राजस्थान में पशुधन एवं पशुपालन: नस्लें, योजनाएँ एवं वर्तमान परिदृश्य — सम्पूर्ण मास्टर गाइड

प्रस्तावना
राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ-साथ पशुपालन का भी अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है, विशेषकर राज्य के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जहाँ कृषि पर निर्भरता सीमित है और पशुपालन ग्रामीण आजीविका का प्रमुख आधार है। राजस्थान देश के उन राज्यों में शामिल है जहाँ पशुधन की विविधता एवं गुणवत्ता (नस्ल की दृष्टि से) सर्वोत्तम मानी जाती है — यहाँ की गाय, भेड़, बकरी, ऊंट एवं घोड़े की नस्लें राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं। RPSC RAS, RSMSSB, पटवारी, ग्राम सेवक तथा REET जैसी परीक्षाओं में पशुधन गणना के आँकड़े, प्रमुख नस्लें एवं वर्तमान सरकारी योजनाएँ नियमित रूप से पूछी जाती हैं।
संक्षिप्त उत्तर (Quick Answer): 20वीं पशुधन गणना (2019) के अनुसार राजस्थान में कुल पशुधन 5.68 करोड़ (56.8 मिलियन) है, जो देश में पशुधन संख्या की दृष्टि से दूसरे स्थान पर है। राजस्थान बकरी, ऊंट एवं गधों की संख्या में देश में पहले स्थान पर है। वर्ष 2024-25 के बजट में राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती कामधेनु बीमा योजना के स्थान पर मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना प्रारंभ की है।
राजस्थान की पशुधन अर्थव्यवस्था में भूमिका
पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी 20वीं पशुधन गणना रिपोर्ट के अनुसार 2012 की पशुगणना की तुलना में 2019 में देश का कुल पशुधन 535.78 मिलियन है, जो कि गत पशुगणना की तुलना में 4.6 प्रतिशत अधिक है। राजस्थान में वर्ष 2021-22 में प्रचलित मूल्यों पर पशुधन क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन 1.56 लाख करोड़ अनुमानित है, तथा राज्य में पशुधन क्षेत्र से होने वाली आय में दूध, अण्डे और मांस का प्रमुख योगदान है। यह दर्शाता है कि पशुपालन राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ वर्षा-आधारित कृषि अनिश्चित है।
20वीं पशुधन गणना (2019): प्रमुख आँकड़े
20वीं पशुगणना के अनुसार राजस्थान में कुल पशुधन 56.8 मिलियन है, जो 2012 में 57.7 मिलियन था — अर्थात 2019 में कुल पशुओं की संख्या में लगभग 1.66% की कमी दर्ज की गई। यह गिरावट राष्ट्रीय स्तर पर देखे गए सामान्य रुझान से अलग है, जहाँ अधिकांश राज्यों में पशुधन संख्या में वृद्धि दर्ज हुई थी।
प्रजाति-वार राजस्थान की राष्ट्रीय स्थिति
- बकरी: सर्वाधिक बकरियां राजस्थान में पाई जाती हैं — देश में इस श्रेणी में राजस्थान प्रथम स्थान पर है।
- ऊंट: सर्वाधिक ऊंट राजस्थान राज्य में पाए जाते हैं।
- गधे: सर्वाधिक गधे राजस्थान राज्य में पाए जाते हैं। हालांकि उल्लेखनीय है कि राजस्थान में गधों की संख्या 2012 के 0.81 मिलियन की तुलना में 2019 में घटकर 0.23 मिलियन रह गई — अर्थात लगभग 71% की भारी कमी दर्ज हुई, फिर भी राज्य इस श्रेणी में देश में पहले स्थान पर बना रहा।
- घोड़े/टट्टू: राजस्थान 2012 के 0.38 मिलियन की तुलना में 2019 में 0.34 मिलियन घोड़ों के साथ देश में तीसरे स्थान पर रहा — इस श्रेणी में भी लगभग 11% की कमी दर्ज हुई।
