संख्या पद्धति और विभाज्यता के नियम — अभाज्य संख्याएँ, इकाई अंक, शेषफल, योग सूत्र व गुणनखंड — CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RSSB CET, पटवारी, SSC व RRB NTPC पाठ्यक्रम की गणित/संख्यात्मक अभियोग्यता इकाई; NCERT गणित पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–10)। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: संख्या पद्धति में प्राकृत संख्याएँ 1 से और पूर्ण संख्याएँ 0 से शुरू होती हैं; पूर्णांकों में ऋणात्मक संख्याएँ भी आती हैं, और p/q (q ≠ 0) रूप में लिखी जा सकने वाली हर संख्या परिमेय है, जबकि √2, √3, π जैसी संख्याएँ अपरिमेय हैं। 1 न अभाज्य है न भाज्य, 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है और 1 से 100 के बीच 25 अभाज्य संख्याएँ हैं (1–50 में 15, 51–100 में 10)। विभाज्यता के नियम परीक्षा में सबसे अधिक काम आते हैं — 3 और 9 के लिए अंकों का योग, 4 के लिए अंतिम दो अंक, 8 के लिए अंतिम तीन अंक, और 11 के लिए एकांतर अंकों के योग का अंतर (0 या 11 का गुणज) देखा जाता है। किसी घात का इकाई अंक निकालने के लिए घातांक को 4 से भाग देकर शेषफल देखते हैं (शेष 0 हो तो चौथी घात लें); n! में अंत के शून्य = [n/5] + [n/25] + [n/125] + …, जैसे 100! में 24 शून्य। योग के सूत्र — 1 से n तक n(n+1)/2, वर्गों का n(n+1)(2n+1)/6, घनों का [n(n+1)/2]², पहली n विषम संख्याओं का n² और पहली n सम संख्याओं का n(n+1)। यदि N = aᵐ × bⁿ × cᵖ हो तो गुणनखंडों की संख्या (m+1)(n+1)(p+1) होती है, जैसे 360 = 2³ × 3² × 5 के 24 गुणनखंड हैं। आवर्ती दशमलव 0.363636… = 36/99 = 4/11 और मिश्रित आवर्ती 0.1666… = (16 − 1)/90 = 1/6 होता है।
संक्षिप्त उत्तर
| तथ्य / सूत्र | उत्तर |
|---|---|
| सबसे छोटी प्राकृत संख्या | 1 |
| सबसे छोटी पूर्ण संख्या | 0 |
| सबसे छोटी अभाज्य संख्या / एकमात्र सम अभाज्य | 2 |
| सबसे छोटी भाज्य (संयुक्त) संख्या | 4 |
| सबसे छोटी विषम भाज्य संख्या | 9 |
| 1 का स्वभाव | न अभाज्य, न भाज्य |
| 0 का स्वभाव | सम संख्या; न धनात्मक न ऋणात्मक; अभाज्य/भाज्य नहीं |
| 1–100 में अभाज्य संख्याएँ | 25 (1–50 में 15, 51–100 में 10) |
| 100 से पहले जुड़वाँ अभाज्य युग्म | 8 युग्म |
| 3 और 9 से विभाज्यता | अंकों का योग 3 / 9 से विभाज्य |
| 4 और 8 से विभाज्यता | अंतिम 2 अंक 4 से / अंतिम 3 अंक 8 से विभाज्य |
| 11 से विभाज्यता | एकांतर स्थानों के अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज |
| इकाई अंक का चक्र (2, 3, 7, 8) | हर 4 घात पर दोहराता है |
| n! में अंत के शून्य | [n/5] + [n/25] + [n/125] + … |
| 1 + 2 + … + n | n(n+1)/2 |
| 1² + 2² + … + n² | n(n+1)(2n+1)/6 |
| 1³ + 2³ + … + n³ | [n(n+1)/2]² |
| पहली n विषम / सम संख्याओं का योग | n² / n(n+1) |
| N = aᵐ·bⁿ·cᵖ के गुणनखंडों की संख्या | (m+1)(n+1)(p+1) |
| 0.ababab… (शुद्ध आवर्ती) | ab/99 |
| भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल | शेषफल हमेशा भाजक से छोटा |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
संख्या पद्धति अंकगणित की नींव है। लघुत्तम-महत्तम, सरलीकरण, प्रतिशत और लाभ-हानि — सभी अध्यायों में भाग, गुणनखंड और विभाज्यता के यही नियम बार-बार लगते हैं। इसलिए राजस्थान CET, पटवारी, VDO, SSC और रेलवे परीक्षाओं के गणित भाग में संख्या पद्धति से सीधे प्रश्न भी आते हैं और यह दूसरे अध्यायों के प्रश्नों को तेज़ी से हल करने का औज़ार भी है। इसके बाद अगला स्वाभाविक अध्याय लघुत्तम-महत्तम, सरलीकरण और घातांक है, जो इन्हीं अभाज्य गुणनखंडों पर टिका है।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- राजस्थान CET (12वीं व स्नातक) / पटवारी / VDO — संख्याओं के प्रकार, अभाज्य संख्याएँ, विभाज्यता, योग के सूत्र
- SSC CGL / CHSL / MTS / GD — इकाई अंक, शेषफल, गुणनखंडों की संख्या, अंत के शून्य, लुप्त अंक ज्ञात करना
- RRB NTPC — विभाज्यता से लुप्त अंक, आवर्ती दशमलव, सरल योग श्रेणी
प्रश्न कैसे आते हैं?
- परिभाषा आधारित — "निम्न में से कौन-सी संख्या अपरिमेय है?"
- गिनती आधारित — "1 से 100 के बीच कितनी अभाज्य संख्याएँ हैं?"
