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राजस्थान इतिहास

राजस्थान के किसान आंदोलन (1897–1946) — बिजोलिया, बेगूं, नीमूचणा | पूर्ण नोट्स

Sudhir Dhaka (इतिहास विशेषज्ञ)
12 अगस्त 2026
7 मिनट पठन
राजस्थान के किसान आंदोलन (1897–1946) — बिजोलिया, बेगूं, नीमूचणा | पूर्ण नोट्स

🎯 Quick Answer Box

राजस्थान के किसान आंदोलन 19वीं सदी के अंत से आजादी तक चली किसानों की वे संगठित लड़ाइयाँ थीं जो देशी रियासतों (मेवाड़, अलवर, मारवाड़, जयपुर, बीकानेर, बूंदी) में जागीरदारों और शासकों द्वारा लगाए गए 84 प्रकार के लाग-बाग करों, बेगार प्रथा और बेतहाशा लगान के विरुद्ध लड़ी गईं। सबसे लंबा और पहला संगठित आंदोलन बिजोलिया किसान आंदोलन (1897–1941) था, जिसे 44 वर्ष चलने के कारण भारत का सबसे लंबा किसान आंदोलन माना जाता है। इसके "जनक" साधु सीताराम दास और प्रमुख नेतृत्वकर्ता विजय सिंह पथिक थे, जिन्हें "राजस्थान के किसान आंदोलन का जनक/राजस्थान का गांधी" कहा जाता है। सबसे भीषण घटना नीमूचणा हत्याकांड (14 मई 1925, अलवर) थी, जिसे "राजस्थान का जलियांवाला बाग" कहा जाता है।

1. भूमिका: किसान आंदोलन राजस्थान के इतिहास में क्यों महत्वपूर्ण हैं

RPSC, RAS, प्रथम/द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती, पटवारी, ग्राम सेवक और REET जैसी लगभग हर राजस्थान-केंद्रित परीक्षा में राजस्थान के किसान आंदोलन एक स्थायी और भारी-भरकम अंक वाला टॉपिक है। यह विषय केवल कृषि इतिहास नहीं है, बल्कि रियासतकालीन शोषण, राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ाव, और आधुनिक राजस्थान के राजनीतिक चेतना-निर्माण की कहानी भी है। बिजोलिया, बेगूं, नीमूचणा, शेखावाटी और मारवाड़ के आंदोलन — हर एक अपनी अलग विशेषता, नेता, तिथि और परिणाम के साथ बार-बार परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

2. पृष्ठभूमि: रियासतकालीन कृषि व्यवस्था और लाग-बाग कर

आजादी-पूर्व राजस्थान की देशी रियासतों में भूमि व्यवस्था तीन स्तरों पर आधारित थी — शासक (महाराजा/महाराणा) → जागीरदार/ठिकानेदार → काश्तकार (किसान)। किसानों से वसूला जाने वाला बोझ केवल लगान (भू-राजस्व) तक सीमित नहीं था, बल्कि दर्जनों अतिरिक्त कर भी लिए जाते थे, जिन्हें सामूहिक रूप से "लाग-बाग" कहा जाता था।

प्रमुख लाग-बाग करों की तालिका

कर का नामअर्थ / अवसर
चंवरी करपुत्र के विवाह पर जागीरदार को दिया जाने वाला कर
तलवार बंधाईजागीरदार के पुत्र की तलवार-बंधाई (वयस्क होने) की रस्म पर
कुँवर करजागीरदार के घर पुत्र-जन्म पर
लाटा-कूंताखेत में खड़ी फसल पर लगने वाला अनुमानित कर
हाथ बंधाईनई फसल काटने की अनुमति के बदले कर
डालीत्योहारों पर भेंट स्वरूप वसूला जाने वाला कर
बेगारबिना मजदूरी दिए जबरन श्रम करवाना

बिजोलिया ठिकाने में अकेले 84 प्रकार के लाग-बाग कर वसूले जाते थे — यह आँकड़ा परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।

