केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) एवं लोकपाल
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स्रोत आधार: भारत का संविधान (मूल पाठ व नवीनतम संशोधन), RPSC RAS, UPSC CSE एवं राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं का आधिकारिक पाठ्यक्रम। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) एवं लोकपाल
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⚡ Quick Answer: भारत में सुशासन व भ्रष्टाचार-नियंत्रण की तीन प्रमुख वैधानिक संस्थाएँ हैं — (1) केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC): संथानम समिति की अनुशंसा पर फ़रवरी 1964 में कार्यकारी संकल्प से बना, CVC अधिनियम, 2003 से वैधानिक; केंद्र सरकार के अधिकारियों के भ्रष्टाचार पर निगरानी व CBI के भ्रष्टाचार-मामलों का अधीक्षण; केंद्रीय सतर्कता आयुक्त + अधिकतम 2 सतर्कता आयुक्त; कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष। (2) केंद्रीय सूचना आयोग (CIC): सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 से; मुख्य सूचना आयुक्त + अधिकतम 10 सूचना आयुक्त; RTI की द्वितीय अपील व शिकायतें सुनता है; 2019 संशोधन के बाद कार्यकाल केंद्र सरकार निर्धारित करती है — नियमों में 3 वर्ष। (3) लोकपाल: लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 (16 जनवरी 2014 से) — अध्यक्ष + अधिकतम 8 सदस्य (50% न्यायिक); प्रधानमंत्री सहित लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायतें; कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष; प्रथम लोकपाल न्या. पिनाकी चंद्र घोष (2019), वर्तमान अध्यक्ष न्या. ए.एम. खानविलकर। तीनों में हटाने हेतु सर्वोच्च न्यायालय की जाँच आवश्यक है।
🕒 करेंट अपडेट (अक्टूबर 2026 तक): न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर मार्च 2024 से लोकपाल के अध्यक्ष हैं। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 की धारा 44(3) ने RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) में संशोधन कर व्यक्तिगत सूचना की छूट को व्यापक किया — इस पर पारदर्शिता कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई; DPDP नियम नवंबर 2025 में अधिसूचित हुए। सूचना आयोगों में रिक्तियों पर सर्वोच्च न्यायालय समय-समय पर निर्देश देता रहा है — अद्यतन पदधारक व स्थिति करेंट अफेयर्स से जाँचें। संविधान संशोधन व न्यायिक व्याख्याएँ बदलती रहती हैं — परीक्षा से पहले करेंट अफेयर्स से मिलाएँ।
📌 CVC, CIC एवं लोकपाल — एक नज़र में
- CVC: 1964 (संकल्प) → CVC अधिनियम, 2003
- CVC चयन समिति: PM, गृह मंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता
- CVC कार्यकाल: 4 वर्ष या 65 वर्ष
- CIC: RTI अधिनियम, 2005 — 12 अक्टूबर 2005
- CIC कार्यकाल: 3 वर्ष (2019 के नियम) / 65 वर्ष
- लोकपाल: अधिनियम 2013 — 16 जनवरी 2014 से
- लोकपाल कार्यकाल: 5 वर्ष या 70 वर्ष
- वर्तमान लोकपाल: न्या. ए.एम. खानविलकर
1. भ्रष्टाचार-विरोधी एवं पारदर्शिता संस्थाओं की आवश्यकता
सुशासन के तीन स्तंभ हैं — पारदर्शिता, जवाबदेही और सत्यनिष्ठा। भारत में इन्हें सुनिश्चित करने हेतु बहुस्तरीय तंत्र है: CVC (केंद्र सरकार में सतर्कता), CBI (अन्वेषण), लोकपाल/लोकायुक्त (उच्च पदस्थ लोक सेवकों के विरुद्ध लोकपाल-संस्था), सूचना आयोग (नागरिक का सूचना अधिकार) और CAG (लेखा-परीक्षा)। इनका कानूनी आधार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित — रिश्वत देना भी अपराध, लोक सेवक की जाँच हेतु पूर्व अनुमति की धारा 17A) है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज नारायण (1975) व एस.पी. गुप्ता (1981) में सूचना के अधिकार को अनु. 19(1)(a) का भाग माना।