- लुप्त अंक — "यदि 57x2 संख्या 9 से विभाज्य है तो x का मान?"
- इकाई अंक / शेषफल — "7⁹⁵ का इकाई अंक?" या "2¹⁰⁰ को 7 से भाग देने पर शेषफल?"
- सूत्र आधारित — योग, गुणनखंडों की संख्या, n! में शून्य, आवर्ती दशमलव का भिन्न रूप
3. संख्याओं के प्रकार
3.1 वर्गीकरण तालिका
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण | याद रखने योग्य बात |
|---|---|---|---|
| प्राकृत संख्याएँ (N) | गिनती की संख्याएँ | 1, 2, 3, 4, … | 0 शामिल नहीं; सबसे छोटी 1 |
| पूर्ण संख्याएँ (W) | 0 सहित प्राकृत संख्याएँ | 0, 1, 2, 3, … | हर प्राकृत संख्या पूर्ण संख्या है, उल्टा नहीं (0) |
| पूर्णांक (Z) | ऋणात्मक, शून्य और धनात्मक पूर्ण संख्याएँ | …, −2, −1, 0, 1, 2, … | 0 न धनात्मक न ऋणात्मक |
| परिमेय (Q) | p/q रूप, p और q पूर्णांक, q ≠ 0 | 3/4, −5, 0, 0.25, 0.333… | सांत या आवर्ती दशमलव वाली हर संख्या परिमेय |
| अपरिमेय | p/q रूप में न लिखी जा सके; दशमलव असांत और अनावर्ती | √2, √3, √5, π, 0.101001000… | 22/7 परिमेय है, π का केवल सन्निकट मान |
| वास्तविक (R) | सभी परिमेय + अपरिमेय | −3, 1/2, √7, π | संख्या रेखा का हर बिंदु एक वास्तविक संख्या |
| सम संख्याएँ | 2 से पूर्णतः विभाज्य | 0, 2, 4, 6, … | रूप 2n |
| विषम संख्याएँ | 2 से विभाज्य नहीं | 1, 3, 5, 7, … | रूप 2n + 1 |
| अभाज्य (रूढ़) | ठीक दो गुणनखंड — 1 और स्वयं | 2, 3, 5, 7, 11 | 2 को छोड़कर सभी अभाज्य विषम |
| भाज्य (संयुक्त) | दो से अधिक गुणनखंड | 4, 6, 8, 9, 10 | सबसे छोटी 4, सबसे छोटी विषम 9 |
| सह-अभाज्य | दो संख्याएँ जिनका HCF 1 हो | (8, 15), (4, 9), (14, 25) | दोनों का स्वयं अभाज्य होना ज़रूरी नहीं |
| जुड़वाँ अभाज्य | अंतर 2 वाले अभाज्य युग्म | (3, 5), (11, 13), (71, 73) | 100 से पहले 8 युग्म |
3.2 0, 1 और 2 — तीन विशेष संख्याएँ
| संख्या | गुण |
|---|---|
| 0 | पूर्ण संख्या है, प्राकृत नहीं; सम है; परिमेय है (0 = 0/1); 0 से भाग परिभाषित नहीं |
| 1 | न अभाज्य न भाज्य (केवल एक गुणनखंड); हर संख्या के साथ सह-अभाज्य |
| 2 | सबसे छोटी अभाज्य और एकमात्र सम अभाज्य संख्या |
3.3 सांत और आवर्ती दशमलव की पहचान
भिन्न p/q को सरलतम रूप में लिखें। यदि हर (q) के अभाज्य गुणनखंड में केवल 2 और/या 5 हों तो दशमलव सांत होगा, अन्यथा असांत आवर्ती।
| भिन्न | हर का गुणनखंड | दशमलव | प्रकार |
|---|---|---|---|
| 7/8 | 2³ | 0.875 | सांत |
| 3/20 | 2² × 5 | 0.15 | सांत |
| 4/11 | 11 | 0.363636… | आवर्ती |
| 1/6 | 2 × 3 | 0.1666… | आवर्ती (3 के कारण) |
| 21/30 | सरलतम 7/10 → 2 × 5 | 0.7 | सांत (पहले सरल करना ज़रूरी) |
4. अभाज्य संख्याएँ (1 से 100)
4.1 दहाई-वार सूची
| अंतराल | अभाज्य संख्याएँ | गिनती |
|---|---|---|
| 1–10 | 2, 3, 5, 7 | 4 |
| 11–20 | 11, 13, 17, 19 | 4 |
| 21–30 | 23, 29 | 2 |
| 31–40 | 31, 37 | 2 |
| 41–50 | 41, 43, 47 | 3 |
| 51–60 | 53, 59 | 2 |
| 61–70 | 61, 67 | 2 |
| 71–80 | 71, 73, 79 | 3 |
| 81–90 | 83, 89 | 2 |
| 91–100 | 97 | 1 |
| कुल | — | 25 |
जुड़वाँ अभाज्य युग्म (100 से पहले): (3, 5), (5, 7), (11, 13), (17, 19), (29, 31), (41, 43), (59, 61), (71, 73) — कुल 8।
4.2 कोई संख्या अभाज्य है या नहीं — √n विधि
नियम: संख्या n के वर्गमूल से ठीक बड़ी पूर्ण संख्या k लें। यदि n, k तक की किसी भी अभाज्य संख्या से विभाज्य नहीं है तो n अभाज्य है। (कारण: यदि n = a × b है तो a या b में से कोई एक √n से छोटा या बराबर होगा।)
| संख्या | √n लगभग | जाँचने वाले अभाज्य | परिणाम |
|---|---|---|---|
| 191 | 13.8 | 2, 3, 5, 7, 11, 13 | किसी से विभाज्य नहीं → अभाज्य |
| 221 | 14.9 | 2, 3, 5, 7, 11, 13 | 221 = 13 × 17 → भाज्य |
