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राजस्थान इतिहास

राजस्थान के स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका — RAS/CET

सुधीर ढाका (इतिहास, कला-संस्कृति, हिंदी व्याकरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी नोट्स लेखक)
प्रकाशित:
24 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान इतिहास इकाई। पाठ्यपुस्तक पृष्ठ यहाँ नहीं चिपकाए गए।

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संक्षिप्त उत्तर: राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका तीन धाराओं में दिखती है — किसान आंदोलन, प्रजामंडल आंदोलन और महिला शिक्षा/समाज-सुधार। बिजोलिया किसान आंदोलन में अंजना देवी चौधरी (पत्नी — रामनारायण चौधरी) और नारायणी देवी वर्मा (पत्नी — माणिक्यलाल वर्मा) ने महिलाओं को संगठित किया; नारायणी देवी ने 1944 में भीलवाड़ा में महिला आश्रम स्थापित किया। शेखावाटी में 25 अप्रैल 1934 को कटराथल (सीकर) में लगभग 10,000 महिलाओं का सम्मेलन हुआ, जिसकी अध्यक्षता किशोरी देवी (पत्नी — सरदार हरलाल सिंह) ने की; उत्तमा देवी (पत्नी — ठाकुर देशराज) और दुर्गा देवी शर्मा भी सक्रिय रहीं। रतन शास्त्री (पत्नी — हीरालाल शास्त्री) ने 1935 में श्री शान्ताबाई शिक्षा कुटीर शुरू की, जो 1943 में वनस्थली विद्यापीठ बनी। जानकी देवी बजाज (पत्नी — जमनालाल बजाज) जयपुर प्रजामंडल के दौर से जुड़ी रहीं। वागड़ में 19 जून 1947 के रास्तापाल (डूंगरपुर) कांड में लगभग 13 वर्ष की भील बालिका कालीबाई ने अपने शिक्षक सेंगाभाई को बचाते हुए प्राण दिए; पाठशाला के संरक्षक नानाभाई खांट भी शहीद हुए।


संक्षिप्त उत्तर

बिंदु

तथ्य

याद रखने योग्य संकेत

अंजना देवी चौधरी

बिजोलिया किसान आंदोलन; महिलाओं का संगठन

पति — रामनारायण चौधरी

नारायणी देवी वर्मा

बिजोलिया/मेवाड़; महिला आश्रम, भीलवाड़ा (1944)

पति — माणिक्यलाल वर्मा

रतन शास्त्री

शान्ताबाई शिक्षा कुटीर (1935) → वनस्थली विद्यापीठ (1943)

पति — हीरालाल शास्त्री (राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री)

किशोरी देवी

कटराथल महिला सम्मेलन की अध्यक्ष (25 अप्रैल 1934)

पति — सरदार हरलाल सिंह (शेखावाटी)

उत्तमा देवी

कटराथल सम्मेलन की प्रमुख वक्ता

पति — ठाकुर देशराज

दुर्गा देवी शर्मा

शेखावाटी में महिला जागरण; कटराथल से जुड़ा उल्लेख

शेखावाटी की प्रमुख महिला कार्यकर्ता

जानकी देवी बजाज

जयपुर प्रजामंडल दौर, रचनात्मक कार्य; पद्म विभूषण (1956)

पति — जमनालाल बजाज

कालीबाई

रास्तापाल कांड, डूंगरपुर — 19 जून 1947

शिक्षक सेंगाभाई को बचाते हुए शहीद

नानाभाई खांट

रास्तापाल पाठशाला के संरक्षक; पुलिस की मार से शहीद

पुरुष — पर कालीबाई प्रसंग से जुड़े

कटराथल सम्मेलन

सीकर ठिकाना (जयपुर राज्य), लगभग 10,000 महिलाएँ

सिहोट ठाकुर द्वारा महिलाओं से दुर्व्यवहार का विरोध

वनस्थली विद्यापीठ

वनस्थली (निवाई, टोंक); डीम्ड विश्वविद्यालय (1983)

जीवन कुटीर 1929 → शिक्षा कुटीर 1935 → विद्यापीठ 1943

महिला आश्रम

भीलवाड़ा, 1944

नारायणी देवी वर्मा

महिला शिक्षा सदन

हटूंडी (अजमेर)

हरिभाऊ उपाध्याय से जुड़ा


2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?

RAS मुख्य परीक्षा के "आधुनिक राजस्थान — राजनीतिक जागरण, किसान-जनजातीय व प्रजामंडल आंदोलन" खंड में महिलाओं की भूमिका एक स्वतंत्र विश्लेषणात्मक प्रश्न के रूप में पूछी जा सकती है (जैसे "राजस्थान के स्वतंत्रता संघर्ष में महिलाओं के योगदान का मूल्यांकन कीजिए")। प्रारंभिक परीक्षा, राजस्थान CET, पटवारी और REET में इसी विषय से "व्यक्ति — पति — आंदोलन — स्थान" वाले मिलान प्रश्न और कालीबाई/कटराथल/वनस्थली जैसे एक-पंक्ति तथ्य आते हैं।

यह नोट हर आंदोलन का पूरा विवरण नहीं दोहराता — बिजोलिया, शेखावाटी, जयपुर व मेवाड़ प्रजामंडल के विस्तृत नोट अलग से उपलब्ध हैं (खंड 17 देखें)। यहाँ केवल उन आंदोलनों में महिलाओं की भागीदारी, संस्थाएँ और परीक्षा-जाल पर ध्यान है।

परीक्षा उपयोगिता: ★★★★☆

  • RPSC RAS प्रारंभिक व मुख्य — कटराथल सम्मेलन, वनस्थली, कालीबाई; मुख्य परीक्षा में "महिलाओं का योगदान" पर लघु/मध्यम उत्तर

  • राजस्थान CET (12वीं व स्नातक) — पति-पत्नी जोड़ियाँ, रास्तापाल कांड की तिथि व जिला

  • पटवारी, VDO, SI — "महिला आश्रम भीलवाड़ा किसने स्थापित किया?" जैसे सीधे प्रश्न

  • REET — महिला शिक्षा संस्थाएँ (वनस्थली), कालीबाई (शिक्षा के लिए बलिदान)