| संस्था | आधार | प्रकृति |
|---|---|---|
| CVC | CVC अधिनियम, 2003 | वैधानिक |
| CIC | RTI अधिनियम, 2005 | वैधानिक |
| लोकपाल | लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 | वैधानिक |
| CBI | गृह मंत्रालय संकल्प (1963); शक्तियाँ — DSPE अधिनियम, 1946 | कार्यकारी |
2. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)
विकास-क्रम
- संथानम समिति (1962–64) — भ्रष्टाचार निवारण पर; इसकी अनुशंसा पर फ़रवरी 1964 में CVC का गठन (कार्यकारी संकल्प)।
- विनीत नारायण बनाम भारत संघ (1997) — ‘जैन हवाला’ मामला: CVC को वैधानिक दर्जा देने व CBI के अधीक्षण का निर्देश।
- 1998 में अध्यादेश; CVC अधिनियम, 2003 (सितंबर 2003) — वैधानिक दर्जा।
- 2004 — लोकहित प्रकटीकरण व सूचक संरक्षण (PIDPI) संकल्प के तहत ‘व्हिसलब्लोअर’ शिकायतों हेतु नामित एजेंसी।
| पहलू | प्रावधान |
|---|---|
| संरचना | केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (अध्यक्ष) + अधिकतम 2 सतर्कता आयुक्त |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति — अपने हस्ताक्षर व मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा |
| चयन समिति | प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), केंद्रीय गृह मंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता |
| कार्यकाल | 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु — जो पहले हो |
| सेवानिवृत्ति के बाद | केंद्र/राज्य सरकार के अधीन आगे नियोजन हेतु अपात्र |
| हटाना | राष्ट्रपति — कदाचार/असमर्थता पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद; दिवालियापन, नैतिक अधमता के अपराध, सवेतन बाहरी नियोजन, अशक्तता पर सीधे |
| प्रतिवेदन | वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को → संसद में |
कार्य एवं शक्तियाँ
- केंद्र सरकार, केंद्रीय PSU, सार्वजनिक बैंकों आदि के निर्दिष्ट श्रेणी के अधिकारियों (जैसे समूह ‘A’) के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराधों की जाँच/जाँच करवाना।
- भ्रष्टाचार मामलों में CBI (दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना) के कार्य का अधीक्षण व अन्वेषण की प्रगति की समीक्षा; CBI में पुलिस अधीक्षक व ऊपर के पदों पर नियुक्ति हेतु समिति की अध्यक्षता।
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक के चयन हेतु समिति का अध्यक्ष।
- मंत्रालयों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों (CVO) के माध्यम से सतर्कता प्रशासन की निगरानी।
- जाँच में सिविल न्यायालय की शक्तियाँ।
- प्रतिवर्ष सतर्कता जागरूकता सप्ताह — सरदार पटेल जयंती (31 अक्टूबर) वाले सप्ताह में।
सीमा: CVC स्वयं अन्वेषण एजेंसी नहीं — CBI व CVO पर निर्भर; इसकी सलाह सामान्यतः बाध्यकारी नहीं; संयुक्त सचिव से ऊपर के अधिकारियों की जाँच में पूर्व अनुमति की शर्त (धारा 17A, PC अधिनियम) से विलंब।
3. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC)
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 15 जून 2005 को पारित हुआ और 12 अक्टूबर 2005 से पूर्णतः लागू हुआ। राजस्थान में MKSS (मज़दूर किसान शक्ति संगठन) — अरुणा रॉय, निखिल डे — के आंदोलन (1990 का दशक) ने RTI की नींव रखी।
