संसद के विशेषाधिकार एवं विशेषाधिकार भंग की प्रक्रिया
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स्रोत आधार: राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं का संबंधित आधिकारिक पाठ्यक्रम। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
संसद के विशेषाधिकार एवं विशेषाधिकार भंग की प्रक्रिया
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⚡ Quick Answer: संसदीय विशेषाधिकार (अनु. 105; राज्यों हेतु 194) वे विशेष अधिकार व उन्मुक्तियाँ हैं जो संसद के सदनों, समितियों, सदस्यों और सदन में बोलने के अधिकारी मंत्रियों व महान्यायवादी को स्वतंत्र कार्य हेतु मिलती हैं — राष्ट्रपति को नहीं। सामूहिक — कार्यवाही प्रकाशन, अजनबियों को बाहर करना, गुप्त बैठक, नियम बनाना, विशेषाधिकार हनन/अवमानना पर दंड, न्यायालय से संरक्षण (अनु. 122)। व्यक्तिगत — सदन में वाक्-स्वतंत्रता, भाषण/मत हेतु न्यायिक कार्यवाही से उन्मुक्ति, सत्र से 40 दिन पहले व बाद केवल सिविल मामलों में गिरफ़्तारी से छूट, जूरी व साक्षी सेवा से छूट। हनन का प्रश्न अध्यक्ष की सहमति से (लोकसभा नियम 222) उठता है और विशेषाधिकार समिति (लोकसभा 15, राज्यसभा 10 सदस्य) जाँच करती है। सीता सोरेन (2024) — रिश्वत संरक्षित नहीं। विशेषाधिकार अब तक संहिताबद्ध नहीं।
🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): मार्च 2024 में सर्वोच्च न्यायालय की 7-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सीता सोरेन बनाम भारत संघ में सर्वसम्मति से कहा कि सदन में मत/भाषण हेतु रिश्वत लेने पर अनु. 105(2)/194(2) की उन्मुक्ति नहीं मिलती — इससे 1998 का पी.वी. नरसिम्हा राव निर्णय पलट गया। विशेषाधिकार अब तक संहिताबद्ध नहीं हैं (14 अक्टूबर 2026 तक)। संविधान संशोधन व न्यायिक व्याख्याएँ बदलती रहती हैं — परीक्षा से पहले करेंट अफेयर्स से मिलाएँ।
📌 संसदीय विशेषाधिकार — एक दृष्टि — एक नज़र में
- अनुच्छेद: 105 (संसद), 194 (राज्य विधानमंडल)
- आधार: संविधान, संसदीय विधि, नियम, परंपराएँ, न्यायिक निर्णय
- दो प्रकार: सामूहिक (सदन के) व व्यक्तिगत (सदस्यों के)
- गिरफ़्तारी से छूट: केवल सिविल — सत्र से 40 दिन पहले/बाद
- लाभार्थी गैर-सदस्य: मंत्री, महान्यायवादी — 105(4)
- संहिताकरण: अब तक नहीं
1. विशेषाधिकार क्या हैं और क्यों?
संसदीय विशेषाधिकार वे विशेष अधिकार, उन्मुक्तियाँ और छूट हैं जो संसद के दोनों सदनों, उनकी समितियों और सदस्यों को प्राप्त होती हैं, ताकि वे स्वतंत्रतापूर्वक, निर्भय होकर और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। इनके बिना सदन न तो अपनी गरिमा बनाए रख सकता है, न सदस्य बिना दबाव के बोल सकते हैं। ये विशेषाधिकार उन व्यक्तियों को भी प्राप्त हैं जो सदन/समिति में बोलने के अधिकारी हैं — मंत्री और भारत के महान्यायवादी (अनु. 105(4)); महान्यायवादी की भूमिका भारत के महान्यायवादी (अनु. 76) में देखें। ध्यान दें: राष्ट्रपति संसद का अंग होते हुए भी संसदीय विशेषाधिकार का लाभार्थी नहीं — उसकी उन्मुक्तियाँ अनु. 361 में अलग से हैं।
2. विशेषाधिकारों के स्रोत
- संविधान: अनु. 105 (संसद), 194 (राज्य विधानमंडल), 122 (कार्यवाही की न्यायिक जाँच वर्जित), 361A (प्रकाशन को संरक्षण)।
- संसद द्वारा निर्मित विधि: जैसे संसदीय कार्यवाही (प्रकाशन संरक्षण) अधिनियम, 1977; सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 135A।
- दोनों सदनों के प्रक्रिया-नियम।
- संसदीय परंपराएँ व न्यायिक व्याख्याएँ।
- अनु. 105(3) का इतिहास: मूल संविधान में अन्य विशेषाधिकार ‘ब्रिटिश हाउस ऑफ़ कॉमन्स’ जैसे बताए गए थे; 44वें संशोधन (1978) ने यह संदर्भ हटाकर कहा कि वे वही होंगे जो उस संशोधन के लागू होने के समय थे — व्यवहार में स्थिति अपरिवर्तित।
3. सामूहिक विशेषाधिकार (सदन के)
| विशेषाधिकार | विवरण |
|---|---|
| प्रकाशन का अधिकार | अपनी रिपोर्ट, वाद-विवाद व कार्यवाही प्रकाशित करने और दूसरों को रोकने का अधिकार; 44वें संशोधन से कार्यवाही के सत्य विवरण के प्रकाशन को प्रेस-संरक्षण (अनु. 361A) — गुप्त बैठक का नहीं |
| अजनबियों को बाहर करना | गैर-सदस्यों को कार्यवाही से बाहर रखना; गुप्त बैठक आयोजित करना |
| नियम बनाना | प्रक्रिया व कार्य-संचालन हेतु नियम (अनु. 118) |
| दंड देने का अधिकार | विशेषाधिकार हनन या सदन की अवमानना पर सदस्यों व बाहरी व्यक्तियों को — भर्त्सना, फटकार, कारावास; सदस्य का निलंबन/निष्कासन |
| सूचना पाने का अधिकार | किसी सदस्य की गिरफ़्तारी, निरोध, दोषसिद्धि, कारावास व रिहाई की तत्काल सूचना |
| न्यायालय से संरक्षण | सदन की कार्यवाही की जाँच न्यायालय नहीं कर सकते (अनु. 122) — प्रक्रिया की अनियमितता के आधार पर |
| परिसर में गिरफ़्तारी नहीं | पीठासीन अधिकारी की अनुमति के बिना सदन के परिसर में कोई गिरफ़्तारी/विधिक आदेश की तामील नहीं |
| जाँच व साक्ष्य | जाँच करना, साक्षियों को बुलाना, दस्तावेज़ मँगाना |
🎯 संसदीय विशेषाधिकार — अभ्यास
अनु. 105, 40 दिन की छूट और सीता सोरेन निर्णय RAS, CET व व्याख्याता परीक्षाओं के संभावित प्रश्न हैं:
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
- Rajasthan CET (स्नातक) फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- RPSC प्रथम श्रेणी व्याख्याता 2026 टेस्ट सीरीज़
- RAS Prelims फाइनल रिवीजन टेस्ट सीरीज़
सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स
4. व्यक्तिगत विशेषाधिकार (सदस्यों के)
| विशेषाधिकार | विवरण व सीमा |
|---|---|
| वाक्-स्वतंत्रता (105(1)) | संसद में बोलने की स्वतंत्रता — संविधान के उपबंधों व सदन के नियमों के अधीन; अनु. 121 के अनुसार न्यायाधीश के आचरण पर चर्चा नहीं (महाभियोग प्रस्ताव को छोड़कर) |
| न्यायिक कार्यवाही से उन्मुक्ति (105(2)) | संसद/समिति में कही गई किसी बात या दिए गए मत के लिए किसी न्यायालय में कार्यवाही नहीं; पर रिश्वत संरक्षित नहीं — सीता सोरेन (2024) |
| गिरफ़्तारी से छूट | सत्र/समिति बैठक के दौरान तथा उसके 40 दिन पहले व 40 दिन बाद — केवल सिविल मामलों में; आपराधिक मामले व निवारक निरोध में छूट नहीं |
| जूरी सेवा से छूट | सत्र के दौरान जूरी के रूप में सेवा से मना कर सकते हैं |
| साक्षी के रूप में छूट | सत्र के दौरान बिना सदन की अनुमति न्यायालय में साक्ष्य देने से इनकार कर सकते हैं |
महत्वपूर्ण: वाक्-स्वतंत्रता का विशेषाधिकार सदन के भीतर तक सीमित है — वही बात सदन के बाहर कहने या प्रकाशित करने पर सामान्य विधि (जैसे मानहानि) लागू होती है। सदन में असंसदीय शब्द पीठासीन अधिकारी कार्यवाही से हटा सकता है।
5. विशेषाधिकार हनन व सदन की अवमानना
- विशेषाधिकार हनन: जब कोई व्यक्ति/प्राधिकारी सदन या सदस्य के किसी विशेषाधिकार की अवहेलना करे।
