राजस्थान के 4 भौतिक प्रदेश — थार से हाड़ौती — CET/RAS PYQ के साथ (2026 Free Notes)
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स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान भूगोल इकाई। आधिकारिक सिलेबस से विषय-सूची; पुस्तक का शब्दशः पाठ नहीं।

सुयोग AI गुरु
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त्वरित उत्तर (Quick Summary): राजस्थान का भौतिक स्वरूप (Physical Divisions) मुख्य रूप से चार स्पष्ट एवं स्थायी भौगोलिक प्रदेशों में विभाजित है — 1. उत्तर-पश्चिमी रेतीला मरुस्थल (61.11% क्षेत्रफल, ~40% जनसंख्या), 2. अरावली पर्वतीय प्रदेश (9% क्षेत्रफल, ~10% जनसंख्या), 3. पूर्वी मैदानी भाग (23.30% क्षेत्रफल, ~39% जनसंख्या), एवं 4. दक्षिण-पूर्वी हाड़ौती का पठार (6.89% क्षेत्रफल, ~11% जनसंख्या)। भूगर्भिक उत्पत्ति की दृष्टि से मरुस्थल व पूर्वी मैदान टेथिस सागर के अवशेष हैं, जबकि अरावली पर्वतमाला एवं हाड़ौती का पठार प्राचीन गोंडवाना लैंड (प्रायद्वीपीय भारत) के भूभाग हैं। राज्य का सर्वोच्च बिंदु गुरुशिखर (1722 मीटर, माउंट आबू, सिरोही) है और कर्क रेखा राज्य के दक्षिणी छोर (बांसवाड़ा एवं डूंगरपुर) से होकर गुजरती है।
1. भौतिक प्रदेश: तुलनात्मक मास्टर तालिका (Master Chart)
| भौतिक प्रदेश (Physical Region) | क्षेत्रफल (%) | जनसंख्या (%) | भूगर्भिक अवशेष | औसत वर्षा | मृदा का प्रकार | जलवायु प्रकार (कोपेन) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1. उत्तर-पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश | 61.11% | ~40% | टेथिस सागर | 10 – 50 सेमी | रेतीली / बलुई (एरिडिसोल / एन्टिसोल) | शुष्क व अर्ध-शुष्क (BWhw / BShw) |
| 2. अरावली पर्वतीय प्रदेश | 9.00% | ~10% | गोंडवाना लैंड | 50 – 90 सेमी | पर्वतीय / पथरीली (इनसेप्टिसोल) | उपाद्र्र (Cwg / BShw) |
| 3. पूर्वी मैदानी भाग | 23.30% | ~39% | टेथिस सागर (जलोढ़ निक्षेप) | 50 – 80 सेमी | जलोढ़ / दोमट / कछारी (एल्फीसोल) | आर्द्र (Cwg) |
| 4. दक्षिण-पूर्वी पठार (हाड़ौती) | 6.89% (लगभग 7%) | ~11% | गोंडवाना लैंड (दक्कन लावा) | 80 – 120 सेमी | मध्यम काली / रेगुर (वर्टिसोल) | अति-आर्द्र (Aw) |
💡 परीक्षा सूत्र (Memory Key):
• क्षेत्रफल क्रम (घटते क्रम में): मरुस्थल (61.11%) > पूर्वी मैदान (23.30%) > अरावली (9%) > हाड़ौती पठार (6.89%)
• जनसंख्या घनत्व क्रम (सर्वाधिक से न्यूनतम): पूर्वी मैदान > अरावली > हाड़ौती पठार > मरुस्थलीय प्रदेश
• भूगर्भिक उत्पत्ति जोड़ा: [अरावली + हाड़ौती = गोंडवाना लैंड] तथा [थार मरुस्थल + पूर्वी मैदान = टेथिस सागर/जलोढ़]
2. राजस्थान की भौगोलिक स्थिति, आकार एवं ढाल
- कुल क्षेत्रफल: 3,42,239 वर्ग किलोमीटर (भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.41%, क्षेत्रफल की दृष्टि से देश में प्रथम स्थान)।
- अक्षांशीय विस्तार: 23°03′ उत्तरी अक्षांश से 30°12′ उत्तरी अक्षांश (कुल अक्षांशीय अंतर: 7°09′)।
- देशांतरीय विस्तार: 69°30′ पूर्वी देशांतर से 78°17′ पूर्वी देशांतर (कुल देशांतरीय अंतर: 8°47′)।
- लंबाई व चौड़ाई: उत्तर से दक्षिण लंबाई 826 किमी (कोणा गाँव, श्रीगंगानगर से बोरकुंड गाँव, कुशलगढ़, बांसवाड़ा) तथा पूर्व से पश्चिम चौड़ाई 869 किमी (सिलान/सिलावट गाँव, राजाखेड़ा, धौलपुर से कटरा गाँव, सम, जैसलमेर)। पूर्व-पश्चिम विस्तार उत्तर-दक्षिण से 43 किमी अधिक है।