3. किसान आंदोलनों के प्रमुख कारण

  1. अत्यधिक व मनमाना लगान — फसल खराब होने या अकाल की स्थिति में भी लगान में छूट न देना।
  2. 84 प्रकार के लाग-बाग कर — विवाह, जन्म, त्योहार आदि हर अवसर पर अतिरिक्त वसूली।
  3. बेगार प्रथा — बिना पारिश्रमिक जबरन श्रम, यहाँ तक कि महिलाओं से भी बेगार लिए जाने के उदाहरण (बूंदी)।
  4. जागीरदारी शोषण — जागीरदारों की मनमानी और शासन का इसमें हस्तक्षेप न करना।
  5. राष्ट्रीय आंदोलन का प्रभाव — असहयोग आंदोलन, गांधीवादी विचारधारा और रूसी क्रांति (1917) से प्रेरणा।
  6. प्रेस और संगठनों का उदय — 'प्रताप', 'तरुण राजस्थान', 'राजस्थान केसरी' जैसे पत्रों ने किसानों की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच दिया।

4. बिजोलिया किसान आंदोलन (1897–1941): "किसान आंदोलनों की जननी"

स्थान: बिजोलिया ठिकाना, वर्तमान भीलवाड़ा जिला (तत्कालीन मेवाड़ रियासत का हिस्सा) अवधि: 1897–1941 (लगभग 44 वर्ष) — भारत का सबसे लंबा चलने वाला किसान आंदोलन

बिजोलिया आंदोलन को राजस्थान का प्रथम संगठित एवं अहिंसक किसान आंदोलन माना जाता है। इसकी शुरुआत चंवरी कर के विरोध से हुई थी और यह धाकड़ जाति के किसानों द्वारा आरंभ किया गया।

आंदोलन के तीन चरण

चरणअवधिनेतृत्वप्रमुख घटनाएँ
प्रथम चरण1897–1916साधु सीताराम दास (आंदोलन के जनक)रावकृष्ण सिंह के विरुद्ध चंवरी कर पर विरोध शुरू; 1913 में अकाल
द्वितीय चरण1916–1923विजय सिंह पथिकबारीसल गाँव में किसान पंचायत बोर्ड की स्थापना; गणेश शंकर विद्यार्थी के पत्र 'प्रताप' से राष्ट्रीय प्रचार
तृतीय चरण1927–1941माणिक्य लाल वर्मा, जमनालाल बजाज, हरिभाऊ उपाध्याय1941 में मेवाड़ के प्रधानमंत्री टी. विजयराघवाचार्य से समझौता, आंदोलन समाप्त

विशेष तथ्य: विजय सिंह पथिक (मूल नाम भूप सिंह) ने 1917 की रूसी क्रांति से प्रेरणा लेकर किसानों में जागरूकता फैलाई और 'प्रताप' पत्र के जरिए बिजोलिया आंदोलन को अखिल भारतीय पहचान दिलाई। माणिक्य लाल वर्मा अपने 'पंछीड़ा' गीत से किसानों में जोश भरते थे।

5. बेगूं किसान आंदोलन (1921–1923)

स्थान: बेगूं ठिकाना (मेवाड़ का प्रथम श्रेणी ठिकाना), वर्तमान चित्तौड़गढ़ जिला शुरुआत: मई 1921, मेनाल/चांदखेड़ी स्थान से

बिजोलिया आंदोलन से प्रेरित होकर बेगूं के धाकड़ किसानों ने बेगार, लाग-बाग और अत्यधिक लगान के विरुद्ध आंदोलन शुरू किया। आरंभ में नेतृत्व रामनारायण चौधरी ने किया, बाद में विजय सिंह पथिक ने बागडोर संभाली।

  • 1922 — बोल्शेविक समझौता: बेगूं के ठाकुर अनूप सिंह और राजस्थान सेवा संघ के बीच हुए समझौते को मेवाड़ महाराणा ने "बोल्शेविक" (रूसी शब्द, अर्थ "बहुमत") की संज्ञा दी। इसकी जाँच हेतु ट्रेंच आयोग गठित हुआ, जिसने बिना उचित जाँच के रिपोर्ट पेश कर दी।
  • 13 जुलाई 1923 — गोविंदपुरा गोलीकांड: ट्रेंच के आदेश पर सेना ने गोविंदपुरा में एकत्र किसानों पर गोलियाँ चलाईं, जिसमें रूपाजी धाकड़ और कृपाजी धाकड़ शहीद हुए।
  • इस घटना के बाद 'प्रताप', 'तरुण राजस्थान' और 'राजस्थान केसरी' जैसे समाचार पत्रों पर मेवाड़ रियासत में प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • 1924 में लगान दरों में कमी और बेगार प्रथा की समाप्ति के साथ आंदोलन सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।

⚠️ सत्यापन सलाह: बोल्शेविक समझौते में राजस्थान सेवा संघ की ओर से हस्ताक्षरकर्ता को लेकर स्रोतों में भिन्नता है (कुछ स्रोत विजय सिंह पथिक, कुछ रामनारायण चौधरी बताते हैं) — RPSC आधिकारिक पाठ्यक्रम व राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल की सामग्री से अंतिम पुष्टि अवश्य करें।

6. अलवर किसान आंदोलन और नीमूचणा हत्याकांड (1925): "राजस्थान का जलियांवाला बाग"

स्थान: नीमूचणा गाँव, बानसूर क्षेत्र, अलवर रियासत तिथि: 14 मई 1925

अलवर के महाराजा जयसिंह ने किसानों पर दोहरा लगान लगा दिया, जिसका राजपूत किसानों ने प्रबल विरोध किया। 14 मई 1925 को नीमूचणा में एकत्र किसानों की शांतिपूर्ण सभा पर अलवर रियासत की सेना ने छाजू सिंह के नेतृत्व में अंधाधुंध गोलीबारी की। इस नरसंहार में सैकड़ों किसान मारे गए (स्रोतों में मृतकों की संख्या 150 से 250 के बीच भिन्न-भिन्न दी गई है) और गाँव जला दिए गए।

  • महात्मा गांधी ने अपने पत्र 'यंग इंडिया' में इसे जलियांवाला बाग से भी भयावह बताते हुए "दोहरी डायरशाही" कहा।
  • इस घटना को "राजस्थान का जलियांवाला बाग" कहा जाता है।
  • व्यापक विरोध के बाद अलवर रियासत को दोहरा लगान वापस लेना पड़ा और बेगार प्रथा समाप्त करनी पड़ी।

⚠️ सत्यापन सलाह: मृतकों की संख्या (150 अथवा 250) को लेकर विभिन्न स्रोतों में अंतर है — परीक्षा में इसे सावधानी से जाँचें और RPSC पाठ्यक्रम के आधिकारिक आँकड़े को वरीयता दें।

7. मारवाड़ किसान आंदोलन (1918–1948)

स्थान: जोधपुर (मारवाड़) रियासत

मारवाड़ में सबसे पहला राजनीतिक संगठन 'मारवाड़ हितकारिणी सभा' (1918) थी, जिसने जागीरदारी शोषण के विरुद्ध किसानों को संगठित करना शुरू किया। मारवाड़ में जागीरदारों की मनमानी वसूली और बेदखली की समस्या प्रमुख रही। यह आंदोलन दशकों तक अलग-अलग चरणों में चला और आज़ादी के करीब तक जारी रहा।

8. शेखावाटी (सीकर) किसान आंदोलन (1922–1935): "किसान आंदोलनों की जन्मभूमि"

स्थान: शेखावाटी क्षेत्र (जयपुर रियासत के अधीन, कछवाहा वंश की शेखावत शाखा का क्षेत्र)

1922 में सीकर के सामंत कल्याण सिंह द्वारा करों में वृद्धि के विरुद्ध जाट किसानों ने आंदोलन शुरू किया।

  • 1921: चिड़ावा सेवा समिति का गठन — आंदोलन की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है; नेतृत्व सरदार हरलाल सिंह ने किया।
  • 1925: राजस्थान सेवा संघ के मंत्री रामनारायण चौधरी सीकर पहुँचे और अधिकारियों से वार्ता की, पर समझौता विफल रहा।
  • चौधरी ने 'तरुण राजस्थान' और लंदन के 'Daily Herald' के जरिए मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया; ब्रिटेन की संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) में पैट्रिक लॉरेन्स ने यह मुद्दा उठाया।
  • 1931: भरतपुर के किसान नेता ठाकुर देशराज ने राजस्थान जाट क्षेत्रीय महासभा का गठन किया, जिसने शेखावाटी आंदोलन का नेतृत्व संभाला।
  • 1932: झुंझुनूं में अखिल भारतीय जाट महासभा का अधिवेशन हुआ, जिसने आंदोलन का समर्थन किया।
  • जयसिंहपुरा हत्याकांड — राजस्थान का पहला ऐसा हत्याकांड था जिसमें हत्यारों को सजा मिली।
  • अमर सेवा समिति — मास्टर प्यारेलाल द्वारा गठित, जिसने शेखावाटी में राजनीतिक चेतना फैलाई।

