वाइगोत्स्की, कोहलबर्ग, एरिक्सन — ZPD, स्कैफ़ोल्डिंग, नैतिक विकास के 6 चरण, 8 मनोसामाजिक अवस्थाएँ
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: REET व RSSB REET मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम का बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र खंड; NCERT/NCF 2005, RTE अधिनियम 2009 व राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल प्रावधान। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: लेव वाइगोत्स्की (रूस) के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के अनुसार बच्चे का संज्ञानात्मक विकास सामाजिक अंतःक्रिया और संस्कृति के साधनों — विशेषकर भाषा — से होता है; बच्चा जो काम अकेले नहीं, पर किसी अधिक जानकार (MKO — More Knowledgeable Other) की मदद से कर सकता है, वह दायरा निकटस्थ विकास का क्षेत्र (ZPD) है, और उस क्षेत्र में दी जाने वाली अस्थायी, धीरे-धीरे हटाई जाने वाली सहायता पाड़ / ढाँचा (Scaffolding) कहलाती है — यह शब्द वाइगोत्स्की ने नहीं, बाद में वुड, ब्रूनर और रॉस ने दिया। वाइगोत्स्की के लिए बच्चे की स्वयं से बातचीत निजी वाणी (Private Speech) है जो चिंतन को दिशा देती है; पियाजे इसे आत्म-केंद्रित वाणी मानते थे। लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक विकास के 3 स्तर और 6 चरण बताए — पूर्व-परंपरागत (1. दंड-आज्ञापालन, 2. स्वार्थ/विनिमय), परंपरागत (3. अच्छा लड़का-अच्छी लड़की, 4. कानून-व्यवस्था), उत्तर-परंपरागत (5. सामाजिक अनुबंध, 6. सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत); इनकी पहचान उत्तर से नहीं, तर्क से होती है (हाइन्ज़ दुविधा)। कैरल गिलिगन ने आलोचना की कि कोहलबर्ग का अध्ययन पुरुषों पर आधारित था और उसमें "न्याय" के स्थान पर स्त्रियों की "देखभाल की नैतिकता" की उपेक्षा हुई। एरिक एरिक्सन ने जीवन-भर की 8 मनोसामाजिक अवस्थाएँ दीं, हर एक में एक संकट — विद्यालयी आयु (6–12) में परिश्रम बनाम हीनता और किशोरावस्था में पहचान बनाम भूमिका-भ्रम सबसे अधिक पूछे जाते हैं।
संक्षिप्त उत्तर
| सिद्धांतकार | सिद्धांत | मुख्य शब्द | एक पंक्ति |
|---|---|---|---|
| लेव वाइगोत्स्की | सामाजिक-सांस्कृतिक (Sociocultural) | ZPD, MKO, स्कैफ़ोल्डिंग, निजी वाणी, आंतरिकीकरण | सीखना पहले सामाजिक स्तर पर, फिर व्यक्तिगत स्तर पर |
| लॉरेंस कोहलबर्ग | नैतिक विकास | 3 स्तर, 6 चरण, हाइन्ज़ दुविधा | नैतिकता का स्तर निर्णय से नहीं, तर्क से |
| कैरल गिलिगन | कोहलबर्ग की आलोचना | देखभाल की नैतिकता (Ethic of Care) | स्त्रियों के नैतिक तर्क को कम आँका गया |
| एरिक एरिक्सन | मनोसामाजिक विकास | 8 अवस्थाएँ, संकट, पहचान-संकट | हर अवस्था का एक सामाजिक संकट, सफल समाधान से एक गुण |
| सिगमंड फ्रायड | मनोलैंगिक विकास | मौखिक, गुदा, लैंगिक (शिश्न), सुप्त, जननांगीय; इड-ईगो-सुपरईगो | बचपन के अनुभव व्यक्तित्व की नींव |
| यूरी ब्रोनफ़ेनब्रेनर | पारिस्थितिक तंत्र (Ecological Systems) | सूक्ष्म, मध्य, बाह्य, वृहद्, काल-तंत्र | बच्चा परस्पर जुड़े वातावरणीय तंत्रों के केंद्र में |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
REET लेवल 1 व 2, RSSB REET मुख्य परीक्षा और CTET के पाठ्यक्रम में "पियाजे, कोहलबर्ग और वाइगोत्स्की की संकल्पनाएँ — रचना और आलोचनात्मक परिप्रेक्ष्य" स्पष्ट रूप से लिखा है। वाइगोत्स्की से ZPD और स्कैफ़ोल्डिंग के कक्षा-अनुप्रयोग, कोहलबर्ग से कथन देकर चरण पहचानना और एरिक्सन से आयु देकर संकट पहचानना सबसे सामान्य प्रश्न हैं। पियाजे की तुलना के लिए पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत साथ में पढ़ें।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- REET लेवल 1 व लेवल 2 — बाल विकास
- RSSB REET मुख्य परीक्षा — शैक्षिक मनोविज्ञान
- CTET पेपर I व II
- RPSC/RSSB शिक्षक भर्ती — मनोविज्ञान खंड
प्रश्न कैसे आते हैं?
