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राजस्थान भूगोल

राजस्थान के ऊर्जा संसाधन: परम्परागत, नवीकरणीय, प्रमुख परियोजनाएं, नीतियाँ एवं कल्याणकारी योजनाएँ (Complete Master-Notes)

योगेश जांगिड़ (संस्थापक)
26 मई 2026
7 मिनट पठन
राजस्थान के ऊर्जा संसाधन: परम्परागत, नवीकरणीय, प्रमुख परियोजनाएं, नीतियाँ एवं कल्याणकारी योजनाएँ (Complete Master-Notes)

परिचय: राजस्थान के ऊर्जा परिदृश्य का वैचारिक विरोधाभास

ऊर्जा किसी भी राज्य के औद्योगिक, कृषि और सामाजिक विकास की रीढ़ होती है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संपूर्ण भारत में सौर ऊर्जा (Solar Energy) की सर्वाधिक व्यावसायिक संभावना राजस्थान में है, जो लगभग 142 गीगावाट (1,42,000 मेगावाट) आंकी गई है। इसके साथ ही पवन ऊर्जा में भी राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शुमार है। परंतु, इस असीमित हरित क्षमता के बावजूद एक बड़ा विरोधाभास यह है कि वर्तमान में भी राज्य की लगभग 78-79 प्रतिशत बिजली का उत्पादन गैर-नवीकरणीय स्रोतों यानी कोयले और गैस (तापीय ऊर्जा) से होता है।

यही वैचारिक और आर्थिक विरोधाभास राजस्थान के ऊर्जा भूगोल की असली कहानी है, और RPSC (RAS Pre/Mains, स्कूल व्याख्याता, सब-इंस्पेक्टर) और RSMSSB (CET, पटवारी, वीडियो, कनिष्ठ सहायक) जैसी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में इसी खंड से सीधे कूट और कथन आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। इस विस्तृत मास्टर-नोट्स में हम जलीय, तापीय, सौर, पवन, परमाणु और बायोमास ऊर्जा परियोजनाओं, उनके नवीन जिला विन्यास, क्षमता और सरकारी योजनाओं का प्रामाणिक व शोध-आधारित विश्लेषण करेंगे।

A. ऊर्जा संसाधनों का तकनीकी वर्गीकरण (Classification of Energy)

प्रतियोगी परीक्षाओं में ऊर्जा के वर्गीकरण को लेकर दो अलग-अलग आधारों पर भ्रम पैदा किया जाता है: उपलब्धता / नवीकरणीयता के आधार पर और पारंपरिकता के आधार पर

1. उपलब्धता एवं प्रकृति के आधार पर

  • नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable / Green Energy): ऊर्जा के वे अजैविक स्रोत जो प्रकृति में असीमित हैं और जिनके दोहन से पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता। जैसे— सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत (जलीय ऊर्जा), बायोमास, बायोगैस, भू-तापीय ऊर्जा और ज्वारीय ऊर्जा।
  • अनवीकरणीय ऊर्जा (Non-Renewable Energy): ऊर्जा के वे सीमित प्राकृतिक स्रोत जिनका एक बार उपभोग करने के बाद उन्हें दोबारा निर्मित होने में लाखों वर्ष लगते हैं और जो कार्बन उत्सर्जन का मुख्य कारण हैं। जैसे— तापीय ऊर्जा (कोयला, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम) और परमाणु ऊर्जा (यूरेनियम व थोरियम)।

2. ऐतिहासिक उपयोग (उत्पादन) के आधार पर

  • परम्परागत ऊर्जा (Conventional): वे स्रोत जिनका उपयोग मानव सदियों से व्यावसायिक रूप से बिजली या ऊष्मा के लिए करता आ रहा है। जैसे— कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और जलीय ऊर्जा (Hydro Power)(नोट: जलीय ऊर्जा नवीकरणीय होते हुए भी पारंपरिक श्रेणी में आती है, यह परीक्षाओं का एक मुख्य कूट है)
  • गैर-परम्परागत ऊर्जा (Non-Conventional): वे आधुनिक और वैकल्पिक स्रोत जिनका तकनीकी विकास हालिया दशकों में पर्यावरण संरक्षण के लिए किया गया है। जैसे— सौर, पवन, परमाणु, बायोमास और बायोगैस।

⚙️ ऊर्जा स्टेशनों के तकनीकी प्रकार (Technical Definitions)

  • सुपर थर्मल पावर स्टेशन: जिस तापीय ऊर्जा केंद्र की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता 1000 मेगावाट (MW) या उससे अधिक होती है।
  • सुपर क्रिटिकल थर्मल स्टेशन: जिस थर्मल प्लांट में प्रयुक्त तकनीक पानी के क्रिटिकल दबाव बिंदु (22.1 MPa से ऊपर) पर कार्य करती है, जिससे ईंधन की बचत और उच्च दक्षता मिलती है। सामान्यतः इसकी एक इकाई की क्षमता 500 MW या 660 MW या उससे अधिक होती है।
  • अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (UMPP): केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार जिस एकल पावर स्टेशन की कुल उत्पादन क्षमता 4000 MW या उससे अधिक निर्धारित होती है।

