शिक्षक की टिप्पणी (Teacher’s Note)
राजस्थान के उद्योग (Industries of Rajasthan Geography) विषय प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में राज्य के विभिन्न प्रकार के उद्योगों—जैसे खनिज आधारित उद्योग, वस्त्र उद्योग, सीमेंट उद्योग, हस्तशिल्प उद्योग एवं कृषि आधारित उद्योग—का विस्तृत अध्ययन किया गया है।
विद्यार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि केवल उद्योगों के नाम याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके स्थान, विकास के कारण, कच्चा माल, प्रमुख केंद्र और आर्थिक महत्व को समझना भी आवश्यक है। विशेष रूप से भीलवाड़ा (टेक्सटाइल), चित्तौड़गढ़ (सीमेंट), किशनगढ़ (मार्बल), सांभर (नमक उद्योग) जैसे उदाहरण परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
इस अध्याय को पढ़ते समय विद्यार्थियों को निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
- उद्योगों के प्रकार और उनका वर्गीकरण
- प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र एवं उनके कारण
- राजस्थान में उद्योगों के विकास की चुनौतियाँ
- RIICO और औद्योगिक नीतियों की भूमिका
- हाल के औद्योगिक विकास (जैसे DMIC, नीमराना, बाड़मेर रिफाइनरी)
यह सामग्री इस प्रकार तैयार की गई है कि यह RPSC, REET, Patwari, SSC, UPSC जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी हो और साथ ही आपकी अवधारणाओं को मजबूत बनाए।
👉 सुझाव: इस अध्याय को पढ़ने के बाद दिए गए FAQs और PYQs अवश्य हल करें, ताकि आपकी परीक्षा तैयारी और अधिक प्रभावी हो सके।
परिचय (Introduction)
RPSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थान के उद्योग से प्रतिवर्ष 3–5 प्रश्न पूछे जाते हैं | राजस्थान औद्योगिक विकास की दृष्टि से एक पिछड़ा हुआ राज्य है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- राजस्थान में जलवायु की विपरीत दिशाएँ पाई जाती हैं।
- आधारभूत संरचना का अल्प विकास।
- औद्योगिक क्षेत्र में निवेश कम होना।
- कुशल श्रमिकों का अभाव।
महत्वपूर्ण तथ्य: कोटा को तीव्र औद्योगिक विकास के कारण ‘राजस्थान की औद्योगिक नगरी’ कहा जाता है।
वर्तमान में राजस्थान में:
- सर्वाधिक उद्योग / फैक्ट्री → जयपुर
- सर्वाधिक वृहद उद्योग → अलवर
B. उद्योगों का वर्गीकरण (Classification of Industries)
उद्योगों को तीन आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है:
- आकार के आधार पर
- विनिर्माण के आधार पर
- स्वामित्व के आधार पर
1. आकार के आधार पर वर्गीकरण
| उद्योग | पूँजी एवं निवेश | टर्नओवर |
|---|---|---|
| (i) सूक्ष्म | 2.5 करोड़ तक | 10 करोड़ तक |
| (ii) लघु | 2.5 से 25 करोड़ | 10 – 100 करोड़ |
| (iii) मध्यम | 25 से 125 करोड़ | 100 – 500 करोड़ |
कुटीर उद्योग – निम्न तकनीक पर आधारित उद्योग, जिनका उद्देश्य लाभ प्राप्त करने के स्थान पर आजीविका चलाना होता है।
2. विनिर्माण के आधार पर वर्गीकरण
विनिर्माण के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कच्चे माल के आधार पर किया जाता है:
- कृषि आधारित उद्योग
- खनिज आधारित उद्योग
- वनोत्पाद आधारित उद्योग
- इंजीनियरिंग उद्योग
- रासायनिक उद्योग
I. कृषि आधारित उद्योग (Agriculture-Based Industries)
(A) सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry)
प्रमुख निजी सूती वस्त्र मिलें:
