राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग: गठन, शक्तियाँ एवं सीमाएँ
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स्रोत आधार: भारत का संविधान (मूल पाठ व नवीनतम संशोधन), RPSC RAS, UPSC CSE एवं राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं का आधिकारिक पाठ्यक्रम। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग: गठन, शक्तियाँ एवं सीमाएँ
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⚡ Quick Answer: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) एक वैधानिक (संवैधानिक नहीं) निकाय है, जिसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत 12 अक्टूबर 1993 को हुई — यह संयुक्त राष्ट्र के पेरिस सिद्धांतों (1991) के अनुरूप है। अधिनियम की धारा 2(d) के अनुसार ‘मानवाधिकार’ का अर्थ है — संविधान द्वारा प्रत्याभूत या अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में निहित तथा भारतीय न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से संबंधित अधिकार। आयोग में अध्यक्ष (पूर्व CJI या SC के न्यायाधीश), 5 पूर्णकालिक सदस्य और 7 पदेन (deemed) सदस्य होते हैं। नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं — प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली 6-सदस्यीय समिति की सिफ़ारिश पर। कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष (2019 संशोधन); पुनर्नियुक्ति संभव। आयोग को जाँच में सिविल न्यायालय की शक्तियाँ हैं, पर इसकी सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं और यह एक वर्ष से पुराने मामलों की जाँच नहीं कर सकता। वर्तमान अध्यक्ष — न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन।
🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन ने दिसंबर 2024 में NHRC के अध्यक्ष का पद संभाला (पूर्व अध्यक्ष — न्या. अरुण कुमार मिश्रा, जून 2024 तक)। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर GANHRI (राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं का वैश्विक गठबंधन) की प्रत्यायन उप-समिति ने 2023–24 में NHRC के ‘A’ दर्जे की समीक्षा स्थगित रखी — नियुक्तियों में पारदर्शिता, विविधता व पुलिस अधिकारियों द्वारा जाँच जैसे मुद्दों पर; अद्यतन स्थिति करेंट अफेयर्स से जाँचें। संविधान संशोधन व न्यायिक व्याख्याएँ बदलती रहती हैं — परीक्षा से पहले करेंट अफेयर्स से मिलाएँ।
📌 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) — एक नज़र में
- प्रकृति: वैधानिक — मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
- स्थापना: 12 अक्टूबर 1993
- आधार: पेरिस सिद्धांत, 1991
- अध्यक्ष योग्यता: पूर्व CJI या SC न्यायाधीश (2019 से)
- चयन समिति: 6 सदस्य — अध्यक्ष प्रधानमंत्री
- कार्यकाल: 3 वर्ष या 70 वर्ष (2019 संशोधन)
- प्रथम अध्यक्ष: न्या. रंगनाथ मिश्र
- वर्तमान अध्यक्ष: न्या. वी. रामसुब्रमण्यन
1. पृष्ठभूमि: मानवाधिकार एवं NHRC की स्थापना
मानवाधिकार वे मूलभूत अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को केवल मनुष्य होने के नाते प्राप्त हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसंबर 1948 को मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) अपनाई — इसीलिए 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। भारत में मौलिक अधिकार (भाग 3) व नीति निदेशक तत्व (भाग 4) मानवाधिकारों का संवैधानिक आधार हैं; देखें मौलिक अधिकार: अनु. 12–35।
- पेरिस सिद्धांत (1991): राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं (NHRI) के लिए संयुक्त राष्ट्र के मानक — स्वतंत्रता, बहुलता, व्यापक अधिदेश, पर्याप्त संसाधन; 1993 में महासभा ने अनुमोदित किए।
- भारत: 28 सितंबर 1993 को अध्यादेश; 12 अक्टूबर 1993 को NHRC का गठन; बाद में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (8 जनवरी 1994 को राष्ट्रपति की स्वीकृति)।
- संशोधन: 2006 (राज्य आयोगों से जुड़े प्रावधान, पदेन सदस्य) व 2019 (संरचना, कार्यकाल)।
- मुख्यालय: नई दिल्ली (मानव अधिकार भवन)।
2. संरचना (2019 संशोधन के बाद)
| पद | योग्यता/विवरण |
|---|---|
| अध्यक्ष | भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश (2019 से पहले केवल पूर्व CJI) |
| सदस्य 1 | सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान/पूर्व न्यायाधीश |
| सदस्य 2 | किसी उच्च न्यायालय का वर्तमान/पूर्व मुख्य न्यायाधीश |
| सदस्य 3–5 | मानवाधिकार का ज्ञान/व्यावहारिक अनुभव रखने वाले 3 व्यक्ति — इनमें कम से कम एक महिला (2019 से पहले 2 सदस्य) |
| पदेन (deemed) सदस्य — 7 | राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष तथा दिव्यांगजन मुख्य आयुक्त |
| महासचिव | मुख्य कार्यकारी अधिकारी — केंद्र सरकार के सचिव स्तर का |
ध्यान दें: पिछड़ा वर्ग आयोग, बाल अधिकार आयोग के अध्यक्ष और दिव्यांगजन मुख्य आयुक्त को 2019 में पदेन सदस्य बनाया गया। आयोग में अन्वेषण प्रभाग है जिसका प्रमुख पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी होता है।
3. नियुक्ति, कार्यकाल एवं हटाना
चयन समिति (6 सदस्य)
- प्रधानमंत्री — अध्यक्ष
- लोकसभा अध्यक्ष
- राज्यसभा के उपसभापति
- संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता (2)
- केंद्रीय गृह मंत्री
SC के वर्तमान न्यायाधीश या HC के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति CJI से परामर्श के बाद ही। समिति में कोई रिक्ति होने से नियुक्ति अमान्य नहीं होती।
| विषय | प्रावधान |
|---|---|
| कार्यकाल | 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु — जो पहले हो (2019 से पहले 5 वर्ष) |
| पुनर्नियुक्ति | पात्र (2019 संशोधन ने स्पष्ट किया) |
| सेवानिवृत्ति के बाद | केंद्र/राज्य सरकार के अधीन आगे नियोजन हेतु अपात्र |
| त्यागपत्र | राष्ट्रपति को |
| हटाना — सीधे | राष्ट्रपति: दिवालिया, कार्यकाल में सवेतन बाहरी नियोजन, मानसिक/शारीरिक अशक्तता, सक्षम न्यायालय द्वारा विकृतचित्त घोषित, नैतिक अधमता के अपराध में दोषसिद्ध व कारावास |
| हटाना — कदाचार/असमर्थता | राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय की जाँच में आरोप सिद्ध होने के बाद |
| वेतन-भत्ते | केंद्र सरकार निर्धारित करती है; नियुक्ति के बाद अलाभकारी परिवर्तन नहीं |
🎯 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) — अभ्यास
NHRC की संरचना, चयन समिति, 2019 के संशोधन और ‘एक वर्ष की सीमा’ RAS, CET, पुलिस व व्याख्याता परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं:
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
- Rajasthan CET (स्नातक) फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- RPSC प्रथम श्रेणी व्याख्याता 2026 टेस्ट सीरीज़
- RAS Prelims फाइनल रिवीजन टेस्ट सीरीज़
सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स
4. NHRC के कार्य (धारा 12)
- किसी लोक सेवक द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन, या उसके निवारण में लापरवाही की जाँच — स्वतः संज्ञान, पीड़ित/उसकी ओर से किसी की याचिका, या न्यायालय के निर्देश पर।
- न्यायालय में लंबित मानवाधिकार संबंधी कार्यवाही में न्यायालय की अनुमति से हस्तक्षेप।
- राज्य सरकार को सूचना देकर जेलों व निरोध-स्थलों का निरीक्षण।
- मानवाधिकार संरक्षण के संवैधानिक व विधिक उपायों की समीक्षा व प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सिफ़ारिश।
- आतंकवाद सहित मानवाधिकारों के उपभोग में बाधक कारकों की समीक्षा।
- मानवाधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय संधियों का अध्ययन व क्रियान्वयन हेतु सिफ़ारिश।
- मानवाधिकार क्षेत्र में शोध को बढ़ावा।
- समाज में मानवाधिकार साक्षरता का प्रसार।
- मानवाधिकार क्षेत्र में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों को प्रोत्साहन।
- आवश्यक समझा गया कोई अन्य कार्य।
व्यवहार में प्रमुख विषय: हिरासत में मृत्यु/हिंसा (24 घंटे में सूचना देने का निर्देश), मुठभेड़ में मृत्यु, बंधुआ मज़दूरी, बाल श्रम, महिलाओं के अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, सिलिकोसिस जैसे व्यावसायिक रोग।
5. शक्तियाँ एवं जाँच के बाद की कार्रवाई
| शक्ति | विवरण |
|---|---|
| सिविल न्यायालय की शक्तियाँ (धारा 13) | साक्षियों को समन करना व शपथ पर परीक्षा; दस्तावेज़ मँगाना; शपथ-पत्र पर साक्ष्य; किसी न्यायालय/कार्यालय से सार्वजनिक अभिलेख मँगाना; साक्षियों/दस्तावेज़ों की परीक्षा हेतु कमीशन |
| अन्वेषण (धारा 14) | केंद्र/राज्य सरकार के किसी अधिकारी या जाँच एजेंसी की सेवाएँ लेना |
| कार्यवाही का स्वरूप | आयोग की कार्यवाही न्यायिक कार्यवाही मानी जाती है |
| जाँच के बाद (धारा 18) | पीड़ित को क्षतिपूर्ति/अंतरिम राहत की सिफ़ारिश; दोषी लोक सेवक पर अभियोजन या अन्य कार्रवाई की सिफ़ारिश; सर्वोच्च/उच्च न्यायालय से निर्देश/आदेश/रिट हेतु संपर्क |
| अनुपालन | संबंधित सरकार को 1 माह में की गई कार्रवाई की सूचना देनी होती है |
| प्रतिवेदन | वार्षिक व विशेष प्रतिवेदन केंद्र सरकार व संबंधित राज्य सरकार को — जो कार्रवाई-ज्ञापन सहित संसद/विधानमंडल में रखती हैं |
6. NHRC की सीमाएँ
- सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं — आयोग स्वयं दंड नहीं दे सकता; केवल सिफ़ारिश कर सकता है। इसीलिए आलोचकों ने इसे ‘दंतहीन बाघ’ कहा।
- एक वर्ष की सीमा: घटना के एक वर्ष बाद के मामलों की जाँच नहीं कर सकता (धारा 36(2))।
- सशस्त्र बल: सशस्त्र बलों द्वारा उल्लंघन के मामलों में स्वयं जाँच नहीं — केवल केंद्र सरकार से प्रतिवेदन माँग सकता है (धारा 19); केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CRPF, BSF आदि) इस परिभाषा से बाहर हैं, उन पर सामान्य जाँच हो सकती है।
- निजी पक्षकार: निजी व्यक्तियों द्वारा उल्लंघन सीधे अधिदेश में नहीं — केवल ‘लोक सेवक की लापरवाही’ के माध्यम से।
- दोहराव: जो मामला राज्य मानवाधिकार आयोग या किसी अन्य विधिक आयोग के समक्ष लंबित है, उसकी जाँच नहीं।
- संसाधन व स्टाफ़: अन्वेषण हेतु प्रतिनियुक्त पुलिस अधिकारियों पर निर्भरता — स्वतंत्रता पर प्रश्न; भारी लंबित शिकायतें।
- नियुक्तियाँ: सेवानिवृत्त न्यायाधीशों व नौकरशाहों का प्रभुत्व; नागरिक समाज का कम प्रतिनिधित्व।
7. राज्य मानवाधिकार आयोग एवं मानवाधिकार न्यायालय
| आधार | NHRC | राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) |
|---|---|---|
| अध्यक्ष | पूर्व CJI या SC न्यायाधीश | किसी HC का पूर्व मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश (2019 से) |
| सदस्य | 5 पूर्णकालिक + 7 पदेन | 2 सदस्य (HC/जिला न्यायाधीश से एक; मानवाधिकार अनुभवी एक) |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति | राज्यपाल — मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति (विधानसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री, विपक्ष के नेता; द्विसदनीय राज्य में परिषद के सभापति व विपक्ष के नेता) |
| हटाना | राष्ट्रपति | राष्ट्रपति (राज्यपाल नहीं) |
| कार्यकाल | 3 वर्ष / 70 वर्ष | 3 वर्ष / 70 वर्ष |
| क्षेत्राधिकार | संघ व राज्य सूची — सभी | केवल राज्य सूची व समवर्ती सूची के विषय |
- मानवाधिकार न्यायालय: त्वरित विचारण हेतु राज्य सरकार, HC के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, प्रत्येक जिले में एक सत्र न्यायालय को मानवाधिकार न्यायालय निर्दिष्ट कर सकती है; प्रत्येक हेतु विशेष लोक अभियोजक।
- राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की स्थापना 1999 में हुई — विवरण राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग में।
8. NHRC का मूल्यांकन एवं सुधार के सुझाव
| योगदान | सुधार के सुझाव |
|---|---|
| हिरासत में मृत्यु की अनिवार्य सूचना व पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफ़ी के दिशानिर्देश | सिफ़ारिशों को बाध्यकारी बनाना या न मानने पर कारण बताना अनिवार्य |
| बंधुआ मज़दूरी, बाल श्रम पर निगरानी | एक वर्ष की सीमा हटाना/बढ़ाना |
| मुठभेड़ हत्याओं पर दिशानिर्देश (1997) | स्वतंत्र अन्वेषण कैडर — पुलिस प्रतिनियुक्ति पर निर्भरता कम |
| मानवाधिकार शिक्षा व जागरूकता | सशस्त्र बलों पर सीमित जाँच अधिकार |
| पीड़ितों को करोड़ों रुपये की क्षतिपूर्ति की सिफ़ारिशें | नागरिक समाज, महिलाओं व वंचित वर्गों का अधिक प्रतिनिधित्व — पेरिस सिद्धांत की ‘बहुलता’ |
अन्य वैधानिक निकायों से तुलना संवैधानिक, वैधानिक व नियामक निकायों में अंतर तथा जीवन व स्वतंत्रता के अधिकार हेतु स्वतंत्रता का अधिकार: अनु. 19–22 देखें।
संबंधित: संवैधानिक, वैधानिक व नियामक निकायों में अंतर | मौलिक अधिकार: अनु. 12–35 | स्वतंत्रता का अधिकार: अनु. 19–22 | CVC, CIC एवं लोकपाल
📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण | हल करने की कुंजी |
|---|---|---|
| स्थापना/प्रकृति | 1993, वैधानिक | खंड 1 |
| संरचना | 5 + 7 पदेन | खंड 2 |
| चयन समिति | PM अध्यक्ष, 6 सदस्य | खंड 3 |
| सीमाएँ | 1 वर्ष, सशस्त्र बल | खंड 6 |
| NHRC बनाम SHRC | हटाना राष्ट्रपति | खंड 7 |
🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना कब हुई?
12 अक्टूबर 1993 को, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत — यह वैधानिक निकाय है।
NHRC के अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?
राष्ट्रपति — प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा उपसभापति, दोनों सदनों के विपक्ष के नेता और गृह मंत्री की समिति की सिफ़ारिश पर।
NHRC के अध्यक्ष का कार्यकाल कितना है?
3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु, जो पहले हो — 2019 के संशोधन से (पहले 5 वर्ष था); पुनर्नियुक्ति संभव।
क्या NHRC की सिफ़ारिशें बाध्यकारी हैं?
नहीं — आयोग केवल क्षतिपूर्ति, अभियोजन या कार्रवाई की सिफ़ारिश कर सकता है; सरकार को एक माह में की गई कार्रवाई बतानी होती है।
NHRC किन मामलों की जाँच नहीं कर सकता?
घटना के एक वर्ष बाद के मामले, अन्य आयोग में लंबित मामले, और सशस्त्र बलों के मामलों में केवल केंद्र से प्रतिवेदन माँग सकता है।
📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किस प्रकार का निकाय है?
(A) संवैधानिक (B) वैधानिक (C) कार्यकारी (D) नियामक
✅ उत्तर: (B) वैधानिक — 1993 का अधिनियम।
NHRC की स्थापना कब हुई?
(A) 10 दिसंबर 1993 (B) 26 जनवरी 1994 (C) 12 अक्टूबर 1993 (D) 2 अक्टूबर 1993
✅ उत्तर: (C) 12 अक्टूबर 1993 — 10 दिसंबर — मानवाधिकार दिवस।
NHRC के अध्यक्ष की नियुक्ति हेतु चयन समिति का अध्यक्ष कौन होता है?
(A) प्रधानमंत्री (B) राष्ट्रपति (C) CJI (D) लोकसभा अध्यक्ष
✅ उत्तर: (A) प्रधानमंत्री — 6-सदस्यीय समिति।
2019 के संशोधन के बाद NHRC अध्यक्ष का कार्यकाल —
(A) 5 वर्ष या 70 वर्ष (B) 5 वर्ष या 65 वर्ष (C) 6 वर्ष या 65 वर्ष (D) 3 वर्ष या 70 वर्ष
✅ उत्तर: (D) 3 वर्ष या 70 वर्ष — पुनर्नियुक्ति पात्र।
NHRC अधिकतम कितने पुराने मामले की जाँच कर सकता है?
(A) 6 माह (B) 1 वर्ष (C) 2 वर्ष (D) कोई सीमा नहीं
✅ उत्तर: (B) 1 वर्ष — धारा 36(2)।
NHRC के प्रथम अध्यक्ष —
(A) न्या. रंगनाथ मिश्र (B) न्या. जे.एस. वर्मा (C) न्या. के.जी. बालकृष्णन (D) न्या. एच.एल. दत्तू
✅ उत्तर: (A) न्या. रंगनाथ मिश्र — 1993–96।
राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को कौन हटाता है?
(A) राज्यपाल (B) मुख्यमंत्री (C) राष्ट्रपति (D) उच्च न्यायालय
✅ उत्तर: (C) राष्ट्रपति — नियुक्ति राज्यपाल।
निम्न में से कौन NHRC का पदेन सदस्य नहीं है?
(A) राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष (B) दिव्यांगजन मुख्य आयुक्त (C) राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष (D) मुख्य सूचना आयुक्त
✅ उत्तर: (D) मुख्य सूचना आयुक्त — 7 पदेन सदस्य।
सशस्त्र बलों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन पर NHRC —
(A) स्वयं जाँच कर दंड दे सकता है (B) केवल केंद्र सरकार से प्रतिवेदन माँग सकता है (C) कोई कार्रवाई नहीं कर सकता (D) सेना प्रमुख को बुला सकता है
✅ उत्तर: (B) केवल केंद्र सरकार से प्रतिवेदन माँग सकता है — धारा 19।
NHRC का गठन किन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है?
(A) पेरिस सिद्धांत (B) जिनेवा अभिसमय (C) वियना घोषणा (D) हेलसिंकी समझौता
✅ उत्तर: (A) पेरिस सिद्धांत — 1991 — UN महासभा 1993।
⚡ One-Liner Revision (Key Facts)
- NHRC — मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
- स्थापना — 12 अक्टूबर 1993
- मानवाधिकार दिवस — 10 दिसंबर
- अध्यक्ष योग्यता — पूर्व CJI / SC न्यायाधीश
- पूर्णकालिक सदस्य — 5 (एक महिला अनिवार्य)
- पदेन सदस्य — 7
- कार्यकाल — 3 वर्ष / 70 वर्ष
- जाँच-सीमा — 1 वर्ष
- प्रथम अध्यक्ष — न्या. रंगनाथ मिश्र
- वर्तमान अध्यक्ष — न्या. वी. रामसुब्रमण्यन
✅ परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु (Key Points)
- NHRC संवैधानिक नहीं, वैधानिक है।
- 2019 से SC का पूर्व न्यायाधीश भी अध्यक्ष बन सकता है।
- सदस्यों में कम से कम एक महिला अनिवार्य।
- सिविल न्यायालय की शक्तियाँ, पर सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं।
- SHRC — नियुक्ति राज्यपाल, हटाना राष्ट्रपति; केवल राज्य व समवर्ती सूची के विषय।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- NHRC अध्यक्ष का कार्यकाल अब 3 वर्ष — पुरानी पुस्तकों में 5 वर्ष।
- चयन समिति में राज्यसभा के उपसभापति होते हैं, सभापति (उपराष्ट्रपति) नहीं।
- चयन समिति में CJI नहीं — केवल वर्तमान न्यायाधीश की नियुक्ति पर परामर्श।
- स्थापना-तिथि 12 अक्टूबर; 10 दिसंबर मानवाधिकार दिवस है।
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ‘सशस्त्र बल’ की परिभाषा में नहीं आते।
🧠 याद रखने की ट्रिक (Memory Tricks)
- “93 में बना, 2019 में बदला — 3 साल, 70 उम्र”।
- संरचना — “1 अध्यक्ष + 5 पूर्णकालिक + 7 पदेन”।
- चयन समिति — “PM, स्पीकर, उपसभापति, दो विपक्षी नेता, गृह मंत्री” = 6।
- सीमाएँ — “एक साल, सेना, सिफ़ारिश” (3 स)।
- “राज्य आयोग: राज्यपाल लाए, राष्ट्रपति हटाए” — UPSC/SPSC जैसा।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
NHRC पर प्रश्न अधिकतर 2019 के संशोधन से जुड़े बदलावों (कार्यकाल, अध्यक्ष की योग्यता, पदेन सदस्य) और चयन समिति से आते हैं। पुलिस व पटवारी परीक्षाओं में ‘मानवाधिकार दिवस’ व ‘स्थापना वर्ष’ भी पूछे जाते हैं। RAS मुख्य परीक्षा हेतु ‘दंतहीन बाघ’ की आलोचना और सुधार (खंड 8) तैयार रखें।
✍️ अभ्यास करें — टेस्ट सीरीज़, क्विज़ व करेंट अफेयर्स
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग: गठन, शक्तियाँ एवं सीमाएँ पर अपनी तैयारी परखने के लिए:
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📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)
- संवैधानिक, वैधानिक व नियामक निकायों में अंतर
- मौलिक अधिकार: अनु. 12–35
- स्वतंत्रता का अधिकार: अनु. 19–22
- CVC, CIC एवं लोकपाल
- संवैधानिक उपचार: अनु. 32 व पाँच रिट
- न्यायिक पुनरावलोकन, सक्रियता व PIL
- राज्य के नीति निदेशक तत्व एवं मौलिक कर्तव्य
- राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग
📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 — धारा 2, 3, 4, 5, 12, 13, 14, 18, 19, 21, 30, 36; संशोधन अधिनियम 2006 व 2019।
- पेरिस सिद्धांत (UN महासभा संकल्प 48/134, 1993); मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा, 1948।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (nhrc.nic.in) — अध्यक्षों की सूची, वार्षिक प्रतिवेदन।
- GANHRI प्रत्यायन उप-समिति की रिपोर्टें (2023–24)।

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Q1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किस प्रकार का निकाय है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. NHRC की स्थापना कब हुई?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. NHRC के अध्यक्ष की नियुक्ति हेतु चयन समिति का अध्यक्ष कौन होता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. 2019 के संशोधन के बाद NHRC अध्यक्ष का कार्यकाल —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. NHRC अधिकतम कितने पुराने मामले की जाँच कर सकता है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
12 अक्टूबर 1993।
वैधानिक — 1993 का अधिनियम।
3 वर्ष या 70 वर्ष।
न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन।
एक वर्ष तक।
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