rajasthan rivers

राजस्थान का अपवाह तंत्र – नदियाँ, झीलें और वर्गीकरण

राजस्थान का अपवाह तंत्र (Drainage System) राज्य की भौगोलिक संरचना, जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों को समझने का एक महत्वपूर्ण विषय है। यहाँ की अधिकांश नदियाँ मानसून पर निर्भर हैं और जल की उपलब्धता असमान रूप से वितरित है।राजस्थान के अपवाह तंत्र को संगम (जहाँ नदियाँ मिलती हैं) के आधार पर तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है

 वर्गीकरण (संगम के आधार पर)

राजस्थान की नदियों को 3 भागों में बाँटा जाता है—

  1. अरब सागर की नदियाँ (17%)
    • लूनी, पश्चिमी बनास, साबरमती, माही
  2. अंतः प्रवाही नदियाँ (60%)
    • घग्घर, कांतली, साबी, बाणगंगा, रूपारेल, कांकनी
  3. बंगाल की खाड़ी की नदियाँ (23%)
    • चम्बल, बनास, बेड़च, गंभीर

अपवाह तंत्र की प्रमुख विशेषताएँ

  • मानसून आधारित अपवाह तंत्र
  • अंतः प्रवाही नदियाँ सर्वाधिक (मरुस्थल प्रभाव)
  • अरावली = जल विभाजक रेखा
  • सतही जल योगदान → 1.16%
  • भूमिगत जल → 1.72%
  • मुख्य बेसिन → 15
  • उपबेसिन → 58

राजस्थान की प्रमुख नदियाँ (संक्षेप में)

राजस्थान की सबसे लंबी नदी: चंबल नदी

राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी: बनास नदी

सबसे लंबी अंतः प्रवाही नदी: घग्घर नदी

बारहमासी नदी: चंबल नदी

मुख्य नदियाँ: चंबल, बनास, बेड़च, गंभीर, घग्घर, कांतली, साबी, बाणगंगा, रूपारेल, कांकनी

याद करने की ट्रिक: चबेबेग + घकासाबारूकां

1. अरब सागर में गिरने वाली नदियां 

ये नदियाँ मुख्यतः अरावली पर्वत श्रृंखला के पश्चिमी भाग से निकलकर गुजरात होते हुए अरब सागर (खंभात की खाड़ी / कच्छ का रण) में मिलती हैं।

 

मुख्य नदियां:

  • माही
  • सोम
  • पश्चिमी बनास
  • जाखम
  • साबरमती
  • लूणी

लूनी नदी (Most Important)

  • उद्गम → नाग हिल्स (अजमेर)
  • संगम → कच्छ का रण
  • लंबाई → 495 किमी (राज. में 330 किमी)

🔸 विशेषताएँ

  • मरुस्थल की सबसे लंबी नदी
  • पानी → आधा मीठा, आधा खारा
  • उपनाम → सागरमती, लवणती, आधी मीठी – आधी खारी, अन्तः सलीला ( कालिदास के अनुसार )  
  • जल खारा (salty) हो जाता है → इसलिए “लवणती”
  • जोजड़ी नदी:
    • एकमात्र दाहिनी ओर की सहायक
    • अरावली से उत्पन्न नहीं होती

🔸 प्रमुख सहायक नदियाँ

👉 Trick: “सूकी बांडी खारी जो गुहिया में जवाई से मिली”

  • सूकड़ी, बांडी, खारी, जोजड़ी, गुहिया, जवाई, सागी, मिठड़ी, लीलड़ी   

👉 Important Facts

  • बांडी = “रासायनिक नदी”,  कारण: कपड़ा रंगाई-छपाई उद्योग
  • जोजड़ी = एकमात्र दायीं सहायक नदी जो अरावली से उद्गमित नही है | 
  • लूनी के अपवाह क्षेत्र को जालौर-सांचौर में रेल या नाडा कहते है | 
  • राजस्थान के कुल अपवाह तंत्र में लूनी नदी का योगदान – 10.40 प्रतिशत है |
  • लूनी नदी देश में मरुस्थल की सबसे लम्बी नदी है | 

बाँध परियोजना –

1 . जसवंत सागर/ पिचिआक बाँध → जोधपुर → लूनी नदी
2. हेमावास बाँध → पाली → बांडी नदी
3. जवाई  बाँध → सुमेरपुर (पाली) → जवाई नदी
4. बाँकली बाँध → जालौर → सुकड़ी  नदी


जवाई बाँध – सुमेरपुर (पाली)

  •  यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है। इसे मारवाड़ का अमृत सरोवर कहते हैं।
  •  जलापूर्ति पाली, जोधपुर, सिरोही, जालोर
  •  जब जवाई बांध में पानी की कमी होती है तो जलापूर्ति सेई जल सुरंग (उदयपुर से
    पाली) से की जाती है।

पश्चिमी बनास नदी 

  • उद्गम – नया सानवरा हिल्स (सिरोही)
  • संगम – लिटिल कच्छ (गुजरात)
  • लम्बाई – 266 कि.मी (राजस्थान में 50 कि.मी)
  • अपवाह क्षेत्र – राजस्थान, गुजरात
  • सहायक नदियाँ – सुकली/सीपू, कूकड़ी

 सहायक नदियाँ (TRICK )

👉 “सुकली सीपू कूकड़ी”
👉 Short Trick: “सु-सी-कू”

🌟 विशेषताएँ

  • राजस्थान से निकलकर गुजरात के रण में समाप्त
  • आबू (सिरोही) एवं डीसा (गुजरात) पश्चिम बनास के किनारे स्थित है।
  • पश्चिम की ओर बहने वाली नदी

माही नदी 

  • उद्गम: मध्य प्रदेश के धार जिले में अमरोरू (विन्ध्यन पर्वत श्रेणी) की पहाड़ियों में मेहद झील (मिण्डा, जिला-धार (M.P.) से। 
  • कुल लंबाई: 576 किमी 
  • राजस्थान में लंबाई: 171 किमी 

राजस्थान में इसे विभिन्न नामों से जाना जाता है:

  • वागड़ की गंगा
  • कंगाल की गंगा
  • आदिवासियों की गंगा
  • दक्षिणी राजस्थान की स्वर्ण रेखा
  • दक्षिणी राजस्थान की गंगा

 माही नदी का प्रवाह क्षेत्र

  •  राजस्थान में प्रवेश: बांसवाड़ा जिले के खांदू गांव से।
  • बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ (वागड़ मैदान)

मुख्य स्थल:

  • बोरखेड़ा (बांसवाड़ा) – यहाँ माही बजाज सागर बांध स्थित है (राजस्थान का सबसे लंबा बांध)।
  • बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर) – यहाँ सोम और जाखम नदियां मिलती हैं, इसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है।
  • आदिवासी कुंभ – बेणेश्वर मेला माघ पूर्णिमा को लगता है। 
  • माही नदी के क्षेत्र में (बाँसवाड़ा) टापुओं की संख्या अधिक पाई जाती है। इस कारण बाँसवाड़ा को ’सौ टापुओं का शहर’ कहा जाता है।
  • गुजरात में प्रवेश: सलकारी गांव (महीसागर जिला), यहाँ कंडाना बांध स्थित है। 
  • अंततः खंभात की खाड़ी में मिल जाती है। 
  • माही नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है। 
  • इसकी आकृति उल्टे U के समान है।
  • माही राजस्थान की एकमात्र नदी है जो दक्षिण से प्रवेश कर अन्त में पश्चिम की ओर बहती है |

माही नदी की मुख्य सहायक नदियां 

  • सोम
  • जाखम
  • अनास
  • चाप
  • मोरान ✅ चाप और अनास बाईं ओर से मिलती हैं।

बाँध परियोजना –

  • माही बजाज सागर बाँध → बांसवाड़ा
  • कागदी पिकअप → बांसवाड़ा
  • कडाना वाटर बैंक  → डूंगरपुर
  • कडाना बाँध → गुजरात
  • सोम -कागदर परियोजना → उदयपुर
  • सोम-कमला परियोजना → डूंगरपुर
  • जाखम बाँध → प्रतापगढ़
  1.  माही बजाज सागर बाँध-
    1. स्थिति – बोरखेड़ा (बाँसवाड़ा)
    2. माही बजाज सागर राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध है तथा आदिवासी क्षेत्र
      में सबसे बड़ा बाँध है।
    3. इसकी कुल लम्बाई = 3109 मीटर
  2.  जाखम बाँध-
    1. स्थिति- सीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़)
    2.  यह राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध है। इसकी कुल लम्बाई 81 मीटर है।

 सोम नदी 

  •  उद्गम: उदयपुर जिले के खेरवाड़ा तहसील में ऋषभदेव के समीप सोम गांव की बिच्छमेड़ा पहाड़ियों से। 
  • प्रवाह क्षेत्र: उदयपुर, डूंगरपुर 
  • संगम: बेणेश्वर में माही नदी से मिलती है। 
  • मुख्य सहायक नदियां:
    • जाखम
    • टीडी
    • गोमती
    • सारनी

जाखम नदी 

  •  उद्गम: प्रतापगढ़ जिले के छोटी सादड़ी की पहाड़ियों से। 
  • प्रवाह क्षेत्र: प्रतापगढ़, उदयपुर, डूंगरपुर 
  • संगम: बेणेश्वर में सोम नदी से मिलती है। 
  • सहायक नदियां: करमाई, सुकली

पश्चिमी बनास नदी 

  • उद्गम: सिरोही जिले के नया सानवारा गांव के निकट अरावली पहाड़ियों से। 
  • प्रवाह क्षेत्र: सिरोही → गुजरात (बनासकांठा) → लिटिल रण (कच्छ रण) में विलुप्त।
  • सहायक नदियां:
    • खारी
    • सीपू
    • कुकड़ी
    • सेव
    • बलराम
    • सुकली
    • गोकल 
    • सुकली नदी पश्चिमी बनास की मुख्य सहायक नदी है।

साबरमती नदी 

  •  उद्गम: उदयपुर जिले की कोटड़ी तहसील में अरावली की पहाड़ियों से। 
  • प्रवाह क्षेत्र: राजस्थान → गुजरात → खंभात की खाड़ी में मिलती है। 
  • मुख्य स्थल:
    • गांधीनगर इसी नदी पर स्थित है।
  • महात्मा गांधी द्वारा स्थापित साबरमती आश्रम इसी नदी के किनारे स्थित है। 
  • मुख्य सहायक नदियां:
    • वेतरक
    • सेई
    • मेशवा
    • हथपति
    • वाकल (गुजरात की प्रमुख नदी)

Special

  • पहला River Front (अहमदाबाद)
  • अहमदाबाद Riverfront इसी नदी पर
  • साबरमती आश्रम (महात्मा गांधी) इसी के किनारे
  • राजस्थान की पहली नदी जिस पर Riverfront विकसित हुआ

 सेई नदी 

  • उद्गम: उदयपुर जिले के पादरना गांव की पहाड़ियों से।
  • संगम: गुजरात के दोथर गांव के पास साबरमती नदी में मिलती है। 
  • सेई बांध: इस पर सेई बांध निर्मित है, जिससे जल सुरंग (राजस्थान की पहली जल सुरंग ) द्वारा जवाई बांध में पानी लाया जाता है। 

2. बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां 🌊

मुख्य नदियां:

  • चंबल
  • पार्वती
  • कालीसिंध
  • बनास
  • बाणगंगा
  • खारी
  • बेड़च

चम्बल नदी (Most Important)

मध्यप्रदेश के जनापाव से निकलकर यमुना में मिलती है। यह राजस्थान की सबसे लंबी और बारहमासी नदी है।

  • उद्गम: जनापाव पहाड़ी (मध्यप्रदेश)
  • संगम: यमुना (इटावा- U.P)
  • लंबाई: 1051 किमी (राजस्थान में – 322 कि.मी.

अपवाह क्षेत्र –

  • चित्तौड़गढ़ (राजस्थान में प्रवेश- चौरासीगढ़)
  • हाड़ौती (कोटा, बूंदी)
  • डांग क्षेत्र (सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर)

🔸 विशेषताएँ

  • राजस्थान की सबसे लंबी और बारहमासी नदी
  • घड़ियालों की शरणस्थली
  • चूलिया जलप्रपात (सबसे ऊँचा जलप्रपात)
  • चम्बल के उपनाम-
    चमती (प्राचीन नाम), कामधेनु, बारहमासी
  •  त्रिवेणी संगम – रामेश्वर  घाट (पद्ररा गाँव-सवाई माधोपुर ) चम्बल + बनास +सीप
  •  चम्बल में  संरक्षित  जीव-
    घड़ियाल, मगरमच्छ, गांगेय , डॉल्फिन, उदबिलाव
  • चूलिया जलप्रपात-
    भैंसरोड़गढ़, (चित्तौड़) में चम्बल नदी पर स्थित।
    • यह राजस्थान का सबसे ऊँचा जलप्रपात है।
    • इसकी कुल ऊँचाई 18 मीटर है।
  •  हैंगिंग ब्रिज-
    • राजस्थान का प्रथम हैंगिंग ब्रिज चम्बल नदी पर कोटा में स्थित है।
    • इसकी कुल लम्बाई 1.5 कि.मी. है।
    • नोट- राजस्थान का दूसरा हैंगिंग ब्रिज = माही नदी (बाँसवाड़ा)|
  • हैरिटेज रिवर फ्रंट- यह चम्बल नदी पर कोटा में स्थित है। जो राजस्थान का प्रथम रिवर फ्रंट है।
  • चम्बल राजस्थान की सबसे लम्बी एवं सबसे बड़ी नदी है।
  •  चम्बल अंतर्राज्यीय सीमा (RJ + MP) पर सबसे लम्बी नदी है।
  •  राजस्थान में सर्वाधिक गॉर्ज वैली (V-आकार की घाटी) चम्बल नदी पर स्थित है।
  • राजस्थान का सबसे बड़ा बांध “राणा प्रताप सागर“ है जबकि चम्बल पर स्थित सबसे बड़ा बाँध “गाँधी सागर“ है।

🔸 त्रिवेणी

  • रामेश्वर → चम्बल + बनास + सीप

प्रमुख सहायक नदियाँ:

  • बनास चम्बल की सबसे लम्बी सहायक नदी है।
  • कालीसिंध चम्बल में दायीं ओर से मिलने वाली सबसे लम्बी सहायक नदी है।
  • पार्वती

2️⃣ बनास नदी

राजसमंद से निकलकर चंबल में मिलती है। यह पूरी तरह राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी है।

  • उद्गम: खमनौर (राजसमंद)
  • संगम: चंबल (रामेश्वर)
  • लंबाई: 512 किमी
  • अपवाह क्षेत्र- मेवाड़ मैदान, मालपुरा-करौली, उदयपुर ,राजसमंद,अजमेर,भीलवाड़ा,टोंक, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर

👉 Important

  • पूरी तरह राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी
  • उपनाम:

    • वशिष्ठी
    • वन की आशा
    • वर्णासा

सहायक नदियाँ (TRICK 🧠)

👉 ट्रिक:
“काली डाकण मासी मेना मोर बांडह आम खा गई”

➡️ याद करें:

  • कालीसिल
  • डाई
  • मासी
  • मेनाल
  • मोरेल
  • बांडी
  • आयड़/बेड़च
  • कोठारी
  • खारी

खारी बनास की सबसे लम्बी सहायक नदी है। , बेडच बनास की दाईं ओर से सबसे लम्बी सहायक नदी है।

प्रमुख बांध

  • बीसलपुर बाँध (टोंक)
    •  राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना
    •  “Mini Goa”
    • यह बनास नदी पर टोंक में स्थित है।
    • इस बाँध का निर्माण काल/शुरुआत = 1999 ई.
    • यह राजस्थान का सबसे बड़ा कंक्रीट बाँध है।
    • बीसलपुर बाँध राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है।
    • जलापूर्ति – टोंक,अजमेर, नागौर,जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर
    • बीसलपुर बाँध को  ERCP से जोड़ा जाएगा।
    • बीसलपुर के अतिरिक्त पानी की ईसरदा बाँध में छोड़ा जाएगा।
    • रंगीन मछलियों का फिश एक्वेरियम एवं प्रजनन केन्द्र इसी बाँध के किनारे स्थापित किया
      गया है।
    • बीसलपुर राजस्थान का प्रथम कंजर्वेशन रिजर्व (2008) है।
  • गलवा बाँध → गलवा नदी ( टोंक )
  • मोरेल बाँध → मोरेल  नदी (सवाई माधोपुर, दौसा)
  • मेजा  बाँध → कोठारी  नदी (भीलवाड़ा)

त्रिवेणी संगम – राजस्थान में सर्वाधिक त्रिवेणी संगम बनास नदी पर है |

संगम स्थलजिलासंगम होने वाली नदिया
बिगोदभीलवाड़ाबनास, बेडच, मेनाल
रामेश्वर घाटसवाई माधोपुरबनास, चम्बल, सीप
जोधपुरियाटोंकबनास, बांडी, माशी
राजमहलटोंकबनास, खारी, डाई

बेड़च नदी

उदयपुर के पास गोगुन्दा से निकलती है और बनास की सहायक नदी है। आयड़ नदी उदयसागर के बाद बेड़च कहलाती है।

    • उद्गम: गोगुन्दा (उदयपुर)
    • संगम: बनास
    • अपवाह क्षेत्र – उदयपुर, चित्तौडगढ़, भीलवाड़ा

    🌟 विशेषताएँ

    • आयड़ नदी → उदयसागर झील में गिरने के बाद बेड़च बनती है
    • चित्तौड़गढ़ दुर्ग → बेड़च और गंभीरी नदी के किनारे
    • बेड़च नदी, बनास में दाईं ओर से सबसे लंबी सहायक नदी है।

4️⃣ गंभीर नदी

करौली क्षेत्र से निकलकर यमुना में मिलती है। यह चंबल प्रणाली की महत्वपूर्ण सहायक नदी है।

  • उद्गम – सपोटरा तहसील (करौली)
    संगम – यमुना (मैनपुरी, UP)
    लंबाई – 288 कि.मी
  • अपवाह क्षेत्र – भरतपुर, धोलपुर, करौली

🔹 सहायक नदियाँ (TRICK 🧠)

👉 “अटा माची भैंस बरखेड़ा”

    • अटा
    • माची
    • भद्रावती
    • भैंसावट
    • बरखेड़ा

🏞️ प्रमुख बांध

  • पाँचना बाँध (करौली)
    👉 राजस्थान का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध

3. आंतरिक जल प्रवाह की नदियां 

(जो किसी सागर में न मिलकर अपने ही प्रवाह क्षेत्र में विलुप्त हो जाती हैं)

मुख्य नदियां:

  • घग्घर
  • मेंथा
  • रूपारेल
  • कांतली
  • रूपनगढ़
  • साबी
  • कांकनी

घग्घर नदी

शिवालिक पहाड़ियों ( H.P)  से निकलकर राजस्थान में बहती है लेकिन समुद्र तक नहीं पहुँचती। इसे प्राचीन सरस्वती नदी माना जाता है।

  • हिमालय से आने वाली एकमात्र नदी ( इंडोब्रह्म या शिवालिक नदी का हिस्सा)
  • तलवाड़ा (टिब्बी, हनुमानगढ़) से राजस्थान में प्रवेश
  • अपवाह क्षेत्र- हनुमानगढ़, श्री गंगानगर
  • उपनाम → सरस्वती (प्राचीन)
  • सबसे लंबी अंतः प्रवाही नदी
  • पाकिस्तान में इसे हकरा कहते हैं |

विशेषताएँ-

  1.  उपनाम- सरस्वती नदी (प्राचीन नाम), मृत नदी, नट, सोता नदी, दृषद्वती नदी |
  2.  घग्घर के अपवाह क्षेत्र को हनुमानगढ़ में  ’नाली/पाट’ और पाकिस्तान में  ’हकरा’ कहते  है।
  3. घग्घर नदी देश /राजस्थान की सबसे लम्बी अन्तः प्रवाही नदी है। जबकि
    राजस्थान में  सबसे  लम्बी अन्तः प्रवाही नदी – कान्तली |
  4.  फोर्ट अब्बास – घग्घर का अंतिम स्थान है जो  पाकिस्तान में  स्थित है।
  5.  यह बीकानेर संभाग की एकमात्र नदी है।
  6. सरस्वती नदी के प्राचीन मार्ग को खोजने के लिए  श्री राम वाडेरा  व हनुमान 
    राय को  नियुक्त किया | 

🟡 कांतली नदी

सीकर के खंडेला से निकलने वाली स्थानीय अंतः प्रवाही नदी है। इसके किनारे गणेश्वर सभ्यता विकसित हुई थी।

  • उद्गम – खंडेला पहाड़ी (सीकर)
  • अपवाह क्षेत्र – तोरावाटी (सीकर, झुंझुनूं
  • सबसे लंबी अंतः प्रवाही नदी (राजस्थान में)
  • लंबाई → 100 किमी
  • गणेश्वर सभ्यता (सीकर) एवं सुनारी सभ्यता (झुंझुनूं) कांतली नदी किनारे स्थित है।

🟡 साबी (साहिबी) नदी

राजस्थान से निकलकर हरियाणा में समाप्त हो जाती है। इसे नजफगढ़ नाला भी कहा जाता है।

  • हरियाणा में समाप्त होने वाली एकमात्र नदी
  • उद्गम – सेवर की पहाड़ियाँ (कौटपुतली-बहरोड़,)
  • अपवाह क्षेत्र – जयपुर, कौटपुतली-बहरोड़, खैरथल तिजारा
  • विशेषताएँ-
    • साबी राजस्थान की एकमात्र नदी है जो हरियाणा के गुड़गाँव मैदान में
      समाप्त होती है।
    • जोधपुरा सभ्यता (कौटपुतली-बहरोड़) साबी नदी के किनारे स्थित है।

🟡 बाणगंगा नदी

जयपुर क्षेत्र से निकलकर आगे सूख जाती है। इसे अर्जुन की गंगा भी कहा जाता है।

  • उद्गम – बैराठ हिल्स (कौटपुतली बहरोड़,)
  • अपवाह क्षेत्र – कौटपुतली बहरोड़, जयपुर, दौसा, भरतपुर
  • उपनाम → अर्जुन की गंगा , ताला नदी, रुण्डित नदी
  • 2012 से अंतः प्रवाही घोषित

👉 Important Concept:
रुण्डित नदी → सहायक नदियाँ जो मुख्य नदी तक नहीं पहुँचती

बाणगंगा की बाँध परियोजनाएँ –

  1. रामगढ़, परियोजना -इससे ईसरदा बाँध (सवाई माधोपुर) से जलापूर्ति की जाएगी।
  2. केवलादेव (अजान बाँध)
    पांचना बाँध (गंभीरी नदी, करौली) व यमुना लिंक नहर से जलापूर्ति को जाती है।

 रूपारेल नदी

अलवर-भरतपुर क्षेत्र में बहती है और आगे समाप्त हो जाती है। इसे भरतपुर की जीवन रेखा माना जाता है।

  • उद्गम – उदयनाथ हिल्स (अलवर)
  • अपवाह क्षेत्र – अलवर, डीग, भरतपुर
  • विशेषताएँ –  सीकरी बाँध रुपारेल नदी पर डीग में स्थित है।

मोती झील –

  • मीठे  पानी की झील है, जो  कि भरतपुर में  स्थित है।
  • इसे  भरतपुर की जीवनरेखा कहते  है,  यह झील  भरतपुर की सिंचाई के लिए जलापूर्ति करता है।
  • इस झील में  नील हरित शैवाल अधिक पाए जाते  है, जो  उवर्रक बनाने में उपयोगी  है |
  • सुजान गंगाः यह एक लिंक/चैनल है जो मोतीझील एवं लोहागढ़ को जोड़ता है।

🟡 कांकनी नदी

जैसलमेर की छोटी अंतः प्रवाही नदी है। यह रेगिस्तानी क्षेत्र में बहकर लुप्त हो जाती है।

  • उद्गम- कोटरी गाँव (जैसलमेर)(मीठे पानी की झील) बुझ झील (जैसलमेर)
  • राजस्थान की सबसे छोटी नदी (27 किमी)

 

📌 कुछ महत्वपूर्ण तथ्य 🏞️

✅ राजस्थान में कोटा संभाग में सर्वाधिक नदियां प्रवाहित होती हैं। ✅ बीकानेर और चुरू जिले में कोई नदी प्रवाहित नहीं होती। ✅ राजस्थान में चंबल ही एकमात्र बारहमासी नदी (सालभर बहने वाली) है। ✅ राजस्थान में पूर्णतः बहने वाली सबसे लंबी नदी बनास है। ✅ सर्वाधिक बांध चंबल नदी पर बने हुए हैं।

