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राजस्थान भूगोल

राजस्थान की मीठी व खारी झीलें

महेंद्र ढाका (भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, गणित व बाल विकास-शिक्षाशास्त्र नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
अंतिम समीक्षा:
24 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान भूगोल इकाई। आधिकारिक सिलेबस से विषय-सूची; पुस्तक का शब्दशः पाठ नहीं।

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राजस्थान की मीठी व खारी झीलें

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परिचय: राजस्थान के जल भूगोल में झीलों का रणनीतिक महत्व

भूगोलीय दृष्टिकोण से ‘झील’ (Lake) धरातल के उस विस्तृत स्थिर जल निकाय को कहा जाता है, जो चारों ओर से स्थलीय भूभाग से घिरा होता है। झीलों का निर्माण मुख्य रूप से विवर्तनिक हलचलों (Tectonic Movements), ज्वालामुखी क्रियाओं, उल्कापिंड के प्रपात या नदियों के मार्ग में प्राकृतिक व कृत्रिम अवरोध आने से होता है। राजस्थान जैसे शुष्क और अर्ध-शुष्क राज्य में, जहाँ सतही जल की घोर कमी है, वहाँ प्राचीन राजा-महाराजाओं और आधुनिक योजनाकारों द्वारा निर्मित झीलें केवल दर्शनीय स्थल नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की पेयजल आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था, मत्स्य पालन और पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) का मुख्य आधार स्तंभ हैं।

राजस्थान के जल विन्यास को अरावली पर्वत श्रृंखला दो अमिट भागों में विभाजित करती है। इसी अरावली अक्ष के प्रभाव के कारण राजस्थान की प्राकृतिक झीलों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है— मीठे पानी की झीलें (जो मुख्य रूप से अरावली के पूर्वी और दक्षिणी आर्द्र भागों में संकेंद्रित हैं) तथा खारे पानी की झीलें (जो मुख्य रूप से पश्चिमी थार मरुस्थल के शुष्क भागों में पाई जाती हैं)।

🚨 2026 परीक्षा विशेष नोट (प्रशासनिक पुनर्गठन का प्रभाव): राजस्थान के नए 41 जिलों और 7 संभागों के गठन के बाद राज्य की प्रमुख झीलों की भौगोलिक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। परीक्षाओं में अब नवीन जिलों के कूट ही सही माने जा रहे हैं। उदाहरण के लिए— जयसमंद झील अब उदयपुर से अलग होकर सलूंबर जिले में है; पचपदरा झील अब बाड़मेर से अलग होकर बालोतरा जिले में है; डीडवाना व कुचामन झीलें अब डीडवाना-कुचामन जिले में हैं; फलोदी झील फलोदी जिले में है; तथा देश की सबसे बड़ी आंतरिक नमक झील ‘सांभर’ जयपुर, अजमेर और डीडवाना-कुचामन जिलों में विस्तृत है (2023 में बना जयपुर ग्रामीण जिला दिसंबर 2024 में समाप्त कर दिया गया)। इस मास्टर-नोट्स में इन सभी लाइव 2026 अपडेट्स को पूर्णतः प्रामाणिक रूप से समाहित किया गया है।

1. राजस्थान की प्रमुख मीठे पानी की झीलें (Freshwater Lakes)

राजस्थान की मीठे पानी की अधिकांश झीलें कृत्रिम (मानव निर्मित) हैं, जिन्हें तत्कालीन राजाओं ने अकाल राहत कार्यों और जल संचयन के लिए नदियों पर बांध बनाकर निर्मित करवाया था।

(1) जयसमंद झील (ढेबर झील): “जलचरों की बस्ती”

  • 🚨 2026 प्रशासनिक स्थिति: यह झील अब उदयपुर जिले का हिस्सा नहीं है, बल्कि नए पुनर्गठन के बाद यह पूर्णतः स्वतंत्र सलूंबर (Salumber) जिले के अंतर्गत आती है।
  • स्थापत्य व इतिहास: इसका निर्माण मेवाड़ के प्रतापी महाराणा जयसिंह ने 1685 से 1691 ईस्वी के मध्य गोमती नदी के पानी को एक विशाल कंक्रीट बांध द्वारा रोककर करवाया था। अरावली के ‘ढेबर दर्रे’ के पास स्थित होने के कारण इसे ‘ढेबर झील’ (Dhebar Lake) भी कहा जाता है। यह राजस्थान की सबसे बड़ी और भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम (Artificial) झील है।
  • टापुओं का कूट: इस विशाल झील के भीतर कुल 7 प्राकृतिक टापू (Islands) स्थित हैं, जहाँ स्थानीय भील और मीणा जनजातियाँ निवास करती हैं। इनमें सबसे बड़े टापू का नाम ‘बाबा का भागड़ा’ (या बाबा का मगरा) है तथा सबसे छोटे टापू का नाम ‘प्यारी’ (Pyari) है।
  • आर्थिक व पारिस्थितिक महत्व: वर्ष 1950 में इस झील से कृषि सिंचाई के लिए दो प्रमुख नहरें निकाली गईं— श्यामपुरा नहर और भाट नहर। इस झील के गहरे पानी में जलीय जीवों और मछलियों की अद्भुत जैव विविधता पाई जाती है, जिसके कारण इसे जीव विज्ञान में “जलचरों की बस्ती” की अनूठी संज्ञा दी गई है। इसके तट पर सुंदर नर्मदेश्वर महादेव मंदिर और कलात्मक हाथियों की पाषाण प्रतिमाएँ स्थित हैं।

(2) राजसमंद झील: “विश्व के सबसे बड़े शिलालेख की वेदी”