| 323 | 18.0 | 2 से 17 तक | 323 = 17 × 19 → भाज्य |
| 397 | 19.9 | 2 से 19 तक | किसी से विभाज्य नहीं → अभाज्य |
| 437 | 20.9 | 2 से 19 तक | 437 = 19 × 23 → भाज्य |
| 899 | 30.0 | 2 से 29 तक | 899 = 29 × 31 → भाज्य |
ध्यान दें: 91 = 7 × 13, 119 = 7 × 17, 133 = 7 × 19, 143 = 11 × 13 और 161 = 7 × 23 — ये "अभाज्य जैसी दिखने वाली" भाज्य संख्याएँ हैं, जो विकल्पों में अक्सर रखी जाती हैं।
5. विभाज्यता के नियम (2 से 13)
5.1 नियम तालिका
| भाजक | नियम | उदाहरण (विभाज्य) |
|---|---|---|
| 2 | इकाई अंक 0, 2, 4, 6 या 8 | 2468 |
| 3 | अंकों का योग 3 से विभाज्य | 2316 (2+3+1+6 = 12) |
| 4 | अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से विभाज्य (या 00) | 2316 (16 ÷ 4 = 4) |
| 5 | इकाई अंक 0 या 5 | 1155 |
| 6 | 2 और 3 दोनों से विभाज्य | 987654 (सम, अंक-योग 39) |
| 7 | इकाई अंक का दुगुना शेष संख्या से घटाएँ; परिणाम 0 या 7 का गुणज | 3913 → 391 − 6 = 385 → 38 − 10 = 28 ✓ |
| 8 | अंतिम तीन अंकों से बनी संख्या 8 से विभाज्य (या 000) | 4512 (512 = 8 × 64) |
| 9 | अंकों का योग 9 से विभाज्य | 234567 (अंक-योग 27) |
| 10 | इकाई अंक 0 | 5470 |
| 11 | (विषम स्थानों के अंकों का योग) − (सम स्थानों के अंकों का योग) = 0 या 11 का गुणज | 13464 → (4+4+1) − (6+3) = 0 ✓ |
| 12 | 3 और 4 दोनों से विभाज्य | 2316 |
| 13 | इकाई अंक का 4 गुना शेष संख्या में जोड़ें; परिणाम 13 का गुणज | 3913 → 391 + 12 = 403 → 40 + 12 = 52 = 13 × 4 ✓ |
5.2 हल किए गए उदाहरण — 7, 11 और 13
| चरण | 7392 की 7 से जाँच | 8778 की 11 से जाँच |
|---|---|---|
| 1 | इकाई अंक 2, उसका दुगुना 4 | दाएँ से विषम स्थान: 8, 7 → योग 15 |
| 2 | 739 − 4 = 735 | दाएँ से सम स्थान: 7, 8 → योग 15 |
| 3 | 73 − 10 = 63 | अंतर 15 − 15 = 0 |
| निष्कर्ष | 63 = 7 × 9 → 7392, 7 से विभाज्य | 0 → 8778, 11 से विभाज्य |
5.3 7, 11 और 13 की संयुक्त विधि (1001 नियम)
1001 = 7 × 11 × 13। संख्या को दाएँ से तीन-तीन अंकों के समूहों में बाँटें और समूहों का एकांतर योग-अंतर निकालें। यदि परिणाम 7, 11 या 13 से विभाज्य है तो मूल संख्या भी उसी से विभाज्य होगी।
- 123123 → 123 − 123 = 0 → 7, 11 और 13 तीनों से विभाज्य (123123 = 1001 × 123)।
- abcabc रूप की हर 6 अंकों वाली संख्या 1001 से, अतः 7, 11 और 13 से विभाज्य होती है।
- abab रूप की 4 अंकों वाली संख्या = ab × 101, इसलिए 101 से विभाज्य होती है।
5.4 भाज्य भाजक का नियम — केवल सह-अभाज्य गुणनखंड लें
किसी भाज्य संख्या से विभाज्यता जाँचने के लिए उसे सह-अभाज्य गुणनखंडों में तोड़ें।
| भाजक | सही जोड़ी (सह-अभाज्य) | गलत जोड़ी (सह-अभाज्य नहीं) |
|---|---|---|
| 12 | 3 × 4 | 2 × 6 |
| 18 | 2 × 9 | 3 × 6 |
| 24 | 3 × 8 | 4 × 6 (12 भी 4 और 6 से विभाज्य है, पर 24 से नहीं) |
| 36 | 4 × 9 | 3 × 12 |
| 45 | 5 × 9 | 3 × 15 |
| 72 | 8 × 9 | 6 × 12 |
5.5 लुप्त अंक वाले प्रश्न — चरणबद्ध
| प्रश्न | हल | उत्तर |
|---|---|---|
| 57x2, 9 से विभाज्य है; x = ? | 5+7+x+2 = 14 + x; 9 का अगला गुणज 18 → x = 4 | 4 |
| 4x56, 3 से विभाज्य है; x का न्यूनतम मान? | 4+x+5+6 = 15 + x; 15 स्वयं 3 का गुणज → x = 0 | 0 (अन्य मान 3, 6, 9) |
| 6x8 को 11 से विभाज्य बनाना है; x = ? | (8 + 6) − x = 14 − x; 0 या 11 होना चाहिए → x = 3 | 3 (638 = 11 × 58) |
| 35x4, 4 से विभाज्य है; x के संभावित मान? | x4 को 4 से विभाज्य होना चाहिए → 04, 24, 44, 64, 84 | 0, 2, 4, 6, 8 |
| 72x6y, 45 से विभाज्य; y = ? (x अधिकतम) | 5 से → y = 0 या 5; 9 से → 7+2+x+6+y = 15+x+y को 9 का गुणज बनाना; y = 0 पर x = 3, y = 5 पर x = 7 | x अधिकतम 7, तब y = 5 |
