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संख्या पद्धति और विभाज्यता के नियम — अभाज्य संख्याएँ, इकाई अंक, शेषफल, योग सूत्र व गुणनखंड — CET

महेंद्र ढाका (भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, गणित व बाल विकास-शिक्षाशास्त्र नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
28 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RSSB CET, पटवारी, SSC व RRB NTPC पाठ्यक्रम की गणित/संख्यात्मक अभियोग्यता इकाई; NCERT गणित पाठ्यपुस्तकें (कक्षा 6–10)। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।

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नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें

संक्षिप्त उत्तर: संख्या पद्धति में प्राकृत संख्याएँ 1 से और पूर्ण संख्याएँ 0 से शुरू होती हैं; पूर्णांकों में ऋणात्मक संख्याएँ भी आती हैं, और p/q (q ≠ 0) रूप में लिखी जा सकने वाली हर संख्या परिमेय है, जबकि √2, √3, π जैसी संख्याएँ अपरिमेय हैं। 1 न अभाज्य है न भाज्य, 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है और 1 से 100 के बीच 25 अभाज्य संख्याएँ हैं (1–50 में 15, 51–100 में 10)। विभाज्यता के नियम परीक्षा में सबसे अधिक काम आते हैं — 3 और 9 के लिए अंकों का योग, 4 के लिए अंतिम दो अंक, 8 के लिए अंतिम तीन अंक, और 11 के लिए एकांतर अंकों के योग का अंतर (0 या 11 का गुणज) देखा जाता है। किसी घात का इकाई अंक निकालने के लिए घातांक को 4 से भाग देकर शेषफल देखते हैं (शेष 0 हो तो चौथी घात लें); n! में अंत के शून्य = [n/5] + [n/25] + [n/125] + …, जैसे 100! में 24 शून्य। योग के सूत्र — 1 से n तक n(n+1)/2, वर्गों का n(n+1)(2n+1)/6, घनों का [n(n+1)/2]², पहली n विषम संख्याओं का n² और पहली n सम संख्याओं का n(n+1)। यदि N = aᵐ × bⁿ × cᵖ हो तो गुणनखंडों की संख्या (m+1)(n+1)(p+1) होती है, जैसे 360 = 2³ × 3² × 5 के 24 गुणनखंड हैं। आवर्ती दशमलव 0.363636… = 36/99 = 4/11 और मिश्रित आवर्ती 0.1666… = (16 − 1)/90 = 1/6 होता है।


संक्षिप्त उत्तर

तथ्य / सूत्रउत्तर
सबसे छोटी प्राकृत संख्या1
सबसे छोटी पूर्ण संख्या0
सबसे छोटी अभाज्य संख्या / एकमात्र सम अभाज्य2
सबसे छोटी भाज्य (संयुक्त) संख्या4
सबसे छोटी विषम भाज्य संख्या9
1 का स्वभावन अभाज्य, न भाज्य
0 का स्वभावसम संख्या; न धनात्मक न ऋणात्मक; अभाज्य/भाज्य नहीं
1–100 में अभाज्य संख्याएँ25 (1–50 में 15, 51–100 में 10)
100 से पहले जुड़वाँ अभाज्य युग्म8 युग्म
3 और 9 से विभाज्यताअंकों का योग 3 / 9 से विभाज्य
4 और 8 से विभाज्यताअंतिम 2 अंक 4 से / अंतिम 3 अंक 8 से विभाज्य
11 से विभाज्यताएकांतर स्थानों के अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज
इकाई अंक का चक्र (2, 3, 7, 8)हर 4 घात पर दोहराता है
n! में अंत के शून्य[n/5] + [n/25] + [n/125] + …
1 + 2 + … + nn(n+1)/2
1² + 2² + … + n²n(n+1)(2n+1)/6
1³ + 2³ + … + n³[n(n+1)/2]²
पहली n विषम / सम संख्याओं का योगn² / n(n+1)
N = aᵐ·bⁿ·cᵖ के गुणनखंडों की संख्या(m+1)(n+1)(p+1)
0.ababab… (शुद्ध आवर्ती)ab/99
भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफलशेषफल हमेशा भाजक से छोटा

2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

संख्या पद्धति अंकगणित की नींव है। लघुत्तम-महत्तम, सरलीकरण, प्रतिशत और लाभ-हानि — सभी अध्यायों में भाग, गुणनखंड और विभाज्यता के यही नियम बार-बार लगते हैं। इसलिए राजस्थान CET, पटवारी, VDO, SSC और रेलवे परीक्षाओं के गणित भाग में संख्या पद्धति से सीधे प्रश्न भी आते हैं और यह दूसरे अध्यायों के प्रश्नों को तेज़ी से हल करने का औज़ार भी है। इसके बाद अगला स्वाभाविक अध्याय लघुत्तम-महत्तम, सरलीकरण और घातांक है, जो इन्हीं अभाज्य गुणनखंडों पर टिका है।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★

  • राजस्थान CET (12वीं व स्नातक) / पटवारी / VDO — संख्याओं के प्रकार, अभाज्य संख्याएँ, विभाज्यता, योग के सूत्र
  • SSC CGL / CHSL / MTS / GD — इकाई अंक, शेषफल, गुणनखंडों की संख्या, अंत के शून्य, लुप्त अंक ज्ञात करना
  • RRB NTPC — विभाज्यता से लुप्त अंक, आवर्ती दशमलव, सरल योग श्रेणी

प्रश्न कैसे आते हैं?