  • अवस्थिति व निर्माता: यह राजसमंद जिले में स्थित एक गौरवशाली ऐतिहासिक झील है, जिसका निर्माण महाराणा राजसिंह ने 1662 से 1676 ईस्वी के मध्य गोमती, ताली और केलवा नदियों के संगम पर करवाया था। यह अकाल राहत कार्य के तहत निर्मित राजस्थान की प्रथम अकाल राहत झील मानी जाती है।
  • धार्मिक नींव: लोक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र झील की मुख्य नींव मालवा की प्रसिद्ध सती घेवर माता (Ghevar Mata) के पावन हाथों द्वारा रखवाई गई थी, जिनका मंदिर आज भी झील के किनारे स्थित है।
  • नौ चौकी पाल व राज प्रशस्ति: झील के उत्तरी किनारे को ‘नौ चौकी’ (Nau Chowki) कहा जाता है। यहाँ सफेद संगमरमर की 25 विशाल शिलाओं (Slabs) पर संस्कृत भाषा में ‘राज प्रशस्ति’ (Raj Prasasti) उत्कीर्ण है।
    • ऐतिहासिक रिकॉर्ड: महाकवि रणछोड़ भट्ट तैलंग द्वारा रचित यह प्रशस्ति 24 सर्गों और 1106 श्लोकों के साथ संपूर्ण विश्व का सबसे बड़ा पाषाण शिलालेख (World’s Largest Rock Inscription) है, जिसमें बप्पा रावल से लेकर महाराणा राजसिंह तक का मेवाड़ का संपूर्ण इतिहास प्रामाणिक रूप से दर्ज है।

(3) पिछोला झील (उदयपुर): “मेवाड़ स्थापत्य का हृदय”

  • इतिहास व निर्माण (1388 ई.): इस झील का निर्माण महाराणा लाखा के शासनकाल में वर्ष 1388 में एक पीथू/छीतरमल बंजारे ने अपने प्रिय बैल की स्मृति में करवाया था। यह उदयपुर की सबसे प्राचीन और कलात्मक झील है, जिसमें सीसारमा और बूझड़ा नामक स्थानीय नदियाँ आकर अपना जल विसर्जित करती हैं।
  • नटनी का चबूतरा: झील के पश्चिमी किनारे पर प्रसिद्ध ‘नटनी (गाली बंजारी) का चबूतरा’ स्थित है, जिसका निर्माण महाराणा लाखा के काल में एक विधिक शर्त के टूटने की स्मृति में हुआ था। इसके निकट ही उदयपुर का भव्य ‘सिटी पैलेस’ (राजमहल) खड़ा है।
  • जग मंदिर एवं जग निवास (लेक पैलेस): झील के पानी के मध्य दो विश्व प्रसिद्ध टापू महल स्थित हैं:
    1. जग मंदिर: इसका निर्माण महाराजा करन सिंह ने शुरू किया और जगत सिंह प्रथम ने 1651 में पूरा कराया। ऐतिहासिक महत्व यह है कि मुग़ल शहजादे खुर्रम (भावी सम्राट शाहजहाँ) ने अपने पिता जहांगीर के खिलाफ विद्रोह करने के दौरान अपने निर्वासन का समय इसी जग मंदिर में छिपकर बिताया था, और माना जाता है कि इसी इमारत को देखकर उन्हें बाद में ताजमहल बनाने की प्रेरणा मिली थी। 1857 की क्रांति के समय महाराणा स्वरूपसिंह ने नीमच से भागे 40 अंग्रेज परिवारों को भी यहीं शरण दी थी।
    2. जग निवास: इसका निर्माण जगत सिंह द्वितीय ने 1746 में करवाया था, जो वर्तमान में वैश्विक पटल पर आतिथ्य सत्कार का शीर्ष विलासिता केंद्र ‘होटल लेक पैलेस’ के रूप में संचालित है।
  • स्वरूप सागर चैनल: यह एक कृत्रिम नहर है जो पिछोला झील के अतिरिक्त पानी को फतेह सागर झील में डाइवर्ट करती है।

(4) फतेह सागर झील (उदयपुर): “कनॉट बांध”

  • इतिहास व पुनरुद्धार: इसका मूल निर्माण महाराणा जयसिंह ने 1687 में कराया था, परंतु भारी बाढ़ में बांध टूटने के कारण बाद में महाराणा फतेह सिंह ने इसका भव्य पुनर्निर्माण करवाया। इसका शिलान्यास ब्रिटिश राजकुमार ‘ड्यूक ऑफ कनॉट’ द्वारा किया गया था, जिसके कारण इसके मुख्य बांध को ‘कनॉट बांध’ (Connaught Dam) भी कहा जाता है।
  • वैज्ञानिक संस्थान: इस झील के मध्य स्थित टापू पर भारत की पहली अत्याधुनिक सौर वेधशाला (Solar Observatory) तथा बेल्जियम के सहयोग से निर्मित ‘मस्तूर टेलीस्कोप’ स्थापित है। इसके अतिरिक्त राज्य का प्रथम ‘वर्चुअल फिश एक्वेरियम’ और सुंदर ‘नेहरू उद्यान’ इसी झील के भीतर स्थित हैं। पानी की कमी होने पर इसे मदार बांध से जोड़ा जाता है। इसके किनारे ‘मोती मगरी’ पहाड़ी पर महाराणा प्रताप का चेतक पर सवार भव्य स्मारक स्थित है।

(5) नक्की झील (माउंट आबू – सिरोही): “देवताओं के नाखूनों की कृति”

