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राजस्थान की ऊर्जा: संपूर्ण जानकारी | Rajasthan Energy Geography in Hindi

यह लेख राजस्थान भूगोल के पाठ 16 “ऊर्जा” पर आधारित है, जो RPSC, RAS, Patwari, Gram Sevak एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।


A. ऊर्जा का वर्गीकरण (Classification of Energy)

संभावना के आधार पर उपयोग

नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy):

  1. हाइड्रो / जल ऊर्जा
  2. सौर ऊर्जा
  3. पवन ऊर्जा
  4. बायो गैस
  5. बायो मास
  6. ज्वारीय ऊर्जा
  7. भू-तापीय ऊर्जा

अनवीकरणीय ऊर्जा (Non-Renewable Energy):

  1. तापीय ऊर्जा (कोयला, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम)
  2. परमाणु ऊर्जा (यूरेनियम, थोरियम)

उत्पादन के आधार पर

परम्परागत ऊर्जा:

  • कोयला, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम, हाइड्रो/जलीय ऊर्जा

गैर-परम्परागत ऊर्जा:

  • परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो मास, बायो गैस, भू-तापीय ऊर्जा

नोट: उत्पादन क्षमता के आधार पर ऊर्जा स्टेशन के प्रकार:

  • सुपर स्टेशन – 1000 MW से अधिक उत्पादन
  • सुपर क्रिटिकल स्टेशन – 500 MW से अधिक उत्पादन
  • अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (UMPP) – 4000 MW से अधिक उत्पादन

B. राजस्थान के प्रमुख ऊर्जा प्रोजेक्ट

राजस्थान में ऊर्जा परियोजनाएं दो श्रेणियों में हैं:

  • I. परम्परागत ऊर्जा – जलीय ऊर्जा एवं तापीय ऊर्जा
  • II. गैर-परम्परागत ऊर्जा

I. परम्परागत ऊर्जा

1. जलीय ऊर्जा (Hydro Power Projects)

(a) राज्य सरकार की जलीय ऊर्जा परियोजनाएं:

परियोजनास्थानउत्पादन क्षमता
जाखम लघु जल विद्युत परियोजनाप्रतापगढ़5.4 MW
अनास जल विद्युत परियोजनाबाँसवाड़ा140 MW
इन्दिरा गाँधी लघु जल विद्युत परियोजनागंगानगर, बीकानेर23.85 MW

(b) राज्य : राज्य की जल विद्युत परियोजनाएं:

भाखड़ा-नांगल जल विद्युत परियोजना:

  • सहयोग: राजस्थान, पंजाब, हरियाणा
  • उत्पादन क्षमता: 1493 MW
  • राजस्थान की हिस्सेदारी: 15.2% (227 MW)

व्यास जल विद्युत परियोजना:

  • सहयोग: राजस्थान, पंजाब
  • राजस्थान की हिस्सेदारी: 422 MW
  • प्रमुख बांध: पोंग बाँध (HP) – 50%, पंडोह बाँध (HP) – 20%

माही बजाज सागर जल विद्युत परियोजना:

  • सहयोग: राजस्थान : गुजरात (45:55)
  • प्रथम चरण (1986): 2×25 MW = 50 MW
  • द्वितीय चरण (1989): 2×45 MW = 90 MW
  • नोट: इस परियोजना में उत्पादित 100% ऊर्जा राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में वितरित की जाती है।

चम्बल जल विद्युत परियोजना:

  • लाभान्वित राज्य: राजस्थान : मध्यप्रदेश (50:50)
  • तीन बाँधों से कुल 386 MW उत्पादन:
चरणबाँधउत्पादन
प्रथमगाँधी सागर5×23 = 115 MW
द्वितीयराणा प्रताप सागर4×43 = 193 MW
तृतीयजवाहर सागर3×33 = 99 MW
  • हिस्सेदारी: राजस्थान (193 MW) : मध्यप्रदेश (193 MW)

राहुघाट परियोजना (करौली – प्रस्तावित):

  • चम्बल नदी पर, राजस्थान + मध्यप्रदेश (50:50)
  • उत्पादन क्षमता: 79 मेगावाट

(c) केन्द्र सरकार की जल विद्युत परियोजनाएं:

परियोजनाराज्यनदीसंचालन
सलास परियोजनाजम्मू-कश्मीरचिनाबNHPC
दुलहस्ती परियोजनाजम्मू-कश्मीरचिनाबNHPC
उरी परियोजनाजम्मू-कश्मीरझेलमNHPC
पार्वती परियोजनाहिमाचल प्रदेशपार्वती नदीNHPC
चमेरा परियोजनाहिमाचल प्रदेशरावी नदीNHPC
नाथपा-झाकरीहिमाचल प्रदेशसतलजNHPC
टिहरी परियोजनाउत्तराखण्डभागीरथी व भीलगंगाTHPC
टनकपुर परियोजनाउत्तराखण्डशारदा (काली)NHPC
धौलीगंगाउत्तराखण्डधौलीगंगाNHPC

