वृद्धि और विकास — विकास के सिद्धांत, अवस्थाएँ, आयाम, वंशानुक्रम-वातावरण व समाजीकरण — REET/CTET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: REET व RSSB REET मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम का बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र खंड; NCERT/NCF 2005, RTE अधिनियम 2009 व राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल प्रावधान। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
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संक्षिप्त उत्तर: वृद्धि (Growth) शरीर के आकार, लंबाई, भार और अंगों में होने वाला मात्रात्मक परिवर्तन है, जो मापा जा सकता है और एक आयु के बाद रुक जाता है; विकास (Development) गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों प्रकार का परिवर्तन है, जो गर्भ से मृत्यु तक जीवन-पर्यंत चलता है और जिसमें वृद्धि भी शामिल है। विकास के प्रमुख सिद्धांत हैं — निरंतरता, निश्चित क्रम, मस्तकाधोमुखी (सिर से पैर की ओर — Cephalocaudal) और समीप-दूराभिमुख (केंद्र से बाहर की ओर — Proximodistal) दिशा, सामान्य से विशिष्ट की ओर, वैयक्तिक भिन्नता तथा वंशानुक्रम और वातावरण की अंतःक्रिया। भारतीय पाठ्यपुस्तकों में प्रमुख अवस्थाएँ हैं — शैशवावस्था (जन्म से लगभग 5–6 वर्ष), बाल्यावस्था (लगभग 6–12 वर्ष) और किशोरावस्था (लगभग 12–18 वर्ष); NCERT/CTET की भाषा में इन्हें प्रारंभिक बाल्यावस्था (2–6) और उत्तर बाल्यावस्था (6–11/12) में भी बाँटा जाता है — आयु-सीमाएँ पुस्तकों में थोड़ी भिन्न हैं। किशोरावस्था को "तूफान और तनाव की अवस्था" (स्टेनली हॉल) और उत्तर बाल्यावस्था को "टोली / गिरोह की आयु" कहा जाता है। विकास के आयाम हैं — शारीरिक, संज्ञानात्मक, भाषिक, संवेगात्मक, सामाजिक और नैतिक; ये सब परस्पर जुड़े होते हैं। परिवार समाजीकरण की सबसे पहली और प्राथमिक संस्था है, जबकि विद्यालय एक औपचारिक (द्वितीयक) संस्था है। REET/CTET के प्रश्नों का मूल सूत्र: विकास क्रमिक, सतत, पूर्वानुमेय है पर हर बच्चे की गति अलग होती है — इसलिए शिक्षक को हर बच्चे की तुलना दूसरों से नहीं, उसके अपने विकास से करनी चाहिए।
संक्षिप्त उत्तर
| बिंदु | वृद्धि (Growth) | विकास (Development) |
|---|---|---|
| प्रकृति | मात्रात्मक (Quantitative) | गुणात्मक + मात्रात्मक (Qualitative + Quantitative) |
| अवधि | एक निश्चित आयु (परिपक्वता) तक | जीवन-पर्यंत (गर्भ से मृत्यु तक) |
| मापन | सीधे मापी जा सकती है (लंबाई, भार) | प्रत्यक्ष नहीं, व्यवहार के निरीक्षण से आँका जाता है |
| क्षेत्र | मुख्यतः शारीरिक | शारीरिक, संज्ञानात्मक, संवेगात्मक, सामाजिक, नैतिक — सभी |
| संबंध | विकास का एक भाग | व्यापक अवधारणा; वृद्धि इसमें शामिल |
| दिशा | बढ़ना ही (आकार में) | परिपक्वता की ओर क्रमिक, संगठित परिवर्तन |
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| मस्तकाधोमुखी (Cephalocaudal) दिशा | सिर से पैर की ओर |
| समीप-दूराभिमुख (Proximodistal) दिशा | शरीर के केंद्र (मेरुदंड) से बाहर की ओर — कंधा → भुजा → हाथ → उँगलियाँ |
| विकास का क्रम | सामान्य से विशिष्ट, सरल से जटिल, स्थूल से सूक्ष्म |
| विकास = ? | वंशानुक्रम × वातावरण (गुणनफल — दोनों अनिवार्य; वुडवर्थ का प्रचलित सूत्र) |
| "तूफान और तनाव" की अवस्था | किशोरावस्था (जी. स्टेनली हॉल) |
| "टोली / गिरोह की आयु" (Gang Age) | उत्तर बाल्यावस्था |
| "खिलौनों की आयु" (Toy Age) / पूर्व-विद्यालयी आयु | प्रारंभिक बाल्यावस्था |
| समाजीकरण की प्राथमिक संस्था | परिवार |
| सबसे तीव्र शारीरिक वृद्धि | गर्भकाल व जीवन के पहले दो वर्ष; फिर किशोरावस्था में वृद्धि-उछाल (Growth Spurt) |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र का पहला अध्याय "वृद्धि और विकास की संकल्पना व सिद्धांत" है। REET लेवल 1 और लेवल 2, RSSB REET मुख्य परीक्षा तथा CTET — सभी के बाल विकास खंड में यह इकाई सीधे लिखी होती है। आगे के सारे सिद्धांत — पियाजे का संज्ञानात्मक विकास, वाइगोत्स्की, कोहलबर्ग और एरिक्सन — इसी नींव पर टिके हैं। प्रश्न परिभाषा से कम और कक्षा-स्थिति से अधिक आते हैं, जैसे "एक शिक्षिका देखती है कि कक्षा 2 के बच्चे अलग-अलग गति से पढ़ना सीख रहे हैं — यह विकास के किस सिद्धांत को दर्शाता है?"
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- REET लेवल 1 (कक्षा 1–5) व लेवल 2 (कक्षा 6–8) — बाल विकास एवं शिक्षण विधियाँ खंड
- RSSB REET मुख्य परीक्षा (लेवल 1 व 2) — शैक्षिक मनोविज्ञान भाग
- CTET पेपर I व II — Child Development and Pedagogy
- RPSC द्वितीय श्रेणी / व्याख्याता तथा RSSB शिक्षक भर्तियाँ — शैक्षिक मनोविज्ञान
प्रश्न कैसे आते हैं?