B. राजस्थान के प्रमुख परम्परागत ऊर्जा प्रोजेक्ट (Conventional Energy Hubs)

1. जलीय ऊर्जा परियोजनाएं (Hydro Power Projects)

जलीय ऊर्जा परियोजनाओं को तीन श्रेणियों में विभाजित करके पढ़ा जाता है: पूर्ण स्वामित्व वाली लघु परियोजनाएं, अंतर-राजकीय संयुक्त परियोजनाएं, और केंद्रीय आवंटन

(a) राजस्थान सरकार के पूर्ण स्वामित्व के लघु जल विद्युत प्रोजेक्ट

  • जाखम लघु जल विद्युत परियोजना (प्रतापगढ़): जाखम बांध पर स्थित इस परियोजना की कुल क्षमता 5.4 MW है, जो स्थानीय स्तर पर जनजातीय विकास में सहायक है।
  • अनास जल विद्युत परियोजना (बांसवाड़ा): अनास नदी पर निर्मित इस बांध परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 140 MW निर्धारित है।
  • इन्दिरा गाँधी नहर लघु जल विद्युत परियोजना: आईजीएनपी की विभिन्न शाखाओं और फॉल्स (प्रपातों) पर गंगानगर और बीकानेर जिलों में छोटे संयंत्र लगाए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 23.85 MW है।

(b) अंतर-राजकीय संयुक्त जलीय परियोजनाएं (Inter-State Joint Ventures)

यह RPSC परीक्षाओं का सबसे पसंदीदा कूट मिलान सेक्शन है, जहाँ राज्यों के हिस्से प्रतिशत और मेगावाट में पूछे जाते हैं:

  1. माही बजाज सागर जल विद्युत परियोजना:
    • साझेदारी कूट: राजस्थान और गुजरात का संयुक्त उपक्रम है। दोनों राज्यों के मध्य वित्तीय और जल निवेश का अनुपात 45:55 है।
    • विद्युत आवंटन का अनूठा नियम: यद्यपि जल में गुजरात की हिस्सेदारी अधिक है, परंतु इस परियोजना से उत्पादित होने वाली 100% बिजली (कुल 140 MW) केवल और केवल राजस्थान को मिलती है। इस बिजली का वितरण मुख्य रूप से दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में किया जाता है। इसका प्रथम चरण 1986 (2 X 25 = 50MW) और द्वितीय चरण 1989 (2 X 45 = 90 MW) में शुरू हुआ था।
  2. चम्बल जल विद्युत परियोजना:
    • साझेदारी कूट: राजस्थान और मध्य प्रदेश का समान 50:50 का संयुक्त उपक्रम है।
    • कुल उत्पादन: चम्बल नदी पर निर्मित तीन मुख्य बांधों के पावर स्टेशनों से कुल 386 MW बिजली का उत्पादन होता है, जिसमें से राजस्थान को 193 MW और मध्य प्रदेश को 193 MW प्राप्त होती है।
    • चरण-वार बाँधों की क्षमता:
      • प्रथम चरण: गांधी सागर बांध (मप्र) – 5 X 23 = 115 MW
      • द्वितीय चरण: राणा प्रताप सागर बांध (रावतभाटा, चित्तौड़गढ़) – 4 X 43 = 193 MW (यह राजस्थान का सबसे बड़ा जलीय ऊर्जा उत्पादक बांध है)
      • तृतीय चरण: जवाहर सागर बांध (कोटा)– 3 X 33 = 99 MW।
  3. भाखड़ा-नांगल जल विद्युत परियोजना:
    • साझेदारी कूट: पंजाब, हरियाणा और राजस्थान का संयुक्त उपक्रम।
    • कुल क्षमता: 1493 MW।
    • राजस्थान की हिस्सेदारी: राजस्थान का हिस्सा इसमें 15.2 प्रतिशत है, जो लगभग 227 MW बिजली के रूप में राज्य को मिलता है।
  4. व्यास जल विद्युत परियोजना:
    • साझेदारी कूट: पंजाब, हरियाणा और राजस्थान। इसमें हिमाचल प्रदेश में स्थित पोंग बांध (50%) और पंडोह बांध (20%) मुख्य स्रोत हैं।
    • राजस्थान को कुल आवंटन: इस परियोजना से राजस्थान को 422 MW बिजली प्राप्त होती है।
  • प्रस्तावित नवीन परियोजना: चम्बल नदी पर करौली के निकट राहुघाट परियोजना प्रस्तावित है, जो राजस्थान और मध्य प्रदेश की 50:50 की संयुक्त योजना है, जिसकी क्षमता 79 MW आंकी गई है।

