राजस्थान में समाचार पत्रों व पत्रकारिता का इतिहास — RAS/CET
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संक्षिप्त उत्तर: परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार राजस्थान का प्रथम समाचार पत्र "मजहरुल सरूर" था, जो 1849 में भरतपुर से उर्दू-हिंदी में निकला। उन्नीसवीं सदी के अंत में अजमेर (ब्रिटिश शासित अजमेर-मेरवाड़ा) पत्रकारिता का केंद्र बना — राजपूताना गजट (1885, मौलवी मुराद अली) और राजस्थान समाचार (1889, मुंशी समर्थदान), जिसे सामान्यतः राजस्थान का पहला हिंदी दैनिक माना जाता है। राष्ट्रीय चेतना के दौर में विजय सिंह पथिक ने वर्धा (1920) से "राजस्थान केसरी" (आर्थिक सहायता जमनालाल बजाज) और अजमेर (1921) से "नवीन राजस्थान" निकाला, जो प्रतिबंध के बाद "तरुण राजस्थान" बना; ये राजस्थान सेवा संघ से जुड़े थे और बिजोलिया किसान आंदोलन को देशभर में पहुँचाया। हरिभाऊ उपाध्याय ने "त्यागभूमि" (1927, अजमेर), जयनारायण व्यास ने "आगीबाण" (1932, ब्यावर — राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक पत्र) और "अखंड भारत" (1936, बंबई) निकाले। दैनिक नवज्योति 1936 में अजमेर से कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी ने आरंभ किया और "लोकवाणी" (1943, जयपुर) जमनालाल बजाज की स्मृति में निकला। रियासतों में कठोर प्रेस-प्रतिबंधों के कारण अधिकांश राष्ट्रवादी पत्र रियासतों के बाहर (अजमेर, ब्यावर, वर्धा, बंबई) से छपे। स्वतंत्रता के बाद राजस्थान पत्रिका (7 मार्च 1956, जयपुर) की स्थापना कर्पूर चंद्र कुलिश ने की।
संक्षिप्त उत्तर
बिंदु | तथ्य | याद रखने योग्य संकेत |
|---|---|---|
प्रथम समाचार पत्र (परीक्षा-उत्तर) | मजहरुल सरूर — भरतपुर, 1849 | उर्दू-हिंदी; रियासती संरक्षण में |
पत्रकारिता का प्रमुख केंद्र | अजमेर (अजमेर-मेरवाड़ा) | ब्रिटिश क्षेत्र — रियासती कानून लागू नहीं |
राजपूताना गजट | 1885, अजमेर — मौलवी मुराद अली | कुछ पुस्तकों में 1884 |
राजस्थान समाचार | 1889, अजमेर — मुंशी समर्थदान | राजस्थान का पहला हिंदी दैनिक (सामान्य परीक्षा-उत्तर) |
राजस्थान सेवा संघ | 1919 वर्धा; 1920 में अजमेर | पथिक, अर्जुनलाल सेठी, केसरी सिंह बारहठ |
राजस्थान केसरी | 1920, वर्धा — विजय सिंह पथिक | जमनालाल बजाज की आर्थिक सहायता |
नवीन राजस्थान | 1921, अजमेर — विजय सिंह पथिक | बिजोलिया का मुखर प्रचारक; प्रतिबंधित |
तरुण राजस्थान | नवीन राजस्थान का नया नाम (लगभग 1923) | राजस्थान सेवा संघ का पत्र |
त्यागभूमि | 1927, अजमेर — हरिभाऊ उपाध्याय | गांधीवादी विचार; सस्ता साहित्य मंडल |
आगीबाण | 1932, ब्यावर — जयनारायण व्यास | राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक पत्र |
अखंड भारत | 1936, बंबई — जयनारायण व्यास | राजस्थान से बाहर से प्रकाशित |
नवज्योति | 1936, अजमेर — कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी | आरंभ में साप्ताहिक, बाद में दैनिक |
लोकवाणी | 1943, जयपुर | जमनालाल बजाज (मृत्यु 1942) की स्मृति में |
राजस्थान पत्रिका | 7 मार्च 1956, जयपुर — कर्पूर चंद्र कुलिश | स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा क्षेत्रीय पत्र-समूह |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
RAS मुख्य परीक्षा के "आधुनिक राजस्थान — राजनीतिक जागरण" खंड और राजस्थान CET, पटवारी, VDO, SI जैसी परीक्षाओं में समाचार पत्रों से जुड़े प्रश्न लगभग हर बार किसी न किसी रूप में आते हैं। प्रश्नों का स्वरूप प्रायः तीन तरह का होता है:
जोड़ी मिलाना — समाचार पत्र ↔ संस्थापक/संपादक ↔ स्थान (जैसे आगीबाण — जयनारायण व्यास — ब्यावर)।
"प्रथम" वाले प्रश्न — राजस्थान का प्रथम समाचार पत्र, प्रथम हिंदी दैनिक, राजस्थानी भाषा का प्रथम राजनीतिक पत्र।
आंदोलन से संबंध — बिजोलिया आंदोलन का प्रचार किन पत्रों ने किया, प्रजामंडल युग के पत्र कौन-से थे।
यह नोट पत्रकारिता को एक स्वतंत्र विषय के रूप में देखता है — कौन-सा पत्र कब, कहाँ, किसने और क्यों निकाला, और रियासती प्रतिबंधों ने इस इतिहास को कैसे आकार दिया। किसान आंदोलनों और प्रजामंडलों का विस्तृत विवरण संबंधित नोट्स (खंड 17) में है; यहाँ केवल उनका "प्रेस-पक्ष" लिया गया है।
3. पृष्ठभूमि: रियासतें, अजमेर और प्रेस
3.1 रियासती राजस्थान में प्रेस की स्थिति
1818 की संधियों के बाद राजपूताना की लगभग सभी रियासतें ब्रिटिश सर्वोच्चता के अधीन आ गईं। शासक आंतरिक मामलों में स्वतंत्र थे, पर उनके शासन की आलोचना को वे राजद्रोह के समान मानते थे। रियासतों में:
छापाखाने (प्रिंटिंग प्रेस) प्रायः राज्य के नियंत्रण में थे और राज्य के "गजट" ही प्रमुख प्रकाशन थे।
निजी समाचार पत्र निकालने के लिए अनुमति आवश्यक थी; आलोचनात्मक लेख लिखने पर देश-निकाला, जेल या जब्ती आम थी।
बाहर से आने वाले राष्ट्रवादी पत्रों के रियासत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाता था।
3.2 अजमेर क्यों बना पत्रकारिता का केंद्र?