- राज्य की आकृति: विषमकोणीय चतुर्भुजाकार / पतंगाकार (Rhomboid - टी. एच. हेण्डले के अनुसार)।
- कर्क रेखा (23°30′ N): राजस्थान के दक्षिणी भाग से होकर गुजरती है। यह बांसवाड़ा के मध्य (कुशलगढ़) से तथा डूंगरपुर की दक्षिणी सीमा (चीखली गाँव) को छूती हुई निकलती है (कुल लंबाई लगभग 26 किमी)।
- राज्य का सामान्य ढाल: उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल का ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है (लूनी नदी का प्रवाह मार्ग इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है)। पूर्वी मैदान का ढाल पश्चिम से पूर्व व दक्षिण-पूर्व की ओर है।
3. प्रदेश 1: उत्तर-पश्चिमी रेतीला मरुस्थलीय प्रदेश (Thar Desert)
यह भारत के विशाल मरुस्थल (Great Indian Desert) का पूर्वी भाग है, जो विश्व के उपोष्ण मरुस्थलों में सर्वाधिक जैव-विविधता एवं सर्वाधिक जनघनत्व वाला मरुस्थल माना जाता है।
- विस्तार एवं सीमांकन: राज्य के कुल क्षेत्रफल का 61.11% भूभाग। इसके पूर्व में अरावली पर्वतमाला की 50 सेमी समवर्षा रेखा इसे पूर्वी राजस्थान से अलग करती है।
- मरुस्थल का उप-विभाजन: 25 सेमी समवर्षा रेखा थार मरुस्थल को दो उप-भागों में विभाजित करती है:
(A) शुष्क रेतीला मरुस्थल (शुष्क मरुभूमि — 0 से 25 सेमी वर्षा)
यह प्रदेश जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर, फलोदी, जोधपुर (पश्चिमी भाग) आदि जिलों में विस्तृत है। इसे दो वर्गों में बाँटा जाता है:
- बालुका स्तूप युक्त प्रदेश (लगभग 58.5% - 60%):
- पैराबोलिक (Parabolic) स्तूप: राजस्थान में संख्या की दृष्टि से सर्वाधिक पाए जाने वाले स्तूप, जो महिला के बालों के हेयरपिन जैसी आकृति के होते हैं। ये पूरे मरुस्थल में सर्वत्र मिलते हैं।
- बरखान (Barchan) स्तूप: अर्धचंद्राकार, गतिशील एवं अत्यंत परिवर्तनशील बालुका स्तूप। यह मरुस्थलीकरण (Desert March / मरु प्रसार) के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी है। प्रमुख क्षेत्र: भालेरी (चूरू), ओसियां (जोधपुर), लूणकरणसर (बीकानेर)।
- अनुदैर्ध्य / सीफ (Longitudinal / Seif): वायु की दिशा के समानांतर बनने वाले रेखीय स्तूप। दो समानांतर स्तूपों के मध्य बने निचले मार्ग को 'गासी' (Gassi) या कारवां मार्ग कहते हैं।
- अनुप्रस्थ (Transverse) स्तूप: वायु की दिशा के समकोण (90°) पर निर्मित होने वाले स्थायी स्तूप (बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनू)।
- तारा बालुका स्तूप (Star Dunes): अनियमित व बहुदिशात्मक वायु प्रवाह से निर्मित तारे की आकृति वाले स्तूप। प्रमुख केंद्र: मोहनगढ़ व पोकरण (जैसलमेर) तथा सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर)।
- सब्र काफीज (Shrub-coppice): मरुस्थलीय झाड़ियों व वनस्पति के सहारे बनने वाले छोटे आकार के स्तूप।
- बालुका स्तूप मुक्त प्रदेश (लगभग 41.5% - 40%):
- यह पोकरण (जैसलमेर), फलोदी तथा बाड़मेर के मध्य स्थित चट्टानी (हम्मादा) व कंकड़युक्त (रेग) मरुस्थल है।
- लाठी सीरीज (Lathi Series): जैसलमेर में पोकरण से मोहनगढ़ तक लगभग 60-70 किमी लंबी भूगर्भीय मीठे जल की पट्टी। इसे 'थार का नखलिस्तान' (Oasis) कहा जाता है। यहाँ अत्यंत पौष्टिक सेवण घास (वानस्पतिक नाम: Lasiurus sindicus) प्रचुर मात्रा में उगती है, जो गोडावण पक्षी की शरणस्थली है।