- वृद्धि और विकास में अंतर — "कौन-सा कथन वृद्धि के बारे में सही नहीं है?"
- विकास के सिद्धांत की पहचान — बच्चा पहले पूरी हथेली से पकड़ता है, बाद में उँगलियों से
- दिशा के सिद्धांत — मस्तकाधोमुखी बनाम समीप-दूराभिमुख
- अवस्थाओं की विशेषताएँ — टोली की आयु, तूफान-तनाव, अनुकरण, कल्पना
- वंशानुक्रम बनाम वातावरण — "विकास दोनों की अंतःक्रिया का परिणाम है"
- समाजीकरण — प्राथमिक और द्वितीयक संस्थाएँ, विद्यालय की भूमिका
- शिक्षक की भूमिका — "विकास के इस सिद्धांत के अनुसार शिक्षक को … करना चाहिए"
3. वृद्धि और विकास: अर्थ और अंतर
वृद्धि का अर्थ है शरीर और उसके अंगों के आकार, लंबाई, भार और अनुपात में बढ़ोतरी। यह कोशिकाओं की संख्या और आकार बढ़ने का परिणाम है। वृद्धि को इंच, सेंटीमीटर या किलोग्राम में मापा जा सकता है और सामान्यतः किशोरावस्था के अंत तक यह रुक जाती है।
विकास एक व्यापक, क्रमबद्ध और संगठित परिवर्तन-प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति में नई क्षमताएँ और विशेषताएँ आती हैं — जैसे बोलना, तर्क करना, संवेगों पर नियंत्रण, सहयोग करना, सही-गलत समझना। विकास में संरचना (वृद्धि) और कार्यक्षमता (Function) दोनों का परिवर्तन आता है। उदाहरण — हाथ का लंबा होना वृद्धि है, पर हाथ से सुंदर अक्षर लिख पाना विकास है।
3.1 विस्तृत तुलना
| आधार | वृद्धि | विकास |
|---|---|---|
| अर्थ | आकार व भार में बढ़ोतरी | क्रमिक, संगठित परिवर्तन — नई क्षमताओं का उदय |
| परिवर्तन का प्रकार | केवल मात्रात्मक | गुणात्मक व मात्रात्मक |
| कब तक | परिपक्वता तक (लगभग किशोरावस्था के अंत तक) | जीवन-पर्यंत |
| मापन | सरल, प्रत्यक्ष | कठिन; निरीक्षण व परीक्षण से |
| व्यापकता | संकुचित — एक पक्ष | व्यापक — सभी पक्ष |
| उदाहरण | लंबाई 110 सेमी से 125 सेमी होना | बच्चे का "यदि–तो" वाले वाक्यों में तर्क करने लगना |
| संबंध | वृद्धि के बिना भी कुछ विकास संभव (जैसे लंबाई रुकने के बाद भी विचार का विकास) | विकास में वृद्धि सम्मिलित |
3.2 परिपक्वता और अधिगम
विकास दो प्रक्रियाओं से होता है — परिपक्वता (Maturation), यानी आनुवंशिक रूप से निर्धारित, आंतरिक रूप से होने वाला स्वाभाविक विकास (जैसे बैठना, चलना), और अधिगम (Learning), यानी अनुभव व अभ्यास से आने वाला परिवर्तन (जैसे साइकिल चलाना, पढ़ना)। कोई भी कौशल तभी सिखाया जा सकता है जब बच्चा उसके लिए परिपक्व हो — इसे तत्परता (Readiness) कहते हैं। जल्दबाज़ी में दिया गया प्रशिक्षण, परिपक्वता से पहले, विशेष लाभ नहीं देता।
4. विकास के सिद्धांत
विकास के सिद्धांत वे सामान्य नियम हैं जो लगभग सभी बच्चों पर लागू होते हैं। शिक्षक इन्हें जानकर पाठ्यक्रम, शिक्षण-विधि और अपेक्षाएँ बच्चे की आयु और क्षमता के अनुसार तय करता है।
| सिद्धांत | अर्थ | उदाहरण | शिक्षक के लिए संकेत |
|---|---|---|---|
| निरंतरता (Continuity) | विकास बिना रुके, धीरे-धीरे, लगातार चलता है; कोई छलाँग नहीं | भाषा: कूजन → बबलाना → शब्द → वाक्य | पिछली कक्षा के ज्ञान से नई बात जोड़ें |
| निश्चित क्रम (Sequence) | विकास एक निश्चित, पूर्वानुमेय क्रम में होता है | बैठना → खिसकना/घुटनों पर चलना → खड़ा होना → चलना | सरल से जटिल क्रम में पढ़ाएँ |
| मस्तकाधोमुखी (Cephalocaudal) | सिर से पैर की ओर | पहले सिर संभालना, फिर बैठना, बाद में चलना | — |
| समीप-दूराभिमुख (Proximodistal) | केंद्र (धड़) से बाहर (अंगों के सिरों) की ओर | पहले कंधे-भुजा का नियंत्रण, बाद में उँगलियों का | छोटे बच्चों से बारीक लेखन की जल्दी अपेक्षा न करें |
| सामान्य से विशिष्ट (General to Specific) | पहले सामान्य/समग्र प्रतिक्रिया, फिर विशिष्ट | पूरी हथेली से पकड़ना → अँगूठा-तर्जनी से पकड़ना; हर पुरुष को "पापा" → केवल पिता को | स्थूल गामक कौशल पहले, सूक्ष्म बाद में |
| वैयक्तिक भिन्नता (Individual Differences) | क्रम सबका समान, पर गति व मात्रा हर बच्चे की अलग | दो जुड़वाँ भी अलग आयु में बोलना शुरू कर सकते हैं | तुलना न करें; विभेदित शिक्षण अपनाएँ |
| वंशानुक्रम-वातावरण की अंतःक्रिया | विकास दोनों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है | लंबाई की संभावना जीन से, वास्तविक लंबाई पोषण से भी | समृद्ध, सुरक्षित कक्षा-वातावरण दें |