अजमेर-मेरवाड़ा सीधे ब्रिटिश शासन (चीफ कमिश्नर) के अधीन था और यहीं AGG (एजेंट टू गवर्नर जनरल) का मुख्यालय भी था। यहाँ रियासतों के मनमाने कानून लागू नहीं होते थे; ब्रिटिश भारत के प्रेस कानून कठोर होते हुए भी एक न्यूनतम कानूनी प्रक्रिया देते थे। रेल-संपर्क, शिक्षण संस्थाएँ और व्यापारिक वर्ग भी यहाँ था। इसीलिए राजपूताना गजट, राजस्थान समाचार, नवीन राजस्थान, तरुण राजस्थान, त्यागभूमि, नवज्योति — सब अजमेर से निकले, और पास का ब्यावर (अजमेर-मेरवाड़ा का ही भाग) भी एक केंद्र बना।
सूत्र: रियासत में लिखो तो जेल, अजमेर से लिखो तो अखबार — इसलिए राजस्थान की राष्ट्रवादी पत्रकारिता "रियासतों के बाहर" से चली।
3.3 पत्रकारिता के तीन चरण
चरण | अवधि (लगभग) | स्वरूप | उदाहरण |
|---|---|---|---|
प्रथम | 1849–1900 | राजकीय गजट, सूचना-प्रधान, सुधारवादी | मजहरुल सरूर, सज्जन कीर्ति सुधाकर, राजपूताना गजट, राजस्थान समाचार |
द्वितीय | 1900–1947 | राष्ट्रवादी, आंदोलनकारी, रियासत-विरोधी | राजस्थान केसरी, नवीन/तरुण राजस्थान, त्यागभूमि, आगीबाण, नवज्योति, लोकवाणी |
तृतीय | 1947 के बाद | व्यावसायिक, लोकतांत्रिक, जनसंचार | राजस्थान पत्रिका, दैनिक नवज्योति, राष्ट्रदूत, अन्य राष्ट्रीय समूहों के संस्करण |
4. प्रारंभिक समाचार पत्र (1849–1900)
4.1 मजहरुल सरूर — भरतपुर (1849)
अधिकांश परीक्षा-पुस्तकें "मजहरुल सरूर" को राजस्थान का पहला समाचार पत्र मानती हैं। यह 1849 में भरतपुर से निकला और उर्दू व हिंदी — दोनों भाषाओं में सामग्री देता था। यह रियासती संरक्षण में निकलने वाला सूचना-प्रधान पत्र था, राजनीतिक आंदोलन का नहीं। कुछ स्रोतों में इसके वर्ष को लेकर थोड़ा अंतर मिलता है, पर परीक्षा में "मजहरुल सरूर — भरतपुर — 1849" ही मानक उत्तर है।
4.2 रियासती गजट और राजकीय पत्र
उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में कई रियासतों ने अपने राजकीय पत्र निकाले, जिनमें सरकारी आदेश, नियुक्तियाँ और सूचनाएँ छपती थीं। इनमें सबसे प्रसिद्ध मेवाड़ का "सज्जन कीर्ति सुधाकर" है, जो महाराणा सज्जन सिंह के समय उदयपुर से निकला (वर्ष परीक्षा-पुस्तकों में प्रायः 1879; कुछ में 1876)। जोधपुर का "मारवाड़ गजट" भी इसी प्रकार का राजकीय पत्र था (वर्ष को लेकर स्रोतों में भिन्नता है)। इन पत्रों की पहचान है — राज्य द्वारा, राज्य के लिए; इनमें जनता की आवाज़ नहीं थी।
4.3 अजमेर के निजी पत्र
राजपूताना गजट (1885, अजमेर) — संपादक मौलवी मुराद अली। इसे अजमेर से निकलने वाले आरंभिक प्रमुख निजी पत्रों में गिना जाता है; कुछ पुस्तकें वर्ष 1884 लिखती हैं। इसमें शासन-प्रशासन की आलोचनात्मक टिप्पणियाँ भी छपती थीं।
राजस्थान समाचार (1889, अजमेर) — संस्थापक मुंशी समर्थदान (चारण)। परीक्षा-पुस्तकों में इसे राजस्थान का पहला हिंदी दैनिक कहा जाता है। सावधानी: कई इतिहासकार लिखते हैं कि यह आरंभ में साप्ताहिक था और बाद में (बीसवीं सदी के आरंभ में) दैनिक हुआ — इसलिए यदि प्रश्न "प्रथम हिंदी दैनिक" पूछे तो उत्तर राजस्थान समाचार ही दें।
देश हितैषी और राजस्थान टाइम्स — कुछ पुस्तकों में उन्नीसवीं सदी के अजमेर के पत्रों के रूप में इनका उल्लेख मिलता है, पर इनके संस्थापक व वर्ष को लेकर स्रोत एकमत नहीं हैं; परीक्षा के लिए इन्हें केवल "अजमेर के आरंभिक पत्र" के रूप में याद रखें।
4.4 इस चरण की विशेषताएँ
भाषा — उर्दू, हिंदी और कहीं-कहीं द्विभाषी; फ़ारसी-उर्दू का प्रशासनिक प्रभाव बना हुआ था।
विषय — सरकारी सूचनाएँ, सामाजिक सुधार (बाल विवाह, फिजूलखर्ची, शिक्षा), व्यापारिक समाचार।
प्रसार — बहुत सीमित; साक्षरता कम और मुद्रण महँगा।
राजनीति — सीधे शासकों का विरोध नहीं; पर "जनमत" की अवधारणा की शुरुआत यहीं से हुई।
5. पथिक युग: राजस्थान सेवा संघ और उसके पत्र
5.1 विजय सिंह पथिक — पत्रकार-आंदोलनकारी
विजय सिंह पथिक (मूल नाम भूपसिंह; जन्म गुठावली, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश) पहले क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े थे और बाद में बिजोलिया किसान आंदोलन के प्रमुख नेता बने। उनकी सबसे बड़ी ताकत थी — प्रेस का उपयोग। उन्होंने बिजोलिया के किसानों की पीड़ा को कानपुर के "प्रताप" (गणेश शंकर विद्यार्थी) जैसे पत्रों तक पहुँचाया और फिर अपने स्वयं के पत्र निकाले।
