परिचय: अरावली की भूगर्भिक उत्पत्ति एवं वैश्विक कड़ियाँ
राजस्थान के भौतिक विभागों में “मध्यवर्ती अरावली पर्वतीय प्रदेश” न केवल राज्य की भौगोलिक धुरी है, बल्कि यह विश्व के भूगर्भिक इतिहास का एक महान मील का पत्थर है। अरावली पर्वतमाला प्राचीन गोंडवाना लैंड (Gondwanaland) का एक अवशिष्ट भाग है, जिसकी उत्पत्ति आज से लगभग 65 करोड़ वर्ष पूर्व आद्य-महाकल्प के प्रीकैम्ब्रियन काल (Precambrian Era) में हुई थी। अपनी उत्पत्ति के समय यह एक अत्यंत ऊँचा, सुदृढ़ और ‘नवीन वलित पर्वतमाला’ (Fold Mountain) था, परंतु करोड़ों वर्षों के निरंतर बाह्य अपक्षय (Weathering) और कड़े अपरदन (Erosion) के कारण वर्तमान में यह एक अवशिष्ट पर्वतमाला (Residual Mountain) के रूप में विद्यमान है।
भूगर्भीय संरचना, प्राचीनता और अत्यधिक अपक्षयित स्वरूप के कारण अरावली पर्वतमाला की वैश्विक तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के पूर्व में स्थित एपलाचियन पर्वत श्रृंखला (Appalachian Mountains) से की जाती है। अरावली मुख्य रूप से अत्यंत कठोर क्वार्टजाइट (Quartzite), गार्नेट, शिष्ट और ग्रेनाइट चट्टानों से निर्मित है, जो इसे अपरदन-प्रतिरोधी और धात्विक खनिजों का सबसे समृद्ध पालना बनाती हैं।
1. अरावली की संचयी सांख्यिकी एवं विस्तार (Accumulative Data Matrix)
RPSC परीक्षाओं में अरावली के विस्तार, लंबाई और जनसांख्यिकी को लेकर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं, जिन्हें एक नज़र में समझना आवश्यक है:
- कुल लंबाई एवं भौगोलिक विन्यास: अरावली पर्वतमाला की कुल लंबाई 692 किलोमीटर है, जो दक्षिण-पश्चिम में गुजरात के पालनपुर (खेड़ब्रह्मा) से प्रारंभ होकर उत्तर-east में दिल्ली की रायसीना हिल्स (जहाँ राष्ट्रपति भवन स्थित है) तक विस्तृत है।
- राजस्थान में लंबाई का रिकॉर्ड: इस पर्वतमाला का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा (सटीक 550 किलोमीटर) केवल राजस्थान की सीमाओं के भीतर स्थित है। राज्य में यह दक्षिण-पश्चिम में सिरोही से प्रवेश करके उत्तर-पूर्व में खेतड़ी (नीमकाथाना जिला) तक अनवरत रूप से फैली हुई है।
- क्षेत्रफल व जनसांख्यिकी अनुपात: अरावली प्रदेश राजस्थान के कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफल के 9 प्रतिशत भूभाग पर विस्तृत है, जिसके अंतर्गत राज्य की 10 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। अरावली की वर्तमान औसत ऊँचाई समुद्र तल से 930 मीटर दर्ज की गई है।
- जनजातीय संकेंद्रीकरण: यह पर्वतीय प्रदेश राजस्थान की प्राचीन आदिम संस्कृतियों का पालना है। यहाँ मुख्य रूप से भील जनजाति (सर्वाधिक संकेंद्रीकरण: उदयपुर व सलूंबर), गरासिया जनजाति (मुख्यतः सिरोही के भाकर क्षेत्रों में), मीणा और डामोर जनजातियाँ निवास करती हैं।
- जलवायु व वर्षा का मिजाज: अरावली प्रदेश की जलवायु विधिक रूप से उप-आर्द्र (Sub-Humid) श्रेणी में आती है, जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 50 से 90 सेंटीमीटर तक होती है। अरावली का सबसे दक्षिणी सिरा (माउंट आबू) 150 सेमी वर्षा के साथ राज्य का सबसे आर्द्र स्थान है। यहाँ मुख्यतः इन्सेप्टीसोल्स (Inceptisols / पर्वतीय धूसर भूरी मिट्टी) पाई जाती है।
2. ऊँचाई व प्रादेशिक बनावट के आधार पर अरावली का त्रिस्तरीय वर्गीकरण
भौगोलिक विषमताओं, चोटियों की ऊँचाई और प्रादेशिक विन्यास के आधार पर अरावली पर्वतमाला को तीन मुख्य उप-विभागों में विभाजित करके पढ़ा जाता है:
[Image showing cross-section profile of Northern, Central, and Southern Aravalli peaks]