| परस्पर संबंध (Interrelation) | विकास के सभी आयाम एक-दूसरे से जुड़े हैं | बीमार बच्चा पढ़ाई और खेल दोनों में पिछड़ता है | समग्र (Holistic) विकास पर ध्यान |
| एकीकरण (Integration) | पहले पूर्ण, फिर अंग, फिर अंगों का एकीकरण | पहले पूरा हाथ, फिर उँगलियाँ, फिर दोनों का समन्वय | — |
| पूर्वानुमेयता (Predictability) | क्रम निश्चित होने से विकास का अनुमान लगाया जा सकता है | आयु-मानक (Developmental Norms) | आयु-उपयुक्त गतिविधियाँ चुनें |
| भिन्न-भिन्न गति | हर अंग और हर आयाम की गति अलग; जीवन के हर दौर में गति अलग | मस्तिष्क का विकास शीघ्र; प्रजनन अंगों का किशोरावस्था में | — |
| वर्तुलाकार / सर्पिल (Spiral) | विकास सीधी रेखा में नहीं; कुछ आगे बढ़कर ठहराव, फिर आगे | नया कौशल सीखते समय पुराने में थोड़ी वापसी | पुनरावृत्ति और समेकन का समय दें |
| सिर्फ़ परिपक्वता नहीं, अधिगम भी | विकास परिपक्वता और अधिगम दोनों का परिणाम | चलना (परिपक्वता), तैरना (अधिगम) | तत्परता देखकर सिखाएँ |
4.1 दिशा के दो सिद्धांत — अलग से याद रखें
| सिद्धांत | हिंदी नाम | दिशा | पहचान-वाक्य |
|---|---|---|---|
| Cephalocaudal | मस्तकाधोमुखी / शिरःपदाभिमुख | सिर → पैर (ऊपर से नीचे) | "बच्चा पहले गर्दन संभालता है, फिर बैठता है, फिर चलता है।" |
| Proximodistal | समीप-दूराभिमुख / निकट-दूर | केंद्र → परिधि (भीतर से बाहर) | "बच्चा पहले बाँह घुमाता है, बाद में उँगलियों से पेंसिल पकड़ता है।" |
दोनों ही "दिशा का सिद्धांत" कहलाते हैं, इसलिए प्रश्न में "सिर से पैर" या "केंद्र से बाहर" — इन शब्दों पर ध्यान दें।
5. विकास की अवस्थाएँ
विकास सतत है, पर अध्ययन की सुविधा के लिए उसे अवस्थाओं में बाँटा जाता है। अलग-अलग पुस्तकों में आयु-सीमाएँ थोड़ी भिन्न हैं — इसलिए परीक्षा में अवस्था की विशेषता पहचानना अधिक महत्वपूर्ण है, एक-एक वर्ष की सीमा नहीं।
| अवस्था | भारतीय पाठ्यपुस्तकों में प्रचलित आयु | NCERT / CTET शैली का विभाजन |
|---|---|---|
| गर्भावस्था (Prenatal) | गर्भधारण से जन्म तक (लगभग 9 माह) | Prenatal period |
| शैशवावस्था (Infancy) | जन्म से 5–6 वर्ष (कई पुस्तकें 0–2 वर्ष को ही शैशव मानती हैं) | Infancy / Toddlerhood: 0–2 वर्ष |
| प्रारंभिक बाल्यावस्था (Early Childhood) | 2–6 वर्ष | Early childhood: 2–6 वर्ष (पूर्व-विद्यालयी आयु) |
| उत्तर बाल्यावस्था (Later Childhood) | 6–12 वर्ष | Middle & later childhood: 6–11/12 वर्ष |
| किशोरावस्था (Adolescence) | 12–18 वर्ष (कुछ पुस्तकें 12–19 या 13–19) | Adolescence: लगभग 11/12–18 वर्ष |
| प्रौढ़ावस्था (Adulthood) | 18 वर्ष के बाद | Early, middle, late adulthood |
स्मरण रहे: REET लेवल 1 के बच्चे (कक्षा 1–5, लगभग 6–11 वर्ष) मुख्यतः उत्तर बाल्यावस्था में हैं; लेवल 2 के बच्चे (कक्षा 6–8, लगभग 11–14 वर्ष) पूर्व-किशोरावस्था / प्रारंभिक किशोरावस्था में हैं।
6. प्रत्येक अवस्था की विशेषताएँ
6.1 शैशवावस्था (जन्म से लगभग 2 वर्ष, विस्तृत अर्थ में 5–6 वर्ष)
| पक्ष | प्रमुख विशेषता |
|---|---|
| शारीरिक | जीवन में सबसे तीव्र वृद्धि; पहले वर्ष में भार लगभग तिगुना; गामक विकास का क्रम — सिर संभालना, बैठना, खड़ा होना, चलना |
| संज्ञानात्मक | इंद्रियों और क्रियाओं से सीखना; वस्तु-स्थायित्व का विकास (पियाजे — संवेदी-गामक अवस्था) |
| भाषा | रोना → कूजन → बबलाना → पहला शब्द (लगभग 1 वर्ष) → दो शब्दों के वाक्य (लगभग 2 वर्ष) |
| संवेगात्मक | संवेग तीव्र, अस्थायी और शीघ्र बदलने वाले; पहले सामान्य उत्तेजना, बाद में भिन्न संवेग |
| सामाजिक | माता/देखभालकर्ता से लगाव (Attachment); अजनबी से डर; अनुकरण द्वारा सीखना |
| अन्य | दूसरों पर निर्भरता; आत्म-केंद्रित (आत्म-प्रेम); मूल प्रवृत्तियों पर आधारित व्यवहार; बार-बार दोहराने की प्रवृत्ति |
शैशवावस्था को "भावी जीवन की आधारशिला" कहा जाता है, क्योंकि इस काल में बनी आदतें, लगाव और भरोसा आगे के व्यक्तित्व की नींव बनते हैं।
6.2 प्रारंभिक बाल्यावस्था (2–6 वर्ष)
| पक्ष | प्रमुख विशेषता |
|---|---|
| शारीरिक | वृद्धि की गति शैशव से धीमी; दौड़ना, कूदना, चढ़ना — स्थूल गामक कौशल; सूक्ष्म कौशल धीरे-धीरे |
| संज्ञानात्मक | प्रतीकात्मक खेल, कल्पना, "क्यों?" वाले प्रश्न (जिज्ञासा); आत्म-केंद्रित चिंतन (पियाजे — पूर्व-संक्रियात्मक) |