5.2 राजस्थान सेवा संघ (1919)
राजस्थान सेवा संघ की स्थापना 1919 में वर्धा में हुई। इसके संस्थापकों में विजय सिंह पथिक, अर्जुनलाल सेठी और केसरी सिंह बारहठ के नाम आते हैं। 1920 में इसका कार्यालय अजमेर स्थानांतरित हुआ। संघ का मुख्य उद्देश्य था — रियासतों की जनता की शिकायतें सामने लाना, किसानों को संगठित करना और प्रेस के माध्यम से देश का ध्यान खींचना। रामनारायण चौधरी, माणिक्यलाल वर्मा, शोभालाल गुप्त जैसे कार्यकर्ता इससे जुड़े। लगभग 1928–29 तक आपसी मतभेदों के कारण संघ निष्क्रिय हो गया।
5.3 राजस्थान केसरी (1920, वर्धा)
स्थान: वर्धा (महाराष्ट्र) — राजस्थान से बाहर।
संस्थापक-संपादक: विजय सिंह पथिक; रामनारायण चौधरी इसके संपादन/संचालन में सहयोगी रहे।
आर्थिक सहायता: सेठ जमनालाल बजाज (वर्धा उनका कार्यक्षेत्र था)।
स्वरूप: साप्ताहिक; रियासतों के अत्याचार और बिजोलिया आंदोलन पर लेख।
नाम में "केसरी" — तिलक के "केसरी" से प्रेरणा का संकेत माना जाता है।
5.4 नवीन राजस्थान (1921, अजमेर) → तरुण राजस्थान
संघ के अजमेर आने के बाद पथिक ने 1921 में अजमेर से "नवीन राजस्थान" निकाला। यह बिजोलिया और बेगूं के किसान आंदोलनों का सबसे मुखर प्रवक्ता था। मेवाड़ और अन्य रियासतों ने इसके प्रवेश पर रोक लगाई और ब्रिटिश प्रशासन ने भी इस पर कार्रवाई की। प्रतिबंध के बाद यही पत्र "तरुण राजस्थान" नाम से निकला (परीक्षा-पुस्तकों में प्रायः 1923; कुछ में 1924)। तरुण राजस्थान के संपादन से शोभालाल गुप्त और रामनारायण चौधरी जैसे नाम जुड़े; कुछ स्रोत जयनारायण व्यास का भी इससे संबंध बताते हैं।
क्रम याद रखें: राजस्थान सेवा संघ (1919 वर्धा) → राजस्थान केसरी (1920 वर्धा) → संघ अजमेर (1920) → नवीन राजस्थान (1921 अजमेर) → तरुण राजस्थान (≈1923)
5.5 बाहरी पत्रों का सहयोग
बिजोलिया आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में राजस्थान के बाहर के पत्रों का बड़ा योगदान रहा। कानपुर का "प्रताप" (गणेश शंकर विद्यार्थी) इसमें सबसे प्रमुख था। कुछ पुस्तकें यह भी लिखती हैं कि बाल गंगाधर तिलक के "मराठा" में भी बिजोलिया का प्रश्न उठाया गया। इसी प्रचार का परिणाम था कि गांधीजी ने स्थिति जानने के लिए महादेव देसाई को भेजा। विस्तार के लिए देखें — बिजोलिया किसान आंदोलन।
6. हरिभाऊ उपाध्याय और "त्यागभूमि" (1927)
हरिभाऊ उपाध्याय गांधीवादी विचारक, लेखक और पत्रकार थे। राजस्थान आने से पहले वे हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय रह चुके थे और सस्ता साहित्य मंडल से जुड़े थे। उन्होंने 1927 में अजमेर से "त्यागभूमि" निकाली।
स्वरूप: विचार-प्रधान पत्रिका — खादी, अस्पृश्यता-निवारण, नशाबंदी, ग्राम-सुधार, स्त्री-शिक्षा।
राजनीति: रियासती जनता में राष्ट्रीय चेतना, पर गांधीवादी, अहिंसक स्वर।
संबद्ध संस्था: हरिभाऊ उपाध्याय ने अजमेर के पास हटूंडी में गांधी आश्रम की स्थापना की (परीक्षा-पुस्तकों में प्रायः 1927)।
बाद की भूमिका: स्वतंत्रता के बाद हरिभाऊ उपाध्याय अजमेर राज्य के मुख्यमंत्री रहे (1952–56)।
"त्यागभूमि" ने राजस्थान की पत्रकारिता में गांधीवादी विचार-पत्रकारिता की परंपरा डाली, जबकि पथिक के पत्र आंदोलनकारी-संघर्षशील थे — यह अंतर परीक्षा में "कथन" प्रश्नों के लिए उपयोगी है।
7. जयनारायण व्यास: आगीबाण और अखंड भारत
जयनारायण व्यास (मारवाड़) को "शेर-ए-राजस्थान" और "लोकनायक" कहा जाता है। वे मारवाड़ में उत्तरदायी शासन के आंदोलन के नेता थे और जोधपुर रियासत ने उन्हें बार-बार निष्कासित व बंदी किया। रियासत में अखबार निकालना असंभव था, इसलिए उन्होंने रियासत के बाहर से पत्र निकाले।
पत्र | वर्ष | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|---|
आगीबाण | 1932 | ब्यावर (अजमेर-मेरवाड़ा) | राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक समाचार पत्र |
अखंड भारत | 1936 | बंबई | हिंदी दैनिक; रियासती शासन की आलोचना |
तरुण राजस्थान (संपादन) | 1920 के दशक का उत्तरार्ध | अजमेर/ब्यावर | कुछ स्रोतों के अनुसार व्यास ने इसका संपादन किया |
