राजस्थान के कंजर्वेशन रिज़र्व व आखेट निषिद्ध क्षेत्र — RAS/CET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान भूगोल इकाई। आधिकारिक सिलेबस से विषय-सूची; पुस्तक का शब्दशः पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: राजस्थान में राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य के अलावा संरक्षित क्षेत्रों की दो और श्रेणियाँ परीक्षा में बार-बार पूछी जाती हैं — कंजर्वेशन रिज़र्व (संरक्षण आरक्षित क्षेत्र) और आखेट निषिद्ध क्षेत्र (Closed Area)। कंजर्वेशन रिज़र्व और कम्युनिटी रिज़र्व की श्रेणी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में 2002 के संशोधन से जोड़ी गई (धारा 36A–36D)। कंजर्वेशन रिज़र्व सरकारी भूमि पर, स्थानीय समुदाय से परामर्श के बाद राज्य सरकार घोषित करती है। राजस्थान का पहला कंजर्वेशन रिज़र्व — बीसलपुर (टोंक), 2008; उसी वर्ष जोड़बीड़ गढ़वाला (बीकानेर) — गिद्ध और सुंधामाता (जालोर-सिरोही) — भालू भी घोषित हुए। इसके बाद गुढ़ा विश्नोईयान (जोधपुर), शाकंभरी (सीकर-झुंझुनूं), गोगेलाव व रोटू (नागौर), बीड़ (झुंझुनूं), उम्मेदगंज पक्षी विहार (कोटा) और जवाई बांध लेपर्ड (पाली, 2013) आए। राज्य में अब 30 से अधिक कंजर्वेशन रिज़र्व हैं (हालिया आँकड़ों के अनुसार; संख्या बढ़ती रहती है) और झुंझुनूं में इनकी संख्या सबसे अधिक मानी जाती है। आखेट निषिद्ध क्षेत्र केवल शिकार पर रोक वाले क्षेत्र हैं — पुस्तकों के अनुसार लगभग 33, सर्वाधिक जोधपुर क्षेत्र में; अधिकांश बिश्नोई बहुल गाँवों के आसपास (देशनोक, मुकाम, लोहावट, फिटकासनी, साथीन, रामदेवरा)।
संक्षिप्त उत्तर
बिंदु | तथ्य | याद रखने योग्य संकेत |
|---|---|---|
कानूनी आधार | वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 | केंद्रीय कानून; राज्य सरकार घोषणा करती है |
CR/कम्युनिटी रिज़र्व श्रेणी | 2002 का संशोधन (धारा 36A–36D) | संशोधन 2003 से लागू माना जाता है |
कंजर्वेशन रिज़र्व की भूमि | राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि | स्थानीय समुदाय से परामर्श आवश्यक |
कम्युनिटी रिज़र्व की भूमि | सामुदायिक या निजी भूमि | समुदाय/व्यक्ति स्वेच्छा से आगे आएँ |
राजस्थान का पहला CR | बीसलपुर (टोंक) | 2008 — बनास नदी पर बीसलपुर बाँध क्षेत्र |
गिद्धों हेतु CR | जोड़बीड़ गढ़वाला (बीकानेर) | 2008 — मृत पशु निस्तारण स्थल |
भालू हेतु प्रसिद्ध CR | सुंधामाता (जालोर-सिरोही) | 2008 — सुंधा माता मंदिर क्षेत्र |
पहला लेपर्ड CR | जवाई बांध (पाली) | 2013 — ग्रेनाइट पहाड़ियाँ, रबारी समुदाय |
पक्षी विहार CR | उम्मेदगंज (कोटा) | 2012 — हाड़ौती क्षेत्र |
सर्वाधिक CR वाला जिला | झुंझुनूं (पुस्तकों के अनुसार) | बीड़, बांसियाल-खेतड़ी, मनसा माता आदि |
कुल CR | 30 से अधिक (हालिया आँकड़े) | संख्या लगातार बदलती है |
आखेट निषिद्ध क्षेत्र | लगभग 33 (पुस्तकों के अनुसार) | सर्वाधिक जोधपुर क्षेत्र में |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
RAS प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा, राजस्थान CET (12वीं व स्नातक), पटवारी, VDO, REET और SI — सभी में "राजस्थान की वन्यजीव संपदा" उप-विषय से प्रश्न आते हैं। राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और टाइगर रिज़र्व पर तो विद्यार्थी अच्छी तैयारी करते हैं, लेकिन कंजर्वेशन रिज़र्व और आखेट निषिद्ध क्षेत्र ऐसे हिस्से हैं जहाँ प्रश्न "कम पढ़े गए तथ्य" से बनते हैं — जैसे "राज्य का पहला कंजर्वेशन रिज़र्व कौन-सा है?", "जोड़बीड़ किस पक्षी के लिए जाना जाता है?", "सुमेलित कीजिए — रिज़र्व और जिला"।
प्रश्नों के प्रकार: प्रथम (पहला कौन), जिला-सुमेलन, प्रजाति-सुमेलन, कानूनी धारा/संशोधन वर्ष, अभयारण्य बनाम CR का अंतर।
मुख्य परीक्षा में: "कंजर्वेशन रिज़र्व की अवधारणा व राजस्थान में उसका महत्व" जैसे 50–100 शब्दों के प्रश्न संभव हैं — इसके लिए खंड 3, 4 और 10 उपयोगी हैं।
मानचित्र आधारित प्रश्न: रिज़र्व किस भौतिक प्रदेश (मरुस्थल, अरावली, हाड़ौती) में है — यह जुड़ाव खंड 7 की तालिका में दिया है।
संस्कृति से जुड़ाव: आखेट निषिद्ध क्षेत्रों का बिश्नोई समाज से संबंध इतिहास-संस्कृति और भूगोल दोनों खंडों में पूछा जा सकता है।