2. तापीय ऊर्जा परियोजनाएं (Thermal Power Projects)

तापीय ऊर्जा (Thermal Power) वर्तमान में राजस्थान में बिजली आपूर्ति का सबसे बड़ा आधार है। इसमें मुख्य रूप से लिग्नाइट कोयला और प्राकृतिक गैस का उपयोग किया जाता है।

(a) राजस्थान सरकार के स्वामित्व वाले थर्मल पावर प्लांट्स

  • सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट (श्रीगंगानगर): * यह वर्ष 2002 में स्थापित राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर प्लांट था।
    • वर्तमान में यह राजस्थान की सबसे बड़ी ताप विद्युत परियोजना है।
    • इसकी कुल स्थापित क्षमता 2820 MW है, जो 8 विभिन्न इकाइयों (Units) में विभाजित है। इसमें पहली 6 इकाइयाँ 250-250 MW की पारंपरिक (Sub-critical) हैं, जबकि यूनिट 7 और यूनिट 8 660-660 MW की आधुनिक सुपर क्रिटिकल इकाइयाँ हैं।
  • कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (कोटा):
    • यह 1983 में स्थापित राजस्थान का पहला कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट है।
    • यह राज्य की दूसरी सबसे बड़ी तापीय परियोजना है, जिसकी 5 चरणों की 7 इकाइयों से कुल उत्पादन क्षमता 1240 MW है। चम्बल नदी के किनारे होने के कारण इसे पानी की निर्बाध आपूर्ति मिलती है।
  • छबड़ा सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट (बारां):
    • इसकी कुल स्थापित उत्पादन क्षमता 2320 MW है।
    • यह तकनीकी रूप से राजस्थान की पहली सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना मानी जाती है, जिसकी अंतिम इकाइयाँ 660-660 MW की क्षमता पर कार्य करती हैं।
  • कवाई सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट (बारां):
    • इसकी कुल उत्पादन क्षमता 1320 MW है (2 x 660 MW)। यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर अडानी ग्रुप (Adani Group) के सहयोग से संचालित एक अत्याधुनिक सुपर क्रिटिकल प्लांट है।
  • कालीसिंध क्रिटिकल पावर प्लांट (झालावाड़):
    • वर्तमान स्थापित क्षमता 1200 MW है। राज्य सरकार ने इसके विस्तार के लिए यहाँ 800 MW का एक और अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल पावर प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया है।
  • लिग्नाइट कोयला आधारित विशिष्ट बाड़मेर कारखाने:
    • बाड़मेर के जालीपा-कपूरड़ी और भादरेस क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले लिग्नाइट कोयले पर आधारित दो बड़े प्लांट हैं: भादरेस सुपर पावर प्लांट (1080 MW) और कपूरड़ी-जालीपा सुपर थर्मल प्लांट (1080 MW)। इसके अतिरिक्त जर्मनी के तकनीकी सहयोग से थुम्बली में गिरल थर्मल पावर प्लांट (250 MW) स्थापित किया गया था, जो अपनी अनूठी गैसीकरण तकनीक के लिए जाना जाता है।
  • बरसिंहसर थर्मल पावर प्लांट (बीकानेर):
    • स्थापित क्षमता 250 MW (125 MW X 2)। यह लिग्नाइट आधारित कारखाना केंद्र सरकार के उपक्रम नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन (NLC) द्वारा संचालित किया जाता है। बीकानेर के गुरहा में एक और ऐसा प्लांट प्रस्तावित है।

(b) गैस एवं तरल ईंधन (नेफ्था) आधारित विद्युत गृह

  • अंता गैस विद्युत परियोजना (बारां): इसकी कुल क्षमता 419.3 MW है। विशेष तथ्य: यह 1389 में स्थापित राजस्थान की पहली गैस आधारित विद्युत परियोजना है, जिसका प्रशासनिक संचालन केंद्रीय उपक्रम NTPC द्वारा किया जाता है।
  • धौलपुर कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट (धौलपुर): स्थापित क्षमता 702.7 MW है। यह गैस और नेफ्था (तरल ईंधन) दोनों पर आधारित राज्य सरकार का सबसे आधुनिक गैस पावर प्लांट है।

C. गैर-परम्परागत एवं नवीकरणीय ऊर्जा (Non-Conventional Energy)

1. परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power Projects)

  • राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन (RAPS – रावतभाटा, चित्तौड़गढ़): यह दिसंबर 1973 में स्थापित संपूर्ण भारत का दूसरा और राजस्थान का पहला परमाणु ऊर्जा केंद्र है। इसके विकास में कनाडा सरकार ने वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान किया था।
  • संस्थागत संचालन: इसका प्रबंधन और सुरक्षा नियंत्रण केंद्रीय उपक्रम नाभिकीय ऊर्जा निगम (NPCIL – Nuclear Power Corporation of India Limited) के अधीन है।
  • क्षमता विश्लेषण: वर्तमान में यहाँ 6 इकाइयाँ क्रियान्वित हैं। पहली इकाई (100 MW) तकनीकी रूप से स्थायी रूप से बंद कर दी गई है, अतः शेष 5 इकाइयों की सक्रिय स्थापित क्षमता 1080 MW है।
  • विस्तार योजना: रावतभाटा में 700-700 MW की दो नई भारी जल इकाइयाँ (यूनिट 7 व 8) स्थापित की जा रही हैं, जिनमें से प्रथम यूनिट का सफल परीक्षण संपन्न हो चुका है।
  • दूसरा परमाणु विद्युत गृह (बांसवाड़ा – प्रस्तावित): माही बजाज सागर के बैकवाटर बेल्ट के पास बांसवाड़ा के माही बांध क्षेत्र में राजस्थान का दूसरा परमाणु ऊर्जा स्टेशन प्रस्तावित किया गया है, जहाँ 700-700 MW की 4 इकाइयाँ लगाकर कुल 2800 MW क्षमता विकसित की जाएगी।

2. सौर ऊर्जा (Solar Energy – द ग्रीन रिवॉल्यूशन)

भौगोलिक अवस्थिति के कारण राजस्थान सौर ऊर्जा के लिए विश्व का सबसे उपयुक्त स्थल है। इसके मुख्य कारणों में— उच्च सौर विकिरण तीव्रता, वर्ष में औसतन 325 से अधिक दिन पूर्णतः साफ और कड़क धूप का रहना, और थार मरुस्थल के रूप में प्रचुर मात्रा में बंजर भूमि की उपलब्धता शामिल है।

(A) सोलर पार्क निर्माण योजना (Solar Parks in Rajasthan)

राज्य सरकार और क्लिंटन फाउंडेशन के मध्य 2010 में हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद मरुस्थलीय जिलों में विशाल सोलर पार्कों का निर्माण शुरू हुआ:

  1. भड़ला सोलर पार्क (फलोदी – नवीन जिला):
    • यह वर्तमान में राजस्थान और विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा पार्कों में से एक है।
    • इसकी कुल स्थापित उत्पादन क्षमता 2245 MW है।
    • इसे चार चरणों (Phases) में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर विकसित किया गया है:
      • प्रथम चरण (65 MW) व द्वितीय चरण (680 MW): राजस्थान सोलर पार्क डेवलपमेंट कंपनी (RSDCL) द्वारा।
      • तृतीय चरण (1000 MW): IL&FS और राज्य सरकार के संयुक्त उपक्रम द्वारा।
      • चतुर्थ चरण (500 MW): अडानी ग्रुप और राज्य सरकार की संयुक्त कंपनी द्वारा।
  2. नोख सोलर पार्क (जैसलमेर): भड़ला के बाद जैसलमेर के नोख में 925 MW का विशाल सोलर पार्क विकसित किया गया है।
  3. पूँगल सोलर पार्क (बीकानेर): यह वर्तमान में निर्माणाधीन और प्रस्तावित पार्कों में सबसे बड़ा है, जहाँ राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम द्वारा कुल 4000 MW की सौर और हाइब्रिड क्षमता विकसित की जा रही है।
  • प्रथम निजी सौर प्रोजेक्ट: रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा नागौर के खींवसर में राज्य का पहला निजी क्षेत्र का सोलर प्लांट शुरू किया गया था। जैसलमेर के धूड़सर में भी रिलायंस का बड़ा प्लांट कार्यरत है।

(B) SEEZ (Solar Energy Enterprises Zone)

RPSC परीक्षाओं में अक्सर ‘सीज’ का पूरा नाम और इसके जिले पूछे जाते हैं। राजस्थान के पश्चिमी भाग में सौर ऊर्जा की सर्वाधिक तीव्रता वाले क्षेत्र को SEEZ (सौर ऊर्जा उपक्रम ज़ोन) घोषित किया गया है, जिसके अंतर्गत मुख्य रूप से तीन मरुस्थलीय जिले आते हैं— जोधपुर, बाड़मेर, और जैसलमेर

(C) सोलर सिटी का विकास

सौर ऊर्जा को शहरी नागरिक जीवन से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत तीन शहरों को ‘सोलर सिटी’ के रूप में विकसित किया जा रहा है— जयपुर, जोधपुर, और अजमेर। इसके अतिरिक्त पूर्णतः सौर संचालित धार्मिक केंद्रों के रूप में पुष्कर (अजमेर) और जैसलमेर शहर को विशेष मॉडल सोलर सिटी बनाया जा रहा है।

3. पवन ऊर्जा (Wind Energy)