- सदन की अवमानना: कोई कार्य या चूक जो सदन/सदस्य/अधिकारी के कार्य में बाधा डाले या सदन की गरिमा गिराए — इसकी परिधि विशेषाधिकार हनन से व्यापक है; हर विशेषाधिकार हनन अवमानना है, पर हर अवमानना विशेषाधिकार हनन नहीं।
- उदाहरण: सदन या सदस्यों पर मानहानिकारक लेख; कार्यवाही का विकृत प्रकाशन; सदस्य को धमकी/रिश्वत; समिति के समक्ष झूठा साक्ष्य; मंत्री द्वारा सदन को गुमराह करना; सदन में अव्यवस्था; गुप्त समिति रिपोर्ट को समय से पहले प्रकट करना।
6. विशेषाधिकार हनन की प्रक्रिया
- कोई सदस्य पीठासीन अधिकारी की सहमति से विशेषाधिकार का प्रश्न उठाता है — लोकसभा में नियम 222, राज्यसभा में नियम 187 (लिखित सूचना, उसी दिन बैठक शुरू होने से पहले)।
- अध्यक्ष/सभापति प्रथम दृष्टया जाँचते हैं — सहमति देने या अस्वीकार करने का निर्णय; वे स्वयं भी मामला सीधे समिति को भेज सकते हैं।
- सहमति मिलने पर सदन की अनुमति से प्रश्न उठाया जाता है; सदन स्वयं निर्णय करे या विशेषाधिकार समिति को भेजे।
- विशेषाधिकार समिति: लोकसभा में 15 सदस्य (अध्यक्ष द्वारा नामित), राज्यसभा में 10 (उपसभापति अध्यक्ष) — अर्ध-न्यायिक जाँच, साक्ष्य, सुनवाई।
- समिति का प्रतिवेदन सदन में — सदन दंड पर अंतिम निर्णय लेता है: भर्त्सना (admonition), फटकार (reprimand), सत्र की समाप्ति तक कारावास; सदस्य हेतु निलंबन या निष्कासन।
संसदीय समितियों की संरचना संसदीय समितियाँ: PAC, प्राक्कलन व COPU में और अन्य संसदीय प्रस्ताव संसद के सत्र, प्रश्नकाल, शून्यकाल व प्रस्ताव में देखें।
7. प्रमुख न्यायिक निर्णय व घटनाएँ
| मामला | वर्ष | निष्कर्ष |
|---|---|---|
| केशव सिंह (विशेष संदर्भ सं. 1) | 1964 | उत्तर प्रदेश विधानसभा बनाम उच्च न्यायालय टकराव — विशेषाधिकार मौलिक अधिकारों (विशेषतः अनु. 21) के अधीन; न्यायालय की समीक्षा-शक्ति |
| इंदिरा गांधी का निष्कासन | 1978 | छठी लोकसभा ने विशेषाधिकार हनन पर निष्कासित कर कारावास दिया — 1981 में निर्णय वापस लिया गया (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार) |
| पी.वी. नरसिम्हा राव | 1998 | रिश्वत लेकर मत देने वाले सांसद 105(2) से संरक्षित — 2024 में पलटा |
| राजा राम पाल | 2007 | कैश-फ़ॉर-क्वेरी (2005) — 11 सांसदों का निष्कासन वैध; न्यायालय निष्कासन की सीमित समीक्षा कर सकता है |
| सीता सोरेन | 2024 | रिश्वत विशेषाधिकार से संरक्षित नहीं; रिश्वत लेने पर अपराध पूर्ण — मत दिया या नहीं, अप्रासंगिक |
8. संहिताकरण की बहस
| संहिताकरण के पक्ष में | विपक्ष में |
|---|---|
| अस्पष्टता दूर होगी — नागरिक व प्रेस को पता होगा कि क्या वर्जित है | संहिता बनने पर विशेषाधिकार न्यायिक समीक्षा के अधीन आ जाएँगे |
| प्रेस-स्वतंत्रता (19(1)(a)) से टकराव घटेगा | बदलती परिस्थितियों में लचीलापन घटेगा |
| मनमाने प्रयोग पर रोक | ब्रिटेन में भी पूर्ण संहिताकरण नहीं |
संबंधित: लोकसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष | भारतीय संसद: लोकसभा व राज्यसभा की तुलना | भारत के महान्यायवादी (अनु. 76) | स्वतंत्रता का अधिकार: अनुच्छेद 19–22
📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण | हल करने की कुंजी |
|---|---|---|
| स्रोत | 105, 122, 361A | खंड 2 |
| सामूहिक | 8 विशेषाधिकार | खंड 3 |
| व्यक्तिगत | 5 विशेषाधिकार | खंड 4 |
| हनन प्रक्रिया | नियम 222 | खंड 6 |
| निर्णय | सीता सोरेन 2024 | खंड 7 |
🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)
संसदीय विशेषाधिकार किस अनुच्छेद में हैं?