- चांदन नलकूप: लाठी सीरीज क्षेत्र में स्थित मीठे जल का स्रोत, जिसे 'थार का घड़ा' कहा जाता है।
- आकल वुड फॉसिल पार्क (Akal Wood Fossil Park): जैसलमेर में स्थित राष्ट्रीय मरु उद्यान का भाग, जहाँ जुरासिक काल (लगभग 18 करोड़ वर्ष पूर्व) के 25 से अधिक काष्ठ जीवाश्म संरक्षित हैं।
(B) अर्ध-शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश / राजस्थान बांगर (25 से 50 सेमी वर्षा)
यह 25 सेमी और 50 सेमी समवर्षा रेखाओं के मध्य स्थित संक्रमणकालीन मैदान है। इसके चार प्रमुख भौतिक उप-भाग हैं:
- 1. घग्घर का मैदान: उत्तर में श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों में घग्घर नदी द्वारा निर्मित उपजाऊ मैदान। घग्घर नदी के प्रवाह क्षेत्र को स्थानीय भाषा में 'नाली' या 'पाट' कहते हैं। यहाँ की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी को 'काठी / बग्गी' कहा जाता है।
- 2. शेखावाटी अंतःप्रवाही प्रदेश: सीकर, झुंझुनू एवं चूरू क्षेत्र, जहाँ कांतली नदी का अंतःप्रवाह बेसिन (तंवरवाटी) विस्तृत है। यहाँ कच्चे/पक्के कुओं को 'जोहड़' तथा वर्षा जल संचयन के छोटे तालाबों को 'सर' या 'नाड़ा' कहते हैं।
- 3. नागौरी उच्चभूमि: नागौर, डीडवाना-कुचामन का क्षेत्र, जहाँ खारे पानी की झीलों (डीडवाना, नावां, कुचामन) की बहुलता है।
• कुबड़ पट्टी / बांका पट्टी: नागौर व अजमेर जिलों के मध्य स्थित वह क्षेत्र जहाँ के भूजल में फ्लोराइड (Fluoride) की अत्यधिक सांद्रता है, जिसके निरंतर सेवन से ग्रामीणों में कूबड़पन, दाँत पीले होना एवं हड्डियों की विकृति पाई जाती है। - 4. लूनी-गोडवाड़ बेसिन: लूनी एवं उसकी सहायक नदियों (जवाई, बांडी, सूकड़ी) का अपवाह क्षेत्र। जालौर, पाली, बालोतरा व बाड़मेर में लूनी नदी के दलदली बाढ़-मैदान को 'नेहड़ / रेल / नाडा' कहा जाता है। यहाँ जालौर में 56 की पहाड़ियाँ एवं नाकोड़ा पर्वत (गोलाकार ग्रेनाइट पहाड़ियाँ) स्थित हैं।
🔍 महत्वपूर्ण मरुस्थलीय शब्दावली:
• पलाया (Playa): बालुका स्तूपों के मध्य स्थित निम्नभूमि में वर्षा जल भरने से बनने वाली अस्थायी खारे पानी की झीलें (उदा. जैसलमेर में खड़ीन व्यवस्था)।
• रन / टाट (Rann / Tat): पलाया झीलों के सूखने के बाद बना दलदली व लवणीय समतल मैदान (उदा. थोब रन - बाड़मेर, बाप रन - फलोदी, पोकरण रन - जैसलमेर)।
• बालसन (Bolson): चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ मरुस्थलीय मैदान जिसका ढाल केंद्र की ओर होता है।
• मरु प्रसार (Desert March): मरुस्थल का आगे बढ़ना; जैसलमेर का नाचना गाँव मरु प्रसार के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।
4. प्रदेश 2: अरावली पर्वतीय प्रदेश (Aravalli Range)
अरावली विश्व की प्राचीनतम वलित (Folded) पर्वतमाला है, जो वर्तमान में अत्यधिक अपरदन के कारण एक अवशिष्ट (Residual) पर्वत के रूप में विद्यमान है। इसका निर्माण प्री-कैम्ब्रियन भूगर्भिक कल्प (Pre-Cambrian Era) में हुआ था।
विस्तार, दिशा एवं संरचना
- कुल विस्तार: दक्षिण-पश्चिम में पालनपुर (गुजरात) के खेड़ब्रह्म से उत्तर-पूर्व में रायसीना हिल्स (नई दिल्ली - राष्ट्रपति भवन) तक कुल 692 किमी।