  • उत्पादन क्षमता: राजस्थान की कुल पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता 150 मीटर की ऊंचाई पर लगभग 284 गीगावाट (GW) आंकी गई है, जो देश में सर्वाधिक संभावना को दर्शाती है।
  • सर्वाधिक संभावना वाला जिला: थार मरुस्थल की तीव्र और निरंतर चलने वाली हवाओं के कारण जैसलमेर जिला को ‘पवन ऊर्जा का गढ़’ कहा जाता है।

📊 प्रमुख पवन ऊर्जा संयंत्र (Wind Energy Farms)

पवन ऊर्जा संयंत्रसंबद्ध जिलापरीक्षा केंद्रित विशिष्टता व महत्व
अमर सागर संयंत्रजैसलमेर1999 में स्थापित राजस्थान का प्रथम पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट (राजकीय स्वामित्व)।
देवगढ़ संयंत्रप्रतापगढ़चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ हिल्स पर स्थित राज्य का दूसरा बड़ा पवन ऊर्जा केंद्र।
बीठड़ी संयंत्रफलोदी (नवीन जिला)जोधपुर-फलोदी बेल्ट में स्थापित राज्य की तीसरी बड़ी पवन ऊर्जा परियोजना।
बड़ा बाग पार्कजैसलमेरमेसर्स कालानी इंडस्ट्रीज द्वारा स्थापित निजी क्षेत्र का प्रथम पवन ऊर्जा पार्क
कोडियासर संयंत्रजैसलमेरभारतीय रेलवे (Indian Railways) द्वारा अपने स्वयं के उपभोग के लिए स्थापित पहला पवन ऊर्जा प्लांट।

4. बायोमास एवं बायोगैस ऊर्जा (Biomass & Biogas)

  • बायोमास ऊर्जा (Biomass): इसका मुख्य कच्चा माल सरसों की तूड़ी (सरसों का डंठल), विलायती बबूल (जूलीफ्लोरा) और चावल की भूसी है। कृषि प्रधान होने के कारण इसकी सर्वाधिक संभावना श्रीगंगानगर जिले में है। वर्ष 2003 में पदमपुर (गंगानगर) में राज्य का पहला बायोमास एनर्जी प्लांट लगाया गया था। इसके अन्य प्रमुख कारखाने खातोली (टोंक), रंगपुर (कोटा) और सांचौर (जालौर) में स्थित हैं।
  • बायोगैस ऊर्जा (Biogas): यह मुख्य रूप से पशुओं के गोबर और जैविक कचरे पर आधारित है, जिसकी ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वाधिक संभावना उदयपुर जिले में पाई जाती है। बायोगैस के रासायनिक संगठन में मुख्य रूप से मीथेन (CH4 – 65%) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2 – 30%) गैसें होती हैं।

D. ऊर्जा संसाधन संबंधी प्रमुख संगठन एवं नीतियाँ

1. RREC (राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड)

  • स्थापना: इसकी स्थापना 9 अगस्त 2002 को की गई थी।
  • विलय विन्यास: राज्य में गैर-पारंपरिक ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली दो पुरानी संस्थाओं — REDA (राजस्थान ऊर्जा विकास अभिकरण – स्थापना 1985) और RSPCL (राजस्थान राज्य पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड – स्थापना 1995) — को आपस में मिलाकर RREC का गठन किया गया।
  • सहयोगी कंपनी: बड़े सोलर पार्कों के भूमि आवंटन और विकास के लिए इसकी एक सहायक कंपनी RSDCL (राजस्थान सोलरपार्क डेवलपमेंट कंपनी) का गठन 2 नवंबर 2011 को जयपुर में किया गया।

🆕 नवीनतम नीति अपडेट: राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति – 2024

  • घोषणा तिथि: 9 सितम्बर 2024 को राज्य सरकार द्वारा इस ऐतिहासिक नीति को मंजूरी दी गई।
  • मूल उद्देश्य: इस नीति के तहत पुरानी सौर ऊर्जा नीति 2019, पवन ऊर्जा नीति 2019 और बायोमास नीति 2023 के प्रावधानों को एक स्थान पर एकीकृत (Integrate) कर दिया गया है।
  • रणनीतिक विज़न: भारत सरकार के वर्ष 2030 तक राष्ट्रीय स्तर पर 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के वैश्विक लक्ष्य में राजस्थान को देश का सबसे बड़ा और प्राथमिक योगदानकर्ता बनाना इस नीति का मुख्य विज़न है। इसके तहत हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) उत्पादन को भी विशेष वित्तीय रियायतें दी गई हैं।

E. ऊर्जा संबंधित प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes)

1. कुसुम योजना (KUSUM Scheme)