| भाषा | शब्द-भंडार में तीव्र वृद्धि; वाक्य-रचना का विकास |
| सामाजिक | समानांतर खेल से सहयोगी खेल की ओर; परिवार के बाहर साथियों से संपर्क |
| उपनाम | खिलौनों की आयु, पूर्व-विद्यालयी आयु, प्रश्न पूछने की आयु |
6.3 उत्तर बाल्यावस्था (6–12 वर्ष)
| पक्ष | प्रमुख विशेषता |
|---|---|
| शारीरिक | वृद्धि धीमी और स्थिर; दूध के दाँत गिरकर स्थायी दाँत; गामक कौशलों में दक्षता |
| संज्ञानात्मक | मूर्त वस्तुओं पर तार्किक चिंतन, संरक्षण, वर्गीकरण, क्रमबद्धता (पियाजे — मूर्त संक्रियात्मक) |
| सामाजिक | समूह/टोली बनाना, समूह के नियमों के प्रति निष्ठा; समलिंगी मित्रता की प्रवृत्ति |
| संवेगात्मक | संवेगों पर कुछ नियंत्रण; संवेगों की अभिव्यक्ति शिष्ट होने लगती है |
| रुचियाँ | संग्रह की प्रवृत्ति (टिकट, पत्थर, सिक्के), रचनात्मक कार्य, खेल-कूद, घूमने की इच्छा |
| नैतिक | नियमों और न्याय की समझ; सही-गलत का बोध बढ़ना |
| उपनाम | टोली/गिरोह की आयु, प्रारंभिक विद्यालयी आयु, "छद्म-परिपक्वता" की आयु (कुछ पुस्तकों में) |
6.4 किशोरावस्था (लगभग 12–18 वर्ष)
| पक्ष | प्रमुख विशेषता |
|---|---|
| शारीरिक | यौवनारंभ (Puberty); वृद्धि-उछाल (Growth Spurt); गौण लैंगिक लक्षण; लड़कियों में यह सामान्यतः लड़कों से कुछ पहले |
| संज्ञानात्मक | अमूर्त चिंतन, परिकल्पना बनाकर तर्क करना (पियाजे — औपचारिक संक्रियात्मक) |
| संवेगात्मक | संवेगों में तीव्रता और अस्थिरता; मनोदशा में जल्दी बदलाव; दिवास्वप्न |
| सामाजिक | साथी-समूह (Peer Group) का प्रभाव सर्वाधिक; विषमलिंगी आकर्षण; स्वतंत्रता की चाह |
| व्यक्तित्व | पहचान (Identity) की खोज (एरिक्सन — पहचान बनाम भूमिका-भ्रम); आदर्शवाद; वीर-पूजा |
| व्यावसायिक | भविष्य और व्यवसाय के प्रति चिंता — मार्गदर्शन व परामर्श की आवश्यकता |
| उपनाम | तूफान और तनाव की अवस्था (स्टेनली हॉल), जीवन का संक्रमण काल, समस्याओं की आयु |
किशोरों के लिए शिक्षक को मित्रवत मार्गदर्शक बनना चाहिए — उनके विचारों का सम्मान, चर्चा और जिम्मेदारी के अवसर, यौन व स्वास्थ्य शिक्षा तथा व्यावसायिक मार्गदर्शन। कठोर नियंत्रण और सार्वजनिक अपमान से विद्रोह बढ़ता है।
7. विकास के आयाम (Domains)
| आयाम | क्या शामिल है | कक्षा-उदाहरण |
|---|---|---|
| शारीरिक / गामक | लंबाई, भार, अंग-विकास; स्थूल गामक (दौड़ना, कूदना) और सूक्ष्म गामक (लिखना, काटना, बटन लगाना) | कक्षा 1 में मोटी पेंसिल और बड़ी रेखाएँ |
| संज्ञानात्मक | प्रत्यक्षीकरण, स्मृति, ध्यान, चिंतन, तर्क, समस्या-समाधान | वस्तुओं को रंग व आकार से छाँटना |
| भाषिक | सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना; शब्द-भंडार, व्याकरण | कहानी सुनकर अपने शब्दों में सुनाना |
| संवेगात्मक | भावनाओं की पहचान, अभिव्यक्ति और नियंत्रण | गुस्सा आने पर "मुझे बुरा लगा" कह पाना |
| सामाजिक | दूसरों के साथ व्यवहार, सहयोग, साझा करना, नियम मानना | समूह-कार्य में बारी लेना |
| नैतिक | सही-गलत का बोध, न्याय, ईमानदारी, मूल्य | खेल में बेईमानी पर स्वयं आपत्ति करना |
NCF 2005 बच्चे के समग्र विकास पर बल देता है। ये आयाम अलग-अलग खानों में नहीं चलते — कुपोषित बच्चा (शारीरिक) ध्यान कम लगा पाता है (संज्ञानात्मक) और समूह से कटता है (सामाजिक)। इसलिए "कौन-सा कथन सही है — विकास के आयाम परस्पर संबंधित हैं" जैसे प्रश्न का उत्तर सदा परस्पर-संबंध ही होता है।
8. वंशानुक्रम और वातावरण (Nature–Nurture)
वंशानुक्रम (Heredity) वे गुण हैं जो बच्चा जन्म के समय माता-पिता से जीनों (Genes) द्वारा पाता है — रंग, आँखों का रंग, रक्त-समूह, शारीरिक ढाँचा और कुछ क्षमताओं की संभावना। मनुष्य की कोशिका में 23 जोड़े (46) गुणसूत्र होते हैं; आधे माता से, आधे पिता से। वातावरण (Environment) गर्भ से लेकर जीवन-भर मिलने वाले सभी बाहरी प्रभाव हैं — पोषण, परिवार, विद्यालय, समाज, संस्कृति, भाषा, अवसर।
| आधार | वंशानुक्रम | वातावरण |
|---|---|---|
| स्रोत | माता-पिता के जीन | बाहरी परिस्थितियाँ |
| कब | गर्भधारण के समय निश्चित | गर्भ से जीवन-भर |
| देता है | संभावनाएँ / सीमाएँ | उन संभावनाओं को साकार होने के अवसर |
| परिवर्तन | बदला नहीं जा सकता | सुधारा जा सकता है (शिक्षक की भूमिका यहीं) |
| उदाहरण | आँखों का रंग, रक्त-समूह | भाषा, बोली, खान-पान, मूल्य |
8.1 अंतःक्रिया — सही दृष्टिकोण