Rivers Quick Revision Table

नदीउद्गममिलती हैविशेष तथ्य
चंबलजनापाव (MP)यमुनासबसे लंबी, बारहमासी, घड़ियाल संरक्षण
बनासखमनौर (राजसमंद)चंबलपूरी तरह राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी
बेड़चगोगुन्दा (उदयपुर)बनासआयड़ → उदयसागर के बाद बेड़च
गंभीरकरौलीयमुनाचंबल की सहायक नदी

🚫 अंतः प्रवाही नदियाँ

नदीउद्गमसमाप्तविशेष तथ्य
घग्घरशिवालिकरेगिस्तानप्राचीन सरस्वती, सबसे लंबी अंतः प्रवाही
कांतलीखंडेला (सीकर)स्थानीयगणेश्वर सभ्यता
साबीअरावलीहरियाणानजफगढ़ नाला
बाणगंगाजयपुर क्षेत्रसूख जातीअर्जुन की गंगा
रूपारेलअलवरभरतपुर क्षेत्रभरतपुर की जीवन रेखा
कांकनीजैसलमेरस्थानीयसबसे छोटी नदी

⚡ Ultra Quick Recall (Exam Booster)

👉 सबसे लंबी → चंबल
👉 राजस्थान में सबसे लंबी → बनास
👉 बारहमासी → चंबल
👉 सबसे लंबी अंतः प्रवाही → घग्घर
👉 सबसे छोटी → कांकनी

 

Quick Memory Hooks

👉 चबेबेग → चंबल, बनास, बेड़च, गंभीर
👉 घकासाबारूकां → घग्घर, कांतली, साबी, बाणगंगा, रूपारेल, कांकनी


🎯 5 सेकंड रिवीजन

  • चंबल → सबसे लंबी + बारहमासी
  • बनास → पूरी राजस्थान में
  • घग्घर → सरस्वती
  • कांतली → गणेश्वर
  • साबी → हरियाणा
  • कांकनी → सबसे छोटी
राजस्थान की अपवाह प्रणाली का मानचित्र – चंबल, बनास और लूणी नदी बेसिन

राजस्थान की नदियाँ – Top 20 Questions

1. राजस्थान की सबसे लंबी नदी कौन सी है?
चंबल नदी राजस्थान की सबसे लंबी नदी है।
2. राजस्थान में पूरी तरह बहने वाली सबसे लंबी नदी कौन सी है?
बनास नदी पूरी तरह राजस्थान में बहने वाली सबसे लंबी नदी है।
3. चंबल नदी किसकी सहायक है?
चंबल नदी यमुना की सहायक नदी है।
4. बनास नदी किसमें मिलती है?
बनास नदी चंबल नदी में मिलती है।
5. बेड़च नदी किसकी सहायक है?
बेड़च नदी बनास की सहायक नदी है।
6. घग्घर नदी का प्राचीन नाम क्या है?
घग्घर नदी को प्राचीन सरस्वती नदी माना जाता है।
7. सबसे लंबी अंतः प्रवाही नदी कौन सी है?
घग्घर नदी सबसे लंबी अंतः प्रवाही नदी है।
8. कांतली नदी किस सभ्यता से संबंधित है?
कांतली नदी गणेश्वर सभ्यता से संबंधित है।
9. साबी नदी कहाँ समाप्त होती है?
साबी नदी हरियाणा में समाप्त होती है।
10. बाणगंगा नदी को किस नाम से जाना जाता है?
बाणगंगा नदी को अर्जुन की गंगा कहा जाता है।
11. रूपारेल नदी किस क्षेत्र की जीवन रेखा है?
रूपारेल नदी भरतपुर क्षेत्र की जीवन रेखा है।
12. कांकनी नदी कहाँ बहती है?
कांकनी नदी जैसलमेर क्षेत्र में बहती है।
13. सबसे छोटी नदी कौन सी है?
कांकनी नदी सबसे छोटी नदी है।
14. बारहमासी नदी कौन सी है?
चंबल नदी बारहमासी नदी है।
15. गंभीर नदी किस नदी तंत्र का भाग है?
गंभीर नदी चंबल-यमुना नदी तंत्र का भाग है।
16. घग्घर नदी का उद्गम कहाँ है?
घग्घर नदी शिवालिक पहाड़ियों से निकलती है।
17. बनास नदी का उद्गम कहाँ है?
बनास नदी खमनौर (राजसमंद) से निकलती है।
18. बेड़च नदी कहाँ से निकलती है?
बेड़च नदी गोगुन्दा (उदयपुर) से निकलती है।
19. अंतः प्रवाही नदियाँ क्या होती हैं?
वे नदियाँ जो समुद्र तक नहीं पहुँचतीं और बीच में ही समाप्त हो जाती हैं।
20. याद रखने की ट्रिक क्या है?
चबेबेग (चंबल, बनास, बेड़च, गंभीर) और घकासाबारूकां (घग्घर, कांतली, साबी, बाणगंगा, रूपारेल, कांकनी)।

नदियाँ MCQ टेस्ट

1. चंबल नदी का उद्गम कहाँ है?
जनापाव
खमनौर
शिवालिक
गोगुन्दा
2. राजस्थान की सबसे लंबी नदी कौन सी है?
बनास
लूनी
चंबल
माही
3. बनास नदी किसमें मिलती है?
गंगा
यमुना
चंबल
माही
4. बेड़च नदी किसकी सहायक है?
चंबल
बनास
माही
लूनी
5. गंभीर नदी किसमें मिलती है?
गंगा
यमुना
चंबल
लूनी
6. घग्घर नदी का प्राचीन नाम क्या है?
गंगा
सरस्वती
यमुना
नर्मदा
7. कांतली नदी कहाँ से निकलती है?
सीकर
जयपुर
अलवर
अजमेर
8. साबी नदी कहाँ समाप्त होती है?
गुजरात
हरियाणा
मध्यप्रदेश
पंजाब
9. बाणगंगा नदी का उपनाम क्या है?
अर्जुन की गंगा
सरस्वती
चर्मवती
जीवन रेखा
10. रूपारेल नदी किस क्षेत्र की जीवन रेखा है?
जैसलमेर
भरतपुर
जोधपुर
बीकानेर
11. कांकनी नदी कहाँ बहती है?
अलवर
जैसलमेर
कोटा
अजमेर
12. चंबल नदी किसकी सहायक है?
गंगा
यमुना
नर्मदा
ब्रह्मपुत्र
13. बनास नदी का उद्गम कहाँ है?
खमनौर
जनापाव
गोगुन्दा
सीकर
14. कौन सी नदी पूरी तरह राजस्थान में बहती है?
चंबल
बनास
माही
साबरमती
15. घग्घर नदी कहाँ से निकलती है?
अरावली
शिवालिक
विंध्य
सतपुड़ा
16. सबसे छोटी नदी कौन सी है?
कांकनी
बनास
चंबल
माही
17. कौन सी नदी बारहमासी है?
चंबल
कांतली
साबी
कांकनी
18. बेड़च नदी पहले किस नाम से जानी जाती है?
आयड़
माही
लूनी
काली
19. कौन सी नदी हरियाणा में समाप्त होती है?
साबी
बनास
चंबल
माही
20. गणेश्वर सभ्यता किस नदी के किनारे थी?
बनास
कांतली
चंबल
घग्घर

चंबल नदी – यह सबसे लंबी और बारहमासी नदी है।

बनास नदी – यह पूरी तरह राजस्थान में बहती है।

यमुना नदी की सहायक है।

चंबल नदी में मिलती है।

आयड़ नदी (उदयसागर के बाद बेड़च कहलाती है)।

हरियाणा में (नजफगढ़ नाला)।

जो नदियाँ समुद्र तक नहीं पहुँचतीं, बीच में ही समाप्त हो जाती हैं।

निष्कर्ष 

राजस्थान की नदियां यहां की भौगोलिक स्थिति और जलवायु पर गहरा प्रभाव डालती हैं। अधिकांश नदियां अरावली पर्वत श्रृंखला से निकलती हैं और इनमें से कई गुजरात में जाकर समुद्र में मिलती हैं या आंतरिक रूप से विलुप्त हो जाती हैं। चंबल एकमात्र बारहमासी नदी है, जबकि माही और बनास राजस्थान की जल आपूर्ति के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। राजस्थान के जल संसाधनों को संरक्षित करना आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे लाभान्वित हो सकें। 

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