| पहलू | प्रावधान |
|---|---|
| संरचना (धारा 12) | मुख्य सूचना आयुक्त + अधिकतम 10 सूचना आयुक्त |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति |
| चयन समिति | प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा में विपक्ष के नेता, PM द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री |
| योग्यता | विधि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंचार या प्रशासन में व्यापक ज्ञान व अनुभव वाले प्रख्यात व्यक्ति; सांसद/विधायक नहीं, लाभ का पद नहीं, राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं |
| कार्यकाल | RTI (संशोधन) अधिनियम, 2019 — केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित; RTI नियम, 2019 में 3 वर्ष (65 वर्ष की आयु तक); पुनर्नियुक्ति नहीं (मूल अधिनियम में 5 वर्ष) |
| वेतन | 2019 से केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित (पहले CEC/EC के समान) |
| हटाना | राष्ट्रपति — कदाचार/असमर्थता पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद |
| प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त | वजाहत हबीबुल्लाह (2005) |
RTI प्रक्रिया एवं CIC की शक्तियाँ
| चरण | समय-सीमा |
|---|---|
| लोक सूचना अधिकारी (PIO) द्वारा सूचना | 30 दिन; जीवन व स्वतंत्रता से जुड़ी सूचना — 48 घंटे |
| प्रथम अपील — प्रथम अपीलीय अधिकारी | 30 दिन में दायर; 30–45 दिन में निपटान |
| द्वितीय अपील — सूचना आयोग | 90 दिन में दायर |
| PIO पर दंड (धारा 20) | ₹250 प्रतिदिन, अधिकतम ₹25,000; अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफ़ारिश |
छूट: धारा 8 (राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता, विदेशी संबंध, मंत्रिमंडल के कागज़ात, व्यक्तिगत सूचना आदि); धारा 24 — दूसरी अनुसूची की सुरक्षा व गुप्तचर एजेंसियाँ बाहर, पर भ्रष्टाचार व मानवाधिकार उल्लंघन की सूचना देनी होगी। राज्य सूचना आयोग — राज्यपाल द्वारा, मुख्यमंत्री, विधानसभा में विपक्ष के नेता व एक मंत्री की समिति की सिफ़ारिश पर; विवरण राजस्थान सूचना आयोग में।
🎯 CVC, CIC एवं लोकपाल — अभ्यास
CVC, CIC व लोकपाल की चयन समितियाँ, कार्यकाल (4/3/5 वर्ष) और स्थापना-वर्ष RAS, CET, पटवारी व व्याख्याता परीक्षाओं के सर्वाधिक पूछे जाने वाले प्रश्न हैं:
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
- Rajasthan CET (स्नातक) फाइनल मेगा टेस्ट सीरीज़
- RPSC प्रथम श्रेणी व्याख्याता 2026 टेस्ट सीरीज़
- RAS Prelims फाइनल रिवीजन टेस्ट सीरीज़
सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़ | रोज़ाना अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स
4. लोकपाल: इतिहास एवं संरचना
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1809 | स्वीडन में ओम्बुड्समैन संस्था |
| 1963 | डॉ. एल.एम. सिंघवी ने ‘लोकपाल’ व ‘लोकायुक्त’ शब्द प्रयोग किए |
| 1966 | प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (मोरारजी देसाई) — केंद्र में लोकपाल व राज्यों में लोकायुक्त की अनुशंसा |
| 1968 | प्रथम लोकपाल विधेयक — चौथी लोकसभा में पारित, पर लोकसभा भंग होने से व्यपगत; 2011 तक कई बार विफल |
| 2011 | अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में जनलोकपाल आंदोलन |
| दिसंबर 2013 | लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 पारित; 1 जनवरी 2014 राष्ट्रपति की स्वीकृति; 16 जनवरी 2014 से लागू |
| मार्च 2019 | प्रथम लोकपाल — न्या. पिनाकी चंद्र घोष |