सत्यापन सलाह: पशुधन गणना प्रत्येक 5 वर्ष में आयोजित होती है और 21वीं पशुधन गणना के आँकड़े जारी होने पर उपरोक्त सभी आँकड़े संशोधित हो सकते हैं। कृपया पशुपालन विभाग, राजस्थान सरकार तथा पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्रालय (भारत सरकार) की नवीनतम रिपोर्ट से क्रॉस-चेक करें।
राजस्थान की प्रमुख पशु नस्लें
गोवंश (Cattle) की प्रमुख नस्लें
| नस्ल | मुख्य क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| राठी (Rathi) | गंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़ | दुधारू नस्ल, अच्छी दूध उत्पादन क्षमता |
| थारपारकर (Tharparkar) | जैसलमेर, बाड़मेर | दोहरे उपयोग (दूध + श्रम) की नस्ल, सफेद/धूसर रंग |
| नागौरी (Nagauri) | नागौर | श्रमशील बैल हेतु प्रसिद्ध, तीव्र गति के लिए जानी जाती है |
| कांकरेज (Kankrej) | जालौर, बाड़मेर (गुजरात सीमा क्षेत्र) | मजबूत बैल, कृषि कार्य हेतु उपयुक्त |
| मालवी (Malvi) | कोटा, झालावाड़ | हाड़ौती क्षेत्र की स्थानीय नस्ल |
भेड़ (Sheep) की प्रमुख नस्लें
- मारवाड़ी: पश्चिमी राजस्थान में सर्वाधिक प्रचलित, ऊन उत्पादन हेतु प्रसिद्ध।
- मगरा: बीकानेर-चूरू क्षेत्र, उच्च गुणवत्ता की ऊन।
- चोकला: शेखावाटी क्षेत्र (चूरू-झुंझुनू), बारीक एवं गुणवत्तायुक्त ऊन हेतु प्रसिद्ध।
- सोनाड़ी: दक्षिणी राजस्थान (उदयपुर क्षेत्र), मांस-उत्पादन उन्मुख।
- नाली: उत्तरी राजस्थान।
बकरी (Goat) की प्रमुख नस्लें
- मारवाड़ी बकरी: पश्चिमी राजस्थान में सर्वाधिक प्रचलित।
- सिरोही: सिरोही एवं आसपास का क्षेत्र, दूध एवं मांस दोनों हेतु उपयुक्त, राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय नस्ल।
ऊंट (Camel) की प्रमुख नस्लें
- बीकानेरी: बीकानेर क्षेत्र, भार-वहन एवं सवारी दोनों हेतु उपयुक्त।
- जैसलमेरी: जैसलमेर क्षेत्र, तीव्र गति एवं सहनशक्ति हेतु प्रसिद्ध, सेना में उपयोग।
- कच्छी: राजस्थान-गुजरात सीमावर्ती क्षेत्र।
ऊंट: राजस्थान का राज्य पशु एवं इसका संकट
ऊंट को वर्ष 2014 में राजस्थान का राज्य पशु (State Animal) घोषित किया गया था, जो राज्य की मरुस्थलीय संस्कृति, परिवहन-इतिहास तथा पर्यटन पहचान का प्रतीक है। परंतु विडंबनापूर्ण स्थिति यह है कि राज्य में ऊंटों की संख्या निरंतर घट रही है — यांत्रिकीकरण (ट्रैक्टर, वाहन) के बढ़ते उपयोग तथा चारागाह भूमि में कमी के कारण ऊंटपालन एक घटता हुआ पारंपरिक व्यवसाय बनता जा रहा है। इसी चुनौती को देखते हुए राज्य सरकार ने विधानसभा में "ऊंट संरक्षण विकास मिशन" आरंभ करने की घोषणा की, जिसके अंतर्गत पशुपालकों को प्रतिवर्ष ₹20,000 की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
बीकानेर स्थित राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (National Research Centre on Camel – NRCC) ऊंट प्रजनन, स्वास्थ्य एवं संरक्षण संबंधी अनुसंधान का देश का प्रमुख संस्थान है।
प्रमुख पशु मेले