राष्ट्रीय उद्यानों व अभयारण्यों का विस्तृत अध्ययन इस नोट का विषय नहीं है; उनके लिए राजस्थान के वन्यजीव अभयारण्य व टाइगर रिजर्व और राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान पढ़ें।
3. कानूनी आधार: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और 2002 का संशोधन
3.1 संरक्षित क्षेत्रों की श्रेणियाँ
भारत में संरक्षित क्षेत्र (Protected Areas) मुख्यतः वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wild Life (Protection) Act, 1972) के अंतर्गत घोषित होते हैं। मूल अधिनियम में दो प्रमुख श्रेणियाँ थीं — अभयारण्य (Sanctuary) और राष्ट्रीय उद्यान (National Park)। संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने और अभयारण्यों के बीच के क्षेत्रों को जोड़ने के लिए वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा दो नई श्रेणियाँ जोड़ी गईं —
कंजर्वेशन रिज़र्व (Conservation Reserve) — धारा 36A; प्रबंधन हेतु कंजर्वेशन रिज़र्व प्रबंधन समिति — धारा 36B।
कम्युनिटी रिज़र्व (Community Reserve) — धारा 36C; प्रबंधन हेतु कम्युनिटी रिज़र्व प्रबंधन समिति — धारा 36D।
बाद में 2006 के संशोधन से टाइगर रिज़र्व को कानूनी आधार (अध्याय IV-B, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण — NTCA) मिला। 2022 के संशोधन में अनुसूचियों की संख्या घटाकर 4 की गई। ध्यान दें — रामसर स्थल इस अधिनियम की श्रेणी नहीं है; वह एक अंतरराष्ट्रीय संधि (रामसर कन्वेंशन, 1971) के तहत मान्यता है।
3.2 कंजर्वेशन रिज़र्व की मुख्य विशेषताएँ
घोषणा कौन करता है: राज्य सरकार, स्थानीय समुदायों से परामर्श के बाद।
किस भूमि पर: राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि — विशेषकर राष्ट्रीय उद्यानों/अभयारण्यों से लगे क्षेत्र तथा एक संरक्षित क्षेत्र को दूसरे से जोड़ने वाले क्षेत्र (गलियारे)।
उद्देश्य: भू-दृश्य (landscape), समुद्री/स्थलीय दृश्य, वनस्पति-जीव और उनके आवास की रक्षा।
स्थानीय अधिकार: अभयारण्य की तुलना में कम कठोर; स्थानीय लोगों के परंपरागत उपयोग को प्रायः बनाए रखा जाता है।
प्रबंधन: कंजर्वेशन रिज़र्व प्रबंधन समिति — जिसमें वन विभाग के साथ ग्राम पंचायत/स्थानीय प्रतिनिधि होते हैं।
3.3 कम्युनिटी रिज़र्व की मुख्य विशेषताएँ
किस भूमि पर: सामुदायिक या निजी भूमि — जहाँ समुदाय या व्यक्ति स्वेच्छा से वन्यजीव व आवास संरक्षण के लिए आगे आए हों।
घोषणा: राज्य सरकार करती है, पर पहल समुदाय की होती है।
भारत का पहला कम्युनिटी रिज़र्व: केशोपुर-छंब (पंजाब, गुरदासपुर) — सामान्यतः 2007 का माना जाता है।
महत्व: राजस्थान की ओरण, देववन, गोचर जैसी पारंपरिक सामुदायिक संरक्षण व्यवस्थाओं के लिए यह श्रेणी स्वाभाविक रूप से उपयुक्त मानी जाती है।
3.4 आखेट निषिद्ध क्षेत्र (Closed Area) — कानूनी स्थिति
आखेट निषिद्ध क्षेत्र वे क्षेत्र हैं जहाँ राज्य सरकार ने अधिसूचना द्वारा केवल शिकार (आखेट) पर रोक लगाई। भूमि का स्वामित्व, खेती, चराई आदि सामान्य गतिविधियाँ चलती रहती हैं — केवल वन्यजीवों का शिकार वर्जित है। राजस्थान में ऐसे अनेक क्षेत्र राज्य के पुराने वन्यजीव कानून (राजस्थान वन्य पशु एवं पक्षी संरक्षण अधिनियम, 1951) और बाद में 1972 के केंद्रीय अधिनियम की व्यवस्था के तहत अधिसूचित हुए। परीक्षा में इनकी धारा कम, नाम-जिला और संख्या अधिक पूछी जाती है।
4. तुलनात्मक तालिका: अभयारण्य बनाम राष्ट्रीय उद्यान बनाम कंजर्वेशन रिज़र्व बनाम कम्युनिटी रिज़र्व बनाम आखेट निषिद्ध क्षेत्र
आधार | राष्ट्रीय उद्यान | अभयारण्य | कंजर्वेशन रिज़र्व | कम्युनिटी रिज़र्व | आखेट निषिद्ध क्षेत्र |
|---|---|---|---|---|---|
कानूनी प्रावधान | धारा 35 (WLPA 1972) | धारा 18 (WLPA 1972) | धारा 36A (2002 संशोधन) | धारा 36C (2002 संशोधन) | राज्य अधिसूचना (शिकार निषेध) |
भूमि | सरकारी; अधिकार समाप्त/निपटाए जाते हैं | सरकारी/कुछ अधिकार बने रह सकते हैं | केवल सरकारी भूमि | सामुदायिक/निजी भूमि | किसी भी स्वामित्व की भूमि |
प्रतिबंधों की कठोरता | सबसे अधिक | अधिक | मध्यम | कम (समुदाय-आधारित) | केवल शिकार पर रोक |
मानव गतिविधि | चराई आदि सामान्यतः वर्जित | नियंत्रित अनुमति संभव | परंपरागत उपयोग प्रायः जारी | समुदाय के नियमों से | खेती-चराई सामान्य रूप से जारी |
प्रबंधन | वन विभाग | वन विभाग | CR प्रबंधन समिति (36B) | कम्युनिटी रिज़र्व प्रबंधन समिति (36D) | वन विभाग की निगरानी |
राजस्थान उदाहरण | रणथंभौर, केवलादेव, मुकुंदरा हिल्स | ताल छापर, कुंभलगढ़, माउंट आबू | बीसलपुर, जोड़बीड़, जवाई | परीक्षा-पुस्तकों में उदाहरण दुर्लभ | देशनोक, लोहावट, रामदेवरा |
क्रम याद रखें (कठोरता घटते क्रम में): राष्ट्रीय उद्यान > अभयारण्य > कंजर्वेशन रिज़र्व > कम्युनिटी रिज़र्व > आखेट निषिद्ध क्षेत्र
राष्ट्रीय उद्यानों के उदाहरणों के लिए राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान देखें।
5. राजस्थान के कंजर्वेशन रिज़र्व — कालक्रम
राजस्थान ने 2008 से कंजर्वेशन रिज़र्व घोषित करना प्रारंभ किया। प्रारंभिक रिज़र्वों के वर्ष परीक्षा-पुस्तकों में लगभग एकसमान मिलते हैं; 2017 के बाद घोषित रिज़र्वों के नाम-वर्ष अलग-अलग स्रोतों में थोड़े भिन्न हो सकते हैं, इसलिए नीचे उन्हें "पुस्तकों के अनुसार" रूप में रखा गया है।
वर्ष (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार) | कंजर्वेशन रिज़र्व | जिला | विशेष पहचान |
|---|---|---|---|
2008 | बीसलपुर | टोंक | राज्य का पहला CR; बनास नदी पर बाँध क्षेत्र |
2008 | जोड़बीड़ गढ़वाला | बीकानेर | गिद्ध व शिकारी पक्षी |
2008 | सुंधामाता | जालोर व सिरोही | भालू; अरावली पहाड़ियाँ |
2011 | गुढ़ा विश्नोईयान | जोधपुर | काला हिरण, चिंकारा; बिश्नोई गाँव |
2012 | शाकंभरी | सीकर व झुंझुनूं | अरावली पहाड़ी वन |
2012 | गोगेलाव | नागौर | मरुस्थलीय वन्यजीव (चिंकारा) |
2012 | बीड़ | झुंझुनूं | घास का मैदान (बीड़) |
2012 | रोटू | नागौर | काला हिरण |
2012 | उम्मेदगंज पक्षी विहार | कोटा | जलीय व प्रवासी पक्षी |
2013 | जवाई बांध लेपर्ड | पाली | तेंदुआ; राज्य का पहला लेपर्ड CR |
2017 | बांसियाल-खेतड़ी | झुंझुनूं | खेतड़ी की अरावली पहाड़ियाँ |
2017 | जवाई बांध लेपर्ड-II | पाली | जवाई क्षेत्र का विस्तार |
2018 | बांसियाल-खेतड़ी बागोर | झुंझुनूं | खेतड़ी क्षेत्र |
2019 | मनसा माता | झुंझुनूं | पहाड़ी वन क्षेत्र |
2021 के बाद (क्रमशः) | शाहबाद, रणखार, वाडाखेड़ा, बीड़ घास फुलिया खुर्द, झालाना-आमागढ़ आदि | बारां, जालोर, सिरोही, भीलवाड़ा, जयपुर | नई घोषणाएँ; वर्ष स्रोतानुसार भिन्न |
2008 की तिकड़ी — "बीसल-जोड़-सुंधा" (टोंक-बीकानेर-जालोर/सिरोही)
संख्या पर टिप्पणी: 2019 तक की पुस्तकों में लगभग 14–16 CR मिलते हैं, जबकि 2022 के बाद की पुस्तकों/राज्य सरकार के हालिया आँकड़ों में संख्या 30 से अधिक बताई जाती है। परीक्षा में "राज्य का पहला", "2008 में घोषित" और "जिला-सुमेलन" जैसे प्रश्न स्थिर तथ्यों पर बनते हैं — कुल संख्या पूछे जाने पर विकल्पों में से नवीनतम आधिकारिक आँकड़े के निकटतम उत्तर चुनें।
6. प्रमुख कंजर्वेशन रिज़र्व — विस्तार से
6.1 बीसलपुर कंजर्वेशन रिज़र्व (टोंक) — राज्य का पहला
वर्ष 2008 में घोषित; राजस्थान का पहला कंजर्वेशन रिज़र्व।
बनास नदी पर बने बीसलपुर बाँध के जलग्रहण व आसपास के वन क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया है — इसलिए यह जलीय पक्षियों व पहाड़ी वन्यजीवों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
बीसलपुर बाँध जयपुर, अजमेर व टोंक की पेयजल परियोजना का आधार है; बाँध की विस्तृत जानकारी के लिए बीसलपुर बाँध परियोजना नोट देखें।
6.2 जोड़बीड़ गढ़वाला (बीकानेर) — गिद्धों का आश्रय
वर्ष 2008 में घोषित; बीकानेर शहर के निकट स्थित।
यहाँ मृत पशुओं के शवों के निस्तारण का बड़ा स्थल है, इसलिए यह गिद्धों (Vultures) और अन्य शिकारी पक्षियों का प्रमुख भोजन-स्थल है। सर्दियों में प्रवासी गिद्ध व स्टेपी ईगल जैसे पक्षी यहाँ बड़ी संख्या में दिखते हैं।
परीक्षा में "जोड़बीड़ — गिद्ध" सबसे अधिक पूछा जाने वाला सुमेलन है।
6.3 सुंधामाता (जालोर-सिरोही) — भालू
वर्ष 2008 में घोषित; जालोर और सिरोही जिलों की सीमा पर अरावली पहाड़ियों में।
प्रसिद्ध सुंधा माता मंदिर इसी पहाड़ी क्षेत्र में है।
पुस्तकों में इसे विशेषतः भालू (Sloth Bear) के आवास के रूप में पहचाना जाता है।
6.4 गुढ़ा विश्नोईयान (जोधपुर) — काला हिरण
पुस्तकों के अनुसार 2011 में CR घोषित (कुछ स्रोतों में 2012)।
बिश्नोई बहुल गाँव; काला हिरण और चिंकारा तथा प्रवासी पक्षियों के लिए जाना जाता है।
यह क्षेत्र पहले से आखेट निषिद्ध क्षेत्र के रूप में भी गिना जाता रहा है — यानी एक ही स्थान दो सूचियों में मिल सकता है।
6.5 2012 के पाँच रिज़र्व
शाकंभरी (सीकर-झुंझुनूं): अरावली की पहाड़ियों में; शाकंभरी माता मंदिर क्षेत्र से नाम।
गोगेलाव (नागौर): मरुस्थलीय क्षेत्र; चिंकारा आदि।
रोटू (नागौर): काले हिरण के लिए प्रसिद्ध; आखेट निषिद्ध सूची में भी।
बीड़ (झुंझुनूं): "बीड़" स्थानीय भाषा में घास के मैदान/चरागाह को कहते हैं — यह झुंझुनूं का घास-मैदान आधारित रिज़र्व है।
उम्मेदगंज पक्षी विहार (कोटा): हाड़ौती का जलाशय-आधारित पक्षी क्षेत्र।
6.6 जवाई बांध लेपर्ड कंजर्वेशन रिज़र्व (पाली)
वर्ष 2013 में घोषित; राज्य का पहला लेपर्ड (तेंदुआ) कंजर्वेशन रिज़र्व (कई स्रोत इसे देश का पहला लेपर्ड CR भी लिखते हैं)।
जवाई बाँध के आसपास की ग्रेनाइट पहाड़ियाँ और गुफाएँ तेंदुओं का प्राकृतिक आवास हैं।
रबारी पशुपालक समुदाय और तेंदुओं के मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के लिए प्रसिद्ध; बाद में जवाई बांध लेपर्ड-II (2017) से क्षेत्र का विस्तार हुआ।
जवाई बाँध की सिंचाई व जल-आपूर्ति के लिए जवाई बाँध (पाली) नोट देखें।
6.7 झुंझुनूं के रिज़र्व — "सर्वाधिक CR वाला जिला"
पुस्तकों में झुंझुनूं को सर्वाधिक कंजर्वेशन रिज़र्व वाला जिला बताया जाता है — बीड़, शाकंभरी (आंशिक, सीकर के साथ), बांसियाल-खेतड़ी, बांसियाल-खेतड़ी बागोर और मनसा माता। खेतड़ी क्षेत्र दिसंबर 2024 में नए जिलों के निरस्त होने के बाद पुनः झुंझुनूं जिले में ही गिना जाता है।
6.8 2021 के बाद के नए रिज़र्व (संक्षेप में)
शाहबाद (बारां): हाड़ौती का वन-बहुल क्षेत्र; बाद में शाहबाद तलहटी क्षेत्र भी जुड़ा।
रणखार (जालोर): कच्छ के रण से लगा लवणीय क्षेत्र — जंगली गधा (घुड़खर) का आवास।
झालाना-आमागढ़ (जयपुर): शहर से सटे तेंदुआ आवास।
वाडाखेड़ा (सिरोही) और बीड़ घास फुलिया खुर्द (भीलवाड़ा) जैसे घास-मैदान/पहाड़ी क्षेत्र।
इन नए रिज़र्वों के सटीक अधिसूचना वर्ष स्रोतों में भिन्न हैं; परीक्षा में इनका नाम-जिला सुमेलन ही सुरक्षित तथ्य है।
7. जिला → रिज़र्व → प्रमुख प्रजाति/पहचान (मानचित्र दृष्टि से)
जिला | कंजर्वेशन रिज़र्व | प्रमुख प्रजाति/पहचान | भौतिक प्रदेश |
|---|---|---|---|
टोंक | बीसलपुर | जलीय पक्षी, पहाड़ी वन | पूर्वी मैदान (बनास बेसिन) |
बीकानेर | जोड़बीड़ गढ़वाला | गिद्ध, स्टेपी ईगल | पश्चिमी मरुस्थल |
जालोर-सिरोही | सुंधामाता | भालू | अरावली (दक्षिण-पश्चिम) |
जोधपुर | गुढ़ा विश्नोईयान | काला हिरण, चिंकारा | पश्चिमी मरुस्थल |
सीकर-झुंझुनूं | शाकंभरी | पहाड़ी वन्यजीव | उत्तरी अरावली |
नागौर | गोगेलाव, रोटू | चिंकारा, काला हिरण | मरुस्थल (अर्ध-शुष्क) |
झुंझुनूं | बीड़, बांसियाल-खेतड़ी, बांसियाल-खेतड़ी बागोर, मनसा माता | घास मैदान, पहाड़ी वन | शेखावाटी/उत्तरी अरावली |
कोटा | उम्मेदगंज पक्षी विहार | जलीय व प्रवासी पक्षी | हाड़ौती पठार |
पाली | जवाई बांध लेपर्ड, जवाई बांध लेपर्ड-II | तेंदुआ | अरावली का पश्चिमी ढाल |
बारां | शाहबाद | वन-बहुल क्षेत्र | हाड़ौती |
जालोर | रणखार | जंगली गधा (घुड़खर) | कच्छ रण से लगा लवणीय क्षेत्र |
जयपुर | झालाना-आमागढ़ | तेंदुआ | अरावली (मध्य) |
स्थानों को मानचित्र पर पहचानने के अभ्यास के लिए राजस्थान वन्यजीव — मानचित्र आधारित प्रश्न उपयोगी है।
पश्चिम में हिरण-गिद्ध (जोधपुर, नागौर, बीकानेर) · अरावली में भालू-तेंदुआ (सुंधा, जवाई, झालाना) · हाड़ौती-बनास में पक्षी (उम्मेदगंज, बीसलपुर)
8. राजस्थान के आखेट निषिद्ध क्षेत्र
8.1 परिचय व संख्या
आखेट निषिद्ध क्षेत्र (Closed Areas / No Hunting Areas) वे क्षेत्र हैं जहाँ शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है। परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार राजस्थान में लगभग 33 आखेट निषिद्ध क्षेत्र हैं और सबसे अधिक (लगभग 7) जोधपुर क्षेत्र में बताए जाते हैं (पुराने जिला-विभाजन के अनुसार; कुछ क्षेत्र अब नए फलोदी जिले की सीमा में गिने जा सकते हैं)। अधिकांश क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान में और बिश्नोई समाज के गाँवों या मंदिरों के आसपास हैं।
8.2 प्रमुख आखेट निषिद्ध क्षेत्र (जिलेवार)
जिला (पारंपरिक) | प्रमुख आखेट निषिद्ध क्षेत्र | टिप्पणी |
|---|---|---|
जोधपुर (फलोदी सहित) | गुढ़ा विश्नोईयान, जम्भेश्वरजी, लोहावट, फिटकासनी, साथीन, डोली | सर्वाधिक संख्या; काला हिरण-चिंकारा |
बीकानेर | देशनोक, मुकाम, जोड़बीड़, बज्जू | देशनोक — करणी माता; मुकाम — जाम्भोजी की समाधि |
जैसलमेर | रामदेवरा | बाबा रामदेव का धाम |
नागौर | रोटू | काला हिरण; CR भी |
पाली | जवाई बाँध क्षेत्र | तेंदुआ; CR भी |
बारां | सोरसन | गोडावण व घास के मैदान |
अजमेर | सोंखलिया | गोडावण/खरमोर का घास-मैदान आवास |
बूंदी | कनक सागर | जलीय पक्षी |
चूरू | संवत्सर-कोटसर | मरुस्थलीय वन्यजीव |
उदयपुर | बागदड़ा | मगरमच्छ |
सावधानी: यह पूरी 33 की सूची नहीं, बल्कि पुस्तकों में बार-बार आने वाले प्रमुख नाम हैं। पूर्ण व अद्यतन सूची के लिए राजस्थान वन विभाग की अधिसूचनाएँ ही प्रामाणिक हैं।
8.3 आखेट निषिद्ध क्षेत्र से अभयारण्य/CR तक
कई स्थानों का संरक्षण स्तर समय के साथ बढ़ाया गया — पहले आखेट निषिद्ध क्षेत्र, फिर अभयारण्य या कंजर्वेशन रिज़र्व। उदाहरण —
ताल छापर (चूरू): पहले आखेट निषिद्ध क्षेत्र, बाद में (1971) वन्यजीव अभयारण्य — काले हिरण के लिए प्रसिद्ध।
गुढ़ा विश्नोईयान, रोटू, जोड़बीड़, जवाई: आखेट निषिद्ध क्षेत्र के रूप में पुराने; बाद में कंजर्वेशन रिज़र्व भी घोषित।
गोडावण के आवास और सोरसन-सोंखलिया जैसे घास-मैदानों पर विस्तृत चर्चा गोडावण (Great Indian Bustard) नोट में है।
9. बिश्नोई समाज और आखेट निषिद्ध क्षेत्र — सांस्कृतिक संबंध
आखेट निषिद्ध क्षेत्रों का भूगोल राजस्थान की सामाजिक परंपरा से गहराई से जुड़ा है। गुरु जाम्भोजी द्वारा प्रवर्तित बिश्नोई संप्रदाय के 29 नियमों में जीव-दया और हरे वृक्ष न काटना प्रमुख हैं। इसीलिए बिश्नोई गाँवों के आसपास काले हिरण और चिंकारा निर्भय होकर विचरण करते हैं, और राज्य ने इन्हीं क्षेत्रों को आखेट निषिद्ध घोषित किया।
मुकाम (बीकानेर): जाम्भोजी का समाधि-स्थल — आखेट निषिद्ध क्षेत्र।
जम्भेश्वरजी, गुढ़ा विश्नोईयान, लोहावट, फिटकासनी (जोधपुर क्षेत्र): बिश्नोई बहुल।
खेजड़ली बलिदान (1730): अमृता देवी बिश्नोई सहित 363 लोगों का बलिदान — पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा।
देशनोक (करणी माता) व रामदेवरा (बाबा रामदेव): धार्मिक स्थलों के आसपास परंपरागत जीव-रक्षा।
संप्रदाय और 29 नियमों के लिए विश्नोई संप्रदाय — गुरु जाम्भोजी, 29 नियम व खेजड़ली बलिदान तथा राज्य वृक्ष के लिए खेजड़ी — राज्य वृक्ष नोट पढ़ें।
10. कम्युनिटी रिज़र्व और पारंपरिक सामुदायिक संरक्षण
राजस्थान में "कम्युनिटी रिज़र्व" की औपचारिक श्रेणी के उदाहरण परीक्षा-पुस्तकों में बहुत कम मिलते हैं, इसलिए इस पर नाम-आधारित प्रश्न की अपेक्षा अवधारणा-आधारित प्रश्न अधिक संभावित हैं। फिर भी राज्य में समुदाय-आधारित संरक्षण की लंबी परंपरा है —
पारंपरिक व्यवस्था | अर्थ | संरक्षण में भूमिका |
|---|---|---|
ओरण | देवी-देवता के नाम पर छोड़ी गई सामुदायिक वन/चरागाह भूमि | पेड़ काटना वर्जित; पशु-पक्षियों का आश्रय |
देववन/देवबनी | मंदिर से जुड़े पवित्र उपवन | धार्मिक आस्था से वन-रक्षा |
गोचर | गाँव की सामूहिक चरागाह भूमि | घास-मैदान व वन्यजीव आवास |
बीड़ | घास के लिए सुरक्षित भूमि | घास-मैदान आधारित प्रजातियाँ |
कंजर्वेशन रिज़र्व का "बीड़" (झुंझुनूं) नाम इसी परंपरा से आया है। वन क्षेत्र और वनावरण के आँकड़ों के लिए राजस्थान की वन संपदा व वनावरण देखें।
11. अन्य संरक्षित/संरक्षण इकाइयाँ — केवल संदर्भ हेतु
श्रेणी | राजस्थान में उदाहरण | विस्तृत नोट |
|---|---|---|
टाइगर रिज़र्व | रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी, धौलपुर-करौली | |
राष्ट्रीय उद्यान | रणथंभौर, केवलादेव (भरतपुर), मुकुंदरा हिल्स | |
रामसर स्थल (अंतरराष्ट्रीय) | केवलादेव, सांभर आदि | |
आर्द्रभूमि | प्रमुख झीलें व जलाशय | |
जैविक उद्यान (Biological Park) | माचिया (जोधपुर), सज्जनगढ़ (उदयपुर), नाहरगढ़ (जयपुर), अभेड़ा (कोटा) | चिड़ियाघर का आधुनिक रूप — संरक्षित क्षेत्र नहीं |
ध्यान दें: जैविक उद्यान पूर्व-स्थाने (ex-situ) संरक्षण का उदाहरण है, जबकि राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, CR और कम्युनिटी रिज़र्व स्व-स्थाने (in-situ) संरक्षण के उदाहरण हैं।
12. "प्रथम" और "सर्वाधिक" — तालिका
प्रश्न | उत्तर | टिप्पणी |
|---|---|---|
राजस्थान का पहला कंजर्वेशन रिज़र्व | बीसलपुर (टोंक) | 2008 |
2008 में घोषित CR | बीसलपुर, जोड़बीड़ गढ़वाला, सुंधामाता | तीनों एक ही वर्ष |
पहला लेपर्ड CR | जवाई बांध (पाली) | 2013 |
गिद्धों के लिए प्रसिद्ध CR | जोड़बीड़ गढ़वाला (बीकानेर) | आखेट निषिद्ध सूची में भी |
पक्षी विहार के रूप में CR | उम्मेदगंज (कोटा) | 2012 |
जंगली गधे (घुड़खर) हेतु CR | रणखार (जालोर) | हाल की घोषणा |
सर्वाधिक CR वाला जिला | झुंझुनूं | पुस्तकों के अनुसार |
सर्वाधिक आखेट निषिद्ध क्षेत्र | जोधपुर | पारंपरिक जिला-विभाजन; लगभग 7 |
CR/कम्युनिटी रिज़र्व जोड़ने वाला संशोधन | वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2002 | धारा 36A–36D |
भारत का पहला कम्युनिटी रिज़र्व | केशोपुर-छंब (पंजाब) | राजस्थान से बाहर; तुलना हेतु |
13. समयरेखा (Timeline)
वर्ष | घटना |
|---|---|
1951 | राजस्थान वन्य पशु एवं पक्षी संरक्षण अधिनियम — राज्य स्तरीय वन्यजीव कानून |
1971 | ताल छापर (चूरू) अभयारण्य बना (पहले आखेट निषिद्ध क्षेत्र) |
1972 | वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम — राष्ट्रीय उद्यान व अभयारण्य की कानूनी व्यवस्था |
2002 | WLPA संशोधन — कंजर्वेशन व कम्युनिटी रिज़र्व श्रेणी (धारा 36A–36D) |
2006 | WLPA संशोधन — टाइगर रिज़र्व व NTCA को कानूनी आधार |
2008 | बीसलपुर (पहला), जोड़बीड़ गढ़वाला, सुंधामाता CR |
2011 | गुढ़ा विश्नोईयान CR (जोधपुर) |
2012 | शाकंभरी, गोगेलाव, बीड़, रोटू, उम्मेदगंज पक्षी विहार |
2013 | जवाई बांध लेपर्ड CR (पाली) |
2017–2019 | बांसियाल-खेतड़ी, जवाई लेपर्ड-II, बांसियाल-खेतड़ी बागोर, मनसा माता |
2021 के बाद | शाहबाद, रणखार, झालाना-आमागढ़ आदि नए CR; कुल संख्या 30 से अधिक |
2022 | WLPA संशोधन — अनुसूचियाँ घटकर 4 |
14. परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्य (One-liners)
कंजर्वेशन रिज़र्व व कम्युनिटी रिज़र्व की श्रेणी — वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2002 से।
कंजर्वेशन रिज़र्व — धारा 36A; कम्युनिटी रिज़र्व — धारा 36C।
कंजर्वेशन रिज़र्व केवल सरकारी भूमि पर; कम्युनिटी रिज़र्व सामुदायिक/निजी भूमि पर।
राजस्थान का पहला कंजर्वेशन रिज़र्व — बीसलपुर (टोंक), 2008।
जोड़बीड़ गढ़वाला (बीकानेर) — गिद्धों के लिए प्रसिद्ध।
सुंधामाता CR — जालोर व सिरोही; भालू।
गुढ़ा विश्नोईयान CR — जोधपुर; काला हिरण, चिंकारा।
गोगेलाव और रोटू — दोनों नागौर जिले में।
उम्मेदगंज पक्षी विहार CR — कोटा।
जवाई बांध लेपर्ड CR — पाली; 2013; राज्य का पहला लेपर्ड CR।
सर्वाधिक कंजर्वेशन रिज़र्व — झुंझुनूं (बीड़, बांसियाल-खेतड़ी, मनसा माता आदि)।
रणखार CR (जालोर) — जंगली गधा (घुड़खर)।
आखेट निषिद्ध क्षेत्र — लगभग 33; सर्वाधिक जोधपुर क्षेत्र में।
मुकाम (बीकानेर) — जाम्भोजी समाधि; आखेट निषिद्ध क्षेत्र।
सोरसन (बारां) और सोंखलिया (अजमेर) — गोडावण से जुड़े घास-मैदान।
बागदड़ा (उदयपुर) — मगरमच्छ हेतु आखेट निषिद्ध क्षेत्र।
रामसर स्थल WLPA की श्रेणी नहीं — अंतरराष्ट्रीय संधि के अंतर्गत मान्यता।
15. भ्रम व सावधानियाँ (Exam Traps)
अभयारण्य ≠ कंजर्वेशन रिज़र्व: अभयारण्य धारा 18 में, CR धारा 36A में। CR में प्रतिबंध कम हैं और स्थानीय समुदाय की भागीदारी अनिवार्य है।
CR ≠ कम्युनिटी रिज़र्व: CR की भूमि सरकारी, कम्युनिटी रिज़र्व की भूमि सामुदायिक/निजी — विकल्पों में यही अंतर पलटकर दिया जाता है।
आखेट निषिद्ध क्षेत्र ≠ अभयारण्य: आखेट निषिद्ध क्षेत्र में केवल शिकार वर्जित है; खेती, चराई, बसावट सामान्य रूप से चलती है।
बीसलपुर बाँध बनाम बीसलपुर CR: बाँध पहले की सिंचाई-पेयजल परियोजना है; CR 2008 की संरक्षण घोषणा। "पहला CR" प्रश्न में बाँध का वर्ष न लिखें।
जवाई — टाइगर रिज़र्व नहीं: जवाई लेपर्ड (तेंदुआ) CR है; राज्य के टाइगर रिज़र्व रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा, रामगढ़ विषधारी, धौलपुर-करौली हैं।
जोड़बीड़ — गिद्ध, गोडावण नहीं: गोडावण के लिए डेजर्ट नेशनल पार्क, सोरसन, सोंखलिया पढ़ें।
सुंधामाता — दो जिले: जालोर और सिरोही; केवल "जालोर" विकल्प अधूरा हो सकता है। इसी तरह शाकंभरी — सीकर व झुंझुनूं।
दोहरी सूची: गुढ़ा विश्नोईयान, रोटू, जोड़बीड़, जवाई — आखेट निषिद्ध सूची और CR सूची दोनों में मिल सकते हैं; प्रश्न की श्रेणी ध्यान से पढ़ें।
संख्या वाले प्रश्न: CR की कुल संख्या पुस्तक के संस्करण के अनुसार बदलती है (14, 16, 26, 30+…)। "पहला/2008/जिला" जैसे स्थिर तथ्य अधिक विश्वसनीय हैं।
गुढ़ा विश्नोईयान का वर्ष: अधिकांश पुस्तकों में 2011, कुछ में 2012 — विकल्प में जो एक ही उपस्थित हो, वही चुनें।
रामसर/टाइगर रिज़र्व: रामसर अंतरराष्ट्रीय मान्यता है, टाइगर रिज़र्व 2006 के संशोधन से WLPA की श्रेणी बना — दोनों को 2002 के संशोधन से न जोड़ें।
16. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
2008 — "बीसल जोड़ सुंधा": बीसलपुर (टोंक) · जोड़बीड़ (बीकानेर) · सुंधामाता (जालोर-सिरोही)
2012 — "शाक गोगे बीड़ रोटू उम्मेद": शाकंभरी · गोगेलाव · बीड़ · रोटू · उम्मेदगंज
प्रजाति कोड — "जोड़ = गिद्ध, सुंधा = भालू, जवाई = तेंदुआ, गुढ़ा-रोटू = हिरण, उम्मेद = पक्षी, रणखार = घुड़खर"
धाराएँ — "36 का आँकड़ा": 36A CR, 36B उसकी समिति, 36C कम्युनिटी, 36D उसकी समिति
भूमि — "Conservation = Crown (सरकारी), Community = Commons (सामुदायिक)"
17. कथन अभ्यास
निम्न कथनों को सही/गलत में बाँटें (उत्तर नीचे) —
कंजर्वेशन रिज़र्व निजी भूमि पर भी घोषित किया जा सकता है।
बीसलपुर राजस्थान का पहला कंजर्वेशन रिज़र्व है।
जोड़बीड़ गढ़वाला गिद्धों के लिए जाना जाता है।
आखेट निषिद्ध क्षेत्र में खेती और चराई वर्जित होती है।
जवाई बांध लेपर्ड कंजर्वेशन रिज़र्व पाली जिले में है।
कम्युनिटी रिज़र्व की श्रेणी 1972 के मूल अधिनियम में थी।
उत्तर: 1 — गलत (CR केवल सरकारी भूमि पर); 2 — सही; 3 — सही; 4 — गलत (केवल शिकार वर्जित); 5 — सही; 6 — गलत (2002 संशोधन से जोड़ी गई)।
18. संबंधित नोट्स
19. एक दिन पहले — 12 रेखाएँ
WLPA 1972 → 2002 संशोधन → CR (36A) व कम्युनिटी रिज़र्व (36C)।
CR — सरकारी भूमि, समुदाय से परामर्श, प्रबंधन समिति (36B)।
कम्युनिटी रिज़र्व — सामुदायिक/निजी भूमि; भारत में पहला केशोपुर-छंब (पंजाब)।
पहला CR — बीसलपुर (टोंक) 2008।
2008 — बीसलपुर, जोड़बीड़ गढ़वाला, सुंधामाता।
2011 — गुढ़ा विश्नोईयान (जोधपुर)।
2012 — शाकंभरी, गोगेलाव, बीड़, रोटू, उम्मेदगंज।
2013 — जवाई बांध लेपर्ड (पाली)।
झुंझुनूं — सर्वाधिक CR; कुल CR 30 से अधिक (हालिया)।
आखेट निषिद्ध — लगभग 33; सर्वाधिक जोधपुर क्षेत्र।
देशनोक, मुकाम, लोहावट, फिटकासनी, साथीन, रामदेवरा — आखेट निषिद्ध।
सोरसन, सोंखलिया — गोडावण; बागदड़ा — मगरमच्छ; रणखार — घुड़खर।
20. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद इस पेज के अंत में दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। कानूनी धाराओं और श्रेणियों के प्रश्नों में गलती हो तो खंड 3 व 4 दोबारा पढ़ें; रिज़र्व-जिला-प्रजाति सुमेलन के लिए खंड 5 और 7 की तालिकाएँ एक बार हाथ से लिखकर दोहराएँ; आखेट निषिद्ध क्षेत्रों के लिए खंड 8.2 पढ़ें।
21. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण का "कठोर" ढाँचा हैं, जबकि कंजर्वेशन रिज़र्व और आखेट निषिद्ध क्षेत्र उसका "लचीला" और समुदाय-आधारित ढाँचा हैं। 2002 के संशोधन के बाद राज्य ने 2008 में बीसलपुर से शुरुआत कर अरावली, मरुस्थल और हाड़ौती — तीनों प्रदेशों में कंजर्वेशन रिज़र्व बनाए, जिससे गिद्ध, भालू, तेंदुआ, काला हिरण और जलीय पक्षियों के आवास जुड़े। आखेट निषिद्ध क्षेत्रों की जड़ें बिश्नोई जैसी परंपराओं में हैं, जहाँ जीव-रक्षा कानून से पहले आस्था का हिस्सा थी। परीक्षा के लिए तीन स्तंभ याद रखें — कानून (2002, धारा 36A–36D), प्रथम व वर्ष (बीसलपुर 2008, जवाई 2013) और जिला-प्रजाति सुमेलन।
2002 संशोधन · 2008 बीसल-जोड़-सुंधा · 2011 गुढ़ा · 2012 शाक-गोगे-बीड़-रोटू-उम्मेद · 2013 जवाई · झुंझुनूं सर्वाधिक CR · जोधपुर सर्वाधिक आखेट निषिद्ध
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“राजस्थान के कंजर्वेशन रिज़र्व व आखेट निषिद्ध क्षेत्र — RAS/CET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- राजस्थान के कंजर्वेशन रिज़र्व व आखेट निषिद्ध क्षेत्र — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- राजस्थान की प्रमुख आर्द्रभूमियाँ (Wetlands) — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- राजस्थान में मत्स्य पालन — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- राजस्थान के राष्ट्रीय राजमार्ग व एक्सप्रेसवे — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
पूरे सिलेबस का अभ्यास: राजस्थान CET 12वीं स्तर 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ (All-in-One Mega Pack) — पहला टेस्ट फ्री आज़माएँ

यह टॉपिक पढ़ लिया? अब असली परीक्षा जैसे मॉक टेस्ट में खुद को परखें
राजस्थान CET 12वीं स्तर 2026 संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ (All-in-One Mega Pack)
- नवीनतम परीक्षा पैटर्न, समय-सीमा और नेगेटिव मार्किंग के साथ
- रैंक, कमजोर टॉपिक विश्लेषण और हर प्रश्न की हिंदी व्याख्या
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
कंजर्वेशन रिज़र्व वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 36A के तहत राज्य सरकार द्वारा स्थानीय समुदायों से परामर्श के बाद सरकारी भूमि पर घोषित संरक्षित क्षेत्र है। यह विशेषकर राष्ट्रीय उद्यानों/अभयारण्यों से लगे या उन्हें जोड़ने वाले क्षेत्रों के लिए है। इसका प्रबंधन धारा 36B की प्रबंधन समिति करती है।
दोनों श्रेणियाँ वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा धारा 36A–36D के रूप में जोड़ी गईं। मूल 1972 के अधिनियम में मुख्यतः राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य की व्यवस्था थी।
बीसलपुर कंजर्वेशन रिज़र्व (टोंक), जिसे वर्ष 2008 में घोषित किया गया। उसी वर्ष जोड़बीड़ गढ़वाला (बीकानेर) और सुंधामाता (जालोर-सिरोही) कंजर्वेशन रिज़र्व भी घोषित हुए।
बीकानेर के निकट स्थित जोड़बीड़ में मृत पशुओं के शवों का बड़ा निस्तारण स्थल है, इसलिए यह गिद्धों और स्टेपी ईगल जैसे शिकारी पक्षियों का प्रमुख भोजन-स्थल है। इसे 2008 में कंजर्वेशन रिज़र्व घोषित किया गया।
यह पाली जिले में जवाई बाँध के आसपास की ग्रेनाइट पहाड़ियों में है और 2013 में घोषित हुआ। यह राज्य का पहला लेपर्ड (तेंदुआ) कंजर्वेशन रिज़र्व है तथा रबारी समुदाय और तेंदुओं के सह-अस्तित्व के लिए प्रसिद्ध है।
कंजर्वेशन रिज़र्व केवल राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि पर (धारा 36A) घोषित होता है, जबकि कम्युनिटी रिज़र्व सामुदायिक या निजी भूमि पर (धारा 36C) घोषित होता है, जहाँ समुदाय या व्यक्ति स्वेच्छा से संरक्षण हेतु आगे आए हों।
आखेट निषिद्ध क्षेत्र (Closed Area) वह क्षेत्र है जहाँ राज्य सरकार की अधिसूचना से केवल शिकार पर रोक होती है; खेती, चराई और बसावट जैसी सामान्य गतिविधियाँ चलती रहती हैं। पुस्तकों के अनुसार राजस्थान में लगभग 33 आखेट निषिद्ध क्षेत्र हैं।
परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार जोधपुर (पारंपरिक जिला-विभाजन) में सर्वाधिक, लगभग 7 आखेट निषिद्ध क्षेत्र हैं — जैसे गुढ़ा विश्नोईयान, जम्भेश्वरजी, लोहावट, फिटकासनी, साथीन और डोली।
पुस्तकों के अनुसार झुंझुनूं जिले में — बीड़, बांसियाल-खेतड़ी, बांसियाल-खेतड़ी बागोर, मनसा माता तथा सीकर के साथ साझा शाकंभरी कंजर्वेशन रिज़र्व।
अधिकांश आखेट निषिद्ध क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान के बिश्नोई बहुल गाँवों व धार्मिक स्थलों के आसपास हैं, जैसे मुकाम (जाम्भोजी की समाधि), गुढ़ा विश्नोईयान, लोहावट और फिटकासनी। गुरु जाम्भोजी के 29 नियमों में जीव-दया के कारण यहाँ काले हिरण व चिंकारा सुरक्षित रहते हैं।
क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें: