राजस्थान का गोडावण (Great Indian Bustard): आवास, संरक्षण एवं महत्वपूर्ण तथ्य
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स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान भूगोल इकाई। आधिकारिक सिलेबस से विषय-सूची; पुस्तक का शब्दशः पाठ नहीं।
राजस्थान का गोडावण (Great Indian Bustard): आवास, संरक्षण एवं महत्वपूर्ण तथ्य
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⚡ Quick Answer: गोडावण (Great Indian Bustard, वैज्ञानिक नाम: Ardeotis nigriceps) राजस्थान का राज्य पक्षी है (घोषणा: 21 मई 1981)। IUCN रेड लिस्ट में यह ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-I में शामिल है। इसकी सर्वाधिक आबादी जैसलमेर-बाड़मेर के राष्ट्रीय मरु उद्यान क्षेत्र में है। संरक्षण हेतु राजस्थान ने 5 जून 2013 को ‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ शुरू किया तथा जैसलमेर के सम और रामदेवरा में संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित किए गए।
1. गोडावण का परिचय — राजस्थान का राज्य पक्षी
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| हिंदी/स्थानीय नाम | गोडावण, सोन चिड़िया (सोहन चिड़िया), हुकना, गुरायिन |
| अंग्रेज़ी नाम | Great Indian Bustard (GIB) |
| वैज्ञानिक नाम | Ardeotis nigriceps |
| कुल (Family) | ओटिडिडी (Otididae) — बस्टर्ड कुल |
| राज्य पक्षी घोषित | 21 मई 1981 |
| IUCN स्थिति | Critically Endangered (गंभीर रूप से संकटग्रस्त) — 2011 से |
| वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 | अनुसूची-I (सर्वोच्च संरक्षण) |
| CMS (बॉन कन्वेंशन) | परिशिष्ट-I — COP-13, गांधीनगर (फरवरी 2020) में शामिल; सम्मेलन का शुभंकर ‘गिबी’ (Gibi) गोडावण ही था |
| सर्वाधिक संख्या | राजस्थान — राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर-बाड़मेर) एवं पोकरण क्षेत्र |
राजस्थान के अन्य राज्य प्रतीकों के साथ गोडावण को जोड़कर पढ़ें: राज्य वृक्ष — खेजड़ी, राज्य पुष्प — रोहिड़ा, राज्य पशु — चिंकारा (वन्य) एवं ऊँट (पशुधन श्रेणी, 2014)। ऊँट की नस्लों के लिए देखें राजस्थान की ऊँट नस्लें।
2. गोडावण की शारीरिक विशेषताएँ एवं व्यवहार
- आकार: लगभग 1 मीटर ऊँचा; नर का भार 15 किलोग्राम तक — यह विश्व के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है।
- रंग-रूप: शरीर भूरा, गर्दन व सिर सफेद; सिर पर काली टोपी (कलगी); नर के सीने पर काली पट्टी।
- दृष्टि-सीमा: आँखें सिर के किनारों पर होने से सामने की ओर सीधा देखने की क्षमता सीमित — इसी कारण यह बिजली की तारों को समय पर नहीं देख पाता।
- आहार: सर्वाहारी — टिड्डे, कीट, छिपकलियाँ, बीज, अनाज, बेर व घास। टिड्डी-नियंत्रण में किसानों का मित्र।
- प्रजनन: मुख्यतः मानसून काल; मादा ज़मीन पर खुले में (घोंसला बनाए बिना) सामान्यतः एक ही अंडा देती है — धीमी प्रजनन दर इसकी सबसे बड़ी जैविक कमजोरी।
- स्वभाव: अत्यंत शर्मीला व सतर्क; खुले घास के मैदान पसंद करता है, घने जंगल नहीं।
3. गोडावण का आवास — राजस्थान में कहाँ पाया जाता है?
गोडावण शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क घास के मैदानों (Grasslands) का पक्षी है, जहाँ सेवण, धामण जैसी घासें और छितरी झाड़ियाँ हों। राजस्थान में इसके तीन पारंपरिक आवास-क्षेत्र परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं:
| क्षेत्र | जिला | विशेषता |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय मरु उद्यान (Desert National Park) | जैसलमेर व बाड़मेर | गोडावण का सबसे बड़ा प्राकृतिक आवास; सुदासरी क्षेत्र में संरक्षित बाड़े (enclosures) |
| पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज क्षेत्र | जैसलमेर | सेना क्षेत्र होने से मानव हस्तक्षेप कम — अच्छी संख्या देखी जाती है |
| सोरसन घास का मैदान | बारां | हाड़ौती क्षेत्र का पारंपरिक गोडावण आवास; ‘क्लोज़्ड एरिया’ घोषित |
| सोंखलिया घास का मैदान | अजमेर | मध्य राजस्थान का पारंपरिक आवास; खरमोर (Lesser Florican) के लिए भी प्रसिद्ध |
राजस्थान के बाहर: गुजरात (कच्छ — नलिया), महाराष्ट्र (सोलापुर — नान्नज/ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अभयारण्य), कर्नाटक व आंध्र प्रदेश (रोलापाडु) में बहुत कम संख्या शेष है। राष्ट्रीय मरु उद्यान के विस्तृत विवरण हेतु देखें राजस्थान के वन्यजीव अभयारण्य एवं राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान।
4. गोडावण की संख्या कितनी है?
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के आकलन के अनुसार भारत में गोडावण की कुल संख्या लगभग 150 या उससे कम आँकी गई है, जिसमें से अधिकांश (लगभग 4/5 भाग) राजस्थान में हैं। 1960 के दशक में यह संख्या 1000 से अधिक मानी जाती थी — यानी कुछ दशकों में 85–90% की गिरावट। (वार्षिक गणना के आँकड़े बदलते रहते हैं; परीक्षा में ‘लगभग 150’ और ‘सर्वाधिक राजस्थान में’ — ये दो तथ्य पर्याप्त हैं।)
5. गोडावण के विलुप्ति की कगार पर पहुँचने के कारण
| खतरा | विवरण |
|---|---|
| हाई-टेंशन बिजली लाइनें | सबसे बड़ा खतरा; भारी शरीर व सीमित सामने की दृष्टि के कारण उड़ते समय तारों से टकराकर मृत्यु |
| आवास क्षरण | घास के मैदानों का कृषि, सिंचाई (नहर), खनन व सौर/पवन परियोजनाओं में परिवर्तन |
| धीमी प्रजनन दर | वर्ष में प्रायः एक अंडा; अंडे ज़मीन पर होने से नष्ट होने का खतरा |
| शिकारी जीव | आवारा कुत्ते, लोमड़ी, नेवले आदि द्वारा अंडों/चूज़ों का शिकार |
| अतीत में शिकार | रियासत काल व स्वतंत्रता के बाद तक इसका शिकार होता रहा |
| मानवीय हस्तक्षेप | वाहनों का आवागमन, पशुओं की अत्यधिक चराई |
ध्यान दें — पश्चिमी राजस्थान में तेज़ी से बढ़ती सौर ऊर्जा परियोजनाएँ और ट्रांसमिशन लाइनें विकास और संरक्षण के बीच संतुलन का बड़ा प्रश्न हैं। देखें राजस्थान की सौर ऊर्जा परियोजनाएँ।
6. गोडावण संरक्षण के प्रयास
(A) प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (राजस्थान, 2013)
राजस्थान सरकार ने 5 जून 2013 (विश्व पर्यावरण दिवस) को ‘प्रोजेक्ट गोडावण’ प्रारंभ किया — ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बना। इसके अंतर्गत प्रजनन क्षेत्रों में बाड़बंदी (enclosures), शिकारी जीवों पर नियंत्रण, घास के मैदानों का पुनर्स्थापन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी शामिल है।
(B) संरक्षण प्रजनन केंद्र (Conservation Breeding Centres)
- केंद्र सरकार (MoEFCC), राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के संयुक्त प्रयास से जैसलमेर में सम (Sam) और रामदेवरा (पोकरण) में प्रजनन केंद्र।
- जंगल से एकत्रित अंडों को कृत्रिम रूप से सेकर चूज़े पाले जाते हैं; पहले चूज़े 2019 में निकले।
- तकनीकी सहयोग: अबू धाबी का International Fund for Houbara Conservation (IFHC)।
- अक्टूबर 2024 में जैसलमेर के केंद्र में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) से गोडावण के चूज़े का जन्म हुआ — इस प्रजाति के संरक्षण में एक बड़ी उपलब्धि।
(C) सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश
- अप्रैल 2021: सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान व गुजरात के गोडावण आवास क्षेत्रों में ओवरहेड बिजली लाइनों को भूमिगत करने या बर्ड-डायवर्टर लगाने के निर्देश दिए।
- मार्च 2024: न्यायालय ने व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए पूर्व आदेश में संशोधन कर विशेषज्ञ समिति गठित की और इसी निर्णय में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से मुक्ति के अधिकार को अनुच्छेद 14 व 21 से जोड़ा।
(D) अन्य प्रयास
- केंद्र की ‘वन्यजीव आवासों का एकीकृत विकास’ योजना के अंतर्गत प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम में शामिल।
- पक्षी-अवरोधक (Bird Flight Diverters) लगाना, घास के मैदानों में चराई नियंत्रण, सामुदायिक ‘गोडावण मित्र’।
7. राजस्थान में पाए जाने वाले अन्य बस्टर्ड
| पक्षी | स्थानीय नाम | राजस्थान में स्थान |
|---|---|---|
| Great Indian Bustard | गोडावण | मरु उद्यान, पोकरण, सोरसन, सोंखलिया |
| Lesser Florican | खरमोर | सोंखलिया/शोकलिया (अजमेर) व आसपास के घास क्षेत्र — मानसून में प्रजनन हेतु आता है |
| MacQueen’s (Houbara) Bustard | तिलोर/हुबारा | पश्चिमी राजस्थान — शीतकालीन प्रवासी |
✅ मुख्य बिंदु (Key Points) — एक नज़र में
- गोडावण — राजस्थान का राज्य पक्षी (21 मई 1981); वैज्ञानिक नाम Ardeotis nigriceps।
- IUCN: Critically Endangered; WPA 1972: अनुसूची-I; CMS: परिशिष्ट-I (2020)।
- सर्वाधिक संख्या राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर-बाड़मेर) में; अन्य आवास — सोरसन (बारां), सोंखलिया (अजमेर)।
- प्रोजेक्ट गोडावण — 5 जून 2013; राजस्थान पहला राज्य।
- प्रजनन केंद्र — सम व रामदेवरा (जैसलमेर); सहयोग — WII व IFHC (अबू धाबी)।
- सबसे बड़ा खतरा — हाई-टेंशन बिजली लाइनें; सर्वोच्च न्यायालय आदेश — अप्रैल 2021 व मार्च 2024।
- COP-13 (CMS), गांधीनगर 2020 का शुभंकर — ‘गिबी’ (गोडावण)।
- मादा सामान्यतः एक अंडा देती है — धीमी प्रजनन दर।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- गोडावण को ‘राज्य पशु’ लिखना — यह राज्य पक्षी है। राज्य पशु चिंकारा व ऊँट हैं।
- IUCN स्थिति ‘Endangered’ चुनना — सही उत्तर Critically Endangered है।
- सोरसन को अजमेर और सोंखलिया को बारां में रखना — सही: सोरसन = बारां, सोंखलिया = अजमेर।
- खरमोर और गोडावण को एक मानना — खरमोर Lesser Florican है, अलग प्रजाति।
- प्रोजेक्ट गोडावण का वर्ष 1981 लिखना — 1981 राज्य पक्षी घोषणा का वर्ष है; प्रोजेक्ट 2013 में शुरू हुआ।
🧠 मेमोरी ट्रिक
“81 में राज्य पक्षी, 13 में प्रोजेक्ट, 20 में गिबी” — 1981 (राज्य पक्षी), 2013 (प्रोजेक्ट), 2020 (CMS शुभंकर)।
आवास: “जैसल-बाड़ का मरु, बारां का सोरसन, अजमेर का सोंखलिया”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
गोडावण एक ‘इंटरडिसिप्लिनरी’ टॉपिक है — इससे भूगोल (आवास), पर्यावरण (IUCN, CMS), करेंट अफेयर्स (सुप्रीम कोर्ट निर्णय, कृत्रिम गर्भाधान) और राजस्थान के प्रतीक — चारों से प्रश्न बनते हैं। CET और पटवारी में सीधे तथ्य (राज्य पक्षी वर्ष, वैज्ञानिक नाम, आवास जिला) पूछे जाते हैं, जबकि RAS Mains में ‘गोडावण संरक्षण बनाम नवीकरणीय ऊर्जा विकास’ जैसे विश्लेषणात्मक प्रश्न आ सकते हैं। Mains में उत्तर लिखते समय सुप्रीम कोर्ट के 2024 निर्णय और बिजली लाइनों की समस्या — दोनों का उल्लेख अवश्य करें।
📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)
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- राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान
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- राजस्थान की सौर ऊर्जा परियोजनाएँ एवं सोलर पार्क
📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- IUCN Red List — Ardeotis nigriceps (BirdLife International आकलन)।
- भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून — Great Indian Bustard Conservation Breeding Programme रिपोर्ट्स।
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) व राजस्थान वन विभाग की आधिकारिक विज्ञप्तियाँ।
- सर्वोच्च न्यायालय — एम.के. रंजीतसिंह बनाम भारत संघ (आदेश 19 अप्रैल 2021; निर्णय 21 मार्च 2024)।
- CMS COP-13 (गांधीनगर, फरवरी 2020) के आधिकारिक दस्तावेज़।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. गोडावण को राजस्थान का राज्य पक्षी किस वर्ष घोषित किया गया?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. सोरसन घास का मैदान, जो गोडावण के लिए प्रसिद्ध है, किस जिले में स्थित है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. गोडावण का वैज्ञानिक नाम है —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. गोडावण संरक्षण प्रजनन केंद्र राजस्थान में कहाँ स्थापित हैं?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. IUCN रेड लिस्ट में गोडावण किस श्रेणी में है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
गोडावण (Great Indian Bustard) को 21 मई 1981 को राजस्थान का राज्य पक्षी घोषित किया गया।
गोडावण का वैज्ञानिक नाम Ardeotis nigriceps है। यह ओटिडिडी (Otididae) कुल का पक्षी है।
गोडावण सर्वाधिक जैसलमेर-बाड़मेर के राष्ट्रीय मरु उद्यान (Desert National Park) और पोकरण क्षेत्र में पाया जाता है। इसके अन्य पारंपरिक आवास सोरसन (बारां) व सोंखलिया (अजमेर) हैं।
राजस्थान सरकार ने 5 जून 2013 (विश्व पर्यावरण दिवस) को प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (प्रोजेक्ट गोडावण) शुरू किया।
हाई-टेंशन ओवरहेड बिजली लाइनों से टकराव गोडावण की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि यह भारी पक्षी है और सामने की ओर इसकी दृष्टि सीमित होती है।
IUCN रेड लिस्ट में गोडावण ‘Critically Endangered’ (गंभीर रूप से संकटग्रस्त) श्रेणी में है।
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