- ZPD/स्कैफ़ोल्डिंग की परिभाषा और कक्षा-उदाहरण
- पियाजे बनाम वाइगोत्स्की — भाषा, सामाजिक भूमिका, विकास-अधिगम संबंध
- कोहलबर्ग — किसी बच्चे का तर्क देकर चरण पहचानना
- कोहलबर्ग के स्तरों का क्रम; हाइन्ज़ दुविधा का उद्देश्य
- गिलिगन की आलोचना
- एरिक्सन — आयु/कक्षा देकर मनोसामाजिक संकट पहचानना
- ब्रोनफ़ेनब्रेनर — दिया गया संदर्भ किस तंत्र में आता है
3. वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत
लेव सेमेनोविच वाइगोत्स्की (1896–1934) सोवियत रूस के मनोवैज्ञानिक थे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक "थॉट एंड लैंग्वेज" (चिंतन और भाषा) है। उनके अनुसार बच्चे का विकास अकेले में नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के भीतर होता है। माता-पिता, शिक्षक, साथी और संस्कृति के साधन (भाषा, संख्याएँ, चिह्न, लेखन) बच्चे के चिंतन को आकार देते हैं।
3.1 मूल विचार
| संकल्पना | अर्थ | कक्षा-उदाहरण |
|---|---|---|
| सामाजिक अंतःक्रिया | हर उच्च मानसिक कार्य पहले दो व्यक्तियों के बीच (अंतर-मानसिक), फिर बच्चे के भीतर (अंतः-मानसिक) आता है | पहले शिक्षक के साथ मिलकर हल करना, फिर अकेले |
| आंतरिकीकरण (Internalisation) | सामाजिक रूप से सीखी गई बात को अपने भीतर आत्मसात करना | शिक्षक के बताए कदम बाद में बच्चा मन में दोहराता है |
| सांस्कृतिक साधन (Cultural Tools) | भाषा, संख्या-प्रणाली, नक्शे, लेखन — जो चिंतन के उपकरण हैं | गिनती के लिए उँगलियाँ, फिर अंक |
| निम्न व उच्च मानसिक कार्य | निम्न = जैविक (साधारण ध्यान, स्मृति); उच्च = संस्कृति से विकसित (तार्किक स्मृति, चयनात्मक ध्यान) | याद रखने के लिए सूची बनाना |
| अधिगम विकास को आगे ले जाता है | उचित शिक्षण विकास से आगे चलकर उसे खींचता है | बच्चे की वर्तमान क्षमता से थोड़ा कठिन, पर सहायता से संभव कार्य |
3.2 निकटस्थ विकास का क्षेत्र (ZPD — Zone of Proximal Development)
ZPD वह दूरी है जो बच्चे के वास्तविक विकास-स्तर (जो वह अकेले कर सकता है) और संभावित विकास-स्तर (जो वह किसी वयस्क या अधिक सक्षम साथी के मार्गदर्शन में कर सकता है) के बीच होती है।
| क्षेत्र | बच्चा क्या कर सकता है | शिक्षक का कार्य |
|---|---|---|
| ZPD से नीचे | अकेले कर सकता है | बार-बार वही देने से ऊब; नया नहीं सीखता |
| ZPD के भीतर | अकेले नहीं, पर सहायता से कर सकता है | यहीं शिक्षण सबसे प्रभावी — संकेत, प्रश्न, प्रदर्शन |
| ZPD से ऊपर | सहायता से भी नहीं कर सकता | अभी बहुत कठिन — निराशा |
उदाहरण: कक्षा 3 की रीना अकेले दो अंकों का हासिल वाला जोड़ नहीं कर पाती, पर शिक्षिका के "इकाई पहले जोड़ो, दस से ऊपर हुआ तो?" जैसे संकेतों से कर लेती है — यह कार्य उसके ZPD में है।
3.3 पाड़ / ढाँचा (Scaffolding)
ZPD में बच्चे को दी जाने वाली अस्थायी, आवश्यकता-आधारित सहायता, जिसे बच्चे की दक्षता बढ़ने पर धीरे-धीरे हटा लिया जाता है, स्कैफ़ोल्डिंग कहलाती है — जैसे भवन-निर्माण में लगाई गई बल्लियाँ भवन बनने पर हटा दी जाती हैं। ध्यान दें: यह विचार वाइगोत्स्की के ZPD से निकला है, पर "Scaffolding" शब्द वुड, ब्रूनर और रॉस ने दिया।
| स्कैफ़ोल्डिंग के रूप | उदाहरण |
|---|---|
| संकेत और सुराग (Hints, Cues) | "इस शब्द का पहला अक्षर देखो" |
| प्रश्न पूछना | "अगर 10 से ज़्यादा हो गया तो क्या करेंगे?" |
| प्रदर्शन (Modelling) | पहले शिक्षक एक प्रश्न करके दिखाता है |
| कार्य को छोटे भागों में बाँटना | निबंध से पहले केवल अनुच्छेद का ढाँचा |
| चार्ट, शब्द-भित्ति, ग्राफ़िक संयोजक | कहानी-लेखन के लिए "पात्र-स्थान-घटना" का चार्ट |
| सहायता घटाना (Fading) | धीरे-धीरे संकेत कम करते जाना |
3.4 MKO — अधिक जानकार अन्य
MKO कोई भी हो सकता है जिसकी समझ उस कार्य में बच्चे से अधिक हो — शिक्षक, माता-पिता, बड़ा भाई-बहन, सहपाठी या आज के संदर्भ में कोई सीखने का साधन। इसीलिए सहकारी अधिगम (Cooperative Learning), सहपाठी शिक्षण (Peer Tutoring) और मिश्रित-क्षमता समूह वाइगोत्स्की के विचार से मेल खाते हैं।
3.5 भाषा और चिंतन; निजी वाणी
| वाणी का प्रकार | आयु (लगभग) | कार्य |
|---|---|---|
| सामाजिक वाणी (Social Speech) | लगभग 3 वर्ष तक | दूसरों से संवाद, व्यवहार नियंत्रित करना |
| निजी वाणी (Private Speech) | लगभग 3–7 वर्ष | ज़ोर से स्वयं से बात करना — अपने चिंतन और व्यवहार को दिशा देना |
| आंतरिक वाणी (Inner Speech) | लगभग 7 वर्ष के बाद | मौन, मन के भीतर चलने वाला शाब्दिक चिंतन |