- राजस्थान में विस्तार: सिरोही (खेड़ब्रह्म सीमा) से खेतड़ी (झुंझुनू) तक कुल 550 किमी (लगभग 80%)।
- विस्तार की दिशा: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व (SW to NE)। दक्षिण-पश्चिम में यह अधिक चौड़ी व ऊँची है, जबकि उत्तर-पूर्व की ओर यह संकरी व कटी-फटी होती जाती है।
- जलवायु एवं जल विभाजक: अरावली राजस्थान की महान भारतीय जल विभाजक रेखा (Great Indian Water Divide) है, जो अरब सागरीय अपवाह तंत्र को बंगाल की खाड़ी के अपवाह तंत्र से अलग करती है। यह 50 सेमी समवर्षा रेखा के समानांतर है।
अरावली का त्रि-स्तरीय प्रादेशिक विभाजन
| अरावली खंड | विस्तार क्षेत्र (जिले) | प्रमुख विशेषताएँ | सर्वोच्च शिखर एवं प्रमुख चोटियाँ |
|---|---|---|---|
| 1. उत्तरी अरावली | अलवर, जयपुर, दौसा, सीकर, झुंझुनू, कोटपूतली | कटी-फटी पहाड़ियाँ, निम्न ऊँचाई, क्वार्टजाइट चट्टानें | • रघुनाथगढ़ (सीकर - 1055 मी.) — उत्तरी अरावली का सर्वोच्च शिखर • खो (जयपुर - 920 मी.) • भैराच (अलवर - 792 मी.) • बरवाड़ा (जयपुर - 786 मी.) • बैराठ (कोटपूतली-जयपुर - 704 मी.) |
| 2. मध्य अरावली | अजमेर, ब्यावर, केकड़ी सीमा | सर्वाधिक संकीर्ण एवं कम ऊँचाई वाला भाग, दर्रों (नाल) की बहुलता | • टॉडगढ़ / मोरामजी / गौरमजी (ब्यावर - 933/934 मी.) — मध्य अरावली का सर्वोच्च शिखर • तारागढ़ (अजमेर - 873 मी.) • नाग पहाड़ (अजमेर - 795 मी. - लूनी नदी का उद्गम स्थल) • प्रमुख दर्रे: बर दर्रा, परवेरिया, शिवपुरा घाट, सूरा घाट |
| 3. दक्षिणी अरावली | सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, सलूंबर, डूंगरपुर | सर्वाधिक ऊँचाई, सघन वन, उच्चतम चोटियाँ एवं प्रमुख पठार | • गुरुशिखर (सिरोही - 1722 मी.) — राजस्थान व मध्य भारत का सर्वोच्च शिखर • सेर (सिरोही - 1597 मी.) • दिलवाड़ा (सिरोही - 1442 मी.) • जरगा (उदयपुर - 1431 मी.) • अचलगढ़ (सिरोही - 1380 मी.) • कुंभलगढ़ (राजसमंद - 1224 मी.) |
अरावली के प्रमुख पठार (Important Plateaus)
- उड़िया का पठार (Uriya Plateau): सिरोही (माउंट आबू) में स्थित, ऊँचाई 1360 मीटर। यह राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार है, जो गुरुशिखर के ठीक नीचे स्थित है।
- आबू का पठार (Abu Plateau): सिरोही में स्थित, ऊँचाई 1200 मीटर। यह राज्य का दूसरा सबसे ऊँचा पठार (बैथोलिथ गुंबदाकार आकृति) है।
- भोराट का पठार (Bhorat Plateau): गोगुंदा (उदयपुर) से कुंभलगढ़ (राजसमंद) के मध्य विस्तृत पठारी भाग।
- मेसा का पठार (Mesa Plateau): चित्तौड़गढ़ में स्थित, ऊँचाई 620 मीटर। इसी पठार पर ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग (गंभीरी व बेड़च नदियों के संगम पर) निर्मित है।
- लसाड़िया का पठार (Lasadiya Plateau): सलूंबर/उदयपुर में जयसमंद झील के पूर्व में स्थित अत्यधिक कटा-फटा व उबड़-खाबड़ पठार।
- ऊपरमाल का पठार (Uparmal Plateau): भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) से बिजौलिया (भीलवाड़ा) के मध्य स्थित पथरीला पठारी भूभाग।
- भोमट का पठार (Bhomat Plateau): सिरोही, उदयपुर एवं डूंगरपुर का आदिवासी बाहुल्य पर्वतीय क्षेत्र।
- देशहरो (Desh-haro): उदयपुर में जरगा और रागा पहाड़ियों के मध्य वर्षभर हरा-भरा रहने वाला क्षेत्र।
🎯 अरावली की शीर्ष 7 चोटियों का अवरोही क्रम (Super Shortcut Trick):
"गुरु से दिल जरा अचलगढ़ रखो"
1. गुरुशिखर (1722 मी., सिरोही) > 2. सेर (1597 मी., सिरोही) > 3. दिलवाड़ा (1442 मी., सिरोही) > 4. जरगा (1431 मी., उदयपुर) > 5. अचलगढ़ (1380 मी., सिरोही) > 6. कुंभलगढ़ (1224 मी., राजसमंद) > 7. रघुनाथगढ़ (1055 मी., सीकर)
5. प्रदेश 3: पूर्वी मैदानी भाग (Eastern Plains)
पूर्वी मैदानी भाग नदियों (चंबल, बनास, बाणगंगा, माही) द्वारा लाई गई उपजाऊ जलोढ़ मृदा से निर्मित है। यह राज्य का कृषि की दृष्टि से सर्वाधिक सम्पन्न एवं सर्वाधिक जनघनत्व वाला प्रदेश है।
- क्षेत्रफल व जनसंख्या: राज्य के 23.30% भूभाग पर राज्य की लगभग 39% जनसंख्या निवास करती है।
- मृदा: अत्यधिक उपजाऊ कछारी / जलोढ़ / दोमट मृदा (Alfisols)।
- उप-विभाजन: पूर्वी मैदान को तीन प्रमुख नदी बेसिनों में बाँटा गया है:
(A) चंबल बेसिन (Chambal Basin)
- कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली एवं धौलपुर जिलों में विस्तृत।
- अवनालिका अपरदन (Gully Erosion): तीव्र जल प्रवाह के कारण चंबल नदी द्वारा मिट्टी का अत्यधिक कटाव किया जाता है, जिससे गहरी खाइयाँ व बीहड़ बनते हैं।
- बीहड़ भूमि / डांग क्षेत्र (Badland Topography): चंबल घाटी में स्थित बीहड़युक्त उत्खात भूमि। धौलपुर एवं करौली को 'डांग की रानी' तथा सवाई माधोपुर को बीहड़ क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
(B) बनास-बाणगंगा बेसिन (Banas-Banganga Basin)
- बनास एवं उसकी सहायक नदियों (खारी, कोठारी, बेड़च, मोरेल, बाणगंगा) द्वारा निर्मित अत्यंत उपजाऊ मैदान।
- पीडमांट का मैदान (Piedmont Plain): देवगढ़ (राजसमंद) के समीप स्थित पृथक टीलेनुमा अवशिष्ट भूभाग।
- मालपुरा-करौली का मैदान: टोंक, सवाई माधोपुर व करौली में बनास बेसिन का उत्तरी-पूर्वी समतल भाग।
- खेराड़ प्रदेश: भीलवाड़ा के जहाजपुर एवं टोंक क्षेत्र में बनास नदी का बेसिन।
- यह क्षेत्र राज्य का मुख्य सरसों, गेहूँ एवं दलहन उत्पादक केंद्र है।
(C) माही बेसिन / छप्पन का मैदान (Mahi Basin / Chhappan Plain)
- प्रतापगढ़, बांसवाड़ा एवं डूंगरपुर (दक्षिणी राजस्थान - वागड़ क्षेत्र) में माही एवं उसकी सहायक नदियों (सोम, जाखम, अनास) द्वारा निर्मित मैदान।
- छप्पन का मैदान: प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा के मध्य 56 गाँवों एवं 56 नदी-नालों के समूह से निर्मित उपजाऊ भूभाग।
- कांठल का मैदान (Kanthal Plain): प्रतापगढ़ में माही नदी के तटवर्ती (किनारे के) भाग को 'कांठल' कहा जाता है (इसी कारण माही को कांठल की गंगा भी कहते हैं)।
6. प्रदेश 4: दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग / हाड़ौती का पठार (Hadoti Plateau)
यह प्रदेश भारत के प्रायद्वीपीय पठार (दक्कन के पठार एवं विंध्याचल पर्वत श्रेणी) का ही उत्तरी-पश्चिमी भाग है। इसका निर्माण क्रिटेशियस काल में ज्वालामुखी दरारी उद्भेदन से निकले बेसाल्टिक लावा के जमने से हुआ है।
- क्षेत्रफल व जनसंख्या: राज्य के 6.89% (लगभग 7%) क्षेत्रफल पर लगभग 11% जनसंख्या निवास करती है।
- विस्तार: मुख्य रूप से 4 जिले — कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ (हाड़ौती क्षेत्र)।
- मृदा: अत्यधिक उपजाऊ मध्यम काली / रेगुर मृदा (Vertisols), जिसमें जल धारण की क्षमता सर्वाधिक होती है। यह मृदा सोयाबीन, संतरा, अफीम, धनिया, लहसुन एवं कपास की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
- झालावाड़: सर्वाधिक संतरा उत्पादन के कारण इसे 'राजस्थान का नागपुर' कहा जाता है। यह राज्य का सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला जिला (औसत ~100 सेमी) है।
हाड़ौती पठार के दो प्रमुख भू-आकृतिक उप-विभाग
- विंध्यन कगार भूमि (Vindhyan Scarplands): बलुआ पत्थरों (Sandstone) एवं चूना पत्थरों से निर्मित खड़ी कगारदार पहाड़ियाँ, जो चंबल व बनास के मध्य धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी व कोटा में विस्तृत हैं।
- दक्कन का लावा पठार (Deccan Lava Plateau): बेसाल्ट लावा चट्टानों की क्षैतिज परतों से निर्मित उपजाऊ पथरीला व पठारी मैदान (मालवा पठार का विस्तार)।
हाड़ौती की विशिष्ट भौगोलिक संरचनाएं
- मुकुंदरा की पहाड़ियाँ (Mukundra Hills): कोटा एवं झालावाड़ के मध्य विस्तृत अर्धचंद्राकार (Crescent-shaped) पहाड़ियाँ। इस क्षेत्र का सर्वोच्च शिखर चांदबाड़ी (517 मीटर, झालावाड़) है। यहाँ मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान व टाइगर रिजर्व स्थित है।
- रामगढ़ क्रेटर (Ramgarh Meteorite Crater, बारां): उल्कापिंड के गिरने से निर्मित लगभग 3.2 किमी व्यास वाली गर्त संरचना। यह घोड़े की नाल (Horse-shoe) जैसी आकृति वाली पहाड़ियों से घिरी है। इसे भारत का तीसरा एवं राजस्थान का पहला अधिसूचित भू-विरासत स्थल (Geo-Heritage Site) घोषित किया गया है।
- कुंडल की पहाड़ियाँ: कोटा व उसके आसपास के क्षेत्र में कुंडल के आकार की गोलाकार पहाड़ियाँ।
- महान सीमा भ्रंश (Great Boundary Fault - GBF): अरावली पर्वतमाला एवं विंध्याचल पर्वतमाला के संधि-स्थल (जंक्शन) पर स्थित एक विशाल भू-गर्भिक भ्रंश रेखा। इसका विस्तार चित्तौड़गढ़ (बेगूँ), बूंदी, सवाई माधोपुर से धौलपुर तक लगभग 300 किमी लंबाई में फैला है।
7. प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रमुख Exam Traps & तथ्य
- ⚠️ Trap 1 (अवशेष भ्रम): पश्चिमी मरुस्थल एवं पूर्वी मैदान = टेथिस सागर के अवशेष हैं, जबकि अरावली पर्वतमाला एवं हाड़ौती का पठार = गोंडवाना लैंड के अवशेष हैं।
- ⚠️ Trap 2 (कर्क रेखा बनाम गुरुशिखर): कर्क रेखा राज्य के सबसे दक्षिणी जिले बांसवाड़ा से गुजरती है, जबकि राज्य का सर्वोच्च शिखर गुरुशिखर सिरोही (माउंट आबू) में स्थित है।
- ⚠️ Trap 3 (जलवायु विभाजक): राजस्थान में 50 सेमी समवर्षा रेखा अरावली के समानांतर गुजरती है और राज्य को शुष्क पश्चिमी व आर्द्र पूर्वी भागों में बाँटती है। मरुस्थल को दो भागों (शुष्क व अर्ध-शुष्क) में 25 सेमी समवर्षा रेखा विभाजित करती है।
- ⚠️ Trap 4 (पठार तुलना): राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार उड़िया का पठार (1360 मी.) है, जबकि सबसे ऊँचा दुर्ग पठार मेसा का पठार (चित्तौड़गढ़ - 620 मी.) है। भोराट का पठार कुंभलगढ़ और गोगुंदा के मध्य स्थित है।
- ⚠️ Trap 5 (उत्तरी अरावली सर्वोच्च शिखर): उत्तरी अरावली का सर्वोच्च शिखर रघुनाथगढ़ (1055 मी., सीकर) है। राज्य का सर्वोच्च शिखर गुरुशिखर (1722 मी., सिरोही) दक्षिणी अरावली में है।
- ⚠️ Trap 6 (नखलिस्तान): थार का नखलिस्तान लाठी सीरीज (पोकरण-मोहनगढ़) को तथा थार का घड़ा चांदन नलकूप को कहा जाता है।
8. विगत वर्षों के महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs)
Q1. राजस्थान के भौतिक प्रदेशों का क्षेत्रफल की दृष्टि से सही अवरोही क्रम (घटता क्रम) कौन-सा है? [RAS Pre 2021 / RPSC]
उत्तर: उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल (61.11%) > पूर्वी मैदान (23.30%) > अरावली पर्वतीय प्रदेश (9.00%) > दक्षिण-पूर्वी हाड़ौती पठार (6.89%)।
Q2. राजस्थान में 'महान सीमा भ्रंश' (Great Boundary Fault) किन पर्वत श्रेणियों के मध्य स्थित है? [RPSC 1st Grade / 2022]
उत्तर: अरावली पर्वतमाला और विंध्याचल पर्वतमाला के मिलन क्षेत्र पर (चित्तौड़गढ़, बूंदी, सवाई माधोपुर व धौलपुर)।
Q3. 'भोराट का पठार' किन दो स्थानों के मध्य विस्तृत है? [RSMSSB Patwari / CET]
उत्तर: कुंभलगढ़ (राजसमंद) और गोगुंदा (उदयपुर) के मध्य स्थित पठारी भाग।
Q4. अर्धचंद्राकार बालुका स्तूपों को क्या कहा जाता है जो मरु प्रसार हेतु सर्वाधिक उत्तरदायी हैं? [RSMSSB VDO]
उत्तर: बरखान (Barchan) बालुका स्तूप।
Q5. 'लाठी सीरीज' क्या है और यह किस जिले में स्थित है? [RPSC RAS Pre]
उत्तर: जैसलमेर जिले में पोकरण से मोहनगढ़ के मध्य स्थित 60 किमी लंबी भूगर्भीय मीठे जल की पट्टी (थार का नखलिस्तान), जहाँ सेवण घास पाई जाती है।
9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. राजस्थान को सर्वप्रथम भौतिक प्रदेशों में किसने विभाजित किया था?
उत्तर: प्रो. वी. सी. मिश्र ने 1968 में अपनी पुस्तक 'राजस्थान का भूगोल' (National Book Trust) में राजस्थान को 7 भौतिक प्रदेशों में विभाजित किया था। वर्तमान में डॉ. हरीमोहन सक्सेना व डॉ. रामलोचन सिंह का 4 भौतिक प्रदेशों का वर्गीकरण सर्वमान्य है।
Q2. राजस्थान की कुबड़ पट्टी (बांका पट्टी) कहाँ स्थित है और इसका क्या कारण है?
उत्तर: यह नागौर और अजमेर जिलों के मध्य विस्तृत है। यहाँ के भूजल में फ्लोराइड की अत्यधिक मात्रा होने के कारण नागरिकों में हड्डियों व दाँतों की विकृति (कूबड़पन) की समस्या उत्पन्न होती है।
Q3. छप्पन का मैदान और 56 की पहाड़ियाँ में क्या अंतर है?
उत्तर: छप्पन का मैदान दक्षिणी राजस्थान में प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा के मध्य माही बेसिन में स्थित 56 नदी-नालों/गाँवों का उपजाऊ मैदान है; जबकि 56 की पहाड़ियाँ बालोतरा व बाड़मेर जिले में सिवाना क्षेत्र में स्थित गोलाकार ग्रेनाइट पहाड़ियाँ (नाकोड़ा पर्वत) हैं।
Q4. रामगढ़ क्रेटर किस जिले में है और इसकी क्या विशेषता है?
उत्तर: रामगढ़ क्रेटर बारां जिले में स्थित है। यह लाखों वर्ष पूर्व उल्कापिंड के टकराने से निर्मित संरचना है, जिसे जियो-हेरिटेज साइट का दर्जा प्राप्त है।
10. संबंधित अध्ययन नोट्स एवं अभ्यास लिंक
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. राजस्थान के भौतिक प्रदेशों का क्षेत्रफल की दृष्टि से सही अवरोही क्रम (घटता क्रम) कौन-सा है?
RAS Pre 2021Q2. भूगर्भिक दृष्टि से राजस्थान का कौन-सा भौतिक प्रदेश प्राचीन गोंडवाना लैंड का भाग है?
RPSC 1st Grade 2022Q3. राजस्थान में 'महान सीमा भ्रंश' (Great Boundary Fault) किन पर्वत श्रेणियों के मध्य स्थित है?
RPSC 2nd Grade 2023Q4. अरावली पर्वतमाला की राजस्थान में कुल लंबाई कितनी है?
RSMSSB CET 2024Q5. 'भोराट का पठार' राजस्थान के किन दो स्थानों के मध्य स्थित है?
Patwari 2021Q6. राजस्थान में अर्धचंद्राकार बालुका स्तूप, जो मरु प्रसार (Desert March) हेतु सर्वाधिक उत्तरदायी हैं, क्या कहलाते हैं?
RSMSSB VDO 2022Q7. राजस्थान में 'लाठी सीरीज' क्या है?
RPSC RAS Pre 2023Q8. राजस्थान की 'कुबड़ पट्टी' (बांका पट्टी) किन जिलों के मध्य विस्तृत है?
RSMSSB CET 2023Q9. उत्तरी अरावली की सर्वोच्च पर्वत चोटी निम्नलिखित में से कौन-सी है?
RPSC 2nd Grade 2022Q10. 'छप्पन का मैदान' राजस्थान के किस नदी बेसिन में स्थित है?
REET 2022Q11. उल्कापिंड के प्रभाव से निर्मित प्रसिद्ध 'रामगढ़ क्रेटर' राजस्थान के किस जिले में स्थित है?
RPSC RAS 2024Q12. राजस्थान के किस भौतिक प्रदेश में सर्वाधिक जनघनत्व एवं उपजाऊ जलोढ़ (कछारी) मृदा पाई जाती है?
RSMSSB Patwari 2021महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
राजस्थान के चार प्रमुख भौतिक प्रदेश हैं: 1. उत्तर-पश्चिमी रेतीला मरुस्थल (61.11%), 2. अरावली पर्वतीय प्रदेश (9.00%), 3. पूर्वी मैदानी भाग (23.30%), तथा 4. दक्षिण-पूर्वी हाड़ौती का पठार (6.89%)।
अरावली पर्वतमाला एवं हाड़ौती का पठार प्राचीन गोंडवाना लैंड (प्रायद्वीपीय भारत) के अवशेष हैं, जबकि उत्तर-पश्चिमी थार मरुस्थल एवं पूर्वी मैदानी भाग टेथिस सागर के अवशेष हैं।
25 सेमी समवर्षा रेखा थार मरुस्थल को दो उप-भागों — शुष्क रेतीला मरुस्थल (0-25 सेमी वर्षा) तथा अर्ध-शुष्क राजस्थान बांगर (25-50 सेमी वर्षा) में विभाजित करती है। अरावली के समानांतर 50 सेमी समवर्षा रेखा गुजरती है।
पैराबोलिक स्तूप राजस्थान में संख्या की दृष्टि से सर्वाधिक पाए जाने वाले स्तूप हैं (हेयरपिन आकृति)। बरखान अर्धचंद्राकार, गतिशील एवं सर्वाधिक विनाशकारी बालुका स्तूप होते हैं, जो मरु प्रसार (डेजर्ट मार्च) के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं।
लाठी सीरीज जैसलमेर में पोकरण से मोहनगढ़ तक विस्तृत लगभग 60-70 किमी लंबी भूगर्भीय मीठे जल की पट्टी है (थार का नखलिस्तान)। यहाँ उगने वाली सेवण घास (Lasiurus sindicus) अत्यधिक पौष्टिक मरु घास है जो राज्य पक्षी गोडावण की शरणस्थली है।
कुबड़ पट्टी नागौर एवं अजमेर जिलों के मध्य विस्तृत है। यहाँ के भूजल में फ्लोराइड (Fluoride) की अत्यधिक सांद्रता होने के कारण नागरिकों में कूबड़पन एवं हड्डियों की विकृति की समस्या पाई जाती है।
अरावली पर्वतमाला का कुल विस्तार गुजरात से दिल्ली तक 692 किमी है, जिसमें से 550 किमी (लगभग 80%) राजस्थान में है। इसका सर्वोच्च शिखर गुरुशिखर (1722 मीटर, माउंट आबू, सिरोही) है।
छप्पन का मैदान दक्षिणी राजस्थान में प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा के मध्य माही बेसिन में स्थित 56 नदी-नालों/गाँवों का उपजाऊ मैदान है; जबकि 56 की पहाड़ियाँ बालोतरा व बाड़मेर में सिवाना क्षेत्र में स्थित गोलाकार ग्रेनाइट पहाड़ियाँ हैं।
यह अरावली पर्वतमाला और विंध्याचल पर्वतमाला के मिलन स्थल पर स्थित एक विशाल भू-गर्भिक भ्रंश रेखा है, जो चित्तौड़गढ़, बूंदी, सवाई माधोपुर से धौलपुर तक लगभग 300 किमी लंबाई में विस्तृत है।
हाड़ौती पठार में बेसाल्ट लावा से निर्मित उपजाऊ मध्यम काली (वर्टिसोल / रेगुर) मृदा पाई जाती है, जो सोयाबीन, संतरा, धनिया, अफीम, लहसुन एवं कपास की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
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