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न्यायिक स्वतंत्रता एवं कॉलेजियम प्रणाली: नियुक्ति और स्थानांतरण

योगेश जांगिड़योगेश जांगिड़ (सॉफ्टवेयर इंजीनियर और लेखक)
17 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 17 अक्टूबर 2026
15 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: भारत का संविधान (मूल पाठ व नवीनतम संशोधन), RPSC RAS, UPSC CSE एवं राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं का आधिकारिक पाठ्यक्रम। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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न्यायिक स्वतंत्रता एवं कॉलेजियम प्रणाली: नियुक्ति और स्थानांतरण

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

⚡ Quick Answer: न्यायिक स्वतंत्रता का अर्थ है कि न्यायपालिका कार्यपालिका व विधायिका के दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष निर्णय दे — यह संविधान के मूल ढाँचे का भाग है। संविधान इसे सुरक्षित करता है: कठोर हटाने की प्रक्रिया, वेतन संचित निधि पर भारित, आचरण पर विधायिका में चर्चा वर्जित (अनु. 121, 211), सेवानिवृत्ति के बाद वकालत पर रोक, अवमानना पर दंड की शक्ति (अनु. 129, 215)। कॉलेजियम प्रणाली उच्च न्यायपालिका में नियुक्ति व स्थानांतरण की वह व्यवस्था है जो संविधान में नहीं बल्कि न्यायिक निर्णयों से बनी — द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993) व तृतीय न्यायाधीश मामला (1998)। सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति व HC न्यायाधीशों के स्थानांतरण हेतु CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश; उच्च न्यायालय में नियुक्ति हेतु CJI + 2 वरिष्ठतम न्यायाधीश (प्रस्ताव HC के मुख्य न्यायाधीश + 2 से)। इसे बदलने वाला NJAC (99वाँ संशोधन, 2014) 16 अक्टूबर 2015 को 4:1 से निरस्त हुआ।

🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): अप्रैल–मई 2025 में सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने पारदर्शिता हेतु न्यायाधीशों की संपत्ति घोषणाएँ और उच्च न्यायालयों में की गई नियुक्तियों का विवरण (सिफ़ारिशकर्ता, लंबित प्रस्ताव, मौजूदा न्यायाधीशों से संबंध आदि) वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्णय लिया। मार्च 2025 में नकदी-प्रकरण के बाद न्या. यशवंत वर्मा का दिल्ली HC से इलाहाबाद HC स्थानांतरण और आंतरिक जाँच प्रक्रिया (in-house procedure) चर्चा में रहे। संशोधित प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) पर सरकार–न्यायपालिका सहमति अब तक (17 अक्टूबर 2026) अंतिम नहीं। संविधान संशोधन व न्यायिक व्याख्याएँ बदलती रहती हैं — परीक्षा से पहले करेंट अफेयर्स से मिलाएँ।

📌 न्यायिक स्वतंत्रता एवं कॉलेजियम — एक नज़र में

  1. न्यायिक स्वतंत्रता: मूल ढाँचे का भाग; अनु. 50 — न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक्करण
  2. कॉलेजियम का आधार: न्यायिक निर्णय — संविधान में उल्लेख नहीं
  3. SC नियुक्ति: CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश
  4. HC नियुक्ति: CJI + 2 (SC); प्रस्ताव HC के CJ + 2 से
  5. HC न्यायाधीश स्थानांतरण: अनु. 222 — CJI + 4; न्यायाधीश की सहमति आवश्यक नहीं
  6. NJAC: 99वाँ संशोधन 2014 (अनु. 124A–C) — 2015 में निरस्त
  7. NJAC मामले में असहमति: न्या. जे. चेलमेश्वर
  8. MoP: 1999 में बना; संशोधन लंबित

1. न्यायिक स्वतंत्रता का अर्थ एवं महत्व

न्यायिक स्वतंत्रता का अर्थ है — न्यायाधीश बिना किसी भय, पक्षपात, राग-द्वेष या बाहरी दबाव (सरकार, राजनीतिक दल, निजी हित, मीडिया) के, केवल संविधान व विधि के आधार पर निर्णय दें। यह विधि के शासन, मौलिक अधिकारों के संरक्षण, संघीय संतुलन और न्यायिक पुनरावलोकन की पूर्वशर्त है। सर्वोच्च न्यायालय ने एस.पी. गुप्ता (1981) से लेकर NJAC मामले (2015) तक इसे संविधान के मूल ढाँचे का भाग माना है। राज्य के नीति निदेशक तत्व के अनु. 50 में राज्य को लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करने का निर्देश है — देखें राज्य के नीति निदेशक तत्व।