  1. परिभाषा आधारित — "निम्न में से कौन-सी संख्या अपरिमेय है?"
  2. गिनती आधारित — "1 से 100 के बीच कितनी अभाज्य संख्याएँ हैं?"
  3. लुप्त अंक — "यदि 57x2 संख्या 9 से विभाज्य है तो x का मान?"
  4. इकाई अंक / शेषफल — "7⁹⁵ का इकाई अंक?" या "2¹⁰⁰ को 7 से भाग देने पर शेषफल?"
  5. सूत्र आधारित — योग, गुणनखंडों की संख्या, n! में शून्य, आवर्ती दशमलव का भिन्न रूप

3. संख्याओं के प्रकार

3.1 वर्गीकरण तालिका

प्रकारपरिभाषाउदाहरणयाद रखने योग्य बात
प्राकृत संख्याएँ (N)गिनती की संख्याएँ1, 2, 3, 4, …0 शामिल नहीं; सबसे छोटी 1
पूर्ण संख्याएँ (W)0 सहित प्राकृत संख्याएँ0, 1, 2, 3, …हर प्राकृत संख्या पूर्ण संख्या है, उल्टा नहीं (0)
पूर्णांक (Z)ऋणात्मक, शून्य और धनात्मक पूर्ण संख्याएँ…, −2, −1, 0, 1, 2, …0 न धनात्मक न ऋणात्मक
परिमेय (Q)p/q रूप, p और q पूर्णांक, q ≠ 03/4, −5, 0, 0.25, 0.333…सांत या आवर्ती दशमलव वाली हर संख्या परिमेय
अपरिमेयp/q रूप में न लिखी जा सके; दशमलव असांत और अनावर्ती√2, √3, √5, π, 0.101001000…22/7 परिमेय है, π का केवल सन्निकट मान
वास्तविक (R)सभी परिमेय + अपरिमेय−3, 1/2, √7, πसंख्या रेखा का हर बिंदु एक वास्तविक संख्या
सम संख्याएँ2 से पूर्णतः विभाज्य0, 2, 4, 6, …रूप 2n
विषम संख्याएँ2 से विभाज्य नहीं1, 3, 5, 7, …रूप 2n + 1
अभाज्य (रूढ़)ठीक दो गुणनखंड — 1 और स्वयं2, 3, 5, 7, 112 को छोड़कर सभी अभाज्य विषम
भाज्य (संयुक्त)दो से अधिक गुणनखंड4, 6, 8, 9, 10सबसे छोटी 4, सबसे छोटी विषम 9
सह-अभाज्यदो संख्याएँ जिनका HCF 1 हो(8, 15), (4, 9), (14, 25)दोनों का स्वयं अभाज्य होना ज़रूरी नहीं
जुड़वाँ अभाज्यअंतर 2 वाले अभाज्य युग्म(3, 5), (11, 13), (71, 73)100 से पहले 8 युग्म

3.2 0, 1 और 2 — तीन विशेष संख्याएँ

संख्यागुण
0पूर्ण संख्या है, प्राकृत नहीं; सम है; परिमेय है (0 = 0/1); 0 से भाग परिभाषित नहीं
1न अभाज्य न भाज्य (केवल एक गुणनखंड); हर संख्या के साथ सह-अभाज्य
2सबसे छोटी अभाज्य और एकमात्र सम अभाज्य संख्या

3.3 सांत और आवर्ती दशमलव की पहचान

भिन्न p/q को सरलतम रूप में लिखें। यदि हर (q) के अभाज्य गुणनखंड में केवल 2 और/या 5 हों तो दशमलव सांत होगा, अन्यथा असांत आवर्ती।

भिन्नहर का गुणनखंडदशमलवप्रकार
7/82³0.875सांत
3/202² × 50.15सांत
4/11110.363636…आवर्ती
1/62 × 30.1666…आवर्ती (3 के कारण)
21/30सरलतम 7/10 → 2 × 50.7सांत (पहले सरल करना ज़रूरी)

4. अभाज्य संख्याएँ (1 से 100)

4.1 दहाई-वार सूची

अंतरालअभाज्य संख्याएँगिनती
1–102, 3, 5, 74
11–2011, 13, 17, 194
21–3023, 292
31–4031, 372
41–5041, 43, 473
51–6053, 592
61–7061, 672
71–8071, 73, 793
81–9083, 892
91–100971
कुल—25

जुड़वाँ अभाज्य युग्म (100 से पहले): (3, 5), (5, 7), (11, 13), (17, 19), (29, 31), (41, 43), (59, 61), (71, 73) — कुल 8।

4.2 कोई संख्या अभाज्य है या नहीं — √n विधि

नियम: संख्या n के वर्गमूल से ठीक बड़ी पूर्ण संख्या k लें। यदि n, k तक की किसी भी अभाज्य संख्या से विभाज्य नहीं है तो n अभाज्य है। (कारण: यदि n = a × b है तो a या b में से कोई एक √n से छोटा या बराबर होगा।)

संख्या√n लगभगजाँचने वाले अभाज्यपरिणाम
19113.82, 3, 5, 7, 11, 13किसी से विभाज्य नहीं → अभाज्य
22114.92, 3, 5, 7, 11, 13221 = 13 × 17 → भाज्य
32318.02 से 17 तक323 = 17 × 19 → भाज्य
39719.92 से 19 तककिसी से विभाज्य नहीं → अभाज्य
43720.92 से 19 तक437 = 19 × 23 → भाज्य
89930.02 से 29 तक899 = 29 × 31 → भाज्य

ध्यान दें: 91 = 7 × 13, 119 = 7 × 17, 133 = 7 × 19, 143 = 11 × 13 और 161 = 7 × 23 — ये "अभाज्य जैसी दिखने वाली" भाज्य संख्याएँ हैं, जो विकल्पों में अक्सर रखी जाती हैं।


5. विभाज्यता के नियम (2 से 13)

5.1 नियम तालिका

भाजकनियमउदाहरण (विभाज्य)
2इकाई अंक 0, 2, 4, 6 या 82468
3अंकों का योग 3 से विभाज्य2316 (2+3+1+6 = 12)
4अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से विभाज्य (या 00)2316 (16 ÷ 4 = 4)
5इकाई अंक 0 या 51155
62 और 3 दोनों से विभाज्य987654 (सम, अंक-योग 39)
7इकाई अंक का दुगुना शेष संख्या से घटाएँ; परिणाम 0 या 7 का गुणज3913 → 391 − 6 = 385 → 38 − 10 = 28 ✓
8अंतिम तीन अंकों से बनी संख्या 8 से विभाज्य (या 000)4512 (512 = 8 × 64)
9अंकों का योग 9 से विभाज्य234567 (अंक-योग 27)
10इकाई अंक 05470
11(विषम स्थानों के अंकों का योग) − (सम स्थानों के अंकों का योग) = 0 या 11 का गुणज13464 → (4+4+1) − (6+3) = 0 ✓
123 और 4 दोनों से विभाज्य2316
13इकाई अंक का 4 गुना शेष संख्या में जोड़ें; परिणाम 13 का गुणज3913 → 391 + 12 = 403 → 40 + 12 = 52 = 13 × 4 ✓

5.2 हल किए गए उदाहरण — 7, 11 और 13

चरण7392 की 7 से जाँच8778 की 11 से जाँच
1इकाई अंक 2, उसका दुगुना 4दाएँ से विषम स्थान: 8, 7 → योग 15
2739 − 4 = 735दाएँ से सम स्थान: 7, 8 → योग 15
373 − 10 = 63अंतर 15 − 15 = 0
निष्कर्ष63 = 7 × 9 → 7392, 7 से विभाज्य0 → 8778, 11 से विभाज्य

5.3 7, 11 और 13 की संयुक्त विधि (1001 नियम)

1001 = 7 × 11 × 13। संख्या को दाएँ से तीन-तीन अंकों के समूहों में बाँटें और समूहों का एकांतर योग-अंतर निकालें। यदि परिणाम 7, 11 या 13 से विभाज्य है तो मूल संख्या भी उसी से विभाज्य होगी।

  • 123123 → 123 − 123 = 0 → 7, 11 और 13 तीनों से विभाज्य (123123 = 1001 × 123)।
  • abcabc रूप की हर 6 अंकों वाली संख्या 1001 से, अतः 7, 11 और 13 से विभाज्य होती है।
  • abab रूप की 4 अंकों वाली संख्या = ab × 101, इसलिए 101 से विभाज्य होती है।

5.4 भाज्य भाजक का नियम — केवल सह-अभाज्य गुणनखंड लें

किसी भाज्य संख्या से विभाज्यता जाँचने के लिए उसे सह-अभाज्य गुणनखंडों में तोड़ें।

भाजकसही जोड़ी (सह-अभाज्य)गलत जोड़ी (सह-अभाज्य नहीं)
123 × 42 × 6
182 × 93 × 6
243 × 84 × 6 (12 भी 4 और 6 से विभाज्य है, पर 24 से नहीं)
364 × 93 × 12
455 × 93 × 15
728 × 96 × 12

5.5 लुप्त अंक वाले प्रश्न — चरणबद्ध

प्रश्नहलउत्तर
57x2, 9 से विभाज्य है; x = ?5+7+x+2 = 14 + x; 9 का अगला गुणज 18 → x = 44
4x56, 3 से विभाज्य है; x का न्यूनतम मान?4+x+5+6 = 15 + x; 15 स्वयं 3 का गुणज → x = 00 (अन्य मान 3, 6, 9)
6x8 को 11 से विभाज्य बनाना है; x = ?(8 + 6) − x = 14 − x; 0 या 11 होना चाहिए → x = 33 (638 = 11 × 58)
35x4, 4 से विभाज्य है; x के संभावित मान?x4 को 4 से विभाज्य होना चाहिए → 04, 24, 44, 64, 840, 2, 4, 6, 8
72x6y, 45 से विभाज्य; y = ? (x अधिकतम)5 से → y = 0 या 5; 9 से → 7+2+x+6+y = 15+x+y को 9 का गुणज बनाना; y = 0 पर x = 3, y = 5 पर x = 7x अधिकतम 7, तब y = 5

6. इकाई अंक (Unit Digit) और चक्रीयता

6.1 चक्र तालिका

आधार का इकाई अंकघात 1, 2, 3, 4 पर इकाई अंकचक्र की लंबाई
0, 1, 5, 6हमेशा वही अंक1
22, 4, 8, 64
33, 9, 7, 14
44, 6 (विषम घात 4, सम घात 6)2
77, 9, 3, 14
88, 4, 2, 64
99, 1 (विषम घात 9, सम घात 1)2

6.2 विधि (चरणबद्ध)

  1. आधार का केवल इकाई अंक लें (1287⁴³ में केवल 7)।
  2. घातांक को 4 से भाग दें और शेषफल r निकालें।
  3. r = 1, 2, 3 हो तो उसी घात का इकाई अंक लें; r = 0 हो तो चौथी घात का इकाई अंक लें।

शर्त: यह विधि धनात्मक पूर्णांक घातांक के लिए है। 4 का चक्र सभी अंकों पर लागू होता है, क्योंकि 2 और 1 लंबाई वाले चक्र भी 4 में पूरे बैठ जाते हैं।

6.3 हल किए गए उदाहरण

व्यंजकइकाई अंक का आधारघात ÷ 4 का शेषउत्तर
7⁹⁵795 ÷ 4 → शेष 37³ → 3
2¹⁰⁰2100 ÷ 4 → शेष 02⁴ → 6
3⁶⁵365 ÷ 4 → शेष 13¹ → 3
8⁴⁷847 ÷ 4 → शेष 38³ → 2
1287⁴³743 ÷ 4 → शेष 33
13²⁷327 ÷ 4 → शेष 37
22²²222 ÷ 4 → शेष 24
4⁹⁹4विषम घात4
9⁵⁰9सम घात1

6.4 गुणनफल और योग का इकाई अंक

  • 7³⁵ × 3³⁴: 7³⁵ का इकाई अंक 3 (35 ÷ 4 शेष 3), 3³⁴ का 9 (34 ÷ 4 शेष 2) → 3 × 9 = 27 → 7।
  • 7³⁵ + 3³⁴: 3 + 9 = 12 → 2।
  • 1! + 2! + 3! + … + 100!: 5! से आगे हर क्रमगुणित का इकाई अंक 0 है; 1 + 2 + 6 + 24 = 33 → 3।
  • पहली 50 अभाज्य संख्याओं का गुणनफल: इसमें 2 × 5 = 10 है → इकाई अंक 0।

7. n! में अंत के शून्यों की संख्या

अंत का हर शून्य एक जोड़ी (2 × 5) से बनता है। n! में 2 के गुणनखंड 5 से हमेशा अधिक होते हैं, इसलिए शून्यों की संख्या = n! में 5 की घात।

सूत्र: शून्य = [n/5] + [n/25] + [n/125] + [n/625] + … (जहाँ [ ] का अर्थ है भागफल का पूर्णांक भाग)

n!गणनाशून्य
24![24/5] = 44
25!5 + 16
30!6 + 17
50!10 + 212
99!19 + 322
100!20 + 424
125!25 + 5 + 131
200!40 + 8 + 149
1000!200 + 40 + 8 + 1249

ध्यान दें: 24! से 25! पर शून्य 4 से सीधे 6 हो जाते हैं, क्योंकि 25 = 5 × 5 दो पाँच देता है। इसलिए किसी n! में ठीक 5 शून्य कभी नहीं होते।


8. शेषफल के मूल नियम

8.1 भाग का सूत्र

भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल, जहाँ 0 ≤ शेषफल < भाजक।

प्रश्नहलउत्तर
भाजक 17, भागफल 9, शेषफल 5; भाज्य = ?17 × 9 + 5 = 153 + 5158
किसी संख्या को 36 से भाग देने पर शेष 19 बचता है; उसी संख्या को 12 से भाग देने पर शेष?36, 12 का गुणज है → 19 को 12 से भाग दें7
भाजक, भागफल का 5 गुना और शेषफल का 2 गुना है; शेषफल 10 हो तो भाज्य?भाजक = 20, भागफल = 4 → 20 × 4 + 1090

शर्त: "बड़े भाजक का शेष, छोटे भाजक से भाग" वाली विधि तभी सही है जब बड़ा भाजक छोटे भाजक का गुणज हो (36, 12 का गुणज है)।

8.2 योग और गुणनफल का शेषफल

(a × b) का n से शेष = (a का शेष × b का शेष) का n से शेष। योग के लिए भी यही नियम है।