3. पृष्ठभूमि: रियासती राजस्थान में महिलाएँ और जागरण के कारण

बीसवीं सदी के प्रारंभ में राजपूताना की अधिकांश जनता दोहरी गुलामी में थी — ऊपर ब्रिटिश सर्वोच्चता और नीचे रियासती शासक व ठिकानेदार (जागीरदार)। महिलाओं की स्थिति इससे भी कठिन थी: पर्दा प्रथा, बाल विवाह, शिक्षा का लगभग अभाव, और ठिकानों में बेगार व लाग-बाग का बोझ, जो किसान परिवार की स्त्रियों पर भी पड़ता था।

3.1 जागरण के प्रमुख कारण

  1. किसान आंदोलनों का पारिवारिक स्वरूप — बिजोलिया और शेखावाटी जैसे आंदोलनों में पूरा परिवार (पुरुष, स्त्री, बच्चे) लगान व बेगार के विरुद्ध खड़ा हुआ। जब पुरुष जेल जाते, तो घर और आंदोलन दोनों स्त्रियाँ संभालतीं।

  2. गांधीवादी रचनात्मक कार्यक्रम — खादी, चरखा, नशाबंदी, अस्पृश्यता-निवारण और स्त्री-शिक्षा जैसे कार्यक्रमों ने महिलाओं के लिए "घर से बाहर" आने का सम्मानजनक रास्ता खोला।

  3. दंपती कार्यकर्ता परंपरा — राजस्थान में अनेक नेता अपनी पत्नियों के साथ आंदोलन में उतरे: रामनारायण चौधरी–अंजना देवी, माणिक्यलाल वर्मा–नारायणी देवी, हीरालाल शास्त्री–रतन शास्त्री, सरदार हरलाल सिंह–किशोरी देवी, जमनालाल बजाज–जानकी देवी, ठाकुर देशराज–उत्तमा देवी। यही कारण है कि परीक्षा में "पति-पत्नी मिलान" प्रश्न बहुत आते हैं।

  4. सामाजिक अपमान के विरुद्ध आक्रोश — शेखावाटी में ठिकानेदारों द्वारा महिलाओं से दुर्व्यवहार की घटनाएँ सीधे महिला-सम्मेलनों (कटराथल 1934) का कारण बनीं।

  5. शिक्षा संस्थाओं का उदय — वनस्थली (1935 से), भीलवाड़ा महिला आश्रम (1944) और हटूंडी का महिला शिक्षा सदन जैसी संस्थाओं ने महिला कार्यकर्ताओं की नई पीढ़ी तैयार की।

  6. जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा आंदोलन — वागड़ (डूंगरपुर-बाँसवाड़ा) में भोगीलाल पंड्या के सेवा संघ की पाठशालाओं ने भील बालिकाओं तक शिक्षा पहुँचाई; रास्तापाल कांड (1947) इसी संघर्ष का परिणाम था।

3.2 महिलाओं की भागीदारी के रूप

रूप

उदाहरण

टिप्पणी

प्रत्यक्ष सत्याग्रह व गिरफ्तारी

अंजना देवी चौधरी, नारायणी देवी वर्मा

प्रजामंडल/किसान सत्याग्रहों में

सम्मेलन व संगठन

कटराथल महिला सम्मेलन (1934) — किशोरी देवी, उत्तमा देवी

शेखावाटी किसान आंदोलन का हिस्सा

शिक्षा संस्था निर्माण

रतन शास्त्री (वनस्थली), नारायणी देवी (महिला आश्रम)

दीर्घकालीन "रचनात्मक" योगदान

बलिदान

कालीबाई (रास्तापाल, 1947)

शिक्षा के अधिकार के लिए

रचनात्मक/सेवा कार्य

जानकी देवी बजाज

खादी, गो-सेवा, बाद में भूदान


4. किसान आंदोलनों में महिलाएँ

4.1 बिजोलिया किसान आंदोलन (मेवाड़)

बिजोलिया (तत्कालीन मेवाड़ का ठिकाना, अब भीलवाड़ा जिला) का किसान आंदोलन 1897 से लगभग 1941 तक चला और इसे भारत के सबसे लंबे अहिंसक किसान आंदोलनों में गिना जाता है। साधु सीताराम दास, विजय सिंह पथिक और माणिक्यलाल वर्मा इसके प्रमुख नेता रहे। विस्तृत चरणों के लिए बिजोलिया किसान आंदोलन — कारण, नेता, 3 चरण देखें।

महिलाओं की भूमिका:

  • अंजना देवी चौधरी — रामनारायण चौधरी की पत्नी। बिजोलिया क्षेत्र में गाँव-गाँव जाकर महिलाओं को संगठित किया और लगान-बेगार विरोध में उन्हें जोड़ा। कई परीक्षा-पुस्तकों में उन्हें राजस्थान में स्वतंत्रता/जन आंदोलन के दौरान गिरफ्तार होने वाली प्रारंभिक (प्रायः "प्रथम") महिला बताया जाता है; कुछ पुस्तकों में उनकी गिरफ्तारी का संदर्भ बूंदी क्षेत्र (बरड़) के किसान आंदोलन से जोड़ा गया है। तिथि और स्थान पर स्रोत एकमत नहीं हैं, इसलिए परीक्षा में "प्रथम महिला" वाले प्रश्न में विकल्पों को ध्यान से देखें।

  • नारायणी देवी वर्मा — माणिक्यलाल वर्मा की पत्नी। बिजोलिया आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई; बाद में मेवाड़ प्रजामंडल के दौर में भी सक्रिय रहीं।

  • आंदोलन की सामूहिक शक्ति: पुरुषों की गिरफ्तारी के बाद महिलाओं ने खेती-बाड़ी, परिवार और आंदोलन की निरंतरता संभाली; लोकगीतों और भजनों के माध्यम से जागरण हुआ।

4.2 शेखावाटी किसान आंदोलन और कटराथल महिला सम्मेलन (1934)

शेखावाटी (सीकर, झुंझुनूं, चूरू क्षेत्र — तत्कालीन जयपुर राज्य के ठिकाने) में जाट किसानों ने ठिकानेदारों की ऊँची लगान-दरों, लाग-बाग और दुर्व्यवहार के विरुद्ध आंदोलन किया। जनवरी 1934 के सीकर जाट प्रजापति महायज्ञ ने जागरण को गति दी। सम्पूर्ण आंदोलन के लिए शेखावाटी किसान आंदोलन — कटराथल व जयसिंहपुरा पढ़ें।

कटराथल सम्मेलन की मुख्य बातें:

बिंदु

तथ्य

तिथि

25 अप्रैल 1934

स्थान

कटराथल, सीकर (तत्कालीन सीकर ठिकाना, जयपुर राज्य)

उपस्थिति

लगभग 10,000 महिलाएँ (परीक्षा-पुस्तकों का प्रचलित आँकड़ा)

अध्यक्षता

किशोरी देवी — सरदार हरलाल सिंह की पत्नी

प्रमुख वक्ता/आयोजक

उत्तमा देवी (ठाकुर देशराज की पत्नी); दुर्गा देवी शर्मा का भी उल्लेख

तात्कालिक कारण

सिहोट के ठाकुर मानसिंह द्वारा सोतिया का बास गाँव में किसान महिलाओं से दुर्व्यवहार

महत्व

राजस्थान के किसान आंदोलनों में महिलाओं का सबसे बड़ा स्वतंत्र सम्मेलन माना जाता है

कटराथल सम्मेलन की विशेषता यह थी कि यह पुरुषों के आंदोलन का "पूरक" नहीं, बल्कि महिलाओं द्वारा, महिलाओं के सम्मान के प्रश्न पर बुलाया गया सम्मेलन था। ग्रामीण, परदे में रहने वाली स्त्रियों का इतनी बड़ी संख्या में एकत्र होना उस समय की रियासती व्यवस्था के लिए एक बड़ा संदेश था।

4.3 अन्य किसान आंदोलन

बेगूं, बूंदी (बरड़), मारवाड़ और बीकानेर के किसान आंदोलनों में भी महिलाओं की उपस्थिति के उल्लेख मिलते हैं, पर किसी एक नामित महिला-नेता का परीक्षा-स्तरीय तथ्य उतना स्थिर नहीं है जितना बिजोलिया और कटराथल का। इन आंदोलनों के लिए राजस्थान के किसान आंदोलन देखें।


5. प्रजामंडल आंदोलनों में महिलाएँ

1930 के दशक के अंत में हरिपुरा कांग्रेस (1938) के बाद रियासतों में प्रजामंडल उत्तरदायी शासन की माँग लेकर सक्रिय हुए। इनकी पूरी समयरेखा के लिए प्रजामंडल आंदोलन Timeline देखें। महिलाओं की भूमिका रियासतवार इस प्रकार थी —

5.1 जयपुर प्रजामंडल

  • जयपुर प्रजामंडल की स्थापना 1931 में हुई और 1936–37 में जमनालाल बजाज व हीरालाल शास्त्री के नेतृत्व में इसका पुनर्गठन/सक्रियकरण हुआ। विवरण: जयपुर प्रजामंडल — स्थापना व सत्याग्रह।

  • जानकी देवी बजाज — जमनालाल बजाज (जन्म: काशी का बास, सीकर) की पत्नी। 1939 के जयपुर सत्याग्रह के दौर में और गांधीवादी रचनात्मक कार्यों (खादी, गो-सेवा) में सक्रिय; स्वतंत्रता के बाद विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से जुड़ीं। उन्हें 1956 में पद्म विभूषण मिला।

  • रतन शास्त्री — हीरालाल शास्त्री की पत्नी। वनस्थली के रचनात्मक केंद्र को संभालते हुए प्रजामंडल कार्यकर्ताओं के परिवारों का सहारा बनीं; उनका मुख्य योगदान शिक्षा क्षेत्र (खंड 7) में है।

  • शेखावाटी (जयपुर राज्य का भाग) की किशोरी देवी, उत्तमा देवी और दुर्गा देवी शर्मा का योगदान किसान आंदोलन के माध्यम से जयपुर राज्य के व्यापक जागरण से जुड़ता है।

5.2 मेवाड़ प्रजामंडल

  • मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना 1938 में माणिक्यलाल वर्मा ने की। विवरण: मेवाड़ प्रजामंडल — नेता व सत्याग्रह।

  • नारायणी देवी वर्मा — पति के साथ सत्याग्रह व जन-जागरण में सक्रिय; भीलवाड़ा में 1944 में महिला आश्रम की स्थापना कर मेवाड़ क्षेत्र में महिला शिक्षा का केंद्र बनाया।

  • मेवाड़/उदयपुर से कुछ अन्य महिला कार्यकर्ताओं (जैसे शांता त्रिवेदी) के नाम भी पुस्तकों में मिलते हैं; उनके विवरण के लिए खंड 9 देखें।

5.3 बीकानेर, मारवाड़ व अन्य रियासतें

बीकानेर (प्रजामंडल 1936, प्रजा परिषद 1942) और मारवाड़ (लोक परिषद 1938) में राजकीय दमन बहुत कड़ा था, इसलिए महिलाओं की खुली भागीदारी सीमित रही। फिर भी बीकानेर में लक्ष्मी देवी आचार्य का नाम महिला जागरण के संदर्भ में लिया जाता है (विवरण में स्रोत भिन्न — खंड 9)। विस्तार के लिए बीकानेर प्रजामंडल व रायसिंहनगर गोलीकांड और मारवाड़ लोक परिषद व प्रजामंडल देखें।

5.4 वागड़ (डूंगरपुर-बाँसवाड़ा) — शिक्षा के माध्यम से संघर्ष

वागड़ के भील बहुल क्षेत्र में भोगीलाल पंड्या ने सेवा संघ के माध्यम से पाठशालाएँ खोलीं, और 1944 में डूंगरपुर प्रजामंडल बना। डूंगरपुर राज्य इन पाठशालाओं को राजनीतिक जागरण का केंद्र मानकर बंद करवा रहा था — इसी टकराव का चरम बिंदु था रास्तापाल कांड (खंड 6)। वागड़ की रियासतों का इतिहास: वागड़ की रियासतें — डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़।


6. रास्तापाल कांड (19 जून 1947) — कालीबाई का बलिदान

स्वतंत्रता से दो महीने से भी कम पहले, 19 जून 1947 को डूंगरपुर रियासत के रास्तापाल गाँव में वह घटना हुई जिसने कालीबाई को राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध बाल-शहीदों में शामिल कर दिया।

6.1 घटनाक्रम

  1. रास्तापाल में सेवा संघ द्वारा संचालित पाठशाला चल रही थी, जिसके संरक्षक नानाभाई खांट थे और शिक्षक सेंगाभाई (सेंगाभाई भील) थे।