9. बूंदी किसान आंदोलन

स्थान: बूंदी रियासत नेतृत्व: पं. नयनूराम शर्मा (राजस्थान सेवा संघ सदस्य)

बूंदी का आंदोलन जागीरदारी व्यवस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि सीधे बूंदी प्रशासन के विरुद्ध था — यह एक महत्वपूर्ण एग्जाम ट्रैप है। बूंदी में गुर्जर किसानों की भागीदारी अधिक रही और यहाँ महिलाओं से भी बेगार ली जाती थी।

  • डाबरा हत्याकांड — 2 अप्रैल 1923: बूंदी आंदोलन की एक प्रमुख हिंसक घटना।

10. बीकानेर किसान आंदोलन (दूधवाखारा व कांगड़ कांड)

स्थान: बीकानेर रियासत

1944 में बीकानेर के जागीरदारों ने बकाया राशि के बहाने अनेक किसानों को उनकी जोत से बेदखल कर दिया। बीकानेर प्रजा परिषद् ने हनुमान सिंह के नेतृत्व में किसान आंदोलन का समर्थन किया।

  • कांगड़ कांड (1946, वर्तमान रतनगढ़, चूरू): ठाकुर गोप सिंह द्वारा किसानों पर किए गए अत्याचार की बीकानेर प्रजा परिषद् ने कड़ी निंदा की। यह घटना बीकानेर किसान आंदोलन की अंतिम कड़ी मानी जाती है।

11. राजस्थान सेवा संघ की भूमिका (1919)

स्थापना: 1919, वर्धा (महाराष्ट्र) | मुख्य संस्थापक: विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी, हरिभाई किंकर (कुछ स्रोतों में अर्जुनलाल सेठी व केसरी सिंह बारहठ का योगदान भी उल्लिखित)

राजस्थान सेवा संघ राजस्थान की रियासती जनता में राजनीतिक चेतना जगाने और उनकी शिकायतों को संगठित मंच देने वाली सबसे प्रभावी संस्था साबित हुई।

  • 22 अक्टूबर 1920 से 'राजस्थान केसरी' नामक साप्ताहिक पत्र वर्धा से प्रकाशित हुआ (संपादक: विजय सिंह पथिक, सह-संपादक: रामनारायण चौधरी); आर्थिक सहयोग जमनालाल बजाज ने दिया।
  • 1920 में संघ का मुख्यालय वर्धा से अजमेर स्थानांतरित हुआ।
  • संघ की शाखाएँ बूंदी, जयपुर, जोधपुर, सीकर सहित कई रियासतों में फैलीं और लगभग हर बड़े किसान आंदोलन (बिजोलिया, बेगूं, शेखावाटी) में इसकी प्रत्यक्ष भूमिका रही।
  • 1919 के अमृतसर कांग्रेस अधिवेशन में पथिक जी के प्रयासों से बाल गंगाधर तिलक ने बिजोलिया संबंधी प्रस्ताव रखा।

12. प्रमुख नेता और उनका योगदान

नेताजुड़ावप्रमुख योगदान
साधु सीताराम दासबिजोलिया (प्रथम चरण)बिजोलिया आंदोलन के जनक; चंवरी कर के विरुद्ध शुरुआत
विजय सिंह पथिक (मूल नाम भूप सिंह)बिजोलिया, बेगूं, राजस्थान सेवा संघ"राजस्थान के किसान आंदोलन का जनक"; 1919 में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना
माणिक्य लाल वर्माबिजोलिया (तृतीय चरण)'पंछीड़ा' गीत से जन-जागरण; 1938 में मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना
रामनारायण चौधरीबेगूं, शेखावाटी, राजस्थान सेवा संघसंघ के सह-संस्थापक; 'तरुण राजस्थान' के माध्यम से प्रचार
नयनूराम शर्माबूंदीबूंदी किसान आंदोलन का नेतृत्व
हनुमान सिंहबीकानेरबीकानेर प्रजा परिषद् के माध्यम से किसान समर्थन
ठाकुर देशराजशेखावाटी/भरतपुर1931 में राजस्थान जाट क्षेत्रीय महासभा की स्थापना
जमनालाल बजाजबिजोलिया, राजस्थान सेवा संघआर्थिक सहयोग व नेतृत्व

13. किसान आंदोलनों का महत्व और परिणाम

  1. राजनीतिक चेतना: किसान आंदोलनों ने आम रियासती जनता में पहली बार संगठित राजनीतिक चेतना पैदा की।
  2. प्रजामंडल आंदोलन की नींव: बिजोलिया व अन्य आंदोलनों के अनुभव से मेवाड़, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर जैसी रियासतों में प्रजामंडल आंदोलन का उदय हुआ (उदा. 1938 मेवाड़ प्रजामंडल)।
  3. लाग-बाग व बेगार में कमी: कई ठिकानों में करों की दर घटी और बेगार प्रथा औपचारिक रूप से समाप्त हुई।
  4. राष्ट्रीय जुड़ाव: गांधीजी, तिलक और कांग्रेस के राष्ट्रीय मंच पर राजस्थान की रियासती समस्याएँ पहली बार सुनी गईं।
  5. प्रेस की भूमिका स्थापित: 'प्रताप', 'तरुण राजस्थान', 'राजस्थान केसरी' जैसे पत्रों ने जन-आंदोलन और मीडिया के गठजोड़ का उदाहरण प्रस्तुत किया।

14. सभी प्रमुख किसान आंदोलन — तुलनात्मक तालिका

आंदोलनरियासत/ठिकानाअवधिप्रमुख नेताप्रमुख घटना
बिजोलिया किसान आंदोलनमेवाड़ (बिजोलिया, भीलवाड़ा)1897–1941सीताराम दास, विजय सिंह पथिक, माणिक्य लाल वर्माभारत का सबसे लंबा किसान आंदोलन (44 वर्ष)
बेगूं किसान आंदोलनमेवाड़ (बेगूं, चित्तौड़गढ़)1921–1923/24रामनारायण चौधरी, विजय सिंह पथिकगोविंदपुरा गोलीकांड (13 जुलाई 1923)
अलवर किसान आंदोलनअलवर1925स्थानीय किसान नेतृत्वनीमूचणा हत्याकांड (14 मई 1925)
मारवाड़ किसान आंदोलनजोधपुर (मारवाड़)1918–1948मारवाड़ हितकारिणी सभासबसे लंबे समय तक चला आंदोलनों में से एक
शेखावाटी किसान आंदोलनजयपुर (सीकर-झुंझुनूं)1922–1935हरलाल सिंह, रामनारायण चौधरी, ठाकुर देशराजDaily Herald (लंदन) व ब्रिटिश संसद तक मुद्दा पहुँचा
बूंदी किसान आंदोलनबूंदी1920 के दशकनयनूराम शर्माडाबरा हत्याकांड (2 अप्रैल 1923)
बीकानेर किसान आंदोलनबीकानेर1944–1946हनुमान सिंह, बीकानेर प्रजा परिषद्कांगड़ कांड (1946)

15. ⚠️ Exam Trap Section — सबसे ज़्यादा भ्रम पैदा करने वाले तथ्य

  • ट्रैप 1: बिजोलिया आंदोलन के जनक साधु सीताराम दास हैं, जबकि "राजस्थान के किसान आंदोलन का जनक/पिता" की उपाधि विजय सिंह पथिक को दी जाती है — दोनों को एक-दूसरे से गड्ड-मड्ड न करें।
  • ट्रैप 2: नीमूचणा हत्याकांड अलवर रियासत में हुआ, जबकि इसे अक्सर छात्र मेवाड़ के आंदोलनों (बिजोलिया/बेगूं) से जोड़ने की भूल करते हैं।
  • ट्रैप 3: बूंदी आंदोलन जागीरदारी प्रथा के विरुद्ध नहीं, बल्कि सीधे बूंदी रियासत/प्रशासन के विरुद्ध था — यह अन्य सभी आंदोलनों से अलग है।
  • ट्रैप 4: बिजोलिया आंदोलन में 84 प्रकार के लाग-बाग कर का उल्लेख होता है — यह संख्या अक्सर 48 या 48 प्रकार के रूप में गलत याद रखी जाती है।
  • ट्रैप 5: "बोल्शेविक समझौता" शब्द मेवाड़ महाराणा द्वारा दिया गया था, न कि ट्रेंच आयोग द्वारा गढ़ा गया — यह केवल जांच रिपोर्ट में इस्तेमाल हुआ।
  • ट्रैप 6: राजस्थान सेवा संघ की स्थापना वर्धा (महाराष्ट्र) में हुई थी, राजस्थान में नहीं — बाद में मुख्यालय अजमेर स्थानांतरित हुआ।
  • ट्रैप 7: शेखावाटी क्षेत्र जयपुर रियासत के अधीन था, यह स्वतंत्र रियासत नहीं थी।

16. 🧠 Memory Tricks (याद रखने की तकनीक)

बिजोलिया के तीन चरण याद रखने हेतु — "सीता विजय माणिक"

सीताराम दास (प्रथम) → विजय सिंह पथिक (द्वितीय) → माणिक्य लाल वर्मा (तृतीय)

"BAN-JC" ट्रिक — प्रमुख हत्याकांड याद रखने हेतु

Begun (गोविंदपुरा, 1923) → Alwar (नीमूचणा, 1925) → Neemuchana + Jaisinghpura + Changad/Kangad (शेखावाटी व बीकानेर की अंतिम घटनाएँ)

राजस्थान सेवा संघ के तीन संस्थापक — "पथिक चौधरी किंकर"

थिक (विजय सिंह) + चौधरी (रामनारायण) + किंकर (हरिभाई) = संघ की नींव

लाग-बाग करों की श्रेणी याद रखने हेतु "जन्म-विवाह-फसल"

कुँवर कर (जन्म) → चंवरी/तलवार बंधाई (विवाह) → लाटा-कूंता/हाथ बंधाई (फसल)

17. 👨‍🏫 Teacher's Commentary

बिजोलिया, बेगूं और अलवर के आंदोलनों को अलग-अलग रटने के बजाय एक समयरेखा (timeline) के रूप में समझें: 1897 में बिजोलिया से शुरुआत → 1919 में राजस्थान सेवा संघ का संगठनात्मक ढांचा बनना → 1921 में बेगूं और शेखावाटी में इसी मॉडल का दोहराव → 1925 में अलवर की सबसे भीषण घटना। जब आप इस क्रम में याद करते हैं तो नेताओं (सीताराम दास → विजय सिंह पथिक → रामनारायण चौधरी → माणिक्य लाल वर्मा) की भूमिका भी अपने आप स्पष्ट हो जाती है। परीक्षा में अक्सर "किस आंदोलन में कौन-सी हत्या/हत्याकांड हुआ" पूछा जाता है — इसलिए हत्याकांडों की तिथि और स्थान को अलग से एक छोटी सूची बनाकर रिवीजन करें।

18. 📝 PYQs / अभ्यास प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1. बिजोलिया किसान आंदोलन किस वर्ष से किस वर्ष तक चला? A) 1857–1900 B) 1897–1941 C) 1905–1935 D) 1919–1947 उत्तर: B) 1897–1941

प्रश्न 2. "राजस्थान के किसान आंदोलन का जनक" किसे कहा जाता है? A) माणिक्य लाल वर्मा B) सीताराम दास C) विजय सिंह पथिक D) रामनारायण चौधरी उत्तर: C) विजय सिंह पथिक

प्रश्न 3. नीमूचणा हत्याकांड किस रियासत में और किस तिथि को हुआ? A) मेवाड़, 13 जुलाई 1923 B) अलवर, 14 मई 1925 C) बीकानेर, 1946 D) बूंदी, 2 अप्रैल 1923 उत्तर: B) अलवर, 14 मई 1925

प्रश्न 4. राजस्थान सेवा संघ की स्थापना कहाँ हुई थी? A) अजमेर B) बिजोलिया C) वर्धा D) जयपुर उत्तर: C) वर्धा

प्रश्न 5. गोविंदपुरा गोलीकांड में कौन-से दो किसान शहीद हुए? A) रूपाजी व कृपाजी धाकड़ B) मानाजी व सुखाजी C) हनुमान सिंह व देशराज D) नयनूराम व हरलाल सिंह उत्तर: A) रूपाजी व कृपाजी धाकड़

प्रश्न 6. बूंदी किसान आंदोलन मुख्यतः किसके विरुद्ध था? A) जागीरदारी प्रथा B) बूंदी प्रशासन C) ब्रिटिश सरकार D) मेवाड़ रियासत उत्तर: B) बूंदी प्रशासन

प्रश्न 7. डाबरा हत्याकांड किस तिथि को हुआ? A) 13 जुलाई 1923 B) 14 मई 1925 C) 2 अप्रैल 1923 D) 22 अक्टूबर 1920 उत्तर: C) 2 अप्रैल 1923

प्रश्न 8. शेखावाटी किसान आंदोलन का मुद्दा किस लंदन के समाचार पत्र में उठाया गया? A) The Times B) Daily Herald C) Manchester Guardian D) Reuters उत्तर: B) Daily Herald

प्रश्न 9. कांगड़ कांड (1946) किस रियासत के किसान आंदोलन की अंतिम घटना मानी जाती है? A) मारवाड़ B) बीकानेर C) मेवाड़ D) अलवर उत्तर: B) बीकानेर

प्रश्न 10. माणिक्य लाल वर्मा ने किसानों में जोश भरने के लिए कौन-सा गीत गाया? A) पंछीड़ा B) केसरिया बालम C) मूमल D) घूमर उत्तर: A) पंछीड़ा

🔗 बाह्य संदर्भ (External References)

⚠️ सत्यापन सलाह (Verification Advisory)

इस लेख में उल्लिखित तिथियाँ, मृतकों की संख्या (विशेषकर नीमूचणा हत्याकांड) और कुछ नेतृत्व-संबंधी विवरण विभिन्न स्रोतों में भिन्न-भिन्न पाए जाते हैं। परीक्षा-तैयारी हेतु अंतिम रूप से RPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम और राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल की सामग्री से अवश्य मिलान करें।

🧑‍🏫 E-E-A-T लेखक परिचय

यह लेख Suyog Academy की कोर टीम — योगेश, सुधीर ढाका और महेंद्र ढाका द्वारा राजस्थान व केंद्रीय सरकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेषज्ञता के आधार पर तैयार किया गया है। टीम राजस्थान इतिहास व संस्कृति पर आधारित शोधपरक, परीक्षा-उन्मुख सामग्री सुयोग अकादमी पर नियमित रूप से प्रकाशित करती है।

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लेखक / पब्लिकेशन: Gauri Publication

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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

बिजोलिया किसान आंदोलन (1897–1941), जो लगभग 44 वर्ष चला, राजस्थान का प्रथम संगठित एवं सबसे लंबा किसान आंदोलन माना जाता है।

विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी और हरिभाई किंकर ने मिलकर 1919 में वर्धा (महाराष्ट्र) में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की।

शेखावाटी क्षेत्र में जाट किसानों के लंबे संघर्ष, राजस्थान जाट क्षेत्रीय महासभा (1931) के गठन और मुद्दे के ब्रिटिश संसद तक पहुँचने के कारण इस क्षेत्र को यह उपाधि दी जाती है।

14 मई 1925 को अलवर रियासत के नीमूचणा गाँव में हुए किसानों के नरसंहार को "राजस्थान का जलियांवाला बाग" कहा जाता है।

मूल नाम भूप सिंह, विजय सिंह पथिक बिजोलिया व बेगूं आंदोलनों के प्रमुख नेता तथा 1919 में राजस्थान सेवा संघ के संस्थापक थे। इन्हें "राजस्थान के किसान आंदोलन का जनक" कहा जाता है।

लाग-बाग रियासतकालीन राजस्थान में जागीरदारों द्वारा किसानों से विवाह, जन्म, त्योहार व फसल जैसे अवसरों पर वसूले जाने वाले दर्जनों अतिरिक्त कर थे — बिजोलिया में इनकी संख्या 84 प्रकार तक बताई जाती है।

13 जुलाई 1923 को गोविंदपुरा में सेना की गोलीबारी में रूपाजी धाकड़ और कृपाजी धाकड़ शहीद हुए।

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