संसद के लिए अनु. 105 और राज्य विधानमंडलों के लिए अनु. 194 में।
सांसदों को गिरफ़्तारी से छूट कब मिलती है?
सत्र या समिति बैठक के दौरान तथा उससे 40 दिन पहले व 40 दिन बाद तक — केवल सिविल मामलों में; आपराधिक मामलों और निवारक निरोध में नहीं।
विशेषाधिकार हनन का प्रश्न कैसे उठाया जाता है?
अध्यक्ष/सभापति की सहमति से (लोकसभा नियम 222, राज्यसभा नियम 187); सदन स्वयं निर्णय करता है या विशेषाधिकार समिति को भेजता है।
सीता सोरेन निर्णय क्या है?
मार्च 2024 में 7-न्यायाधीश पीठ ने कहा कि सदन में मत/भाषण हेतु रिश्वत लेने पर अनु. 105(2)/194(2) की उन्मुक्ति नहीं — 1998 का नरसिम्हा राव निर्णय पलटा।
क्या राष्ट्रपति को संसदीय विशेषाधिकार प्राप्त हैं?
नहीं — राष्ट्रपति संसद का अंग होते हुए भी इनका लाभार्थी नहीं; उनकी उन्मुक्तियाँ अनु. 361 में हैं।
📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)
संसद व उसके सदस्यों के विशेषाधिकार किस अनुच्छेद में हैं?
(A) अनु. 118 (B) अनु. 105 (C) अनु. 194 (D) अनु. 122
✅ उत्तर: (B) अनु. 105 — राज्य विधानमंडल — अनु. 194।
सांसदों को सिविल मामलों में गिरफ़्तारी से छूट — सत्र से पहले व बाद में कितने दिन?
(A) 30 दिन (B) 15 दिन (C) 60 दिन (D) 40 दिन
✅ उत्तर: (D) 40 दिन — सिविल प्रक्रिया संहिता, धारा 135A।
सांसदों को गिरफ़्तारी से छूट किन मामलों में नहीं है?
(A) सत्र के दौरान सिविल मामले (B) समिति बैठक के दौरान सिविल मामले (C) आपराधिक मामले व निवारक निरोध (D) सिविल मामले
✅ उत्तर: (C) आपराधिक मामले व निवारक निरोध — केवल सिविल मामलों में छूट।
सदन में दिए भाषण/मत हेतु रिश्वत लेने पर अनु. 105 की उन्मुक्ति नहीं — किस निर्णय में (2024)?
(A) राजा राम पाल (B) केशव सिंह (C) सीता सोरेन बनाम भारत संघ (D) पी.वी. नरसिम्हा राव
✅ उत्तर: (C) सीता सोरेन बनाम भारत संघ — 7-न्यायाधीश पीठ ने 1998 का निर्णय पलटा।
संसद की कार्यवाही की वैधता की जाँच न्यायालय नहीं कर सकते —
(A) अनु. 122 (B) अनु. 105(2) (C) अनु. 212 (D) अनु. 361A
✅ उत्तर: (A) अनु. 122 — प्रक्रिया की अनियमितता के आधार पर।
‘विशेषाधिकार’ के प्रावधान किन गैर-सदस्यों पर भी लागू होते हैं?
(A) राष्ट्रपति (B) मुख्य न्यायाधीश (C) CAG (D) मंत्री व महान्यायवादी (जो सदन में बोलने के अधिकारी हैं)
✅ उत्तर: (D) मंत्री व महान्यायवादी (जो सदन में बोलने के अधिकारी हैं) — अनु. 105(4)।
विशेषाधिकार हनन के प्रश्न की जाँच हेतु लोकसभा की विशेषाधिकार समिति में सदस्य —
(A) 30 (B) 15 (C) 10 (D) 22
✅ उत्तर: (B) 15 — राज्यसभा — 10।
कैश-फ़ॉर-क्वेरी (2005) मामले में 11 सांसदों के निष्कासन को किस निर्णय में वैध ठहराया गया?
(A) अमरिंदर सिंह (2010) (B) राजा राम पाल (2007) (C) सीता सोरेन (2024) (D) किहोतो होलोहन
✅ उत्तर: (B) राजा राम पाल (2007) — सदन को निष्कासन की शक्ति।
संसद की कार्यवाही के सत्य विवरण के प्रकाशन को संरक्षण देने वाला अनुच्छेद (44वाँ संशोधन) —
(A) अनु. 361A (B) अनु. 105(3) (C) अनु. 19(1)(a) (D) अनु. 122
✅ उत्तर: (A) अनु. 361A — 1977 का अधिनियम भी।
सामूहिक विशेषाधिकार में शामिल नहीं —
(A) विशेषाधिकार हनन पर दंड देना (B) आपराधिक मामलों में गिरफ़्तारी से छूट (C) अजनबियों को बाहर करना (D) गुप्त बैठक
✅ उत्तर: (B) आपराधिक मामलों में गिरफ़्तारी से छूट — यह व्यक्तिगत विशेषाधिकार भी नहीं है।
⚡ One-Liner Revision (Key Facts)
- संसदीय विशेषाधिकार — अनु. 105
- राज्य विधानमंडल — अनु. 194
- कार्यवाही की न्यायिक जाँच वर्जित — अनु. 122
- प्रकाशन संरक्षण — अनु. 361A
- गिरफ़्तारी छूट — 40 दिन, सिविल
- लोकसभा नियम — 222
- विशेषाधिकार समिति (लोकसभा) — 15 सदस्य
- रिश्वत असंरक्षित — सीता सोरेन 2024
✅ परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु (Key Points)
- विशेषाधिकार संहिताबद्ध नहीं।
- मंत्री व AG को भी विशेषाधिकार — 105(4)।
- वाक्-स्वतंत्रता केवल सदन के भीतर।
- अवमानना की परिधि विशेषाधिकार हनन से व्यापक।
- विशेषाधिकार अनु. 21 के अधीन (केशव सिंह)।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- गिरफ़्तारी से छूट आपराधिक मामलों में नहीं।
- राष्ट्रपति विशेषाधिकार के लाभार्थी नहीं।
- 44वें संशोधन ने हाउस ऑफ़ कॉमन्स का संदर्भ हटाया — विशेषाधिकार नहीं घटाए।
- नरसिम्हा राव निर्णय 1998 — 2024 में पलटा।
🧠 याद रखने की ट्रिक (Memory Tricks)
- “105 संसद, 194 राज्य” — जैसे 76 AG, 165 महाधिवक्ता।
- “40-40 का कवच, सिर्फ़ सिविल पर” — गिरफ़्तारी से छूट।
- व्यक्तिगत — “बोलो, न बँधो (गिरफ़्तारी), न जूरी, न गवाही”।
- नियम — “लोक 222, राज्य 187”; समिति — “लोक 15, राज्य 10”।
- “नरसिम्हा 98 बचाया, सोरेन 2024 ने पलटाया”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
सामूहिक बनाम व्यक्तिगत विशेषाधिकार की दो सूचियाँ (खंड 3 व 4) से ‘इनमें से कौन-सा नहीं है’ प्रकार के प्रश्न बनते हैं — हर सूची में एक ‘नकली’ विकल्प (जैसे आपराधिक गिरफ़्तारी से छूट) पहचानने का अभ्यास करें।
✍️ अभ्यास करें — टेस्ट सीरीज़, क्विज़ व करेंट अफेयर्स
संसद के विशेषाधिकार एवं विशेषाधिकार भंग की प्रक्रिया पर अपनी तैयारी परखने के लिए:
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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- भारत का संविधान — अनु. 105, 121, 122, 194, 361A।
- सिविल प्रक्रिया संहिता — धारा 135A; संसदीय कार्यवाही (प्रकाशन संरक्षण) अधिनियम, 1977।
- केशव सिंह (1964), पी.वी. नरसिम्हा राव (1998), राजा राम पाल (2007), सीता सोरेन (2024)।
- लोकसभा नियम 222–228; राज्यसभा नियम 187–203 (sansad.in)।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. संसद व उसके सदस्यों के विशेषाधिकार किस अनुच्छेद में हैं?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. सांसदों को सिविल मामलों में गिरफ़्तारी से छूट — सत्र से पहले व बाद में कितने दिन?
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सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
अनु. 105।
सिविल — 40 दिन।
222।
लोकसभा 15।
नहीं — सीता सोरेन 2024।
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