RPSC, RSMSSB, Patwari, REET, Computer Instructor परीक्षाओं के लिए विशेष नोट्स
राजस्थान की जनसंख्या: एक व्यापक अध्ययन
राजस्थान — भारत का सबसे बड़ा राज्य क्षेत्रफल की दृष्टि से, परंतु जनसंख्या के मामले में एक अनूठी और जटिल तस्वीर प्रस्तुत करता है। थार के विशाल मरुस्थल से लेकर अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों तक, चंबल के बीहड़ों से लेकर हाड़ौती के उपजाऊ मैदानों तक — राजस्थान की जनसंख्या का वितरण उतना ही विविध और असमान है जितनी यहाँ की भौगोलिक संरचना।
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की कुल जनसंख्या 6.85 करोड़ है, जो भारत की कुल जनसंख्या का 5.67 प्रतिशत है। क्षेत्रफल में देश का 10.41 प्रतिशत भाग घेरने वाला यह राज्य जनसंख्या की दृष्टि से भारत में 7वें स्थान पर है (आंध्रप्रदेश के विभाजन के बाद)। यह विरोधाभास ही राजस्थान की जनसंख्या भूगोल की सबसे बड़ी विशेषता है — इतना विशाल भूभाग, फिर भी अपेक्षाकृत विरल जनसंख्या।
जनसंख्या अध्ययन क्यों आवश्यक है?
जनसंख्या किसी भी राज्य या देश के विकास की धुरी होती है। जनसंख्या का अध्ययन हमें बताता है कि:
- किसी क्षेत्र में मानव संसाधन कितने और कहाँ उपलब्ध हैं।
- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी सुविधाओं की योजना कैसे बनाई जाए।
- सामाजिक विकास की दिशा कैसी है — साक्षरता बढ़ रही है या नहीं, लिंगानुपात सुधर रहा है या बिगड़ रहा है।
- आर्थिक नीतियों को किस आधार पर तैयार किया जाए।
राजस्थान के संदर्भ में जनसंख्या का अध्ययन इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यहाँ जनसंख्या वितरण, घनत्व, साक्षरता, लिंगानुपात और जनजातीय जनसंख्या — सभी संकेतक राष्ट्रीय औसत से भिन्न हैं और गहरी सामाजिक-आर्थिक कहानी कहते हैं।
भारतीय जनगणना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जनसंख्या गणना की परंपरा भारत में सहस्राब्दियों पुरानी है। यह परंपरा तीन ऐतिहासिक कालखंडों से होकर गुज़री है:
प्राचीन काल — चाणक्य और अर्थशास्त्र
मौर्य काल में महान अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ चाणक्य (कौटिल्य) ने अपने अमर ग्रंथ “अर्थशास्त्र” में जनगणना और जनसंख्या प्रबंधन का विस्तृत उल्लेख किया। यह भारत में जनसंख्या के व्यवस्थित अध्ययन का पहला प्रमाण माना जाता है। चाणक्य ने राज्य की समृद्धि और सुरक्षा के लिए जनसंख्या की जानकारी को अनिवार्य बताया था।
मध्य काल — अबुल फजल और आइने-अकबरी
मुगल काल में सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक अबुल-फजल ने अपनी प्रसिद्ध कृति “आइने-अकबरी” में जनसंख्या, कृषि, व्यापार और प्रशासन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। यह मध्यकालीन भारत में जनसांख्यिकी के सबसे व्यवस्थित दस्तावेजों में से एक है। अकबर के साम्राज्य में विभिन्न सूबों की जनसंख्या और आर्थिक स्थिति का जो लेखाजोखा रखा गया, वह उस युग की प्रशासनिक कुशलता का प्रमाण है।
आधुनिक काल — लार्ड मेयो से लार्ड रिपन तक