  • पूरा नाम: किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान योजना।
  • प्रारंभ तिथि: 8 मार्च 2019 को केंद्र सरकार द्वारा घोषित।
  • घटक संरचना (Components Data):
    • घटक-A: किसानों की बंजर भूमि पर 0.5 MW से 2 MW क्षमता के विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र लगाना (इसका संचालन RREC द्वारा किया जाता है)। विशेष तथ्य: इस योजना के तहत पूरे भारत में पहला सौर ऊर्जा संयंत्र भालोजी गाँव (कोटपुतली-बहरोड़ जिला, पूर्व में जयपुर) में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया था।
    • घटक-B: ग्रिड से दूर स्थित क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई के लिए 7.5 HP तक के स्टैंडअलोन सौर ऊर्जा पंप सेट (Solar Pumps) वितरित करना, जिसमें 60% तक की भारी राजकीय सब्सिडी दी जाती है।
    • घटक-C (फीडर लेवल सोलराइजेशन): इसके तहत पारंपरिक कृषि बिजली फीडरों का पूर्ण रूप से सौरीकरण करना शामिल है ताकि किसानों को दिन के समय निर्बाध बिजली मिल सके।

2. मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना (घरेलू व कृषि अनुदान)

  • घरेलू उपभोक्ता रियायत: राज्य के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए प्रति माह 100 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है। 200 यूनिट तक उपभोग करने वाले परिवारों को पहले 100 यूनिट के बिल के समस्त फिक्स चार्ज और टैक्स में पूर्ण छूट दी जाती है।
  • कृषि उपभोक्ता योजना: पूर्व में संचालित ‘मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना 2021’ (जिसमें ₹1000 प्रति माह अनुदान मिलता था) को समाहित करके अब कृषि उपभोक्ताओं को प्रति माह 2000 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान की जा रही है, जिससे राज्य के लाखों किसानों का बिजली बिल शून्य हो चुका है।

3. PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (2024–2026)

  • प्रारंभ तिथि: 13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित।
  • वित्तीय बजट: ₹75,000 करोड़ के राष्ट्रीय विन्यास के साथ क्रियान्वित।
  • उद्देश्य: देश के 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित करना ताकि प्रत्येक परिवार को 300 यूनिट प्रति माह मुफ्त बिजली मिल सके और अतिरिक्त बिजली को वे डिस्कॉम को बेचकर आय कमा सकें।
  • सब्सिडी / वित्तीय सहायता संरचना:
    • 1 KW क्षमता के प्लांट पर: ₹30,000 की केंद्रीय सब्सिडी
    • 2 KW क्षमता के प्लांट पर: ₹60,000 की केंद्रीय सब्सिडी
    • 3 KW या उससे अधिक क्षमता पर: ₹78,000 की अधिकतम केंद्रीय सब्सिडी
  • राजस्थान का लक्ष्य: इस योजना के तहत राजस्थान सरकार ने राज्य के 5 लाख घरों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

📝 विगत वर्षों के महत्वपूर्ण प्रश्न (Exam-Targeted PYQs with Explanations)

यहाँ RPSC और RSMSSB परीक्षाओं के पिछले 15 वर्षों के 25 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के पूर्ण प्रामाणिक उत्तर और विश्लेषणात्मक व्याख्याएँ दी जा रही हैं:

Q1. राजस्थान का पहला तापीय विद्युत संयंत्र कौनसा है और कहाँ स्थित है? (RAS Pre 2018)

  • उत्तर: कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन। यह कोटा में चम्बल नदी के किनारे स्थित है, जिसकी स्थापना वर्ष 1983 में की गई थी। यह राज्य का पहला कोयला आधारित पारंपरिक पावर प्लांट है।

Q2. सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन किस जिले में है और इसकी कुल उत्पादन क्षमता कितनी है? (RPSC 2nd Grade 2022)

  • उत्तर: यह श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ कस्बे में स्थित है। वर्तमान में इसकी कुल स्थापित उत्पादन क्षमता 2820 MW है, जो इसे राजस्थान का सबसे बड़ा चालू बिजली उत्पादक प्लांट बनाती है।

Q3. राजस्थान की पहली गैस आधारित विद्युत परियोजना कौनसी है? (Gram Sevak 2022)

  • उत्तर: अंता गैस विद्युत परियोजना (बारां)। इसकी स्थापना वर्ष 1389 में केंद्रीय उपक्रम NTPC द्वारा की गई थी, जिसकी कुल स्थापित क्षमता 419.3 MW है।

Q4. छबड़ा सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट किस जिले में है और यह किस विशेषता के लिए जाना जाता है? (2nd Grade 2022)

  • उत्तर: यह बारां जिले में स्थित है। यह तकनीकी रूप से राजस्थान की पहली सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना है, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता 2320 MW है।

Q5. चम्बल जल विद्युत परियोजना से राजस्थान और मध्यप्रदेश को किस अनुपात में ऊर्जा मिलती है? (Patwari 2021)