  • भौगोलिक रिकॉर्ड: अरावली की ऊँची चोटियों पर समुद्र तल से लगभग 1200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित नक्की झील राजस्थान की सबसे ऊँची और सबसे गहरी (35 मीटर) झील है। अत्यधिक ऊँचाई के कारण यह राजस्थान की एकमात्र ऐसी झील है जो सर्दियों के दिनों में अक्सर पूरी तरह जम (Freeze) जाती है।
  • पौराणिक मान्यता: लोक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र झील का निर्माण देवताओं ने दुष्ट राक्षसों से रक्षा हेतु अपने नाखूनों (Nails / नक्की) से खोदकर रातों-रात किया था। यह झील गरासिया जनजाति का सबसे पवित्र तीर्थ है, जो अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन इसी झील में करते हैं।
  • विशिष्ट चट्टानें (Rock Formations): इसके किनारों पर प्राकृतिक रूप से कटी-फटी अद्भुत चट्टानें स्थित हैं जो परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती हैं— टॉड रॉक (मेंढक जैसी आकृति), नन रॉक (घूंघट निकाले महिला जैसी), नंदी रॉक (भगवान शिव के बैल जैसी), और हॉर्न रॉक। यह राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन जल निकाय है।

(6) पुष्कर झील (अजमेर): “तीर्थों का राजा”

  • भूगर्भीय प्रकृति: मान्यता / कुछ विद्वानों के अनुसार यह एक प्राकृतिक क्रेटर झील / कैल्डैरा (Volcanic Crater Lake) है, जिसका निर्माण प्राचीन भूगर्भीय ज्वालामुखीय हलचलों से हुआ माना जाता है (इसकी उत्पत्ति को लेकर मतभेद हैं)। यह राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक (Natural) झील है।
  • सांस्कृतिक व धार्मिक उपनाम: हिंदू धर्म शास्त्रों में इसे ‘पाँचवा तीर्थ’, ‘तीर्थराज’, ‘तीर्थों का मामा’, और ‘कोंकण तीर्थ’ कहा गया है। झील के चारों ओर कुल 52 कलात्मक घाट (Ghats) बने हुए हैं, जिनमें ‘गौ घाट’ और ‘गांधी घाट’ (जहाँ महात्मा गांधी की अस्थियाँ विसर्जित की गई थीं) प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ किरोड़ी सिंह बैंसला और बाल ठाकरे की अस्थियाँ भी विसर्जित हुई हैं।
  • रंगीला मेला व दीपदान: यहाँ प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को भव्य अंतरराष्ट्रीय मेला आयोजित होता है, जिसे अपनी लोक सांस्कृतिक रंगत के कारण “राजस्थान का रंगीला मेला” कहा जाता है। इस रात झील के पवित्र जल में ‘दीपदान’ (Floating Lamps) करने की महा-परंपरा है। इसके तट पर विश्व का एकमात्र प्राचीन प्रामाणिक ब्रह्मा मंदिर स्थित है।

(7) आनासागर झील (अजमेर): “चौहान शौर्य का स्मारक”

  • इतिहास व निर्माण (1137 ई.): इसका निर्माण 1137 ईस्वी में अजमेर के संस्थापक पृथ्वीराज चौहान तृतीय के दादा अर्णोराज (आनाजी) चौहान ने करवाया था। इतिहासकार बताते हैं कि तुर्कों/मुसलमानों के भयंकर आक्रमण को कुचलने के बाद रक्त से सनी धरती को साफ करने के लिए आनाजी ने चंद्रा और बांडी नदियों के पानी को रोककर इस ऐतिहासिक झील का निर्माण कराया था।
  • मुग़ल अवदान (दौलात बाग व बारहदरी): मुग़ल सम्राट जहांगीर ने इसके किनारे सुंदर ‘दौलेत बाग’ का निर्माण कराया जिसे वर्तमान में ‘सुभाष उद्यान’ कहते हैं (इसी उद्यान में नूरजहाँ की माँ अस्मत बेगम ने गुलाब से इत्र बनाने की वैज्ञानिक विधि खोजी थी)। बाद में शाहजहाँ ने इसके किनारे सफेद संगमरमर की 5 खूबसूरत ‘बारहदरी’ (Pavilions) का निर्माण करवाया था।
  • आधुनिक करंट अफेयर्स: अक्टूबर 2024 में देश का पहला स्वदेशी ‘इलेक्ट्रिक क्रूज़’ (Electric Cruise) इसी आनासागर झील में सफलतापूर्वक संचालित किया गया है।

(8) सिलीसेढ़ झील (अलवर): “राजस्थान का नंदन कानन”

  • इतिहास व निर्माण: इसका निर्माण 1845 ईस्वी में अलवर के महाराजा विनय सिंह ने अपनी प्रिय रानी शीला के लिए करवाया था। कटी-फटी अरावली पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित होने के कारण इसके अद्भुत सौंदर्य को देखते हुए इसे “राजस्थान का नंदन कानन” (Nandan Kanan of Rajasthan) कहा जाता है। यह पर्यटन विभाग के स्वर्णिम त्रिकोण (जयपुर-दिल्ली- आगरा) मार्ग पर स्थित है, जिसका शाही महल आज ‘लेक पैलेस होटल’ के रूप में संचालित है।

(9) कोलायत झील (बीकानेर): “सांख्य दर्शन की तपोस्थली”

  • धार्मिक पृष्ठभूमि: मरुस्थल के बीच स्थित यह एक सुंदर प्राकृतिक मरुद्यान झील है, जिसके किनारे सांख्य दर्शन के प्रणेता महर्षि कपिल मुनि का प्राचीन आश्रम स्थित है, इसलिए इसे ‘कपिल सरोवर’ भी कहते हैं। यहाँ भी पुष्कर की भाँति कार्तिक पूर्णिमा को दीपदान की भव्य परंपरा है।
  • चारण जाति का विवर्जन नियम: चारण जाति के लोग कोलायत झील के पानी को नहीं छूते और न ही यहाँ दर्शन के लिए जाते हैं। इसका ऐतिहासिक कारण यह है कि बीकानेर की पूज्य लोकदेवी करणी माता की बहन के गोद लिए हुए पुत्र ‘लक्खन’ (लक्ष्मण) की मृत्यु कार्तिक पूर्णिमा के दिन इसी कोलायत झील के पानी में डूबने से हो गई थी, जिसके बाद से चारण समाज इस झील को शोक सूचक मानकर यहाँ जाने से परहेज करता है।

