संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): गठन, कार्य एवं संवैधानिक सुरक्षा
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स्रोत आधार: भारत का संविधान (मूल पाठ व नवीनतम संशोधन), RPSC RAS, UPSC CSE एवं राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं का आधिकारिक पाठ्यक्रम। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): गठन, कार्य एवं संवैधानिक सुरक्षा
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⚡ Quick Answer: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) भारत का केंद्रीय भर्ती अभिकरण है — एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय, जिसका प्रावधान संविधान के भाग 14, अनु. 315–323 में है। इसकी जड़ें 1 अक्टूबर 1926 को गठित लोक सेवा आयोग (ली आयोग की अनुशंसा) में हैं; 1935 के अधिनियम से यह संघीय लोक सेवा आयोग और 26 जनवरी 1950 से UPSC बना। इसमें एक अध्यक्ष व राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित संख्या में सदस्य होते हैं — नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं; आधे सदस्यों का भारत/राज्य सरकार के अधीन 10 वर्ष का सेवा-अनुभव आवश्यक। कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु। हटाना अनु. 317 के अनुसार — कदाचार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद, जिसकी सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी है। व्यय भारत की संचित निधि पर भारित। अध्यक्ष सेवानिवृत्ति के बाद किसी सरकारी नियोजन हेतु अपात्र। इसकी भूमिका परामर्शदात्री है — सरकार सलाह मानने हेतु बाध्य नहीं।
🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): अजय कुमार (पूर्व रक्षा सचिव) ने मई 2025 में UPSC के अध्यक्ष का पद संभाला — पूर्व अध्यक्ष प्रीति सूदन का कार्यकाल अप्रैल 2025 में पूर्ण हुआ। 2024 में एक परिवीक्षाधीन अधिकारी द्वारा पहचान व आरक्षण प्रमाणपत्रों के दुरुपयोग के प्रकरण के बाद आयोग ने उसकी उम्मीदवारी रद्द की और सत्यापन प्रक्रिया (आधार-आधारित प्रमाणीकरण आदि) कड़ी की; अगस्त 2024 में पार्श्व प्रवेश (lateral entry) का विज्ञापन सरकार के अनुरोध पर वापस लिया गया। संविधान संशोधन व न्यायिक व्याख्याएँ बदलती रहती हैं — परीक्षा से पहले करेंट अफेयर्स से मिलाएँ।
📌 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) — एक नज़र में
- संवैधानिक आधार: भाग 14, अनु. 315–323
- मूल: लोक सेवा आयोग — 1 अक्टूबर 1926 (ली आयोग)
- प्रथम अध्यक्ष (1926): सर रॉस बार्कर
- नियुक्ति: राष्ट्रपति
- कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष
- हटाना: अनु. 317 — SC की जाँच (कदाचार)
- व्यय: भारत की संचित निधि पर भारित
- वर्तमान अध्यक्ष: अजय कुमार (मई 2025 से)
1. UPSC का ऐतिहासिक विकास
योग्यता-आधारित सिविल सेवा भर्ती का विचार मैकाले समिति (1854) की अनुशंसा से आया, जिसके बाद 1855 से भारतीय सिविल सेवा (ICS) की प्रतियोगी परीक्षा लंदन में होने लगी। भारत में एक स्थायी भर्ती निकाय की नींव निम्न चरणों में पड़ी —
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1919 | भारत शासन अधिनियम, 1919 — लोक सेवा आयोग की स्थापना का प्रावधान |
| 1924 | ली आयोग (भारत में उच्च लोक सेवाओं पर रॉयल कमीशन) — लोक सेवा आयोग शीघ्र स्थापित करने की अनुशंसा |
| 1 अक्टूबर 1926 | लोक सेवा आयोग का गठन — प्रथम अध्यक्ष सर रॉस बार्कर |
| 1937 | भारत शासन अधिनियम, 1935 — संघीय लोक सेवा आयोग व प्रांतीय लोक सेवा आयोग |
| 26 जनवरी 1950 | संविधान के अनु. 378 के तहत संघ लोक सेवा आयोग नाम |
UPSC का मुख्यालय धौलपुर हाउस, नई दिल्ली में है। आयोग के प्रथम भारतीय अध्यक्ष एच.के. कृपलानी (1947–49) थे और संविधान लागू होने पर UPSC के अध्यक्ष आर.एन. बनर्जी (1949–55) रहे। यह भारत में योग्यता प्रणाली (merit system) का ‘प्रहरी (watchdog)’ माना जाता है।
2. संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 315–323
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| 315 | संघ हेतु एक लोक सेवा आयोग व प्रत्येक राज्य हेतु एक; दो या अधिक राज्यों हेतु संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) — संसद विधि द्वारा, राज्य विधानमंडलों के संकल्प पर |
| 316 | सदस्यों की नियुक्ति व पदावधि |
| 317 | सदस्यों को हटाना व निलंबन |
| 318 | सदस्यों व कर्मचारियों की सेवा-शर्तें बनाने की शक्ति (UPSC — राष्ट्रपति, SPSC — राज्यपाल) |
| 319 | पद छोड़ने के बाद नियोजन पर प्रतिबंध |
| 320 | लोक सेवा आयोगों के कार्य |
| 321 | आयोगों के कार्यों के विस्तार की शक्ति (संसद/राज्य विधानमंडल) |
| 322 | आयोगों के व्यय — संचित निधि पर भारित |
| 323 | आयोगों के प्रतिवेदन — UPSC का वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को, जो संसद में रखवाते हैं |
3. संरचना, नियुक्ति एवं कार्यकाल (अनु. 316)
- संरचना: एक अध्यक्ष व अन्य सदस्य — संख्या संविधान में नहीं, राष्ट्रपति तय करते हैं (सामान्यतः अध्यक्ष सहित 9–11)।
- नियुक्ति: अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
- योग्यता: संविधान में कोई विशेष शैक्षिक योग्यता नहीं, पर कम से कम आधे सदस्य ऐसे हों जिन्होंने भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम से कम 10 वर्ष पद धारण किया हो।
- कार्यकाल: पदग्रहण से 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु — जो पहले हो।
- त्यागपत्र: राष्ट्रपति को।
- कार्यवाहक अध्यक्ष: अध्यक्ष का पद रिक्त हो या अध्यक्ष अनुपस्थित हों तो राष्ट्रपति किसी सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त करते हैं।
- पुनर्नियुक्ति: उसी पद पर दूसरी बार नियुक्ति नहीं (अनु. 316(3))।
🎯 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) — अभ्यास
अनु. 315–323, UPSC सदस्यों को हटाने की प्रक्रिया (अनु. 317) और सेवानिवृत्ति के बाद के प्रतिबंध RAS, RPSC व्याख्याता, CET परीक्षाओं के प्रिय प्रश्न हैं:
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- Rajasthan CET (स्नातक) फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- RPSC प्रथम श्रेणी व्याख्याता 2026 टेस्ट सीरीज़
- RAS Prelims फाइनल रिवीजन टेस्ट सीरीज़
सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स
4. हटाना एवं निलंबन (अनु. 317)
| आधार | प्रक्रिया |
|---|---|
| कदाचार (misbehaviour) | राष्ट्रपति मामला सर्वोच्च न्यायालय को जाँच हेतु भेजते हैं; SC जाँच कर हटाने की सलाह दे तो राष्ट्रपति हटाते हैं — SC की सलाह बाध्यकारी; जाँच के दौरान राष्ट्रपति सदस्य को निलंबित कर सकते हैं |