नोट: टिहरी (भागीरथी) THPC द्वारा संचालित है, अन्य सभी NHPC द्वारा।


2. तापीय ऊर्जा (Thermal Power Projects)

इस ऊर्जा का मुख्य स्रोत कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस है।

(a) राज्य सरकार की परियोजनाएं:

सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट – श्री गंगानगर:

  • राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर प्लांट (2002)
  • वर्तमान में राजस्थान की सबसे बड़ी ताप विद्युत परियोजना (2025)
  • पाँच चरणों में 8 इकाइयों से कुल 2820 MW
चरणइकाईउत्पादन
IUnit 1, 2, 3250+250+250 MW
IIUnit 4250 MW
IIIUnit 5250 MW
IVUnit 6, 7250+660 MW
VUnit 8660 MW

कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट:

  • राजस्थान का पहला (1983) थर्मल (कोयला) पावर प्लांट
  • राजस्थान की प्रथम ताप विद्युत परियोजना तथा दूसरी सुपर ताप विद्युत परियोजना
  • पाँच चरणों में 7 इकाइयों से कुल 1240 MW

छबड़ा सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट – बारां:

  • उत्पादन क्षमता: 2320 मेगावाट
  • राजस्थान की प्रथम क्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना

कवाई सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट – बारां:

  • उत्पादन क्षमता: 1320 मेगावाट
  • सहयोग: अडानी ग्रुप (2 × 660 MW)

कालीसिंध क्रिटिकल पावर प्लांट – झालावाड़:

  • उत्पादन क्षमता: 1200 मेगावाट
  • प्रस्तावित: 800 MW (अल्ट्रा पावर प्रोजेक्ट)

भादरेस सुपर पावर प्लांट – बाड़मेर:

  • उत्पादन क्षमता: 1080 मेगावाट

कपूरड़ी-जालीपा सुपर थर्मल पावर प्लांट – बाड़मेर:

  • उत्पादन क्षमता: 1080 मेगावाट

गिरल थर्मल पावर प्लांट – थुम्बली (बाड़मेर):

  • उत्पादन क्षमता: 250 मेगावाट
  • सहयोगिता: जर्मनी

दानपुर सुपर थर्मल पावर प्लांट – बाँसवाड़ा:

  • उत्पादन क्षमता: 1600 मेगावाट

बरसिंहसर थर्मल पावर प्लांट – बीकानेर:

  • उत्पादन क्षमता: 250 मेगावाट (125 MW × 2)
  • नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन (भारत सरकार) द्वारा संचालित

गुरहा थर्मल पावर प्लांट – (प्रस्तावित) बीकानेर

(b) राज्य : राज्य की परियोजना:

सतपुड़ा तापीय विद्युत परियोजना:

  • स्थित: जिला बैतूल (MP)
  • लाभान्वित: राजस्थान + मध्यप्रदेश

(c) केन्द्र की परियोजनाएं (NTPC द्वारा संचालित):

परियोजनास्थान
सिंगरौली थर्मल प्लांटउत्तरप्रदेश
रिहंद सुपर थर्मल पावर प्लांटउत्तरप्रदेश
ऊँचाहार सुपर थर्मल पावर प्लांटउत्तरप्रदेश
कहलगांवबिहार
तलचरओडिशा

गैस विद्युत परियोजनाएं:

परियोजनास्थानउत्पादन क्षमता
अंताबारां419.3 MW
दादरीउ.प्र.829.78 MW
औरैयाउ.प्र.652 MW

नोट: राज्य की प्रथम (1989) गैस विद्युत परियोजना – अंता गैस पावर प्लांट, NTPC द्वारा संचालित।

नेफ्था/तरल ईंधन आधारित परियोजनाएं:

परियोजनाउत्पादन
धौलपुर पावर प्लांट330+372.7 = 702.7 MW
केशोरायपाटन थर्मल पावर प्लांट – बूंदीप्रस्तावित

II. गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत

1. परमाणु ऊर्जा
  • स्रोत: यूरेनियम व थोरियम
  • राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन: रावतभाटा (चित्तौड़)
  • शुरुआत: दिसम्बर 1973 (सहयोग – कनाडा)
  • संचालन: नाभिकीय ऊर्जा निगम (NPCIL)
  • 6 इकाइयों की कुल क्षमता: 1180 मेगावाट (प्रथम इकाई पूर्णतः बंद – शेष 1080 MW)
इकाईउत्पादन
प्रथम (बंद)100 MW
द्वितीय से छठी200-200 MW प्रत्येक
  • रावतभाटा में 700 MW की दो यूनिट प्रस्तावित; प्रथम यूनिट सितम्बर 2024 में स्थापित
  • राजस्थान को रावतभाटा (राजस्थान) व नरौरा (उ.प्र.) से परमाणु ऊर्जा मिलती है
  • राजस्थान में दूसरा परमाणु ऊर्जा विद्युत गृह: बाँसवाड़ा (प्रस्तावित) – 700 MW × 4 यूनिट = 2800 MW

2. सौर ऊर्जा

सौर ऊर्जा की सर्वाधिक सम्भावना:

  • भारत में → राजस्थान में
  • राजस्थान में → जोधपुर में

राजस्थान में सौर ऊर्जा की सर्वाधिक सम्भावना के कारण:

  1. सौर विकिरण की तीव्रता अधिक होना
  2. एक वर्ष में लगभग 325 दिन साफ धूप रहना
  3. सौर ऊर्जा में निवेश अधिक होना
  4. मरुस्थलीय विस्तार अधिक होने के कारण उच्च तापमान की प्राप्ति

नोट: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार राजस्थान में सौर ऊर्जा की सम्भावना 142 गीगावाट (1,42,000 MW) है।

राजस्थान में सौर ऊर्जा विकास के प्रयास:

(a) सोलर पार्क निर्माण योजना:

  • चुने गए जिले: जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर
  • 2010 से क्लिंटन फाउंडेशन और राज्य सरकार के मध्य समझौता

राजस्थान में स्थापित सोलर पार्क:

जिलास्थान
फलोदीभड़ला, फलोदी, नोख
जोधपुरनादिया कलाँ
बीकानेरपूँगल
जैसलमेरधूड़सर (रिलायंस), फतेहगढ़, पोकरण, भैंसडा/भैंसरा

नोट: राजस्थान की पहली निजी क्षेत्र की सौर परियोजना रिलायंस द्वारा खींवसर (नागौर) में शुरू की गई।

भड़ला सोलर पार्क (फलोदी):

  • 2245 MW का सोलर पार्क, चार चरणों में विकसित
  • वर्तमान में भड़ला राजस्थान का सबसे बड़ा सोलर पार्क है
  • (प्रस्तावित में सबसे बड़ा – पूगल, 4000 मेगावाट)
चरणउत्पादनसहयोग
Ist65 MWराजस्थान सोलर पार्क
IInd680 MWडवलपमेंट कम्पनी लिमिटेड
IIIrd1000 MWIT & FS + राज्य सरकार
IVth500 MWमेसर्स अडानी + राज्य सरकार

(b) सोलर सिटी का निर्माण:

  • सर्वाधिक सौर ऊर्जा क्षमता वाले शहरों को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा
  • शामिल शहर: जयपुर, जोधपुर, अजमेर
  • प्रस्तावित सिटी: पुष्कर (अजमेर), जैसलमेर

(c) SEEZ (Solar Energy Enterprises Zone/सौर ऊर्जा उपक्रम जोन):

  • राजस्थान में सर्वाधिक सौर ऊर्जा सम्भावना वाला क्षेत्र SEEZ कहलाता है
  • शामिल क्षेत्र: जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर

(d) सौर ऊर्जा मिशन:

  • जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सोलर मिशन
  • शुरुआत: जनवरी 2010
  • लक्ष्य: 2022 तक 1 लाख मेगावाट (100 GW) सौर ऊर्जा उत्पादन
  • तीन चरणों में: 2010-13 / 2013-17 / 2017-22

(e) सौर ऊर्जा नीति:

  • प्रथम सौर ऊर्जा नीति: 2011
  • द्वितीय: 2014
  • नवीनतम: 18 दिसम्बर 2019

नवीनतम नीति का लक्ष्य: 2024-25 तक 30,000 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाओं का लक्ष्य, जिसमें:

  • सोलर पार्क → 24000 MW
  • डिस्कॉम → 4000 MW
  • सोलर रूफटॉप → 1000 MW
  • सौलर पम्प → 1000 MW

(f) सौर ऊर्जा निवेश कार्यक्रम:

  • रिसजेंट राजस्थान (2008)
  • रिसजेंट राजस्थान (2015)
  • इन्वेस्ट समिट (2022)
  • राइजिंग राजस्थान (9-10-11 दिसम्बर 2024)