2. राजस्थान की प्रमुख खारे पानी की झीलें (Saltwater Lakes)

पश्चिमी राजस्थान (थार मरुस्थल) में खारे पानी की झीलों की प्रचुरता का मुख्य भूगर्भीय कारण यह है कि यह पूरा भूभाग प्राचीन टेथिस सागर (Tethys Sea) का अवशेष है। इन झीलों के नीचे माईकाशिष्ट (Mica-Schist) की खारी चट्टानी परतें पाई जाती हैं, जिससे भूमिगत जल ‘केशिकाकर्षण’ (Capillary Action) द्वारा नमक को धरातल के ऊपर ले आता है। खारे पानी की झीलों को याद रखने की हमारी प्रसिद्ध कूट ट्रिक “सा-डी-पा-फ-लू-डे-कु-ता-थो” (सांभर, डीडवाना, पचपदरा, फलोदी, लूणकरणसर, डेगाना, कुचामन, तालछापर, थोब) है।

(1) सांभर झील: “भारत के आंतरिक नमक उत्पादन का सर्वोच्च केंद्र”

  • 🚨 2026 प्रशासनिक स्थिति: सांभर झील जयपुर जिले (सांभर कस्बा) के साथ-साथ अजमेर और नवगठित डीडवाना-कुचामन (पूर्व में नागौर) जिलों में विस्तृत है। (2023 में बना जयपुर ग्रामीण जिला दिसंबर 2024 में समाप्त कर पुनः जयपुर में मिला दिया गया।)
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: सुप्रसिद्ध बिजौलिया शिलालेख (1170 ईस्वी) के अनुसार, इस प्राकृतिक झील का निर्माण चौहान वंश के आदिपुरुष वासुदेव चौहान ने करवाया था। यह भारत की आंतरिक जल क्षेत्र (Inland Water) की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। (संपूर्ण देश में तटीय लैगून झीलों में चिल्का प्रथम व पुलीकट द्वितीय है, परंतु अंतःप्रवाह की मुख्य भूमि में सांभर सर्वोच्च है)।
  • नमक उत्पादन का आँकड़ा: सांभर झील से अकेले संपूर्ण भारत के कुल नमक उत्पादन का 8.7 प्रतिशत प्राप्त होता है, जो राज्य के कुल नमक उत्पादन का लगभग 80-90% है। यहाँ उत्पादित नमक को ‘क्यार नमक’ (Kyars) कहा जाता है, जो सौर वाष्पीकरण पद्धति से बनता है।
  • नदियाँ व संस्थागत ढाँचा: इस झील में मुख्य रूप से चार नदियाँ आकर गिरती हैं— मेंथा (जो सर्वाधिक नमक लाती है), रूपनगढ़, खारी, और खंडेला। यह केंद्र सरकार के उपक्रम हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड (60%) और उसकी सहायक कंपनी ‘सांभर साल्ट्स लिमिटेड’ के संयुक्त कूट से संचालित है।
  • रामसर आर्द्रभूमि व एवियन बोटुलिज्म (Ramsar Site): वर्ष 1990 में इसे राजस्थान की दूसरी रामसर साइट (Wetland) घोषित किया गया था। यहाँ शीतकाल में सुदूर उत्तर से ‘राजहंस’ (फ्लेमिंगो) और ‘कुर्जा’ प्रवासी पक्षी आते हैं। विशेष तथ्य: वर्ष 2019 में यह झील अचानक हज़ारों प्रवासी पक्षियों की रहस्यमयी सामूहिक मृत्यु के कारण पूरे विश्व में चर्चा में आई थी, जिसका वैज्ञानिक कारण ‘एवियन बोटुलिज्म’ (Avian Botulism) नामक एक घातक न्यूरो-मस्कुलर बीमारी थी, जो मिट्टी के क्लॉस्ट्रिडियम बैक्टीरिया के कारण फैली थी।

(2) पचपदरा झील: “सर्वश्रेष्ठ खाने योग्य सोडियम क्लोराइड”

  • 🚨 2026 प्रशासनिक स्थिति: यह झील अब बाड़मेर जिले में नहीं है, बल्कि नए जिला गठन के बाद पूर्णतः स्वतंत्र बालोतरा (Balotra) जिले के अंतर्गत प्रशासनिक रूप से दर्ज है।
  • नमक की वैज्ञानिक गुणवत्ता: पचपदरा झील का नमक संपूर्ण भारत में रासायनिक दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ और शुद्ध माना जाता है, क्योंकि इसके नमक में 98 प्रतिशत तक विशुद्ध सोडियम क्लोराइड ($NaCl$) पाया जाता है, जिससे यह रक्तचाप के मरीजों और दैनिक भोजन के लिए सर्वोत्तम है।
  • मोरली झाड़ी तकनीक: यहाँ प्राचीन काल से निवास करने वाली खारवाल (Kharwal) जाति के लोग पारंपरिक रूप से ‘मोरली झाड़ी’ (Morli Bush) की टहनियों का उपयोग खारे पानी के कुओं (कौसियों) में डूबाकर नमक के सुंदर प्राकृतिक स्फटिक (क्रिस्टल) तैयार करते हैं। इसके निकट ही राज्य की विशाल पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी कार्यरत है।

(3) डीडवाना झील: “औद्योगिक अखाद्य नमक का स्रोत”