भारत में आधुनिक जनगणना की नींव ब्रिटिश शासन के दौरान रखी गई। 1872 में लार्ड मेयो के कार्यकाल में पहली बार व्यापक जनगणना कराई गई, जिसे भारत की प्रथम आधुनिक जनगणना माना जाता है। इसके बाद 1881 में लार्ड रिपन के काल में व्यवस्थित और दशकीय जनगणना की परंपरा स्थापित हुई, जो आज भी निर्बाध रूप से जारी है। इसी क्रम में जनगणना अधिनियम 1948 पारित किया गया जिसने स्वतंत्र भारत में जनगणना को कानूनी आधार प्रदान किया।
📌 शिक्षक नोट (Teacher’s Note – RPSC/Patwari/REET): इतिहास की यह त्रिस्तरीय संरचना परीक्षाओं में बहुत पूछी जाती है। याद रखने की सरल ट्रिक:
- प्राचीन = चाणक्य + अर्थशास्त्र + मौर्य काल
- मध्य = अबुल फजल + आइने-अकबरी + मुगल काल
- आधुनिक = लार्ड मेयो (1872) + लार्ड रिपन (1881 दशकीय)
जनगणना 2011 — राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में एक मील का पत्थर
वर्ष 2011 की जनगणना न केवल भारत की बल्कि राजस्थान की भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण जनगणना रही। यह देश की 15वीं जनगणना थी, जिसे दशकीय/व्यवस्थित आधार पर 14वीं माना जाता है। इस जनगणना का आदर्श वाक्य था — “हमारी जनगणना – हमारा भविष्य”, जो इस बात का प्रतीक था कि जनगणना के आँकड़े हमारे सामूहिक भविष्य की योजना का आधार बनते हैं।
इस जनगणना की कुल लागत ₹2200 करोड़ थी, अर्थात प्रति व्यक्ति मात्र ₹18.19 — एक चाय की कीमत से भी कम में प्रत्येक नागरिक की गणना। यह अपने आप में भारत की प्रशासनिक क्षमता का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
इस जनगणना की कई ऐतिहासिक विशेषताएँ थीं। पहली बार किन्नर समुदाय को स्वतंत्र श्रेणी के रूप में मान्यता मिली। पहली बार घरों की गणना अलग से की गई। यह भारत की प्रथम पेपरलेस जनगणना थी, जिसमें डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग हुआ। यह सब मिलकर 2011 की जनगणना को एक ऐतिहासिक दस्तावेज बनाते हैं।
राजस्थान की जनसंख्या की विशिष्टताएँ — एक संक्षिप्त परिचय
राजस्थान की जनसंख्या को समझने के लिए कुछ प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है जो इस राज्य को देश के अन्य राज्यों से अलग करते हैं:
1. असमान वितरण: राजस्थान में जनसंख्या का वितरण अत्यंत असमान है। पूर्वी राजस्थान, विशेषकर जयपुर, भरतपुर, दौसा और अलवर जैसे जिले जहाँ घनत्व 400-600 प्रति वर्ग कि.मी. तक है, वहीं पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र में जैसलमेर जैसे जिले में यह मात्र 17 प्रति वर्ग कि.मी. है। यह अंतर पूरे देश में किन्हीं भी दो जिलों के बीच सबसे बड़े अंतरों में से एक है।
2. लिंगानुपात की चुनौती: राजस्थान का औसत लिंगानुपात 928 है जो राष्ट्रीय औसत 943 से कम है। विशेष रूप से शिशु लिंगानुपात (888) की स्थिति और भी चिंताजनक है, हालाँकि 2001 की तुलना में कुछ सुधार भी आया है। धौलपुर (846) जैसे जिले आज भी लिंग भेदभाव की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि डूंगरपुर (994) जैसे आदिवासी जिले बेहतर लिंगानुपात के साथ एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