वाइगोत्स्की के अनुसार आरंभ में भाषा और चिंतन अलग-अलग विकसित होते हैं; लगभग दो वर्ष की आयु के आसपास दोनों मिलते हैं और शाब्दिक चिंतन शुरू होता है। भाषा चिंतन का प्रमुख साधन है। कठिन पहेली हल करते हुए बच्चा बुदबुदाता है — "पहले यह टुकड़ा, फिर यह" — यह निजी वाणी है, और कार्य जितना कठिन होता है निजी वाणी उतनी बढ़ती है। शिक्षक को इसे रोकना नहीं चाहिए।
3.6 वाइगोत्स्की के कक्षा-निहितार्थ
- बच्चे के ZPD का आकलन करके उससे थोड़ा आगे का कार्य दें, सहायता के साथ।
- सामूहिक कार्य, चर्चा, सहपाठी शिक्षण, पारस्परिक शिक्षण (Reciprocal Teaching)।
- सहायता को धीरे-धीरे हटाएँ ताकि बच्चा स्वतंत्र बने।
- बच्चे की भाषा और संस्कृति को कक्षा में स्थान दें — बहुभाषिकता को संसाधन मानें (NCF 2005 भी यही कहता है)।
- गतिशील आकलन (Dynamic Assessment) — केवल यह नहीं कि बच्चा अकेले क्या कर सकता है, बल्कि सहायता से क्या कर सकता है।
4. पियाजे बनाम वाइगोत्स्की — तुलना तालिका
| आधार | पियाजे | वाइगोत्स्की |
|---|---|---|
| सिद्धांत का नाम | संज्ञानात्मक विकास (संज्ञानात्मक रचनावाद) | सामाजिक-सांस्कृतिक (सामाजिक रचनावाद) |
| बच्चे की छवि | "नन्हा वैज्ञानिक" — अकेला खोजकर्ता | "सामाजिक प्राणी" — दूसरों के साथ सीखने वाला |
| विकास का स्रोत | व्यक्ति की वस्तुओं से अंतःक्रिया, साम्यधारण | सामाजिक अंतःक्रिया और संस्कृति |
| अवस्थाएँ | 4 सार्वभौमिक अवस्थाएँ | निश्चित अवस्थाएँ नहीं बताईं |
| भाषा और चिंतन | चिंतन पहले, भाषा उस पर निर्भर | भाषा चिंतन का साधन; दोनों बाद में मिलते हैं |
| स्वयं से बात करना | आत्म-केंद्रित वाणी — अपरिपक्वता, बाद में समाप्त | निजी वाणी — आत्म-नियमन का साधन, आंतरिक वाणी बन जाती है |
| विकास और अधिगम | विकास पहले, अधिगम उसके पीछे | अधिगम विकास को आगे ले जाता है |
| संस्कृति की भूमिका | कम | केंद्रीय |
| शिक्षक की भूमिका | वातावरण और सामग्री देने वाला सुगमकर्ता | सक्रिय मार्गदर्शक, स्कैफ़ोल्डिंग देने वाला |
| साथियों की भूमिका | संज्ञानात्मक द्वंद्व पैदा करना | MKO के रूप में सहायता |
| प्रमुख शब्द | स्कीमा, आत्मसातीकरण, समायोजन, साम्यधारण | ZPD, MKO, स्कैफ़ोल्डिंग, आंतरिकीकरण |
| समानता | रचनावादी — बच्चा सक्रिय रूप से ज्ञान रचता है | दोनों रचनावादी — बच्चा सक्रिय रूप से ज्ञान रचता है |
5. कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत
अमेरिकी मनोवैज्ञानिक लॉरेंस कोहलबर्ग ने पियाजे के नैतिक विकास के विचार को आगे बढ़ाया। उन्होंने बच्चों और किशोरों के सामने नैतिक दुविधाएँ (Moral Dilemmas) रखीं और उनके उत्तरों के पीछे के तर्क का विश्लेषण करके नैतिक विकास के 3 स्तर और 6 चरण बताए। हर व्यक्ति इन चरणों से इसी क्रम में गुजरता है, पर सभी अंतिम चरणों तक नहीं पहुँचते।
5.1 तीन स्तर और छह चरण
| स्तर | चरण | नैतिकता का आधार | बच्चे का तर्क (उदाहरण) |
|---|---|---|---|
| I. पूर्व-परंपरागत (Pre-conventional) | 1. दंड और आज्ञापालन अभिमुखता | दंड से बचना; जो दंड दिलाए वह गलत | "चोरी नहीं करनी चाहिए, वरना पिटाई होगी।" |
| I. पूर्व-परंपरागत | 2. व्यक्तिवाद और विनिमय (साधनात्मक उद्देश्य / स्वार्थ) | अपना लाभ; "तुम मेरा करो, मैं तुम्हारा" | "मैं उसकी मदद करूँगा क्योंकि बाद में वह मेरी करेगा।" |
| II. परंपरागत (Conventional) | 3. अच्छा लड़का–अच्छी लड़की (अंतर्वैयक्तिक संबंध) | दूसरों की स्वीकृति, अच्छा कहलाना | "मैं ऐसा करूँगा ताकि माँ और शिक्षक मुझे अच्छा बच्चा समझें।" |
| II. परंपरागत | 4. कानून और व्यवस्था (सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना) | नियम, कर्तव्य, सत्ता का सम्मान | "कानून सबके लिए है; सब तोड़ेंगे तो समाज नहीं चलेगा।" |
| III. उत्तर-परंपरागत (Post-conventional) | 5. सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार | कानून लोगों के हित के लिए बना समझौता है; बदला जा सकता है | "अन्यायपूर्ण कानून को लोकतांत्रिक ढंग से बदलना चाहिए।" |
| III. उत्तर-परंपरागत | 6. सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत | न्याय, मानव-गरिमा, समानता के अंतरात्मा-आधारित सिद्धांत | "मानव जीवन किसी भी संपत्ति से बड़ा है, कानून कुछ भी कहे।" |
5.2 हाइन्ज़ दुविधा (Heinz Dilemma)
हाइन्ज़ की पत्नी एक गंभीर कैंसर से मरने वाली थी। शहर के एक दवा-विक्रेता ने उसकी दवा खोजी थी, पर वह लागत से लगभग दस गुना दाम माँग रहा था। हाइन्ज़ केवल आधी रकम जुटा सका; विक्रेता ने सस्ता देने या बाद में पैसे लेने से मना कर दिया। हताश होकर हाइन्ज़ ने दुकान में घुसकर दवा चुरा ली। प्रश्न — क्या हाइन्ज़ को ऐसा करना चाहिए था? क्यों?