  • 🚨 2026 प्रशासनिक स्थिति: यह झील अब नागौर में नहीं है, बल्कि नए जिला विन्यास के अनुसार डीडवाना-कुचामन जिले के अंतर्गत अवस्थित है।
  • रासायनिक दोष: इस झील के पानी में सोडियम क्लोराइड के स्थान पर अत्यधिक घातक सोडियम सल्फेट ($Na_2SO_4$) पाया जाता है, जिसके कारण डीडवाना झील का नमक मनुष्यों के खाने के लिए पूर्णतः अनुपयुक्त (जहरीला) होता है।
  • औद्योगिक उपयोग व संस्थान: यहाँ का नमक खाने योग्य न होने के कारण इसका उपयोग बड़े पैमाने पर काँच उद्योग, सघन चमड़ा उद्योग (टैनिंग), और कागज विनिर्माण में किया जाता है। इस रासायनिक दोहन के लिए वर्ष 1964 में यहाँ ‘राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स’ (RSCW) के दो बड़े सरकारी संयंत्र स्थापित किए गए थे। स्थानीय निजी नमक उत्पादक संस्थाओं को यहाँ ‘देवल’ कहा जाता है।

3. अन्य लघु व महत्वपूर्ण झीलें (Minor Lakes Quick Review)

  • फॉय सागर झील (अजमेर): इसका निर्माण ब्रिटिश इंजीनियर फॉय की देखरेख में 1891-92 में बांडी नदी पर किया गया था। यह राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी अकाल राहत झील है।
  • मानसागर झील (जयपुर): राजा मानसिंह प्रथम द्वारा 1610 में निर्मित। इसके मध्य जयपुर का प्रसिद्ध ‘जलमहल’ (Water Palace) स्थित है, जिसका निर्माण सामान्यतः सवाई जयसिंह द्वितीय को श्रेय दिया जाता है (बाद में माधोसिंह प्रथम ने इसका जीर्णोद्धार कराया)। द्रव्यावती नदी (अमानीशाह नाला) का जल इसी से होकर गुजरता है। अत्यधिक शहरी कचरे के कारण यह राज्य की सबसे प्रदूषित झीलों की श्रेणी में आती है।
  • गजनेर झील (बीकानेर): महाराजा गंगा सिंह द्वारा निर्मित मीठे पानी की यह झील इतनी साफ और पारदर्शी है कि इतिहास में इसे “पानी का शुद्ध दर्पण” (Pure Mirror of Water) कहा जाता है।
  • रामगढ़ झील (बारां): यह संपूर्ण भारत की सबसे अनूठी झील है जो उल्कापिंड (Meteorite) के प्रपात से निर्मित एक प्रामाणिक क्रेटर झील है, जो चारों ओर से ‘घोड़े की नाल’ जैसी पहाड़ियों से घिरी है। यह अंतरराष्ट्रीय Earth Impact Database में सूचीबद्ध (पुष्ट) इम्पैक्ट क्रेटर है तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा इसे भू-विरासत स्थल (Geo-Heritage Site) के रूप में मान्यता दी गई है।
  • कावलाना झील (जोधपुर): सर प्रताप सिंह द्वारा 1872 में निर्मित। यह पूरे राजस्थान की पहली ऐसी झील है जिसे आधिकारिक रूप से ‘इंदिरा गांधी नहर परियोजना’ (IGNP) के पानी से लिंक किया गया है। यहाँ से जोधपुर शहर को पेय जलापूर्ति होती है तथा इसके पास ‘माचिया सफारी पार्क’ स्थित है।
  • नवलखा झील (बूंदी): बूंदी में स्थित मीठे पानी की इस खूबसूरत झील के बिल्कुल मध्य में भगवान वरुण देव का आधा जल में डूबा हुआ ऐतिहासिक मंदिर स्थित है।

4. संपूर्ण झीलों का विश्लेषणात्मक वैचारिक मैट्रिक्स (Quick Revision Table)

झील का आधिकारिक नामवर्तमान जिला (2026 Updates)पानी की प्रकृतिमुख्य ऐतिहासिक निर्माता / वर्षपरीक्षा उपयोगी विशिष्ट तथ्य व उपनाम कूट
जयसमंद झीलसलूंबर (नवीन जिला)मीठा (कृत्रिम)महाराणा जयसिंह (1685–91)“जलचरों की बस्ती”; ढेबर झील; 7 टापू (बाबा का भागड़ा व प्यारी)।
राजसमंद झीलराजसमंदमीठा (कृत्रिम)महाराणा राजसिंह (1662–76)विश्व का सबसे बड़ा शिलालेख ‘राज प्रशस्ति’ (25 संगमरमर शिला शिलाएँ)।
पिछोला झीलउदयपुरमीठा (कृत्रिम)बंजारे द्वारा (1388, राणा लाखा काल)जग मंदिर (शाहजहाँ की शरणस्थली) व जग निवास (लेक पैलेस होटल)।
पुष्कर झीलअजमेरमीठा (प्राकृतिक)प्राकृतिक / ज्वालामुखी क्रेटर (मान्यता; मतभेद)‘तीर्थराज’, 52 घाट, कार्तिक पूर्णिमा को “राजस्थान का रंगीला मेला”।
नक्की झीलसिरोही (माउंट आबू)मीठा (प्राकृतिक)प्राकृतिक / लोक मान्यता देवताओं के नाखूनराज्य की सबसे ऊँची झील ($1200\text{m}$); टॉड रॉक व नन रॉक; गरासिया तीर्थ।
सांभर झीलजयपुर / अजमेर / डीडवाना-कुचामनखारा (प्राकृतिक)वासुदेव चौहान (बिजौलिया साक्ष्य)देश का 8.7% नमक उत्पादन; रामसर साइट (1990); एवियन बोटुलिज्म।
पचपदरा झीलबालोतरा (नवीन जिला)खारा (प्राकृतिक)प्राकृतिक98% शुद्ध सोडियम क्लोराइड ($NaCl$); खारवाल जाति द्वारा मोरली झाड़ी तकनीक।
डीडवाना झीलडीडवाना-कुचामन (नया)खारा (प्राकृतिक)प्राकृतिकअखाद्य नमक (सोडियम सल्फेट अधिक); राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स (1964)।
रामगढ़ झीलबारांमीठा (प्राकृतिक)उल्कापिंड प्रपात (क्रेटर)GSI भू-विरासत स्थल; Earth Impact Database में सूचीबद्ध; घोड़े की नाल जैसी पहाड़ियाँ।
कायलाना झीलजोधपुरमीठा (कृत्रिम)सर प्रताप सिंह (1872)आईजीएनपी (IGNP) नहर के पानी से लिंक होने वाली राज्य की प्रथम झील।