राजस्थान में पशु मेलों की एक समृद्ध एवं सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा है, जो न केवल पशु व्यापार का केंद्र हैं बल्कि लोक-देवताओं की स्मृति, धार्मिक आस्था एवं सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन से भी गहराई से जुड़े हैं। राज्य में वर्षभर में 250 से अधिक छोटे-बड़े पशु मेले आयोजित होते हैं, जिनमें से कुछ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिद्ध हैं। अधिकांश प्रमुख पशु मेले नागौर जिले में आयोजित होते हैं, जिससे नागौर को "राजस्थान के पशु मेलों की राजधानी" जैसा दर्जा प्राप्त है।
पुष्कर पशु मेला (अजमेर)
पुष्कर मेला विश्व-प्रसिद्ध ऊंट मेला है, जो कार्तिक शुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक आयोजित होता है। यह मेला धार्मिक (पुष्कर सरोवर स्नान एवं ब्रह्मा मंदिर दर्शन) एवं पशु-व्यापारिक — दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है, तथा यहाँ ऊंटों के साथ-साथ घोड़े एवं अन्य पशुओं का भी व्यापार होता है। यह मेला अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के आकर्षण का भी प्रमुख केंद्र है।
श्री वीर तेजाजी पशु मेला, परबतसर (नागौर)
यह मेला लोक देवता वीर तेजाजी (जिन्हें गौरक्षक एवं कृषि-कार्यों के लोक देवता के रूप में पूजा जाता है) की स्मृति में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक आयोजित होता है। यह मेला नागौरी बैलों के व्यापार हेतु विशेष रूप से प्रसिद्ध है, और आय/आमदनी की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है।
मल्लीनाथ पशु मेला, तिलवाड़ा (बालोतरा, बाड़मेर)
लूनी नदी के तट पर आयोजित होने वाला यह मेला चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी तक भरता है। इसे राजस्थान का सबसे प्राचीन पशु मेला माना जाता है तथा क्रय-विक्रय (कुल व्यापार मात्रा) की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। परंपरा के अनुसार इस मेले का प्रारंभ मारवाड़ के शासक मोटा राजा उदय सिंह ने करवाया था, और यह संत मल्लीनाथ की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
श्री बलदेव पशु मेला, मेड़ता सिटी (नागौर)
यह मेला चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल पूर्णिमा (अप्रैल माह) तक आयोजित होता है, और इसे किसान नेता बलदेव राम मिर्धा की स्मृति में आयोजित किया जाता है। यह मेला मुख्यतः पशु विक्रय हेतु प्रसिद्ध है।
चंद्रभागा पशु मेला, झालरापाटन (झालावाड़)
यह मेला कार्तिक शुक्ल एकादशी से मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी (नवंबर माह) तक चंद्रभागा नदी के तट पर आयोजित होता है, और धार्मिक स्नान परंपरा के साथ-साथ पशु व्यापार का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
श्री गोमतीसागर पशु मेला, झालरापाटन (झालावाड़)
यह मेला वैशाख शुक्ल त्रयोदशी से ज्येष्ठ कृष्ण पंचमी (मई माह) तक आयोजित होता है — झालावाड़ जिले में यह चंद्रभागा मेले के अतिरिक्त दूसरा प्रमुख पशु मेला है, जिस कारण झालावाड़ जिला भी सर्वाधिक पशु मेलों वाले जिलों में गिना जाता है।
महाशिवरात्रि पशु मेला (करौली)
करौली जिले में महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित होने वाला यह मेला भी क्षेत्रीय स्तर पर पशु व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
तुलनात्मक तालिका: राजस्थान के प्रमुख पशु मेले
| मेले का नाम | स्थान/जिला | आयोजन अवधि | विशेष पहचान |
|---|---|---|---|