2. न्यायिक स्वतंत्रता हेतु संवैधानिक प्रावधान

प्रावधानअनुच्छेदकैसे स्वतंत्रता सुनिश्चित
नियुक्ति में न्यायपालिका की भूमिका124(2), 217CJI से परामर्श अनिवार्य — व्यवहार में कॉलेजियम
कार्यकाल की सुरक्षा124(4), 217(1)(b), 218केवल सिद्ध कदाचार/असमर्थता पर, संसद के विशेष बहुमत से हटाना
निश्चित सेवा शर्तें125, 221नियुक्ति के बाद अलाभकारी परिवर्तन नहीं (वित्तीय आपातकाल अपवाद)
व्यय संचित निधि पर भारित112(3)(d), 146(3), 202(3)(d), 229(3)विधायिका में मतदान नहीं
आचरण पर चर्चा वर्जित121, 211संसद/विधानमंडल में केवल हटाने के प्रस्ताव पर
सेवानिवृत्ति के बाद वकालत पर रोक124(7), 220भविष्य के लाभ के लोभ से मुक्ति
अवमानना पर दंड की शक्ति129, 215प्राधिकार व गरिमा की रक्षा
कर्मचारी नियुक्ति की स्वतंत्रता146, 229CJI/HC के CJ स्वयं अधिकारी व सेवक नियुक्त करते हैं
क्षेत्राधिकार घटाया नहीं जा सकता138संसद केवल बढ़ा सकती है
कार्यपालिका से पृथक्करण50निदेशक तत्व

3. चार न्यायाधीश मामले: कॉलेजियम का विकास

अनु. 124(2) व 217(1) में ‘परामर्श (consultation)’ शब्द है — इस एक शब्द की व्याख्या ने भारत की नियुक्ति-व्यवस्था का स्वरूप तय किया।

मामलावर्षप्रश्ननिर्णय
संकलचंद सेठ (भारत संघ बनाम संकलचंद हिम्मतलाल सेठ)1977क्या स्थानांतरण हेतु न्यायाधीश की सहमति आवश्यक?सहमति आवश्यक नहीं; परामर्श ‘प्रभावी’ हो
प्रथम न्यायाधीश मामला (एस.पी. गुप्ता बनाम भारत संघ)1981‘परामर्श’ = ‘सहमति’?नहीं — कार्यपालिका ‘ठोस कारणों’ से CJI की राय अस्वीकार कर सकती है; कार्यपालिका की प्रधानता
द्वितीय न्यायाधीश मामला (SC एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन)1993प्रथम मामले की पुनर्समीक्षा9-न्यायाधीश पीठ ने प्रथम मामला पलटा; ‘परामर्श’ = ‘सहमति’; CJI की राय सर्वोपरि — CJI + 2 वरिष्ठतम; कॉलेजियम का जन्म
तृतीय न्यायाधीश मामला (In re Special Reference 1 of 1998)1998राष्ट्रपति के. आर. नारायणन का संदर्भ (अनु. 143)CJI की राय ‘बहुल परामर्श’ से — SC हेतु CJI + 4 वरिष्ठतम; HC हेतु CJI + 2; लिखित राय
चतुर्थ न्यायाधीश मामला (SC AoR एसोसिएशन बनाम भारत संघ / NJAC मामला)201599वाँ संशोधन व NJAC अधिनियम वैध?4:1 से असंवैधानिक — न्यायिक प्रधानता मूल ढाँचा; कॉलेजियम बहाल; असहमति — न्या. चेलमेश्वर

🎯 न्यायिक स्वतंत्रता एवं कॉलेजियम — अभ्यास

चारों न्यायाधीश मामले, कॉलेजियम की संरचना और NJAC की सदस्यता RAS, CET व व्याख्याता परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती है:

सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स

4. कॉलेजियम की संरचना एवं प्रक्रिया

उद्देश्यकॉलेजियमविशेष
भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्तिनिवर्तमान CJI की सिफ़ारिशवरिष्ठतम न्यायाधीश — परंपरा; विधि मंत्री के माध्यम से PM, फिर राष्ट्रपति
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशCJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशसंबंधित HC से आने वाले वरिष्ठतम SC न्यायाधीश की राय भी
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशCJI + 2 वरिष्ठतमनीति — CJ राज्य के बाहर से
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशप्रस्ताव: HC के CJ + 2 वरिष्ठतम; अंतिम: CJI + 2राज्यपाल व मुख्यमंत्री की राय; IB की रिपोर्ट
HC न्यायाधीशों/CJ का स्थानांतरणCJI + 4 वरिष्ठतमदोनों HC के CJ की राय

प्रक्रिया के चरण (प्रक्रिया-ज्ञापन, MoP 1999 के अनुसार)

  1. कॉलेजियम नाम तय कर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को भेजता है।
  2. सरकार आसूचना ब्यूरो (IB) से पृष्ठभूमि-जाँच करवाती है।
  3. सरकार नाम एक बार पुनर्विचार हेतु लौटा सकती है।
  4. कॉलेजियम यदि नाम दोहराता (reiterate) है तो सरकार नियुक्ति हेतु बाध्य — पर कोई समय-सीमा नहीं।
  5. प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति नियुक्ति-वारंट जारी करते हैं।

पारदर्शिता: अक्टूबर 2017 से कॉलेजियम के प्रस्ताव (resolutions) सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर प्रकाशित होते हैं; सरकार की आपत्तियाँ भी 2023 से सार्वजनिक की जाने लगीं।

5. न्यायाधीशों का स्थानांतरण (अनु. 222)

  • अनु. 222(1): राष्ट्रपति, CJI से परामर्श के बाद, किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश सहित) का दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण कर सकते हैं।
  • अनु. 222(2): स्थानांतरित न्यायाधीश को वेतन के अतिरिक्त संसद द्वारा निर्धारित प्रतिकरात्मक भत्ता।
  • न्यायाधीश की सहमति आवश्यक नहीं — संकलचंद सेठ (1977); स्थानांतरण ‘लोकहित’ में, दंड के रूप में नहीं।
  • तृतीय न्यायाधीश मामला: CJI को 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों तथा दोनों उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की राय लेनी होगी; बिना ऐसे परामर्श के स्थानांतरण न्यायिक समीक्षा योग्य।
  • सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण नहीं होता — एक ही न्यायालय है।
  • आंतरिक जाँच प्रक्रिया (In-house Procedure, 1999): न्यायाधीशों के विरुद्ध शिकायतों पर CJI द्वारा 3-सदस्यीय समिति — गंभीर कदाचार पर त्यागपत्र की सलाह या हटाने हेतु राष्ट्रपति/प्रधानमंत्री को सूचना; उदाहरण — न्या. यशवंत वर्मा प्रकरण (2025)।

उच्च न्यायालय की संरचना उच्च न्यायालय: अनुच्छेद 214–231 में देखें।

6. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC)

99वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 से अनु. 124A, 124B, 124C जोड़े गए तथा NJAC अधिनियम, 2014 पारित हुआ (13 अप्रैल 2015 से प्रभावी)।

NJAC के सदस्य (6)विवरण
अध्यक्षभारत के मुख्य न्यायाधीश
न्यायिक सदस्यसर्वोच्च न्यायालय के 2 वरिष्ठतम न्यायाधीश
कार्यपालिकाकेंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री
प्रख्यात व्यक्ति (2)समिति (PM, CJI, लोकसभा में विपक्ष के नेता/सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) द्वारा 3 वर्ष हेतु नामित; एक SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक/महिला वर्ग से
वीटोकोई भी 2 सदस्य किसी सिफ़ारिश को रोक सकते थे

निरस्तीकरण: 16 अक्टूबर 2015 को 5-न्यायाधीश पीठ ने 4:1 से कहा कि NJAC में न्यायपालिका की प्रधानता समाप्त होती है, विधि मंत्री व प्रख्यात व्यक्तियों का ‘वीटो’ न्यायिक स्वतंत्रता के विरुद्ध है — अतः मूल ढाँचे का उल्लंघन। कॉलेजियम पुनः लागू हुआ; न्यायालय ने कॉलेजियम में सुधार (पारदर्शिता, सचिवालय, पात्रता मानदंड) हेतु नया MoP बनाने को कहा। संशोधन-शक्ति की सीमाएँ संविधान संशोधन प्रक्रिया: अनु. 368 में।

7. कॉलेजियम: आलोचना बनाम पक्ष

आलोचनापक्ष में तर्क
अपारदर्शिता — चयन मानदंड, कार्यवृत्त सार्वजनिक नहींकार्यपालिका के हस्तक्षेप से न्यायिक स्वतंत्रता सुरक्षित
भाई-भतीजावाद — विधि आयोग की 230वीं रिपोर्ट (2009) में ‘अंकल जज सिंड्रोम’ का उल्लेखन्यायाधीश ही विधिक योग्यता का सर्वोत्तम आकलन कर सकते हैं
संविधान में आधार नहीं — ‘न्यायाधीश स्वयं न्यायाधीश चुनते हैं’सबसे बड़ा वादकारी (सरकार) नियुक्ति में निर्णायक न हो
सरकार द्वारा नामों को रोके रखना — विलंब व रिक्तियाँ2017 के बाद प्रस्ताव प्रकाशन, 2025 में नियुक्ति-विवरण व संपत्ति का प्रकाशन — सुधार जारी
सामाजिक विविधता (महिला, SC/ST/OBC, अल्पसंख्यक) का अभावMoP संशोधन से संस्थागत सुधार संभव

सुधार के सुझाव

  • संशोधित MoP — पात्रता, वरिष्ठता, सचिवालय, शिकायत-निवारण तंत्र।
  • सिफ़ारिशों पर सरकार के लिए समय-सीमा।
  • कॉलेजियम का स्थायी सचिवालय व डेटाबेस।
  • विविधता पर ध्यान व उम्मीदवारों के मूल्यांकन के वस्तुनिष्ठ मानदंड।
  • अधीनस्थ न्यायपालिका हेतु अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (अनु. 312) — देखें अधीनस्थ न्यायालय।

संबंधित: सर्वोच्च न्यायालय: गठन व न्यायाधीशों की नियुक्ति | उच्च न्यायालय: अनुच्छेद 214–231 | न्यायिक पुनरावलोकन, सक्रियता व PIL | संविधान संशोधन प्रक्रिया व मूल ढाँचा

📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?

प्रश्न का प्रकारउदाहरणहल करने की कुंजी
निर्णय-क्रमप्रथम/द्वितीय/तृतीय/चतुर्थ न्यायाधीश मामलाखंड 3
संरचनाCJI + 4, CJI + 2खंड 4
स्थानांतरणअनु. 222, सहमति आवश्यक नहींखंड 5
NJAC99वाँ संशोधन, 6 सदस्य, 4:1खंड 6
प्रावधान121, 124(7), 146, 50खंड 2

🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)

कॉलेजियम प्रणाली क्या है?

उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति व स्थानांतरण की वह व्यवस्था जिसमें CJI और वरिष्ठतम न्यायाधीशों का समूह नाम तय करता है — यह न्यायिक निर्णयों (1993, 1998) से बनी, संविधान में उल्लेख नहीं।

सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम में कितने न्यायाधीश होते हैं?

भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित 5 — CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश; HC नियुक्तियों हेतु CJI + 2।

NJAC को क्यों निरस्त किया गया?

16 अक्टूबर 2015 को सर्वोच्च न्यायालय ने 4:1 से कहा कि NJAC में न्यायपालिका की प्रधानता समाप्त होने से न्यायिक स्वतंत्रता (मूल ढाँचा) का उल्लंघन होता है।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का स्थानांतरण कौन करता है?

राष्ट्रपति, CJI से परामर्श के बाद (अनु. 222) — व्यवहार में CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों के कॉलेजियम की सिफ़ारिश पर; न्यायाधीश की सहमति आवश्यक नहीं।

न्यायिक स्वतंत्रता के लिए संविधान में क्या प्रावधान हैं?

कार्यकाल की सुरक्षा, वेतन संचित निधि पर भारित, आचरण पर चर्चा वर्जित (अनु. 121, 211), सेवानिवृत्ति के बाद वकालत पर रोक, अवमानना पर दंड की शक्ति, कर्मचारी नियुक्ति की स्वतंत्रता आदि।

📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)

  1. कॉलेजियम प्रणाली का जन्म किस मामले से हुआ?

    (A) प्रथम न्यायाधीश मामला (1981) (B) द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993) (C) केशवानंद भारती (1973) (D) मिनर्वा मिल्स (1980)

    ✅ उत्तर: (B) द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993) — ‘परामर्श’ = ‘सहमति’।

  2. तृतीय न्यायाधीश मामले (1998) के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति हेतु कॉलेजियम —

    (A) CJI + 2 (B) CJI + 3 (C) CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश (D) CJI + विधि मंत्री

    ✅ उत्तर: (C) CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश — HC नियुक्ति हेतु CJI + 2।

  3. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग किस संविधान संशोधन से बना?

    (A) 99वाँ (2014) (B) 100वाँ (C) 101वाँ (D) 97वाँ

    ✅ उत्तर: (A) 99वाँ (2014) — अनु. 124A–124C।

  4. NJAC को असंवैधानिक घोषित करने वाली पीठ में असहमति किसकी थी?

    (A) न्या. जे.एस. खेहर (B) न्या. कुरियन जोसेफ़ (C) न्या. मदन बी. लोकुर (D) न्या. जे. चेलमेश्वर

    ✅ उत्तर: (D) न्या. जे. चेलमेश्वर — फ़ैसला 4:1 — 16 अक्टूबर 2015।

  5. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के स्थानांतरण का प्रावधान —

    (A) अनु. 217 (B) अनु. 222 (C) अनु. 224 (D) अनु. 226

    ✅ उत्तर: (B) अनु. 222 — राष्ट्रपति, CJI से परामर्श पर।

  6. स्थानांतरण हेतु न्यायाधीश की सहमति आवश्यक नहीं — किस मामले में?

    (A) एस.पी. गुप्ता (B) संकलचंद सेठ (1977) (C) एल. चंद्र कुमार (D) राज नारायण

    ✅ उत्तर: (B) संकलचंद सेठ (1977) — परामर्श प्रभावी होना चाहिए।

  7. न्यायाधीशों के आचरण पर संसद में चर्चा का निषेध किस अनुच्छेद में है?

    (A) अनु. 121 (B) अनु. 105 (C) अनु. 211 (D) अनु. 122

    ✅ उत्तर: (A) अनु. 121 — राज्य विधानमंडल — अनु. 211।

  8. ‘परामर्श का अर्थ सहमति नहीं’ — कार्यपालिका की प्रधानता किस मामले में?

    (A) द्वितीय न्यायाधीश मामला (B) तृतीय न्यायाधीश मामला (C) प्रथम न्यायाधीश मामला (एस.पी. गुप्ता, 1981) (D) NJAC मामला

    ✅ उत्तर: (C) प्रथम न्यायाधीश मामला (एस.पी. गुप्ता, 1981) — 1993 में पलटा।

  9. NJAC में कितने सदस्य थे?

    (A) 5 (B) 7 (C) 4 (D) 6

    ✅ उत्तर: (D) 6 — CJI, 2 SC न्यायाधीश, विधि मंत्री, 2 प्रख्यात व्यक्ति।

  10. राज्य को न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करने का निर्देश देने वाला अनुच्छेद —

    (A) अनु. 48 (B) अनु. 50 (C) अनु. 39A (D) अनु. 44

    ✅ उत्तर: (B) अनु. 50 — नीति निदेशक तत्व।

⚡ One-Liner Revision (Key Facts)

  1. कॉलेजियम का जन्म — द्वितीय न्यायाधीश मामला, 1993
  2. SC कॉलेजियम — CJI + 4
  3. HC नियुक्ति कॉलेजियम — CJI + 2 (प्रस्ताव HC CJ + 2)
  4. स्थानांतरण — अनु. 222
  5. सहमति आवश्यक नहीं — संकलचंद सेठ, 1977
  6. NJAC — 99वाँ संशोधन, 2014
  7. NJAC निरस्त — 16 अक्टूबर 2015, 4:1
  8. असहमति — न्या. चेलमेश्वर
  9. MoP — 1999
  10. ‘अंकल जज सिंड्रोम’ — विधि आयोग 230वीं रिपोर्ट

✅ परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु (Key Points)

  • कॉलेजियम संविधान में नहीं — न्यायिक व्याख्या का परिणाम।
  • सरकार नाम एक बार लौटा सकती है; दोहराए जाने पर नियुक्ति बाध्यकारी।
  • स्थानांतरण दंड नहीं, लोकहित में — पर न्यायिक समीक्षा योग्य यदि परामर्श न हुआ।
  • NJAC निरस्तीकरण का आधार — न्यायिक स्वतंत्रता मूल ढाँचा।
  • SC न्यायाधीशों का स्थानांतरण नहीं होता।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • प्रथम न्यायाधीश मामले (1981) में कार्यपालिका की प्रधानता — कॉलेजियम 1993 से।
  • SC हेतु CJI + 4, HC हेतु CJI + 2 — उलटें नहीं।
  • NJAC पीठ में फ़ैसला 4:1 — 5:0 नहीं।
  • स्थानांतरण में न्यायाधीश की सहमति आवश्यक नहीं।
  • NJAC में विधि मंत्री सदस्य थे — प्रधानमंत्री नहीं (PM केवल प्रख्यात व्यक्तियों की चयन समिति में)।

🧠 याद रखने की ट्रिक (Memory Tricks)

  • न्यायाधीश मामले — “81 सरकार, 93 कॉलेजियम, 98 पाँच का दल, 2015 NJAC का अंत”।
  • “SC को चार साथी, HC को दो” — कॉलेजियम।
  • NJAC — “1 CJI + 2 जज + 1 मंत्री + 2 प्रख्यात = 6”, वीटो “2”।
  • “222 = ट्रांसफ़र” — दो-दो-दो, इधर से उधर।
  • “चेलमेश्वर अकेले चले” — NJAC असहमति।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

चारों न्यायाधीश मामलों की तालिका (खंड 3) को वर्ष के साथ याद करें — ‘कौन-सा मामला किससे संबंधित’ प्रकार के मिलान प्रश्न सबसे सामान्य हैं। RAS मुख्य परीक्षा में ‘कॉलेजियम बनाम NJAC’ पर दोनों पक्ष और सुधार के सुझाव (खंड 7) लिखना अपेक्षित होता है।

✍️ अभ्यास करें — टेस्ट सीरीज़, क्विज़ व करेंट अफेयर्स

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • भारत का संविधान — अनु. 50, 121, 124, 124A–C (निरस्त), 211, 217, 222।
  • एस.पी. गुप्ता (1981), SC AoR एसोसिएशन (1993), Special Reference 1 of 1998, SC AoR एसोसिएशन — NJAC (2015), संकलचंद सेठ (1977)।
  • विधि आयोग — 230वीं रिपोर्ट (2009); प्रक्रिया-ज्ञापन (MoP), विधि एवं न्याय मंत्रालय।
  • sci.gov.in — कॉलेजियम प्रस्ताव, न्यायाधीशों की संपत्ति घोषणा (2025)।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी राजव्यवस्था संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: न्यायिक स्वतंत्रता एवं कॉलेजियम प्रणाली: नियुक्ति और स्थानांतरण

स्रोत-आधार: भारत का संविधान (विधि एवं न्याय मंत्रालय का नवीनतम द्विभाषी संस्करण), संविधान सभा की कार्यवाही (Constituent Assembly Debates), सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय तथा मानक पाठ्य-सामग्री।

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, UPSC प्रारंभिक, Rajasthan CET, REET मुख्य, RPSC द्वितीय/प्रथम श्रेणी, पटवारी, पुलिस एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: कॉलेजियम की संरचना तृतीय न्यायाधीश मामले व MoP के अनुसार; 2025 के पारदर्शिता उपायों की स्थिति सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक विज्ञप्तियों पर आधारित।

अंतिम समीक्षा: 17 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 17 अक्टूबर 2026
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Q1. कॉलेजियम प्रणाली का जन्म किस मामले से हुआ?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. तृतीय न्यायाधीश मामले (1998) के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति हेतु कॉलेजियम —

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Q3. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग किस संविधान संशोधन से बना?

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Q4. NJAC को असंवैधानिक घोषित करने वाली पीठ में असहमति किसकी थी?

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Q5. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के स्थानांतरण का प्रावधान —

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993)।

CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश।

99वाँ संविधान संशोधन, 2014।

16 अक्टूबर 2015 (4:1)।

अनु. 222।

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