  2. डूंगरपुर राज्य की पुलिस पाठशाला बंद कराने पहुँची। नानाभाई खांट ने पाठशाला बंद करने से इनकार किया, तो उन्हें बुरी तरह पीटा गया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

  3. पुलिस शिक्षक सेंगाभाई को रस्सी से बाँधकर ट्रक (वाहन) के पीछे घसीटते हुए ले जाने लगी।

  4. खेत से लौट रही लगभग 13 वर्ष की भील बालिका कालीबाई (कुछ स्रोतों में आयु 12 वर्ष) ने यह देखा, दौड़कर हँसिए/दराँती से रस्सी काट दी और अपने गुरु को मुक्त कराया।

  5. पुलिस ने गोली चलाई; कालीबाई गंभीर रूप से घायल हुई और कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई (कुछ पुस्तकों में मृत्यु-तिथि 20 जून 1947 दी गई है)। गोलीबारी में अन्य ग्रामीण भी घायल हुए।

6.2 महत्व और स्मृति

  • कालीबाई का बलिदान शिक्षा के अधिकार के लिए दिया गया बलिदान माना जाता है — इसीलिए वह "गुरु-भक्ति" और "शिक्षा की शहीद" दोनों रूपों में याद की जाती है।

  • इस घटना ने डूंगरपुर राज्य के दमन के विरुद्ध जनमत को तेज़ किया और वागड़ में प्रजामंडल आंदोलन को नैतिक बल दिया।

  • राजस्थान सरकार की "कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना" इन्हीं के नाम पर है — परीक्षा में योजना-नाम के रूप में भी पूछा जाता है।

  • वागड़ के भील समाज की स्मृति में कालीबाई गोविंद गुरु और मानगढ़ (1913) की परंपरा के साथ जुड़ी प्रतिरोध-धारा का प्रतीक हैं — देखें राजस्थान के जनजातीय आंदोलन।

व्यक्ति

पहचान

घटना में भूमिका

कालीबाई

लगभग 13 वर्ष की भील बालिका

रस्सी काटकर शिक्षक को छुड़ाया; पुलिस की गोली से शहीद

सेंगाभाई

पाठशाला के शिक्षक

जिन्हें पुलिस बाँधकर घसीट रही थी

नानाभाई खांट

पाठशाला के संरक्षक/संचालक

पाठशाला बंद करने से इनकार; पुलिस की मार से मृत्यु

भोगीलाल पंड्या

वागड़ के गांधी; सेवा संघ के संस्थापक

पाठशालाओं का नेटवर्क (घटना में प्रत्यक्ष नहीं)


7. महिला शिक्षा व संस्थाएँ

7.1 वनस्थली विद्यापीठ (टोंक)

हीरालाल शास्त्री (जन्म: जोबनेर, जयपुर) ने 1929 में जयपुर राज्य की सेवा छोड़कर वनस्थली गाँव (निवाई, अब टोंक जिला) में "जीवन कुटीर" नामक ग्रामसेवा केंद्र शुरू किया। उनकी पुत्री शान्ताबाई की असमय मृत्यु के बाद हीरालाल शास्त्री और रतन शास्त्री ने बालिकाओं की शिक्षा को उसकी स्मृति से जोड़ा।

वर्ष

चरण

1929

जीवन कुटीर — ग्रामसेवा व रचनात्मक कार्य केंद्र (वनस्थली)

1935 (6 अक्टूबर, प्रचलित तिथि)

श्री शान्ताबाई शिक्षा कुटीर — कुछ बालिकाओं के साथ शुरुआत

1943

नाम "वनस्थली विद्यापीठ"

1983

UGC अधिनियम के अंतर्गत डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा

  • वनस्थली की पहचान — "पंचमुखी शिक्षा" (शारीरिक, व्यावहारिक, कलात्मक, नैतिक, बौद्धिक), खादी-वेश, घुड़सवारी, तैराकी और यहाँ तक कि उड्डयन (ग्लाइडिंग/फ्लाइंग क्लब) का प्रशिक्षण।

  • रतन शास्त्री विद्यापीठ की वास्तविक "माँ" मानी जाती हैं — छात्राओं के आवास, अनुशासन और संचालन का भार उन्हीं पर था। उन्हें पद्म श्री (1955) और पद्म भूषण (1975) से सम्मानित किया गया (परीक्षा-पुस्तकों में प्रचलित वर्ष)।

  • हीरालाल शास्त्री 30 मार्च 1949 को वृहत् राजस्थान बनने पर राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री (मनोनीत) बने — देखें वृहद राजस्थान का निर्माण।

7.2 महिला आश्रम, भीलवाड़ा (1944)

नारायणी देवी वर्मा ने 1944 में भीलवाड़ा में महिला आश्रम की स्थापना की। इसका उद्देश्य था — ग्रामीण, विधवा, परित्यक्ता और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को शिक्षा, आवास और आत्मनिर्भरता के कौशल देना; साथ ही आदिवासी (भील) क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार। स्वतंत्रता के बाद नारायणी देवी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहीं और 1970 के दशक में राज्यसभा सदस्य भी रहीं (सामान्यतः उल्लिखित)।

7.3 महिला शिक्षा सदन, हटूंडी (अजमेर)

अजमेर-मेरवाड़ा (ब्रिटिश प्रांत) में गांधीवादी नेता हरिभाऊ उपाध्याय ने हटूंडी में गांधी आश्रम के साथ महिला शिक्षा सदन की स्थापना की, जहाँ स्त्रियों को शिक्षा के साथ खादी और सेवा-कार्य का प्रशिक्षण मिलता था। स्थापना वर्ष पर पुस्तकों में भिन्नता है, इसलिए यहाँ वर्ष नहीं दिया जा रहा; परीक्षा में "हटूंडी — हरिभाऊ उपाध्याय" जोड़ी याद रखें।

7.4 संस्थाओं की तुलना

संस्था

स्थान

संस्थापक/संबद्ध

वर्ष

जीवन कुटीर

वनस्थली (टोंक)

हीरालाल शास्त्री

1929

श्री शान्ताबाई शिक्षा कुटीर

वनस्थली (टोंक)

हीरालाल शास्त्री व रतन शास्त्री

1935

वनस्थली विद्यापीठ

वनस्थली (टोंक)

वही — नया नाम

1943; डीम्ड 1983

महिला आश्रम

भीलवाड़ा

नारायणी देवी वर्मा

1944

महिला शिक्षा सदन

हटूंडी (अजमेर)

हरिभाऊ उपाध्याय

वर्ष पर स्रोत भिन्न

सेवा संघ पाठशालाएँ

वागड़ (डूंगरपुर)

भोगीलाल पंड्या

1930 के दशक से


8. प्रमुख महिलाएँ — व्यक्ति → आंदोलन → स्थान → भूमिका

नीचे केवल वही जोड़ियाँ दी गई हैं जो मानक परीक्षा-पुस्तकों में स्थिर रूप से मिलती हैं।

महिला

पति/संबंध

आंदोलन/क्षेत्र

स्थान

मुख्य भूमिका

अंजना देवी चौधरी

रामनारायण चौधरी

बिजोलिया किसान आंदोलन

बिजोलिया (मेवाड़); बूंदी क्षेत्र का भी उल्लेख

महिलाओं का संगठन; प्रारंभिक महिला बंदी

नारायणी देवी वर्मा

माणिक्यलाल वर्मा

बिजोलिया; मेवाड़ प्रजामंडल

भीलवाड़ा/मेवाड़

महिला आश्रम 1944

रतन शास्त्री

हीरालाल शास्त्री

जयपुर प्रजामंडल दौर; महिला शिक्षा

वनस्थली (टोंक)

शान्ताबाई शिक्षा कुटीर 1935 → वनस्थली विद्यापीठ

किशोरी देवी

सरदार हरलाल सिंह

शेखावाटी किसान आंदोलन

कटराथल (सीकर)

महिला सम्मेलन की अध्यक्ष, 1934

उत्तमा देवी

ठाकुर देशराज

शेखावाटी किसान आंदोलन

कटराथल (सीकर)

सम्मेलन में ओजस्वी भाषण/आयोजन

दुर्गा देवी शर्मा

—

शेखावाटी जागरण

शेखावाटी

महिला जागृति; कटराथल से जुड़ा उल्लेख

जानकी देवी बजाज

जमनालाल बजाज

जयपुर प्रजामंडल दौर; रचनात्मक कार्य

जयपुर/वर्धा

खादी, गो-सेवा, भूदान; पद्म विभूषण 1956

कालीबाई

— (शिष्या — सेंगाभाई)

वागड़ का शिक्षा/प्रजामंडल संघर्ष

रास्तापाल (डूंगरपुर)

19 जून 1947 को बलिदान

8.1 पति-पत्नी जोड़ियाँ — एक नज़र में

पत्नी

पति

पति की पहचान

अंजना देवी चौधरी

रामनारायण चौधरी

बिजोलिया/बेगूं क्षेत्र के कार्यकर्ता, पत्रकार

नारायणी देवी वर्मा

माणिक्यलाल वर्मा

मेवाड़ प्रजामंडल संस्थापक (1938); संयुक्त राजस्थान के प्रधानमंत्री (1948)

रतन शास्त्री

हीरालाल शास्त्री

जयपुर प्रजामंडल; राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री (1949)

किशोरी देवी

सरदार हरलाल सिंह

शेखावाटी (झुंझुनूं) के किसान नेता

उत्तमा देवी

ठाकुर देशराज

जाट किसान जागरण के नेता, लेखक

जानकी देवी बजाज

जमनालाल बजाज

जयपुर प्रजामंडल अध्यक्ष (1938); जन्म — काशी का बास, सीकर

संकेत: "अं-रा, ना-मा, र-ही, कि-ह, उ-दे, जा-ज" — अंजना–रामनारायण, नारायणी–माणिक्यलाल, रतन–हीरालाल, किशोरी–हरलाल, उत्तमा–देशराज, जानकी–जमनालाल।


9. अन्य नाम — स्रोतों में संक्षिप्त उल्लेख (सावधानी सहित)

राजस्थान GK की कई पुस्तकों में स्वतंत्रता आंदोलन की महिलाओं की लंबी सूची मिलती है, पर उनमें से कई नामों के साथ आंदोलन, स्थान या वर्ष की जोड़ी अलग-अलग पुस्तकों में भिन्न है या केवल नाम-मात्र दिया गया है। ऐसे नामों को यहाँ "पहचान स्तर" पर रखा गया है — इन्हें सूची के रूप में पहचानें, पर किसी एक विशेष जोड़ी को बिना पुष्टि के रटें नहीं।

नाम

सामान्यतः जिस संदर्भ में उल्लेख

सावधानी

लक्ष्मी देवी आचार्य

बीकानेर — महिला जागरण/प्रजा परिषद दौर

कार्य-विवरण व वर्ष पर पुस्तकें भिन्न

शांता त्रिवेदी

मेवाड़/उदयपुर — प्रजामंडल व महिला कार्य

केवल क्षेत्र-स्तरीय पहचान रखें

रमा देवी पांडे

स्वतंत्रता आंदोलन की महिला कार्यकर्ताओं की सूची में

आंदोलन/स्थान पर स्रोत भिन्न

सरदार कुंवरी

महिला कार्यकर्ताओं की सूची में

विश्वसनीय विस्तृत विवरण सीमित

विजया बाई

किसान/प्रजामंडल दौर की सूचियों में

जोड़ी स्पष्ट नहीं

गोमती देवी

सूचियों में

जोड़ी स्पष्ट नहीं

महिमा देवी किंकर

सूचियों में

जोड़ी स्पष्ट नहीं

भगवती देवी

सूचियों में

इस नाम की एक से अधिक कार्यकर्ता — भ्रम की आशंका

सत्यभामा

सूचियों में

जोड़ी स्पष्ट नहीं

मोहिनी देवी

सूचियों में

जोड़ी स्पष्ट नहीं

इंदिरा देवी

सूचियों में

इस नाम की एक से अधिक कार्यकर्ता — भ्रम की आशंका

परीक्षा-रणनीति: यदि प्रश्न में इनमें से किसी नाम के साथ एक विशेष आंदोलन जोड़ा गया हो, तो पहले खंड 8 की "स्थिर जोड़ियों" से अन्य विकल्पों को हटाएँ (elimination)। अधिकांश प्रश्न खंड 8 की आठ महिलाओं और खंड 7 की संस्थाओं से ही बनते हैं।


10. "प्रथम" और विशिष्ट तथ्य

तथ्य

उत्तर

टिप्पणी

जन/स्वतंत्रता आंदोलन में गिरफ्तार प्रारंभिक ("प्रथम") महिला

अंजना देवी चौधरी

प्रचलित परीक्षा-उत्तर; स्थान/वर्ष पर स्रोत भिन्न

राजस्थान के किसान आंदोलनों का सबसे बड़ा महिला सम्मेलन

कटराथल, 25 अप्रैल 1934

लगभग 10,000 महिलाएँ

कटराथल सम्मेलन की अध्यक्ष

किशोरी देवी

सरदार हरलाल सिंह की पत्नी

राजस्थान का प्रमुख महिला विश्वविद्यालय (आवासीय)

वनस्थली विद्यापीठ

डीम्ड 1983

भीलवाड़ा महिला आश्रम

नारायणी देवी वर्मा, 1944

—

वागड़ की बाल-शहीद

कालीबाई, रास्तापाल

19 जून 1947

रास्तापाल में शहीद पुरुष

नानाभाई खांट

पाठशाला संरक्षक

पद्म विभूषण (1956) — राजस्थान से जुड़ी गांधीवादी महिला

जानकी देवी बजाज

जमनालाल बजाज की पत्नी

वनस्थली संस्थापक दंपती

हीरालाल शास्त्री–रतन शास्त्री

पुत्री शान्ताबाई की स्मृति


11. आंदोलनवार सारणी — महिलाओं का योगदान

आंदोलन

क्षेत्र

महिलाएँ

स्वरूप

बिजोलिया किसान आंदोलन

मेवाड़ (भीलवाड़ा)

अंजना देवी चौधरी, नारायणी देवी वर्मा

संगठन, सत्याग्रह, गिरफ्तारी

शेखावाटी किसान आंदोलन

सीकर-झुंझुनूं (जयपुर राज्य)

किशोरी देवी, उत्तमा देवी, दुर्गा देवी शर्मा

कटराथल महिला सम्मेलन 1934

जयपुर प्रजामंडल

जयपुर राज्य

जानकी देवी बजाज, रतन शास्त्री

रचनात्मक कार्य, शिक्षा

मेवाड़ प्रजामंडल

उदयपुर/भीलवाड़ा

नारायणी देवी वर्मा

सत्याग्रह; महिला आश्रम 1944

वागड़ शिक्षा-संघर्ष/डूंगरपुर प्रजामंडल

डूंगरपुर

कालीबाई

बलिदान, 19 जून 1947

बीकानेर प्रजामंडल/प्रजा परिषद

बीकानेर

लक्ष्मी देवी आचार्य (उल्लेख)

महिला जागरण — विवरण भिन्न


12. समयरेखा (Timeline)

वर्ष

घटना

1897

बिजोलिया किसान असंतोष का आरंभ (प्रचलित वर्ष)

1929

हीरालाल शास्त्री द्वारा वनस्थली में जीवन कुटीर

1931

जयपुर प्रजामंडल की स्थापना

जनवरी 1934

सीकर जाट प्रजापति महायज्ञ

25 अप्रैल 1934

कटराथल महिला सम्मेलन — अध्यक्ष किशोरी देवी

1935

श्री शान्ताबाई शिक्षा कुटीर, वनस्थली

1936–37

जयपुर प्रजामंडल का पुनर्गठन (जमनालाल बजाज, हीरालाल शास्त्री)

1938

हरिपुरा कांग्रेस; मेवाड़ प्रजामंडल (माणिक्यलाल वर्मा)

1939

जयपुर व मेवाड़ में प्रजामंडल सत्याग्रह

1943

शिक्षा कुटीर का नाम वनस्थली विद्यापीठ

1944

नारायणी देवी वर्मा द्वारा महिला आश्रम, भीलवाड़ा; डूंगरपुर प्रजामंडल

19 जून 1947

रास्तापाल कांड — कालीबाई व नानाभाई खांट शहीद

30 मार्च 1949

वृहत् राजस्थान; हीरालाल शास्त्री प्रथम मुख्यमंत्री

1955

रतन शास्त्री को पद्म श्री

1956

जानकी देवी बजाज को पद्म विभूषण

1983

वनस्थली विद्यापीठ को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा


13. परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्य (One-liners)

  1. कटराथल महिला सम्मेलन — 25 अप्रैल 1934, सीकर।

  2. कटराथल सम्मेलन की अध्यक्ष — किशोरी देवी (पत्नी: सरदार हरलाल सिंह)।

  3. कटराथल सम्मेलन में लगभग 10,000 महिलाएँ एकत्र हुईं।

  4. कटराथल का तात्कालिक कारण — सिहोट ठाकुर मानसिंह द्वारा सोतिया का बास में महिलाओं से दुर्व्यवहार।

  5. उत्तमा देवी — ठाकुर देशराज की पत्नी; कटराथल की प्रमुख वक्ता।

  6. महिला आश्रम, भीलवाड़ा (1944) — नारायणी देवी वर्मा।

  7. अंजना देवी चौधरी — रामनारायण चौधरी की पत्नी; बिजोलिया में महिलाओं का नेतृत्व।

  8. वनस्थली विद्यापीठ — हीरालाल शास्त्री व रतन शास्त्री; टोंक जिला।

  9. शान्ताबाई शिक्षा कुटीर — 1935; वनस्थली विद्यापीठ नाम — 1943।

  10. वनस्थली को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा — 1983।

  11. जानकी देवी बजाज — जमनालाल बजाज की पत्नी; पद्म विभूषण 1956।

  12. रास्तापाल कांड — 19 जून 1947, डूंगरपुर।

  13. कालीबाई ने अपने शिक्षक सेंगाभाई को बचाने के लिए रस्सी काटी।

  14. नानाभाई खांट — रास्तापाल पाठशाला के संरक्षक; पुलिस की मार से शहीद।

  15. रास्तापाल की पाठशाला — भोगीलाल पंड्या के सेवा संघ से संबद्ध।

  16. "कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना" — राजस्थान सरकार की योजना।

  17. महिला शिक्षा सदन, हटूंडी (अजमेर) — हरिभाऊ उपाध्याय।


14. भ्रम व सावधानियाँ (Exam Traps)

Trap 1: नारायणी देवी बनाम अंजना देवी

दोनों बिजोलिया से जुड़ी हैं। महिला आश्रम भीलवाड़ा (1944) — केवल नारायणी देवी वर्मा (माणिक्यलाल वर्मा)। अंजना देवी — रामनारायण चौधरी की पत्नी, "प्रारंभिक महिला बंदी"।

Trap 2: किशोरी देवी बनाम उत्तमा देवी

कटराथल सम्मेलन की अध्यक्ष किशोरी देवी थीं; उत्तमा देवी प्रमुख वक्ता/आयोजक थीं। "अध्यक्षता किसने की?" में किशोरी देवी ही चुनें।

Trap 3: कटराथल बनाम जयसिंहपुरा बनाम कूदन

तीनों शेखावाटी किसान आंदोलन से जुड़े हैं, पर महिला सम्मेलन केवल कटराथल में हुआ (1934)। जयसिंहपुरा हत्याकांड (1934) और कूदन गोलीकांड (1935) अलग घटनाएँ हैं।

Trap 4: वनस्थली — 1929, 1935, 1943 और 1983

1929 = जीवन कुटीर (ग्रामसेवा), 1935 = शिक्षा कुटीर (बालिका शिक्षा का आरंभ), 1943 = "वनस्थली विद्यापीठ" नाम, 1983 = डीम्ड विश्वविद्यालय। "वनस्थली की स्थापना" पूछे जाने पर प्रायः 1935 अपेक्षित होता है।

Trap 5: वनस्थली — जयपुर नहीं, टोंक

वनस्थली आज टोंक जिले (निवाई के पास) में है, यद्यपि स्थापना के समय यह जयपुर राज्य में था। "वर्तमान जिला" पूछे जाने पर टोंक।

Trap 6: कालीबाई — मानगढ़ नहीं, रास्तापाल

मानगढ़ (बाँसवाड़ा) हत्याकांड 1913 में गोविंद गुरु से जुड़ा है। कालीबाई का बलिदान रास्तापाल, डूंगरपुर, 1947 में हुआ। दोनों वागड़ के हैं, इसलिए विकल्पों में साथ आते हैं — देखें गोविंद गुरु व मानगढ़ हत्याकांड 1913।

Trap 7: सेंगाभाई शहीद नहीं, नानाभाई खांट शहीद

पुलिस सेंगाभाई (शिक्षक) को घसीट रही थी, जिन्हें कालीबाई ने छुड़ाया। नानाभाई खांट (संरक्षक) की मृत्यु पुलिस की मार से हुई। "रास्तापाल में किस शिक्षक को बचाया गया?" — सेंगाभाई।

Trap 8: महारानी गायत्री देवी स्वतंत्रता सेनानी नहीं

जयपुर की महारानी गायत्री देवी ने 1943 में जयपुर में बालिका विद्यालय (महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक स्कूल) शुरू किया — यह महिला शिक्षा का योगदान है, पर वे प्रजामंडल/स्वतंत्रता आंदोलन की कार्यकर्ता नहीं थीं। प्रश्न "प्रजामंडल की महिला कार्यकर्ता" पूछे तो उन्हें न चुनें।

Trap 9: जानकी देवी बजाज का जन्म राजस्थान में नहीं

राजस्थान (सीकर — काशी का बास) से जुड़ाव उनके पति जमनालाल बजाज का है। जानकी देवी का कार्यक्षेत्र जयपुर प्रजामंडल दौर के साथ-साथ वर्धा (महाराष्ट्र) भी रहा।

Trap 10: "प्रथम महिला" वाले प्रश्न

"स्वतंत्रता आंदोलन में जेल जाने वाली राजस्थान की प्रथम महिला" — प्रचलित उत्तर अंजना देवी चौधरी। पर घटना-स्थान (बिजोलिया/बूंदी) और वर्ष पर पुस्तकें भिन्न हैं; इसलिए वर्ष-आधारित विकल्प हों तो सावधानी रखें।


15. इसे आसानी से याद कैसे रखें?

1. "कटराथल = कि-उ-दु": किशोरी (अध्यक्ष) — उत्तमा — दुर्गा देवी शर्मा; तिथि 25-4-34 ("पच्चीस-चार-चौंतीस")।

2. "29-35-43-83 वनस्थली": कुटीर → शिक्षा कुटीर → विद्यापीठ → डीम्ड।

3. "नारायणी का 44, भीलवाड़ा का आश्रम" — 1944 में ही डूंगरपुर प्रजामंडल भी बना।

4. "का-से-ना": कालीबाई ने सेंगाभाई को छुड़ाया, नानाभाई खांट शहीद — रास्तापाल, 19-6-47।


16. कथन अभ्यास

कटराथल महिला सम्मेलन की अध्यक्षता उत्तमा देवी ने की। — गलत (किशोरी देवी)।

नारायणी देवी वर्मा ने 1944 में भीलवाड़ा में महिला आश्रम स्थापित किया। — सही।

वनस्थली विद्यापीठ वर्तमान में जयपुर जिले में है। — गलत (टोंक)।

रतन शास्त्री, हीरालाल शास्त्री की पत्नी थीं। — सही।

रास्तापाल कांड बाँसवाड़ा रियासत में हुआ। — गलत (डूंगरपुर)।

कालीबाई ने अपने शिक्षक सेंगाभाई को बचाने के लिए बलिदान दिया। — सही।

अंजना देवी चौधरी, माणिक्यलाल वर्मा की पत्नी थीं। — गलत (रामनारायण चौधरी)।

जानकी देवी बजाज को पद्म विभूषण मिला। — सही (1956)।

कटराथल सम्मेलन 1934 में सीकर क्षेत्र में हुआ। — सही।

शान्ताबाई शिक्षा कुटीर हीरालाल शास्त्री की माता की स्मृति में थी। — गलत (पुत्री शान्ताबाई)।


17. संबंधित नोट्स


18. एक दिन पहले — 12 रेखाएँ

  1. अंजना देवी चौधरी — रामनारायण चौधरी; बिजोलिया; प्रारंभिक महिला बंदी (प्रचलित)

  2. नारायणी देवी वर्मा — माणिक्यलाल वर्मा; महिला आश्रम भीलवाड़ा 1944

  3. रतन शास्त्री — हीरालाल शास्त्री; शान्ताबाई शिक्षा कुटीर 1935

  4. वनस्थली: 1929 जीवन कुटीर → 1935 → 1943 विद्यापीठ → 1983 डीम्ड; टोंक

  5. कटराथल (सीकर) — 25 अप्रैल 1934, लगभग 10,000 महिलाएँ

  6. अध्यक्ष किशोरी देवी (सरदार हरलाल सिंह); उत्तमा देवी (ठाकुर देशराज)

  7. कारण — सिहोट ठाकुर मानसिंह, सोतिया का बास

  8. जानकी देवी बजाज — जमनालाल बजाज; पद्म विभूषण 1956

  9. रास्तापाल, डूंगरपुर — 19 जून 1947

  10. कालीबाई (लगभग 13 वर्ष) — शिक्षक सेंगाभाई को बचाया

  11. नानाभाई खांट — पाठशाला संरक्षक, शहीद; सेवा संघ — भोगीलाल पंड्या

  12. महिला शिक्षा सदन, हटूंडी (अजमेर) — हरिभाऊ उपाध्याय


19. अभ्यास

नोट पढ़ने के बाद इस पेज के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 4.2 (कटराथल), खंड 6 (रास्तापाल) और खंड 8.1 (पति-पत्नी जोड़ियाँ) दोबारा पढ़ें। वर्ष-आधारित प्रश्नों के लिए खंड 12 की समयरेखा को कम से कम दो बार लिखकर दोहराएँ।


20. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?

राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं का योगदान केवल "सहयोगी" का नहीं था। बिजोलिया में अंजना देवी और नारायणी देवी ने किसान स्त्रियों को आंदोलन की धुरी बनाया; कटराथल में किशोरी देवी और उत्तमा देवी ने हज़ारों ग्रामीण महिलाओं को अपने सम्मान के प्रश्न पर एकत्र किया; रतन शास्त्री और नारायणी देवी ने वनस्थली और भीलवाड़ा महिला आश्रम जैसी संस्थाएँ खड़ी कर आंदोलन को स्थायी सामाजिक परिवर्तन में बदला; और रास्तापाल में कालीबाई ने शिक्षा के अधिकार के लिए प्राण दिए। परीक्षा के लिए तीन स्तंभ याद रखें — कटराथल (1934, किशोरी देवी), संस्थाएँ (वनस्थली 1935/1943, महिला आश्रम 1944) और रास्तापाल (19 जून 1947, कालीबाई)।

1929 जीवन कुटीर · 1934 कटराथल · 1935 शिक्षा कुटीर · 1938 मेवाड़ प्रजामंडल · 1943 वनस्थली विद्यापीठ · 1944 महिला आश्रम · 1947 रास्तापाल · 1949 शास्त्री मुख्यमंत्री · 1956 जानकी देवी पद्म विभूषण · 1983 वनस्थली डीम्ड


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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

कटराथल महिला सम्मेलन 25 अप्रैल 1934 को सीकर (तत्कालीन सीकर ठिकाना, जयपुर राज्य) के कटराथल में हुआ। इसकी अध्यक्षता सरदार हरलाल सिंह की पत्नी किशोरी देवी ने की और इसमें लगभग 10,000 महिलाएँ एकत्र हुईं।

सिहोट के ठाकुर मानसिंह द्वारा सोतिया का बास गाँव में किसान महिलाओं से किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में यह सम्मेलन बुलाया गया था। यह शेखावाटी किसान आंदोलन का हिस्सा था।

माणिक्यलाल वर्मा की पत्नी नारायणी देवी वर्मा ने 1944 में भीलवाड़ा में महिला आश्रम की स्थापना की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण व वंचित महिलाओं को शिक्षा और आत्मनिर्भरता देना था।

हीरालाल शास्त्री और रतन शास्त्री ने वनस्थली (टोंक) में 1929 में जीवन कुटीर शुरू की; पुत्री शान्ताबाई की स्मृति में 1935 में श्री शान्ताबाई शिक्षा कुटीर बनी, जिसका नाम 1943 में वनस्थली विद्यापीठ हुआ और 1983 में इसे डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।

19 जून 1947 को डूंगरपुर रियासत के रास्तापाल गाँव में सेवा संघ की पाठशाला बंद कराने आई पुलिस ने संरक्षक नानाभाई खांट को पीट-पीटकर मार डाला और शिक्षक सेंगाभाई को बाँधकर घसीटा। लगभग 13 वर्ष की भील बालिका कालीबाई ने रस्सी काटकर शिक्षक को छुड़ाया और पुलिस की गोली से शहीद हो गई।

अंजना देवी चौधरी रामनारायण चौधरी की पत्नी थीं, जिन्होंने बिजोलिया किसान आंदोलन में महिलाओं को संगठित किया। परीक्षा-पुस्तकों में उन्हें प्रायः जन/स्वतंत्रता आंदोलन में गिरफ्तार होने वाली राजस्थान की प्रारंभिक (प्रथम) महिला बताया जाता है, हालाँकि स्थान और वर्ष पर स्रोत भिन्न हैं।

ठाकुर देशराज की पत्नी उत्तमा देवी शेखावाटी किसान आंदोलन में सक्रिय थीं और 1934 के कटराथल महिला सम्मेलन की प्रमुख वक्ता/आयोजकों में थीं।

जानकी देवी बजाज, जयपुर प्रजामंडल के अध्यक्ष रहे जमनालाल बजाज (जन्म: काशी का बास, सीकर) की पत्नी थीं। वे जयपुर प्रजामंडल दौर और खादी, गो-सेवा जैसे रचनात्मक कार्यों से जुड़ी रहीं और 1956 में उन्हें पद्म विभूषण मिला।

अंजना देवी–रामनारायण चौधरी, नारायणी देवी–माणिक्यलाल वर्मा, रतन शास्त्री–हीरालाल शास्त्री, किशोरी देवी–सरदार हरलाल सिंह, उत्तमा देवी–ठाकुर देशराज और जानकी देवी–जमनालाल बजाज।

महिला शिक्षा सदन हटूंडी (अजमेर) में गांधीवादी नेता हरिभाऊ उपाध्याय से संबंधित है, जहाँ महिलाओं को शिक्षा के साथ खादी और सेवा-कार्य का प्रशिक्षण दिया जाता था। इसके स्थापना वर्ष पर पुस्तकों में भिन्नता है।

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