| पुष्कर पशु मेला | पुष्कर, अजमेर | कार्तिक शुक्ल एकादशी–पूर्णिमा (नवंबर) | विश्व-प्रसिद्ध ऊंट मेला, धार्मिक+पर्यटन महत्व |
| वीर तेजाजी पशु मेला | परबतसर, नागौर | श्रावण पूर्णिमा–भाद्रपद अमावस्या (अगस्त) | आय की दृष्टि से सबसे बड़ा मेला, नागौरी बैल |
| मल्लीनाथ पशु मेला | तिलवाड़ा, बाड़मेर | चैत्र कृष्ण 11–चैत्र शुक्ल 11 (मार्च-अप्रैल) | सबसे प्राचीन मेला, क्रय-विक्रय में सबसे बड़ा |
| श्री बलदेव पशु मेला | मेड़ता सिटी, नागौर | चैत्र शुक्ल 1–पूर्णिमा (अप्रैल) | बलदेव राम मिर्धा की स्मृति में |
| चंद्रभागा पशु मेला | झालरापाटन, झालावाड़ | कार्तिक शुक्ल एकादशी–मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी (नवंबर) | नदी-तट धार्मिक+पशु मेला |
| गोमतीसागर पशु मेला | झालरापाटन, झालावाड़ | वैशाख शुक्ल त्रयोदशी–ज्येष्ठ कृष्ण पंचमी (मई) | झालावाड़ का दूसरा प्रमुख मेला |
| महाशिवरात्रि पशु मेला | करौली | महाशिवरात्रि (फरवरी-मार्च) | क्षेत्रीय पशु व्यापार केंद्र |
सत्यापन सलाह: राजस्थान में सर्वाधिक पशु मेले आयोजित होने वाले जिलों में नागौर (परबतसर + मेड़ता सिटी सहित 3 प्रमुख मेले) एवं झालावाड़ (चंद्रभागा + गोमतीसागर, 2 मेले) शामिल हैं। सभी मेलों की तिथियाँ हिंदू पंचांग (विक्रम संवत) के अनुसार निर्धारित होती हैं, इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर में इनकी तारीख प्रतिवर्ष बदलती है। सटीक वर्तमान तिथियों तथा मेलों की कुल संख्या (राज्यभर में 250+) हेतु राज्य पशुपालन विभाग एवं राजस्थान पर्यटन विभाग के आधिकारिक वार्षिक कैलेंडर से पुष्टि करें।
वर्तमान सरकारी योजनाएँ (नवीनतम अद्यतन)
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना (2024-25)
राजस्थान राज्य सरकार ने 2024-25 के बजट में मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की शुरुआत की, जिसके तहत सभी पशुपालकों को उनके पशुओं के लिए बीमा दिया जाएगा। यह योजना पूर्ववर्ती सरकार द्वारा संचालित कामधेनु बीमा योजना के स्थान पर लागू की गई है। इस योजना में सरकार ने ₹400 करोड़ रुपए खर्च करके 21 लाख पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें दुधारू गाय-भैंस के लिए 5-5 लाख रुपये तथा ऊंट के लिए 1 लाख रुपए के बीमा की सहायता दी जाएगी।
योजना की मुख्य विशेषताएँ:
- दुधारू गाय एवं भैंस — प्रत्येक हेतु ₹5 लाख तक का बीमा कवरेज
- ऊंट — ₹1 लाख तक का बीमा कवरेज
- भेड़-बकरी — प्रथम चरण में लक्षित समावेशन
- यह योजना उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी द्वारा बजट भाषण के दौरान घोषित की गई थी
सत्यापन सलाह: योजना के नियम, पात्रता-शर्तें एवं बीमा राशि में समय-समय पर संशोधन संभव है — आवेदन से पूर्व राजस्थान पशुपालन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से नवीनतम दिशा-निर्देश अवश्य देखें।
ऊंट संरक्षण विकास मिशन
राज्य में घटती ऊंट जनसंख्या को रोकने हेतु शुरू की गई यह योजना ऊंटपालकों को प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन (₹20,000 प्रतिवर्ष) प्रदान करती है, ताकि यह पारंपरिक पशुपालन व्यवसाय आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे।
तुलनात्मक तालिका: राजस्थान की प्रमुख पशु प्रजातियाँ एवं राष्ट्रीय स्थिति
| पशु प्रजाति | राजस्थान की राष्ट्रीय रैंक (20वीं पशुगणना) | प्रमुख नस्ल | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| बकरी | प्रथम | मारवाड़ी, सिरोही | पश्चिमी एवं दक्षिणी राजस्थान |
| ऊंट | प्रथम | बीकानेरी, जैसलमेरी | बीकानेर, जैसलमेर |
| गधा | प्रथम (संख्या में भारी गिरावट सहित) | — | पश्चिमी राजस्थान |
| घोड़ा/टट्टू | तृतीय | मारवाड़ी घोड़ा | जोधपुर-मारवाड़ क्षेत्र |
| कुल पशुधन | द्वितीय (देश में) | — | सम्पूर्ण राज्य |
🎯 एग्जाम ट्रैप (Exam Trap Section)
- कुल पशुधन में प्रथम समझ लेना: राजस्थान बकरी, ऊंट एवं गधों में देश में प्रथम स्थान पर है, परंतु कुल पशुधन संख्या की दृष्टि से राजस्थान देश में द्वितीय स्थान पर है — इस अंतर को स्पष्ट रूप से याद रखें।
- ऊंट राज्य पशु होने के बावजूद संख्या में वृद्धि समझना: ऊंट राजस्थान का राज्य पशु (2014 से) होते हुए भी इसकी जनसंख्या में निरंतर गिरावट दर्ज हो रही है — इसे "राज्य पशु = बढ़ती संख्या" समझने की भूल न करें।
- कामधेनु बीमा योजना बनाम मंगला पशु बीमा योजना: कामधेनु बीमा योजना पूर्ववर्ती सरकार की योजना थी, जिसे 2024-25 के बजट में मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना से प्रतिस्थापित किया गया — दोनों नामों को परीक्षा में मिलाकर पूछा जा सकता है।
- पुष्कर मेला बनाम नागौर मेला: पुष्कर मेला मुख्यतः ऊंट व्यापार हेतु प्रसिद्ध है, जबकि नागौर मेला मुख्यतः बैलों (नागौरी नस्ल) के व्यापार हेतु प्रसिद्ध है — इन्हें आपस में न बदलें।
- नस्ल-क्षेत्र मेल में भ्रम: मारवाड़ी नस्ल भेड़ और बकरी दोनों में पाई जाती है (अलग-अलग पशु प्रजातियों में समान नाम) — प्रश्न में यह स्पष्ट देखें कि "मारवाड़ी" किस पशु के संदर्भ में पूछा गया है।
- गधों की गिरावट दर को कम आंकना: गधों की संख्या में 2012-2019 के मध्य लगभग 71% की भारी गिरावट दर्ज हुई है, जो सभी पशु प्रजातियों में सर्वाधिक गिरावट दर में से एक है — यह आँकड़ा अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
🧠 मेमोरी ट्रिक (स्मरण तकनीक)
"बकरी-ऊंट-गधा — तीनों में राजस्थान अव्वल है सदा" — बकरी, ऊंट एवं गधा — इन तीन प्रजातियों में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है, यह याद रखने का सरल सूत्र है।
नस्ल-क्षेत्र याद रखने हेतु: "बीकानेरी-जैसलमेरी ऊंट, राठी-नागौरी गाय-बैल, मारवाड़ी-सिरोही बकरी" — नाम में ही क्षेत्र छिपा है (बीकानेर→बीकानेरी, जैसलमेर→जैसलमेरी, नागौर→नागौरी, सिरोही→सिरोही)।
👩🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
"पशुधन खंड में परीक्षक प्रायः दो प्रकार के प्रश्न पूछते हैं — पहला, गणना आँकड़ों पर आधारित (कौन-सी प्रजाति में राजस्थान किस स्थान पर है), और दूसरा, वर्तमान योजनाओं पर आधारित (योजना का नाम, बीमा राशि, लक्ष्य)। चूंकि योजनाओं के नाम एवं प्रावधान सरकार बदलने के साथ बदलते रहते हैं (जैसे कामधेनु → मंगला), विद्यार्थियों को परीक्षा-तिथि के निकटतम नवीनतम योजना का नाम अवश्य अद्यतन रखना चाहिए।"
📝 अभ्यास प्रश्न (PYQ/Practice MCQs)
1. 20वीं पशुधन गणना (2019) के अनुसार राजस्थान में कुल पशुधन कितना है?
A) 57.7 मिलियन B) 56.8 मिलियन C) 53.5 मिलियन D) 60.2 मिलियन
उत्तर: B) 56.8 मिलियन
2. कुल पशुधन संख्या की दृष्टि से राजस्थान देश में किस स्थान पर है?
A) प्रथम B) द्वितीय C) तृतीय D) चतुर्थ
उत्तर: B) द्वितीय
3. बकरियों की संख्या में राजस्थान देश में किस स्थान पर है?
A) प्रथम B) द्वितीय C) तृतीय D) पाँचवें
उत्तर: A) प्रथम
4. ऊंटों की संख्या में राजस्थान देश में किस स्थान पर है?
A) द्वितीय B) प्रथम C) तृतीय D) चतुर्थ
उत्तर: B) प्रथम
5. घोड़े/टट्टू की संख्या में राजस्थान देश में किस स्थान पर है?
A) प्रथम B) द्वितीय C) तृतीय D) पाँचवें
उत्तर: C) तृतीय
6. राजस्थान को राज्य पशु (State Animal) के रूप में ऊंट कब घोषित किया गया?
A) 2010 B) 2014 C) 2019 D) 2005
उत्तर: B) 2014
7. राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (NRCC) कहाँ स्थित है?
A) जैसलमेर B) बीकानेर C) जोधपुर D) बाड़मेर
उत्तर: B) बीकानेर
8. पुष्कर पशु मेला मुख्यतः किस पशु के व्यापार हेतु प्रसिद्ध है?
A) बैल B) ऊंट C) भेड़ D) बकरी
उत्तर: B) ऊंट
9. नागौर पशु मेला मुख्यतः किस पशु/नस्ल के व्यापार हेतु प्रसिद्ध है?
A) ऊंट B) नागौरी बैल C) बकरी D) घोड़ा
उत्तर: B) नागौरी बैल
10. मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना किस वर्ष के बजट में घोषित हुई?
A) 2022-23 B) 2023-24 C) 2024-25 D) 2021-22
उत्तर: C) 2024-25
11. मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के अंतर्गत दुधारू गाय/भैंस हेतु अधिकतम बीमा राशि कितनी है?
A) ₹1 लाख B) ₹3 लाख C) ₹5 लाख D) ₹10 लाख
उत्तर: C) ₹5 लाख
12. मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के अंतर्गत ऊंट हेतु अधिकतम बीमा राशि कितनी है?
A) ₹50,000 B) ₹1 लाख C) ₹2 लाख D) ₹5 लाख
उत्तर: B) ₹1 लाख
13. मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना किस पूर्ववर्ती योजना के स्थान पर शुरू की गई?
A) मुख्यमंत्री कामधेनु बीमा योजना B) पशुधन विकास योजना C) राष्ट्रीय गोकुल मिशन D) श्वेत क्रांति योजना
उत्तर: A) मुख्यमंत्री कामधेनु बीमा योजना
14. ऊंट संरक्षण विकास मिशन के अंतर्गत ऊंटपालकों को प्रतिवर्ष कितनी सहायता राशि दी जाती है?