आधुनिक मनोविज्ञान और NCERT का दृष्टिकोण यह है कि विकास वंशानुक्रम और वातावरण दोनों की अंतःक्रिया का परिणाम है — दोनों में से कोई एक अकेले पर्याप्त नहीं। प्रचलित सूत्र है विकास = वंशानुक्रम × वातावरण; गुणनफल इसलिए कि यदि किसी एक का मान शून्य हो तो विकास भी शून्य होगा। बीज (वंशानुक्रम) में पेड़ बनने की संभावना है, पर मिट्टी, पानी और धूप (वातावरण) के बिना वह पेड़ नहीं बनता।
8.2 अध्ययन — संक्षेप में
| अध्ययन | किसने | निष्कर्ष की दिशा |
|---|---|---|
| जुड़वाँ अध्ययन (Twin Studies) | फ्रांसिस गाल्टन ने जुड़वाँ विधि को आरंभ किया | एकयुग्मज (समरूप) जुड़वाँ के जीन समान होते हैं; अलग पाले जाने पर भी समानताएँ वंशानुक्रम का, और अंतर वातावरण का प्रभाव दिखाते हैं |
| ज्यूक्स परिवार | डगडेल | वंशानुक्रम के पक्ष में उद्धृत |
| कालीकाक परिवार | गोडार्ड | वंशानुक्रम के पक्ष में उद्धृत |
इन पुराने पारिवारिक अध्ययनों की बाद में आलोचना हुई कि उनमें वातावरण के प्रभाव को अलग नहीं किया गया था। परीक्षा के लिए सार यही है: समरूप जुड़वाँ के जीन समान होते हैं, इसलिए उनके बीच दिखने वाला अंतर मुख्यतः वातावरण के कारण माना जाता है।
8.3 शिक्षक के लिए अर्थ
- बच्चे की "जन्मजात कमी" मानकर उसे छोड़ना गलत — वातावरण सुधारकर बहुत कुछ बदला जा सकता है।
- हर बच्चे की क्षमताएँ अलग हैं — एक जैसी अपेक्षा न रखें (वैयक्तिक भिन्नता)।
- मध्याह्न भोजन, स्वास्थ्य-जाँच, सुरक्षित और प्रेरक कक्षा — ये सब वातावरण के पक्ष हैं जिन पर विद्यालय का नियंत्रण है।
9. समाजीकरण और उसकी संस्थाएँ
समाजीकरण (Socialisation) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बच्चा अपने समाज के मूल्य, मानदंड, रीति-रिवाज, भाषा और व्यवहार सीखकर समाज का सक्रिय सदस्य बनता है। यह जन्म से शुरू होकर जीवन-भर चलती है।
| संस्था | प्रकार | भूमिका |
|---|---|---|
| परिवार | प्राथमिक, अनौपचारिक — सबसे पहली | भाषा, आदतें, मूल्य, लगाव; बच्चे की पहली पाठशाला |
| साथी-समूह (Peer Group) | प्राथमिक, अनौपचारिक | सहयोग, प्रतिस्पर्धा, बराबरी का व्यवहार; किशोरावस्था में प्रभाव सर्वाधिक |
| विद्यालय | द्वितीयक, औपचारिक | योजनाबद्ध रूप से ज्ञान, कौशल, अनुशासन, नागरिकता; विविध पृष्ठभूमि के बच्चों से मेल |
| समुदाय / पड़ोस | द्वितीयक | सामाजिक नियम, त्योहार, परंपराएँ |
| जनसंचार माध्यम (टीवी, इंटरनेट) | द्वितीयक, अनौपचारिक | विचार, फैशन, मूल्यों पर व्यापक प्रभाव |
| धार्मिक व सांस्कृतिक संस्थाएँ | द्वितीयक | आस्था, नैतिक मूल्य, अनुष्ठान |
प्राथमिक समाजीकरण बचपन में परिवार के भीतर होता है; द्वितीयक समाजीकरण विद्यालय, कार्यस्थल और समाज की बड़ी संस्थाओं से होता है। शिक्षक की भूमिका — कक्षा में लोकतांत्रिक माहौल, समूह-कार्य, सहयोगी खेल, विविधता का सम्मान, और लैंगिक या जातिगत रूढ़ियों को न दोहराना।
10. कक्षा में अनुप्रयोग — सिद्धांत से व्यवहार
| कक्षा-स्थिति | लागू सिद्धांत | शिक्षक को क्या करना चाहिए |
|---|---|---|
| कक्षा 1 के कुछ बच्चे पेंसिल ठीक से नहीं पकड़ पाते | समीप-दूराभिमुख, सामान्य से विशिष्ट | पहले बड़ी रेखाएँ, मिट्टी, रंग भरना; फिर छोटे अक्षर |
| एक ही आयु के बच्चे अलग गति से पढ़ना सीख रहे हैं | वैयक्तिक भिन्नता | विभेदित गतिविधियाँ, अतिरिक्त समय; तुलना नहीं |
| गिनती सीखने से पहले बच्चों को वस्तुएँ छाँटना कराया जाता है | निश्चित क्रम / सरल से जटिल | पूर्व-संख्या कौशल से शुरुआत |
| किशोर छात्र बार-बार बहस करता है | किशोरावस्था की स्वतंत्रता व पहचान की खोज | चर्चा का अवसर, सम्मानपूर्ण संवाद, जिम्मेदारी |
| कुपोषित बच्चा कक्षा में थका और उदास रहता है | आयामों का परस्पर संबंध, वातावरण का प्रभाव | स्वास्थ्य व पोषण पर ध्यान, अभिभावक से संवाद |
| 9–10 वर्ष के बच्चे टोलियाँ बनाकर खेलते हैं | उत्तर बाल्यावस्था — टोली की आयु | समूह-परियोजनाएँ, टीम खेल, नेतृत्व के अवसर |
इन स्थितियों में संज्ञानात्मक पक्ष को गहराई से समझने के लिए पियाजे की चार अवस्थाएँ और सामाजिक-नैतिक पक्ष के लिए वाइगोत्स्की, कोहलबर्ग और एरिक्सन के नोट्स साथ पढ़ें।
11. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: "वृद्धि जीवन-भर चलती है"
गलत। वृद्धि एक आयु के बाद रुक जाती है; विकास जीवन-पर्यंत चलता है। यदि विकल्प में "विकास एक निश्चित आयु पर रुक जाता है" लिखा हो तो वह भी गलत है।