3. साक्षरता का द्वैत: एक ओर कोटा (76.6%) और जयपुर (75.5%) जैसे शहरी जिले उच्च साक्षरता का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो दूसरी ओर जालौर (54.9%) और सिरोही (55.3%) जैसे जिले अभी भी पिछड़े हुए हैं। सबसे चिंताजनक यह है कि देश में पुरुष और महिला साक्षरता दर के बीच सर्वाधिक अंतर राजस्थान में है — जो गहरी लैंगिक असमानता की ओर संकेत करता है।
4. जनसंख्या वृद्धि का इतिहास: राजस्थान की जनसंख्या वृद्धि का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 1911–21 का दशक जहाँ “जनसंख्या विभाजक दशक” कहलाया — जब प्लेग महामारी और प्रथम विश्व युद्ध के कारण जनसंख्या में 6.29% की ऋणात्मक वृद्धि हुई — वहीं 1951–1981 का काल “जनसंख्या विस्फोटक दशक” के रूप में जाना जाता है जिसमें जनसंख्या तेजी से बढ़ी।
5. आदिवासी और दलित जनसंख्या: राजस्थान में अनुसूचित जनजाति (ST) की जनसंख्या 13.5% और अनुसूचित जाति (SC) की जनसंख्या 17.8% है। दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बहुल जिले — बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ — और उत्तरी राजस्थान के गंगानगर, हनुमानगढ़ — SC जनसंख्या के मुख्य केंद्र हैं। इन समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति राजस्थान के समग्र विकास से सीधी जुड़ी है।
इस अध्याय का परीक्षाओं में महत्व
राजस्थान की जनसंख्या का यह अध्याय RPSC (RAS, School Lecturer, College Lecturer), RSMSSB (Patwari, Gram Sevak, LDC), REET, Computer Instructor सहित राजस्थान की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक परीक्षा में इस अध्याय से औसतन 3 से 7 प्रश्न पूछे जाते हैं।
परीक्षाओं में मुख्यतः निम्नलिखित बिंदुओं से प्रश्न आते हैं:
- जनगणना 2011 की विशेषताएँ और तथ्य
- सर्वाधिक / न्यूनतम जनसंख्या, घनत्व, वृद्धि दर वाले जिले
- लिंगानुपात और शिशु लिंगानुपात के आँकड़े
- साक्षरता दर — कुल, पुरुष, महिला, ग्रामीण, शहरी
- SC/ST जनसंख्या और उनका वितरण
- ऐतिहासिक जनगणना तथ्य (विभाजक दशक, विस्फोटक दशक)
- जनसंख्या नीति की तारीखें
📌 अंतिम प्रेरणा नोट (Motivational Note for Students): राजस्थान की जनसंख्या के ये आँकड़े केवल परीक्षा के लिए नहीं हैं — ये उस समाज की कहानी हैं जिसमें आप रहते हैं। जब आप जालौर की महिला साक्षरता दर (38.5%) पढ़ते हैं, तो यह सिर्फ एक संख्या नहीं है — यह उन लाखों बेटियों की कहानी है जिन्हें शिक्षा का अवसर नहीं मिला। इन आँकड़ों को समझना, याद रखना और इन पर सोचना — यही एक जागरूक नागरिक और एक बेहतर प्रशासक बनाता है। पढ़ें, समझें और आगे बढ़ें।
यह परिचय खंड राजस्थान भूगोल के पाठ — जनसंख्या — का विस्तृत प्रारंभिक भाग है। आगे के खंडों में जनगणना 2011 के विस्तृत आँकड़े, जनसंख्या वितरण, घनत्व, लिंगानुपात, साक्षरता और SC/ST जनसंख्या का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय जनगणना का इतिहास
भारत में जनगणना की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। इसे तीन कालखंडों में विभाजित किया जा सकता है:
- प्राचीन काल: चाणक्य (कौटिल्य) ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ “अर्थशास्त्र” में जनगणना का उल्लेख किया है। यह मौर्य काल से संबंधित है।