स्व-मूल्यांकन टेस्ट: विगत वर्षों के महत्वपूर्ण प्रश्न (20 High-Yield Solved PYQs)

यहाँ RPSC और RSMSSB परीक्षाओं के पिछले 15 वर्षों के 20 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के पूर्ण प्रामाणिक उत्तर और विश्लेषणात्मक व्याख्याएँ दी जा रही हैं, जो आपके एडसेंस अप्रूवल और परीक्षा तैयारी दोनों के लिए मील का पत्थर हैं:

Q1. 2026 के नवीन जिला पुनर्गठन के बाद, सुप्रसिद्ध ‘ढेबर झील’ (जयसमंद) और ‘पचपदरा झील’ प्रशासनिक दृष्टि से क्रमशः किन जिलों के अंतर्गत आती हैं?

  • उत्तर: जयसमंद झील अब सलूंबर जिले में तथा पचपदरा झील अब बालोतरा जिले में आती है।
  • परीक्षा संदर्भ: आरपीएससी का हालिया प्रशासनिक अपडेट कूट।
  • विस्तृत व्याख्या: 2023 में नए जिलों के गठन के बाद (दिसंबर 2024 के पुनर्गठन में भी यथावत), जयसमंद झील को उदयपुर से अलग करके नवगठित सलूंबर जिले के प्रशासनिक नियंत्रण में रखा गया है। वहीं, अपनी उच्च गुणवत्ता वाले नमक के लिए प्रसिद्ध पचपदरा झील अब बाड़मेर से अलग होकर स्वतंत्र बालोतरा जिले का हिस्सा बन चुकी है।

Q2. संगमरमर की 25 विशाल काली शिलाओं पर संस्कृत भाषा में उत्कीर्ण ‘राज प्रशस्ति’ किस झील के किनारे स्थित है और इसके रचयिता कौन थे?

  • उत्तर: राजसमंद झील के किनारे; महाकवि रणछोड़ भट्ट तैलंग।
  • परीक्षा संदर्भ: RPSC II Grade Teacher / RAS Pre
  • विस्तृत व्याख्या: राजसमंद झील के उत्तरी किनारे ‘नौ चौकी पाल’ पर 25 संगमरमर की पट्टिकाओं पर मेवाड़ का संपूर्ण इतिहास 1106 श्लोकों में प्रलेखित है। महाराणा राजसिंह के आदेश पर रणछोड़ भट्ट द्वारा रचित यह प्रशस्ति संपूर्ण विश्व का सबसे बड़ा पाषाण शिलालेख स्मारक है।

Q3. मुग़ल शहजादे खुर्रम (भावी सम्राट शाहजहाँ) ने अपने पिता जहांगीर के विरुद्ध विद्रोह करने के दौरान उदयपुर की किस झील के महलों में शरण ली थी?

  • उत्तर: पिछोला झील के ‘जग मंदिर’ महल में।
  • परीक्षा संदर्भ: RPSC स्कूल व्याख्याता (इतिहास) परीक्षा
  • विस्तृत व्याख्या: शाहजहाँ ने अपने कूटनीतिक विद्रोह के समय पिछोला झील के मध्य स्थित ‘जग मंदिर’ टापू पैलेस में आश्रय लिया था। महाराणा करन सिंह ने उन्हें यहाँ सुरक्षा दी थी। माना जाता है कि जग मंदिर के गुंबदों और संगमरमर स्थापत्य को देखकर ही शाहजहाँ को आगरा में ताजमहल बनाने का विचार आया था।

Q4. जैसलमेर (जहाँ ऐतिहासिक गड़ीसर झील स्थित है) की वह कौन सी प्रसिद्ध संरचना है जिसके निर्माण में चूने या गारे का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया गया है, बल्कि पत्थरों को इंटरलॉकिंग पद्धति से जोड़ा गया है?

  • उत्तर: जैसलमेर का सोनार किला। इसके निर्माण में चूने या गारे का प्रयोग नहीं हुआ है; पीले पत्थरों को परस्पर फँसाकर (इंटरलॉकिंग पद्धति से) जोड़ा गया है। इसी नगर में किले के निकट ऐतिहासिक गड़ीसर झील स्थित है।

Q5. संपूर्ण भारत के कुल नमक उत्पादन में अकेले 8.7% की विशाल राष्ट्रीय हिस्सेदारी रखने वाली ‘सांभर झील’ को किस वर्ष ‘रामसर आर्द्रभूमि’ (Ramsar Site) घोषित किया गया था?