Trap 2: मस्तकाधोमुखी बनाम समीप-दूराभिमुख
| प्रश्न में शब्द | सिद्धांत |
|---|---|
| सिर से पैर, ऊपर से नीचे, पहले सिर संभालना फिर चलना | मस्तकाधोमुखी (Cephalocaudal) |
| केंद्र से बाहर, धड़ से उँगलियों की ओर, भुजा पहले फिर उँगलियाँ | समीप-दूराभिमुख (Proximodistal) |
| पूरी हथेली से पकड़ना, फिर उँगलियों से | सामान्य से विशिष्ट (कई पुस्तकें इसे समीप-दूराभिमुख का उदाहरण भी मानती हैं) |
तीसरी पंक्ति पर पुस्तकों में दोहराव है, इसलिए परीक्षा में दोनों विकल्प एक साथ हों तो प्रश्न के बाकी शब्द ("केंद्र से" या "सामान्य प्रतिक्रिया से") देखकर निर्णय करें।
Trap 3: वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ "क्रम अलग" नहीं
सभी बच्चों में विकास का क्रम समान होता है (बैठना → खड़ा होना → चलना); भिन्नता गति और मात्रा में होती है। "हर बच्चे का विकास-क्रम अलग होता है" — गलत।
Trap 4: "विकास केवल वंशानुक्रम से" या "केवल वातावरण से"
दोनों अतिवादी विकल्प गलत हैं। सही उत्तर हमेशा "दोनों की अंतःक्रिया" है। सूत्र में योग (+) नहीं, गुणनफल (×) याद रखें।
Trap 5: समाजीकरण की "प्राथमिक" संस्था विद्यालय नहीं
विद्यालय महत्वपूर्ण है, पर प्राथमिक (पहली) संस्था परिवार है। विद्यालय औपचारिक/द्वितीयक संस्था है।
Trap 6: "तूफान और तनाव" बाल्यावस्था नहीं
यह किशोरावस्था का उपनाम है। उत्तर बाल्यावस्था का उपनाम टोली की आयु है। "खिलौनों की आयु" प्रारंभिक बाल्यावस्था है।
Trap 7: आयु-सीमा पर अड़ना
शैशवावस्था 0–2 है या 0–5/6 — दोनों रूप पुस्तकों में मिलते हैं। प्रश्न में दिए विकल्पों में से विशेषता के आधार पर चुनें; आयु पर विवादित विकल्प हों तो जो विकल्प उस अवस्था की पहचान-विशेषता से मेल खाए वही लें।
12. Most-Asked रिवीज़न तालिका
| # | प्रश्न / बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | वृद्धि किस प्रकार का परिवर्तन है? | मात्रात्मक |
| 2 | विकास किस प्रकार का परिवर्तन है? | गुणात्मक व मात्रात्मक |
| 3 | कौन जीवन-पर्यंत चलता है? | विकास |
| 4 | कौन सरलता से मापा जा सकता है? | वृद्धि |
| 5 | व्यापक अवधारणा कौन? | विकास (वृद्धि उसमें शामिल) |
| 6 | सिर से पैर की ओर विकास | मस्तकाधोमुखी (Cephalocaudal) |
| 7 | केंद्र से परिधि की ओर विकास | समीप-दूराभिमुख (Proximodistal) |
| 8 | पहले गर्दन संभालना, फिर बैठना | मस्तकाधोमुखी |
| 9 | पहले बाँह, फिर उँगलियाँ | समीप-दूराभिमुख |
| 10 | हर पुरुष को "पापा", बाद में केवल पिता को | सामान्य से विशिष्ट |
| 11 | विकास बिना रुके धीरे-धीरे | निरंतरता |
| 12 | बैठना → खड़ा होना → चलना | निश्चित क्रम |
| 13 | एक ही आयु के बच्चों की अलग गति | वैयक्तिक भिन्नता |
| 14 | विकास के आयाम आपस में जुड़े | परस्पर संबंध का सिद्धांत |
| 15 | विकास का अनुमान लगाया जा सकता है | पूर्वानुमेयता |
| 16 | विकास सीधी रेखा में नहीं, ठहराव के साथ | वर्तुलाकार / सर्पिल |
| 17 | विकास = ? | वंशानुक्रम × वातावरण |
| 18 | स्वाभाविक, आनुवंशिक रूप से निर्धारित विकास | परिपक्वता |
| 19 | अनुभव व अभ्यास से परिवर्तन | अधिगम |
| 20 | सिखाने से पहले जिस स्थिति का होना ज़रूरी | तत्परता (Readiness) |
| 21 | सबसे तीव्र शारीरिक वृद्धि (जन्म के बाद) | शैशवावस्था (पहले दो वर्ष) |
| 22 | भावी जीवन की आधारशिला | शैशवावस्था |
| 23 | अनुकरण द्वारा सीखना, अजनबी से डर | शैशवावस्था |
| 24 | खिलौनों की आयु, "क्यों?" की आयु | प्रारंभिक बाल्यावस्था |
| 25 | प्रतीकात्मक/कल्पनात्मक खेल | प्रारंभिक बाल्यावस्था |
| 26 | टोली / गिरोह की आयु | उत्तर बाल्यावस्था |
| 27 | संग्रह की प्रवृत्ति | उत्तर बाल्यावस्था |
| 28 | मूर्त वस्तुओं पर तार्किक चिंतन | उत्तर बाल्यावस्था |
| 29 | तूफान और तनाव की अवस्था | किशोरावस्था |
| 30 | "तूफान और तनाव" किसने कहा? | जी. स्टेनली हॉल |
| 31 | वृद्धि-उछाल (Growth Spurt) | किशोरावस्था |
| 32 | पहचान की खोज | किशोरावस्था |
| 33 | साथी-समूह का सर्वाधिक प्रभाव | किशोरावस्था |
| 34 | अमूर्त चिंतन, परिकल्पना | किशोरावस्था |
| 35 | व्यावसायिक मार्गदर्शन की सबसे अधिक ज़रूरत | किशोरावस्था |
| 36 | मनुष्य में गुणसूत्र | 23 जोड़े (46) |
| 37 | वंशानुगत गुणों के वाहक | जीन |