3. पवन ऊर्जा
  • राजस्थान में पवन ऊर्जा की उत्पादन क्षमता लगभग 284 GW (150 मी. ऊँचाई पर)
  • देश में पवन ऊर्जा की सर्वाधिक सम्भावना → राजस्थान
  • राजस्थान में सर्वाधिक सम्भावना → जैसलमेर में

प्रमुख पवन ऊर्जा संयंत्र:

संयंत्रजिलाविशेषता
अमर सागरजैसलमेरराजस्थान में प्रथम
सोढ़ा बांधनजैसलमेर
पोहाराजैसलमेर
आकलजैसलमेर
हँसुआजैसलमेर
देवगढ़प्रतापगढ़द्वितीय
बीठड़ीफलोदीतृतीय
हर्ष विंड एनर्जीसीकर
बड़ा बागजैसलमेरसबसे बड़ा विंड एनर्जी पार्क
हाइब्रिड विंड एनर्जी प्लांटजैसलमेर
कोडियासरजैसलमेररेलवे का पहला पवन ऊर्जा संयंत्र

नोट: मेसर्स कालानी इन्डस्ट्रीज ने बड़ा बाग (जैसलमेर) में निजी क्षेत्र की प्रथम पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित की है। पवन ऊर्जा में सर्वाधिक योगदान: सुजलॉन एनर्जी

पवन ऊर्जा नीति:

  • प्रथम: 2012
  • नवीनतम (द्वितीय): 18 दिसम्बर 2019
  • लक्ष्य: 2024-25 तक 3500 मेगावाट पवन एवं हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं का लक्ष्य

4. बायोमास ऊर्जा
  • मुख्य स्रोत: सरसों का तेल, विलायती बबूल, चावल की भूसी
  • सर्वाधिक सम्भावनाएं: श्री गंगानगर जिले में
  • राजस्थान में प्रथम बायोमास एनर्जी प्लांट: पदमपुर, गंगानगर (2003)

बायोमास ऊर्जा संयंत्र:

संयंत्रजिला
पदमपुरगंगानगर
खातोलीउनियारा (टोंक)
रंगपुरकोटा
चंदेरियाचित्तौड़गढ़
सांगरियाहनुमानगढ़
कचेला-बागसरीजालौर (साँचौर)

5. बायोगैस ऊर्जा
  • स्रोत: गाय का गोबर
  • सर्वाधिक सम्भावना: उदयपुर में
  • बायोगैस का रासायनिक संघटन:
    • मिथेन (CH₄) → 65%
    • कार्बन डाई ऑक्साइड (CO₂) → 30%
    • हाइड्रोजन एवं अन्य गैस → 5%

C. ऊर्जा संबंधी संस्थान

1. राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (RREC):

  • उद्देश्य: राज्य में गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोतों का विकास और संरक्षण
  • स्थापना: 9 अगस्त 2002
  • REDA (1985) + RSPCL (1995) को मिलाकर स्थापित
  • RSDCL (Rajasthan Solarpark Development Company): स्थापना 2 नवम्बर 2011, जयपुर (RREC की सहयोगी कम्पनी)

2. राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम – जयपुर

3. राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम – जयपुर

4. राजस्थान राज्य विद्युत वितरण निगम – जयपुर

5. राजस्थान राज्य विद्युत वितरण निगम – अजमेर

6. राजस्थान राज्य विद्युत वितरण निगम – जोधपुर


D. ऊर्जा संबंधित प्रमुख योजनाएं

1. उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय योजना)

  • शुरुआत: 5 नवम्बर 2015 (ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार)
  • 27 जनवरी 2016 को त्रिकोणीय MOU हस्ताक्षर
  • मुख्य उद्देश्य: वितरण कम्पनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति सुधारना

2. सौभाग्य योजना (PM सहज हर घर बिजली योजना)

  • शुरुआत: 25 सितम्बर 2017
  • उद्देश्य: देश के हर घर में बिजली पहुँचाना (लक्ष्य वर्ष: 31 मार्च 2019)

3. कुसुम योजना (KUSUM)

  • पूर्ण नाम: किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उद्यान महाभियान योजना
  • प्रारम्भ: 8 मार्च 2019
  • लक्ष्य: 34800 MW

घटक:

  • घटक-A: 0.5 MW से 2 MW क्षमता के विकेन्द्रीकरण सौर ऊर्जा संयंत्र, संचालन – RREC
  • घटक-B: 7.5 HP तक के कृषि पम्प सेटों का सौरीकरण (12,500 पम्प का लक्ष्य)
  • घटक-C (फीडर लेवल सोलराइजेशन): 2,00,000 पम्प सेटों का सोलराइजेशन

4. मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना

  • शुरुआत: 17 जुलाई 2021
  • उद्देश्य: कृषि उपभोक्ताओं को ₹1000 प्रतिमाह, वर्ष में अधिकतम ₹12000 का अनुदान
  • जून 2023 से इसे मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना (कृषि अनुदान) में मिला दिया गया

5. मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना (घरेलू अनुदान)

  • लाभ प्रारम्भ: जून 2023
विद्युत उपभोगरियायत
100 यूनिटमुफ्त बिजली
200 यूनिटपहले 100 यूनिट के बिल में छूट
200 से अधिकपहली 100 यूनिट मुफ्त, अन्य शुल्क उपभोक्ता को

6. PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना

  • शुरुआत: 13 फरवरी 2024
  • बजट: 75000 करोड़
  • उद्देश्य: 1 करोड़ घरों पर सौर संयंत्र स्थापित करना (300 यूनिट/माह मुफ्त)
क्षमताअनुदान
1 KW₹30,000
2 KW₹60,000
3 KW या अधिक₹78,000

लक्ष्य: राजस्थान सरकार ने 5 लाख घरों में सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाने का लक्ष्य रखा है।


E. अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु

राजस्थान में ऊर्जा संबंधित नीतियाँ

नीतिवर्ष
सौर ऊर्जा नीति (1st)2011
सौर ऊर्जा नीति (2nd)2014
सौर ऊर्जा नीति (3rd/नवीनतम)18 दिसम्बर 2019
पवन ऊर्जा नीति (1st)2012
पवन ऊर्जा नीति (2nd/नवीनतम)18 दिसम्बर 2019
बायोमास नीति (1st)2010
बायोमास नीति (2nd)2023
बायोमास वेस्ट टू एनर्जी नीति2023
अक्षय ऊर्जा नीति6 अक्टूबर 2019
राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन नीतिसितम्बर 2023

राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति – 2024:

  • जारी: 9 सितम्बर 2024
  • उद्देश्य: सौर, पवन, बायोमास एवं हरित हाइड्रोजन नीति के प्रावधानों को एकीकृत करना
  • विजन: नवीकरणीय ऊर्जा के राष्ट्रीय लक्ष्य (500 GW) में राजस्थान को प्रमुख योगदानकर्ता बनाना

राजस्थान में वर्तमान ऊर्जा उत्पादन (दिसम्बर 2024)

  • अधिष्ठापित क्षमता (Installed Capacity): 26,325.19 MW
    • तापीय ऊर्जा: 13,000 MW (लगभग 50%)
    • सौर ऊर्जा: 5482.66 MW
    • पवन ऊर्जा: 4414.12 MW
  • परम्परागत ऊर्जा का योगदान: 78-79%
  • नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान: 21-22%

नोट: नवीकरणीय ऊर्जा में सर्वाधिक वार्षिक वृद्धि 2023 में – राजस्थान। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य तक प्रतिबद्ध है।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (हरित ऊर्जा गलियारा)

  • शुरुआत: 2015-16
  • उद्देश्य: परम्परागत ऊर्जा स्टेशनों के साथ नवीकरणीय संसाधनों (सौर, पवन) से उत्पादित विद्युत को एकीकृत करना
  • राजस्थान में विस्तार: बीकानेर, जोधपुर, नागौर, अजमेर एवं चित्तौड़गढ़

ऊर्जा संबंधित महत्वपूर्ण दिवस

  • 20 अगस्त → अक्षय ऊर्जा दिवस
  • 14 दिसम्बर → राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस
  • अर्थ आवर डे → मार्च के अंतिम शनिवार को सायं 8:30 – 9:30 (ऑस्ट्रेलिया से शुरू)

यह लेख RPSC RAS, Patwari, Gram Sevak, SI, 2nd Grade Teacher एवं अन्य राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।

FAQs

Q: राजस्थान में सबसे बड़ा सोलर पार्क कौनसा है?

A: भड़ला सोलर पार्क (फलोदी) — 2245 MW

Q: राजस्थान का पहला थर्मल पावर प्लांट कौनसा है?

A: कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (1983)

Q: राजस्थान में परमाणु ऊर्जा केंद्र कहाँ है?

A: रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ (शुरुआत 1973, कनाडा सहयोग)

Q: राजस्थान में पवन ऊर्जा की सर्वाधिक सम्भावना कहाँ है?

A: जैसलमेर जिले में

Q: RREC की स्थापना कब हुई?

A: 9 अगस्त 2002

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