत्तर: (B) राष्ट्रपति — संविधान में नियत नहीं।

⚡ One-Liner Revision (Key Facts)

  1. महान्यायवादी — अनु. 76
  2. महाधिवक्ता — अनु. 165
  3. सभी न्यायालयों में सुनवाई — 76(3)
  4. संसद में बोलना — अनु. 88
  5. विशेषाधिकार — 105(4)
  6. पारिश्रमिक — राष्ट्रपति
  7. प्रथम — एम.सी. सीतलवाड़
  8. SG का आधार — नियम 1987

✅ परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु (Key Points)

  • AG मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं।
  • कार्यकाल व हटाने के आधार संविधान में नहीं।
  • निजी वकालत की अनुमति, पर सरकार के विरुद्ध नहीं।
  • SG व ASG संवैधानिक पद नहीं।
  • AG संघ की कार्यपालिका (भाग 5) का भाग।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • AG की योग्यता सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश जैसी — उच्च न्यायालय नहीं।
  • AG संसद में मत नहीं देता।
  • पारिश्रमिक संसद नहीं, राष्ट्रपति तय करते हैं।
  • सॉलिसिटर जनरल का अनुच्छेद पूछा जाए तो उत्तर ‘कोई नहीं’।

🧠 याद रखने की ट्रिक (Memory Tricks)

  • “76 केंद्र, 165 राज्य” — AG बनाम महाधिवक्ता।
  • “AG बोले पर वोट न डाले” — अनु. 88।
  • “AG = सुप्रीम जज जैसी योग्यता; AdvGen = हाई कोर्ट जज जैसी”।
  • “SG — संविधान में नहीं, सिर्फ़ नियम में (1987)”।
  • “सीतलवाड़ — पहला भी, सबसे लंबा भी”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

AG, महाधिवक्ता, CAG और महाधिवक्ता-राज्य — चारों की नियुक्ति, योग्यता और अनुच्छेद एक तालिका में लिखें; परीक्षक इन्हें आपस में मिलाकर ‘सुमेलित कीजिए’ प्रश्न बनाते हैं।

✍️ अभ्यास करें — टेस्ट सीरीज़, क्विज़ व करेंट अफेयर्स

भारत के महान्यायवादी (Attorney General): अनुच्छेद 76 एवं कार्य पर अपनी तैयारी परखने के लिए:

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • भारत का संविधान — अनु. 76, 88, 105(4), 143, 165।
  • विधि अधिकारी (सेवा शर्तें) नियम, 1987।
  • विधि एवं न्याय मंत्रालय (विधि कार्य विभाग) — विधि अधिकारियों की सूची (legalaffairs.gov.in)।
  • मानक पाठ्य-पुस्तकें — संघ की कार्यपालिका।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी राजव्यवस्था संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: भारत के महान्यायवादी (Attorney General): अनुच्छेद 76 एवं कार्य

स्रोत-आधार: भारत का संविधान (विधि एवं न्याय मंत्रालय का नवीनतम द्विभाषी संस्करण), संविधान सभा की कार्यवाही (Constituent Assembly Debates), सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय तथा मानक पाठ्य-सामग्री।

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, UPSC प्रारंभिक, Rajasthan CET, REET मुख्य, RPSC द्वितीय/प्रथम श्रेणी, पटवारी, पुलिस एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: वर्तमान पदधारकों के नाम 14 अक्टूबर 2026 की स्थिति अनुसार; कार्यकाल-विस्तार/नई नियुक्ति हेतु विधि कार्य विभाग की अधिसूचना देखें।

अंतिम समीक्षा: 14 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 14 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. भारत के महान्यायवादी (Attorney General) का प्रावधान —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. महान्यायवादी बनने हेतु योग्यता —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. महान्यायवादी का कार्यकाल —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. महान्यायवादी संसद में —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. भारत के प्रथम महान्यायवादी —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

अनु. 76।

राष्ट्रपति।

राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत।

नहीं।

एम.सी. सीतलवाड़।

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