| 38 | जुड़वाँ विधि किससे जुड़ी | फ्रांसिस गाल्टन |
| 39 | समरूप जुड़वाँ | एकयुग्मज — जीन समान |
| 40 | भाषा, बोली, खान-पान किससे? | वातावरण |
| 41 | रक्त-समूह, आँखों का रंग किससे? | वंशानुक्रम |
| 42 | समाजीकरण की पहली संस्था | परिवार |
| 43 | समाजीकरण की औपचारिक संस्था | विद्यालय |
| 44 | साथी-समूह किस प्रकार की संस्था | प्राथमिक, अनौपचारिक |
| 45 | समाजीकरण कब तक? | जीवन-भर |
| 46 | स्थूल गामक कौशल | दौड़ना, कूदना, चढ़ना |
| 47 | सूक्ष्म गामक कौशल | लिखना, बटन लगाना, कैंची चलाना |
| 48 | पहले कौन — स्थूल या सूक्ष्म गामक? | स्थूल |
| 49 | भाषा-विकास का आरंभिक क्रम | रोना → कूजन → बबलाना → शब्द → वाक्य |
| 50 | NCF 2005 किस विकास पर बल देता है | समग्र विकास |
| 51 | REET लेवल 1 के बच्चे किस अवस्था में | मुख्यतः उत्तर बाल्यावस्था |
| 52 | बच्चे की तुलना किससे करें? | उसके अपने पिछले प्रदर्शन से |
13. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
पैटर्न 1 — सिद्धांत की पहचान: "एक शिशु पहले अपना सिर उठाना सीखता है, फिर बैठना और अंत में चलना। यह विकास के किस सिद्धांत का उदाहरण है?" — उत्तर: मस्तकाधोमुखी।
पैटर्न 2 — अंतर वाले कथन: "निम्न में से कौन-सा कथन वृद्धि के संबंध में सही है? (a) जीवन-पर्यंत चलती है (b) गुणात्मक होती है (c) मापी जा सकती है (d) सभी आयामों से संबंधित है" — उत्तर: (c)।
पैटर्न 3 — कक्षा-अनुप्रयोग: "कक्षा 3 की एक शिक्षिका जानती है कि सभी बच्चे एक ही गति से नहीं सीखते। उसे क्या करना चाहिए?" — उत्तर: बच्चों की आवश्यकता के अनुसार विविध गतिविधियाँ और समय देना (वैयक्तिक भिन्नता)।
पैटर्न 4 — अवस्था की विशेषता: "बच्चों में समूह बनाने और समूह के प्रति निष्ठा की प्रवृत्ति किस अवस्था में प्रबल होती है?" — उत्तर: उत्तर बाल्यावस्था।
पैटर्न 5 — वंशानुक्रम-वातावरण: "समरूप जुड़वाँ बच्चों को अलग-अलग परिवारों में पाला गया और उनकी भाषा व रुचियों में अंतर पाया गया। यह किसका प्रभाव दर्शाता है?" — उत्तर: वातावरण।
पैटर्न 6 — समाजीकरण: "विद्यालय समाजीकरण की कौन-सी संस्था है?" — उत्तर: औपचारिक (द्वितीयक)।
14. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. वृद्धि = "वजन-ऊँचाई", विकास = "व्यवहार-योग्यता": वृद्धि तराज़ू और फीते से नापो; विकास आँख से देखो।
2. "मस्तक से पद, मध्य से उँगली": मस्तकाधोमुखी = मस्तक (सिर) से अधो (नीचे); समीप-दूर = समीप (केंद्र) से दूर (उँगलियाँ)।
3. "क्रम एक, चाल अनेक": विकास का क्रम सबका एक, गति सबकी अलग — वैयक्तिक भिन्नता।
4. "बीज × मिट्टी = पेड़": वंशानुक्रम × वातावरण = विकास; एक भी शून्य तो परिणाम शून्य।
5. अवस्थाओं के उपनाम — "खिलौना, टोली, तूफान": प्रारंभिक बाल्यावस्था = खिलौने, उत्तर बाल्यावस्था = टोली, किशोरावस्था = तूफान-तनाव।
6. समाजीकरण — "घर पहला, स्कूल औपचारिक": परिवार प्राथमिक; विद्यालय द्वितीयक-औपचारिक; साथी किशोर उम्र में सबसे भारी।
15. कथन अभ्यास
वृद्धि मात्रात्मक परिवर्तन है और इसे मापा जा सकता है। — सही।
विकास एक निश्चित आयु पर रुक जाता है। — गलत (विकास जीवन-पर्यंत चलता है; वृद्धि रुकती है)।
विकास की अवधारणा में वृद्धि सम्मिलित होती है। — सही।
मस्तकाधोमुखी सिद्धांत के अनुसार विकास पैरों से सिर की ओर होता है। — गलत (सिर से पैर की ओर)।
बच्चा उँगलियों पर नियंत्रण से पहले बाँहों पर नियंत्रण पाता है — यह समीप-दूराभिमुख सिद्धांत है। — सही।
वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ है कि हर बच्चे में विकास का क्रम अलग होता है। — गलत (क्रम समान, गति व मात्रा अलग)।
विकास वंशानुक्रम और वातावरण की अंतःक्रिया का परिणाम है। — सही।
किशोरावस्था को "टोली की आयु" कहा जाता है। — गलत (टोली की आयु उत्तर बाल्यावस्था; किशोरावस्था तूफान-तनाव की अवस्था)।
परिवार समाजीकरण की प्राथमिक संस्था है। — सही।
विकास के शारीरिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक आयाम एक-दूसरे से स्वतंत्र होते हैं। — गलत (परस्पर संबंधित होते हैं)।
समरूप जुड़वाँ बच्चों के जीन समान होते हैं। — सही।
स्थूल गामक कौशल सूक्ष्म गामक कौशल से पहले विकसित होते हैं। — सही।
16. एक दिन पहले — 14 रेखाएँ
- वृद्धि = मात्रात्मक, मापनीय, एक आयु तक; विकास = गुणात्मक + मात्रात्मक, जीवन-पर्यंत
- विकास व्यापक है, वृद्धि उसका एक भाग
- निरंतरता — विकास बिना रुके, धीरे-धीरे
- निश्चित क्रम — सबका क्रम समान और पूर्वानुमेय
- मस्तकाधोमुखी = सिर से पैर; समीप-दूराभिमुख = केंद्र से बाहर
- सामान्य से विशिष्ट — हथेली से पकड़ना, फिर उँगलियों से
- वैयक्तिक भिन्नता — क्रम समान, गति अलग; तुलना नहीं
- विकास = वंशानुक्रम × वातावरण — अंतःक्रिया
- शैशव = आधारशिला, अनुकरण; प्रारंभिक बाल्य = खिलौने, कल्पना
- उत्तर बाल्य = टोली की आयु, संग्रह, मूर्त तर्क
- किशोर = तूफान-तनाव (हॉल), पहचान की खोज, साथी-समूह
- आयु-सीमाएँ पुस्तकों में थोड़ी भिन्न — विशेषता से पहचानें
- परिवार = प्राथमिक संस्था; विद्यालय = औपचारिक/द्वितीयक
- आयाम परस्पर संबंधित — NCF 2005 का समग्र विकास
17. अभ्यास
नोट पढ़ने के बाद नीचे दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। हर प्रश्न में पहले देखें कि वह सिद्धांत पूछ रहा है, अवस्था की विशेषता या शिक्षक की भूमिका। पूरे बाल विकास खंड के मिश्रित अभ्यास के लिए REET लेवल 1 टेस्ट सीरीज़ या REET लेवल 2 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
18. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
वृद्धि और विकास का अध्याय बाल विकास की भाषा सिखाता है। वृद्धि शरीर का बढ़ना है, विकास पूरे व्यक्ति का बदलना। विकास निरंतर, क्रमबद्ध, सिर से पैर और केंद्र से बाहर की ओर, सामान्य से विशिष्ट की दिशा में चलता है, और हर बच्चे में उसकी गति अलग होती है। वंशानुक्रम संभावना देता है, वातावरण उसे साकार करता है — इसीलिए शिक्षक और विद्यालय का महत्व है। परीक्षा के अधिकांश प्रश्न इन्हीं सिद्धांतों को कक्षा की किसी स्थिति में छिपाकर पूछते हैं; स्थिति पढ़ते ही सिद्धांत पहचानना ही इस अध्याय की कुंजी है।
वृद्धि = मात्रात्मक, सीमित | विकास = गुणात्मक, जीवन-पर्यंत | सिर से पैर, केंद्र से बाहर, सामान्य से विशिष्ट | क्रम समान, गति अलग | विकास = वंशानुक्रम × वातावरण | परिवार प्राथमिक संस्था
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“वृद्धि और विकास — विकास के सिद्धांत, अवस्थाएँ, आयाम, वंशानुक्रम-वातावरण व समाजीकरण — REET/CTET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- वृद्धि, विकास के सिद्धांत और अवस्थाएँ — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
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महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
वृद्धि शरीर के आकार, लंबाई और भार में होने वाला मात्रात्मक परिवर्तन है जो एक आयु के बाद रुक जाता है। विकास गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों परिवर्तन है, जो जीवन-पर्यंत चलता है और जिसमें वृद्धि भी शामिल है।
निरंतरता, निश्चित क्रम, मस्तकाधोमुखी और समीप-दूराभिमुख दिशा, सामान्य से विशिष्ट, वैयक्तिक भिन्नता, परस्पर संबंध तथा वंशानुक्रम और वातावरण की अंतःक्रिया विकास के प्रमुख सिद्धांत हैं।
इसके अनुसार विकास सिर से पैर की ओर होता है। शिशु पहले गर्दन संभालता है, फिर बैठता है और अंत में चलता है।
विकास शरीर के केंद्र से बाहर की ओर होता है। बच्चा पहले कंधे और भुजा पर नियंत्रण पाता है, बाद में उँगलियों पर।
जी. स्टेनली हॉल ने किशोरावस्था को तूफान और तनाव (Storm and Stress) की अवस्था कहा। इस अवस्था में संवेग तीव्र और अस्थिर होते हैं।
उत्तर बाल्यावस्था (लगभग 6–12 वर्ष) को टोली की आयु कहते हैं, क्योंकि इस समय बच्चे समूह बनाते हैं और समूह के नियमों के प्रति निष्ठावान होते हैं।
विकास दोनों की अंतःक्रिया का परिणाम है; कोई एक अकेले पर्याप्त नहीं। इसे विकास = वंशानुक्रम × वातावरण के सूत्र से व्यक्त किया जाता है।
परिवार समाजीकरण की प्राथमिक और सबसे पहली संस्था है। विद्यालय समाजीकरण की औपचारिक (द्वितीयक) संस्था है।
प्रचलित रूप से शैशवावस्था जन्म से 5–6 वर्ष (कई पुस्तकों में 0–2), प्रारंभिक बाल्यावस्था 2–6, उत्तर बाल्यावस्था 6–12 और किशोरावस्था 12–18 वर्ष मानी जाती है। पुस्तकों में ये सीमाएँ थोड़ी भिन्न होती हैं।
सभी बच्चों में विकास का क्रम समान होता है पर गति अलग होती है। इसलिए शिक्षक को बच्चों की आपस में तुलना न करके उनकी आवश्यकता के अनुसार विविध गतिविधियाँ और समय देना चाहिए।
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