| दिवालिया घोषित होना | राष्ट्रपति सीधे हटा सकते हैं |
| पदावधि में पद के बाहर सवेतन नियोजन | राष्ट्रपति सीधे |
| राष्ट्रपति की राय में मानसिक/शारीरिक अशक्तता | राष्ट्रपति सीधे |
कदाचार की परिभाषा (अनु. 317(4)): यदि सदस्य भारत/राज्य सरकार द्वारा किए गए किसी अनुबंध या करार में हितबद्ध हो या उसके लाभ में भाग ले (निगमित कंपनी के सामान्य सदस्य के रूप में छोड़कर)। ध्यान दें: SPSC के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, पर हटाते राष्ट्रपति ही हैं। सर्वोच्च न्यायालय की इस भूमिका हेतु सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र देखें।
5. स्वतंत्रता हेतु संवैधानिक सुरक्षा
- कार्यकाल की सुरक्षा: केवल अनु. 317 में वर्णित आधारों व प्रक्रिया से हटाए जा सकते हैं।
- सेवा-शर्तों में अलाभकारी परिवर्तन नहीं (अनु. 318 का परंतुक)।
- व्यय संचित निधि पर भारित (अनु. 322) — संसद में मतदान नहीं।
- सेवानिवृत्ति के बाद नियोजन पर प्रतिबंध (अनु. 319):
| पद | सेवानिवृत्ति के बाद क्या संभव | क्या संभव नहीं |
|---|---|---|
| UPSC अध्यक्ष | — | भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई भी नियोजन |
| UPSC सदस्य | UPSC का अध्यक्ष या किसी SPSC का अध्यक्ष | अन्य कोई सरकारी नियोजन |
| SPSC अध्यक्ष | UPSC का अध्यक्ष/सदस्य या किसी अन्य SPSC का अध्यक्ष | अन्य सरकारी नियोजन |
| SPSC सदस्य | UPSC का अध्यक्ष/सदस्य, उसी/अन्य SPSC का अध्यक्ष | अन्य सरकारी नियोजन |
इन सुरक्षाओं की तुलना अन्य संवैधानिक निकायों से संवैधानिक, वैधानिक व नियामक निकायों में अंतर में करें।
6. UPSC के कार्य (अनु. 320)
- परीक्षाएँ आयोजित करना: अखिल भारतीय सेवाओं, केंद्रीय सेवाओं व संघ राज्यक्षेत्रों की सेवाओं में नियुक्ति हेतु — सिविल सेवा, भारतीय वन सेवा, इंजीनियरिंग सेवा, संयुक्त चिकित्सा सेवा, NDA, CDS, CAPF आदि।
- संयुक्त भर्ती में सहायता: दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर विशेष योग्यता वाली सेवाओं हेतु संयुक्त भर्ती की योजनाएँ बनाने में।
- राज्यपाल के अनुरोध व राष्ट्रपति की अनुमति से राज्य की किसी भी या सभी आवश्यकताओं की पूर्ति।
- परामर्श (अनु. 320(3)) — निम्न विषयों पर आयोग से परामर्श आवश्यक:
| परामर्श का विषय | उदाहरण |
|---|---|
| सिविल सेवाओं व पदों पर भर्ती की पद्धतियाँ | भर्ती नियम |
| नियुक्ति, पदोन्नति, स्थानांतरण के सिद्धांत | विभागीय पदोन्नति समितियाँ (DPC) |
| अभ्यर्थियों की उपयुक्तता | प्रतिनियुक्ति, प्रत्यक्ष भर्ती |
| अनुशासनात्मक मामले | भारत सरकार के अधीन सिविल सेवकों पर दंड |
| कानूनी कार्यवाही का व्यय | कर्तव्य निर्वहन में किए कार्य हेतु मुक़दमे का ख़र्च |
| पेंशन | कर्तव्य के दौरान चोट पर पेंशन |
| अस्थायी नियुक्ति | 1 वर्ष से अधिक की अस्थायी नियुक्ति |
विस्तार (अनु. 321): संसद विधि द्वारा UPSC को अतिरिक्त कार्य सौंप सकती है — किसी स्थानीय प्राधिकरण, निगमित निकाय या सार्वजनिक संस्था की सेवाओं के संबंध में। वार्षिक प्रतिवेदन (अनु. 323): राष्ट्रपति को; राष्ट्रपति उसे उन मामलों के ज्ञापन सहित संसद के दोनों सदनों में रखवाते हैं जिनमें आयोग की सलाह नहीं मानी गई और उसके कारण।
7. UPSC की सीमाएँ एवं भूमिका
- परामर्शदात्री निकाय: सलाह बाध्यकारी नहीं — सर्वोच्च न्यायालय ने ए.एन. डिसिल्वा (1962) में कहा कि अनु. 320(3) निर्देशात्मक (directory) है, आज्ञापक नहीं; परामर्श न लेने पर भी कार्रवाई अवैध नहीं, और सिविल सेवक को कोई उपचार नहीं।
- परामर्श की आवश्यकता नहीं: (i) पिछड़े वर्गों हेतु नियुक्तियों/पदों में आरक्षण (अनु. 16(4)); (ii) अनु. 335 के तहत SC/ST के दावों पर विचार।
- राष्ट्रपति द्वारा अपवर्जन: राष्ट्रपति विनियमों द्वारा किसी पद/सेवा/विषय को UPSC के क्षेत्राधिकार से बाहर कर सकते हैं — ये विनियम संसद के समक्ष कम से कम 14 दिन रखे जाते हैं, संसद संशोधित/निरस्त कर सकती है।
- क्षेत्र से बाहर: अधिकरणों/आयोगों के अध्यक्षों व सदस्यों की नियुक्ति, उच्चतम राजनयिक पद, समूह ‘C’ व ‘D’ की अधिकांश सेवाएँ (SSC व अन्य द्वारा)।
- केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के गठन के बाद अनुशासनात्मक मामलों में UPSC की भूमिका सीमित हुई — दोनों से परामर्श पर ‘दोहराव’ की चर्चा।
- UPSC केवल भर्ती अभिकरण है — वर्गीकरण, वेतन, सेवा-शर्तें, कैडर प्रबंधन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) का दायित्व।
8. UPSC, राज्य लोक सेवा आयोग एवं संयुक्त आयोग की तुलना
| आधार | UPSC | राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) | संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) |
|---|---|---|---|
| स्वरूप | संवैधानिक | संवैधानिक | वैधानिक (संसद की विधि) |
| सृजन | संविधान (अनु. 315) | संविधान (अनु. 315) | संबंधित राज्यों के विधानमंडलों के संकल्प पर संसद द्वारा |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति | राज्यपाल | राष्ट्रपति |
| कार्यकाल | 6 वर्ष / 65 वर्ष | 6 वर्ष / 62 वर्ष | 6 वर्ष / 62 वर्ष |
| हटाना | राष्ट्रपति (अनु. 317) | राष्ट्रपति (राज्यपाल केवल निलंबित कर सकते हैं) | राष्ट्रपति |
| त्यागपत्र | राष्ट्रपति | राज्यपाल | राष्ट्रपति |
| प्रतिवेदन | राष्ट्रपति → संसद | राज्यपाल → विधानमंडल | प्रत्येक संबंधित राज्यपाल → विधानमंडल |
उदाहरण: 1966 में पंजाब पुनर्गठन के बाद पंजाब व हरियाणा हेतु अल्पकालिक संयुक्त आयोग बना था। UPSC राज्यपाल के अनुरोध व राष्ट्रपति के अनुमोदन से किसी राज्य की आवश्यकताएँ भी पूरी कर सकता है। राजस्थान का विवरण राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में पढ़ें।
संबंधित: संवैधानिक, वैधानिक व नियामक निकायों में अंतर | राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) | निर्वाचन आयोग: अनुच्छेद 324 | नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण | हल करने की कुंजी |
|---|---|---|
| अनुच्छेद-मिलान | 315, 317, 319, 320, 323 | खंड 2 |
| हटाना | SC की जाँच, सलाह बाध्यकारी | खंड 4 |
| सेवानिवृत्ति प्रतिबंध | अध्यक्ष बनाम सदस्य | खंड 5 |
| सीमाएँ | परामर्श बाध्यकारी नहीं | खंड 7 |
| तुलना | UPSC बनाम SPSC बनाम JSPSC | खंड 8 |
🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)
संघ लोक सेवा आयोग का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
संविधान के भाग 14 में अनु. 315 से 323 तक; अनु. 315 संघ व राज्यों के लोक सेवा आयोगों का प्रावधान करता है।
UPSC के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है?
राष्ट्रपति — कम से कम आधे सदस्यों का भारत/राज्य सरकार के अधीन 10 वर्ष का सेवा-अनुभव आवश्यक है।
UPSC के सदस्य को कैसे हटाया जाता है?
अनु. 317 के तहत राष्ट्रपति द्वारा — कदाचार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद; दिवालियापन, सवेतन बाहरी नियोजन या अशक्तता पर सीधे।
क्या UPSC की सलाह सरकार पर बाध्यकारी है?
नहीं — UPSC परामर्शदात्री निकाय है; सलाह न मानने पर सरकार को कारण सहित ज्ञापन संसद में रखना होता है (अनु. 323)।
राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों को कौन हटाता है?
राष्ट्रपति — यद्यपि उनकी नियुक्ति राज्यपाल करते हैं; राज्यपाल जाँच के दौरान केवल निलंबित कर सकते हैं।
📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)
संघ लोक सेवा आयोग का प्रावधान संविधान के किस भाग में है?
(A) भाग 15 (B) भाग 14 (C) भाग 18 (D) भाग 9
✅ उत्तर: (B) भाग 14 — अनु. 315–323।
UPSC के सदस्य का कार्यकाल —
(A) 6 वर्ष या 65 वर्ष (B) 5 वर्ष या 62 वर्ष (C) 6 वर्ष या 62 वर्ष (D) 5 वर्ष या 65 वर्ष
✅ उत्तर: (A) 6 वर्ष या 65 वर्ष — SPSC — 6 वर्ष या 62 वर्ष।
कदाचार के आधार पर UPSC सदस्य को हटाने से पहले जाँच कौन करता है?
(A) CVC (B) संसद की समिति (C) सर्वोच्च न्यायालय (D) उच्च न्यायालय
✅ उत्तर: (C) सर्वोच्च न्यायालय — अनु. 317 — सलाह बाध्यकारी।
राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को हटाता कौन है?
(A) राज्यपाल (B) मुख्यमंत्री (C) राज्य विधानसभा (D) राष्ट्रपति
✅ उत्तर: (D) राष्ट्रपति — नियुक्ति राज्यपाल, हटाना राष्ट्रपति।
भारत में लोक सेवा आयोग का गठन पहली बार कब हुआ?
(A) 1 अक्टूबर 1926 (B) 1 अप्रैल 1937 (C) 26 जनवरी 1950 (D) 15 अगस्त 1947
✅ उत्तर: (A) 1 अक्टूबर 1926 — ली आयोग की अनुशंसा पर।
सेवानिवृत्ति के बाद UPSC का अध्यक्ष —
(A) SPSC का अध्यक्ष बन सकता है (B) भारत/राज्य सरकार के अधीन किसी नियोजन हेतु अपात्र है (C) राज्यपाल नहीं बन सकता, पर मंत्री बन सकता है (D) केवल CAG बन सकता है
✅ उत्तर: (B) भारत/राज्य सरकार के अधीन किसी नियोजन हेतु अपात्र है — अनु. 319(a)।
UPSC के कार्यों का उल्लेख किस अनुच्छेद में है?
(A) अनु. 315 (B) अनु. 318 (C) अनु. 320 (D) अनु. 323
✅ उत्तर: (C) अनु. 320 — भर्ती व परामर्श।
संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) का गठन कौन करता है?
(A) राष्ट्रपति स्वयं (B) संबंधित राज्यपाल (C) UPSC (D) संसद — संबंधित राज्यों के अनुरोध पर
✅ उत्तर: (D) संसद — संबंधित राज्यों के अनुरोध पर — यह वैधानिक निकाय है।
UPSC अपना वार्षिक प्रतिवेदन किसे सौंपता है?
(A) प्रधानमंत्री (B) राष्ट्रपति (C) लोकसभा अध्यक्ष (D) कार्मिक मंत्री
✅ उत्तर: (B) राष्ट्रपति — अनु. 323।
UPSC से परामर्श आवश्यक नहीं है —
(A) पिछड़े वर्गों हेतु आरक्षण के मामले में (B) भर्ती की पद्धति (C) अनुशासनात्मक मामले (D) पदोन्नति के सिद्धांत
✅ उत्तर: (A) पिछड़े वर्गों हेतु आरक्षण के मामले में — अनु. 16(4) व 335।
⚡ One-Liner Revision (Key Facts)
- UPSC — अनु. 315–323, भाग 14
- लोक सेवा आयोग गठन — 1 अक्टूबर 1926
- ली आयोग — 1924
- कार्यकाल — 6 वर्ष / 65 वर्ष
- SPSC कार्यकाल — 6 वर्ष / 62 वर्ष
- हटाना — अनु. 317
- सेवानिवृत्ति प्रतिबंध — अनु. 319
- कार्य — अनु. 320
- वार्षिक प्रतिवेदन — अनु. 323
- अध्यक्ष (2025 से) — अजय कुमार
✅ परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु (Key Points)
- UPSC व SPSC संवैधानिक, JSPSC वैधानिक।
- सदस्य संख्या संविधान में नहीं — राष्ट्रपति तय करते हैं।
- SC की सलाह (अनु. 317) राष्ट्रपति पर बाध्यकारी — अनु. 143 के विपरीत।
- UPSC की सलाह सरकार पर बाध्यकारी नहीं — ए.एन. डिसिल्वा (1962)।
- UPSC भर्ती अभिकरण है; सेवा-प्रबंधन DoPT का कार्य।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- SPSC सदस्य को राज्यपाल नहीं, राष्ट्रपति हटाते हैं।
- SPSC की आयु-सीमा 62, UPSC की 65।
- UPSC सदस्य सेवानिवृत्ति के बाद UPSC/SPSC का अध्यक्ष बन सकता है — अध्यक्ष कुछ नहीं बन सकता।
- JSPSC के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
- 1926 का आयोग ‘लोक सेवा आयोग’ था, ‘संघीय’ 1937 में, ‘संघ’ 1950 में।
🧠 याद रखने की ट्रिक (Memory Tricks)
- “315 बनाओ, 316 नियुक्त करो, 317 हटाओ, 319 रोक लगाओ, 320 काम दो, 323 रिपोर्ट लो”।
- इतिहास — “26 में लोक, 37 में संघीय, 50 में संघ”।
- “राज्यपाल लाए, राष्ट्रपति हटाए” — SPSC।
- “आधे सदस्य, दस साल सरकारी”।
- “UPSC 65, राज्य 62” — जैसे SC 65, HC 62।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
अनु. 317 (हटाना) और अनु. 319 (सेवानिवृत्ति के बाद नियोजन) — ये दो अनुच्छेद RAS व RPSC परीक्षाओं में सर्वाधिक पूछे गए हैं। खंड 5 की तालिका ‘कौन क्या बन सकता है’ याद करें। UPSC बनाम SPSC बनाम JSPSC की तुलना (खंड 8) से कथन-आधारित प्रश्न बनते हैं।
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): गठन, कार्य एवं संवैधानिक सुरक्षा पर अपनी तैयारी परखने के लिए:
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- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
- CVC, CIC एवं लोकपाल
- सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र
- समानता का अधिकार: अनु. 14–18
- राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB)
📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- भारत का संविधान — भाग 14 (अनु. 315–323), अनु. 16(4), 335, 378।
- संघ लोक सेवा आयोग (परामर्श से छूट) विनियम, 1958; upsc.gov.in — इतिहास व वार्षिक प्रतिवेदन।
- भारत संघ बनाम ए.एन. डिसिल्वा (1962); ली आयोग रिपोर्ट (1924)।
- कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय — UPSC नियुक्ति अधिसूचनाएँ (2025)।

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Q1. संघ लोक सेवा आयोग का प्रावधान संविधान के किस भाग में है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. UPSC के सदस्य का कार्यकाल —
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अनु. 315 से 323।
6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु।
अनु. 317।
नहीं — परामर्शदात्री।
अजय कुमार (मई 2025 से)।
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