"आगीबाण" नाम ही संकेत है — "आग का बाण"। राजस्थानी (मारवाड़ी) भाषा में राजनीतिक पत्र निकालना इस बात का प्रमाण था कि व्यास आम ग्रामीण जनता तक उसकी अपनी भाषा में पहुँचना चाहते थे। आगे चलकर व्यास मारवाड़ लोक परिषद के प्रमुख नेता रहे और स्वतंत्रता के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भी बने। मारवाड़ के आंदोलन के लिए देखें — मारवाड़ लोक परिषद व प्रजामंडल।
आगीबाण = आग + बाण + ब्यावर + 1932 + राजस्थानी भाषा; अखंड भारत = बंबई + 1936 — दोनों जयनारायण व्यास।
8. प्रजामंडल युग के प्रमुख पत्र (1936–1947)
8.1 नवज्योति (1936, अजमेर)
कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी ने 1936 में अजमेर से "नवज्योति" आरंभ किया। यह आरंभ में साप्ताहिक था और बाद में दैनिक नवज्योति बना। प्रजामंडल आंदोलनों और रियासती अत्याचारों के समाचार इसमें प्रमुखता से छपते थे। यह उन गिने-चुने स्वतंत्रता-पूर्व पत्रों में है जो स्वतंत्रता के बाद भी निरंतर प्रकाशित होते रहे। दुर्गाप्रसाद चौधरी स्वयं स्वतंत्रता सेनानी थे — "कप्तान" उपनाम उनके नाम के साथ जुड़ा।
8.2 लोकवाणी (1943, जयपुर)
सेठ जमनालाल बजाज का निधन फ़रवरी 1942 में हुआ। वे जयपुर प्रजामंडल के अध्यक्ष रह चुके थे (1938 के बाद उनके नेतृत्व में प्रजामंडल ने सत्याग्रह किया)। उनकी स्मृति में 1943 में जयपुर से "लोकवाणी" निकाला गया, जो जयपुर प्रजामंडल के विचारों का प्रमुख माध्यम बना। संस्थापक/संपादक के रूप में अलग-अलग पुस्तकों में अलग नाम मिलते हैं; परीक्षा में मुख्य पहचान है — "जमनालाल बजाज की स्मृति में, 1943, जयपुर"। विस्तार — जयपुर प्रजामंडल।
8.3 प्रजा सेवक (जोधपुर)
परीक्षा-पुस्तकों में "प्रजा सेवक" को जोधपुर से जोड़ा जाता है और इसका संबंध अचलेश्वर प्रसाद शर्मा से बताया जाता है, जो मारवाड़ के राजनीतिक आंदोलन के कार्यकर्ता थे। इसके प्रकाशन वर्ष के बारे में स्रोत एकमत नहीं हैं (प्रायः 1940 के दशक), इसलिए वर्ष-आधारित प्रश्न में सावधानी रखें।
8.4 "राजस्थान" — ऋषिदत्त मेहता (ब्यावर)
बूंदी के ऋषिदत्त मेहता ने ब्यावर से "राजस्थान" नामक साप्ताहिक निकाला (प्रायः 1930 के दशक का उल्लेख)। वे बाद में बूंदी राज्य लोक परिषद (1944) के संस्थापकों में रहे। ध्यान दें — "राजस्थान" (ऋषिदत्त मेहता), "राजस्थान समाचार" (समर्थदान) और "राजस्थान केसरी" (पथिक) तीन अलग पत्र हैं।
8.5 जयपुर के अन्य पत्र
जयपुर से "जयपुर समाचार" जैसे पत्रों का भी उल्लेख मिलता है, पर इनके संस्थापक और वर्ष को लेकर मानक पुस्तकों में स्पष्टता नहीं है। परीक्षा के लिए जयपुर के संदर्भ में लोकवाणी सबसे महत्वपूर्ण है।
8.6 प्रजामंडल युग के पत्रों की विशेषताएँ
मुख्य माँग — उत्तरदायी शासन, नागरिक अधिकार, बेगार व लाग-बाग की समाप्ति।
स्वर — गांधीवादी, कांग्रेस और अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (1927) की नीतियों के अनुरूप।
प्रकाशन केंद्र — अधिकतर अजमेर, ब्यावर या रियासत के बाहर; जयपुर जैसी रियासत में भी 1940 के दशक में धीरे-धीरे अवसर बने।
परिणाम — 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और 1946–47 के उत्तरदायी शासन आंदोलनों में जनमत तैयार करना।
9. प्रेस पर प्रतिबंध: ब्रिटिश कानून और रियासती दमन
9.1 ब्रिटिश भारत के प्रमुख प्रेस कानून
कानून | वर्ष | संबंधित वायसराय/संदर्भ | प्रभाव |
|---|---|---|---|
वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (देशी भाषा समाचार पत्र अधिनियम) | 1878 | लॉर्ड लिटन; 1882 में लॉर्ड रिपन ने रद्द किया | भारतीय भाषाओं के पत्रों पर विशेष नियंत्रण — "गैगिंग एक्ट" |
भारतीय प्रेस अधिनियम (Indian Press Act) | 1910 | राष्ट्रवादी व क्रांतिकारी लेखन के दौर में | जमानत राशि व जब्ती के अधिकार |
प्रिंसेज़ प्रोटेक्शन से संबंधित अधिनियम | 1922 (और 1934 का संबंधित कानून) | नरेंद्र मंडल के दबाव में | ब्रिटिश भारत से छपने वाले पत्रों में रियासती शासकों की आलोचना को दंडनीय बनाना |
अंतिम पंक्ति राजस्थान के लिए सबसे महत्वपूर्ण है: जब राष्ट्रवादी पत्र अजमेर, ब्यावर या बंबई से रियासतों की आलोचना करने लगे, तो शासकों ने ब्रिटिश सरकार पर दबाव डाला कि ब्रिटिश क्षेत्र से छपने वाले पत्रों में भी "राजाओं" की आलोचना पर अंकुश लगे। इसी संदर्भ में 1922 में रियासतों के शासकों को "असंतोष फैलाने वाले" लेखन से सुरक्षा देने वाला कानून बना (सामान्य नाम — Princes Protection Act)। विस्तृत ब्रिटिश ढाँचे के लिए देखें — ब्रिटिश सर्वोच्चता, AGG व नरेंद्र मंडल।
9.2 रियासती दमन के तरीके
प्रवेश प्रतिबंध — नवीन राजस्थान, तरुण राजस्थान जैसे पत्रों को रियासत की सीमा में लाना अपराध।
निष्कासन — पत्रकार-नेताओं को रियासत से निकालना (जयनारायण व्यास, माणिक्यलाल वर्मा जैसे उदाहरण)।
जब्ती व बंदी — पत्रों की प्रतियाँ जब्त करना, संपादकों को जेल।
सार्वजनिक सुरक्षा कानून — कई रियासतों ने "पब्लिक सेफ्टी" जैसे कानूनों से सभा, जुलूस और प्रकाशन पर रोक लगाई (बीकानेर इसका प्रमुख उदाहरण)।
राजकीय गजट का एकाधिकार — सूचना पर नियंत्रण।
9.3 प्रतिबंधों का उल्टा प्रभाव
प्रतिबंधों ने पत्रकारिता को रोका नहीं, बल्कि भौगोलिक रूप से बाहर धकेल दिया। इससे एक विशिष्ट पैटर्न बना — वर्धा (राजस्थान केसरी), अजमेर (नवीन/तरुण राजस्थान, त्यागभूमि, नवज्योति), ब्यावर (आगीबाण, राजस्थान), बंबई (अखंड भारत)। साथ ही हस्तलिखित पर्चे, गीत और लोक-काव्य भी "वैकल्पिक प्रेस" बने — जैसे केसरी सिंह बारहठ के "चेतावणी रा चूंगट्या" (1903) ने महाराणा फतेह सिंह को दिल्ली दरबार में जाने से रोकने के लिए कलम की शक्ति दिखाई। देखें — राजस्थान का क्रांतिकारी आंदोलन — बारहठ, सेठी, खरवा।
10. किसान व प्रजामंडल आंदोलनों में पत्रकारिता की भूमिका
आंदोलन | प्रेस की भूमिका | संबंधित पत्र/व्यक्ति |
|---|---|---|
बिजोलिया किसान आंदोलन | किसानों की शिकायतें राष्ट्रीय पत्रों तक; गांधीजी व कांग्रेस का ध्यान | प्रताप (कानपुर), राजस्थान केसरी, नवीन राजस्थान — पथिक |
बेगूं किसान आंदोलन | राजस्थान सेवा संघ के माध्यम से प्रचार | राजस्थान सेवा संघ के पत्र; रामनारायण चौधरी |
मारवाड़ में उत्तरदायी शासन | रियासत के बाहर से आलोचना | आगीबाण, अखंड भारत — जयनारायण व्यास |
जयपुर प्रजामंडल | प्रजामंडल विचारों का प्रसार | लोकवाणी (1943) |
अजमेर-केंद्रित राष्ट्रीय आंदोलन | गांधीवादी रचनात्मक कार्यक्रम | त्यागभूमि — हरिभाऊ उपाध्याय |
प्रजामंडल व भारत छोड़ो दौर | सामान्य जनमत निर्माण | नवज्योति — कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी |
पत्रकारिता के तीन बड़े योगदान थे:
स्थानीय को राष्ट्रीय बनाना — बिजोलिया जैसा एक ठिकाने का विवाद देशभर में चर्चा का विषय बना।
संगठन — पत्र ही आंदोलन का "दफ्तर" थे; कार्यकर्ताओं को निर्देश, सूचनाएँ और माँगपत्र इन्हीं से पहुँचते थे।
नेतृत्व निर्माण — पथिक, व्यास, हरिभाऊ उपाध्याय, ऋषिदत्त मेहता, दुर्गाप्रसाद चौधरी — लगभग सभी बड़े नेता स्वयं पत्रकार भी थे।
महिलाओं की भागीदारी, प्रभात फेरियों और सत्याग्रहों के समाचार भी इन्हीं पत्रों से फैले — देखें स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका। किसान आंदोलनों का समग्र चित्र — राजस्थान के किसान आंदोलन।
11. स्वतंत्रता के बाद की पत्रकारिता
11.1 राजस्थान पत्रिका (1956)
कर्पूर चंद्र कुलिश ने 7 मार्च 1956 को जयपुर से "राजस्थान पत्रिका" का प्रकाशन आरंभ किया। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह पत्र आगे चलकर राजस्थान का सबसे बड़ा क्षेत्रीय समाचार-पत्र समूह बना और राजस्थान के बाहर भी इसके संस्करण निकले। कुलिश स्वयं पत्रकार और लेखक थे; यह पत्र राज्य के एकीकरण (1956 में सातवाँ चरण पूर्ण) के लगभग साथ-साथ आरंभ हुआ — यह संयोग याद रखने में सहायक है।
11.2 दैनिक नवज्योति
1936 में अजमेर से शुरू हुआ नवज्योति स्वतंत्रता के बाद दैनिक नवज्योति के रूप में अजमेर व जयपुर सहित कई केंद्रों से निकलता रहा। इस प्रकार यह स्वतंत्रता-पूर्व और स्वतंत्रता-पश्चात पत्रकारिता के बीच का पुल है।
11.3 अन्य प्रमुख नाम
राष्ट्रदूत — जयपुर से प्रकाशित पुराना हिंदी दैनिक (संस्थापक के रूप में प्रायः हजारीलाल शर्मा का नाम मिलता है; वर्ष पर स्रोत भिन्न)।
दैनिक भास्कर — मूल रूप से मध्य प्रदेश का समूह; राजस्थान में इसका जयपुर संस्करण 1990 के दशक में आरंभ हुआ और यह राज्य के प्रमुख दैनिकों में शामिल हो गया। ध्यान दें — यह राजस्थान में स्थापित पत्र नहीं है।
राष्ट्रीय अंग्रेज़ी व हिंदी समूहों के जयपुर संस्करण भी स्वतंत्रता के बाद आए।
11.4 स्वतंत्रता-पूर्व बनाम पश्चात
आधार | स्वतंत्रता-पूर्व | स्वतंत्रता-पश्चात |
|---|---|---|
उद्देश्य | आंदोलन, जनजागरण, उत्तरदायी शासन | सूचना, लोकतांत्रिक विमर्श, व्यवसाय |
प्रकाशन स्थान | रियासतों के बाहर — अजमेर, ब्यावर, वर्धा, बंबई | जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर सहित राज्य भर |
मालिक/संचालक | नेता-पत्रकार, संस्थाएँ (राजस्थान सेवा संघ) | पत्रकार-उद्यमी, मीडिया समूह |
प्रमुख चुनौती | प्रतिबंध, निष्कासन, जब्ती | प्रसार, प्रतिस्पर्धा, तकनीक |
उदाहरण | राजस्थान केसरी, त्यागभूमि, आगीबाण, लोकवाणी | राजस्थान पत्रिका, दैनिक नवज्योति, राष्ट्रदूत |
12. मुख्य सारणी: समाचार पत्र — संस्थापक/संपादक — स्थान — वर्ष
नीचे की तालिका इस नोट का सार है। "स्रोत-भिन्नता" कॉलम बताता है कि कहाँ सावधानी रखनी है।
समाचार पत्र | संस्थापक/संपादक | स्थान | वर्ष | स्रोत-भिन्नता / टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|
मजहरुल सरूर | रियासती संरक्षण | भरतपुर | 1849 | प्रथम समाचार पत्र (परीक्षा-उत्तर) |
सज्जन कीर्ति सुधाकर | मेवाड़ राज्य (महाराणा सज्जन सिंह काल) | उदयपुर | 1879 (कुछ में 1876) | राजकीय पत्र |
राजपूताना गजट | मौलवी मुराद अली | अजमेर | 1885 | कुछ में 1884 |
राजस्थान समाचार | मुंशी समर्थदान | अजमेर | 1889 | प्रथम हिंदी दैनिक; आरंभ में साप्ताहिक होने का भी मत |
राजस्थान केसरी | विजय सिंह पथिक (सहयोग — रामनारायण चौधरी; वित्त — जमनालाल बजाज) | वर्धा | 1920 | राजस्थान से बाहर |
नवीन राजस्थान | विजय सिंह पथिक | अजमेर | 1921 | बिजोलिया का प्रचारक; प्रतिबंधित |
तरुण राजस्थान | राजस्थान सेवा संघ (शोभालाल गुप्त, रामनारायण चौधरी) | अजमेर | ≈1923 | नवीन राजस्थान का नया नाम; 1924 का भी उल्लेख |
त्यागभूमि | हरिभाऊ उपाध्याय | अजमेर | 1927 | गांधीवादी |
आगीबाण | जयनारायण व्यास | ब्यावर | 1932 | राजस्थानी भाषा का प्रथम राजनीतिक पत्र |
अखंड भारत | जयनारायण व्यास | बंबई | 1936 | राजस्थान से बाहर |
नवज्योति | कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी | अजमेर | 1936 | बाद में दैनिक; आज भी प्रकाशित |
राजस्थान | ऋषिदत्त मेहता | ब्यावर | 1930 का दशक | वर्ष पर भिन्नता |
लोकवाणी | जयपुर प्रजामंडल से जुड़े कार्यकर्ता | जयपुर | 1943 | जमनालाल बजाज की स्मृति में |
प्रजा सेवक | अचलेश्वर प्रसाद शर्मा | जोधपुर | 1940 का दशक | वर्ष पर भिन्नता |
राजस्थान पत्रिका | कर्पूर चंद्र कुलिश | जयपुर | 7 मार्च 1956 | स्वतंत्रता-पश्चात |
13. समयरेखा (Timeline)
वर्ष | घटना |
|---|---|
1849 | भरतपुर से मजहरुल सरूर — राजस्थान का प्रथम समाचार पत्र |
1878 | वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (लॉर्ड लिटन) |
1879 (या 1876) | उदयपुर से सज्जन कीर्ति सुधाकर |
1882 | लॉर्ड रिपन द्वारा वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट रद्द |
1885 | अजमेर से राजपूताना गजट (मौलवी मुराद अली) |
1889 | अजमेर से राजस्थान समाचार (मुंशी समर्थदान) |
1903 | केसरी सिंह बारहठ — "चेतावणी रा चूंगट्या" |
1910 | भारतीय प्रेस अधिनियम |
1919 | वर्धा में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना |
1920 | वर्धा से राजस्थान केसरी; संघ का कार्यालय अजमेर |
1921 | अजमेर से नवीन राजस्थान |
1922 | रियासती शासकों की आलोचना रोकने वाला संरक्षण कानून |
≈1923 | नवीन राजस्थान → तरुण राजस्थान |
1927 | अजमेर से त्यागभूमि (हरिभाऊ उपाध्याय) |
1932 | ब्यावर से आगीबाण (जयनारायण व्यास) |
1936 | बंबई से अखंड भारत (व्यास); अजमेर से नवज्योति (दुर्गाप्रसाद चौधरी) |
1942 | जमनालाल बजाज का निधन |
1943 | जयपुर से लोकवाणी |
1956 | 7 मार्च — जयपुर से राजस्थान पत्रिका (कर्पूर चंद्र कुलिश) |
14. परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्य (One-liners)
राजस्थान का प्रथम समाचार पत्र — मजहरुल सरूर (भरतपुर, 1849)।
मजहरुल सरूर की भाषा — उर्दू और हिंदी (द्विभाषी)।
राजपूताना गजट (1885, अजमेर) के संपादक — मौलवी मुराद अली।
राजस्थान का पहला हिंदी दैनिक (परीक्षा-उत्तर) — राजस्थान समाचार (1889, अजमेर)।
राजस्थान समाचार के संस्थापक — मुंशी समर्थदान।
मेवाड़ का राजकीय पत्र — सज्जन कीर्ति सुधाकर (उदयपुर)।
राजस्थान सेवा संघ की स्थापना — 1919, वर्धा; 1920 में अजमेर।
राजस्थान केसरी — 1920, वर्धा, विजय सिंह पथिक; आर्थिक सहायता — जमनालाल बजाज।
नवीन राजस्थान — 1921, अजमेर, विजय सिंह पथिक।
नवीन राजस्थान पर प्रतिबंध के बाद नया नाम — तरुण राजस्थान।
त्यागभूमि — 1927, अजमेर, हरिभाऊ उपाध्याय।
आगीबाण — 1932, ब्यावर, जयनारायण व्यास; राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक पत्र।
अखंड भारत — 1936, बंबई, जयनारायण व्यास।
नवज्योति — 1936, अजमेर, कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी।
लोकवाणी — 1943, जयपुर, जमनालाल बजाज की स्मृति में।
प्रजा सेवक — जोधपुर, अचलेश्वर प्रसाद शर्मा।
"राजस्थान" (साप्ताहिक, ब्यावर) — ऋषिदत्त मेहता।
बिजोलिया आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान देने वाला कानपुर का पत्र — प्रताप (गणेश शंकर विद्यार्थी)।
वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट — 1878, लॉर्ड लिटन; रद्द — 1882, लॉर्ड रिपन।
राजस्थान पत्रिका — 7 मार्च 1956, जयपुर, कर्पूर चंद्र कुलिश।
स्वतंत्रता-पूर्व राष्ट्रवादी पत्रकारिता का केंद्र — अजमेर (ब्रिटिश शासित अजमेर-मेरवाड़ा)।
15. भ्रम व सावधानियाँ (Exam Traps)
भ्रम | सही तथ्य |
|---|---|
"राजस्थान केसरी" अजमेर से निकला | नहीं — वर्धा (1920) से; अजमेर से पथिक का पत्र "नवीन राजस्थान" (1921) था |
"केसरी" और "राजस्थान केसरी" एक ही | नहीं — "केसरी" तिलक का (पुणे) पत्र; "राजस्थान केसरी" पथिक का |
प्रथम समाचार पत्र = राजस्थान समाचार | नहीं — प्रथम समाचार पत्र मजहरुल सरूर (1849); राजस्थान समाचार (1889) प्रथम हिंदी दैनिक |
आगीबाण बंबई से | नहीं — आगीबाण ब्यावर (1932); बंबई से "अखंड भारत" (1936) |
त्यागभूमि के संस्थापक पथिक | नहीं — हरिभाऊ उपाध्याय (1927, अजमेर) |
लोकवाणी जमनालाल बजाज ने स्वयं निकाला | नहीं — बजाज का निधन 1942 में हुआ; लोकवाणी 1943 में उनकी स्मृति में निकला |
नवज्योति जयपुर से शुरू हुआ | नहीं — अजमेर (1936), कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी |
राजस्थान पत्रिका स्वतंत्रता-पूर्व पत्र | नहीं — 1956, कर्पूर चंद्र कुलिश |
दैनिक भास्कर राजस्थान में स्थापित | नहीं — मूल रूप से मध्य प्रदेश का समूह; राजस्थान में बाद में संस्करण |
राजस्थान सेवा संघ की स्थापना अजमेर में | नहीं — स्थापना वर्धा (1919); 1920 में अजमेर स्थानांतरित |
"राजस्थान", "राजस्थान समाचार", "राजस्थान केसरी" एक ही | तीन अलग पत्र — ऋषिदत्त मेहता / समर्थदान / पथिक |
नियम: जहाँ वर्ष को लेकर पुस्तकों में भिन्नता है (सज्जन कीर्ति सुधाकर, राजपूताना गजट, तरुण राजस्थान, प्रजा सेवक), वहाँ विकल्पों में से वह उत्तर चुनें जो इस नोट में "परीक्षा-उत्तर" के रूप में दिया गया है, और यदि दोनों वर्ष विकल्प में हों तो प्रश्न की भाषा ("सामान्यतः", "परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार") पर ध्यान दें।
16. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
"मज़े से भरा" — मजहरुल सरूर, भरतपुर, 1849 (पहला पत्र)
"अजमेर के 5 पत्र — राग, राज, नवीन, त्याग, ज्योति" — राजपूताना गजट, राजस्थान समाचार, नवीन राजस्थान, त्यागभूमि, नवज्योति
"पथिक के तीन पड़ाव — वर्धा का केसरी, अजमेर का नवीन, फिर तरुण"
"व्यास के दो बाण — ब्यावर में आगीबाण (32), बंबई में अखंड भारत (36)"
"हरि ने त्याग किया 27 में" — हरिभाऊ उपाध्याय, त्यागभूमि, 1927
"बजाज गए 42 में, लोकवाणी आई 43 में" — जयपुर
"कप्तान की ज्योति 36 में अजमेर से" — दुर्गाप्रसाद चौधरी, नवज्योति
"कुलिश की पत्रिका, एकीकरण के साथ — 1956"
17. संबंधित नोट्स
18. एक दिन पहले — 12 रेखाएँ
मजहरुल सरूर — भरतपुर — 1849 — प्रथम पत्र (उर्दू-हिंदी)।
सज्जन कीर्ति सुधाकर — उदयपुर — मेवाड़ का राजकीय पत्र।
राजपूताना गजट — अजमेर — 1885 — मौलवी मुराद अली।
राजस्थान समाचार — अजमेर — 1889 — मुंशी समर्थदान — प्रथम हिंदी दैनिक।
राजस्थान सेवा संघ — 1919 वर्धा → 1920 अजमेर।
राजस्थान केसरी — 1920 वर्धा — पथिक — जमनालाल बजाज की सहायता।
नवीन राजस्थान (1921 अजमेर) → तरुण राजस्थान (≈1923)।
त्यागभूमि — 1927 अजमेर — हरिभाऊ उपाध्याय।
आगीबाण (1932 ब्यावर) और अखंड भारत (1936 बंबई) — जयनारायण व्यास।
नवज्योति — 1936 अजमेर — कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी।
लोकवाणी — 1943 जयपुर — जमनालाल बजाज स्मृति।
राजस्थान पत्रिका — 7 मार्च 1956 जयपुर — कर्पूर चंद्र कुलिश।
19. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पेज के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। जिन प्रश्नों में गलती हो, उनके लिए खंड 12 (मुख्य सारणी) और खंड 15 (भ्रम व सावधानियाँ) दोबारा पढ़ें। "प्रथम" वाले प्रश्नों के लिए खंड 4 और वर्ष-आधारित प्रश्नों के लिए खंड 13 की समयरेखा को एक बार लिखकर दोहराएँ — विशेषकर अजमेर, ब्यावर, वर्धा और बंबई से निकले पत्रों को अलग-अलग समूहों में बाँटकर।
20. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
राजस्थान की पत्रकारिता का इतिहास दरअसल रियासती निरंकुशता के विरुद्ध अभिव्यक्ति के संघर्ष का इतिहास है। 1849 के मजहरुल सरूर और राजकीय गजटों से शुरू होकर यह अजमेर के राजपूताना गजट और राजस्थान समाचार तक पहुँची; फिर पथिक, हरिभाऊ उपाध्याय, जयनारायण व्यास और दुर्गाप्रसाद चौधरी जैसे नेता-पत्रकारों ने इसे किसान व प्रजामंडल आंदोलनों का हथियार बनाया। रियासती प्रतिबंधों ने इसे अजमेर, ब्यावर, वर्धा और बंबई की ओर धकेला, पर रोका नहीं। स्वतंत्रता के बाद राजस्थान पत्रिका और दैनिक नवज्योति जैसे पत्रों ने लोकतांत्रिक राजस्थान की आवाज़ बनकर यह परंपरा आगे बढ़ाई। परीक्षा के लिए तीन स्तंभ याद रखें — "प्रथम" वाले पत्र (1849, 1889), नेता-पत्रकार जोड़ियाँ (पथिक, हरिभाऊ, व्यास, चौधरी) और प्रकाशन-स्थान का भूगोल (रियासतों के बाहर)।
1849 मजहरुल सरूर · 1885 राजपूताना गजट · 1889 राजस्थान समाचार · 1919 सेवा संघ · 1920 राजस्थान केसरी · 1921 नवीन राजस्थान · 1927 त्यागभूमि · 1932 आगीबाण · 1936 अखंड भारत/नवज्योति · 1943 लोकवाणी · 1956 राजस्थान पत्रिका
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार राजस्थान का प्रथम समाचार पत्र 'मजहरुल सरूर' था, जो 1849 में भरतपुर से उर्दू और हिंदी में निकला। यह रियासती संरक्षण वाला सूचना-प्रधान पत्र था।
सामान्यतः 'राजस्थान समाचार' को राजस्थान का पहला हिंदी दैनिक माना जाता है, जिसे मुंशी समर्थदान ने 1889 में अजमेर से आरंभ किया। कुछ इतिहासकार लिखते हैं कि यह आरंभ में साप्ताहिक था और बाद में दैनिक हुआ, पर परीक्षा-उत्तर राजस्थान समाचार ही है।
राजस्थान केसरी 1920 में वर्धा (महाराष्ट्र) से विजय सिंह पथिक ने निकाला। इसे सेठ जमनालाल बजाज की आर्थिक सहायता मिली और रामनारायण चौधरी इसके संचालन में सहयोगी रहे।
विजय सिंह पथिक ने 1921 में अजमेर से 'नवीन राजस्थान' निकाला, जो बिजोलिया किसान आंदोलन का मुखर प्रचारक था। इस पर प्रतिबंध के बाद यही पत्र 'तरुण राजस्थान' नाम से निकला (परीक्षा-पुस्तकों में प्रायः 1923)।
राजस्थान सेवा संघ की स्थापना 1919 में वर्धा में हुई। विजय सिंह पथिक, अर्जुनलाल सेठी और केसरी सिंह बारहठ इसके संस्थापकों में थे। 1920 में इसका कार्यालय अजमेर स्थानांतरित हुआ।
त्यागभूमि 1927 में अजमेर से गांधीवादी नेता हरिभाऊ उपाध्याय ने निकाली। इसमें खादी, अस्पृश्यता-निवारण, नशाबंदी और ग्राम-सुधार जैसे रचनात्मक विषय प्रमुख थे।
जयनारायण व्यास ने 1932 में ब्यावर से 'आगीबाण' निकाला, जिसे राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक समाचार पत्र माना जाता है, और 1936 में बंबई से 'अखंड भारत' निकाला।
लोकवाणी 1943 में जयपुर से सेठ जमनालाल बजाज की स्मृति में निकाला गया, जिनका निधन फ़रवरी 1942 में हुआ था। यह जयपुर प्रजामंडल के विचारों का प्रमुख माध्यम बना।
अजमेर-मेरवाड़ा सीधे ब्रिटिश शासन के अधीन था, इसलिए यहाँ रियासतों के मनमाने प्रतिबंध लागू नहीं होते थे। रियासतों में आलोचनात्मक पत्र निकालने पर निष्कासन, जब्ती और जेल आम थी, इसलिए राष्ट्रवादी पत्र अजमेर, ब्यावर, वर्धा और बंबई जैसे बाहरी केंद्रों से निकले।
राजस्थान पत्रिका की स्थापना कर्पूर चंद्र कुलिश ने 7 मार्च 1956 को जयपुर से की। आगे चलकर यह राजस्थान का सबसे बड़ा क्षेत्रीय समाचार-पत्र समूह बना।
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