(1) उत्तरी अरावली (Northern Aravalli) — “तोरावटी व शेखावाटी पहाड़ियाँ”
- प्रशासकीय विस्तार (2026): इसके अंतर्गत मुख्य रूप से जयपुर शहर, जयपुर ग्रामीण, दूदू, दौसा, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, झुंझुनू और नवगठित नीमकाथाना (Neem Ka Thana) जिला शामिल है।
- औसत ऊँचाई: समुद्र तल से लगभग 450 मीटर।
- सर्वोच्च पर्वत चोटियाँ:
- रघुनाथगढ़ (सीकर): यह 1055 मीटर ऊँचाई के साथ उत्तरी अरावली का सर्वोच्च शिखर है।
- खो (जयपुर): ऊँचाई 920 मीटर (दूसरी सर्वोच्च चोटी)।
- भैरांच (अलवर): ऊँचाई 792 मीटर। | बरवाड़ा (जयपुर): 786 मीटर।
- प्रमुख क्षेत्रीय पहाड़ियाँ: बैराठ की पहाड़ियाँ (कोटपुतली-बहरोड़ – बाणगंगा नदी का उद्गम), खंडेला व मालखेत की पहाड़ियाँ (सीकर), तोरावटी की पहाड़ियाँ (नीमकाथाना – कांतली नदी का बेसिन), और उदयनाथ की पहाड़ियाँ (अलवर – रूपारेल नदी का उद्गम)।
(2) मध्य अरावली (Central Aravalli) — “मेरवाड़ा पहाड़ियाँ व ब्यावर संस्तर”
- 🚨 2026 प्रशासनिक स्थिति का महा-अपडेट: पूर्व में मध्य अरावली को केवल अजमेर जिले तक सीमित पढ़ा जाता था। परंतु नवीन प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद मध्य अरावली का सर्वाधिक ऊँचा और मुख्य भाग अब नवगठित ब्यावर (Beawar) जिले के अंतर्गत आता है, तथा शेष भाग अजमेर और केकड़ी में विस्तृत है।
- औसत ऊँचाई: समुद्र तल से लगभग 550 मीटर। यह अरावली का सबसे कटा-फटा और विच्छिन्न भाग है, जहाँ से थार मरुस्थल की शुष्क हवाएँ पूर्व की ओर प्रवेश करती हैं (मरुस्थल के मार्च में सहायक)।
- सर्वोच्च पर्वत चोटियाँ:
- गोरमजी / मायरजी (टॉडगढ़ – ब्यावर जिला): यह 933 मीटर ऊँचाई के साथ सम्पूर्ण मध्य अरावली की सर्वोच्च पर्वत चोटी है। (छात्र ध्यान दें: टॉडगढ़ अब ब्यावर जिले का हिस्सा है)।
- तारागढ़ (अजमेर): ऊँचाई 873 मीटर (माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अनुसार 870 मीटर)। यह मध्य अरावली की दूसरी सबसे प्रसिद्ध चोटी है, जिसके शीर्ष पर अजयमेरु दुर्ग स्थित है।
- नाग पहाड़ (Ajmer): ऊँचाई 795 मीटर (जहाँ से लूनी नदी का उद्गम सागरमती के रूप में होता है)।
🧭 मध्य अरावली के सुप्रसिद्ध दर्रे (Gaps / घाटियाँ)
दर्रे पहाड़ियों के बीच के वे तंग प्राकृतिक मार्ग होते हैं जो दो भौगोलिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ते हैं। ब्यावर के अरावली संस्तर में निम्नलिखित दर्रे आरपीएससी के सबसे प्रिय प्रश्न हैं:
- बर दर्रा (Barr Pass): यह वर्तमान में ब्यावर जिले में स्थित है, जो मारवाड़ (पाली) को मेवाड़/मेरवाड़ा (ब्यावर) से जोड़ने का मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग मार्ग है।
- सूरा घाट व शिवपुर घाट दर्रा: ये दोनों दर्रे भी अब पूर्णतः ब्यावर जिले के अंतर्गत प्रशासनिक रूप से नियंत्रित हैं, जो मध्य अरावली के मुख्य रणनीतिक दर्रे हैं। इसके अतिरिक्त परवेरिया और झीलवाड़ा दर्रे भी यहीं हैं।
(3) दक्षिणी अरावली (Southern Aravalli) — “मुख्य पर्वतीय विन्यास”
यह अरावली का सबसे ऊँचा, सघन, अजैविक रूप से सुदृढ़ और अनवरत भाग है, जिसके अंतर्गत सिरोही, उदयपुर, सलूंबर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों का विस्तृत पर्वतीय संस्तर आता है।
- औसत ऊँचाई: समुद्र तल से 900 मीटर से अधिक। राज्य की शीर्ष 10 सर्वोच्च चोटियाँ इसी भाग में संकेंद्रित हैं।
- दक्षिणी अरावली को मुख्य रूप से दो उप-भागों में विभाजित किया जाता है:
(A) आबू पर्वतखंड (Abu Block) — “जटिल बैथोलिथ संरचना”
यह सिरोही जिले में स्थित ग्रेनाइट चट्टानों का एक विशाल पठारी ब्लॉक है, जो भूविज्ञान में बैथोलिथ (Batholith) गुंबद का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- गुरु शिखर (माउंट आबू – 1722 मीटर): यह राजस्थान और संपूर्ण मध्य भारत की सर्वोच्च पर्वत चोटी है। महाकवि और इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने इसके शांत और आध्यात्मिक वातावरण को देखकर इसे “संतों का शिखर” (Peak of Saints) कहा था। इसके शीर्ष पर दतात्रेय ऋषि का प्राचीन मंदिर स्थित है।
- सेर (सिरोही): ऊँचाई 1597 मीटर (राज्य की दूसरी सबसे ऊँची चोटी)।
- दिलवाड़ा (सिरोही): ऊँचाई 1442 मीटर (तीसरी सबसे ऊँची चोटी)।
- उड़िया का पठार (Udhiya Plateau): समुद्र तल से 1360 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह संपूर्ण राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार है, जो माउंट आबू और सेर चोटी के नीचे विस्तृत है।
- Reginal Terms: सिरोही के अरावली क्षेत्र में पाई जाने वाली तीव्र ढाल वाली उबड़-खाबड़ पहाड़ियों को स्थानीय भाषा में ‘भाकर’ (Bhakar) कहा जाता है। (नोट: इसराना भाकर और रोजा भाकर जालौर जिले के ग्रेनाइट पर्वत हैं)। जसवंतपुरा की पहाड़ियों में स्थित ‘डोरा पर्वत’ (869 मीटर) पश्चिमी राजस्थान का सबसे ऊँचा शिखर है।
(B) मेवाड़ का चट्टानी प्रदेश व भोराठ पठार
यह उदयपुर, राजसमंद, सलूंबर और डूंगरपुर के मध्य फैला अत्यधिक सघन और दुर्गम पर्वतीय भाग है।
- भोराठ का पठार (Bhorat Plateau): RPSC परीक्षाओं का सबसे सदाबहार प्रश्न। यह पठार राजसमंद के कुंभलगढ़ और उदयपुर के गोगुंदा के मध्य स्थित एक अत्यधिक ऊँचा और विस्तृत पठारी भाग है।
- जरगा चोटी (उदयपुर): ऊँचाई 1431 मीटर। यह राजस्थान की चौथी सबसे ऊँची चोटी है।
- विशिष्ट क्षेत्रीय भौगोलिक शब्दावलियाँ (Micro-Geographical Terms):
- गिरवा (Girwa): उदयपुर शहर के चारों ओर स्थित तश्तरीनुमा (Saucer-shaped) पहाड़ियों की शृंखला को स्थानीय भाषा में ‘गिरवा’ कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘पहाड़ियों की मेखला’ है।
- देशहरो (Deshharo): उदयपुर में जरगा और रागा पर्वत चोटियों के मध्य का वह उच्च पर्वतीय क्षेत्र जो वर्षभर प्रचुर वर्षा के कारण सदाबहार और हरा-भरा (Green) रहता है, उसे ‘देशहरो’ कहा जाता है।
- ऊपरमाल का पठार: चित्तौड़गढ़ के भैंसरोड़गढ़ से लेकर भीलवाड़ा के बिजोलिया के मध्य स्थित उपजाऊ कृषि पठारी भाग को ‘ऊपरमाल का पठार’ कहा जाता है।
- मेसा का पठार (Mesa Plateau): चित्तौड़गढ़ जिला का वह चपटा पठार जिस पर राजस्थान का गौरव चित्तौड़गढ़ दुर्ग चित्रांगद मौर्य द्वारा निर्मित है।
- लसाड़िया का पठार: जयसमंद झील (सलूंबर जिला) के पूर्व में स्थित अत्यधिक कटा-फटा और विच्छेदित पठार लसाड़िया का पठार कहलाता है।
🧭 दक्षिणी अरावली के प्रमुख दर्रे (नाल)
दक्षिणी अरावली में पहाड़ियों के बीच के संकरे मार्गों को स्थानीय भाषा में ‘नाल’ (Naal) कहा जाता है:
- उदयपुर / सलूंबर संस्तर: फुलवारी की नाल (जहाँ से मानसी-वाकल नदियाँ गुजरती हैं), केवड़ा की नाल, और देबारी दर्रा (उदयपुर का मुख्य पूर्वी प्रवेश द्वार)।
- पाली संस्तर: देसूरी की नाल (पाली को मेवाड़ से जोड़ता है) और सोमेश्वर की नाल।
- राजसमंद संस्तर: कामलीघाट दर्रा, गोरमघाट दर्रा (जहाँ से सुंदर हेरिटेज ट्रेन गुजरती है), और जिलवा की नाल (पगल्या की नाल) $\rightarrow$ यह मारवाड़ से मेवाड़ में प्रवेश करने का प्राचीन कूटनीतिक मार्ग था।
3. अरावली पर्वतमाला का बहुआयामी पारिस्थितिक महत्व (Ecological Pillars)
अरावली केवल पत्थरों का ढेर नहीं है, यह राजस्थान के पर्यावरण विन्यास का सुरक्षा कवच है:
- मरुस्थलीकरण पर प्रभावी रोक (“The Green Wall”): अरावली पर्वतमाला उत्तर-पश्चिम में स्थित थार मरुस्थल के रेतीले विस्तार को पूर्वी उपजाऊ मैदानी भागों की ओर बढ़ने से रोकने में एक महान प्राकृतिक अवरोध (Natural Barrier) का कार्य करती है। यदि अरावली न होती, तो जयपुर, अलवराव और संपूर्ण पूर्वी मैदान आज रेगिस्तान बन चुके होते। इसी रणनीतिक महत्ता के कारण इसे “Green Wall of Rajasthan” कहा जाता है।
- महान भारतीय जल विभाजक रेखा (Watershed Role): अरावली पर्वतमाला भारतीय उपमहाद्वीप की एक प्रमुख जल विभाजक रेखा है। यह राज्य की नदियों के अपवाह को दो भागों में बांटती है— इसके पूर्व से निकलने वाली नदियाँ (बनास, चंबल, बाणगंगा) अपना जल बंगाल की खाड़ी की ओर ले जाती हैं, जबकि इसके पश्चिम से निकलने वाली नदियाँ (लूनी, पश्चिमी बनास, साबरमती) अपना जल अरब सागर की ओर विसर्जित करती हैं।
- जैव विविधता का महा-हब (Biodiversity Hotspot): अरावली के सघन पर्वतीय वनों में ढोंक, सालाार, खैर, बबूल और ढाक (पलाश – जंगल की ज्वाला) जैसी वनस्पतियों की प्रचुरता है। यह क्षेत्र तेंदुआ (पैंथर), रीछ, जरख, सांभर, चिंकारा और जंगली मुर्गों का मुख्य प्राकृतिक आवास है। सरिस्का टाइगर रिजर्व, कुंभलगढ़ अभ्यारण्य, और टॉडगढ़ रावली जैसे बड़े वन्यजीव अभ्यारण्य इसी की गोद में फल-फूल रहे हैं।
4. अरावली की वर्तमान चुनौतियाँ, समस्याएँ एवं संरक्षण प्रयास
करोड़ों वर्षों से अडिग खड़ी अरावली वर्तमान में गंभीर मानवीय खतरों से जूझ रही है:
- अवैध खनन (Illegal Mining): अरावली में तांबा, सीसा, जस्ता और संगमरमर के अंधाधुंध और अवैध खनन के कारण कई पहाड़ पूरी तरह गायब (समतल) हो चुके हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और भूजल स्तर नीचे जा रहा है।
- वनों की अंधाधुंध कटाई व शहरीकरण: बढ़ती जनसंख्या और शहरी विस्तार (जैसे जयपुर, अजमेर, गुरुग्राम का फैलाव) के कारण अरावली की पारिस्थितिकी नष्ट हो रही है, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारे (Wildlife Corridors) टूट रहे हैं।
🛠️ राष्ट्रीय व राजकीय स्तर पर संरक्षण प्रयास
- सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के कड़े विधिक आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की महत्ता को देखते हुए इसके कोर क्षेत्रों में सभी प्रकार की खनन गतिविधियों पर पूर्ण विधानिक प्रतिबंध लगाया है और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को इसकी लाइव मॉनिटरिंग के आदेश दिए हैं।
- अरावली ग्रीन वॉल परियोजना (Aravalli Green Wall Project): अफ्रीका की ‘ग्रेट ग्रीन वॉल’ की तर्ज पर भारत सरकार द्वारा गुजरात से दिल्ली तक अरावली के दोनों ओर 5 किमी चौड़ी हरित पट्टी (Buffer Zone) विकसित करने का महा-अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर स्थानीय वृक्षारोपण कर मरुस्थलीकरण को जड़ से रोका जा रहा है।
📊 अरावली पर्वतमाला: परीक्षा उपयोगी मास्टर मैट्रिक्स (Quick Revision Table)
| विशिष्ट संकेतक / बिंदु | आधिकारिक भौगोलिक तथ्य (Verified Data) | संबद्ध मुख्य जिला / स्थान (2026 Updated) | RPSC / RSMSSB परीक्षा हेतु कूट व दृष्टिकोण |
| मूल भूगर्भिक उत्पत्ति | प्रीकैम्ब्रियन काल; गोंडवाना लैंड का अवशेष | संपूर्ण विन्यास (गुजरात से दिल्ली) | विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमाला; वर्तमान में ‘अवशिष्ट’ रूप में विद्यमान। |
| सर्वोच्च पर्वत चोटी | गुरु शिखर (1722 मीटर) | माउंट आबू (सिरोही) | संपूर्ण मध्य भारत की सर्वोच्च चोटी; कर्नल टॉड ने ‘संतों का शिखर’ कहा। |
| उत्तरी अरावली का शीर्ष | रघुनाथगढ़ (1055 मीटर) | सीकर | जयपुर संभाग की सबसे ऊँची चोटी; क्वार्टजाइट चट्टान संरचना। |
| मध्य अरावली का शीर्ष | गोरमजी / मायरजी (933 मीटर) | टॉडगढ़ (ब्यावर जिला) | अजमेर से अलग होकर ब्यावर अब मध्य अरावली की सर्वोच्च चोटी का प्रशासनिक जिला है। |
| सबसे ऊँचा पठारी विन्यास | उड़ड़िया का पठार (1360 मीटर) | माउंट आबू (सिरोही) | सेर और दिलवाड़ा चोटियों के आधार पर स्थित राज्य का सर्वोच्च पठार। |
| प्रसिद्ध नाल / दर्रा कूट | भोराठ का पठार (कुंभलगढ़-गगोंदा) | राजसमंद व उदयपुर सीमा | परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाने वाला शीर्ष पर्वतीय पठार कूट। |
| मध्य अरावली के मुख्य दर्रे | बर दर्रा, सूरा घाट, शिवपुर घाट | ब्यावर जिला (नवीन जिला) | मारवाड़ को मेरवाड़ा से जोड़ने वाले मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग दर्रे। |
| धात्विक खनिज संकेंद्रण | खेतड़ी तांबा बेल्ट / जावर जस्ता खदानें | नीमकाथाना / उदयपुर | खेतड़ी अब झुंझुनू में नहीं, नीमकाथाना नए जिले का मुख्य औद्योगिक केंद्र है। |
📝 विगत वर्षों के महत्वपूर्ण प्रश्न (20 High-Yield Solved PYQs)
यहाँ RPSC और RSMSSB परीक्षाओं के पिछले 15 वर्षों के 20 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के पूर्ण प्रामाणिक उत्तर और विश्लेषणात्मक व्याख्याएँ दी जा रही हैं:
Q1. 2026 के नवीन प्रशासनिक जिला पुनर्गठन के बाद, मध्य अरावली की सर्वोच्च पर्वत चोटी ‘गोरमजी’ (933 मीटर) और प्रसिद्ध ‘बर दर्रा’ वर्तमान में किस जिले के अंतर्गत आते हैं?
- उत्तर: स्वतंत्र ब्यावर (Beawar) जिले के अंतर्गत।
- परीक्षा संदर्भ: आरपीएससी का हालिया अपडेटेड भूगोल प्रश्न।
- विस्तृत व्याख्या: नए 50 जिलों के गठन के बाद, अजमेर के टॉडगढ़ और पाली के बर क्षेत्र को मिलाकर ब्यावर को नया जिला बनाया गया है। अतः मध्य अरावली की सर्वोच्च चोटी गोरमजी और प्रसिद्ध बर दर्रा, सूरा घाट व शिवपुर घाट अब ब्यावर जिले के प्रशासनिक मानचित्र का हिस्सा हैं।
Q2. अरावली पर्वतमाला की भूगर्भिक संरचना, प्राचीनता और वलित स्वरूप के आधार पर इसकी तुलना विश्व की किस प्रसिद्ध पर्वत श्रृंखला से की जाती है?
- उत्तर: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) की एपलाचियन पर्वत श्रृंखला (Appalachian Mountains) से।
- परीक्षा संदर्भ: RPSC RAS Pre Exam (कई बार दोहराया गया)।
- विस्तृत व्याख्या: एपलाचियन पर्वतमाला भी अरावली की भाँति अत्यंत प्राचीन और प्रीकैम्ब्रियन-पेलियोजोइक काल की वलित पर्वत श्रृंखला है, जो वर्तमान में बाह्य अपक्षय के कारण अवशिष्ट और निम्न ऊँचाई वाले कर्णवत्त रूप में विद्यमान है।
Q3. कर्नल जेम्स टॉड ने माउंट आबू की सबसे ऊँची चोटी ‘गुरु शिखर’ (1722 मीटर) के शांत और आध्यात्मिक परिवेश को देखकर इसे किस विशिष्ट नाम से अलंकृत किया था?
- उत्तर: “संतों का शिखर” (Peak of Saints)।
- परीक्षा संदर्भ: RPSC II Grade Teacher Exam।
- विस्तृत व्याख्या: गुरु शिखर के शीर्ष पर पवित्र दतात्रेय ऋषि का प्राचीन मंदिर और तपोस्थली है, जहाँ प्राचीन काल से ऋषि-मुनि साधना करते आ रहे हैं। इसी आध्यात्मिक आभा को देखकर कर्नल टॉड ने इसे ‘संतों का शिखर’ कहा था।
Q4. राजस्थान के संपूर्ण भौतिक विन्यास में ‘भोराठ का पठार’ (Bhorat Plateau) किन दो विशिष्ट ऐतिहासिक भौगोलिक स्थानों के मध्य विस्तृत है?
- उत्तर: राजसमंद के कुंभलगढ़ और उदयपुर के गोगुंदा के मध्य।
- परीक्षा संदर्भ: RPSC और RSMSSB परीक्षाओं का सर्वाधिक दोहराया गया सदाबहार प्रश्न।
- विस्तृत व्याख्या: कुंभलगढ़ (राजसमंद) से लेकर गोगुंदा (उदयपुर) के मध्य स्थित अत्यधिक ऊँचा, कड़ा और विस्तृत पठारी भाग भोराठ का पठार कहलाता है। यह अरावली का एक मुख्य जल विभाजक हब है।
Q5. उत्तरी अरावली की सर्वोच्च पर्वत चोटी कौन सी है और नवीन प्रशासनिक सीमाओं के अनुसार यह किस क्षेत्र में स्थित है?
- उत्तर: रघुनाथगढ़; ऊँचाई 1055 मीटर (यह सीकर जिले में स्थित है)।
- परीक्षा संदर्भ: RSMSSB पटवारी / ग्राम विकास अधिकारी परीक्षा।
- विस्तृत व्याख्या: रघुनाथगढ़ उत्तरी अरावली का सर्वोच्च शिखर है। छात्र ध्यान दें कि इसके पास की तांबा बेल्ट खेतड़ी अब नीमकाथाना नए जिले में है, परंतु रघुनाथगढ़ चोटी का मुख्य भौगोलिक संस्तर सीकर जिले के अंतर्गत ही आता है।
Q6. सिरोही जिले के माउंट आबू क्षेत्र में पाई जाने वाली अरावली की अत्यंत तीव्र ढाल वाली उबड़-खाबड़ पहाड़ियों को स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता है?
- उत्तर: भाकर (Bhakar)।
- परीक्षा संदर्भ: RPSC II Grade Teacher।
- विस्तृत व्याख्या: सिरोही के पूर्वी भाग में स्थित अरावली की वे पहाड़ियाँ जिनकी ढाल अत्यधिक खड़ी, तीव्र और कटी-फटी होती है, उन्हें स्थानीय लोग ‘भाकर’ कहते हैं। इसके विपरीत, जालौर के ग्रेनाइट पर्वतों को ‘रोजा भाकर’ या ‘इशराना भाकर’ नाम दिया गया है।
Q7. उदयपुर शहर के चारों ओर स्थित ‘तश्तरीनुमा’ (Saucer-shaped) पहाड़ियों की सुंदर मेखला को स्थानीय भौगोलिक भाषा में किस नाम से पुकारा जाता है?
- उत्तर: गिरवा (Girwa)।
- परीक्षा संदर्भ: RSMSSB कनिष्ठ सहायक परीक्षा।
- विस्तृत व्याख्या: गिरवा का शाब्दिक अर्थ है ‘पहाड़ियों की गर्दन या मेखला’। उदयपुर शहर चारों ओर से अरावली की सुंदर तश्तरी जैसी गोल पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो इसे प्राकृतिक सुरक्षा और सौंदर्य प्रदान करती हैं।
Q8. उदयपुर में स्थित जरगा और रागा पर्वत चोटियों के मध्य का वह उच्च पर्वतीय भाग जो वर्षभर अपनी प्रचुर आद्रता के कारण सदाबहार व हरा-भरा रहता है, क्या कहलाता है?
- उत्तर: देशहरो (Deshharo)।
- परीक्षा संदर्भ: RPSC स्कूल व्याख्याता परीक्षा।
- विस्तृत व्याख्या: अरावली का यह विशिष्ट क्षेत्र अत्यधिक वर्षा प्राप्त करता है, जिससे यहाँ की वनस्पतियाँ सर्दियों और गर्मियों दोनों में पूर्णतः हरी-भरी रहती हैं, इसी विशिष्ट वानस्पतिक गुण के कारण इसे ‘देशहरो’ (देश का हरा भाग) कहते हैं।
Q9. भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया से लेकर चित्तौड़गढ़ के भैंसरोड़गढ़ के मध्य स्थित ऊंचे उपजाऊ कृषि पठारी भाग को किस नाम से जाना जाता है?
- उत्तर: ऊपरमाल का पठार (Uparmal Plateau)।
- परीक्षा संदर्भ: REET / पटवारी मुख्य परीक्षा।
- विस्तृत व्याख्या: यह पठार ऐतिहासिक रूप से ‘बिजोलिया किसान आंदोलन’ का मुख्य केंद्र रहा है। भौगालिक रूप से यह एक समतल उपजाऊ पठारी पट्टी है जहाँ रबी और खरीफ की प्रचुर फसलें उगाई जाती हैं।
Q10. समुद्र तल से 1360 मीटर की ऊँचाई पर स्थित ‘राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार’ कौन सा है और यह किस जिले में विस्तृत है?
- उत्तर: उड़ड़िया का पठार (Udhiya Plateau); यह सिरोही जिले के माउंट आबू क्षेत्र में स्थित है।
- परीक्षा संदर्भ: RSMSSB कनिष्ठ अभियंता परीक्षा।
- विस्तृत व्याख्या: यह पठार गुरु शिखर चोटी के ठीक नीचे स्थित है, जिसकी ऊँचाई 1360 मीटर है। यह राज्य का सर्वोच्च पठारी संस्तर है, जिस पर नक्की झील और आबू शहर की पृष्ठभूमि टिकी है।
Q11. अरावली पर्वतमाला को “Green Wall of Rajasthan” कहे जाने का मुख्य प्राथमिक और रणनीतिक पारिस्थितिक कारण क्या है?
- उत्तर: यह पश्चिमी थार मरुस्थल के रेतीले विस्तार को पूर्वी उपजाऊ मैदानी भागों की ओर बढ़ने से रोकने में एक प्राकृतिक अवरोध का कार्य करती है।
- परीक्षा संदर्भ: RPSC RAS Pre / मुख्य परीक्षा विन्यास।
- विस्तृत व्याख्या: अरावली की भौगोलिक अवस्थिति मरुस्थल के मार्च (Desert March) के सामने एक मजबूत दीवार की तरह खड़ी है, जो हवा की गति को रोककर पूर्वी मैदानों को रेगिस्तान बनने से बचाती है।
Q12. कछवाहों की प्राचीन राजधानी बैराठ (कोटपुतली-बहरोड़) की पहाड़ियों से किस प्रसिद्ध अंतः प्रवाही नदी का उद्गम होता है जिसे ‘अर्जुन की गंगा’ भी कहते हैं?
- उत्तर: बाणगंगा नदी (Baanganga River)।
- परीक्षा संदर्भ: RPSC वरिष्ठ उपाध्याय परीक्षा।
- विस्तृत व्याख्या: बैराठ की पहाड़ियों से निकलने वाली बाणगंगा को पौराणिक कथाओं में अर्जुन के बाण से उत्पन्न माना गया है। वर्ष 2012 से विधिक रूप से इसे ‘रुण्डित अंतः प्रवाही’ श्रेणी में शामिल किया गया है।
Q13. अरावली पर्वतमाला भारतीय उपमहाद्वीप की एक प्रमुख ‘जल विभाजक रेखा’ (Great Indian Water Divide) के रूप में नदियों के प्रवाह को किन दो समुद्री दिशाओं में विभाजित करती है?
- उत्तर: पूर्व की नदियों को बंगाल की खाड़ी की ओर तथा पश्चिम की नदियों को अरब सागर की ओर विभाजित करती है।
- परीक्षा संदर्भ: RPSC स्कूल व्याख्याता (भूगोल) परीक्षा।
- विस्तृत व्याख्या: अरावली का अक्ष ऐसा है कि इसके पूर्व से निकलने वाली बनास-चंबल यमुना में मिलकर बंगाल की खाड़ी जाती हैं, जबकि इसके पश्चिम से निकलने वाली लूनी-साबरमती अरब सागर की ओर अग्रसर होती हैं।
Q20. अरावली पर्वतीय प्रदेश में मुख्य रूप से किस वैज्ञानिक ऑर्डर की मिट्टी पाई जाती है और कृषि में इसका क्या महत्व है?
- उत्तर: Inceptisols (इन्सेप्टीसोल्स / पर्वतीय धूसर भूरी मिट्टी)।
- परीक्षा संदर्भ: हालिया अपडेटेड सॉयल-जियोग्राफी कूट।
- विस्तृत व्याख्या: यह अरावली के पहाड़ी ढलानों और अद्र घाटियों में पाई जाने वाली आंशिक विकसित संस्तरों वाली मिट्टी है, जो पतझड़ वनों को प्रचुर पोषण देती है और ढलानों पर मक्का (Maize) व ज्वार की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
Q1. अरावली पर्वतमाला को विश्व की “सबसे प्राचीनतम अवशिष्ट पर्वतमाला” क्यों माना जाता है और वर्तमान में इसकी औसत ऊँचाई कितनी है?
- उत्तर: अरावली पर्वतमाला की भूगर्भिक उत्पत्ति आज से लगभग 65 करोड़ वर्ष पूर्व प्रीकैम्ब्रियन काल में हुई थी, जो पृथ्वी के इतिहास की सबसे प्रारंभिक पर्वत निर्माणकारी हलचल थी। जब यह निर्मित हुई थी तब यह हिमालय की तरह ही एक अत्यंत ऊँचा और ‘वलित पर्वत’ था। परंतु करोड़ों वर्षों के निरंतर वर्षा, धूप, हवा और ग्लेशियरों के बाह्य अपक्षय व अपरदन के कारण इसके ऊंचे शिखर घिस चुके हैं और वर्तमान में यह केवल एक अवशिष्ट (Residual) पर्वतमाला के रूप में बची है, जिसकी वर्तमान औसत ऊँचाई समुद्र तल से मात्र 930 मीटर रह गई है।
Q2. ‘पीडमांट का मैदान’ (Piedmont) और ‘ऊपरमाल का पठार’ के मध्य क्या मुख्य भौगोलिक और संरचनात्मक अंतर होता है?
- उत्तर: परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह अंतर अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- पीडमांट का मैदान: यह बनास बेसिन के अंतर्गत देवगढ़ (राजसमंद) के पास स्थित अरावली का वह मैदानी भाग है जो पहाड़ियों के तीव्र अपरदन से समतल हो चुका है और बीच-बीच में निर्जन अवशिष्ट पहाड़ियाँ (Monadnocks) खड़ी हैं।
- ऊपरमाल का पठार: यह भीलवाड़ा के बिजोलिया से चित्तौड़गढ़ के भैंसरोड़गढ़ के मध्य स्थित एक ऊँचा, चपटा और अत्यधिक उपजाऊ कृषि पठार है, जो मालवा के दक्कन लावा ट्रैप का हिस्सा है।
Q3. ‘भोराठ का पठार’ (Bhorat) और ‘लसाड़िया का पठार’ (Lasadiya) वर्तमान 2026 के प्रशासनिक विन्यास के अनुसार किन जिलों में स्थित हैं?
- उत्तर: * भोराठ का पठार: यह राजसमंद के कुंभलगढ़ और उदयपुर के गोगुंदा के मध्य विस्तृत एक अत्यधिक ऊँचा पर्वतीय पठार है, जो राजसमंद और उदयपुर की सीमाओं को जोड़ता है।
- लसाड़िया का पठार: यह जयसमंद झील के पूर्व में स्थित अत्यधिक कटा-फटा और विच्छेदित पठार है, जो नए जिला पुनर्गठन के बाद अब उदयपुर से अलग होकर पूर्णतः स्वतंत्र सलूंबर (Salumber) जिले के अंतर्गत प्रशासनिक रूप से दर्ज है।
Q4. भारत सरकार द्वारा संचालित “Aravalli Green Wall Project” का मुख्य उद्देश्य क्या है और यह किस देश की तर्ज पर काम कर रहा है?
- उत्तर: इस महत्वाकांक्षी पर्यावरण परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली अरावली पर्वत श्रृंखला के दोनों किनारों पर 5 किलोमीटर चौड़ी एक हरित बफर पट्टी (Green Belt) विकसित करना है। इसके तहत बड़े पैमाने पर स्थानीय सघन वृक्षारोपण किया जा रहा है ताकि पश्चिमी थार मरुस्थल के उड़ते हुए रेतीले धोरों के विस्तार को पूर्वी उपजाऊ भारत की ओर बढ़ने से पूरी तरह रोका जा सके। यह परियोजना अफ्रीका महाद्वीप के सहारा मरुस्थल के विस्तार को रोकने के लिए बनाई गई ‘ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ अफ्रीका’ की सफल वैश्विक तर्ज पर भारत में क्रियान्वित की जा रही है।
Q5. सिरोही के अरावली संस्तर में प्रयुक्त होने वाली विशिष्ट लोक-शब्दावली ‘भाकर’ (Bhakar) का वास्तविक अर्थ क्या होता है?
- उत्तर: पूर्वी सिरोही और आबू पर्वतीय क्षेत्र के आस-पास पाई जाने वाली अरावली की वे कठोर ग्रेनाइट और क्वार्टजाइट पहाड़ियाँ जिनकी ढाल अत्यधिक खड़ी, तीव्र, कंटीली और उबड़-खाबड़ होती है, उन्हें स्थानीय जनजातीय संस्कृति और जनमानस में ‘भाकर’ कहा जाता है। यह क्षेत्र गरासिया जनजाति का मुख्य सुरक्षित निवास स्थान रहा है।
📚 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत (References & E-E-A-T Seal)
- निदेशालय, खान एवं भूविज्ञान विभाग, राजस्थान सरकार की आधिकारिक भूगर्भिक संचय रिपोर्ट (DMG Reports).
- डॉ. हरीमोहन सक्सेना, “राजस्थान का भूगोल” (राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा स्वीकृत प्रामाणिक संदर्भ ग्रंथ).
- भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) – अरावली ग्रीन वॉल परियोजना एवं यूनेस्को (UNESCO) भू-विरासत स्थल राजपत्र अधिसूचना (2024-2026 संशोधित संस्करण).
- RPSC RAS Pre/Mains, स्कूल व्याख्याता (Grade-I) और RSMSSB परीक्षाओं के विगत 15 वर्षों के आधिकारिक प्रश्नपत्रों का प्रामाणिक विश्लेषणात्मक संकलन।
- तथ्य जाँच एवं संपादन: सुयोग अकादमी संपादकीय टीम (सुधीर ढाका – BSc-BEd, योगेश जांगिड़ – सॉफ्टवेयर इंजीनियर)।

