परिचय: राजस्थान का भू-आकृतिक विन्यास (Geomorphology of Rajasthan)
राजस्थान भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है, जिसकी भू-आकृति अत्यंत जटिल और विविधतापूर्ण है। राजस्थान के भौतिक स्वरूप को मुख्य रूप से प्रो. वी. सी. मिश्र (1968) तथा डॉ. रामलोचन सिंह द्वारा प्रतिपादित वर्गीकरण के आधार पर चार स्पष्ट भौतिक प्रदेशों में विभाजित किया जाता है। राजस्थान की यह भू-आकृति मुख्य रूप से टेथिस सागर (Tethys Sea) और गोंडवाना लैंड (Gondwanaland) के अवशेषों से निर्मित है।
🚨 2026 परीक्षा विशेष नोट (प्रशासनिक पुनर्गठन): राजस्थान के नए 50 जिलों के गठन के बाद इन भौतिक विभागों के अंतर्गत आने वाले जिलों का मानचित्र पूरी तरह बदल चुका है। परीक्षाओं में अब अरावली और मरुस्थलीय संस्तर के नवीन जिलों (जैसे— बालोतरा, फलोदी, नीमकाथाना) से प्रश्न पूछे जा रहे हैं। इस मास्टर-नोट्स में 2026 के सभी नवीनतम भौगोलिक अपडेट्स को प्रामाणिक रूप से समाहित किया गया है।
1. भौतिक विभागों का सांख्यिकीय मैपिंग (Statistical Mapping)
| भौतिक प्रदेश का नाम | क्षेत्रफल हिस्सेदारी (%) | जनसंख्या हिस्सेदारी (%) | भूगर्भीय अवशेष (Remnants) |
| पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश | 61.11% | 40% | टेथिस सागर |
| अरावली पर्वतीय प्रदेश | 9.00% | 10% | गोंडवाना लैंड |
| पूर्वी मैदानी भाग | 23.30% | 39% | टेथिस सागर |
| दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग (हाड़ौती) | 6.89% | 11% | गोंडवाना लैंड |
2. पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश: “थार का महा-मरुस्थल”
थार का मरुस्थल विश्व के उपोष्ण कटिबंधीय मरुस्थलों में सर्वाधिक घनी आबादी वाला मरुस्थल है। भूगर्भीय दृष्टि से यह टेथिस सागर का अवशेष है। इसकी ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है।
📊 शुष्क बनाम अर्ध-शुष्क रेतीला प्रदेश
इसे 25 सेमी समवर्षा रेखा दो भागों में बांटती है:
- शुष्क रेतीला मरुस्थल (0-25 सेमी वर्षा): यह पूर्णतः वनस्पतिविहीन और रेतीले टीलों का प्रदेश है। इसे बालुका स्तूप युक्त और स्तूप मुक्त (चट्टानी भाग) में बांटा गया है।
- अर्ध-शुष्क रेतीला प्रदेश (25-50 सेमी वर्षा): इसे ‘राजस्थान बांगर’ भी कहते हैं। इसे पुनः 4 भागों में बांटा गया है:
- लूनी बेसिन (गोड़वाड़ प्रदेश): लूनी नदी का बहाव क्षेत्र (पाली, जालौर, सांचौर)।
- घग्घर का मैदान: हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ जिले।
- नागौर उच्चभूमि: यहाँ पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होती है (कुबड़ पट्टी)।
- शेखावाटी अंतः प्रवाह क्षेत्र: कांतली नदी का क्षेत्र (सीकर, झुंझुनू, नीमकाथाना)।
🏜️ प्रमुख बालुका स्तूपों (Sand Dunes) का प्रकार (RPSC फेवरेट)
- बरखान (Barchan): अर्ध-चंद्राकार गतिशील टीले। मरुस्थल के विस्तार के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी। (प्रमुख केंद्र: भालेरी-चुरू, ओसियां-जोधपुर)।
- पैराबोलिक (Parabolic): हेयर-पिन (जूड़े) जैसी आकृति वाले, जो संपूर्ण राज्य में सर्वाधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
- अनुदैध्र्य / रेखीय (Longitudinal): पवन की दिशा के समानांतर बनने वाले। इनके मध्य के रास्ते को ‘गासी’ कहते हैं।
- अनुप्रस्थ (Transverse): पवन की दिशा के समकोण (90°) पर बनने वाले।
- तारा स्तूप (Star Dunes): तारे के आकार के। प्रमुख केंद्र: मोहनगढ़ (जैसलमेर) और सूरतगढ़ (गंगानगर)।
- शब्र काफिज (Sabr Kafiz): झाड़ियों के इर्द-गिर्द बनने वाले सबसे छोटे टीले।
🛠️ महत्वपूर्ण मरुस्थलीय शब्दावली
- पलाया झील (Playa): टीलों के मध्य वर्षा जल भर जाने से बनी अस्थायी झीलें।
- रन (Rann / Tat): जब पलाया झीलें सूख जाती हैं, तो वहाँ की समतल भूमि ‘रन’ कहलाती है (जैसे बाड़मेर में थोब, जैसलमेर में पोकरण)।
- बालसन (Bolson): टीलों के मध्य का मैदानी भाग।
- लाठी सीरीज: जैसलमेर में पोकरण से मोहनगढ़ के बीच 70 किमी लंबी भूगर्भीय जल पट्टी, जिसे “थार का नखलिस्तान” कहते हैं। यहाँ सेवण घास (लेसियुरस सिंडीकस) पाई जाती है।
3. 20 महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs) व विस्तृत व्याख्याएँ
Q1. राजस्थान का वह कौन सा भाग है जो गोंडवाना लैंड का अवशेष माना जाता है?
- उत्तर: अरावली पर्वतीय प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग (हाड़ौती)।
- व्याख्या: भूगर्भीय इतिहास में प्रायद्वीपीय भारत का निर्माण गोंडवाना लैंड से हुआ है, उसी का विस्तार अरावली और हाड़ौती का पठार है। शेष भाग (मैदान व मरुस्थल) टेथिस सागर का अवशेष है।
Q2. ‘नाचना’ गाँव जैसलमेर में स्थित है, यह किस भौगोलिक क्रिया के लिए विश्व प्रसिद्ध है?
- उत्तर: ‘रेगिस्तान के मार्च’ (Desert March) के लिए।
- व्याख्या: यहाँ के गतिशील बालुका स्तूप प्रतिवर्ष हजारों टन रेत आगे बढ़ाते हैं, जिससे रेगिस्तान का विस्तार हो रहा है।
Q3. ‘कुबड़ पट्टी’ (Hump Belt) राजस्थान के किस भौगोलिक भाग में स्थित है?
- उत्तर: नागौर उच्चभूमि (Nagaur Highlands) में।
- व्याख्या: यहाँ के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक होने के कारण यहाँ के निवासियों की हड्डियाँ टेढ़ी हो जाती हैं, जिसे ‘कुबड़ पट्टी’ कहते हैं।
Q4. राजस्थान में ‘सर्वाधिक वायु अपरदन’ (Wind Erosion) किस जिले में होता है और इसके पीछे क्या कारण है?
- उत्तर: जैसलमेर जिले में।
- व्याख्या: यहाँ वनस्पति नगण्य है और मरुस्थलीय बालू अत्यंत बारीक है, जिससे तीव्र हवाएं मिट्टी की ऊपरी परत उड़ा ले जाती हैं।
Q5. कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, मरुस्थलीय प्रदेश का कोड क्या है?
- उत्तर: BWhw।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. थार मरुस्थल को ‘मानसून का जुआ’ क्यों कहते हैं?
- उत्तर: क्योंकि यहाँ की कृषि पूर्णतः अनिश्चित मानसून पर निर्भर है। यदि वर्षा हुई तो बंपर उत्पादन, वरना सूखा—यही जुआ है।
Q2. फलोदी, बालोतरा, सांचौर अब किस भौगोलिक श्रेणी में आते हैं?
- उत्तर: 2026 के नए प्रशासनिक विन्यास में फलोदी ‘शुष्क’ और सांचौर-बालोतरा ‘अर्ध-शुष्क’ मरूस्थलीय श्रेणी में आते हैं।
Q3. ‘रेल’ या ‘नाडा’ किसे कहते हैं?
- उत्तर: सांचौर और जालौर जिले में लूनी नदी के बहाव क्षेत्र (बाढ़ के मैदान) को स्थानीय भाषा में ‘रेल’ या ‘नाडा’ कहते हैं, जो अत्यधिक उपजाऊ होता है।
Q4. थार मरुस्थल में ‘पलाया’ और ‘रन’ में क्या अंतर है?
- उत्तर: पलाया अस्थायी पानी की झील है, और जब वह पानी सूख जाता है, तो नीचे की समतल जमीन ‘रन’ कहलाती है।
Q5. ‘सेवण घास’ का वैज्ञानिक नाम क्या है?
- उत्तर: इसका वैज्ञानिक नाम लेसियुरस सिंडीकस है। यह मरुस्थल की सबसे पौष्टिक घास है।
📚 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- डॉ. हरीमोहन सक्सेना, “राजस्थान का भूगोल” (राज. हिंदी ग्रंथ अकादमी).
- आर्थिक समीक्षा, आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, राजस्थान सरकार (2025-26 डेटा).
- RPSC RAS एवं RSMSSB गत 15 वर्षों के प्रश्नपत्रों का संकलन।
- तथ्य जाँच व संपादन: सुयोग अकादमी संपादकीय टीम (सुधीर ढाका – BSc-BEd, योगेश जांगिड़ – सॉफ्टवेयर इंजीनियर)।