प्रश्नहलउत्तर
(17 × 23) ÷ 52 × 3 = 6 → 6 ÷ 51
(37 × 41 × 43) ÷ 72 × 6 × 1 = 12 → 12 ÷ 75
2¹⁰ ÷ 72³ = 8 → शेष 1; 2¹⁰ = (2³)³ × 2 → 1 × 22
2¹⁰⁰ ÷ 7100 = 3 × 33 + 1 → 1 × 22
2³¹ ÷ 52⁴ = 16 → शेष 1; 31 = 4 × 7 + 3 → 2³ = 8 → 8 ÷ 53
7⁵⁰ ÷ 67 → शेष 1 → 1⁵⁰ = 11
17²⁰⁰ ÷ 1817 → शेष −1 → (−1)²⁰⁰ = 11

ऋणात्मक शेष की ट्रिक: यदि आधार भाजक से 1 कम है (17 और 18), तो शेष −1 मानें; सम घात पर उत्तर 1 और विषम घात पर उत्तर (भाजक − 1)।


9. योग के सूत्र (श्रेणी)

श्रेणीसूत्रउदाहरणउत्तर
1 + 2 + 3 + … + nn(n+1)/21 से 5050 × 51/2 = 1275
1 + 2 + … + 100n(n+1)/2n = 1005050
51 + 52 + … + 100S(100) − S(50)5050 − 12753775
1² + 2² + … + n²n(n+1)(2n+1)/6n = 1010 × 11 × 21/6 = 385
1² + 2² + … + 20²n(n+1)(2n+1)/6n = 2020 × 21 × 41/6 = 2870
1³ + 2³ + … + n³[n(n+1)/2]²n = 1055² = 3025
1³ + … + 20³[n(n+1)/2]²n = 20210² = 44100
1 + 3 + 5 + … (पहली n विषम)n²पहली 20 विषम400
1 + 3 + … + 99n² (n = 50)पद = (99 + 1)/2 = 502500
2 + 4 + 6 + … (पहली n सम)n(n+1)पहली 20 सम420
2 + 4 + … + 100n(n+1) (n = 50)50 × 512550

रोचक तथ्य: 1³ + 2³ + … + n³ = (1 + 2 + … + n)² — घनों का योग, प्राकृत संख्याओं के योग का वर्ग होता है।


10. गुणनखंडों की संख्या और उनका योग

पहले संख्या को अभाज्य गुणनखंडों में लिखें: N = aᵐ × bⁿ × cᵖ

  • गुणनखंडों की संख्या = (m + 1)(n + 1)(p + 1)
  • गुणनखंडों का योग = (1 + a + … + aᵐ)(1 + b + … + bⁿ)(1 + c + … + cᵖ)
  • विषम गुणनखंड: 2 की घात को छोड़कर शेष घातों से गिनें; सम गुणनखंड = कुल − विषम
संख्याअभाज्य गुणनखंडगुणनखंडों की संख्यागुणनखंडों का योगविषम गुणनखंड
722³ × 3²4 × 3 = 1215 × 13 = 1953
3602³ × 3² × 54 × 3 × 2 = 2415 × 13 × 6 = 11703 × 2 = 6
1002² × 5²3 × 3 = 97 × 31 = 2173
1202³ × 3 × 54 × 2 × 2 = 1615 × 4 × 6 = 3604
2102 × 3 × 5 × 72⁴ = 163 × 4 × 6 × 8 = 5768
18002³ × 3² × 5²4 × 3 × 3 = 3615 × 13 × 31 = 60459
25202³ × 3² × 5 × 74 × 3 × 2 × 2 = 4815 × 13 × 6 × 8 = 936012

पूर्ण वर्ग की पहचान: केवल पूर्ण वर्ग संख्याओं के गुणनखंडों की संख्या विषम होती है — 36 के 9, 49 के 3, 100 के 9 और 144 के 15 गुणनखंड हैं।


11. आवर्ती दशमलव को भिन्न में बदलना

11.1 नियम

प्रकारनियमउदाहरण
शुद्ध आवर्ती (दशमलव के तुरंत बाद से दोहराव)अंश = दोहराने वाले अंक; हर = उतने ही 90.363636… = 36/99 = 4/11
मिश्रित आवर्ती (कुछ अंक दोहराते नहीं)अंश = (पूरे अंक) − (न दोहराने वाले अंक); हर = दोहराने वाले अंकों जितने 9, फिर न दोहराने वाले अंकों जितने 00.1666… = (16 − 1)/90 = 15/90 = 1/6
पूर्णांक भाग सहितपूर्णांक अलग रखें, दशमलव भाग बदलें3.454545… = 3 + 45/99 = 3 + 5/11 = 38/11

11.2 हल किए गए उदाहरण

दशमलवचरणभिन्न
0.333…3/91/3
0.222…2/92/9
1.222…1 + 2/911/9
0.2454545… (45 दोहराता है)(245 − 2)/990 = 243/99027/110
0.1252525… (25 दोहराता है)(125 − 1)/990 = 124/99062/495
0.571428571428…571428/9999994/7
0.999…9/91

11.3 क्यों काम करता है (एक उदाहरण से)

  1. माना x = 0.363636…
  2. दोहराने वाले अंक 2 हैं, इसलिए 100 से गुणा: 100x = 36.363636…
  3. घटाएँ: 100x − x = 36 → 99x = 36
  4. x = 36/99 = 4/11

12. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)

Trap 1: 1 को अभाज्य मान लेना

"1 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है" — गलत। अभाज्य संख्या के ठीक दो गुणनखंड होते हैं; 1 का केवल एक। सबसे छोटी अभाज्य संख्या 2 है।

Trap 2: 0 प्राकृत संख्या?

स्कूली परिभाषा (NCERT) में प्राकृत संख्याएँ 1 से शुरू होती हैं, इसलिए 0 पूर्ण संख्या है पर प्राकृत नहीं। विकल्पों में "0 सबसे छोटी प्राकृत संख्या" आए तो वह गलत है।

Trap 3: 22/7 = π?

22/7 परिमेय संख्या है, जबकि π अपरिमेय है। 22/7 केवल π का सन्निकट मान है (π ≈ 3.14159…, 22/7 ≈ 3.142857…)।

Trap 4: सह-अभाज्य संख्याएँ स्वयं अभाज्य हों

8 और 15 दोनों भाज्य हैं, फिर भी सह-अभाज्य हैं क्योंकि HCF(8, 15) = 1। सह-अभाज्यता जोड़ी का गुण है, अलग संख्या का नहीं।

Trap 5: 24 की विभाज्यता के लिए 4 और 6 जाँचना

12 संख्या 4 और 6 दोनों से विभाज्य है पर 24 से नहीं। भाजक को सदैव सह-अभाज्य गुणनखंडों (3 × 8) में तोड़ें।

Trap 6: इकाई अंक में शेष 0 का अर्थ

2¹⁰⁰ में 100 ÷ 4 का शेष 0 है, इसलिए उत्तर 2⁰ = 1 नहीं, बल्कि 2⁴ का इकाई अंक 6 है।

Trap 7: n! में शून्य = n/5

100! में शून्य 100/5 = 20 नहीं, बल्कि 20 + 4 = 24 हैं, क्योंकि 25, 50, 75 और 100 में दो-दो पाँच होते हैं।

Trap 8: 0.999… को 1 से छोटा मानना

0.999… = 9/9 = 1। x = 0.999… लेकर 10x − x = 9 → x = 1। यह परिमेय है और ठीक 1 के बराबर है।

Trap 9: सांत दशमलव की जाँच बिना सरल किए

21/30 का हर 30 = 2 × 3 × 5 दिखता है, पर सरलतम रूप 7/10 है, जिसका दशमलव 0.7 सांत है। पहले भिन्न को सरलतम रूप में लाएँ।

Trap 10: पहली n विषम संख्याओं में n गलत गिनना

1 + 3 + … + 99 में 99 पद नहीं, बल्कि (99 + 1)/2 = 50 पद हैं; योग 50² = 2500।


13. Most-Asked रिवीज़न तालिका (50 तथ्य)

क्रमप्रश्नउत्तर
1सबसे छोटी प्राकृत संख्या1
2सबसे छोटी पूर्ण संख्या0
3सबसे छोटी अभाज्य संख्या2
4एकमात्र सम अभाज्य2
5सबसे छोटी भाज्य संख्या4
6सबसे छोटी विषम भाज्य संख्या9
71 अभाज्य है या भाज्य?दोनों नहीं
81 से 100 तक अभाज्य संख्याएँ25
91 से 50 तक अभाज्य संख्याएँ15
1051 से 100 तक अभाज्य संख्याएँ10
11100 से छोटी सबसे बड़ी अभाज्य संख्या97
1291 अभाज्य है?नहीं, 7 × 13
13100 से पहले जुड़वाँ अभाज्य युग्म8
14√2 किस प्रकार की संख्याअपरिमेय
1522/7 किस प्रकार की संख्यापरिमेय
160.333… किस प्रकार की संख्यापरिमेय (1/3)
17सह-अभाज्य की शर्तHCF = 1
183 से विभाज्यताअंकों का योग 3 से विभाज्य
194 से विभाज्यताअंतिम दो अंक
208 से विभाज्यताअंतिम तीन अंक
219 से विभाज्यताअंकों का योग 9 से विभाज्य
2211 से विभाज्यताएकांतर अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज
2312 से विभाज्यता3 और 4 दोनों
2424 से विभाज्यता3 और 8 दोनों
251001 के अभाज्य गुणनखंड7 × 11 × 13
26abcabc रूप की संख्या किससे विभाज्य7, 11, 13 (1001)
2757x2, 9 से विभाज्य; x4
282, 3, 7, 8 का चक्र4
294 और 9 का चक्र2
307⁹⁵ का इकाई अंक3
312¹⁰⁰ का इकाई अंक6
329⁵⁰ का इकाई अंक1
331! + 2! + … + 100! का इकाई अंक3
3450! में अंत के शून्य12
35100! में अंत के शून्य24
36125! में अंत के शून्य31
371000! में अंत के शून्य249
382¹⁰⁰ ÷ 7 का शेष2
3917²⁰⁰ ÷ 18 का शेष1
401 से 100 का योग5050
411 से 50 का योग1275
421² से 10² का योग385
431³ से 10³ का योग3025
44पहली 20 विषम संख्याओं का योग400
45पहली 20 सम संख्याओं का योग420
46360 के गुणनखंडों की संख्या24
47360 के गुणनखंडों का योग1170
48किस संख्या के गुणनखंड विषम संख्या में होते हैंपूर्ण वर्ग
490.363636… का भिन्न रूप4/11
500.1666… का भिन्न रूप1/6

14. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

इस अध्याय के प्रश्न प्रायः छह ढाँचों में आते हैं। हर ढाँचे के लिए एक नमूना (स्वयं बनाया गया) प्रश्न:

  1. परिभाषा पहचान: "निम्न में से कौन-सी परिमेय संख्या नहीं है — 0.25, 22/7, √5, −3?" (उत्तर: √5)
  2. लुप्त अंक: "यदि 6x8 संख्या 11 से विभाज्य है तो x?" ((8 + 6) − x = 11 → x = 3)
  3. इकाई अंक: "(1287)⁴³ का इकाई अंक?" (7 का चक्र, 43 ÷ 4 शेष 3 → 3)
  4. शेषफल: "(37 × 41 × 43) को 7 से भाग देने पर शेष?" (2 × 6 × 1 = 12 → 5)
  5. सूत्र प्रयोग: "51 से 100 तक की संख्याओं का योग?" (5050 − 1275 = 3775)
  6. गुणनखंड: "1800 के कितने गुणनखंड हैं?" (2³ × 3² × 5² → 4 × 3 × 3 = 36)

रणनीति: हर प्रश्न में पहले यह पहचानें कि कौन-सा नियम लगेगा — अंक-योग, अंतिम अंक, चक्र, शेष या अभाज्य गुणनखंड। विकल्पों से उलटी जाँच (back-substitution) लुप्त अंक वाले प्रश्नों में सबसे तेज़ रास्ता है। पूरा अभ्यास राजस्थान पटवारी 2026 टेस्ट सीरीज़ में करें।


15. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. अभाज्य दहाई-वार गिनती: "4-4-2-2-3, 2-2-3-2-1" — 1–10 से 91–100 तक हर दहाई में अभाज्य संख्याएँ; कुल 15 + 10 = 25।

2. 7, 11, 13 = 1001: "सात-ग्यारह-तेरह, एक हज़ार एक का घेरा" — 7 × 11 × 13 = 1001।

3. 7 का नियम: "दुगुना घटाओ"; 13 का नियम: "चौगुना जोड़ो"।

4. चक्र: "2-4-8-6, 3-9-7-1" — 7 का चक्र 3 का उल्टा (7-9-3-1) और 8 का चक्र 2 का उल्टा (8-4-2-6)।

5. शेष 0 = चौथी घात: "शून्य मिले तो चार लगाओ"।

6. विषम योग: "विषम का योग = पदों का वर्ग"; सम योग = n × (n + 1)।

7. आवर्ती दशमलव: "दोहराए तो 9, न दोहराए तो 0" — हर में।


16. कथन अभ्यास

1 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है। — गलत (1 न अभाज्य है न भाज्य; सबसे छोटी अभाज्य 2 है)।

2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है। — सही।

1 से 100 के बीच 25 अभाज्य संख्याएँ हैं। — सही।

22/7 एक अपरिमेय संख्या है। — गलत (22/7 परिमेय है; π अपरिमेय है)।

8 और 15 सह-अभाज्य संख्याएँ हैं। — सही (HCF = 1)।

कोई संख्या 4 और 6 से विभाज्य हो तो 24 से भी विभाज्य होगी। — गलत (12 इसका प्रति-उदाहरण है; 24 के लिए 3 और 8 जाँचें)।

2¹⁰⁰ का इकाई अंक 6 है। — सही।

100! के अंत में 20 शून्य होते हैं। — गलत (24 शून्य होते हैं)।

पहली n विषम प्राकृत संख्याओं का योग n² होता है। — सही।

0.363636… = 4/11। — सही।

91 एक अभाज्य संख्या है। — गलत (91 = 7 × 13)।

केवल पूर्ण वर्ग संख्याओं के गुणनखंडों की संख्या विषम होती है। — सही।


17. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ

  1. प्राकृत 1 से, पूर्ण 0 से; 0 सम है पर न धनात्मक न ऋणात्मक।
  2. परिमेय = p/q (q ≠ 0); √2, √3, π अपरिमेय; 22/7 परिमेय।
  3. 1 न अभाज्य न भाज्य; 2 एकमात्र सम अभाज्य; सबसे छोटी भाज्य 4, विषम भाज्य 9।
  4. 1–100 में 25 अभाज्य (15 + 10); जुड़वाँ युग्म 8।
  5. अभाज्य जाँच: √n तक के अभाज्यों से भाग दें।
  6. 3, 9 → अंक-योग; 4 → अंतिम 2 अंक; 8 → अंतिम 3 अंक।
  7. 11 → एकांतर अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज।
  8. 7 → इकाई का दुगुना घटाओ; 13 → इकाई का चौगुना जोड़ो; 1001 = 7 × 11 × 13।
  9. भाज्य भाजक को सह-अभाज्य गुणनखंडों में तोड़ें (24 = 3 × 8)।
  10. इकाई अंक: घात ÷ 4 का शेष; शेष 0 → चौथी घात।
  11. n! में शून्य = [n/5] + [n/25] + [n/125] + …; 100! → 24।
  12. भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल; शेष हमेशा भाजक से छोटा।
  13. Σn = n(n+1)/2; Σn² = n(n+1)(2n+1)/6; Σn³ = [n(n+1)/2]²।
  14. N = aᵐbⁿcᵖ → गुणनखंड (m+1)(n+1)(p+1); 360 → 24।
  15. 0.ab ab… = ab/99; मिश्रित आवर्ती में हर = 9 फिर 0।

18. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद इस पृष्ठ के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 5 (विभाज्यता), खंड 6 (इकाई अंक) और खंड 12 (Exam Traps) दोबारा पढ़ें। इसके बाद प्रतिशत के प्रश्नों के लिए प्रतिशत के सूत्र नोट देखें, और परीक्षा-स्तर के अभ्यास के लिए राजस्थान CET (स्नातक) मेगा टेस्ट सीरीज़ या SSC CGL 2026 टेस्ट सीरीज़ हल करें।


19. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

संख्या पद्धति के प्रश्न सूत्र रटने से अधिक नियम पहचानने पर टिके हैं। संख्याओं के प्रकार और 0, 1, 2 के विशेष गुण पक्के करें, 1–100 की 25 अभाज्य संख्याएँ याद रखें, और विभाज्यता के नियमों को लुप्त अंक वाले प्रश्नों पर अभ्यास से पक्का करें। इकाई अंक, अंत के शून्य, शेषफल और गुणनखंडों की संख्या के प्रश्न एक निश्चित विधि से 30 सेकंड में हल हो जाते हैं — बस चक्र में शेष 0 और 25 के दोहरे पाँच जैसे जाल याद रखें।

1 न अभाज्य न भाज्य | 2 एकमात्र सम अभाज्य | 1–100 में 25 अभाज्य | 3, 9 अंक-योग; 4, 8 अंतिम अंक; 11 एकांतर अंतर | चक्र 4, शेष 0 → चौथी घात | 100! में 24 शून्य | Σn = n(n+1)/2 | (m+1)(n+1)(p+1)


अंतिम संशोधन (Last Updated):
RPSC / RSSB सिलेबस के अनुसार
भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, गणित व बाल विकास-शिक्षाशास्त्र नोट्स लेखकलेखक परिचय

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“संख्या पद्धति और विभाज्यता के नियम — अभाज्य संख्याएँ, इकाई अंक, शेषफल, योग सूत्र व गुणनखंड — CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

1 न अभाज्य है न भाज्य। अभाज्य संख्या के ठीक दो गुणनखंड (1 और स्वयं) होते हैं, जबकि 1 का केवल एक गुणनखंड है। सबसे छोटी अभाज्य संख्या 2 है।

1 से 100 तक 25 अभाज्य संख्याएँ हैं — 1 से 50 के बीच 15 और 51 से 100 के बीच 10। सबसे बड़ी 97 है।

जो संख्या p/q (q ≠ 0, p और q पूर्णांक) रूप में लिखी जा सके वह परिमेय है, जैसे 3/4, 0.25, 0.333…। जो इस रूप में न लिखी जा सके और जिसका दशमलव असांत व अनावर्ती हो, वह अपरिमेय है, जैसे √2 और π।

संख्या के विषम स्थानों के अंकों के योग और सम स्थानों के अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज हो तो संख्या 11 से विभाज्य है। जैसे 13464 में (4+4+1) − (6+3) = 0।

इकाई अंक का दुगुना शेष संख्या से घटाएँ और यह क्रिया दोहराएँ; परिणाम 0 या 7 का गुणज हो तो संख्या 7 से विभाज्य है। जैसे 7392 → 739 − 4 = 735 → 73 − 10 = 63।

आधार का इकाई अंक लें और घातांक को 4 से भाग दें। शेष 1, 2, 3 हो तो उसी घात का इकाई अंक लें, शेष 0 हो तो चौथी घात का। जैसे 7⁹⁵ में शेष 3 है, इसलिए उत्तर 7³ का इकाई अंक 3 है।

100! में [100/5] + [100/25] = 20 + 4 = 24 शून्य होते हैं, क्योंकि हर शून्य 2 × 5 की जोड़ी से बनता है और 5 के गुणनखंड कम होते हैं।

संख्या को अभाज्य गुणनखंडों में aᵐ × bⁿ × cᵖ रूप में लिखें; गुणनखंडों की संख्या (m+1)(n+1)(p+1) होगी। जैसे 360 = 2³ × 3² × 5 के 4 × 3 × 2 = 24 गुणनखंड हैं।

शुद्ध आवर्ती दशमलव में दोहराने वाले अंक अंश में और उतने ही 9 हर में लिखते हैं: 0.363636… = 36/99 = 4/11।

पहली n विषम प्राकृत संख्याओं का योग n² होता है। जैसे 1 + 3 + … + 99 में 50 पद हैं, इसलिए योग 2500 है।

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