- राजस्थान स्पिनिंग एंड वीविंग मिल – भीलवाड़ा
- मेवाड़ टेक्सटाइल मिल – भीलवाड़ा
- आदित्य मिल्स लिमिटेड – किशनगढ़ (अजमेर)
- सार्दुल टेक्सटाइल मिल – गंगानगर
सार्वजनिक सूती वस्त्र उद्योग:
- एडवर्ड्स (ब्यावर, 1906)
- विजयनगर – ब्यावर
- महालक्ष्मी (ब्यावर, 1925)
सहकारी सूती वस्त्र उद्योग:
- राजस्थान सहकारी कताई मिल (गुलाबपुरा – भीलवाड़ा) → 1965 → प्रथम सहकारी सूती वस्त्र मिल
- गंगापुर सहकारी कताई मिल (भीलवाड़ा – 1981)
- श्री गंगानगर सहकारी कताई मिल (हनुमानगढ़ – 1978)
- गुलाबपुरा स्पिनिंग व जिनिंग सहकारी मिल
SPINEFD / स्पिनफैड: Rajasthan State Cooperative Spinning & Ginning Mills Federation Ltd – स्थापना: 1 अप्रैल 1993। यह सहकारी सूती वस्त्र मिलों का एक संघ है।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य:
- सूती वस्त्र उद्योग कृषि आधारित सबसे बड़ा उद्योग है।
- यह एक परम्परागत उद्योग है।
- महिलाएँ इस उद्योग में सर्वाधिक कार्यरत हैं।
- महाराजा उम्मेद सिंह मिल्स लिमिटेड (पाली, 1939) राजस्थान की सबसे बड़ी सूती वस्त्र मिल थी।
- भीलवाड़ा को राजस्थान का मैनचेस्टर / वस्त्रनगरी / टेक्सटाइल सिटी कहते हैं।
- उभरता हुआ वस्त्र नगर – भिवाड़ी
(B) चीनी उद्योग (Sugar Industry)
कच्चा माल: गन्ना एवं चुकन्दर
| मिल | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| मेवाड़ शुगर मिल 1932 | चित्तौड़ | प्रथम निजी चीनी मिल |
| उदयपुर शुगर मिल 1976 | उदयपुर | – |
| गंगानगर शुगर मिल 1937 | गंगानगर | प्रथम सार्वजनिक चीनी मिल (1956) |
| केशीरायपाटन शुगर मिल 1965 | बूँदी | प्रथम सहकारी चीनी मिल |
नोट: गंगानगर शुगर मिल एकमात्र मिल है जहाँ 1968 में चुकन्दर व गन्ने से चीनी बनाई गई। वर्तमान में यह बंद है। इसके द्वारा वर्तमान में निम्नलिखित उपक्रमों का संचालन किया जा रहा है:
- देशी शराब का निर्माण (डिस्ट्रीलरी)
- हेरिटेज लिकर का निर्माण
- द हाईटेक प्रिसीजन ग्लास फैक्ट्री, धौलपुर
- सेनेटाइजर का निर्माण
(C) ऊन उद्योग (Wool Industry)
आधार: पशु सम्पदा (भेड़, ऊँट)
सर्वाधिक ऊन उत्पादक (2022-2023 के अनुसार):
- 1st – राजस्थान (47.98%)
- 2nd – जम्मू & कश्मीर
प्रमुख ऊन उद्योग:
| क्र. | संस्था/स्थान |
|---|---|
| 1 | केन्द्रीय ऊन बोर्ड – जोधपुर |
| 2 | राजस्थान में सर्वाधिक ऊन उत्पादक – जोधपुर |
| 3 | राजस्थान में सबसे बड़ी ऊन मण्डी – बीकानेर |
| 4 | वूल टेस्टिंग प्रयोगशाला – बीकानेर |
| 5 | स्टेट वूल मिल – बीकानेर |
| 6 | ऊन प्रोसेसिंग केन्द्र – जयपुर |
| 7 | केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान केन्द्र – अविकारनगर (टोंक) |
| 8 | वर्स्टेड स्पिनिंग मिल्य – लाडनूं (डीडवाना-कुचामन), चूरू |
नोट: ऊन कॉम्प्लेक्स → खारा (बीकानेर), ब्यावर, नरबदखेड़ा, गुहाना (ब्यावर)
(D) वनस्पति घी एवं सरसों तेल उद्योग
- राजस्थान में प्रथम वनस्पति घी फैक्ट्री – भीलवाड़ा (1964)
- वर्तमान में वनस्पति घी का सर्वाधिक उत्पादन – जयपुर
- वर्तमान में सरसों तेल का सर्वाधिक उत्पादन – जयपुर
सरसों तेल के प्रमुख कारखाने:
- चम्बल – जयपुर
- वीर बालक – जयपुर
- नेताजी – जयपुर
- इंजन मार्क – भरतपुर
(E) डेयरी उद्योग (Dairy Industry)
- राजस्थान में डेयरी उद्योग का सर्वाधिक विकास – जयपुर में
- राजस्थान राज्य डेयरी विकास निगम – 1975, जयपुर (सहयोग – विश्व बैंक)
डेयरी विकास के लिए राज्य में त्रि-स्तरीय ढाँचा:
- शीर्ष → RCDF (राजस्थान सहकारी डेयरी संघ, जयपुर) – स्थापना 1977
- जिला स्तर पर → जिला दुग्ध सहकारी संघ → 24
- ग्रामीण स्तर पर → प्राथमिक सहकारी दुग्ध समितियाँ → 19054
नोट: RCDF (Rajasthan Cooperative Dairy Federation) की स्थापना राजस्थान राज्य विकास निगम के स्थान पर की गई।
राजस्थान में संचालित प्रमुख डेयरियाँ:
| डेयरी | विवरण |
|---|---|
| पद्मा (अजमेर, 1938) | राजस्थान की प्रथम डेयरी |
| वरमूल (WRMOL) | Western Rajasthan Milk Union Ltd. – जोधपुर |
| उरमूल (URMUL) | Uttari Rajasthan Milk Union Ltd. – बीकानेर |
| गंगमूल (Gangmul) | Ganganagar Milk Union Ltd. – हनुमानगढ़ |
| कैमल मिल्क डेयरी | 1st → बीकानेर, 2009 (जोडबीड); 2nd → जैसलमेर, 2021 (पोकरण) |
| मेट्रो डेयरी | गोविन्दगढ़, जयपुर (क्षमता – 11 लाख लीटर) |
- ऊँटनी के ‘दुग्ध विपणन का केन्द्र’ (21000 लीटर प्रति दिन) – जयपुर में स्थापित।
- देश में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन: 1st – उत्तर प्रदेश, 2nd – राजस्थान (14.44%)
(F) बायोडीजल उद्योग
कच्चा माल: रतनजोत / जैट्रोफा एवं करंज
- बायोडीजल रिफाइनरी – कलड़वास (उदयपुर)
- बायोडीजल प्लांट – झामरकोटड़ा (उदयपुर)
(G) जैतून तेल एवं ऑलिव ऑयल उद्योग
कच्चा माल: जैतून
- जैतून रिफाइनरी – लूणकरणसर (बीकानेर)
- ऑलिव ऑयल टी-प्लांट – जयपुर (बस्सी) (सहयोग – इजराइल)
II. खनिज आधारित उद्योग (Mineral-Based Industries)
1. सीमेन्ट उद्योग (Cement Industry)
- सर्वाधिक सीमेन्ट उत्पादन – चित्तौड़गढ़ (निम्बाहेड़ा)
- कच्चा माल: चूना पत्थर, जिप्सम व सिलिका
- प्रथम सीमेन्ट फैक्ट्री – ACC (एसोसिएट सीमेन्ट कम्पनी) – लाखेरी (बूँदी)
- सहयोग – क्लिक निक्सन | स्थापना – 1915 ई. (उत्पादन 1917 ई.)
सफेद सीमेन्ट फैक्ट्री:
- J.K. व्हाईट सीमेन्ट फैक्ट्री – गोटन (नागौर), 1984
- J.K. व्हाईट सीमेन्ट फैक्ट्री – मांगरोल (चित्तौड़)
- बिरला व्हाईट सीमेन्ट फैक्ट्री – खारियाखंगार (जोधपुर)
सीमेन्ट उत्पादन की प्रमुख इकाइयाँ:
| फैक्ट्री | स्थान |
|---|---|
| J.K. सीमेन्ट | निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) |
| अल्ट्राटेक सीमेन्ट | चित्तौड़गढ़ |
| चेतक सीमेन्ट | चित्तौड़गढ़ |
| लाफार्ज सीमेन्ट | चित्तौड़गढ़ |
| ऐसोसिएट सीमेन्ट | लाखेरी (बूँदी) |
| बांगड़ सीमेन्ट | पाली |
| श्री सीमेन्ट | गंगानगर, चूरू, ब्यावर |
| बिनानी सीमेन्ट | पिंडवाड़ा (सिरोही) |
| श्री राम सीमेन्ट | श्री रामनगर (कोटा) |
| ग्रासिम सीमेन्ट | कोटपुतली बहरोड़ |
| मंगलम सीमेन्ट | मोड़क (कोटा) |
| जयपुर सीमेन्ट | सवाई माधोपुर |
| अम्बुजा सीमेन्ट | राबडियावास (ब्यावर); मुंडवा-मारवाड़ (नागौर) |
| वंडर सीमेन्ट | चित्तौड़गढ़ |
| J&K लक्ष्मी सीमेन्ट | सिरोही |
2. काँच उद्योग (Glass Industry)
- कच्चा माल: सिलिका सैंड, सोडियम सल्फेट, शोरा (पोटेशियम नाइट्रेट)
- राजस्थान में काँच उद्योग का सर्वाधिक विकास – धौलपुर व अलवर
प्रमुख काँच फैक्ट्री:
- धौलपुर → धौलपुर ग्लास फैक्ट्री; द हाईटेक प्रिसीजन ग्लास फैक्ट्री (गंगानगर शुगर मिल)
- कोटा → सेमकोर ग्लास फैक्ट्री (दक्षिणी कोरिया)
- अलवर → सेंट गोबेन ग्लास फैक्ट्री (फ्राँस) (भिवाड़ी, खैरथल तिजारा)
3. नमक उद्योग (Salt Industry)
प्रमुख स्रोत: महासागरीय जल एवं खारे पानी की झील
| स्थान | विशेष |
|---|---|
| साँभर (जयपुर) | सर्वाधिक नमक उत्पादन; संचालन – हिन्दुस्तान सॉल्ट लिमिटेड |
| पचपदरा (बालोतरा) | सर्वश्रेष्ठ श्रेणी का नमक |
| डीडवाना (नागौर) | निम्नतम श्रेणी का नमक उत्पादन |
4. मार्बल उद्योग (Marble Industry)
- मार्बल उद्योग में राजस्थान का प्रथम स्थान।
- सर्वाधिक मार्बल उत्पादन – राजसमंद में।
- किशनगढ़ (अजमेर) – मार्बल मण्डी का सबसे बड़ा विपणन केन्द्र।
- राजस्थान का सफेद मार्बल (मकराना, डीडवाना-कुचामन) विश्व प्रसिद्ध माना जाता है।
5. ग्रेनाइट उद्योग (Granite Industry)
- इस पत्थर का उत्पादन सर्वाधिक राजस्थान के जालोर, बाड़मेर, सिरोही क्षेत्र से होता है।
- जालोर को राजस्थान की ‘ग्रेनाइट सिटी’ कहा जाता है।
6. अभ्रक उद्योग (Mica Industry)
- राजस्थान में अभ्रक ईंट बनाने का कारखाना – भीलवाड़ा
- उपयोग → अभ्रक से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाए जाते हैं।
- (अभ्रक / माईका सिटी)
III. वनोत्पाद आधारित उद्योग (Forest-Based Industries)
| उत्पाद | वनस्पति/वृक्ष | क्षेत्र |
|---|---|---|
| नक्काशीदार फर्नीचर | सागवान / रोहिड़ा | बाड़मेर एवं जोधपुर |
| खाद्य गोंद | कूमट वृक्ष | चौहटन (बाड़मेर) |
| टसर रेशम (कार्यक्रम-1986) | शहतूत | उदयपुर, बांसवाड़ा, कोटा |
| बीड़ी | तेंदू पत्ता | अजमेर, भीलवाड़ा; टोंक (मयूर बीड़ी) |
| कत्था | – | उदयपुर, चित्तौड़गढ़ |
| औषधी एवं शराब | महुआ | डूंगरपुर, बांसवाड़ा |
IV. इंजीनियरिंग / तकनीकी उद्योग (Engineering Industries)
| उद्योग | उत्पाद | स्थान |
|---|---|---|
| नेशनल इंजीनियरिंग कम्पनी | बॉल व बेयरिंग | जयपुर |
| जयपुर मेटल्स | बिजली के मीटर | जयपुर |
| कैप्सटन मीटर | पानी के मीटर | जयपुर, पाली |
| राजस्थान इलैक्ट्रो. कॉर्पोरेशन | T.V. | जयपुर |
| मान इन्डस्ट्रीज | लौह के दरवाजे एवं टॉवर निर्माण | जयपुर |
| REIL (Rajasthan Electronics & Instruments Limited) | नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र व सॉफ्टवेयर | कनकपुर (जयपुर) |
| हीरो मोटोकॉर्प | मोटर साइकिल | कुकस (जयपुर), नीमराणा (कोट-बहरोड़) |
| केबल इन्डस्ट्रीज | केबल | कोटा |
| इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड | यंत्र एवं मशीन | कोटा |
| श्र-ज्ञ इलेक्ट्रॉनिक्स | T.V. | कोटा |
| फ्लोर्सपार संयंत्र | लौहे के साथ मिलकर संयंत्र निर्माण | डूंगरपुर |
| सिमको वैगन फैक्ट्री (1957) | रेल डिब्बे निर्माण | भरतपुर |
V. रासायनिक उर्वरक उद्योग (Chemical Fertilizer Industries)
- चम्बल फर्टिलाइजर्स एवं केमिकल्स – गड़ेपान (कोटा)
- राष्ट्रीय केमिकल्स एवं फर्टिलाइजर्स (DAP – डाई अमोनियम फॉस्फेट) – कपासन (चित्तौड़)
- राजस्थान स्टेट कैमिकल वर्क्स – डीडवाना, 1964
- पाइराइट एण्ड फॉस्फेट लिमिटेड – सलेदीपुरा (सीकर)
3. स्वामित्व के आधार पर वर्गीकरण
- निजी उद्योग (व्यक्तिगत आधार)
- सार्वजनिक उद्योग (सरकार का अधिकार)
- केन्द्र सरकार के उपक्रम – 7
- राज्य सरकार के उपक्रम – 23 (वैधानिक बोर्ड – 6; कम्पनी अधिनियम – 17)
- सहकारी उद्योग (व्यक्तिगत एवं सरकार दोनों का अधिकार)
केन्द्र सरकार के उपक्रम (7):
- हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड, 1967
- हिन्दुस्तान मशीन लिमिटेड, 1967
- हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड – देवारी (उदयपुर, 1966)
- हिन्दुस्तान सॉल्ट लिमिटेड, 1964
- मॉडर्न बेकरी (निजीकरण, 1965)
- ड्रग्स & फार्मास्युटिकल्स, 1978
- इंस्ट्रूमेंटेशन – 1964
राज्य सरकार के उपक्रम:
(i) वैधानिक बोर्ड – 6:
| वर्ष | संस्था |
|---|---|
| 1955 | राजस्थान वित्त निगम |
| 1957 | कृषि भण्डारण निगम |
| 1 अक्टूबर 1964 | राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) |
| 1970 | राजस्थान राज्य हाउसिंग बोर्ड निगम (RHB) |
| 1974 | राज्य कृषि विपणन बोर्ड |
| 1975 | राज्य भूमि विकास निगम |
(ii) कम्पनी अधिनियम – 17 प्रमुख उपक्रम:
- RSMML – राजस्थान राज्य खान एवं खनिज निगम (30 अक्टूबर 1974) उदयपुर
- राज्य विद्युत वितरण निगम – जोधपुर, अजमेर, जयपुर
- REIL – Rajasthan Electronics & Instruments Ltd. – (कनकपुरा, जयपुर)
C. औद्योगिक विकास (Industrial Development)
I. राजस्थान में औद्योगिक नीतियाँ
सामान्य नीतियाँ:
- 1978 (प्रथम), 1991, 1994, 1998, 2010, 1 जुलाई 2019
MSME नीति:
- 20 नवम्बर 2015, 17 सितम्बर 2022, 9 दिसम्बर 2024
हैंडीक्राफ्ट / हस्तशिल्प नीति:
- 17 सितम्बर 2022
II. विशेष औद्योगिक क्षेत्र – SEZ (रिको द्वारा क्रियान्वयन)
राजस्थान में सर्वाधिक SEZ जयपुर में स्थित है।
| प्रमुख सेज | सम्बन्धित क्षेत्र | जिला |
|---|---|---|
| बोरानाड़ा सेज | ग्वारगम, हैण्डीक्राफ्ट | जोधपुर |
| सीतापुरा सेज | जेम्स एंड ज्वैलरी | जयपुर |
| महिन्द्रा सेज | आई.टी. हैण्डीक्राफ्ट | जयपुर (कलवाड़ा) |
| सोमानी सेज | हार्डवेयर एंड सॉफ्टवेयर | खैरथल-तिजारा |
| आर.एन.बी. सेज | टेक्सटाइल | बीकानेर |
| वाटिका सेज (प्रस्तावित) | आई.टी. | जयपुर |
III. औद्योगिक पार्क एवं कॉम्प्लैक्स
| पार्क | स्थान |
|---|---|
| जापानी पार्क (जेट्रो) | नीमराणा; घिलोठ (कोटपुतली-बहरोड़) |
| कोरियन पार्क (KOTRA) | घिलोठ (कोटपुतली-बहरोड़) |
| सिरेमिक जोन | घिलोठ (कोटपुतली-बहरोड़) |
| एग्रो फूड पार्क | श्री गंगानगर, जोधपुर, कोटा, अलवर |
| मेगा फूड पार्क (केन्द्र सरकार) | रूपनगढ़ (अजमेर); प्रस्तावित: सानियाना (जोधपुर), पलाना (बीकानेर) |
| सूचना तकनीकी पार्क (IT पार्क) | जयपुर, कोटा, जोधपुर, उदयपुर |
| मसाला पार्क (Spice Park) | 1st मथानिया (जोधपुर); 2nd रामगंज मण्डी (कोटा) |
| परिधान पार्क / अपैरल पार्क | जगतपुरा (महल रोड) जयपुर |
| स्टोन पार्क | मण्डौर (जोधपुर), मासलपुर (करौली), विसनौधा (धौलपुर), मण्डाना (कोटा) |
| सॉफ्टवेयर पार्क | कनकपुरा (जयपुर) |
| पुष्प पार्क | खुशखेड़ा (खैरथल-तिजारा) |
| होजरी पार्क | चौपंकी (खैरथल-तिजारा) |
| निर्यात संवर्द्धन औद्योगिक पार्क | सीतापुरा (जयपुर), बोरानाड़ा (जोधपुर), नीमराणा (कोटपुतली-बहरोड़) |
| सिरामिक पार्क | सोनिंयाणा (चित्तौड़गढ़) |
| स्टोन पार्क | निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़), बूँदी |
| खिलौना पार्क | कोटा |
| फार्मा पार्क | DMIC (दिल्ली मुम्बई इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर) |
| मेड टेक मेडिकल डिवाइसेंज पार्क | बोरानाड़ा (जोधपुर) |
| इंटीग्रेटेड रिसोर्स रिकवरी पार्क | जयपुर |
नोट: देश का प्रथम निर्यात संवर्द्धन औद्योगिक पार्क – सीतापुरा (जयपुर)
कॉम्प्लैक्स:
| कॉम्प्लैक्स | स्थान |
|---|---|
| ऊन कॉम्प्लैक्स | खारा (बीकानेर), ब्यावर, गोहन (ब्यावर), नरबदखेड़ा |
| सिरामिक कॉम्प्लैक्स | खारा (बीकानेर) |
| लेदर कॉम्प्लैक्स | मानपुरा-माचेड़ी (जयपुर) |
| पैट्रो कॉम्प्लैक्स | बालोतरा |
IV. औद्योगिक निवेश कार्यक्रम
- रिसर्जेंट राजस्थान → 2008
- रिसर्जेंट राजस्थान – नवम्बर 2015
- निवेश / इन्वेस्ट राजस्थान समिट – 7 अक्टूबर 2022
- राजसिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट – 9-10-11 दिसम्बर 2024
- आयोजन – जयपुर, JECC (जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर)
- थीम – Replete, Responsible, Ready (R3)
- उद्देश्य – अगले 5 वर्षों में राजस्थान को 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना।
नोट: निवेश कार्यक्रम का आयोजन करवाने वाली नोडल एजेंसी – BIP (ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन) – गठन 1991। उद्देश्य – 10 करोड़ से अधिक के औद्योगिक निवेश।
V. दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC)
वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर:
- कुल लम्बाई – 1504 कि.मी. (7 राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों में)
- दादरी (UP) से JLN पोर्ट (मुम्बई)
- राजस्थान में लम्बाई = 570 कि.मी. (38%)
- सहायता = जापान
- उद्देश्य = औद्योगिक निर्यात को बढ़ावा देना।
DMIC के दोनों तरफ 150 कि.मी. की पट्टी को DMIC के रूप में विकसित किया जाएगा जिसमें 24 औद्योगिक क्षेत्र एवं 8 औद्योगिक निवेश क्षेत्र बनाए जाएंगे।
राजस्थान में DMIC का प्रथम चरण:
- (a) खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराणा (165 कि.मी²) – 28 Dec 2020 को ‘विशेष निवेश क्षेत्र’ घोषित
- (b) जोधपुर-पाली-मारवाड़ (154 कि.मी²) – 12 अक्टूबर 2020 को ‘विशेष निवेश क्षेत्र’ घोषित
औद्योगिक क्षेत्र:
- जयपुर-दौसा औद्योगिक क्षेत्र
- राजसमंद-भीलवाड़ा औद्योगिक क्षेत्र
- जोधपुर-पाली-मारवाड़ (RIICO)
RIDCO – राजस्थान इण्डस्ट्रियल डवलपमेंट कॉर्पोरेशन – स्थापना 15 मार्च 2022
नोट: प्रथम चरण में पूर्णतः राजकीय भूमि (Govt. Land) शामिल है।
VI. औद्योगिक संस्थान (Industrial Institutions)
1. RFC (Rajasthan Financial Corporation / राज्य वित्त निगम)
- स्थापना: जनवरी 1955
- मुख्यालय: जयपुर
- उद्देश्य: अतिलघु, लघु एवं मध्यम उद्योगों को अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराना।
RFC की योजनाएँ:
- (i) फ्लैक्सी ऋण योजना – MSME उद्योगों को सस्ती दर पर ऋण।
- (ii) टॉप-अप योजना – अतिलघु उद्योगों को तकनीकी व मशीनरी विकास के लिए ऋण।
- (iii) सेमफैक्स योजना (SEMFEX) – भूतपूर्व सैनिकों को उद्योग स्थापित करने के लिए सहयोग।
नोट: RFC द्वारा विश्वसनीय ऋणियों को सिल्वर, गोल्ड, प्लैटिनम कार्ड जारी किया जाता है।
2. राजसिको (RAJSICO – Rajasthan Small Industries Corporation Limited)
- स्थापना: जून 1961
- मुख्यालय: जयपुर
- उद्देश्य:
- आदिवासी क्षेत्रों में प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना।
- लघु उद्योगों को कच्चा माल, मशीनरी व तकनीकी सुविधा उपलब्ध करवाना।
- लघु उद्योगों से उत्पादित माल के विपणन का कार्य करना।
3. रीको (RIICO – Rajasthan State Industrial Development and Investment Corporation Limited)
- स्थापना: 28 मार्च 1969 (पुनर्गठन – 1 जनवरी 1980)
- मुख्यालय: जयपुर
- उद्देश्य:
- मध्यम एवं वृहद उद्योगों को दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध करवाना।
- उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध करवाना।
- सेज कार्यक्रम का संचालन।
- यह राजस्थान में उद्योगों की शीर्ष संस्था है।
4. रूडा (RUDA – Rural Non-farm/Agriculture Development Agency)
- स्थापना: 1995
- मुख्यालय: जयपुर
- उद्देश्य: गैर-कृषि क्षेत्रों में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित प्रशिक्षण देना।
- प्रशिक्षण क्षेत्र: ऊन एवं वस्त्र उद्योग, चमड़ा उद्योग, लघु व गौण खनिज।
VII. औद्योगिक विकास योजनाएँ
A. एसाईड योजना:
- औद्योगिक निर्यात को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई योजना।
- शुरुआत – मार्च 2002
B. मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना:
- शुरुआत – 2013
- उद्देश्य: हस्त आधारित व दस्तकारों को स्वयं का उद्योग स्थापित करने के लिए 10 लाख रु. तक का ऋण।
C. मुख्यमंत्री युवा उद्यमिता योजना:
- शुरुआत – 1 अप्रैल 2013 (31 जुलाई 2024 तक)
- उद्देश्य: युवाओं को आर्थिक सहयोग व ऋण उपलब्ध करवाना।
- योग्यता – आयु 18 से 35 वर्ष, 10 वीं पास + ITI या ग्रेजुएट
- ऋण राशि – 25 लाख से एक करोड़ (वापसी अवधि 7 वर्ष)
D. मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना:
- शुरुआत – 17 दिसम्बर 2019 (31 मार्च 2024 से प्रभावी)
- लघु उद्योगों के ऋण पर ब्याज अनुदान योजना।
| ऋण राशि | ब्याज अनुदान |
|---|---|
| 25 लाख | 8% |
| 25 लाख – 5 करोड़ | 6% |
| 5 करोड़ – 10 करोड़ | 5% |
E. डॉ. भीमराव अम्बेडकर राजस्थान दलित, आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना – 2022:
- प्रारंभ – 8 सितम्बर 2022
- उद्देश्य: SC एवं ST वर्गों की गैर कृषि क्षेत्रों में उद्यम ऋण पर ब्याज अनुदान।
| ऋण राशि | ब्याज अनुदान |
|---|---|
| रू. 25 लाख तक | 9 प्रतिशत |
| रू. 25 लाख – 5 करोड़ | 7 प्रतिशत |
| रू. 5 करोड़ – 10 करोड़ | 6 प्रतिशत |
उद्यम लागत का 25% या रू. 25 लाख अनुदान राशि देय होगा।
D. अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- औद्योगिक विकास के लिए जिला स्तर पर → जिला उद्योग केन्द्र – 36, उपकेन्द्र – 8
- सिंगल विंडो क्लियरेंस एक्ट – 2011 (संशोधित 2020)
- ई-गवर्नेंस व IT नीति – नवम्बर 2015
राज्य के विशेष औद्योगिक संस्थान:
- कम्प्यूटर ऐडेड कॉर्पेट (Carpet) डिजाइन सेंटर → जयपुर
- कम्प्यूटर ऐडेड टेक्सटाईल डिजाइन सेंटर → भीलवाड़ा
- ब्रहमगुप्त अनुसंधान व विकास संस्थान → जोधपुर
- फूटविअर डिजाइन सेंटर → मंडोर (जोधपुर)
- NIFT (National Institute of Fashion Technology) → बीकानेर
राजस्थान में निवेश प्रोत्साहन नीति
| नीति | वर्ष |
|---|---|
| निवेश प्रोत्साहन नीति | 2003 |
| राजस्थान उद्योग एवं निवेश प्रोत्साहन नीति | 2010 |
| राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति | 2014 |
| राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति | 17 Dec. 2019 |
| राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति (RIPS) | 2022 |
| राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति (RIPS) | 8 अक्टूबर 2024 |
RIPS 2024 के उद्देश्य:
- राज्य में सतत आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देना।
- औद्योगिक विकास, नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता एवं हरित विकास को बढ़ावा देने पर केन्द्रित।
- पर्यावरण संरक्षण हेतु हरित हाइड्रोजन एवं वैकल्पिक ऊर्जा को प्रोत्साहन।
राजस्थान से सर्वाधिक औद्योगिक निर्यात 2024 (क्रमशः)
- इंजीनियरिंग वस्तुएँ
- जवाहरात व आभूषण
- धातुएँ
- कपड़ा
📌 Quick Revision Table — एक नज़र में सभी महत्वपूर्ण तथ्य
Quick revision table for Rajasthan industries geography — organised by industry category with exam importance ratings
| उद्योग / विषय | मुख्य तथ्य (परीक्षा उपयोगी) | स्थान / जिला | महत्व |
|---|
📘 राजस्थान के उद्योग — महत्वपूर्ण PYQs (MCQ Format)
परीक्षा में पूछे गए / पूछे जाने योग्य वस्तुनिष्ठ प्रश्न — सही विकल्प चुनें
FAQs – Rajasthan Industries
1. राजस्थान में खनिज आधारित उद्योग क्यों सबसे अधिक विकसित हैं?
राजस्थान खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, जहाँ चूना पत्थर, संगमरमर, ग्रेनाइट और जिप्सम जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसी कारण यहाँ सीमेंट, पत्थर और खनिज आधारित उद्योग सबसे अधिक विकसित हैं।
2. राजस्थान में वस्त्र उद्योग किन क्षेत्रों में सबसे अधिक केंद्रित है और क्यों?
राजस्थान का वस्त्र उद्योग मुख्यतः भीलवाड़ा, पाली और जयपुर में केंद्रित है क्योंकि यहाँ कच्चा माल, कुशल श्रमिक और परंपरागत तकनीक उपलब्ध है।
3. राजस्थान को भारत का सीमेंट हब क्यों कहा जाता है?
राजस्थान में चूना पत्थर के विशाल भंडार हैं, जो सीमेंट उद्योग का मुख्य कच्चा माल है। इसी कारण राज्य भारत में सीमेंट उत्पादन में अग्रणी है।
4. राजस्थान में हस्तशिल्प उद्योग का आर्थिक महत्व क्या है?
हस्तशिल्प उद्योग रोजगार सृजन और निर्यात दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जयपुर, जोधपुर और बीकानेर इसके प्रमुख केंद्र हैं।
5. राजस्थान में कृषि आधारित उद्योग किन उत्पादों पर आधारित हैं?
राजस्थान में कृषि आधारित उद्योग मुख्यतः सरसों तेल, मसाले, अनाज प्रसंस्करण और डेयरी उत्पादों पर आधारित हैं।
6. राजस्थान के औद्योगिक विकास में RIICO की क्या भूमिका है?
RIICO (राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम) औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और उद्योगों को आधारभूत सुविधाएँ प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
7. राजस्थान में ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग उद्योग कहाँ विकसित हो रहे हैं?
राजस्थान में ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग उद्योग मुख्यतः अलवर, जयपुर और नीमराना क्षेत्रों में तेजी से विकसित हो रहे हैं।
8. राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक शहर कौन-कौन से हैं?
जयपुर, कोटा, उदयपुर, जोधपुर, भीलवाड़ा और अलवर राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक शहर हैं जहाँ विभिन्न उद्योग विकसित हैं।
9. राजस्थान में उद्योगों के विकास में बाधाएँ क्या हैं?
राजस्थान में जल की कमी, कठोर जलवायु, सीमित आधारभूत संरचना और कुशल श्रमिकों की कमी उद्योगों के विकास में प्रमुख बाधाएँ हैं।
10. राजस्थान की अर्थव्यवस्था में उद्योगों का कितना योगदान है?
राजस्थान की अर्थव्यवस्था में उद्योग क्षेत्र का लगभग 30% से अधिक योगदान है, जो रोजगार और आय का प्रमुख स्रोत है।
यह लेख राजस्थान भूगोल, पाठ- उद्योग पर आधारित एक व्यापक अध्ययन सामग्री है जो RPSC, RAS, पटवारी, ग्राम सेवक और अन्य राजस्थान सरकार की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।