  • उत्तर: 50:50 के समान अनुपात में। इस परियोजना की कुल क्षमता 386 MW है, जिसमें से दोनों राज्यों को 193-193 MW बिजली प्राप्त होती है।

Q6. माही बजाज सागर जल विद्युत परियोजना में राजस्थान और गुजरात की हिस्सेदारी क्या है? (RAS Pre 2019)

  • उत्तर: जल और वित्तीय निवेश में हिस्सेदारी का अनुपात 45:55 (राजस्थान:गुजरात) है, परंतु इससे उत्पादित होने वाली 100% बिजली (140 MW) केवल राजस्थान को मिलती है

Q7. भाखड़ा-नांगल परियोजना में राजस्थान की हिस्सेदारी कितनी है? (Gram Sevak 2021)

  • उत्तर: इस संयुक्त परियोजना में राजस्थान की कुल हिस्सेदारी 15.2 प्रतिशत निर्धारित है, जो राज्य को लगभग 227 MW बिजली के रूप में मिलती है।

Q8. राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन कहाँ स्थित है और इसकी शुरुआत कब हुई? (RAS Pre 2016)

  • उत्तर: यह रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) में स्थित है। इसकी शुरुआत दिसंबर 1973 में कनाडा सरकार के तकनीकी सहयोग से भारत के दूसरे परमाणु केंद्र के रूप में हुई थी।

Q9. रावतभाटा परमाणु ऊर्जा केंद्र की कुल इकाइयाँ और वर्तमान सक्रिय क्षमता कितनी है? (RAS Pre 2021)

  • उत्तर: यहाँ कुल 6 इकाइयाँ हैं, परंतु पहली इकाई (100 MW) के स्थायी रूप से बंद होने के कारण वर्तमान सक्रिय स्थापित क्षमता 1080 MW है।

Q10. राजस्थान का दूसरा प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा विद्युत गृह कहाँ होगा? (SI 2023)

  • उत्तर: यह दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के माही बांध क्षेत्र में प्रस्तावित है, जहाँ 700-700 MW की 4 इकाइयाँ (कुल 2800 MW) लगाई जाएंगी।

Q11. भड़ला सोलर पार्क किस जिले में है और इसकी वर्तमान क्षमता कितनी है? (Patwari 2023)

  • उत्तर: प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद भड़ला सोलर पार्क अब नए गठित जिले पवन फलोदी (Phalodi) के अंतर्गत आता है। इसकी वर्तमान कुल क्रियाशील क्षमता 2245 MW है, जो इसे विश्व का अग्रणी सोलर हब बनाती है।

Q12. राजस्थान में सौर ऊर्जा की सर्वाधिक सम्भावना किस जिले में है और कुल क्षमता कितनी है? (Patwari 2021)

  • उत्तर: सौर ऊर्जा की सर्वाधिक भौगोलिक संभावना जोधपुर और फलोदी बेल्ट में है। भारत सरकार के अनुसार राजस्थान की कुल सौर क्षमता 142 गीगावाट (1,42,000 MW) आंकी गई है।

Q13. SEEZ का पूरा नाम क्या है और इसमें कौन-से जिले शामिल हैं? (RAS Pre 2020)

  • उत्तर: SEEZ का पूरा नाम Solar Energy Enterprises Zone (सौर ऊर्जा उपक्रम ज़ोन) है। इसमें मुख्य रूप से तीन मरुस्थलीय जिले शामिल हैं— जोधपुर, बाड़मेर, और जैसलमेर

Q14. राजस्थान की नवीनतम सौर ऊर्जा नीति कब जारी हुई और 2024-25 का लक्ष्य क्या है? (RAS Mains 2021)

  • उत्तर: यह नीति 18 दिसंबर 2019 को जारी की गई थी, जिसका लक्ष्य वर्ष 2024-25 तक राज्य में 30,000 MW सौर ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित करना निर्धारित किया गया था।

Q15. निजी क्षेत्र की पहली सौर परियोजना राजस्थान में कहाँ और किसने शुरू की? (2nd Grade 2023)

  • उत्तर: यह निजी परियोजना रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा नागौर जिले के खींवसर कस्बे में सफलतापूर्वक शुरू की गई थी।

Q16. राजस्थान में पवन ऊर्जा की सर्वाधिक सम्भावना किस जिले में है और पहला संयंत्र कहाँ था? (SI 2021)

  • उत्तर: सर्वाधिक संभावना जैसलमेर जिले में है। राज्य का पहला राजकीय पवन ऊर्जा संयंत्र वर्ष 1399 में अमर सागर (जैसलमेर) में स्थापित किया गया था।

Q17. राजस्थान में पवन ऊर्जा की कुल उत्पादन क्षमता कितनी है (150 मी. ऊँचाई पर)? (RAS Mains 2022)