A) ₹10,000 B) ₹15,000 C) ₹20,000 D) ₹25,000
उत्तर: C) ₹20,000
15. निम्न में से कौन-सी गोवंश नस्ल नागौर क्षेत्र से संबंधित है?
A) राठी B) थारपारकर C) नागौरी D) कांकरेज
उत्तर: C) नागौरी
16. थारपारकर नस्ल मुख्यतः किन जिलों में पाई जाती है?
A) जैसलमेर, बाड़मेर B) कोटा, झालावाड़ C) नागौर, अजमेर D) जयपुर, अलवर
उत्तर: A) जैसलमेर, बाड़मेर
17. चोकला भेड़ नस्ल मुख्यतः किस क्षेत्र से संबंधित है?
A) दक्षिणी राजस्थान B) शेखावाटी क्षेत्र (चूरू-झुंझुनू) C) हाड़ौती क्षेत्र D) मेवाड़ क्षेत्र
उत्तर: B) शेखावाटी क्षेत्र (चूरू-झुंझुनू)
18. सिरोही बकरी नस्ल किस उद्देश्य हेतु उपयुक्त मानी जाती है?
A) केवल दूध B) केवल मांस C) दूध एवं मांस दोनों D) केवल ऊन
उत्तर: C) दूध एवं मांस दोनों
19. 2012 से 2019 के मध्य राजस्थान में गधों की संख्या में लगभग कितनी गिरावट दर्ज हुई?
A) 25% B) 45% C) 71% D) 90%
उत्तर: C) 71%
20. जैसलमेरी ऊंट नस्ल किस विशेषता हेतु प्रसिद्ध है?
A) दूध उत्पादन B) तीव्र गति एवं सहनशक्ति, सैन्य उपयोग C) ऊन उत्पादन D) केवल प्रदर्शनी हेतु
उत्तर: B) तीव्र गति एवं सहनशक्ति, सैन्य उपयोग
बाह्य संदर्भ (External References)
- पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार — 20वीं पशुधन गणना रिपोर्ट: https://dahd.gov.in
- पशुपालन विभाग, राजस्थान सरकार (आधिकारिक पोर्टल): https://animalhusbandry.rajasthan.gov.in
- राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र, बीकानेर: https://nrccamel.icar.gov.in
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
20वीं पशुधन गणना (2019) के अनुसार राजस्थान में कुल पशुधन 56.8 मिलियन (5.68 करोड़) है, जो देश में दूसरे स्थान पर है।
राजस्थान बकरी, ऊंट एवं गधों की संख्या में देश में प्रथम स्थान पर है।
ऊंट को वर्ष 2014 में राजस्थान का राज्य पशु घोषित किया गया था।
यह राजस्थान सरकार की 2024-25 के बजट में घोषित योजना है, जिसके अंतर्गत दुधारू गाय-भैंस हेतु ₹5 लाख तथा ऊंट हेतु ₹1 लाख तक का बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है। यह पूर्ववर्ती कामधेनु बीमा योजना के स्थान पर लागू की गई है।
यांत्रिकीकरण (ट्रैक्टर एवं वाहनों का बढ़ता उपयोग), चारागाह भूमि में कमी तथा पारंपरिक ऊंटपालन व्यवसाय की घटती आर्थिक लाभप्रदता के कारण राज्य में ऊंटों की संख्या निरंतर घट रही है, जिसे रोकने हेतु सरकार ने ऊंट संरक्षण विकास मिशन शुरू किया है।
पुष्कर मेला मुख्यतः ऊंट व्यापार हेतु विश्व-प्रसिद्ध है, जबकि नागौर मेला मुख्यतः नागौरी नस्ल के बैलों के व्यापार हेतु प्रसिद्ध है।
राठी, थारपारकर, नागौरी, कांकरेज तथा मालवी राजस्थान की प्रमुख गोवंश नस्लें हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र बीकानेर में स्थित है, जो ऊंट प्रजनन, स्वास्थ्य एवं संरक्षण संबंधी अनुसंधान का देश का प्रमुख संस्थान है।