कोहलबर्ग के लिए "हाँ" या "नहीं" महत्वपूर्ण नहीं था; महत्वपूर्ण था "क्यों"। एक ही उत्तर अलग-अलग चरणों से आ सकता है:
| चरण | "चुराना चाहिए" का तर्क | "नहीं चुराना चाहिए" का तर्क |
|---|---|---|
| 1 | दवा का दाम ज़्यादा नहीं, पकड़ा भी गया तो सज़ा कम | पकड़ा गया तो जेल जाएगा |
| 2 | पत्नी बचेगी तो उसे ही सुख मिलेगा | जेल गया तो उसका अपना नुकसान |
| 3 | अच्छा पति वही जो पत्नी को बचाए; लोग समझेंगे | लोग उसे चोर कहेंगे, परिवार की बदनामी |
| 4 | पति का कर्तव्य है, पर बाद में सज़ा भुगतनी चाहिए | चोरी कानून के विरुद्ध है; सब ऐसा करें तो व्यवस्था टूटेगी |
| 5 | जीवन का अधिकार संपत्ति के अधिकार से ऊपर है | समाज ने जो नियम सहमति से बनाए उनका सम्मान आवश्यक |
| 6 | मानव जीवन का मूल्य सार्वभौमिक सिद्धांत है | — (इस चरण का तर्क सामान्यतः जीवन के पक्ष में जाता है) |
5.3 पियाजे का नैतिक विकास (संक्षेप में)
पियाजे ने कंचे के खेल के नियमों पर बच्चों से बात करके दो चरण बताए — परायत्त / बाह्य नैतिकता (Heteronomous Morality, नैतिक यथार्थवाद): नियम अटल, बड़ों द्वारा बनाए गए, परिणाम से सही-गलत; और स्वायत्त नैतिकता (Autonomous Morality, सहयोग की नैतिकता): नियम आपसी सहमति से बदले जा सकते हैं, इरादा महत्वपूर्ण। कोहलबर्ग का सिद्धांत इसी का विस्तार है।
5.4 गिलिगन की आलोचना
| बिंदु | व्याख्या |
|---|---|
| किसने | कैरल गिलिगन, पुस्तक "इन अ डिफ़रेंट वॉइस" |
| लिंग-पक्षपात | कोहलबर्ग का मूल अध्ययन केवल लड़कों/पुरुषों पर था, इसलिए स्त्रियों का नैतिक तर्क प्रायः चरण 3 पर आँका गया |
| न्याय बनाम देखभाल | कोहलबर्ग की नैतिकता "न्याय और अधिकार" पर; गिलिगन के अनुसार स्त्रियाँ प्रायः "देखभाल, संबंध और उत्तरदायित्व" (Ethic of Care) से सोचती हैं — यह कम नहीं, भिन्न है |
5.5 कोहलबर्ग की अन्य आलोचनाएँ और कक्षा-निहितार्थ
- नैतिक तर्क और नैतिक व्यवहार हमेशा मेल नहीं खाते।
- सिद्धांत पश्चिमी व्यक्तिवादी मूल्यों पर आधारित — संस्कृति-पक्षपात की आलोचना।
- चरण 6 तक बहुत कम लोग पहुँचते हैं।
- कक्षा में: नैतिक दुविधाओं पर चर्चा, कहानियों से "क्यों" पूछना, नैतिक मूल्य उपदेश से नहीं बल्कि चर्चा और उदाहरण से; बच्चे को उससे एक चरण ऊँचे तर्क से परिचित कराना।
6. एरिक्सन का मनोसामाजिक विकास सिद्धांत
एरिक एरिक्सन ने फ्रायड के विचारों को सामाजिक दिशा दी और विकास को जीवन-पर्यंत माना। उनके अनुसार हर अवस्था में एक मनोसामाजिक संकट (Crisis) होता है; उसका सफल समाधान एक गुण (Virtue) देता है और असफलता आगे की अवस्थाओं में कठिनाई पैदा करती है। "पहचान-संकट (Identity Crisis)" शब्द एरिक्सन से ही जुड़ा है। (आयु-सीमाएँ पुस्तकों में थोड़ी भिन्न दी जाती हैं।)
| # | आयु (लगभग) | संकट | सफल समाधान से गुण | मुख्य संबंध / स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| 1 | जन्म–1/1½ वर्ष | विश्वास बनाम अविश्वास (Trust vs Mistrust) | आशा (Hope) | माता/देखभालकर्ता; भोजन, स्नेह |
| 2 | 1½–3 वर्ष | स्वायत्तता बनाम लज्जा व संदेह (Autonomy vs Shame & Doubt) | इच्छाशक्ति (Will) | माता-पिता; शौच-प्रशिक्षण, स्वयं खाना |
| 3 | 3–5/6 वर्ष | पहल बनाम अपराध-बोध (Initiative vs Guilt) | उद्देश्य (Purpose) | परिवार; खेल, खोज |
| 4 | 6–12 वर्ष | परिश्रम बनाम हीनता (Industry vs Inferiority) | सक्षमता (Competence) | विद्यालय, शिक्षक, साथी |
| 5 | 12–18 वर्ष | पहचान बनाम भूमिका-भ्रम (Identity vs Role Confusion) | निष्ठा (Fidelity) | साथी-समूह, आदर्श व्यक्ति |
| 6 | युवा वयस्क (लगभग 18–40) | घनिष्ठता बनाम अलगाव (Intimacy vs Isolation) | प्रेम (Love) | मित्र, जीवन-साथी |
| 7 | मध्य वयस्क (लगभग 40–65) | उत्पादकता बनाम ठहराव (Generativity vs Stagnation) | देखभाल (Care) | कार्य, संतान, अगली पीढ़ी |
| 8 | वृद्धावस्था (65+) | अहं-संपूर्णता बनाम निराशा (Integrity vs Despair) | प्रज्ञा (Wisdom) | जीवन पर चिंतन |
6.1 शिक्षक के लिए सबसे प्रासंगिक दो अवस्थाएँ
परिश्रम बनाम हीनता (6–12): REET लेवल 1 और प्रारंभिक लेवल 2 के बच्चे इसी में हैं। बच्चा कौशल सीखकर उपलब्धि का अनुभव करना चाहता है। सफलता के अवसर, प्रयास की सराहना और उचित कठिनाई वाले कार्य सक्षमता का भाव देते हैं; बार-बार असफलता, तुलना और उपहास हीनता पैदा करते हैं।
