Rajasthan National Park
Rajasthan National Park

राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान: विधिक श्रेणियाँ, यूनेस्को धरोहर, जैव विविधता एवं जिला-वार प्रामाणिक नोट्स

परिचय: राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य का विधिक व प्रशासनिक अंतर

राजस्थान की गौरवशाली मरुभूमि जहाँ एक ओर शौर्यगाथाओं के लिए जानी जाती है, वहीं दूसरी ओर यह अपनी अनूठी जैविक धरोहर और विस्मयकारी वन्यजीव विविधता के लिए भी वैश्विक पटल पर विख्यात है। राज्य में पर्यावरण संतुलन और संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत दो मुख्य प्रकार के संरक्षित क्षेत्र घोषित किए जाते हैं:

  • वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary): यह एक ऐसा संरक्षित क्षेत्र होता है जहाँ किसी विशिष्ट प्रजाति या जीवों के समूह का संरक्षण किया जाता है। यहाँ प्रशासनिक नियम आंशिक रूप से शिथिल होते हैं, और स्थानीय निवासियों को सूखी लकड़ी इकट्ठा करने, सीमित पशुचारण और पर्यावरण पर्यटन की विधिक अनुमति होती है।
  • राष्ट्रीय उद्यान (National Park): यह पूर्णतः राज्य सरकार के नियंत्रण वाला सर्वोच्च संरक्षित क्षेत्र होता है, जहाँ संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem), वनस्पतियों, जीवों और ऐतिहासिक स्मारकों का एकीकृत संरक्षण किया जाता है। यहाँ मानवीय हस्तक्षेप, शिकार, कृषि, और पशुचारण पूर्णतः प्रतिबंधित (Strictly Prohibited) होते हैं। यहाँ के नियम अत्यंत कठोर होते हैं।

🚨 विधिक परीक्षा नोट (RPSC / RSMSSB मापदंड): छात्र अक्सर नाम के भ्रम में आकर गलत उत्तर चुन लेते हैं। विधिक और राजकीय दस्तावेजों के अनुसार “राजस्थान में कुल 3 ही आधिकारिक राष्ट्रीय उद्यान हैं”। सरिस्का एक बाघ परियोजना व अभ्यारण्य है तथा राष्ट्रीय मरु उद्यान क्षेत्रफल में राज्य का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है (नाम में राष्ट्रीय होने से वह नेशनल पार्क नहीं बनता)। परीक्षाओं में इसी तकनीकी कूट से प्रश्न पूछे जाते हैं।

2. राजस्थान के 3 आधिकारिक राष्ट्रीय उद्यानों का प्रामाणिक विश्लेषण

(1) रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान (सवाई माधोपुर): “बाघों का क्रैडल”

यह राजस्थान का सबसे पहला, सबसे बड़ा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक ख्याति प्राप्त राष्ट्रीय उद्यान है। अरावली और विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के मिलन बिंदु पर स्थित यह उद्यान अपनी अनूठी भू-आकृति के लिए जाना जाता है।

  • प्रशासकीय व विधिक कालक्रम (Timelines):
    • 1955: सर्वप्रथम इसे ‘सवाई माधोपुर खेल अभ्यारण्य’ के रूप में अधिसूचित किया गया था।
    • 1973: भारत के ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत इसे राजस्थान की प्रथम बाघ परियोजना (First Tiger Reserve) होने का गौरव मिला।
    • 1 नवंबर 1980: इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय उद्यान (National Park) का विधिक दर्जा प्रदान किया गया।
  • क्षेत्रफल: इसका कोर राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र 282.03 वर्ग किलोमीटर पर विस्तृत है, जो राष्ट्रीय उद्यानों में सबसे बड़ा है।
  • मुख्य जलीय पारिस्थितिकी: इसके भीतर तीन अत्यंत खूबसूरत और बारहमासी झीलें स्थित हैं— पद्म तालाब (जहाँ मगरमच्छ और बाघों का संघर्ष देखा जाता है), राजबाग झील, और मलिक तालाब
  • ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर: इस उद्यान के केंद्र में 13वीं शताब्दी का अभेद्य रणथंभौर दुर्ग (यूनेस्को विश्व धरोहर) स्थित है। इसके अतिरिक्त भारत भर में प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर और तालाब के किनारे स्थित ऐतिहासिक जोगी महल पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं। यहाँ मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वन (धोकड़ा वृक्ष) पाए जाते हैं।

(2) केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर): “परिंदों का स्वर्ग”

यह संपूर्ण एशिया महाद्वीप में पक्षियों की सबसे बड़ी और समृद्ध प्रजनन व प्रवास स्थली माना जाता है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “पक्षी प्रेमियों का स्वर्ग” (Bird Paradise) कहा जाता है।

  • प्रशासकीय व विधिक कालक्रम (Timelines):
    • 1956: इसे ‘भरतपुर पक्षी अभ्यारण्य’ (घाना पक्षी विहार) के रूप में आरक्षित किया गया।
    • 27 अगस्त 1981: इसे विधिक रूप से राष्ट्रीय उद्यान (National Park) घोषित किया गया।
    • 1 अक्टूबर 1981 (रामसर साइट): अपनी आर्द्रभूमि के वैश्विक महत्व के कारण इसे ईरान की रामसर संधि के तहत राजस्थान की पहली रामसर आर्द्रभूमि (Ramsar Wetland Site) घोषित किया गया।
    • 1985 (यूनेस्को धरोहर): वास्तुकला और प्राकृतिक विशिष्टता के कारण यूनेस्को (UNESCO) ने इसे ‘विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल’ की सूची में शामिल किया। यह राज्य का एकमात्र ऐसा राष्ट्रीय उद्यान है।
  • क्षेत्रफल का रिकॉर्ड: यह मात्र 28.73 वर्ग किलोमीटर (लगभग 29 किमी²) क्षेत्र में फैला है, जो क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है।
  • प्रवासी मेहमान – साइबेरियन क्रेन: सर्दियों के मौसम में यहाँ सुदूर रूस के बर्फीले मैदानों से अत्यंत दुर्लभ ‘साइबेरियन क्रेन’ (सफेद सारस) आते हैं, जिनका मुख्य भोजन ‘कुट्टू की घास’ है। यहाँ पक्षियों की 370 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • जल स्रोत और आकर्षण: इस आर्द्रभूमि को पानी की आपूर्ति मुख्य रूप से गंभीर नदी पर बने अजान बांध (Ajan Dam) से की जाती है। उद्यान के भीतर अजगरों को धूप सेकते हुए देखने के लिए प्रसिद्ध ‘पाइथन पॉइंट’ (Python Point) स्थित है। पर्यटकों के लिए यहाँ पर्यावरण अनुकूल साइकिल और रिक्शा सफारी की अनूठी व्यवस्था लागू है। यह महान बर्डमैन ‘डॉ. सालीम अली’ की मुख्य कर्मस्थली रहा है।

(3) मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान (कोटा, चित्तौड़गढ़, बूंदी व झालावाड़)

हाड़ौती संभाग की मुकुंदरा पहाड़ियों की गोद में फैला यह राज्य का तीसरा और सबसे नवीन राष्ट्रीय उद्यान है, जिसे प्रकृति प्रेमी हाड़ौती शासक राव मुकुंद सिंह की स्मृति में नाम दिया गया है।

  • प्रशासकीय व विधिक कालक्रम (Timelines):
    • 1955: पूर्व में यह ‘दर्रा वन्यजीव अभ्यारण्य’ के रूप में जाना जाता था।
    • 9 जनवरी 2012: राज्य सरकार की विशेष अधिसूचना द्वारा इसे राजस्थान का तीसरा राष्ट्रीय उद्यान (Third National Park) घोषित किया गया।
    • 9 अप्रैल 2013: इसे राजस्थान की तीसरी आधिकारिक बाघ परियोजना (3rd Tiger Reserve) के रूप में स्वीकृत किया गया।
  • मुख्य विशिष्ट जीव: यह अभ्यारण्य पूरे राजपूताना में “गागरोनी तोते” (हीरामन तोता / अलेक्जेंड्रिन पेराकिट) के लिए विश्व विख्यात है। यह तोता इंसानों की हूबहू आवाज और बोली की नकल करने के लिए जाना जाता है, जिसका प्राचीन काल में कूटनीतिक संदेशों के लिए उपयोग होता था। इसके अलावा यहाँ चौसिंगा और तेंदुए पाए जाते हैं।
  • ऐतिहासिक स्मारक: इस उद्यान के भीतर कोटा के महाराव मुकुंद सिंह द्वारा निर्मित सुप्रसिद्ध ‘अबली मीणी का महल’ स्थित है, जिसे कला-संस्कृति में “हाड़ौती का ताजमहल” या ‘राजस्थान का छोटा ताजमहल’ कहा जाता है। इसके अतिरिक्त विंध्याचल पहाड़ियों के संस्तर पर स्थित गुप्तकालीन ‘दर्रा का शिव मंदिर’ और गागरोन दुर्ग का पिछला हिस्सा इसी के प्रभाव क्षेत्र में आता है।

3. विशिष्ट विवरण: अन्य दो लोकप्रिय क्षेत्र (Sariska & Desert Park Matrix)

छात्रों के संशय को दूर करने के लिए, उन दो क्षेत्रों का विवरण भी यहाँ दिया जा रहा है जिन्हें आम तौर पर लोग राष्ट्रीय उद्यान समझ बैठते हैं, परंतु वे विधिक अभ्यारण्य हैं:

  • सरिस्का टाइगर रिजर्व (अलवर): यह 866 वर्ग किमी में फैला अभ्यारण्य है, जिसे 1978 में राज्य की दूसरी बाघ परियोजना घोषित किया गया था। यह इतिहास में “विश्व की पहली सफल बाघ विस्थापन (Relocation) परियोजना” (2005) के लिए जाना जाता है, जब रणथंभौर से विंग कमांडर के सहयोग से हेलीकॉप्टर द्वारा ‘बाघ एसटी-1’ को सरिस्का में सफलतापूर्वक शिफ्ट किया गया था। इसके भीतर पांडुपोल हनुमान मंदिर और कांकनवाड़ी का किला स्थित है।
  • राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर व बाड़मेर): यह 3162 वर्ग किलोमीटर के साथ राजस्थान का सबसे बड़ा वन्यजीव अभ्यारण्य है। इसके नाम में ‘राष्ट्रीय’ शब्द केवल सम्मानसूचक है, विधिक रूप से यह नेशनल पार्क नहीं है। यह राज्य पक्षी गोडावण (Great Indian Bustard) का मुख्य गंतव्य है और इसके भीतर 18 करोड़ वर्ष प्राचीन लकड़ी के जीवाश्मों वाला ‘आकल वुड फॉसिल पार्क’ स्थित है।

📊 संपूर्ण राष्ट्रीय उद्यानों का विश्लेषणात्मक वैचारिक मैट्रिक्स

यह संदर्भ तालिका परीक्षाओं से ठीक पहले त्वरित और सटीक विधिक रिवीजन के लिए प्रलेखित की गई है:

राष्ट्रीय उद्यान का नाममुख्य भौगोलिक जिलाराष्ट्रीय उद्यान का विधिक वर्षकुल कोर क्षेत्रफलविशिष्ट विधिक / अंतरराष्ट्रीय पहचानमुख्य संरक्षित प्रजातियाँ व आकर्षण
1. रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यानसवाई माधोपुर1 नवंबर 1980282.03 वर्ग किमी (सबसे बड़ा)राज्य की प्रथम बाघ परियोजना (1973); ‘बाघों का घर’।रॉयल बंगाल टाइगर, मगरमच्छ, पद्म तालाब, त्रिनेत्र गणेश मंदिर, जोगी महल।
2. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यानभरतपुर27 अगस्त 198128.73 वर्ग किमी (सबसे छोटा)यूनेस्को विश्व प्राकृतिक धरोहर (1985); पहली रामसर साइट (1981)।साइबेरियन क्रेन (सफेद सारस), 370+ पक्षी प्रजातियाँ, पाइथन पॉइंट, अजान बांध।
3. मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यानकोटा, चित्तौड़गढ़, बूंदी9 जनवरी 2012लगभग 199.5 वर्ग किमीराज्य की तीसरी बाघ परियोजना (2013); हाड़ौती का मुख्य नेशनल पार्क।गागरोनी तोते (हीरामन तोता), अबली मीणी का महल (हाड़ौती का ताजमहल)।

📝 विगत वर्षों के महत्वपूर्ण प्रश्न (Exam-Targeted PYQs with Explanations)

यहाँ RPSC और RSMSSB परीक्षाओं के पिछले 15 वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के पूर्ण प्रामाणिक उत्तर और व्याख्याएँ दी जा रही हैं:

Q1. विधिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से वर्तमान में राजस्थान में कुल कितने आधिकारिक “राष्ट्रीय उद्यान” (National Parks) क्रियान्वित हैं? (RPSC 2018)

(A) 3

(B) 5

(C) 4

(D) 6

  • सटीक उत्तर: (A) 3
  • विस्तृत व्याख्या: यह वन्यजीवों का सबसे कोर प्रश्न है। राजस्थान में केवल तीन ही विधिक राष्ट्रीय उद्यान हैं— रणथंभौर, केवलादेव, और मुकुंदरा हिल्स। सरिस्का और मरु उद्यान अभ्यारण्य की श्रेणी में आते हैं।

Q2. राजस्थान का वह कौन सा एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है जो यूनेस्को (UNESCO) की ‘विश्व प्राकृतिक धरोहर सूची’ में शामिल है और इसे यह दर्जा किस वर्ष मिला? (RPSC RAS Pre)

(A) रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान; 1980

(B) केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान; 1985

(C) मुकुंदरा हिल्स; 2012

(D) सरिस्का टाइगर रिजर्व; 2005

  • सटीक उत्तर: (B) केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान; 1985
  • विस्तृत व्याख्या: भरतपुर स्थित केवलादेव (घाना पक्षी विहार) को उसकी अद्वितीय पक्षी जैव विविधता के कारण वर्ष 1985 में यूनेस्को ने विश्व प्राकृतिक धरोहर घोषित किया था। यह राज्य का एकमात्र ऐसा गौरव प्राप्त नेशनल पार्क है।

Q3. क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से राजस्थान का सबसे बड़ा और सबसे छोटा “राष्ट्रीय उद्यान” क्रमशः कौन सा है? (RPSC II Grade)

(A) राष्ट्रीय मरु उद्यान एवं सरिस्का ‘अ’

(B) रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान एवं केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान

(C) मुकुंदरा हिल्स एवं केवलादेव

(D) रणथंभौर एवं सरिस्का

  • सटीक उत्तर: (B) रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान एवं केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान
  • विस्तृत व्याख्या: विधिक राष्ट्रीय उद्यानों में रणथंभौर (282.03 वर्ग किमी) सबसे बड़ा है, तथा केवलादेव (28.73 वर्ग किमी) सबसे छोटा है। (छात्र ध्यान दें कि यदि ‘अभ्यारण्य’ पूछा जाए तो मरु उद्यान सबसे बड़ा और सरिस्का ‘अ’ सबसे छोटा होता है, नेशनल पार्क में रणथंभौर व केवलादेव का कूट सही है)।

Q4. “अबली मीणी का महल”, जिसे कला-संस्कृति में ‘हाड़ौती का ताजमहल’ कहा जाता है, किस राष्ट्रीय उद्यान के प्रांगण में अवस्थित है? (Gram Sevak)

(A) रणथंभौर नेशनल पार्क

(B) मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान

(C) केवलादेव पक्षी विहार

(D) सरिस्का अलवर

  • सटीक उत्तर: (B) मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान
  • विस्तृत व्याख्या: कोटा के महाराव मुकुंद सिंह द्वारा अपनी पासवान रानी अबली मीणी के लिए निर्मित यह महल मुकुंदरा हिल्स (दर्रा) राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है। इसे हाड़ौती का ताजमहल भी कहा जाता है।

Q5. सर्दियों के मौसम में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में आने वाले सुप्रसिद्ध प्रवासी पक्षी ‘साइबेरियन क्रेन’ का मुख्य पसंदीदा भोजन कौन सी प्राकृतिक घास है?

(A) मोथिया घास

(B) कुट्टू की घास (एंटीलोप घास)

(C) सेवण घास

(D) लफ्फा घास

  • सटीक उत्तर: (B) कुट्टू की घास (एंटीलोप घास)
  • विस्तृत व्याख्या: साइबेरियन क्रेन इस आर्द्रभूमि के जलीय संस्तर में उगने वाली ‘कुट्टू की घास’ के कंदों को अत्यधिक चाव से खाते हैं। जबकि ‘मोथिया घास’ तालछापर के काले हिरणों का भोजन है और ‘सेवण घास’ मरु उद्यान में गोडावण का कवक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)

Q1. ‘राष्ट्रीय मरु उद्यान’ के नाम में ‘राष्ट्रीय’ (National) शब्द होने के बावजूद परीक्षाओं में इसे विधिक राष्ट्रीय उद्यान क्यों नहीं माना जाता?

उत्तर: यह भारतीय वन्यजीव विन्यास का एक विधिक नियम है। किसी भी क्षेत्र को ‘राष्ट्रीय उद्यान’ घोषित करने के लिए वहाँ समस्त मानवीय गतिविधियों, निजी भूमि और बस्तियों का पूर्ण विस्थापन अनिवार्य है। चूंकि मरु उद्यान का क्षेत्रफल (3162 वर्ग किमी) अत्यंत विशाल है और इसके भीतर कई राजस्व गाँव व बस्तियाँ स्थित हैं, इसलिए इसे सरकार ने केवल ‘नाम’ राष्ट्रीय दिया है, परंतु विधिक श्रेणी के अनुसार यह आज भी एक वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) ही है।

Q2. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘रामसर साइट’ (Ramsar Wetland) का दर्जा कब मिला और इसे पानी कहाँ से मिलता है?

उत्तर: केवलादेव को 1 अक्टूबर 1981 को रामसर आर्द्रभूमि सूची में शामिल किया गया था, यह राजस्थान की पहली रामसर साइट है (दूसरी सांभर झील है)। इस उद्यान के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को सूखा प्रभावित होने से बचाने के लिए भरतपुर के प्रसिद्ध अजान बांध (Ajan Dam) से बाणगंगा और गंभीर नदी का पानी प्रदान किया जाता है।

Q3. ‘विश्व की पहली सफल बाघ पुनर्स्थापन परियोजना’ (World’s First Tiger Relocation) का संबंध राजस्थान के किस वन्यजीव क्षेत्र से है?

उत्तर: इसका संबंध सरिस्का टाइगर रिजर्व (अलवर) से है। वर्ष 2005 में सरिस्का में शिकार के कारण बाघ पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। तब भारत सरकार और राजस्थान सरकार ने कूटनीतिक निर्णय लेते हुए रणथंभौर नेशनल पार्क से ‘बाघ एसटी-1’ को हेलीकॉप्टर के माध्यम से हवा में उड़ाकर सरिस्का में शिफ्ट किया था। यह दुनिया का पहला सफल बाघ पुनर्वास मॉडल बना।

Q4. ‘गागरोनी तोता’ या हीरामन तोता किस राष्ट्रीय उद्यान की मुख्य वानस्पतिक और प्राणिज विशेषता है और इसका वैज्ञानिक महत्व क्या है?

उत्तर: यह मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान (कोटा-झालावाड़) की मुख्य विशेषता है। इसका वैज्ञानिक महत्व यह है कि यह अलेक्जेंड्रिन पेराकिट प्रजाति का तोता है, जिसके कंठ की बनावट ऐसी होती है कि यह मनुष्यों की हूबहू आवाज और शब्दों का सटीक उच्चारण (नकल) कर सकता है। प्राचीन काल में राजा-महाराजा इसका उपयोग कूटनीतिक संदेशों और मनोरंजन के लिए करते थे।

Q5. रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित ‘पद्म तालाब’ और ‘जोगी महल’ का ऐतिहासिक संबंध किस राजवंश से रहा है?

उत्तर: इनका ऐतिहासिक संबंध रणथंभौर के प्रतापी चौहान राजवंश (विशेषकर हम्मीर देव चौहान) से रहा है। पद्म तालाब के किनारे ही अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हम्मीर की पुत्री ने ‘जल जौहर’ किया था। बाद में जयपुर के महाराजाओं ने जोगी महल को अपने शाही शिकारगाह (Hunting Lodge) के रूप में पुनर्गठित किया था।

📚 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत (References & E-E-A-T Seal)

  • वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, राजस्थान सरकार की आधिकारिक राष्ट्रीय उद्यान निर्देशिका (Official Forest Department Database).
  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून – भारत के राष्ट्रीय उद्यानों की विधिक संचय प्रलेखन रिपोर्ट।
  • यूनेस्को (UNESCO) विश्व प्राकृतिक धरोहर केंद्र – केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान भरतपुर तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट (1985).
  • RPSC RAS Pre/Mains, स्कूल व्याख्याता (Grade-I) और RSMSSB परीक्षाओं के पिछले 15 वर्षों के आधिकारिक प्रश्नपत्रों का प्रामाणिक विश्लेषणात्मक संकलन।
  • तथ्य जाँच एवं संपादन: सुयोग अकादमी संपादकीय टीम (सुधीर ढाका – BSc-BEd, योगेश जांगिड़ – सॉफ्टवेयर इंजीनियर)।

📚 सुयोग अकादमी: राजस्थान संपूर्ण अध्ययन श्रृंखला

भूगोल (Geography): स्थिति एवं विस्तार | भौतिक स्वरूप | अरावली पर्वत | मैदान व पठार | जलवायु | मिट्टी

जल संसाधन (Water Resources): नदियाँ व अपवाह तंत्र | प्रमुख झीलें | सिंचाई परियोजनाएं

अर्थव्यवस्था (Economy): कृषि एवं जलवायु प्रदेश | खनिज संपदा | ऊर्जा परियोजनाएं | उद्योग | जनसंख्या (2011)

पारिस्थितिकी एवं इतिहास: वन्यजीव अभ्यारण्य | राष्ट्रीय उद्यान | पर्यटन | एकीकरण | प्रमुख दुर्ग

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