| मार्च 2024 | न्या. ए.एम. खानविलकर — अध्यक्ष |
| पहलू | प्रावधान |
|---|---|
| संरचना | अध्यक्ष + अधिकतम 8 सदस्य — इनमें 50% न्यायिक; सदस्यों में कम से कम 50% SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक/महिला |
| अध्यक्ष की योग्यता | पूर्व CJI, या SC का पूर्व/वर्तमान न्यायाधीश, या निर्धारित योग्यता वाला प्रख्यात व्यक्ति |
| चयन समिति | प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, CJI या उनके द्वारा नामित SC न्यायाधीश, पहले चार द्वारा अनुशंसित व राष्ट्रपति द्वारा नामित प्रख्यात विधिवेत्ता; सहायता हेतु खोज समिति |
| कार्यकाल | 5 वर्ष या 70 वर्ष |
| हटाना | राष्ट्रपति — कदाचार पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद; संदर्भ राष्ट्रपति स्वयं या कम से कम 100 सांसदों की याचिका पर |
| सेवानिवृत्ति के बाद | पुनर्नियुक्ति नहीं; राजनयिक/राज्यपाल जैसे पद नहीं; 5 वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकते |
| संगठन | जाँच शाखा (Inquiry Wing) व अभियोजन शाखा (Prosecution Wing); विशेष न्यायालय |
5. लोकपाल का क्षेत्राधिकार एवं प्रक्रिया
- प्रधानमंत्री — शामिल, पर अपवाद: अंतरराष्ट्रीय संबंध, बाह्य व आंतरिक सुरक्षा, लोक व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष से जुड़े आरोप नहीं; PM के विरुद्ध जाँच हेतु लोकपाल की पूर्ण पीठ में कम से कम 2/3 सदस्यों की स्वीकृति आवश्यक; जाँच बंद कमरे (in camera) में।
- मंत्री व सांसद — पर संसद में दिए भाषण/मत के लिए नहीं (अनु. 105)।
- केंद्र सरकार के समूह A, B, C, D के अधिकारी (समूह C व D के मामलों में CVC से प्रारंभिक जाँच)।
- केंद्रीय अधिनियम से बने निकायों, सरकारी कंपनियों, सरकार से वित्तपोषित संस्थाओं के अधिकारी।
- विदेशी अंशदान (₹10 लाख से अधिक) प्राप्त करने वाली संस्थाओं (NGO) के अधिकारी।
- शिकायत-अवधि: कथित अपराध के 7 वर्ष के भीतर।
- शक्तियाँ: CBI सहित किसी भी एजेंसी को मामले सौंपने व उनका अधीक्षण; लोकपाल द्वारा भेजे मामलों की जाँच करने वाले CBI अधिकारियों का स्थानांतरण लोकपाल की अनुमति से; भ्रष्ट तरीके से अर्जित संपत्ति की कुर्की; झूठी शिकायत पर दंड।
- CBI निदेशक का चयन: इसी अधिनियम ने DSPE अधिनियम में संशोधन कर समिति बनाई — प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता, CJI (या नामित न्यायाधीश)।
6. लोकायुक्त
- 2013 के अधिनियम की धारा 63 — प्रत्येक राज्य अधिनियम लागू होने के 365 दिन के भीतर विधि द्वारा लोकायुक्त स्थापित करेगा; संरचना, नियुक्ति व क्षेत्राधिकार राज्य तय करेंगे।
- प्रथम लोकायुक्त: महाराष्ट्र (1971); ओडिशा ने 1970 में अधिनियम पारित किया पर संस्था 1983 में बनी।
- राजस्थान: राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 — 1973 में लोकायुक्त संस्था; प्रथम लोकायुक्त न्या. आई.डी. दुआ; विस्तार से राजस्थान लोकायुक्त।
- राज्यों में लोकायुक्त की शक्तियाँ भिन्न — कुछ में मुख्यमंत्री शामिल, कुछ में नहीं; कई के पास स्वतंत्र अन्वेषण तंत्र नहीं।
7. CVC, CIC एवं लोकपाल: तुलनात्मक तालिका
| आधार | CVC | CIC | लोकपाल |
|---|---|---|---|
| अधिनियम | CVC अधिनियम, 2003 | RTI अधिनियम, 2005 | लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 |
| संरचना | 1 + अधिकतम 2 | 1 + अधिकतम 10 | 1 + अधिकतम 8 |
| चयन समिति अध्यक्ष | प्रधानमंत्री | प्रधानमंत्री | प्रधानमंत्री |