पहचान बनाम भूमिका-भ्रम (12–18): किशोर पूछता है "मैं कौन हूँ, मुझे क्या बनना है?"। विविध भूमिकाओं को आज़माने के अवसर, करियर-मार्गदर्शन और सम्मानजनक संवाद स्पष्ट पहचान बनाने में मदद करते हैं।
7. फ्रायड की मनोलैंगिक अवस्थाएँ (संक्षेप में)
सिगमंड फ्रायड (ऑस्ट्रिया) को मनोविश्लेषण का जनक माना जाता है। उनके अनुसार व्यक्तित्व के तीन भाग हैं — इड (Id): सुख-सिद्धांत पर चलने वाली मूल प्रवृत्तियाँ; ईगो (Ego, अहं): वास्तविकता-सिद्धांत पर संतुलन बनाने वाला; सुपरईगो (Superego, पराहं): नैतिकता और अंतरात्मा। बचपन के आरंभिक वर्ष व्यक्तित्व की नींव हैं; किसी अवस्था में अति-तृप्ति या वंचना से स्थिरीकरण (Fixation) हो सकता है।
| अवस्था | आयु (लगभग) | सुख का केंद्र |
|---|---|---|
| मौखिक (Oral) | 0–1 वर्ष | मुँह — चूसना, खाना |
| गुदा (Anal) | 1–3 वर्ष | मल-त्याग पर नियंत्रण (शौच-प्रशिक्षण) |
| लैंगिक / शिश्न (Phallic) | 3–6 वर्ष | जननांग; ओडिपस ग्रंथि की अवधारणा |
| सुप्त (Latency) | 6 वर्ष से यौवनारंभ तक | लैंगिक इच्छाएँ दबी; सामाजिक, बौद्धिक गतिविधियाँ |
| जननांगीय (Genital) | यौवनारंभ से आगे | परिपक्व लैंगिक रुचि |
8. ब्रोनफ़ेनब्रेनर का पारिस्थितिक तंत्र सिद्धांत (संक्षेप में)
यूरी ब्रोनफ़ेनब्रेनर के अनुसार बच्चा एक-दूसरे में समाए वातावरणीय तंत्रों के केंद्र में है और हर तंत्र उसके विकास को प्रभावित करता है।
| तंत्र | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| सूक्ष्म तंत्र (Microsystem) | बच्चे का सीधा, निकटतम वातावरण | परिवार, विद्यालय, साथी, पड़ोस |
| मध्य तंत्र (Mesosystem) | सूक्ष्म तंत्रों के आपसी संबंध | अभिभावक-शिक्षक बैठक; घर और विद्यालय का तालमेल |
| बाह्य तंत्र (Exosystem) | वे संदर्भ जिनमें बच्चा सीधे शामिल नहीं, पर जो उसे प्रभावित करते हैं | माता-पिता का कार्यस्थल, स्थानीय प्रशासन |
| वृहद् तंत्र (Macrosystem) | संस्कृति, मूल्य, कानून, विचारधारा | सामाजिक मान्यताएँ, शिक्षा नीति |
| काल तंत्र (Chronosystem) | समय के साथ होने वाले परिवर्तन और जीवन-घटनाएँ | परिवार का स्थानांतरण, ऐतिहासिक परिवर्तन |
9. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: "Scaffolding" शब्द वाइगोत्स्की का नहीं
अवधारणा वाइगोत्स्की के ZPD से जुड़ी है, पर शब्द वुड, ब्रूनर और रॉस का है। प्रश्न "ZPD किसने दिया?" — वाइगोत्स्की। प्रश्न "स्कैफ़ोल्डिंग किस सिद्धांत से जुड़ी है?" — वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत।
Trap 2: ZPD = अकेले और सहायता के बीच का अंतर
ZPD वह नहीं जो बच्चा अकेले कर सकता है, और न वह जो वह सहायता से भी नहीं कर सकता। यह "अकेले नहीं, सहायता से हाँ" वाला क्षेत्र है।
Trap 3: निजी वाणी पर दो दृष्टिकोण
वाइगोत्स्की — निजी वाणी, आत्म-नियमन का साधन। पियाजे — आत्म-केंद्रित वाणी, अपरिपक्वता का संकेत। "बच्चा पहेली हल करते समय खुद से बात करता है — वाइगोत्स्की के अनुसार यह क्या दर्शाता है?" — चिंतन/आत्म-नियमन का साधन।
Trap 4: कोहलबर्ग में "उत्तर" नहीं, "तर्क" देखें
"हाइन्ज़ को चोरी करनी चाहिए" — इससे चरण तय नहीं होता। कारण में दंड है तो चरण 1, अपना लाभ तो 2, लोग क्या कहेंगे / अच्छा कहलाना तो 3, कानून / कर्तव्य तो 4, लोगों के अधिकार और सहमति तो 5, सार्वभौमिक अंतरात्मा तो 6।
Trap 5: चरण 3 बनाम चरण 4
चरण 3 = व्यक्तिगत संबंधों में स्वीकृति ("माँ खुश होंगी")। चरण 4 = समाज की व्यवस्था, नियम, कानून ("नियम सबके लिए हैं")। दोनों परंपरागत स्तर में हैं।
Trap 6: एरिक्सन की विद्यालयी आयु
6–12 वर्ष = परिश्रम बनाम हीनता; 3–6 वर्ष = पहल बनाम अपराध-बोध। "कक्षा 4 का बच्चा बार-बार असफल होकर कहता है, 'मुझसे कुछ नहीं होगा'" — परिश्रम बनाम हीनता।
Trap 7: एरिक्सन "मनोसामाजिक", फ्रायड "मनोलैंगिक"
दोनों शब्द मिलते-जुलते हैं। एरिक्सन — सामाजिक संकट, 8 अवस्थाएँ, जीवन-भर। फ्रायड — सुख का केंद्र, 5 अवस्थाएँ, यौवन तक।
Trap 8: अभिभावक-शिक्षक बैठक — मध्य तंत्र
परिवार अकेला = सूक्ष्म; विद्यालय अकेला = सूक्ष्म; दोनों का आपसी संबंध = मध्य तंत्र। माता-पिता का कार्यस्थल = बाह्य तंत्र।