  • उत्तर: राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान के नवीनतम मापदंडों के अनुसार 150 मीटर की ऊंचाई पर राजस्थान की कुल पवन क्षमता लगभग 284 गीगावाट (GW) आंकी गई है।

Q18. बड़ा बाग पवन ऊर्जा पार्क कहाँ है और क्यों उल्लेखनीय है? (SI 2022)

  • उत्तर: यह जैसलमेर में स्थित है। यह इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि यह मेसर्स कालानी इंडस्ट्रीज द्वारा स्थापित निजी क्षेत्र का पहला पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट था।

Q19. कोडियासर पवन ऊर्जा संयंत्र किस कारण विशेष रूप से जाना जाता है? (Gram Sevak 2023)

  • उत्तर: जैसलमेर का कोडियासर प्लांट इसलिए विशेष है क्योंकि यह भारतीय रेलवे (Indian Railways) द्वारा अपने स्वयं के ट्रेनों के संचालन और ग्रिड आपूर्ति के लिए स्थापित पहला स्वतंत्र पवन ऊर्जा संयंत्र है।

Q20. RREC की स्थापना कब और किन दो संस्थाओं को मिलाकर हुई? (RAS Mains 2020)

  • उत्तर: RREC (राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम) की स्थापना 9 अगस्त 2002 को हुई थी। इसे REDA (स्थापना 1985) और RSPCL (स्थापना 1995) नामक दो संस्थाओं को आपस में मिलाकर गठित किया गया था।

Q21. KUSUM योजना का पूरा नाम, प्रारम्भ तिथि और लक्ष्य क्या है? (Patwari 2023)

  • उत्तर: पूरा नाम किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान है, जो 8 मार्च 2019 को शुरू हुई थी। इसका मुख्य लक्ष्य किसानों के पंपों का सौरीकरण कर देश में 34,800 MW की विकेंद्रीकृत सौर क्षमता विकसित करना है।

Q22. उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) कब शुरू हुई और इसका उद्देश्य क्या है? (RAS Pre 2019)

  • उत्तर: यह योजना केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 5 नवंबर 2015 को शुरू की गई थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य घाटे में चल रही बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति में सुधार कर उन्हें कर्ज से मुक्त करना है।

Q23. जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सोलर मिशन कब शुरू हुआ और इसका लक्ष्य क्या था? (Patwari 2022)

  • उत्तर: यह मिशन जनवरी 2010 में शुरू किया गया था, जिसका राष्ट्रीय लक्ष्य वर्ष 2022 तक भारत में 1 लाख मेगावाट (100 GW) ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करना था।

Q24. PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना कब शुरू हुई और इसका बजट व लक्ष्य क्या है? (Patwari 2024)

  • उत्तर: यह योजना 13 फरवरी 2024 को शुरू हुई। इसका राष्ट्रीय बजट ₹75,000 करोड़ है और लक्ष्य देश के 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप लगाकर प्रत्येक परिवार को 300 यूनिट प्रति माह मुफ्त बिजली देना है।

Q25. राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024 कब जारी हुई और इसका उद्देश्य क्या है? (RAS Pre 2025)

  • उत्तर: यह नीति 9 सितंबर 2024 को जारी की गई। इसका मुख्य उद्देश्य सौर, पवन, बायोमास और हरित हाइड्रोजन की अलग-अलग नीतियों के प्रावधानों को एकीकृत कर भारत के 500 GW के राष्ट्रीय लक्ष्य में राजस्थान को शीर्ष स्थान पर लाना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)

Q1. भड़ला सोलर पार्क प्रशासनिक दृष्टि से वर्तमान में किस जिले के अंतर्गत आता है और इसकी कुल क्षमता कितनी है?

उत्तर: राजस्थान के जिलों के गठन के बाद विश्व प्रसिद्ध भड़ला सोलर पार्क अब जोधपुर के स्थान पर नए गठित जिले फलोदी (Phalodi) के प्रशासनिक नियंत्रण में आता है। इसकी कुल वर्तमान स्थापित क्षमता 2245 MW है।

Q2. राजस्थान की पहली गैस आधारित विद्युत परियोजना कौनसी है और इसका संचालन कौन करता है?

उत्तर: राज्य की पहली गैस विद्युत परियोजना अंता गैस पावर प्लांट (बारां) है, जिसकी स्थापना वर्ष 1389 में हुई थी। इसका पूर्ण स्वामित्व और संचालन केंद्रीय उपक्रम NTPC द्वारा किया जाता है।

Q3. ‘कुसुम योजना’ (KUSUM) के तहत भारत का पहला सौर ऊर्जा संयंत्र राजस्थान में कहाँ स्थापित किया गया था?

उत्तर: कुसुम योजना के घटक-A के तहत संपूर्ण भारत का पहला सौर ऊर्जा संयंत

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