| समिति के अन्य सदस्य | गृह मंत्री, LS में विपक्ष के नेता | LS में विपक्ष के नेता, नामित कैबिनेट मंत्री | LS अध्यक्ष, LS में विपक्ष के नेता, CJI/नामित न्यायाधीश, प्रख्यात विधिवेत्ता |
| कार्यकाल | 4 वर्ष / 65 वर्ष | 3 वर्ष / 65 वर्ष (2019 के नियम) | 5 वर्ष / 70 वर्ष |
| हटाना | राष्ट्रपति — SC की जाँच | राष्ट्रपति — SC की जाँच | राष्ट्रपति — SC की जाँच |
| मुख्य कार्य | सतर्कता, CBI का अधीक्षण | RTI अपीलें व शिकायतें | भ्रष्टाचार की शिकायतें — जाँच व अभियोजन |
| दंड-शक्ति | नहीं — सलाह | PIO पर ₹25,000 तक | अभियोजन, संपत्ति कुर्की |
| प्रतिवेदन | राष्ट्रपति | केंद्र सरकार → संसद | राष्ट्रपति |
सामान्य चुनौतियाँ
- चयन समितियों में सरकार का बहुमत; विपक्ष के नेता के अभाव में ‘सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता’ का प्रावधान।
- सूचना आयोगों में रिक्तियाँ व लंबित अपीलें — अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ (2019) में समयबद्ध नियुक्ति के निर्देश।
- 2019 के संशोधन से सूचना आयुक्तों की स्वायत्तता पर प्रश्न।
- लोकपाल को प्राप्त शिकायतों में बड़ी संख्या निर्धारित प्रारूप में न होने से निरस्त; अपनी अन्वेषण शाखा का धीमा विकास।
- व्हिसलब्लोअर संरक्षण अधिनियम, 2014 अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं।
अन्य निकायों से तुलना संवैधानिक, वैधानिक व नियामक निकायों में अंतर में करें।
संबंधित: संवैधानिक, वैधानिक व नियामक निकायों में अंतर | राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग | नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) | स्वतंत्रता का अधिकार: अनु. 19–22
📊 प्रश्न-पैटर्न विश्लेषण — किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
| प्रश्न का प्रकार | उदाहरण | हल करने की कुंजी |
|---|---|---|
| स्थापना-वर्ष | CVC 1964/2003, RTI 2005, लोकपाल 2013 | खंड 2–4 |
| चयन समिति | कौन किस समिति में | खंड 7 |
| कार्यकाल | 4/3/5 वर्ष | खंड 7 |
| RTI समय-सीमा | 30 दिन, 48 घंटे, ₹25,000 | खंड 3 |
| लोकपाल क्षेत्राधिकार | PM — अपवाद व 2/3 | खंड 5 |
🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)
केंद्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना कब हुई?
फ़रवरी 1964 में संथानम समिति की अनुशंसा पर कार्यकारी संकल्प से; CVC अधिनियम, 2003 से इसे वैधानिक दर्जा मिला।
मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल कितना है?
RTI (संशोधन) अधिनियम, 2019 के बाद केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित — नियमों के अनुसार 3 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक।
लोकपाल की चयन समिति में कौन होते हैं?
प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, CJI या नामित SC न्यायाधीश और एक प्रख्यात विधिवेत्ता।
क्या प्रधानमंत्री लोकपाल के क्षेत्राधिकार में आते हैं?
हाँ, पर अंतरराष्ट्रीय संबंध, सुरक्षा, लोक व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष से जुड़े आरोप बाहर हैं; जाँच हेतु पूर्ण पीठ के 2/3 सदस्यों की स्वीकृति और बंद कमरे में सुनवाई आवश्यक।
भारत के प्रथम लोकपाल कौन थे?
न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष — मार्च 2019 में नियुक्त; वर्तमान अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर (मार्च 2024 से)।
📝 अभ्यास MCQ (10 प्रश्न, उत्तर-व्याख्या सहित)
केंद्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना किस समिति की अनुशंसा पर हुई?
(A) संथानम समिति (B) सरकारिया आयोग (C) वोहरा समिति (D) होता समिति
✅ उत्तर: (A) संथानम समिति — फ़रवरी 1964।
CVC को वैधानिक दर्जा किस वर्ष मिला?
(A) 1964 (B) 1998 (C) 2005 (D) 2003
✅ उत्तर: (D) 2003 — CVC अधिनियम, 2003।
केंद्रीय सतर्कता आयुक्त का कार्यकाल —
(A) 5 वर्ष या 65 वर्ष (B) 4 वर्ष या 65 वर्ष (C) 3 वर्ष या 65 वर्ष (D) 6 वर्ष या 65 वर्ष
✅ उत्तर: (B) 4 वर्ष या 65 वर्ष — CVC अधिनियम, 2003।
CVC की चयन समिति में कौन शामिल है?
(A) CJI (B) लोकसभा अध्यक्ष (C) केंद्रीय गृह मंत्री (D) राज्यसभा के सभापति
✅ उत्तर: (C) केंद्रीय गृह मंत्री — PM, गृह मंत्री, LS में विपक्ष के नेता।
सूचना का अधिकार अधिनियम पूर्णतः कब लागू हुआ?
(A) 12 अक्टूबर 2005 (B) 15 जून 2005 (C) 26 जनवरी 2006 (D) 1 जनवरी 2005
✅ उत्तर: (A) 12 अक्टूबर 2005 — 15 जून 2005 को पारित।
RTI के अंतर्गत लोक सूचना अधिकारी पर अधिकतम कितना जुर्माना लगाया जा सकता है?
(A) ₹10,000 (B) ₹50,000 (C) ₹25,000 (D) ₹1,00,000
✅ उत्तर: (C) ₹25,000 — ₹250 प्रतिदिन।
लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम कब से लागू हुआ?
(A) 1 जनवरी 2014 (B) 16 जनवरी 2014 (C) 26 जनवरी 2014 (D) 19 मार्च 2019
✅ उत्तर: (B) 16 जनवरी 2014 — 1 जनवरी 2014 — राष्ट्रपति की स्वीकृति।
लोकपाल में अध्यक्ष के अलावा अधिकतम कितने सदस्य हो सकते हैं?
(A) 10 (B) 6 (C) 2 (D) 8
✅ उत्तर: (D) 8 — 50% न्यायिक।
‘लोकपाल’ शब्द किसने दिया?
(A) एल.एम. सिंघवी (B) मोरारजी देसाई (C) अन्ना हज़ारे (D) के. संथानम
✅ उत्तर: (A) एल.एम. सिंघवी — 1963।
भारत में सर्वप्रथम लोकायुक्त संस्था किस राज्य में स्थापित हुई?
(A) राजस्थान (B) महाराष्ट्र (C) ओडिशा (D) कर्नाटक
✅ उत्तर: (B) महाराष्ट्र — 1971; राजस्थान — 1973।
⚡ One-Liner Revision (Key Facts)
- CVC गठन — फ़रवरी 1964 — संथानम समिति
- CVC अधिनियम — 2003
- CVC कार्यकाल — 4 वर्ष / 65 वर्ष
- RTI लागू — 12 अक्टूबर 2005
- प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त — वजाहत हबीबुल्लाह
- RTI संशोधन — 2019 — कार्यकाल 3 वर्ष
- लोकपाल अधिनियम लागू — 16 जनवरी 2014
- प्रथम लोकपाल — न्या. पिनाकी चंद्र घोष (2019)
- लोकपाल कार्यकाल — 5 वर्ष / 70 वर्ष
- प्रथम लोकायुक्त — महाराष्ट्र, 1971
✅ परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु (Key Points)
- तीनों संस्थाएँ वैधानिक हैं, संवैधानिक नहीं।
- तीनों की चयन समितियों के अध्यक्ष प्रधानमंत्री।
- CVC स्वयं अन्वेषण एजेंसी नहीं — CBI का अधीक्षण करता है।
- CBI निदेशक की चयन समिति — PM, विपक्ष के नेता, CJI (लोकपाल अधिनियम से)।
- लोकपाल में 50% न्यायिक सदस्य और 50% आरक्षित वर्ग/महिला।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- CVC समिति में गृह मंत्री; CIC समिति में नामित कैबिनेट मंत्री; लोकपाल समिति में CJI व लोकसभा अध्यक्ष।
- CIC का कार्यकाल अब 3 वर्ष — मूल RTI अधिनियम में 5 वर्ष।
- लोकपाल अधिनियम 2013 का, पर लागू 2014 में; प्रथम लोकपाल 2019 में।
- प्रथम लोकायुक्त महाराष्ट्र — अधिनियम पहले पारित करने वाला ओडिशा।
- CVC की स्थापना संथानम समिति से — के. संथानम द्वितीय वित्त आयोग के अध्यक्ष भी थे।
🧠 याद रखने की ट्रिक (Memory Tricks)
- कार्यकाल — “CVC 4, CIC 3, लोकपाल 5” (चार-तीन-पाँच)।
- सदस्य — “CVC 1+2, CIC 1+10, लोकपाल 1+8”।
- वर्ष — “64 संकल्प, 2003 कानून; 2005 सूचना; 2013 लोकपाल”।
- RTI — “30 दिन, 48 घंटे, 90 दिन, 25 हज़ार”।
- “सिंघवी ने नाम दिया, देसाई ने सुझाया, हज़ारे ने जगाया, घोष पहले बने”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
इस टॉपिक की कुंजी तुलनात्मक तालिका (खंड 7) है — चयन समितियों के सदस्यों को आपस में मिलाकर भ्रामक विकल्प बनाए जाते हैं। राजस्थान की परीक्षाओं में RTI आंदोलन (MKSS, अरुणा रॉय) और राजस्थान लोकायुक्त (1973) अवश्य याद रखें। 2019 के RTI संशोधन के बाद पुरानी पुस्तकों के ‘5 वर्ष’ वाले उत्तर से सावधान रहें।
✍️ अभ्यास करें — टेस्ट सीरीज़, क्विज़ व करेंट अफेयर्स
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) एवं लोकपाल पर अपनी तैयारी परखने के लिए:
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पूरी भारतीय राजव्यवस्था इकाई: भारतीय राजव्यवस्था — सभी नोट्स | राजस्थान राजव्यवस्था: राजस्थान राजव्यवस्था — सभी नोट्स | संवैधानिक संशोधन व न्यायिक निर्णयों के अपडेट: डेली करेंट अफेयर्स | सभी टेस्ट: सुयोग अकादमी टेस्ट सीरीज़
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- संवैधानिक, वैधानिक व नियामक निकायों में अंतर
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
- स्वतंत्रता का अधिकार: अनु. 19–22
- राजस्थान लोकायुक्त
- राजस्थान सूचना आयोग
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
- राजस्थान में RTI अधिनियम
📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003; भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 संशोधन)।
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005; RTI (संशोधन) अधिनियम, 2019 व RTI नियम, 2019; DPDP अधिनियम, 2023।
- लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013; विनीत नारायण (1997), अंजलि भारद्वाज (2019)।
- cvc.gov.in, cic.gov.in, lokpal.gov.in — संरचना व वार्षिक प्रतिवेदन।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. केंद्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना किस समिति की अनुशंसा पर हुई?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. CVC को वैधानिक दर्जा किस वर्ष मिला?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. केंद्रीय सतर्कता आयुक्त का कार्यकाल —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. CVC की चयन समिति में कौन शामिल है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. सूचना का अधिकार अधिनियम पूर्णतः कब लागू हुआ?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
फ़रवरी 1964; वैधानिक — 2003।
4 वर्ष या 65 वर्ष।
12 अक्टूबर 2005।
5 वर्ष या 70 वर्ष।
न्या. ए.एम. खानविलकर।
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