राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग: गठन, कार्य एवं शक्तियाँ
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स्रोत आधार: RPSC RAS / RSMSSB CET पाठ्यक्रम — राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था इकाई। भारत का संविधान एवं संबंधित राज्य अधिनियम।
राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग: गठन, कार्य एवं शक्तियाँ
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⚡ Quick Answer: राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत बना वैधानिक निकाय है। इसका गठन 18 जनवरी 1999 को हुआ और यह मार्च 2000 से क्रियाशील है। अध्यक्ष उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश होते हैं, और साथ में 2 सदस्य होते हैं। नियुक्ति राज्यपाल करते हैं (मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री व नेता प्रतिपक्ष की समिति की सिफ़ारिश पर), पर हटाते राष्ट्रपति हैं। कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष है। आयोग को सिविल न्यायालय की जाँच-शक्तियाँ हैं, पर उसकी सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं; 1 वर्ष से पुरानी घटनाओं की जाँच सामान्यतः नहीं होती। वर्तमान अध्यक्ष न्यायमूर्ति जी.आर. मूलचंदानी (28 जून 2024 से) हैं।
🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति जी.आर. मूलचंदानी हैं (28 जून 2024 से, आयोग की आधिकारिक वेबसाइट)। आयोग का कार्यालय SSO भवन, शासन सचिवालय, जयपुर में है। अभिरक्षा में मृत्यु, पुलिस ज्यादती, जेल-स्थितियाँ और कमज़ोर वर्गों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर आयोग स्वप्रेरणा से भी संज्ञान लेता है। पदधारी व संख्याएँ बदलती रहती हैं — परीक्षा से पहले करेंट अफेयर्स से अवश्य मिलाएँ।
📌 राज्य मानवाधिकार आयोग — एक नज़र में — एक नज़र में
- कानून: मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
- गठन: 18 जनवरी 1999; मार्च 2000 से क्रियाशील
- प्रकृति: वैधानिक निकाय
- अध्यक्ष: HC के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश
- नियुक्ति: राज्यपाल — मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफ़ारिश पर
- हटाना: राष्ट्रपति
- कार्यकाल: 3 वर्ष या 70 वर्ष
- वर्तमान अध्यक्ष: न्यायमूर्ति जी.आर. मूलचंदानी
1. मानवाधिकार आयोग — गरिमा का प्रहरी
मानवाधिकार का अर्थ है जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से जुड़े वे अधिकार जो संविधान द्वारा गारंटीकृत हैं या अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में शामिल हैं और भारत के न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं। इनकी रक्षा के लिए संसद ने मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 बनाया, जिसके अंतर्गत केंद्र में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राज्यों में राज्य मानवाधिकार आयोग गठित होते हैं। राजस्थान में आयोग का गठन 18 जनवरी 1999 को हुआ और यह मार्च 2000 से क्रियाशील हुआ। यह एक वैधानिक (statutory) निकाय है — संविधान में नहीं, संसद के अधिनियम से बना। आयोग का काम है लोक सेवकों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन या उल्लंघन रोकने में लापरवाही की शिकायतों की जाँच करना, अभिरक्षा-स्थलों (जेल, थाने, सुधार गृह) का निरीक्षण करना और सरकार को सुधार की सिफ़ारिश देना।
2. संरचना, नियुक्ति, कार्यकाल व हटाना
| बिंदु | प्रावधान |
|---|---|
| संरचना | अध्यक्ष + 2 सदस्य (2019 संशोधन के अनुसार); सचिव — मुख्य कार्यकारी अधिकारी |
| अध्यक्ष योग्यता | उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश |
| सदस्य | एक — उच्च न्यायालय का (सेवानिवृत्त) न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश (7 वर्ष अनुभव); एक — मानवाधिकार का ज्ञान/अनुभव रखने वाला (महिला प्राथमिकता सहित नियमानुसार) |
| नियुक्ति | राज्यपाल — समिति: मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री, नेता प्रतिपक्ष |
| कार्यकाल | 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो पहले); पुनर्नियुक्ति पात्र |
| हटाना | राष्ट्रपति — सिद्ध कदाचार/असमर्थता पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद; दिवालियापन, अन्य वैतनिक कार्य आदि आधारों पर भी |
🎯 आयोग — अभ्यास
मानवाधिकार आयोग की नियुक्ति-हटाने की प्रक्रिया RAS, CET, पुलिस व शिक्षक परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती है:
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
- राजस्थान पुलिस कांस्टेबल 2026 टेस्ट सीरीज़
- Rajasthan CET (स्नातक) फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- RPSC द्वितीय श्रेणी वरिष्ठ अध्यापक 2026 टेस्ट सीरीज़
सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स
3. कार्य
- लोक सेवक द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन या उसके निवारण में लापरवाही की शिकायत की जाँच — पीड़ित की याचिका पर या स्वप्रेरणा से।
- न्यायालय में लंबित मानवाधिकार-संबंधी कार्यवाही में न्यायालय की अनुमति से हस्तक्षेप।
- जेल, सुधार गृह व अभिरक्षा-स्थलों का निरीक्षण (सरकार को सूचना देकर)।
- मानवाधिकार संरक्षण के संवैधानिक व वैधानिक उपायों की समीक्षा।
- आतंकवाद सहित मानवाधिकार-बाधक कारकों की समीक्षा।
- मानवाधिकार साक्षरता व जागरूकता का प्रसार।
- गैर-सरकारी संगठनों के प्रयासों को प्रोत्साहन।
4. शक्तियाँ व सीमाएँ
| शक्ति/सीमा | विवरण |
|---|---|
| सिविल न्यायालय की शक्ति | CPC 1908 के अंतर्गत — गवाहों को समन, दस्तावेज़ मँगाना, शपथ-पत्र पर साक्ष्य, सार्वजनिक अभिलेख |
| जाँच तंत्र | राज्य सरकार के अधिकारियों/जाँच एजेंसी की सेवाएँ |
| अंतरिम राहत | पीड़ित को अंतरिम सहायता/क्षतिपूर्ति की सिफ़ारिश |
| सिफ़ारिश | क्षतिपूर्ति, दोषी लोक सेवक पर कार्रवाई, अभियोजन; सरकार 1 माह में की गई कार्रवाई बताती है |
| समय-सीमा | घटना के 1 वर्ष बाद की शिकायत सामान्यतः नहीं (धारा 36(2)) |
| दोहराव पर रोक | किसी अन्य आयोग में लंबित मामला नहीं (धारा 36(1)) |
| प्रकृति | सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं — आयोग की प्रमुख सीमा |
5. शिकायत कैसे करें?
राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत
- सादे काग़ज़ पर हिंदी/अंग्रेज़ी में शिकायत — पीड़ित, परिजन या कोई भी व्यक्ति/संस्था।
- घटना का विवरण, तिथि, स्थान, संबंधित लोक सेवक व साक्ष्य संलग्न करें।
- डाक/ई-मेल/आयोग की वेबसाइट से भेजें; कोई शुल्क नहीं।
- आयोग प्रारंभिक जाँच कर संबंधित विभाग से रिपोर्ट मँगाता है।
- जाँच के बाद सिफ़ारिश; सरकार की कार्रवाई-रिपोर्ट की निगरानी।
6. राज्य आयोग बनाम राष्ट्रीय आयोग
| बिंदु | राज्य मानवाधिकार आयोग | राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग |
|---|---|---|
| गठन | धारा 21 | धारा 3 |
| अध्यक्ष | HC के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश | सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश |
| नियुक्ति | राज्यपाल | राष्ट्रपति |
| हटाना | राष्ट्रपति | राष्ट्रपति |
| क्षेत्र | राज्य सूची व समवर्ती सूची के विषय | सम्पूर्ण देश |
प्रथम अध्यक्ष (परीक्षा-पुस्तकों के अनुसार): न्यायमूर्ति कांता कुमारी भटनागर।
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📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण | हल करने की कुंजी |
|---|---|---|
| गठन | 18 जनवरी 1999 | एक नज़र में |
| ट्रैप | नियुक्ति राज्यपाल, हटाना राष्ट्रपति | खंड 2 |
| कार्यकाल | 3 वर्ष/70 वर्ष | खंड 2 |
| सीमा | 1 वर्ष, बाध्यकारी नहीं | खंड 4 |
| तुलना | SHRC बनाम NHRC | खंड 6 |
🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)
राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन कब हुआ?
18 जनवरी 1999 को; मार्च 2000 से क्रियाशील।
मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को कौन हटाता है?
राष्ट्रपति — जबकि नियुक्ति राज्यपाल करते हैं।
राज्य मानवाधिकार आयोग का कार्यकाल कितना है?
3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु, जो पहले हो (2019 संशोधन); पुनर्नियुक्ति संभव।
राजस्थान मानवाधिकार आयोग के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?
न्यायमूर्ति जी.आर. मूलचंदानी — 28 जून 2024 से।
क्या मानवाधिकार आयोग सजा दे सकता है?
नहीं, वह जाँच कर सिफ़ारिश करता है; सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं, पर सरकार को कार्रवाई-रिपोर्ट देनी होती है।
📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)
राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग किस अधिनियम से?
(A) RTI 2005 (B) लोकायुक्त अधिनियम 1973 (C) महिला आयोग अधिनियम 1999 (D) मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
✅ उत्तर: (D) मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 — धारा 21 — राज्य आयोग।
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत राजस्थान में राज्य आयोग किस तिथि को गठित हुआ?
(A) 12 अक्टूबर 1993 (B) 2006 (C) 18 जनवरी 1999 (D) 15 मई 1999
✅ उत्तर: (C) 18 जनवरी 1999 — मार्च 2000 से क्रियाशील।
आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति —
(A) राज्यपाल, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफ़ारिश पर (B) राष्ट्रपति (C) मुख्य न्यायाधीश (D) विधानसभा
✅ उत्तर: (A) राज्यपाल, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफ़ारिश पर — समिति: CM, स्पीकर, गृह मंत्री, नेता प्रतिपक्ष।
आयोग के अध्यक्ष/सदस्य को कौन हटाता है?
(A) राज्यपाल (B) मुख्यमंत्री (C) उच्च न्यायालय (D) राष्ट्रपति
✅ उत्तर: (D) राष्ट्रपति — नियुक्ति राज्यपाल, हटाना राष्ट्रपति।
2019 संशोधन के बाद कार्यकाल —
(A) 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (B) 5 वर्ष या 70 वर्ष (C) 6 वर्ष या 65 वर्ष (D) आजीवन
✅ उत्तर: (A) 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु — पुनर्नियुक्ति पात्र।
अध्यक्ष की योग्यता (2019 संशोधन) —
(A) कोई भी नागरिक (B) उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश (C) केवल सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (D) IAS
✅ उत्तर: (B) उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश — पहले केवल मुख्य न्यायाधीश।
राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के वर्तमान अध्यक्ष —
(A) न्यायमूर्ति गोपाल कृष्ण व्यास (B) न्यायमूर्ति जी.आर. मूलचंदानी (C) न्यायमूर्ति कांता भटनागर (D) न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया
✅ उत्तर: (B) न्यायमूर्ति जी.आर. मूलचंदानी — 28 जून 2024 से।
आयोग घटना के कितने समय बाद के मामलों की जाँच सामान्यतः नहीं करता?
(A) 6 माह (B) 3 वर्ष (C) 5 वर्ष (D) 1 वर्ष
✅ उत्तर: (D) 1 वर्ष — धारा 36(2)।
आयोग की जाँच शक्तियाँ —
(A) सिविल न्यायालय की (CPC 1908) (B) दंड देने की (C) गिरफ्तारी की (D) कोई नहीं
✅ उत्तर: (A) सिविल न्यायालय की (CPC 1908) — समन, दस्तावेज़, शपथ-पत्र।
आयोग की सिफ़ारिशों की प्रकृति —
(A) न्यायालय के निर्णय समान (B) अंतिम (C) बाध्यकारी नहीं; सरकार को कार्रवाई-रिपोर्ट देनी होती है (D) बाध्यकारी
✅ उत्तर: (C) बाध्यकारी नहीं; सरकार को कार्रवाई-रिपोर्ट देनी होती है — 1 माह में की गई कार्रवाई की सूचना।
⚡ One-Liner Revision (Key Facts)
- अधिनियम — 1993
- गठन — 18 जनवरी 1999
- क्रियाशील — मार्च 2000
- नियुक्ति — राज्यपाल
- हटाना — राष्ट्रपति
- कार्यकाल — 3 वर्ष/70 वर्ष
- वर्तमान अध्यक्ष — जी.आर. मूलचंदानी
- प्रथम अध्यक्ष — कांता कुमारी भटनागर
✅ मुख्य बिंदु (Key Points)
- वैधानिक, संवैधानिक नहीं।
- स्वप्रेरणा से संज्ञान संभव।
- सिविल न्यायालय की जाँच-शक्ति।
- सिफ़ारिशें बाध्यकारी नहीं।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- हटाना राष्ट्रपति — राज्यपाल नहीं।
- 3 वर्ष (2019 के बाद), पहले 5 वर्ष।
- 1 वर्ष पुरानी घटना की जाँच नहीं।
🧠 याद रखने की ट्रिक
“राज्यपाल लाते, राष्ट्रपति हटाते; तीन साल या सत्तर”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
RAS मुख्य में ‘मानवाधिकार आयोग — दंतहीन बाघ?’ जैसे प्रश्न आते हैं। उत्तर में शक्तियाँ (खंड 4) और सीमाएँ (बाध्यकारी नहीं, 1 वर्ष) दोनों रखें।
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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग — आधिकारिक वेबसाइट (अध्यक्ष एवं सदस्य)।
- मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (2019 संशोधन सहित)।
- RajRAS — राजस्थान मानवाधिकार आयोग।
- गृह विभाग, राजस्थान — आयोग अध्यक्ष।
- सुयोग अकादमी — संवैधानिक एवं वैधानिक आयोग।

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18 जनवरी 1999।
राज्यपाल।
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जी.आर. मूलचंदानी।
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