- मध्य काल: मुगल काल में अबुल-फजल ने “आइने-अकबरी” में जनसंख्या संबंधी विवरण दर्ज किया।
- आधुनिक काल: लार्ड मेयो के काल में 1872 ई. में पहली आधुनिक जनगणना संपन्न हुई।
📌 शिक्षक नोट (Teacher’s Note): परीक्षाओं में अक्सर यह पूछा जाता है — “भारत की पहली आधुनिक जनगणना किसने कराई?” उत्तर है — लार्ड मेयो (1872)। और “व्यवस्थित दशकीय जनगणना किसने शुरू की?” उत्तर है — लार्ड रिपन (1881)।
जनगणना से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक तथ्य
- सन् 1881 में लार्ड रिपन के काल में व्यवस्थित और दशकीय जनगणना की शुरुआत हुई।
- जनगणना अधिनियम 1948 में पारित किया गया।
- जनसंख्या संघ सूची का विषय है — यह संविधान की 7वीं अनुसूची में शामिल है।
- जनगणना गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा करवाई जाती है।
- राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन 11 मई, 2000 को किया गया।
📌 परीक्षा टिप (Exam Tip – Patwari / RSMSSB):
- जनगणना संघ सूची का विषय है → 7वीं अनुसूची
- गृह मंत्रालय जनगणना करता है
- राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग: 11 मई 2000
जनगणना 2011 – विशेष जानकारी
मूल तथ्य
- यह 15वीं जनगणना है, जो दशकीय/व्यवस्थित आधार पर 14वीं मानी जाती है।
- बजट: ₹2200 करोड़ (प्रति व्यक्ति ₹18.19)
- जनगणना शुभंकर: प्रगणक शिक्षिका
- आदर्श वाक्य (स्लोगन): “हमारी जनगणना – हमारा भविष्य”
- शामिल जिले: 640 (राजस्थान के 33)
जनगणना 2011 के विशेष बिंदु
- जनगणना को राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर में पहली बार लिखा गया।
- प्रथम बार घरों की गणना की गई।
- किन्नरों को इस जनगणना में पहली बार शामिल किया गया।
- यह प्रथम पेपरलेस जनगणना थी।
- 2011 की जनगणना दो चरणों में सम्पन्न हुई:
- पहला चरण: 15 मई से 30 जून 2010
- दूसरा चरण: 9 फरवरी से 28 फरवरी 2011
📌 महत्वपूर्ण नोट (RPSC/REET के लिए): जनगणना 2011 की ये 4 बातें हमेशा पूछी जाती हैं:
- पहली बार किन्नरों को शामिल किया गया
- पहली बार घरों की गणना हुई
- पहली पेपरलेस जनगणना
- स्लोगन: “हमारी जनगणना – हमारा भविष्य”
कुल जनसंख्या – भारत एवं राजस्थान
- भारत की कुल जनसंख्या: 121.085 करोड़
- राजस्थान की कुल जनसंख्या: 6.85 करोड़
- पुरुष: 51.86%
- महिलाएँ: 48.14%
राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या वाले जिले
| क्रम | जिला | जनसंख्या |
|---|---|---|
| 1 | जयपुर | 66.26 लाख |
| 2 | जोधपुर | 36.87 लाख |
| 3 | अलवर | 36.74 लाख |
| 4 | नागौर | 33.07 लाख |
| 5 | उदयपुर | 30.68 लाख |
राजस्थान में न्यूनतम जनसंख्या वाले जिले
| क्रम | जिला | जनसंख्या |
|---|---|---|
| 1 | जैसलमेर | 6.69 लाख |
| 2 | प्रतापगढ़ | 8.67 लाख |
| 3 | सिरोही | 10.36 लाख |
| 4 | बूँदी | 11.10 लाख |
| 5 | राजसमंद | 11.56 लाख |
📌 ट्रिक (Memory Trick): सर्वाधिक जनसंख्या: “जो अल ना उ” → जयपुर, जोधपुर, अलवर, नागौर, उदयपुर न्यूनतम जनसंख्या: “जै प्र सि बू रा” → जैसलमेर, प्रतापगढ़, सिरोही, बूँदी, राजसमंद