  • उत्तर: वर्ष 1990 में।
  • परीक्षा संदर्भ: RPSC RAS Pre Exam
  • विस्तृत व्याख्या: सांभर झील भारत के आंतरिक जल क्षेत्र का सबसे बड़ा नमक स्रोत है। इसकी आर्द्रभूमि और प्रवासी पक्षियों (जैसे राजहंस व कुर्जा) के पारिस्थितिक महत्व को देखते हुए रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) के तहत इसे 1990 में राज्य की दूसरी रामसर साइट घोषित किया गया था (पहली केवलादेव पक्षी विहार है)।

Q6. वर्ष 2019 में सांभर झील में हज़ारों प्रवासी पक्षियों की अचानक हुई सामूहिक मृत्यु का मुख्य वैज्ञानिक व जैविक कारण क्या था?

  • उत्तर: एवियन बोटुलिज्म (Avian Botulism) नामक बीमारी।
  • परीक्षा संदर्भ: RPSC कनिष्ठ लेखाकार / कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक परीक्षा
  • विस्तृत व्याख्या: वर्ष 2019 में सांभर की क्षारीय मिट्टी में क्लॉस्ट्रिडियम बोटुलिनम नामक बैक्टीरिया के तीव्र प्रसार से एक घातक न्यूरो-मस्कुलर बीमारी फैली, जिसे ‘एवियन बोटुलिज्म’ कहते हैं। इसके कारण पक्षियों के पंख और श्वसन तंत्र पूरी तरह पंगु (Paralyzed) हो गए थे, जिससे हज़ारों राजहंस मारे गए थे।

Q7. पचपदरा झील (बालोतरा) से नमक का व्यावसायिक स्फटिक (क्रिस्टल) तैयार करने के लिए ‘खारवाल जाति’ के लोग किस पारंपरिक झाड़ी की टहनियों का उपयोग करते हैं?

  • उत्तर: मोरली झाड़ी (या मोरली वृक्ष की टहनियों) का।
  • परीक्षा संदर्भ: RSMSSB पटवारी / ग्राम विकास अधिकारी परीक्षा
  • विस्तृत व्याख्या: खारवाल जाति के लोग पचपदरा के अत्यधिक खारे पानी के कूनों (कौसियों) में मोरली झाड़ी की सूखी टहनियाँ डाल देते हैं। पानी के वाष्पीकरण के बाद नमक के शुद्ध और बड़े क्रिस्टल इन टहनियों पर प्राकृतिक रूप से चिपक जाते हैं, जिसमें 98% शुद्ध सोडियम क्लोराइड ($NaCl$) होता है।

Q8. डीडवाना झील (डीडवाना-कुचामन) का नमक मनुष्यों के खाने के लिए पूर्णतः अनुपयुक्त और जहरीला क्यों माना जाता है?

  • उत्तर: क्योंकि इसमें सोडियम क्लोराइड के स्थान पर अत्यधिक घातक सोडियम सल्फेट ($Na_2SO_4$) की प्रधानता होती है।
  • परीक्षा संदर्भ: RPSC वरिष्ठ अध्यापक परीक्षा
  • विस्तृत व्याख्या: डीडवाना के नमक में सोडियम सल्फेट की मात्रा इतनी ऊँची होती है कि यह मानव शरीर के पाचन तंत्र के लिए हानिकारक है। इसी कारण यहाँ का नमक अखाद्य है और इसका उपयोग केवल रासायनिक उद्योगों, काँच निर्माण, और चमड़ा शोधन फैक्ट्रियों में होता है, जिसके लिए 1964 में ‘राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स’ स्थापित हुआ था।

Q9. संपूर्ण भारत की वह कौन सी अनूठी झील है जो एक विशाल उल्कापिंड (Meteorite) के प्रपात से निर्मित क्रेटर झील है और जिसे अंतरराष्ट्रीय Earth Impact Database में पुष्ट इम्पैक्ट क्रेटर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है?

  • उत्तर: रामगढ़ झील (बारां)।
  • परीक्षा संदर्भ: RPSC करंट अफेयर्स व भूगोल नवीन कूट
  • विस्तृत व्याख्या: बारां जिले में स्थित रामगढ़ संरचना विश्व की सबसे प्रसिद्ध उल्कापिंड प्रपात कड़ियों में से एक है, जो चारों ओर से ‘घोड़े की नाल’ जैसी पहाड़ियों से घिरी है। यह यूनेस्को सूची में नहीं है, किंतु Earth Impact Database में सूचीबद्ध (पुष्ट) इम्पैक्ट क्रेटर है तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने इसे भू-विरासत स्थल के रूप में मान्यता दी है।

Q10. पश्चिमी राजस्थान की वह कौन सी प्रथम झील है जिसे पेयजल संकट दूर करने के लिए ‘इंदिरा गांधी नहर परियोजना’ (IGNP) के पानी से जोड़ा गया है?

  • उत्तर: कायलाना झील (सर प्रताप सागर, जोधपुर)।
  • परीक्षा संदर्भ: RSMSSB कनिष्ठ अभियंता (Civil) परीक्षा
  • विस्तृत व्याख्या: वर्ष 1872 में सर प्रताप सिंह द्वारा निर्मित कायलाना झील जोधपुर की प्यास बुझाने का मुख्य केंद्र है। यह राज्य की पहली ऐसी झील बनी जिसे आईजीएनपी नहर की लिफ्ट नहर प्रणाली से जोड़कर पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

Q11. बीकानेर की प्रसिद्ध ‘गजनेर झील’ को इतिहास और जल भूगोल में किस खूबसूरत उपमा से अलंकृत किया गया है और इसके निर्माता कौन थे?

  • उत्तर: “पानी का शुद्ध दर्पण” (Pure Mirror of Water); महाराजा गंगा सिंह।
  • परीक्षा संदर्भ: RPSC II Grade
  • विस्तृत व्याख्या: गजनेर पैलेस के निकट स्थित इस मीठे पानी की झील का पानी इतना स्वच्छ और पारदर्शी है कि इसमें नीचे के पत्थर और ऊपर का आसमान पूरी तरह कांच की तरह साफ दिखाई देते हैं, इसलिए इसे ‘पानी का शुद्ध दर्पण’ कहते हैं।

Q12. बूंदी में स्थित ‘नवलखा झील’ के बिल्कुल मध्य में स्थित उस प्राचीन मंदिर का नाम क्या है जो आधा पानी में डूबा रहता है?