10. Most-Asked रिवीज़न तालिका
| # | प्रश्न / बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | वाइगोत्स्की किस देश के थे? | रूस (सोवियत संघ) |
| 2 | वाइगोत्स्की का सिद्धांत | सामाजिक-सांस्कृतिक |
| 3 | वाइगोत्स्की की प्रसिद्ध पुस्तक | थॉट एंड लैंग्वेज |
| 4 | ZPD का पूरा नाम | Zone of Proximal Development — निकटस्थ विकास का क्षेत्र |
| 5 | ZPD | अकेले और सहायता से की जा सकने वाली क्षमता के बीच का अंतर |
| 6 | MKO | More Knowledgeable Other — शिक्षक, अभिभावक, सहपाठी |
| 7 | अस्थायी सहायता जो धीरे-धीरे हटाई जाए | स्कैफ़ोल्डिंग |
| 8 | "Scaffolding" शब्द किसने दिया | वुड, ब्रूनर और रॉस |
| 9 | सामाजिक बात को भीतर आत्मसात करना | आंतरिकीकरण |
| 10 | स्वयं से ज़ोर से बोलना (वाइगोत्स्की) | निजी वाणी |
| 11 | निजी वाणी का कार्य | चिंतन और व्यवहार का आत्म-नियमन |
| 12 | निजी वाणी बाद में बनती है | आंतरिक वाणी |
| 13 | वाइगोत्स्की — भाषा | चिंतन का साधन |
| 14 | वाइगोत्स्की — अधिगम और विकास | अधिगम विकास को आगे ले जाता है |
| 15 | वाइगोत्स्की से जुड़ी शिक्षण-विधियाँ | सहकारी अधिगम, सहपाठी शिक्षण, पारस्परिक शिक्षण |
| 16 | वाइगोत्स्की से जुड़ा आकलन | गतिशील आकलन |
| 17 | पियाजे और वाइगोत्स्की दोनों | रचनावादी |
| 18 | वाइगोत्स्की का रचनावाद | सामाजिक रचनावाद |
| 19 | कोहलबर्ग ने कितने स्तर और चरण दिए | 3 स्तर, 6 चरण |
| 20 | कोहलबर्ग की विधि | नैतिक दुविधाएँ (कहानी) और तर्क का विश्लेषण |
| 21 | प्रसिद्ध दुविधा | हाइन्ज़ दुविधा |
| 22 | पहला स्तर | पूर्व-परंपरागत |
| 23 | चरण 1 | दंड और आज्ञापालन |
| 24 | चरण 2 | व्यक्तिवाद और विनिमय (स्वार्थ) |
| 25 | दूसरा स्तर | परंपरागत |
| 26 | चरण 3 | अच्छा लड़का–अच्छी लड़की |
| 27 | चरण 4 | कानून और व्यवस्था |
| 28 | तीसरा स्तर | उत्तर-परंपरागत |
| 29 | चरण 5 | सामाजिक अनुबंध |
| 30 | चरण 6 | सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत |
| 31 | कोहलबर्ग की आलोचक | कैरल गिलिगन |
| 32 | गिलिगन की अवधारणा | देखभाल की नैतिकता |
| 33 | गिलिगन की मुख्य आपत्ति | अध्ययन पुरुषों पर आधारित — लिंग-पक्षपात |
| 34 | पियाजे के नैतिक विकास के दो चरण | परायत्त (नैतिक यथार्थवाद) और स्वायत्त |
| 35 | एरिक्सन का सिद्धांत | मनोसामाजिक |
| 36 | एरिक्सन की अवस्थाएँ | 8 |
| 37 | पहली अवस्था | विश्वास बनाम अविश्वास |
| 38 | 1½–3 वर्ष | स्वायत्तता बनाम लज्जा व संदेह |
| 39 | 3–6 वर्ष | पहल बनाम अपराध-बोध |
| 40 | 6–12 वर्ष | परिश्रम बनाम हीनता |
| 41 | 12–18 वर्ष | पहचान बनाम भूमिका-भ्रम |
| 42 | युवा वयस्क | घनिष्ठता बनाम अलगाव |
| 43 | मध्य वयस्क | उत्पादकता बनाम ठहराव |
| 44 | वृद्धावस्था | अहं-संपूर्णता बनाम निराशा |
| 45 | "पहचान-संकट" शब्द | एरिक्सन |
| 46 | फ्रायड का सिद्धांत | मनोलैंगिक; मनोविश्लेषण |
| 47 | सुख-सिद्धांत पर चलने वाला भाग | इड |
| 48 | वास्तविकता-सिद्धांत | ईगो (अहं) |
| 49 | नैतिकता / अंतरात्मा | सुपरईगो (पराहं) |
| 50 | फ्रायड — 6 वर्ष से यौवनारंभ | सुप्त अवस्था |
| 51 | ब्रोनफ़ेनब्रेनर — परिवार, विद्यालय | सूक्ष्म तंत्र |
| 52 | अभिभावक-शिक्षक संबंध | मध्य तंत्र |
| 53 | माता-पिता का कार्यस्थल | बाह्य तंत्र |
| 54 | संस्कृति, मूल्य, कानून | वृहद् तंत्र |
| 55 | समय के साथ परिवर्तन | काल तंत्र |
11. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
पैटर्न 1 — ZPD अनुप्रयोग: "एक शिक्षिका पहचानती है कि अमन अकेले शब्द-समस्या हल नहीं कर पाता, पर उसके संकेतों से कर लेता है। वाइगोत्स्की के अनुसार यह कार्य किसके भीतर है?" — उत्तर: अमन के ZPD में।
पैटर्न 2 — स्कैफ़ोल्डिंग: "शिक्षक पहले पूरा प्रश्न हल करके दिखाता है, फिर केवल संकेत देता है, फिर बच्चे को अकेले करने देता है। यह क्या है?" — उत्तर: स्कैफ़ोल्डिंग (क्रमशः सहायता घटाना)।
पैटर्न 3 — कोहलबर्ग चरण: "सोनू कहता है, 'मैं होमवर्क करता हूँ ताकि मैडम मुझे अच्छा बच्चा कहें।' यह किस चरण का तर्क है?" — उत्तर: चरण 3।
पैटर्न 4 — एरिक्सन: "एरिक्सन के अनुसार प्राथमिक विद्यालय के बच्चों का प्रमुख मनोसामाजिक संकट क्या है?" — उत्तर: परिश्रम बनाम हीनता।