राजस्थान का भारत और विश्व में स्थान
- राजस्थान में भारत की कुल जनसंख्या का 5.67 प्रतिशत और विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 1% हिस्सा है।
- 2011 के अनुसार, जनसंख्या की दृष्टि से राजस्थान का भारत में 8वाँ स्थान था। वर्तमान में आंध्रप्रदेश के विभाजन के कारण 7वाँ स्थान है।
- शिशु जनसंख्या (0–6 वर्ष): राजस्थान की कुल जनसंख्या का 15.54%
ग्रामीण एवं शहरी जनसंख्या
ग्रामीण जनसंख्या (5.15 करोड़)
सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या: जयपुर > अलवर > नागौर > उदयपुर
न्यूनतम ग्रामीण जनसंख्या: जैसलमेर > कोटा > प्रतापगढ़ > सिरोही
शहरी जनसंख्या (1.70 करोड़)
सर्वाधिक शहरी जनसंख्या: जयपुर > जोधपुर > कोटा > अजमेर
न्यूनतम शहरी जनसंख्या: प्रतापगढ़ > डूंगरपुर > जैसलमेर > बाँसवाड़ा
प्रतिशत के आधार पर
| श्रेणी | प्रतिशत | सर्वाधिक | न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| ग्रामीण | 75.1% | डूंगरपुर | कोटा |
| शहरी | 24.1% | कोटा | डूंगरपुर |
📌 शिक्षक नोट: कोटा और डूंगरपुर एक-दूसरे के विपरीत हैं — कोटा में शहरी प्रतिशत सर्वाधिक है तो ग्रामीण न्यूनतम, और डूंगरपुर में ग्रामीण प्रतिशत सर्वाधिक है तो शहरी न्यूनतम। यह एक बार पक्का याद कर लें।
जनसंख्या वृद्धि दर
परिभाषा: किसी निश्चित स्थान पर निश्चित समय (10 वर्ष) में प्रति 100 व्यक्तियों पर होने वाली वृद्धि “जनसंख्या वृद्धि दर” कहलाती है।
सर्वाधिक वृद्धि दर वाले जिले
| क्रम | जिला | वृद्धि दर |
|---|---|---|
| 1 | बाड़मेर | 32.5% |
| 2 | जैसलमेर | 31.8% |
| 3 | जोधपुर | 27.7% |
| 4 | बाँसवाड़ा | 26.58% |
न्यूनतम वृद्धि दर वाले जिले
| क्रम | जिला | वृद्धि दर |
|---|---|---|
| 1 | श्री गंगानगर | 10% |
| 2 | झुंझुनू | 11.7% |
| 3 | पाली | 11.9% |
| 4 | बूँदी | 15.4% |
ग्रामीण वृद्धि दर (19%)
- सर्वाधिक: जैसलमेर > बाड़मेर > बाँसवाड़ा
- न्यूनतम: कोटा > श्री गंगानगर > झुंझुनूं
नगरीय वृद्धि दर (29%)
- सर्वाधिक: अलवर > दौसा > बारां
- न्यूनतम: डूंगरपुर > प्रतापगढ़ > बाँसवाड़ा
ऐतिहासिक महत्व
- राजस्थान में सर्वाधिक ऋणात्मक जनसंख्या वृद्धि 1911–21 (–6.29%) के दशक में रही।
- 1911–21 के दशक को “जनसंख्या विभाजक दशक” भी कहा जाता है।
- राजस्थान में जनसंख्या घटने के कारण (1911–21):
- प्लेग महामारी (मुख्य कारण)
- प्रथम विश्व युद्ध
- राष्ट्रीय आन्दोलनों की शुरुआत
- 1951–1981 के दशकों को “जनसंख्या विस्फोटक दशक” कहा जाता है, जिसमें सर्वाधिक वृद्धि दर 1971–81 (32.97%) रही।
- 1991 से 2001 में राजस्थान की जनसंख्या में सर्वाधिक वृद्धि हुई।
📌 परीक्षा नोट (RPSC RAS / Patwari):
- जनसंख्या विभाजक दशक = 1911–21
- जनसंख्या विस्फोटक दशक = 1951–1981
- राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि के मुख्य कारक: उच्च जन्म दर, न्यूनतम मृत्यु दर एवं आप्रवास
जनसंख्या घनत्व
परिभाषा: प्रति वर्ग किलोमीटर में रहने वाली जनसंख्या।
- 2001 में राजस्थान का जनसंख्या घनत्व 165 था।
- 2011 में जनसंख्या घनत्व = 200/वर्ग कि.मी.
सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाले जिले
| क्रम | जिला | घनत्व |
|---|---|---|
| 1 | जयपुर | 595 |
| 2 | भरतपुर | 503 |
| 3 | दौसा | 476 |
| 4 | अलवर | 438 |
न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाले जिले
| क्रम | जिला | घनत्व |
|---|---|---|
| 1 | जैसलमेर | 17 |
| 2 | बीकानेर | 78 |
| 3 | बाड़मेर | 92 |
| 4 | चुरू | 147 |
📌 महत्वपूर्ण तथ्य:
- 100 से कम जनसंख्या घनत्व वाले जिले: जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर
- मरुस्थलीय जिलों (पश्चिमी राजस्थान) में जनसंख्या घनत्व सबसे कम मिलता है।
लिंगानुपात
परिभाषा: प्रति हजार पुरुषों की संख्या पर महिलाओं की संख्या को ‘लिंगानुपात’ कहा जाता है।
कुल औसत लिंगानुपात = 928
| श्रेणी | सर्वाधिक | न्यूनतम |
|---|---|---|
| सर्वाधिक | डूंगरपुर – 994 | धौलपुर – 846 |
| राजसमंद – 990 | जैसलमेर – 852 | |
| पाली – 987 | करौली – 861 | |
| प्रतापगढ़ – 983 | भरतपुर – 880 |
- 2001 (921) की तुलना में 2011 (928) में 7 अंकों की बढ़ोतरी हुई।
ग्रामीण लिंगानुपात – 993
- सर्वाधिक: पाली (1003) > राजसमंद (998) > डूंगरपुर (996)
- न्यूनतम: धौलपुर (841) > करौली (856) > जैसलमेर (859)
शहरी लिंगानुपात – 914
- सर्वाधिक: टोंक (985) > बाँसवाड़ा (964) > प्रतापगढ़ (963)
- न्यूनतम: जैसलमेर (807) > धौलपुर (864) > अलवर (872)
📌 परीक्षा में बार-बार पूछा जाने वाला तथ्य:
- राजस्थान के सभी जिलों में लिंगानुपात 1000 से कम है।
- राजस्थान का औसत लिंगानुपात (928) भारत के औसत लिंगानुपात (943) से कम है।
- राजस्थान में सामान्य लिंगानुपात में औसत से कम वाले जिले: 15
- राजस्थान में शिशु लिंगानुपात में औसत से कम वाले जिले: 12
शिशु लिंगानुपात (0–6 वर्ष)
2011 में शिशु लिंगानुपात = 888
| सर्वाधिक | न्यूनतम |
|---|---|
| बाँसवाड़ा – 934 | झुंझनूं – 837 |
| प्रतापगढ़ – 933 | सीकर – 848 |
| भीलवाड़ा – 928 | करौली – 852 |
| उदयपुर – 924 | श्रीगंगानगर – 854 |
- राजस्थान में 2001 में शिशु लिंगानुपात 909 था, जिसमें 2011 में (909–888) 21 अंकों की कमी हुई।
राज्य में शिशु लिंगानुपात
ग्रामीण (892):
- सर्वाधिक: बाँसवाड़ा (937) > प्रतापगढ़ (936) > भीलवाड़ा (933)
- न्यूनतम: झुंझनु (832) > सीकर (843) > करौली (850)
शहरी (874):
- सर्वाधिक: नागौर (907) > बीकानेर (906) > भीलवाड़ा (904)
- न्यूनतम: धौलपुर (841) > गंगानगर (842) > दौसा (847)
📌 शिक्षक नोट (REET/Computer Instructor): शिशु लिंगानुपात में गिरावट चिंताजनक है। परीक्षा में यह पूछा जाता है कि 2001 की तुलना में 2011 में कितने अंकों की कमी हुई — उत्तर है 21 अंक (909 से 888)।
साक्षरता
परिभाषा: 6 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति जो किसी भी भाषा को पढ़ने या लिखने में सक्षम हो, उसे ‘साक्षर’ कहा जाता है।
2011 में साक्षरता दर = 66.1 प्रतिशत
| सर्वाधिक | न्यूनतम |
|---|---|
| कोटा – 76.6% | जालौर – 54.9% |
| जयपुर – 75.5% | सिरोही – 55.3% |
| झुंझुनू – 74.1% | प्रतापगढ़ – 56.0% |
| सीकर – 71.9% | बाँसवाड़ा – 56.3% |
पुरुष साक्षरता दर = 79.2%
- सर्वाधिक: झुंझुनू (86.9%) > कोटा (86.3%) > जयपुर (86.1%) > सीकर (85.1%)
- न्यूनतम: प्रतापगढ़ (69.5%) = बाँसवाड़ा (69.5%) > सिरोही (70.0%) > जालौर (70.7%)
महिला साक्षरता दर = 52.1%
- सर्वाधिक: कोटा (65.9%) > जयपुर (64.0%) > झुंझुनूं (61.0%) > गंगानगर (59.7%)
- न्यूनतम: जालौर (38.5%) > जैसलमेर (39.7%) > सिरोही (39.7%) > बाड़मेर (40.6%)
ग्रामीण एवं शहरी साक्षरता
ग्रामीण साक्षरता (61.4%)
- पुरुष: 76.2%, महिला: 45.8%
- सर्वाधिक ग्रामीण साक्षरता: झुंझुनू | न्यूनतम: सिरोही
- ग्रामीण पुरुष साक्षरता सर्वाधिक: झुंझुनू | न्यूनतम: सिरोही
- ग्रामीण महिला साक्षरता सर्वाधिक: झुंझुनू | न्यूनतम: सिरोही
शहरी साक्षरता (79.7%)
- पुरुष: 87.9%, महिला: 70.7%
- सर्वाधिक शहरी साक्षरता: उदयपुर | न्यूनतम: नागौर
- शहरी पुरुष साक्षरता सर्वाधिक: उदयपुर | न्यूनतम: धौलपुर
- शहरी महिला साक्षरता सर्वाधिक: उदयपुर | न्यूनतम: जालौर
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- जनगणना 2011 में बाड़मेर और चुरू में साक्षरता दर में कमी हुई, शेष सभी जिलों में वृद्धि हुई।
- राज्य की साक्षरता दर में 10 वर्षों (2001–2011) में 5.69 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
- पुरुषों में वृद्धि: 3.50%
- महिलाओं में वृद्धि: 8.25%
- देश में पुरुष एवं महिला साक्षरता दर के बीच अंतर सर्वाधिक राजस्थान में है।
- राजस्थान में औसत साक्षरता (66.1%) से कम साक्षरता वाले जिले: 19
📌 परीक्षा में बहुत पूछा जाता है:
- सर्वाधिक साक्षर जिला: कोटा
- न्यूनतम साक्षर जिला: जालौर
- पुरुष-महिला साक्षरता में अंतर सबसे ज्यादा: राजस्थान (पूरे देश में)
- 2001–2011 में महिला साक्षरता में सबसे अधिक वृद्धि हुई
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति
अनुसूचित जनजाति / ST (13.5%)
- कुल जनसंख्या: 92.38 लाख
| सर्वाधिक ST | सर्वाधिक ST % | न्यूनतम ST | न्यूनतम ST % |
|---|---|---|---|
| उदयपुर | बाँसवाड़ा | बीकानेर | नागौर |
| बाँसवाड़ा | डूंगरपुर | नागौर | बीकानेर |
| डूंगरपुर | प्रतापगढ़ | चुरू | चुरू |
- ST लिंगानुपात: 948
- ST 28% से अधिक: 5 जिलों में (बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर)
- ST 50% या 60% से अधिक: 3 जिले (बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़)
अनुसूचित जाति / SC (17.8%)
- कुल जनसंख्या: 121.21 लाख
| सर्वाधिक SC | सर्वाधिक SC % | न्यूनतम SC | न्यूनतम SC % |
|---|---|---|---|
| जयपुर | श्री गंगानगर | डूंगरपुर | डूंगरपुर |
| गंगानगर | हनुमानगढ़ | प्रतापगढ़ | बाँसवाड़ा |
| नागौर | करौली | बाँसवाड़ा | उदयपुर |
- SC लिंगानुपात: 923
- SC 25% से अधिक: 2 जिलों में (श्री गंगानगर, हनुमानगढ़)
- SC 20% से अधिक: 12 जिले
📌 परीक्षा नोट:
- सर्वाधिक ST जनसंख्या: उदयपुर | सर्वाधिक ST %: बाँसवाड़ा
- सर्वाधिक SC जनसंख्या: जयपुर | सर्वाधिक SC %: श्री गंगानगर
- SC और ST दोनों में न्यूनतम %: डूंगरपुर (SC) और नागौर (ST)
राजस्थान में विभिन्न धर्मों की जनसंख्या
| धर्म | प्रतिशत | सर्वाधिक जनसंख्या | सर्वाधिक प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| हिन्दू | 88.49% | जयपुर | दौसा |
| मुस्लिम | 9.07% | जयपुर | जैसलमेर |
| सिख | 1.27% | श्री गंगानगर | श्री गंगानगर |
| जैन | 0.91% | जयपुर | उदयपुर |
| ईसाई | 0.14% | बाँसवाड़ा | बाँसवाड़ा |
| बौद्ध | 0.02% | टलवर | अलवर |
जनसंख्या नीति
- राजस्थान राज्य की जनसंख्या नीति: 20 जनवरी, 2000
- राष्ट्रीय जनसंख्या नीति: 15 फरवरी, 2000
📌 अंतिम परीक्षा टिप (सभी परीक्षाओं के लिए): राजस्थान की जनसंख्या नीति (20 जनवरी) राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (15 फरवरी) से पहले आई — यह एक सामान्य भ्रम का विषय है, अच्छे से याद रखें।
त्वरित संदर्भ तालिका – RPSC/RSMSSB/Patwari/REET
| विषय | तथ्य |
|---|---|
| आधुनिक जनगणना वर्ष | 1872 (लार्ड मेयो) |
| दशकीय जनगणना शुरू | 1881 (लार्ड रिपन) |
| जनगणना अधिनियम | 1948 |
| जनगणना 2011 का स्लोगन | हमारी जनगणना – हमारा भविष्य |
| राजस्थान की जनसंख्या | 6.85 करोड़ |
| सर्वाधिक जनसंख्या जिला | जयपुर |
| न्यूनतम जनसंख्या जिला | जैसलमेर |
| जनसंख्या घनत्व 2011 | 200/वर्ग कि.मी. |
| लिंगानुपात (औसत) | 928 |
| शिशु लिंगानुपात | 888 |
| साक्षरता दर | 66.1% |
| पुरुष साक्षरता | 79.2% |
| महिला साक्षरता | 52.1% |
| सर्वाधिक साक्षर जिला | कोटा (76.6%) |
| न्यूनतम साक्षर जिला | जालौर (54.9%) |
| ST जनसंख्या | 92.38 लाख (13.5%) |
| SC जनसंख्या | 121.21 लाख (17.8%) |
| जनसंख्या विभाजक दशक | 1911–21 |
| जनसंख्या विस्फोटक दशक | 1951–1981 |
राजस्थान जनसंख्या – विगत वर्ष प्रश्न (PYQ)
विगत वर्ष प्रश्न (PYQ)
राजस्थान जनसंख्या अध्याय — सभी प्रमुख परीक्षाओं से संकलित
इस interactive PYQ section में शामिल है:
35 प्रश्न — RPSC RAS, Patwari, REET, RSMSSB और Computer Instructor परीक्षाओं से
दो modes:
- Practice Mode — सभी प्रश्न एक साथ, क्लिक करके उत्तर चुनें, तुरंत हिंदी स्पष्टीकरण मिलेगा
- Browse Mode — एक-एक प्रश्न, navigation के साथ, progress bar दिखता है
Filters — परीक्षा के नाम से या कठिनाई स्तर (आसान/मध्यम/कठिन) से छाँटें
Live scoreboard — हल किए प्रश्न, सही उत्तर और सटीकता प्रतिशत ऊपर दिखता है
हर प्रश्न पर:
- परीक्षा का नाम, वर्ष और कठिनाई badge
- उत्तर चुनते ही सही/गलत रंग से highlight
- विस्तृत हिंदी स्पष्टीकरण
- Topic tags जैसे घनत्व, साक्षरता, लिंगानुपात आदि
राजस्थान जनसंख्या – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राजस्थान की जनसंख्या से जुड़े सभी सामान्य प्रश्नों के सटीक उत्तर
यह सामग्री राजस्थान के भूगोल (Lesson जनसंख्या) पर आधारित है और RPSC, RSMSSB, Patwari, REET, Computer Instructor जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए तैयार की गई है।