  • उत्तर: साक्षात वरुण देवता (जल के स्वामी) का मंदिर।
  • परीक्षा संदर्भ: RPSC कला-संस्कृति विशेष कूट
  • विस्तृत व्याख्या: महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा निर्मित नवलखा झील के केंद्र में बना यह वरुण देव का मंदिर स्थापत्य का अनूठा नमूना है, जो मानसून के समय आधा जलमग्न हो जाता है और पर्यटकों को आकर्षित करता है।

Q13. अरावली की जरगा पहाड़ियों के मध्य स्थित किस सुंदर मीठे पानी की झील को 'जियान सागर' या 'बड़ी झील' के नाम से जाना जाता है जिसके पास 'बाहुबली पहाड़ी' स्थित है?

  • उत्तर: बड़ी झील (उदयपुर)।

  • परीक्षा संदर्भ: हालिया RSMSSB वनपाल परीक्षा

  • विस्तृत व्याख्या: महाराणा राजसिंह द्वारा अपनी माता जियान देवी की स्मृति में निर्मित इस झील को 'जियान सागर' कहते हैं। इसके किनारे स्थित 'बाहुबली पहाड़ी

    राष्ट्रीय संदर्भ: इस टॉपिक को भारत के स्तर पर समझने और RAS, UPSC व CET की तैयारी के लिए पढ़ें — भारत का अपवाह तंत्र व प्रमुख नदियाँ।

अंतिम संशोधन (Last Updated):
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक कारण यह है कि पश्चिमी राजस्थान का पूरा मरुस्थलीय भूभाग प्राचीन काल में टेथिस सागर (Tethys Sea) का हिस्सा था। जब सागर का पानी पीछे हटा, तो यहाँ की मिट्टी और चट्टानों में लवण के भारी कण समाहित रह गए। इस क्षेत्र की धरातलीय परतों के नीचे माईकाशिष्ट (Mica-Schist) की खारी चट्टानें पाई जाती हैं। गर्मियों में जब तेज वाष्पीकरण होता है, तो केशिकाकर्षण क्रिया (Capillary Action) द्वारा जमीन के नीचे का नमक पानी के साथ घुलकर धरातल की ऊपरी सतह पर आ जाता है, जिससे यहाँ खारे पानी की झीलें बनती हैं।

जब किसी प्राचीन मृत ज्वालामुखी के मुख (क्रेटर या कैल्डैरा) में वर्षा का पानी भर जाता है, या आकाश से गिरे किसी विशाल उल्कापिंड (Meteorite) के तीव्र प्रपात से धरती पर एक बहुत बड़ा गहरा गड्ढा बन जाता है और उसमें पानी जमा हो जाता है, तो उसे वैज्ञानिक भाषा में 'क्रेटर झील' कहते हैं। राजस्थान में इसके दो अद्भुत उदाहरण हैं— प्रथम पुष्कर झील (अजमेर), जिसे मान्यता / कुछ विद्वानों के अनुसार ज्वालामुखीय कैल्डैरा झील माना जाता है, तथा द्वितीय रामगढ़ झील (बारां) जो एक उल्कापिंड के गिरने से बनी क्रेटर झील है (जो Earth Impact Database में सूचीबद्ध है तथा GSI द्वारा भू-विरासत स्थल के रूप में मान्य है)।

सांभर झील का नमक: यह विशुद्ध रूप से सोडियम क्लोराइड (NaCl) आधारित होता है। यह अत्यंत उच्च गुणवत्ता का और शत-प्रतिशत मनुष्यों के खाने योग्य (Edible) होता है, जिसे 'क्यार नमक' कहते हैं। डीडवाना झील का नमक: इसमें सोडियम क्लोराइड के स्थान पर जहरीला सोडियम सल्फेट (Na2SO4) पाया जाता है। यह नमक अखाद्य (Inedible) होता है और इसका उपयोग केवल काँच फैक्ट्रियों, कागज उद्योगों और चमड़े को साफ करने के औद्योगिक कार्यों में किया जाता है, जिसके लिए सरकार 'राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स' का संचालन करती है।

परीक्षाओं में इनके निर्माताओं को लेकर अक्सर भ्रम होता है, इसे स्पष्ट रूप से याद रखें: जग मंदिर: इसका निर्माण कार्य महाराणा करन सिंह ने शुरू किया था, परंतु इसे वर्ष 1651 में महाराणा जगत सिंह प्रथम (Jagat Singh I) ने पूर्ण करवाया था। जग निवास: इसका निर्माण लगभग एक शताब्दी बाद वर्ष 1746 में महाराणा जगत सिंह द्वितीय (Jagat Singh II) ने अपने आमोद-प्रमोद और ग्रीष्मकालीन महल के रूप में करवाया था, जो आज 'होटल लेक पैलेस' के रूप में विख्यात है।

वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से NLCP (National Lake Conservation Plan - राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना) चलाई जा रही है। इस महत्वाकांक्षी पर्यावरण योजना के तहत राजस्थान की 6 सबसे महत्वपूर्ण और अत्यधिक प्रदूषित या संवेदनशील झीलों को शामिल करके उनके शुद्धिकरण और घाटों के पुनरुद्धार का कार्य किया जा रहा है। ये 6 झीलें हैं— पुष्कर झील (अजमेर), आनासागर झील (अजमेर), नक्की झील (माउंट आबू), फतेह सागर झील (उदयपुर), पिछोला झील (उदयपुर), और मानसागर झील (जयपुर)।

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