6. इकाई अंक (Unit Digit) और चक्रीयता
6.1 चक्र तालिका
| आधार का इकाई अंक | घात 1, 2, 3, 4 पर इकाई अंक | चक्र की लंबाई |
|---|---|---|
| 0, 1, 5, 6 | हमेशा वही अंक | 1 |
| 2 | 2, 4, 8, 6 | 4 |
| 3 | 3, 9, 7, 1 | 4 |
| 4 | 4, 6 (विषम घात 4, सम घात 6) | 2 |
| 7 | 7, 9, 3, 1 | 4 |
| 8 | 8, 4, 2, 6 | 4 |
| 9 | 9, 1 (विषम घात 9, सम घात 1) | 2 |
6.2 विधि (चरणबद्ध)
- आधार का केवल इकाई अंक लें (1287⁴³ में केवल 7)।
- घातांक को 4 से भाग दें और शेषफल r निकालें।
- r = 1, 2, 3 हो तो उसी घात का इकाई अंक लें; r = 0 हो तो चौथी घात का इकाई अंक लें।
शर्त: यह विधि धनात्मक पूर्णांक घातांक के लिए है। 4 का चक्र सभी अंकों पर लागू होता है, क्योंकि 2 और 1 लंबाई वाले चक्र भी 4 में पूरे बैठ जाते हैं।
6.3 हल किए गए उदाहरण
| व्यंजक | इकाई अंक का आधार | घात ÷ 4 का शेष | उत्तर |
|---|---|---|---|
| 7⁹⁵ | 7 | 95 ÷ 4 → शेष 3 | 7³ → 3 |
| 2¹⁰⁰ | 2 | 100 ÷ 4 → शेष 0 | 2⁴ → 6 |
| 3⁶⁵ | 3 | 65 ÷ 4 → शेष 1 | 3¹ → 3 |
| 8⁴⁷ | 8 | 47 ÷ 4 → शेष 3 | 8³ → 2 |
| 1287⁴³ | 7 | 43 ÷ 4 → शेष 3 | 3 |
| 13²⁷ | 3 | 27 ÷ 4 → शेष 3 | 7 |
| 22²² | 2 | 22 ÷ 4 → शेष 2 | 4 |
| 4⁹⁹ | 4 | विषम घात | 4 |
| 9⁵⁰ | 9 | सम घात | 1 |
6.4 गुणनफल और योग का इकाई अंक
- 7³⁵ × 3³⁴: 7³⁵ का इकाई अंक 3 (35 ÷ 4 शेष 3), 3³⁴ का 9 (34 ÷ 4 शेष 2) → 3 × 9 = 27 → 7।
- 7³⁵ + 3³⁴: 3 + 9 = 12 → 2।
- 1! + 2! + 3! + … + 100!: 5! से आगे हर क्रमगुणित का इकाई अंक 0 है; 1 + 2 + 6 + 24 = 33 → 3।
- पहली 50 अभाज्य संख्याओं का गुणनफल: इसमें 2 × 5 = 10 है → इकाई अंक 0।
7. n! में अंत के शून्यों की संख्या
अंत का हर शून्य एक जोड़ी (2 × 5) से बनता है। n! में 2 के गुणनखंड 5 से हमेशा अधिक होते हैं, इसलिए शून्यों की संख्या = n! में 5 की घात।
सूत्र: शून्य = [n/5] + [n/25] + [n/125] + [n/625] + … (जहाँ [ ] का अर्थ है भागफल का पूर्णांक भाग)
| n! | गणना | शून्य |
|---|---|---|
| 24! | [24/5] = 4 | 4 |
| 25! | 5 + 1 | 6 |
| 30! | 6 + 1 | 7 |
| 50! | 10 + 2 | 12 |
| 99! | 19 + 3 | 22 |
| 100! | 20 + 4 | 24 |
| 125! | 25 + 5 + 1 | 31 |
| 200! | 40 + 8 + 1 | 49 |
| 1000! | 200 + 40 + 8 + 1 | 249 |
ध्यान दें: 24! से 25! पर शून्य 4 से सीधे 6 हो जाते हैं, क्योंकि 25 = 5 × 5 दो पाँच देता है। इसलिए किसी n! में ठीक 5 शून्य कभी नहीं होते।
8. शेषफल के मूल नियम
8.1 भाग का सूत्र
भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल, जहाँ 0 ≤ शेषफल < भाजक।
| प्रश्न | हल | उत्तर |
|---|---|---|
| भाजक 17, भागफल 9, शेषफल 5; भाज्य = ? | 17 × 9 + 5 = 153 + 5 | 158 |
| किसी संख्या को 36 से भाग देने पर शेष 19 बचता है; उसी संख्या को 12 से भाग देने पर शेष? | 36, 12 का गुणज है → 19 को 12 से भाग दें | 7 |
| भाजक, भागफल का 5 गुना और शेषफल का 2 गुना है; शेषफल 10 हो तो भाज्य? | भाजक = 20, भागफल = 4 → 20 × 4 + 10 | 90 |
शर्त: "बड़े भाजक का शेष, छोटे भाजक से भाग" वाली विधि तभी सही है जब बड़ा भाजक छोटे भाजक का गुणज हो (36, 12 का गुणज है)।
8.2 योग और गुणनफल का शेषफल
(a × b) का n से शेष = (a का शेष × b का शेष) का n से शेष। योग के लिए भी यही नियम है।
| प्रश्न | हल | उत्तर |
|---|---|---|
| (17 × 23) ÷ 5 | 2 × 3 = 6 → 6 ÷ 5 | 1 |
| (37 × 41 × 43) ÷ 7 | 2 × 6 × 1 = 12 → 12 ÷ 7 | 5 |
| 2¹⁰ ÷ 7 | 2³ = 8 → शेष 1; 2¹⁰ = (2³)³ × 2 → 1 × 2 | 2 |
| 2¹⁰⁰ ÷ 7 | 100 = 3 × 33 + 1 → 1 × 2 | 2 |
| 2³¹ ÷ 5 | 2⁴ = 16 → शेष 1; 31 = 4 × 7 + 3 → 2³ = 8 → 8 ÷ 5 | 3 |
| 7⁵⁰ ÷ 6 | 7 → शेष 1 → 1⁵⁰ = 1 | 1 |
| 17²⁰⁰ ÷ 18 | 17 → शेष −1 → (−1)²⁰⁰ = 1 | 1 |
ऋणात्मक शेष की ट्रिक: यदि आधार भाजक से 1 कम है (17 और 18), तो शेष −1 मानें; सम घात पर उत्तर 1 और विषम घात पर उत्तर (भाजक − 1)।
9. योग के सूत्र (श्रेणी)
| श्रेणी | सूत्र | उदाहरण | उत्तर |
|---|---|---|---|
| 1 + 2 + 3 + … + n | n(n+1)/2 | 1 से 50 | 50 × 51/2 = 1275 |
| 1 + 2 + … + 100 | n(n+1)/2 | n = 100 | 5050 |
| 51 + 52 + … + 100 | S(100) − S(50) | 5050 − 1275 | 3775 |
| 1² + 2² + … + n² | n(n+1)(2n+1)/6 | n = 10 | 10 × 11 × 21/6 = 385 |
| 1² + 2² + … + 20² | n(n+1)(2n+1)/6 | n = 20 | 20 × 21 × 41/6 = 2870 |
| 1³ + 2³ + … + n³ | [n(n+1)/2]² | n = 10 | 55² = 3025 |
| 1³ + … + 20³ | [n(n+1)/2]² | n = 20 | 210² = 44100 |
| 1 + 3 + 5 + … (पहली n विषम) | n² | पहली 20 विषम | 400 |
| 1 + 3 + … + 99 | n² (n = 50) | पद = (99 + 1)/2 = 50 | 2500 |
| 2 + 4 + 6 + … (पहली n सम) | n(n+1) | पहली 20 सम | 420 |
| 2 + 4 + … + 100 | n(n+1) (n = 50) | 50 × 51 | 2550 |
रोचक तथ्य: 1³ + 2³ + … + n³ = (1 + 2 + … + n)² — घनों का योग, प्राकृत संख्याओं के योग का वर्ग होता है।
10. गुणनखंडों की संख्या और उनका योग
पहले संख्या को अभाज्य गुणनखंडों में लिखें: N = aᵐ × bⁿ × cᵖ
- गुणनखंडों की संख्या = (m + 1)(n + 1)(p + 1)
- गुणनखंडों का योग = (1 + a + … + aᵐ)(1 + b + … + bⁿ)(1 + c + … + cᵖ)
- विषम गुणनखंड: 2 की घात को छोड़कर शेष घातों से गिनें; सम गुणनखंड = कुल − विषम
| संख्या | अभाज्य गुणनखंड | गुणनखंडों की संख्या | गुणनखंडों का योग | विषम गुणनखंड |
|---|---|---|---|---|
| 72 | 2³ × 3² | 4 × 3 = 12 | 15 × 13 = 195 | 3 |
| 360 | 2³ × 3² × 5 | 4 × 3 × 2 = 24 | 15 × 13 × 6 = 1170 | 3 × 2 = 6 |
| 100 | 2² × 5² | 3 × 3 = 9 | 7 × 31 = 217 | 3 |
| 120 | 2³ × 3 × 5 | 4 × 2 × 2 = 16 | 15 × 4 × 6 = 360 | 4 |
| 210 | 2 × 3 × 5 × 7 | 2⁴ = 16 | 3 × 4 × 6 × 8 = 576 | 8 |
| 1800 | 2³ × 3² × 5² | 4 × 3 × 3 = 36 | 15 × 13 × 31 = 6045 | 9 |
| 2520 | 2³ × 3² × 5 × 7 | 4 × 3 × 2 × 2 = 48 | 15 × 13 × 6 × 8 = 9360 | 12 |
पूर्ण वर्ग की पहचान: केवल पूर्ण वर्ग संख्याओं के गुणनखंडों की संख्या विषम होती है — 36 के 9, 49 के 3, 100 के 9 और 144 के 15 गुणनखंड हैं।
11. आवर्ती दशमलव को भिन्न में बदलना
11.1 नियम
| प्रकार | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| शुद्ध आवर्ती (दशमलव के तुरंत बाद से दोहराव) | अंश = दोहराने वाले अंक; हर = उतने ही 9 | 0.363636… = 36/99 = 4/11 |
| मिश्रित आवर्ती (कुछ अंक दोहराते नहीं) | अंश = (पूरे अंक) − (न दोहराने वाले अंक); हर = दोहराने वाले अंकों जितने 9, फिर न दोहराने वाले अंकों जितने 0 | 0.1666… = (16 − 1)/90 = 15/90 = 1/6 |
| पूर्णांक भाग सहित | पूर्णांक अलग रखें, दशमलव भाग बदलें | 3.454545… = 3 + 45/99 = 3 + 5/11 = 38/11 |
11.2 हल किए गए उदाहरण
| दशमलव | चरण | भिन्न |
|---|---|---|
| 0.333… | 3/9 | 1/3 |
| 0.222… | 2/9 | 2/9 |
| 1.222… | 1 + 2/9 | 11/9 |
| 0.2454545… (45 दोहराता है) | (245 − 2)/990 = 243/990 | 27/110 |
| 0.1252525… (25 दोहराता है) | (125 − 1)/990 = 124/990 | 62/495 |
| 0.571428571428… | 571428/999999 | 4/7 |
| 0.999… | 9/9 | 1 |
11.3 क्यों काम करता है (एक उदाहरण से)
- माना x = 0.363636…
- दोहराने वाले अंक 2 हैं, इसलिए 100 से गुणा: 100x = 36.363636…
- घटाएँ: 100x − x = 36 → 99x = 36
- x = 36/99 = 4/11
12. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: 1 को अभाज्य मान लेना
"1 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है" — गलत। अभाज्य संख्या के ठीक दो गुणनखंड होते हैं; 1 का केवल एक। सबसे छोटी अभाज्य संख्या 2 है।
Trap 2: 0 प्राकृत संख्या?
स्कूली परिभाषा (NCERT) में प्राकृत संख्याएँ 1 से शुरू होती हैं, इसलिए 0 पूर्ण संख्या है पर प्राकृत नहीं। विकल्पों में "0 सबसे छोटी प्राकृत संख्या" आए तो वह गलत है।
Trap 3: 22/7 = π?
22/7 परिमेय संख्या है, जबकि π अपरिमेय है। 22/7 केवल π का सन्निकट मान है (π ≈ 3.14159…, 22/7 ≈ 3.142857…)।
Trap 4: सह-अभाज्य संख्याएँ स्वयं अभाज्य हों
8 और 15 दोनों भाज्य हैं, फिर भी सह-अभाज्य हैं क्योंकि HCF(8, 15) = 1। सह-अभाज्यता जोड़ी का गुण है, अलग संख्या का नहीं।
Trap 5: 24 की विभाज्यता के लिए 4 और 6 जाँचना
12 संख्या 4 और 6 दोनों से विभाज्य है पर 24 से नहीं। भाजक को सदैव सह-अभाज्य गुणनखंडों (3 × 8) में तोड़ें।
Trap 6: इकाई अंक में शेष 0 का अर्थ
2¹⁰⁰ में 100 ÷ 4 का शेष 0 है, इसलिए उत्तर 2⁰ = 1 नहीं, बल्कि 2⁴ का इकाई अंक 6 है।
Trap 7: n! में शून्य = n/5
100! में शून्य 100/5 = 20 नहीं, बल्कि 20 + 4 = 24 हैं, क्योंकि 25, 50, 75 और 100 में दो-दो पाँच होते हैं।
Trap 8: 0.999… को 1 से छोटा मानना
0.999… = 9/9 = 1। x = 0.999… लेकर 10x − x = 9 → x = 1। यह परिमेय है और ठीक 1 के बराबर है।
Trap 9: सांत दशमलव की जाँच बिना सरल किए
21/30 का हर 30 = 2 × 3 × 5 दिखता है, पर सरलतम रूप 7/10 है, जिसका दशमलव 0.7 सांत है। पहले भिन्न को सरलतम रूप में लाएँ।
Trap 10: पहली n विषम संख्याओं में n गलत गिनना
1 + 3 + … + 99 में 99 पद नहीं, बल्कि (99 + 1)/2 = 50 पद हैं; योग 50² = 2500।
13. Most-Asked रिवीज़न तालिका (50 तथ्य)
| क्रम | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | सबसे छोटी प्राकृत संख्या | 1 |
| 2 | सबसे छोटी पूर्ण संख्या | 0 |
| 3 | सबसे छोटी अभाज्य संख्या | 2 |
| 4 | एकमात्र सम अभाज्य | 2 |
| 5 | सबसे छोटी भाज्य संख्या | 4 |
| 6 | सबसे छोटी विषम भाज्य संख्या | 9 |
| 7 | 1 अभाज्य है या भाज्य? | दोनों नहीं |
| 8 | 1 से 100 तक अभाज्य संख्याएँ | 25 |
| 9 | 1 से 50 तक अभाज्य संख्याएँ | 15 |
| 10 | 51 से 100 तक अभाज्य संख्याएँ | 10 |
| 11 | 100 से छोटी सबसे बड़ी अभाज्य संख्या | 97 |
| 12 | 91 अभाज्य है? | नहीं, 7 × 13 |
| 13 | 100 से पहले जुड़वाँ अभाज्य युग्म | 8 |
| 14 | √2 किस प्रकार की संख्या | अपरिमेय |
| 15 | 22/7 किस प्रकार की संख्या | परिमेय |
| 16 | 0.333… किस प्रकार की संख्या | परिमेय (1/3) |
| 17 | सह-अभाज्य की शर्त | HCF = 1 |
| 18 | 3 से विभाज्यता | अंकों का योग 3 से विभाज्य |
| 19 | 4 से विभाज्यता | अंतिम दो अंक |
| 20 | 8 से विभाज्यता | अंतिम तीन अंक |
| 21 | 9 से विभाज्यता | अंकों का योग 9 से विभाज्य |
| 22 | 11 से विभाज्यता | एकांतर अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज |
| 23 | 12 से विभाज्यता | 3 और 4 दोनों |
| 24 | 24 से विभाज्यता | 3 और 8 दोनों |
| 25 | 1001 के अभाज्य गुणनखंड | 7 × 11 × 13 |
| 26 | abcabc रूप की संख्या किससे विभाज्य | 7, 11, 13 (1001) |
| 27 | 57x2, 9 से विभाज्य; x | 4 |
| 28 | 2, 3, 7, 8 का चक्र | 4 |
| 29 | 4 और 9 का चक्र | 2 |
| 30 | 7⁹⁵ का इकाई अंक | 3 |
| 31 | 2¹⁰⁰ का इकाई अंक | 6 |
| 32 | 9⁵⁰ का इकाई अंक | 1 |
| 33 | 1! + 2! + … + 100! का इकाई अंक | 3 |
| 34 | 50! में अंत के शून्य | 12 |
| 35 | 100! में अंत के शून्य | 24 |
| 36 | 125! में अंत के शून्य | 31 |
| 37 | 1000! में अंत के शून्य | 249 |
| 38 | 2¹⁰⁰ ÷ 7 का शेष | 2 |
| 39 | 17²⁰⁰ ÷ 18 का शेष | 1 |
| 40 | 1 से 100 का योग | 5050 |
| 41 | 1 से 50 का योग | 1275 |
| 42 | 1² से 10² का योग | 385 |
| 43 | 1³ से 10³ का योग | 3025 |
| 44 | पहली 20 विषम संख्याओं का योग | 400 |
| 45 | पहली 20 सम संख्याओं का योग | 420 |
| 46 | 360 के गुणनखंडों की संख्या | 24 |
| 47 | 360 के गुणनखंडों का योग | 1170 |
| 48 | किस संख्या के गुणनखंड विषम संख्या में होते हैं | पूर्ण वर्ग |
| 49 | 0.363636… का भिन्न रूप | 4/11 |
| 50 | 0.1666… का भिन्न रूप | 1/6 |
14. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
इस अध्याय के प्रश्न प्रायः छह ढाँचों में आते हैं। हर ढाँचे के लिए एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न:
- परिभाषा पहचान: "निम्न में से कौन-सी परिमेय संख्या नहीं है — 0.25, 22/7, √5, −3?" (उत्तर: √5)
- लुप्त अंक: "यदि 6x8 संख्या 11 से विभाज्य है तो x?" ((8 + 6) − x = 11 → x = 3)
- इकाई अंक: "(1287)⁴³ का इकाई अंक?" (7 का चक्र, 43 ÷ 4 शेष 3 → 3)
- शेषफल: "(37 × 41 × 43) को 7 से भाग देने पर शेष?" (2 × 6 × 1 = 12 → 5)
- सूत्र प्रयोग: "51 से 100 तक की संख्याओं का योग?" (5050 − 1275 = 3775)
- गुणनखंड: "1800 के कितने गुणनखंड हैं?" (2³ × 3² × 5² → 4 × 3 × 3 = 36)
रणनीति: हर प्रश्न में पहले यह पहचानें कि कौन-सा नियम लगेगा — अंक-योग, अंतिम अंक, चक्र, शेष या अभाज्य गुणनखंड। विकल्पों से उलटी जाँच (back-substitution) लुप्त अंक वाले प्रश्नों में सबसे तेज़ रास्ता है। पूरा अभ्यास राजस्थान पटवारी 2026 टेस्ट सीरीज़ में करें।
15. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. अभाज्य दहाई-वार गिनती: "4-4-2-2-3, 2-2-3-2-1" — 1–10 से 91–100 तक हर दहाई में अभाज्य संख्याएँ; कुल 15 + 10 = 25।
2. 7, 11, 13 = 1001: "सात-ग्यारह-तेरह, एक हज़ार एक का घेरा" — 7 × 11 × 13 = 1001।
3. 7 का नियम: "दुगुना घटाओ"; 13 का नियम: "चौगुना जोड़ो"।
4. चक्र: "2-4-8-6, 3-9-7-1" — 7 का चक्र 3 का उल्टा (7-9-3-1) और 8 का चक्र 2 का उल्टा (8-4-2-6)।
5. शेष 0 = चौथी घात: "शून्य मिले तो चार लगाओ"।
6. विषम योग: "विषम का योग = पदों का वर्ग"; सम योग = n × (n + 1)।
7. आवर्ती दशमलव: "दोहराए तो 9, न दोहराए तो 0" — हर में।
16. कथन अभ्यास
1 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है। — गलत (1 न अभाज्य है न भाज्य; सबसे छोटी अभाज्य 2 है)।
2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है। — सही।
1 से 100 के बीच 25 अभाज्य संख्याएँ हैं। — सही।
22/7 एक अपरिमेय संख्या है। — गलत (22/7 परिमेय है; π अपरिमेय है)।
8 और 15 सह-अभाज्य संख्याएँ हैं। — सही (HCF = 1)।
कोई संख्या 4 और 6 से विभाज्य हो तो 24 से भी विभाज्य होगी। — गलत (12 इसका प्रति-उदाहरण है; 24 के लिए 3 और 8 जाँचें)।
2¹⁰⁰ का इकाई अंक 6 है। — सही।
100! के अंत में 20 शून्य होते हैं। — गलत (24 शून्य होते हैं)।
पहली n विषम प्राकृत संख्याओं का योग n² होता है। — सही।
0.363636… = 4/11। — सही।
91 एक अभाज्य संख्या है। — गलत (91 = 7 × 13)।
केवल पूर्ण वर्ग संख्याओं के गुणनखंडों की संख्या विषम होती है। — सही।
17. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- प्राकृत 1 से, पूर्ण 0 से; 0 सम है पर न धनात्मक न ऋणात्मक।
- परिमेय = p/q (q ≠ 0); √2, √3, π अपरिमेय; 22/7 परिमेय।
- 1 न अभाज्य न भाज्य; 2 एकमात्र सम अभाज्य; सबसे छोटी भाज्य 4, विषम भाज्य 9।
- 1–100 में 25 अभाज्य (15 + 10); जुड़वाँ युग्म 8।
- अभाज्य जाँच: √n तक के अभाज्यों से भाग दें।
- 3, 9 → अंक-योग; 4 → अंतिम 2 अंक; 8 → अंतिम 3 अंक।
- 11 → एकांतर अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज।
- 7 → इकाई का दुगुना घटाओ; 13 → इकाई का चौगुना जोड़ो; 1001 = 7 × 11 × 13।
- भाज्य भाजक को सह-अभाज्य गुणनखंडों में तोड़ें (24 = 3 × 8)।
- इकाई अंक: घात ÷ 4 का शेष; शेष 0 → चौथी घात।
- n! में शून्य = [n/5] + [n/25] + [n/125] + …; 100! → 24।
- भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल; शेष हमेशा भाजक से छोटा।
- Σn = n(n+1)/2; Σn² = n(n+1)(2n+1)/6; Σn³ = [n(n+1)/2]²।
- N = aᵐbⁿcᵖ → गुणनखंड (m+1)(n+1)(p+1); 360 → 24।
- 0.ab ab… = ab/99; मिश्रित आवर्ती में हर = 9 फिर 0।
18. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 5 (विभाज्यता), खंड 6 (इकाई अंक) और खंड 12 (Exam Traps) दोबारा पढ़ें। इसके बाद प्रतिशत के प्रश्नों के लिए प्रतिशत के सूत्र नोट देखें, और परीक्षा-स्तर के अभ्यास के लिए राजस्थान CET (स्नातक) मेगा टेस्ट सीरीज़ या SSC CGL 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
19. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
संख्या पद्धति के प्रश्न सूत्र रटने से अधिक नियम पहचानने पर टिके हैं। संख्याओं के प्रकार और 0, 1, 2 के विशेष गुण पक्के करें, 1–100 की 25 अभाज्य संख्याएँ याद रखें, और विभाज्यता के नियमों को लुप्त अंक वाले प्रश्नों पर अभ्यास से पक्का करें। इकाई अंक, अंत के शून्य, शेषफल और गुणनखंडों की संख्या के प्रश्न एक निश्चित विधि से 30 सेकंड में हल हो जाते हैं — बस चक्र में शेष 0 और 25 के दोहरे पाँच जैसे जाल याद रखें।
1 न अभाज्य न भाज्य | 2 एकमात्र सम अभाज्य | 1–100 में 25 अभाज्य | 3, 9 अंक-योग; 4, 8 अंतिम अंक; 11 एकांतर अंतर | चक्र 4, शेष 0 → चौथी घात | 100! में 24 शून्य | Σn = n(n+1)/2 | (m+1)(n+1)(p+1)
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“संख्या पद्धति और विभाज्यता के नियम — अभाज्य संख्याएँ, इकाई अंक, शेषफल, योग सूत्र व गुणनखंड — CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- संख्या पद्धति और विभाज्यता नियम — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- LCM-HCF, सरलीकरण और घातांक — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- लाभ-हानि और छूट के सूत्र — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- प्रतिशत के सूत्र — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
1 न अभाज्य है न भाज्य। अभाज्य संख्या के ठीक दो गुणनखंड (1 और स्वयं) होते हैं, जबकि 1 का केवल एक गुणनखंड है। सबसे छोटी अभाज्य संख्या 2 है।
1 से 100 तक 25 अभाज्य संख्याएँ हैं — 1 से 50 के बीच 15 और 51 से 100 के बीच 10। सबसे बड़ी 97 है।
जो संख्या p/q (q ≠ 0, p और q पूर्णांक) रूप में लिखी जा सके वह परिमेय है, जैसे 3/4, 0.25, 0.333…। जो इस रूप में न लिखी जा सके और जिसका दशमलव असांत व अनावर्ती हो, वह अपरिमेय है, जैसे √2 और π।
संख्या के विषम स्थानों के अंकों के योग और सम स्थानों के अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज हो तो संख्या 11 से विभाज्य है। जैसे 13464 में (4+4+1) − (6+3) = 0।
इकाई अंक का दुगुना शेष संख्या से घटाएँ और यह क्रिया दोहराएँ; परिणाम 0 या 7 का गुणज हो तो संख्या 7 से विभाज्य है। जैसे 7392 → 739 − 4 = 735 → 73 − 10 = 63।
आधार का इकाई अंक लें और घातांक को 4 से भाग दें। शेष 1, 2, 3 हो तो उसी घात का इकाई अंक लें, शेष 0 हो तो चौथी घात का। जैसे 7⁹⁵ में शेष 3 है, इसलिए उत्तर 7³ का इकाई अंक 3 है।
100! में [100/5] + [100/25] = 20 + 4 = 24 शून्य होते हैं, क्योंकि हर शून्य 2 × 5 की जोड़ी से बनता है और 5 के गुणनखंड कम होते हैं।
संख्या को अभाज्य गुणनखंडों में aᵐ × bⁿ × cᵖ रूप में लिखें; गुणनखंडों की संख्या (m+1)(n+1)(p+1) होगी। जैसे 360 = 2³ × 3² × 5 के 4 × 3 × 2 = 24 गुणनखंड हैं।
शुद्ध आवर्ती दशमलव में दोहराने वाले अंक अंश में और उतने ही 9 हर में लिखते हैं: 0.363636… = 36/99 = 4/11।
पहली n विषम प्राकृत संख्याओं का योग n² होता है। जैसे 1 + 3 + … + 99 में 50 पद हैं, इसलिए योग 2500 है।
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