पैटर्न 5 — तुलना: "निम्न में से कौन-सा कथन वाइगोत्स्की का है, पियाजे का नहीं?" — उत्तर: अधिगम विकास से आगे चलकर उसे दिशा देता है।
पैटर्न 6 — ब्रोनफ़ेनब्रेनर: "पिता की नौकरी जाने से बच्चे पर पड़ने वाला प्रभाव किस तंत्र का उदाहरण है?" — उत्तर: बाह्य तंत्र।
12. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. ZPD = "ज़रा पकड़, दौड़ेगा": थोड़ा सहारा मिले तो बच्चा आगे बढ़ जाएगा।
2. वाइगोत्स्की के चार शब्द — "ZMSP": ZPD, MKO, Scaffolding, Private speech।
3. कोहलबर्ग के 6 चरण — "डंडा, धंधा, दुलार, दफ़्तर, दस्तख़त, धर्म-विवेक": दंड (1), लेन-देन (2), स्वीकृति/दुलार (3), कानून-दफ़्तर (4), सामाजिक अनुबंध पर दस्तख़त (5), अंतरात्मा (6)।
4. स्तर — "पूर्व, परंपरा, पार": पूर्व-परंपरागत, परंपरागत, उत्तर-परंपरागत।
5. एरिक्सन के 8 — "विश्वास से स्वायत्त, पहल से परिश्रम, पहचान से प्रेम, पीढ़ी से पूर्णता": विश्वास, स्वायत्तता, पहल, परिश्रम, पहचान, घनिष्ठता, उत्पादकता, संपूर्णता।
6. फ्रायड — "मुँह, गुदा, लिंग, सोओ, जागो": मौखिक, गुदा, लैंगिक, सुप्त, जननांगीय।
7. ब्रोनफ़ेनब्रेनर — "सू-म-बा-वृ-का": सूक्ष्म, मध्य, बाह्य, वृहद्, काल।
13. कथन अभ्यास
वाइगोत्स्की के अनुसार संज्ञानात्मक विकास में सामाजिक अंतःक्रिया की केंद्रीय भूमिका है। — सही।
ZPD वह क्षेत्र है जिसमें बच्चा बिना किसी सहायता के कार्य कर सकता है। — गलत (अकेले नहीं, सहायता से कर सकता है)।
स्कैफ़ोल्डिंग में दी गई सहायता को बच्चे की दक्षता बढ़ने पर धीरे-धीरे हटा लिया जाता है। — सही।
वाइगोत्स्की के अनुसार निजी वाणी अपरिपक्व चिंतन का संकेत है जो बेकार है। — गलत (यह आत्म-नियमन का साधन है; अपरिपक्वता वाला दृष्टिकोण पियाजे का है)।
सहपाठी भी MKO की भूमिका निभा सकता है। — सही।
कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास के 3 स्तर और 6 चरण हैं। — सही।
कोहलबर्ग ने नैतिक चरण तय करने के लिए दुविधा के उत्तर (हाँ/नहीं) को आधार बनाया। — गलत (उत्तर के पीछे के तर्क को)।
"कानून और व्यवस्था" अभिमुखता पूर्व-परंपरागत स्तर का चरण है। — गलत (परंपरागत स्तर का चरण 4)।
कैरल गिलिगन ने कोहलबर्ग के सिद्धांत को लिंग-पक्षपाती बताया। — सही।
एरिक्सन के अनुसार 6–12 वर्ष के बच्चों का संकट पहचान बनाम भूमिका-भ्रम है। — गलत (परिश्रम बनाम हीनता; पहचान बनाम भूमिका-भ्रम किशोरावस्था में)।
एरिक्सन ने विकास को जीवन-पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया माना। — सही।
ब्रोनफ़ेनब्रेनर के अनुसार अभिभावक-शिक्षक संबंध मध्य तंत्र का उदाहरण है। — सही।
14. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- वाइगोत्स्की — रूसी; सामाजिक-सांस्कृतिक; "थॉट एंड लैंग्वेज"
- ZPD = अकेले बनाम सहायता से की जा सकने वाली क्षमता का अंतर
- MKO = अधिक जानकार अन्य — शिक्षक, अभिभावक, सहपाठी
- स्कैफ़ोल्डिंग = अस्थायी सहायता, धीरे-धीरे हटाना; शब्द वुड-ब्रूनर-रॉस का
- निजी वाणी (वाइगोत्स्की) = आत्म-नियमन; आत्म-केंद्रित वाणी (पियाजे) = अपरिपक्वता
- वाइगोत्स्की: भाषा चिंतन का साधन; अधिगम विकास को आगे ले जाता है
- पियाजे — व्यक्तिगत रचनावाद; वाइगोत्स्की — सामाजिक रचनावाद
- कोहलबर्ग: 3 स्तर, 6 चरण; हाइन्ज़ दुविधा; तर्क से चरण
- पूर्व-परंपरागत: 1 दंड-आज्ञापालन, 2 स्वार्थ-विनिमय
- परंपरागत: 3 अच्छा लड़का-लड़की, 4 कानून-व्यवस्था
- उत्तर-परंपरागत: 5 सामाजिक अनुबंध, 6 सार्वभौमिक सिद्धांत
- गिलिगन — देखभाल की नैतिकता; लिंग-पक्षपात की आलोचना
- एरिक्सन: 8 मनोसामाजिक अवस्थाएँ; 6–12 परिश्रम बनाम हीनता; 12–18 पहचान बनाम भूमिका-भ्रम
- फ्रायड: मौखिक, गुदा, लैंगिक, सुप्त, जननांगीय; इड-ईगो-सुपरईगो
- ब्रोनफ़ेनब्रेनर: सूक्ष्म, मध्य, बाह्य, वृहद्, काल तंत्र
15. अभ्यास
अब नीचे दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। कोहलबर्ग वाले प्रश्नों में हर बार "क्यों?" वाले हिस्से को रेखांकित करें; वाइगोत्स्की वाले प्रश्नों में देखें कि सहायता मिल रही है या नहीं। अधिगम से जुड़े सिद्धांतों के लिए अधिगम सिद्धांत वाला नोट पढ़ें और मिश्रित अभ्यास के लिए REET लेवल 2 टेस्ट सीरीज़ या RSSB REET मुख्य परीक्षा लेवल 2 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
16. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
पियाजे ने बताया कि बच्चा स्वयं सोचता है; वाइगोत्स्की ने जोड़ा कि वह दूसरों के साथ सोचना सीखता है। ZPD और स्कैफ़ोल्डिंग आज की कक्षा में समूह-कार्य, सहपाठी शिक्षण और क्रमशः घटती सहायता के रूप में दिखते हैं। कोहलबर्ग ने नैतिकता को निर्णय नहीं, तर्क की परिपक्वता के रूप में देखा, और गिलिगन ने उसमें देखभाल का पक्ष जोड़ा। एरिक्सन ने याद दिलाया कि हर आयु का एक सामाजिक संकट है — विद्यालय में बच्चे की सक्षमता का भाव और किशोर की पहचान, दोनों शिक्षक के व्यवहार से बनते या बिगड़ते हैं। परीक्षा में इन सबका एक ही तरीका है: स्थिति पढ़ें, मुख्य संकेत-शब्द पकड़ें और सिद्धांत से जोड़ें।
वाइगोत्स्की: ZPD, MKO, स्कैफ़ोल्डिंग, निजी वाणी, भाषा = चिंतन का साधन | कोहलबर्ग: 3 स्तर, 6 चरण, तर्क से पहचान | गिलिगन: देखभाल की नैतिकता | एरिक्सन: 6–12 परिश्रम बनाम हीनता, 12–18 पहचान बनाम भूमिका-भ्रम
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“वाइगोत्स्की, कोहलबर्ग, एरिक्सन — ZPD, स्कैफ़ोल्डिंग, नैतिक विकास के 6 चरण, 8 मनोसामाजिक अवस्थाएँ” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- वाइगोत्स्की, कोहलबर्ग और एरिक्सन — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- वृद्धि, विकास के सिद्धांत और अवस्थाएँ — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- शिक्षण विधियाँ, मूल्यांकन और CCE — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
पूरे सिलेबस का अभ्यास: राजस्थान REET लेवल-1 (हिंदी माध्यम) संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ — पहला टेस्ट फ्री आज़माएँ

यह टॉपिक पढ़ लिया? अब असली परीक्षा जैसे मॉक टेस्ट में खुद को परखें
राजस्थान REET लेवल-1 (हिंदी माध्यम) संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
- नवीनतम परीक्षा पैटर्न, समय-सीमा और नेगेटिव मार्किंग के साथ
- रैंक, कमजोर टॉपिक विश्लेषण और हर प्रश्न की हिंदी व्याख्या
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
ZPD (निकटस्थ विकास का क्षेत्र) वह अंतर है जो बच्चा अकेले कर सकता है और जो वह किसी वयस्क या अधिक सक्षम साथी की सहायता से कर सकता है। इसी क्षेत्र में शिक्षण सबसे प्रभावी होता है।
ZPD में बच्चे को दी जाने वाली अस्थायी सहायता, जिसे उसकी दक्षता बढ़ने पर धीरे-धीरे हटा लिया जाता है। यह अवधारणा वाइगोत्स्की से जुड़ी है, पर यह शब्द वुड, ब्रूनर और रॉस ने दिया।
MKO का अर्थ है More Knowledgeable Other, यानी अधिक जानकार अन्य। यह शिक्षक, माता-पिता, बड़ा भाई-बहन या सहपाठी कोई भी हो सकता है जिसकी उस कार्य में समझ बच्चे से अधिक हो।
पियाजे व्यक्तिगत खोज और अवस्थाओं पर बल देते हैं और चिंतन को भाषा से पहले मानते हैं। वाइगोत्स्की सामाजिक अंतःक्रिया और संस्कृति पर बल देते हैं, भाषा को चिंतन का साधन मानते हैं और कहते हैं कि अधिगम विकास को आगे ले जाता है।
3 स्तर और 6 चरण — पूर्व-परंपरागत (दंड-आज्ञापालन, स्वार्थ-विनिमय), परंपरागत (अच्छा लड़का-अच्छी लड़की, कानून-व्यवस्था) और उत्तर-परंपरागत (सामाजिक अनुबंध, सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत)।
यह कोहलबर्ग की प्रसिद्ध नैतिक दुविधा है जिसमें हाइन्ज़ अपनी मरणासन्न पत्नी के लिए महँगी दवा चुराता है। कोहलबर्ग ने 'हाँ' या 'नहीं' के बजाय उत्तर के पीछे के तर्क से नैतिक चरण तय किया।
गिलिगन के अनुसार कोहलबर्ग का अध्ययन पुरुषों पर आधारित था और न्याय पर केंद्रित था, इसलिए स्त्रियों की 'देखभाल की नैतिकता' को कम आँका गया।
विश्वास बनाम अविश्वास, स्वायत्तता बनाम लज्जा-संदेह, पहल बनाम अपराध-बोध, परिश्रम बनाम हीनता, पहचान बनाम भूमिका-भ्रम, घनिष्ठता बनाम अलगाव, उत्पादकता बनाम ठहराव, और अहं-संपूर्णता बनाम निराशा।
लगभग 6–12 वर्ष के बच्चों का संकट परिश्रम बनाम हीनता है। सफलता के अवसर और प्रयास की सराहना से सक्षमता का भाव बनता है।
बच्चे का कार्य करते समय स्वयं से ज़ोर से बोलना निजी वाणी है। वाइगोत्स्की के अनुसार यह चिंतन और व्यवहार के आत्म-नियमन का साधन है, जो बाद में आंतरिक वाणी बन जाती है।
क्या आपको यह अध्ययन नोट्स पसंद आए? अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें: