अधिगम के सिद्धांत — थॉर्नडाइक, पावलोव, स्किनर, कोहलर, बंडूरा, रचनावाद, अधिगम-अंतरण व पठार — REET
कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। प्रकाशन तिथि ऊपर और अंतिम संशोधन तिथि लेख के अंत में दी गई है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय
स्रोत आधार: REET व RSSB REET मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम का बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र खंड; NCERT/NCF 2005, RTE अधिनियम 2009 व राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल प्रावधान। शब्दशः पुस्तक पाठ नहीं।
सुयोग AI गुरु
नोट्स के मुख्य बिंदु, मॉक MCQ या डाउट पूछें
संक्षिप्त उत्तर: अधिगम (Learning) अनुभव और अभ्यास द्वारा व्यवहार में होने वाला अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है; थकान, दवा या परिपक्वता से होने वाले परिवर्तन अधिगम नहीं हैं। थॉर्नडाइक (भूखी बिल्ली, पहेली-बक्सा) — प्रयास और त्रुटि / संबंधवाद (S–R बंधन); तीन मुख्य नियम — तत्परता, अभ्यास, प्रभाव (परिणाम)। पावलोव (कुत्ता, घंटी, लार) — शास्त्रीय अनुबंधन: भोजन = UCS, लार = UCR, घंटी = CS, घंटी पर लार = CR; CS के बाद UCS बार-बार न मिले तो विलोपन, मिलते-जुलते उद्दीपक पर भी अनुक्रिया = सामान्यीकरण। स्किनर (चूहा, कबूतर, स्किनर-बॉक्स) — क्रियाप्रसूत (Operant) अनुबंधन: व्यवहार उसके परिणाम से नियंत्रित; पुनर्बलन व्यवहार को बढ़ाता है, दंड घटाता है — नकारात्मक पुनर्बलन दंड नहीं है (अप्रिय उद्दीपक हटाकर व्यवहार बढ़ाना)। कोहलर (चिंपैंज़ी सुल्तान, छड़ियाँ जोड़ना, बक्से रखना) — अंतर्दृष्टि (सूझ) अधिगम, गेस्टाल्ट संप्रदाय। बंडूरा (बोबो गुड़िया) — सामाजिक / अवलोकनात्मक अधिगम: ध्यान, धारण, पुनरुत्पादन, अभिप्रेरणा। रचनावाद (पियाजे, वाइगोत्स्की, ब्रूनर) — अधिगमकर्ता पूर्व-ज्ञान के आधार पर ज्ञान का सक्रिय निर्माण करता है; NCF 2005 इसी पर बल देता है। अधिगम-वक्र में प्रगति का रुक जाना पठार (Plateau) है, और एक स्थिति का अधिगम दूसरी पर प्रभाव डाले तो वह अधिगम-अंतरण है (धनात्मक, ऋणात्मक, शून्य)।
संक्षिप्त उत्तर
| सिद्धांतकार | सिद्धांत | प्रयोग / प्राणी | मुख्य नियम / शब्द |
|---|---|---|---|
| ई. एल. थॉर्नडाइक | प्रयास और त्रुटि; संबंधवाद (S–R बंधन) | भूखी बिल्ली, पहेली-बक्सा, बाहर मछली | तत्परता, अभ्यास, प्रभाव के नियम |
| इवान पावलोव | शास्त्रीय (अनुकूलित अनुक्रिया) अनुबंधन | कुत्ता, घंटी, भोजन, लार | UCS, UCR, CS, CR; विलोपन, सामान्यीकरण, विभेदन |
| बी. एफ. स्किनर | क्रियाप्रसूत (सक्रिय) अनुबंधन | चूहा (लीवर), कबूतर (चोंच); स्किनर-बॉक्स | पुनर्बलन, दंड, पुनर्बलन-अनुसूचियाँ, आकार देना (Shaping) |
| वोल्फगैंग कोहलर | अंतर्दृष्टि (सूझ) अधिगम; गेस्टाल्ट | चिंपैंज़ी सुल्तान, केला, छड़ियाँ, बक्से | पूर्ण की समझ, अचानक समाधान ("आहा!") |
| अल्बर्ट बंडूरा | सामाजिक / अवलोकनात्मक अधिगम | बच्चे, बोबो गुड़िया | मॉडलिंग; ध्यान, धारण, पुनरुत्पादन, अभिप्रेरणा; प्रतिनिधिक पुनर्बलन |
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| व्यवहार बढ़ाता है | पुनर्बलन (धनात्मक और नकारात्मक दोनों) |
| व्यवहार घटाता है | दंड |
| नकारात्मक पुनर्बलन | अप्रिय उद्दीपक हटाना → व्यवहार बढ़ता है |
| विलोपन के प्रति सबसे अधिक प्रतिरोधी अनुसूची | परिवर्तनशील अनुपात (Variable Ratio) |
| अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction) का आधार | स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन |
| अधिगम-वक्र में प्रगति रुकना | पठार (Plateau) |
2. सिलेबस में यह टॉपिक क्यों महत्वपूर्ण है?
"अधिगम की अवधारणा और सिद्धांत" REET लेवल 1 व 2, RSSB REET मुख्य परीक्षा और CTET के शिक्षाशास्त्र खंड की केंद्रीय इकाई है। प्रश्न तीन रूपों में आते हैं — मिलान (सिद्धांतकार–प्रयोग–प्राणी), शब्द-पहचान (यह नकारात्मक पुनर्बलन है या दंड) और कक्षा-अनुप्रयोग (शिक्षक की प्रशंसा, अवलोकन से सीखना, पठार दूर करना)। विकास की पृष्ठभूमि के लिए वृद्धि और विकास तथा रचनावाद की गहराई के लिए पियाजे और वाइगोत्स्की के नोट्स देखें।
परीक्षा उपयोगिता: ★★★★★
- REET लेवल 1 व लेवल 2 — अधिगम और शिक्षाशास्त्र
- RSSB REET मुख्य परीक्षा — शैक्षिक मनोविज्ञान
- CTET पेपर I व II — Learning and Pedagogy
- RPSC/RSSB शिक्षक भर्ती — शैक्षिक मनोविज्ञान
प्रश्न कैसे आते हैं?
- "बोबो गुड़िया प्रयोग किससे संबंधित है?" जैसे मिलान
- थॉर्नडाइक के नियमों की कक्षा-पहचान
- UCS/UCR/CS/CR पहचानना
- नकारात्मक पुनर्बलन बनाम दंड — सबसे बड़ा जाल
- पुनर्बलन-अनुसूचियाँ
- अंतर्दृष्टि अधिगम की विशेषताएँ
- रचनावादी कक्षा में शिक्षक की भूमिका
- अधिगम-अंतरण और पठार
3. अधिगम: अर्थ और विशेषताएँ
परिभाषा: अधिगम वह प्रक्रिया है जिसमें अनुभव, अभ्यास और प्रशिक्षण के फलस्वरूप व्यक्ति के व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन आता है। गेट्स और उनके सहयोगियों ने इसे "अनुभव और प्रशिक्षण द्वारा व्यवहार में परिमार्जन" कहा है, और स्किनर ने "व्यवहार में उत्तरोत्तर सामंजस्य की प्रक्रिया"।
| अधिगम है | अधिगम नहीं है |
|---|---|
| साइकिल चलाना सीखना | लंबाई बढ़ना (वृद्धि/परिपक्वता) |
| पहाड़े याद करना | थकान से काम की गति घटना |
| गर्म तवे से हाथ हटाना सीख लेना (अनुभव से) | गर्म तवे पर हाथ लगते ही हटना (प्रतिवर्त क्रिया) |
| नई भाषा बोलना | दवा या नशे से व्यवहार का अस्थायी परिवर्तन |
3.1 अधिगम की विशेषताएँ
| विशेषता | व्याख्या |
|---|---|
| व्यवहार में परिवर्तन | अधिगम का परिणाम व्यवहार (ज्ञान, कौशल, अभिवृत्ति) में दिखता है |
| अपेक्षाकृत स्थायी | अस्थायी परिवर्तन (थकान, बीमारी) अधिगम नहीं |
| अनुभव और अभ्यास से | परिपक्वता से होने वाला परिवर्तन अधिगम नहीं |
| जीवन-पर्यंत | जन्म से मृत्यु तक चलने वाली प्रक्रिया |
| सार्वभौमिक | हर प्राणी सीखता है |
| उद्देश्यपूर्ण व सक्रिय | अधिगमकर्ता की सक्रिय भागीदारी आवश्यक |
| सकारात्मक या नकारात्मक | अच्छी आदतें भी सीखी जाती हैं, बुरी भी |
| अंतरणीय | एक स्थिति का अधिगम दूसरी में प्रयोग हो सकता है |
| समायोजन में सहायक | व्यक्ति वातावरण के साथ बेहतर समायोजन करता है |
3.2 अधिगम के सिद्धांतों के दो प्रमुख वर्ग
| व्यवहारवादी (S–R) सिद्धांत | संज्ञानात्मक / क्षेत्र सिद्धांत |
|---|---|
| थॉर्नडाइक, पावलोव, स्किनर, वाटसन, हल | कोहलर (गेस्टाल्ट), टॉलमैन, पियाजे, ब्रूनर |
| बाहरी, दिखने वाले व्यवहार पर बल | भीतरी मानसिक प्रक्रियाओं, समझ और संगठन पर बल |
| अधिगम = उद्दीपक और अनुक्रिया का संबंध | अधिगम = पूर्ण स्थिति की समझ |
| पुनर्बलन और अभ्यास केंद्रीय | अंतर्दृष्टि, अर्थ और संरचना केंद्रीय |
बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत दोनों के बीच का सेतु माना जाता है, क्योंकि उसमें व्यवहारवादी पुनर्बलन के साथ ध्यान और धारण जैसी संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ भी हैं।
4. थॉर्नडाइक — प्रयास और त्रुटि सिद्धांत
अमेरिकी मनोवैज्ञानिक एडवर्ड ली थॉर्नडाइक ने अधिगम को उद्दीपक (S) और अनुक्रिया (R) के बीच बंधन का बनना माना, इसलिए उनका सिद्धांत संबंधवाद (Connectionism) या S–R बंधन सिद्धांत भी कहलाता है। उन्हें प्रायः शिक्षा-मनोविज्ञान के अग्रदूतों में गिना जाता है।
4.1 बिल्ली का प्रयोग
एक भूखी बिल्ली को पहेली-बक्से (Puzzle Box) में बंद किया गया; बक्से के बाहर मछली रखी गई। बक्से का दरवाज़ा एक चटखनी/लीवर दबाने से खुलता था। बिल्ली ने पहले बहुत-सी निरर्थक क्रियाएँ कीं — पंजे मारना, काटना, इधर-उधर कूदना — और संयोग से लीवर दब गया, दरवाज़ा खुला, मछली मिली। बार-बार दोहराने पर गलत क्रियाएँ घटती गईं और दरवाज़ा खोलने का समय कम होता गया; अंत में बिल्ली बक्से में रखते ही लीवर दबाने लगी। निष्कर्ष — अधिगम प्रयास और त्रुटि से, धीरे-धीरे होता है; सफल अनुक्रिया संतोष (भोजन) देने के कारण स्थिर हो जाती है।
4.2 अधिगम के मुख्य नियम
| नियम | अर्थ | कक्षा-अनुप्रयोग |
|---|---|---|
| तत्परता का नियम (Law of Readiness) | जब प्राणी किसी कार्य के लिए तैयार हो तो उसे करना संतोष देता है; तैयार न हो तो करवाना असंतोष देता है | पाठ से पहले प्रेरणा, जिज्ञासा जगाना; थके बच्चों पर नया पाठ न थोपना |
| अभ्यास का नियम (Law of Exercise) | बार-बार अभ्यास से S–R बंधन मज़बूत (उपयोग का नियम), अभ्यास न करने से कमज़ोर (अनुपयोग का नियम) | पहाड़े, वर्तनी, सुलेख का नियमित अभ्यास और पुनरावृत्ति |
| प्रभाव / परिणाम का नियम (Law of Effect) | जिस अनुक्रिया का परिणाम संतोषजनक हो वह दोहराई जाती है; असंतोषजनक परिणाम वाली कमज़ोर होती है | सही उत्तर पर प्रशंसा, सफलता का अनुभव; इसे "सुख-दुःख का नियम" भी कहते हैं |
4.3 गौण नियम (संक्षेप में)
| गौण नियम | अर्थ |
|---|---|
| बहु-अनुक्रिया | नई समस्या में प्राणी अनेक अनुक्रियाएँ करता है जब तक सही न मिल जाए |
| मानसिक स्थिति / मनोवृत्ति | अधिगम सीखने वाले की मनोवृत्ति पर निर्भर |
| आंशिक क्रिया | प्राणी स्थिति के प्रमुख तत्वों पर अनुक्रिया करता है |
| सादृश्यता / आत्मीकरण | नई स्थिति में पुरानी मिलती-जुलती स्थिति वाली अनुक्रिया |
| साहचर्य-परिवर्तन | अनुक्रिया एक उद्दीपक से जुड़े दूसरे उद्दीपक पर स्थानांतरित |
बाद के वर्षों में थॉर्नडाइक ने स्वयं अभ्यास के नियम को कमज़ोर माना (केवल दोहराना पर्याप्त नहीं, परिणाम भी चाहिए) और कहा कि दंड, पुरस्कार जितना प्रभावी नहीं होता।
5. पावलोव — शास्त्रीय अनुबंधन
रूसी शरीर-क्रिया-वैज्ञानिक इवान पेट्रोविच पावलोव को पाचन पर शोध के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था। इसी शोध के दौरान उन्होंने देखा कि कुत्ते भोजन देखने से पहले ही — भोजन लाने वाले की आहट पर — लार टपकाने लगते हैं। इससे शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) की खोज हुई, जिसे अनुकूलित अनुक्रिया या संबद्ध प्रतिक्रिया सिद्धांत भी कहते हैं।
5.1 कुत्ते का प्रयोग
| चरण | क्या हुआ | शब्दावली |
|---|---|---|
| अनुबंधन से पहले | भोजन → लार (स्वाभाविक) | भोजन = अनानुबंधित उद्दीपक (UCS); लार = अनानुबंधित अनुक्रिया (UCR) |
| अनुबंधन से पहले | घंटी → लार नहीं (केवल ध्यान) | घंटी = तटस्थ उद्दीपक |
| अनुबंधन के दौरान | घंटी + तुरंत भोजन → लार; कई बार दोहराया | तटस्थ उद्दीपक और UCS का युग्मन |
| अनुबंधन के बाद | केवल घंटी → लार | घंटी = अनुबंधित उद्दीपक (CS); घंटी पर लार = अनुबंधित अनुक्रिया (CR) |
सावधान: लार दोनों स्थितियों में है, पर भोजन पर लार UCR है और घंटी पर लार CR। उद्दीपक बदलने से नाम बदलता है।
5.2 मुख्य संकल्पनाएँ
| संकल्पना | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अधिग्रहण (Acquisition) | CS और UCS के युग्मन से CR का बनना | घंटी पर लार आना शुरू होना |
| विलोपन (Extinction) | CS के बाद UCS बार-बार न मिले तो CR धीरे-धीरे समाप्त | घंटी बजती रही, भोजन नहीं मिला — लार बंद |
| स्वतः पुनर्प्राप्ति (Spontaneous Recovery) | विलोपन के कुछ समय बाद CS देने पर CR का अचानक फिर लौटना | विश्राम के बाद घंटी पर फिर थोड़ी लार |
| उद्दीपक सामान्यीकरण (Generalisation) | CS से मिलते-जुलते उद्दीपक पर भी CR | मिलती-जुलती दूसरी घंटी पर भी लार |
| विभेदन (Discrimination) | केवल मूल CS पर अनुक्रिया, अन्य पर नहीं | केवल एक विशेष स्वर पर लार |
| उच्च-क्रम अनुबंधन | एक CS को दूसरे तटस्थ उद्दीपक से जोड़कर नया CS बनाना | रोशनी + घंटी → केवल रोशनी पर लार |
5.3 कक्षा में शास्त्रीय अनुबंधन
- किसी विषय के शिक्षक के कठोर व्यवहार से बच्चे में उस विषय के प्रति ही डर बन जाना — नकारात्मक अनुबंधन; गणित-भय (Math Anxiety) इसका सामान्य उदाहरण है।
- प्रेमपूर्ण, सुरक्षित कक्षा से विद्यालय के प्रति सकारात्मक संवेग जुड़ते हैं।
- घंटी बजने पर कक्षा का अपने-आप शांत होना या खड़े हो जाना — अनुबंधित अनुक्रिया।
- भय और भाव (संवेग) सीखने में यह सिद्धांत विशेष रूप से उपयोगी है; वाटसन ने "लिटिल अल्बर्ट" प्रयोग में एक शिशु में सफ़ेद चूहे के प्रति डर (तेज़ आवाज़ के साथ युग्मन से) अनुबंधित करके दिखाया।
6. स्किनर — क्रियाप्रसूत अनुबंधन
अमेरिकी मनोवैज्ञानिक बी. एफ. स्किनर ने बताया कि अधिकांश व्यवहार किसी उद्दीपक से उत्पन्न (elicited) नहीं होता, बल्कि प्राणी स्वयं करता (emitted) है, और उस व्यवहार का परिणाम तय करता है कि वह आगे दोहराया जाएगा या नहीं। इसे क्रियाप्रसूत / सक्रिय / नैमित्तिक अनुबंधन (Operant Conditioning) कहते हैं।
6.1 चूहे और कबूतर के प्रयोग
स्किनर ने एक विशेष बक्सा बनाया — स्किनर-बॉक्स। उसमें भूखा चूहा इधर-उधर घूमते हुए संयोग से लीवर दबाता है और भोजन की गोली गिरती है। भोजन (पुनर्बलन) मिलने से लीवर दबाने की दर तेज़ी से बढ़ती है। इसी तरह कबूतर को एक बटन/चकती पर चोंच मारने पर दाना देकर सिखाया गया। कबूतरों को क्रमशः पुनर्बलन देकर जटिल व्यवहार (जैसे घूमना) भी सिखाए गए — इसे आकार देना (Shaping) या क्रमिक सन्निकटन कहते हैं।
6.2 प्रतिवादी बनाम क्रियाप्रसूत व्यवहार
| आधार | शास्त्रीय (पावलोव) | क्रियाप्रसूत (स्किनर) |
|---|---|---|
| व्यवहार | प्रतिवादी (Respondent) — उद्दीपक से उत्पन्न, अनैच्छिक | क्रियाप्रसूत (Operant) — प्राणी द्वारा स्वेच्छा से किया गया |
| क्रम | उद्दीपक पहले, अनुक्रिया बाद में (S → R) | अनुक्रिया पहले, फिर परिणाम/पुनर्बलन (R → S) |
| प्राणी की भूमिका | अपेक्षाकृत निष्क्रिय | सक्रिय |
| उदाहरण | घंटी पर लार | लीवर दबाकर भोजन पाना |
| सीखा जाता है | संवेग, अनैच्छिक प्रतिक्रियाएँ | ऐच्छिक व्यवहार, आदतें, कौशल |
6.3 पुनर्बलन और दंड — चार प्रकार
| प्रकार | क्या किया जाता है | व्यवहार पर असर | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| धनात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) | सुखद उद्दीपक जोड़ना | व्यवहार बढ़ता | गृहकार्य पूरा करने पर प्रशंसा, स्टार |
| नकारात्मक पुनर्बलन (Negative Reinforcement) | अप्रिय उद्दीपक हटाना | व्यवहार बढ़ता | सीट-बेल्ट लगाते ही चेतावनी की बीप बंद; काम पूरा करने पर अतिरिक्त गृहकार्य हटा देना |
| धनात्मक दंड (Positive Punishment) | अप्रिय उद्दीपक जोड़ना | व्यवहार घटता | शोर करने पर डाँट या अतिरिक्त काम |
| नकारात्मक दंड (Negative Punishment) | सुखद उद्दीपक हटाना | व्यवहार घटता | नियम तोड़ने पर खेल का समय कम करना |
सूत्र: "पुनर्बलन = बढ़ाना, दंड = घटाना; धनात्मक = जोड़ना, नकारात्मक = हटाना।" नकारात्मक पुनर्बलन में कुछ बुरा हटता है ताकि अच्छा व्यवहार बढ़े — यह दंड नहीं है।
6.4 पुनर्बलन की अनुसूचियाँ (Schedules of Reinforcement)
| अनुसूची | पुनर्बलन कब | उदाहरण | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| सतत (Continuous) | हर सही अनुक्रिया पर | हर सही उत्तर पर प्रशंसा | नया व्यवहार सिखाने में सबसे तेज़; पर पुनर्बलन रुकते ही जल्दी विलोपन |
| निश्चित अनुपात (Fixed Ratio) | निश्चित संख्या की अनुक्रियाओं के बाद | हर 5 सही उत्तर पर एक स्टार; प्रति नग भुगतान | तेज़ अनुक्रिया, पुनर्बलन के बाद छोटा विराम |
| परिवर्तनशील अनुपात (Variable Ratio) | अनिश्चित संख्या के बाद (औसत निश्चित) | लॉटरी, जुए की मशीन | अनुक्रिया की दर ऊँची और स्थिर; विलोपन के प्रति सबसे अधिक प्रतिरोधी |
| निश्चित अंतराल (Fixed Interval) | निश्चित समय बीतने के बाद पहली अनुक्रिया पर | मासिक वेतन; तय तारीख की परीक्षा | समय पास आने पर तेज़ी, बाद में ढील |
| परिवर्तनशील अंतराल (Variable Interval) | अनिश्चित समय के बाद | अचानक होने वाले सरप्राइज़ टेस्ट | धीमी पर स्थिर अनुक्रिया |
व्यवहार सिखाते समय सतत पुनर्बलन और व्यवहार को टिकाऊ बनाने के लिए आंशिक (विशेषकर परिवर्तनशील) पुनर्बलन उपयोगी है।
6.5 स्किनर के शैक्षिक योगदान
- अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction) — विषय-वस्तु छोटे-छोटे क्रमबद्ध पदों में, हर पद पर तुरंत प्रतिपुष्टि; स्किनर को इसका जनक माना जाता है।
- शिक्षण-मशीन (Teaching Machine)।
- तुरंत प्रतिपुष्टि (Immediate Feedback) और व्यवहार-संशोधन (Behaviour Modification)।
- दंड की अपेक्षा पुनर्बलन पर बल — दंड केवल व्यवहार को दबाता है, सही व्यवहार नहीं सिखाता और भय/विरोध पैदा कर सकता है।
7. कोहलर — अंतर्दृष्टि (सूझ) अधिगम
जर्मन मनोवैज्ञानिक वोल्फगैंग कोहलर गेस्टाल्ट संप्रदाय (वर्दाइमर, कोफ़्का और कोहलर) से थे। "गेस्टाल्ट" का अर्थ है पूर्ण आकृति / समग्र — "पूर्ण अपने अंशों के योग से अधिक है।" कोहलर ने टेनेरिफ़ (कैनरी द्वीप) में चिंपैंज़ियों पर प्रयोग किए और अपनी पुस्तक "द मेंटैलिटी ऑफ़ एप्स" में उन्हें प्रस्तुत किया।
7.1 सुल्तान के प्रयोग
| प्रयोग | स्थिति | समाधान |
|---|---|---|
| छड़ी प्रयोग | पिंजरे के बाहर केला, एक छोटी छड़ी से नहीं पहुँचता | कुछ असफल प्रयासों और ठहराव के बाद सुल्तान ने दो छड़ियों को जोड़कर लंबी छड़ी बनाई और केला खींच लिया |
| बक्सा प्रयोग | छत से लटका केला, ऊँचाई तक नहीं पहुँचता | बक्सों को एक-दूसरे पर रखकर उन पर चढ़कर केला प्राप्त किया |
निष्कर्ष — चिंपैंज़ी ने अंधाधुंध प्रयास नहीं किए; उसने पूरी स्थिति (केला, छड़ियाँ, दूरी) के संबंधों को एक साथ देखा और समाधान अचानक सूझा। इसे अंतर्दृष्टि (Insight) या "आहा! अनुभव" कहते हैं।
7.2 अंतर्दृष्टि अधिगम की विशेषताएँ
- समाधान अचानक आता है, धीरे-धीरे नहीं।
- स्थिति का समग्र प्रत्यक्षीकरण और अंशों के संबंध की समझ।
- एक बार समझा गया समाधान लंबे समय तक याद रहता है और दोहराया जा सकता है।
- नई, मिलती-जुलती स्थितियों में अंतरण आसानी से होता है।
- बुद्धि, अनुभव और समस्या की संरचना (सभी तत्व सामने दिखें) पर निर्भर।
कक्षा में: रटाने के बजाय समस्या को पूरा प्रस्तुत करना, सोचने का समय देना, संबंध और पैटर्न खोजने वाले प्रश्न — विशेषकर गणित और विज्ञान में।
8. बंडूरा — सामाजिक / अवलोकनात्मक अधिगम
कनाडाई-अमेरिकी मनोवैज्ञानिक अल्बर्ट बंडूरा के अनुसार व्यक्ति दूसरों (मॉडल) के व्यवहार और उसके परिणामों को देखकर भी सीखता है — स्वयं प्रयास करके पुरस्कार पाना हमेशा आवश्यक नहीं। इसे अवलोकनात्मक अधिगम, अनुकरण या मॉडलिंग कहते हैं।
8.1 बोबो गुड़िया प्रयोग
बच्चों के एक समूह ने एक वयस्क को फुलाने वाली बोबो गुड़िया को मारते, फेंकते और उस पर चिल्लाते देखा; दूसरे समूह ने शांत वयस्क को देखा। बाद में खिलौनों वाले कमरे में, आक्रामक मॉडल देखने वाले बच्चों ने गुड़िया के साथ वैसा ही आक्रामक व्यवहार, कई बार वही शब्द दोहराते हुए, अधिक किया। निष्कर्ष — बच्चे देखकर सीखते हैं; आक्रामकता भी अवलोकन से सीखी जा सकती है।
8.2 अवलोकनात्मक अधिगम की चार प्रक्रियाएँ
| प्रक्रिया | अर्थ | कक्षा-उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. ध्यान (Attention) | मॉडल के व्यवहार पर ध्यान देना | शिक्षक का प्रदर्शन सबको दिखे |
| 2. धारण (Retention) | देखे गए व्यवहार को स्मृति में रखना | चरणों को बोलकर या लिखकर दोहराना |
| 3. पुनरुत्पादन (Reproduction) | व्यवहार को स्वयं करके दिखा पाना | अभ्यास का अवसर |
| 4. अभिप्रेरणा (Motivation) | व्यवहार को दोहराने की इच्छा — पुनर्बलन की अपेक्षा | प्रशंसा, सफलता |
8.3 अन्य प्रमुख शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| प्रतिनिधिक पुनर्बलन (Vicarious Reinforcement) | दूसरे को पुरस्कार मिलते देखकर स्वयं वह व्यवहार करने की प्रेरणा |
| प्रतिनिधिक दंड | दूसरे को दंड मिलते देखकर वह व्यवहार न करना |
| आत्म-प्रभावकारिता (Self-efficacy) | "मैं यह कर सकता हूँ" — अपनी क्षमता पर विश्वास |
| पारस्परिक निर्धारणवाद | व्यक्ति, व्यवहार और वातावरण एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं |
शिक्षक के लिए अर्थ: शिक्षक स्वयं सबसे प्रभावशाली मॉडल है — समय-पालन, विनम्रता, सफ़ाई, धैर्य बच्चे देखकर सीखते हैं। अच्छे व्यवहार वाले साथी की सार्वजनिक प्रशंसा दूसरों के लिए प्रतिनिधिक पुनर्बलन बनती है।
9. रचनावाद (Constructivism)
रचनावाद के अनुसार ज्ञान बाहर से "डाला" नहीं जाता; अधिगमकर्ता अपने पूर्व-ज्ञान और अनुभव के आधार पर, गतिविधि और अंतःक्रिया से नए ज्ञान का सक्रिय निर्माण करता है।
| प्रकार | प्रमुख विचारक | मुख्य बल |
|---|---|---|
| संज्ञानात्मक / व्यक्तिगत रचनावाद | पियाजे | व्यक्ति की खोज, स्कीमा, साम्यधारण |
| सामाजिक रचनावाद | वाइगोत्स्की | सामाजिक अंतःक्रिया, ZPD, भाषा |
| खोज अधिगम (Discovery Learning) | जेरोम ब्रूनर | स्वयं खोजकर सीखना; सर्पिल पाठ्यक्रम; क्रियात्मक → प्रतिमात्मक → प्रतीकात्मक प्रस्तुति |
9.1 पारंपरिक बनाम रचनावादी कक्षा
| पक्ष | पारंपरिक कक्षा | रचनावादी कक्षा |
|---|---|---|
| शिक्षक | ज्ञान का स्रोत, व्याख्याता | सुगमकर्ता, मार्गदर्शक, सह-अधिगमकर्ता |
| बच्चा | निष्क्रिय श्रोता, "खाली बर्तन" | सक्रिय ज्ञान-निर्माता |
| विधि | रटना, व्याख्यान | गतिविधि, प्रयोग, चर्चा, परियोजना, खोज |
| गलतियाँ | दंड योग्य | सीखने का अवसर |
| आकलन | सत्र के अंत में लिखित परीक्षा | सतत, प्रक्रिया-आधारित, अधिगम के लिए आकलन |
| पाठ्यपुस्तक | एकमात्र स्रोत | अनेक स्रोतों में से एक |
NCF 2005 के मार्गदर्शक सिद्धांत — ज्ञान को स्कूल के बाहर के जीवन से जोड़ना, रटंत प्रणाली से मुक्ति, पाठ्यचर्या को पाठ्यपुस्तक से आगे ले जाना, परीक्षा को लचीला और कक्षा-जीवन से जुड़ा बनाना — सभी रचनावादी दृष्टि से मेल खाते हैं।
10. सभी सिद्धांतों की तुलना तालिका
| सिद्धांतकार | सिद्धांत का नाम | प्रयोग | प्राणी | मुख्य नियम / शब्द | कक्षा-अनुप्रयोग |
|---|---|---|---|---|---|
| थॉर्नडाइक | प्रयास और त्रुटि; संबंधवाद | पहेली-बक्सा | बिल्ली | तत्परता, अभ्यास, प्रभाव | अभ्यास, प्रेरणा, सफलता का अनुभव |
| पावलोव | शास्त्रीय अनुबंधन | घंटी-भोजन-लार | कुत्ता | UCS, UCR, CS, CR; विलोपन, सामान्यीकरण | अच्छी आदतें, सकारात्मक संवेग, भय दूर करना |
| वाटसन | व्यवहारवाद; संवेगों का अनुबंधन | लिटिल अल्बर्ट | मानव शिशु | भय का अनुबंधन | भय और अभिवृत्ति कैसे बनती है |
| स्किनर | क्रियाप्रसूत अनुबंधन | स्किनर-बॉक्स | चूहा, कबूतर | पुनर्बलन, दंड, अनुसूचियाँ, आकार देना | प्रशंसा, तुरंत प्रतिपुष्टि, अभिक्रमित अनुदेशन |
| कोहलर | अंतर्दृष्टि अधिगम; गेस्टाल्ट | छड़ी जोड़ना, बक्से रखना | चिंपैंज़ी (सुल्तान) | समग्र प्रत्यक्षीकरण, अचानक समाधान | समस्या-समाधान, संबंध खोजना |
| टॉलमैन | चिह्न / अव्यक्त अधिगम | भूल-भुलैया | चूहा | संज्ञानात्मक मानचित्र | पुरस्कार के बिना भी अधिगम संभव |
| बंडूरा | सामाजिक / अवलोकनात्मक अधिगम | बोबो गुड़िया | बच्चे | मॉडलिंग; ध्यान, धारण, पुनरुत्पादन, अभिप्रेरणा | शिक्षक आदर्श मॉडल, प्रदर्शन विधि |
11. अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक
| वर्ग | कारक |
|---|---|
| अधिगमकर्ता से जुड़े | शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, परिपक्वता, तत्परता, अभिप्रेरणा, रुचि, बुद्धि, अभिवृत्ति, पूर्व-ज्ञान, थकान, आत्म-विश्वास |
| शिक्षक से जुड़े | विषय-ज्ञान, शिक्षण-विधि, व्यवहार, बच्चों की समझ, प्रतिपुष्टि देने का ढंग |
| विषय-वस्तु से जुड़े | कठिनाई-स्तर, सार्थकता, क्रमबद्धता, जीवन से संबंध, लंबाई |
| वातावरण से जुड़े | कक्षा का भौतिक वातावरण (प्रकाश, हवा, बैठक), भावनात्मक सुरक्षा, घर का माहौल, साथियों का व्यवहार |
| विधि से जुड़े | करके सीखना, संपूर्ण बनाम अंश विधि, वितरित बनाम एकत्रित अभ्यास, पुनरावृत्ति |
अभिप्रेरणा को अधिगम का सबसे महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। आंतरिक अभिप्रेरणा (सीखने का आनंद, जिज्ञासा) बाहरी पुरस्कार से अधिक स्थायी अधिगम देती है।
12. अधिगम-अंतरण (Transfer of Learning)
एक स्थिति में किया गया अधिगम जब दूसरी स्थिति के अधिगम या निष्पादन को प्रभावित करे, तो उसे अधिगम-अंतरण कहते हैं।
| प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| धनात्मक (Positive) | पहला अधिगम दूसरे में सहायक | साइकिल चलाना आने पर स्कूटर सीखना आसान |
| ऋणात्मक (Negative) | पहला अधिगम दूसरे में बाधक | बाएँ हाथ ड्राइविंग वाले देश का चालक दाएँ हाथ ड्राइविंग वाले देश में उलझता है; हिंदी की आदत से अंग्रेज़ी उच्चारण में भूल |
| शून्य (Zero) | कोई प्रभाव नहीं | तैराकी सीखने का इतिहास पढ़ने पर कोई असर नहीं |
| क्षैतिज (Lateral) | समान स्तर की दूसरी स्थिति में प्रयोग | कक्षा में सीखा जोड़ दुकान पर प्रयोग करना |
| ऊर्ध्व (Vertical) | निचले स्तर का अधिगम उच्च स्तर के अधिगम में सहायक | जोड़ से गुणा सीखना |
| द्विपार्श्विक (Bilateral) | शरीर के एक अंग का कौशल दूसरे अंग में | दाएँ हाथ से लिखना सीखने के बाद बाएँ हाथ से लिखने में कुछ सहायता |
| अंतरण का सिद्धांत | प्रतिपादक | मुख्य विचार |
|---|---|---|
| मानसिक / औपचारिक अनुशासन | प्राचीन शक्ति-मनोविज्ञान | मन की शक्तियाँ (स्मृति, तर्क) व्यायाम से मज़बूत होकर हर क्षेत्र में अंतरित |
| समान तत्वों का सिद्धांत | थॉर्नडाइक | दोनों स्थितियों में जितने समान तत्व, उतना अंतरण |
| सामान्यीकरण का सिद्धांत | जड (Judd) | सामान्य नियम/सिद्धांत की समझ अंतरित होती है |
| पक्षांतरण / संरूपण का सिद्धांत | गेस्टाल्ट | स्थिति के संबंधों और संरचना की समझ अंतरित होती है |
अंतरण बढ़ाने के लिए शिक्षक: सामान्य नियम समझाएँ, विविध उदाहरण दें, पाठ को दैनिक जीवन से जोड़ें, विषयों के बीच संबंध दिखाएँ।
13. अधिगम-वक्र और पठार
अधिगम-वक्र (Learning Curve) अभ्यास (प्रयासों या समय) के साथ अधिगम की प्रगति को ग्राफ़ पर दिखाता है — क्षैतिज अक्ष पर प्रयास/समय, ऊर्ध्व अक्ष पर उपलब्धि।
| वक्र का प्रकार | स्वरूप | कब |
|---|---|---|
| तीव्र आरंभ वाला वक्र | आरंभ में तेज़ प्रगति, बाद में धीमी | सरल या परिचित कार्य, उच्च रुचि |
| धीमे आरंभ वाला वक्र | आरंभ में धीमी प्रगति, बाद में तेज़ | कठिन या नया कार्य |
| मिश्रित (S-आकार) वक्र | पहले धीमी, फिर तेज़, फिर धीमी | अधिकांश जटिल कौशलों में |
(इन वक्रों के हिंदी नाम — उन्नतोदर/नतोदर — पुस्तकों में अलग-अलग ढंग से प्रयुक्त होते हैं, इसलिए नाम से अधिक उनका स्वरूप याद रखें।)
13.1 पठार (Plateau)
अभ्यास जारी रहने पर भी जब कुछ समय तक अधिगम में कोई प्रगति नहीं दिखती और वक्र समतल हो जाता है, उसे पठार कहते हैं। यह स्थायी नहीं होता; उचित उपायों के बाद प्रगति फिर शुरू होती है।
| पठार के कारण | दूर करने के उपाय |
|---|---|
| थकान, ऊब, रुचि की कमी | विश्राम, विविधता, रोचक गतिविधियाँ |
| अभिप्रेरणा में कमी | नए लक्ष्य, प्रोत्साहन, प्रगति की जानकारी देना |
| गलत या अनुपयुक्त विधि | शिक्षण-विधि बदलना |
| कौशल के सरल से जटिल स्तर में संक्रमण | नए स्तर के लिए पूर्व-आवश्यक कौशल मज़बूत करना |
| स्वास्थ्य संबंधी समस्या | स्वास्थ्य पर ध्यान |
| कार्य की कठिनाई या शारीरिक सीमा | कार्य को छोटे भागों में बाँटना, यथार्थ लक्ष्य |
14. परीक्षा में कौन-सी गलतियाँ होती हैं? (Exam Trap)
Trap 1: नकारात्मक पुनर्बलन ≠ दंड
| स्थिति | क्या है | क्यों |
|---|---|---|
| सारा कक्षा-कार्य पूरा करने वाले छात्रों का गृहकार्य माफ़ | नकारात्मक पुनर्बलन | अप्रिय (गृहकार्य) हटा, कार्य पूरा करने का व्यवहार बढ़ा |
| शोर करने पर खेल का पीरियड रद्द | नकारात्मक दंड | सुखद (खेल) हटा, शोर घटाना उद्देश्य |
| देर से आने पर अतिरिक्त कार्य | धनात्मक दंड | अप्रिय जोड़ा, व्यवहार घटाना उद्देश्य |
| सिरदर्द होने पर दवा लेना, दर्द चला जाना — आगे भी दवा लेना | नकारात्मक पुनर्बलन | अप्रिय (दर्द) हटा, दवा लेने का व्यवहार बढ़ा |
पहचान का प्रश्न — "व्यवहार बढ़ाना है या घटाना?" बढ़ाना = पुनर्बलन; घटाना = दंड।
Trap 2: UCR और CR — दोनों लार
भोजन पर लार = UCR; घंटी पर लार = CR। घंटी = CS (अनुबंधन से पहले तटस्थ उद्दीपक)।
Trap 3: विलोपन बनाम विस्मरण
विलोपन — पुनर्बलन (UCS) बंद करने से अनुक्रिया का समाप्त होना। विस्मरण — समय बीतने या अभ्यास न होने से भूलना। विलोपन के बाद भी स्वतः पुनर्प्राप्ति हो सकती है, अर्थात् अधिगम पूरी तरह मिटता नहीं।
Trap 4: प्राणियों का मिलान
बिल्ली — थॉर्नडाइक; कुत्ता — पावलोव; चूहा व कबूतर — स्किनर; चिंपैंज़ी — कोहलर; बच्चे/बोबो गुड़िया — बंडूरा; चूहा व भूल-भुलैया — टॉलमैन। "चूहा" दिखे तो प्रयोग देखें — लीवर/बॉक्स = स्किनर, भूल-भुलैया = टॉलमैन।
Trap 5: प्रयास-त्रुटि बनाम अंतर्दृष्टि
प्रयास-त्रुटि में सुधार धीरे-धीरे (बिल्ली का समय क्रमशः घटता है)। अंतर्दृष्टि में समाधान अचानक (सुल्तान की छड़ियाँ)।
Trap 6: "Scaffolding" या "ZPD" अधिगम-व्यवहारवाद में नहीं
ये वाइगोत्स्की के सामाजिक रचनावाद से हैं। "मॉडलिंग, प्रतिनिधिक पुनर्बलन" बंडूरा से; "अभिक्रमित अनुदेशन, आकार देना" स्किनर से।
Trap 7: थॉर्नडाइक का "प्रभाव का नियम" = पुनर्बलन का आधार
संतोषजनक परिणाम से अनुक्रिया मज़बूत — यही विचार आगे स्किनर के पुनर्बलन में विकसित हुआ। दोनों के प्रश्नों में "परिणाम" शब्द पर ध्यान दें।
15. Most-Asked रिवीज़न तालिका
| # | प्रश्न / बिंदु | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | अधिगम | अनुभव व अभ्यास से व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन |
| 2 | परिपक्वता से परिवर्तन अधिगम है? | नहीं |
| 3 | अधिगम का सबसे महत्वपूर्ण कारक | अभिप्रेरणा |
| 4 | प्रयास और त्रुटि सिद्धांत | थॉर्नडाइक |
| 5 | थॉर्नडाइक का प्राणी | बिल्ली |
| 6 | थॉर्नडाइक का उपकरण | पहेली-बक्सा |
| 7 | थॉर्नडाइक के सिद्धांत का दूसरा नाम | संबंधवाद / S–R बंधन |
| 8 | तैयार होने पर कार्य करना संतोषजनक | तत्परता का नियम |
| 9 | अभ्यास से बंधन मज़बूत | अभ्यास का नियम (उपयोग-अनुपयोग) |
| 10 | संतोषजनक परिणाम से अनुक्रिया मज़बूत | प्रभाव / परिणाम का नियम |
| 11 | "सुख-दुःख का नियम" | प्रभाव का नियम |
| 12 | समान तत्वों का अंतरण सिद्धांत | थॉर्नडाइक |
| 13 | शास्त्रीय अनुबंधन | पावलोव |
| 14 | पावलोव का प्राणी | कुत्ता |
| 15 | पावलोव के प्रयोग में UCS | भोजन |
| 16 | पावलोव के प्रयोग में CS | घंटी |
| 17 | भोजन पर लार | UCR |
| 18 | घंटी पर लार | CR |
| 19 | UCS न मिलने पर CR का समाप्त होना | विलोपन |
| 20 | विलोपन के बाद CR का लौटना | स्वतः पुनर्प्राप्ति |
| 21 | मिलते-जुलते उद्दीपक पर भी CR | सामान्यीकरण |
| 22 | केवल मूल उद्दीपक पर अनुक्रिया | विभेदन |
| 23 | लिटिल अल्बर्ट प्रयोग | वाटसन |
| 24 | गणित-भय किस अनुबंधन से समझाया जाता है | शास्त्रीय अनुबंधन |
| 25 | क्रियाप्रसूत अनुबंधन | स्किनर |
| 26 | स्किनर के प्राणी | चूहा, कबूतर |
| 27 | स्किनर का उपकरण | स्किनर-बॉक्स |
| 28 | क्रियाप्रसूत में क्रम | अनुक्रिया पहले, फिर पुनर्बलन |
| 29 | सुखद उद्दीपक जोड़कर व्यवहार बढ़ाना | धनात्मक पुनर्बलन |
| 30 | अप्रिय उद्दीपक हटाकर व्यवहार बढ़ाना | नकारात्मक पुनर्बलन |
| 31 | व्यवहार घटाना | दंड |
| 32 | सुखद उद्दीपक हटाकर व्यवहार घटाना | नकारात्मक दंड |
| 33 | हर सही अनुक्रिया पर पुनर्बलन | सतत पुनर्बलन |
| 34 | लॉटरी / जुआ | परिवर्तनशील अनुपात |
| 35 | मासिक वेतन | निश्चित अंतराल |
| 36 | सरप्राइज़ टेस्ट | परिवर्तनशील अंतराल |
| 37 | विलोपन के प्रति सबसे प्रतिरोधी | परिवर्तनशील अनुपात |
| 38 | क्रमिक सन्निकटन से जटिल व्यवहार सिखाना | आकार देना (Shaping) |
| 39 | अभिक्रमित अनुदेशन | स्किनर |
| 40 | अंतर्दृष्टि अधिगम | कोहलर |
| 41 | कोहलर का प्राणी | चिंपैंज़ी (सुल्तान) |
| 42 | कोहलर का संप्रदाय | गेस्टाल्ट |
| 43 | गेस्टाल्ट का अर्थ | पूर्ण / समग्र आकृति |
| 44 | अंतर्दृष्टि में समाधान | अचानक |
| 45 | सामाजिक / अवलोकनात्मक अधिगम | बंडूरा |
| 46 | बोबो गुड़िया प्रयोग | बंडूरा |
| 47 | अवलोकन अधिगम की 4 प्रक्रियाएँ | ध्यान, धारण, पुनरुत्पादन, अभिप्रेरणा |
| 48 | दूसरे को पुरस्कार मिलते देख सीखना | प्रतिनिधिक पुनर्बलन |
| 49 | "मैं कर सकता हूँ" का विश्वास | आत्म-प्रभावकारिता |
| 50 | चूहा + भूल-भुलैया + संज्ञानात्मक मानचित्र | टॉलमैन |
| 51 | खोज अधिगम, सर्पिल पाठ्यक्रम | ब्रूनर |
| 52 | रचनावादी कक्षा में शिक्षक | सुगमकर्ता |
| 53 | एक अधिगम से दूसरे में सहायता | धनात्मक अंतरण |
| 54 | एक अधिगम से दूसरे में बाधा | ऋणात्मक अंतरण |
| 55 | सामान्यीकरण का अंतरण सिद्धांत | जड |
| 56 | अधिगम-वक्र में प्रगति रुकना | पठार |
| 57 | पठार का एक प्रमुख कारण | थकान / रुचि व अभिप्रेरणा में कमी |
16. परीक्षा में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
पैटर्न 1 — मिलान: "सुमेलित कीजिए — (a) थॉर्नडाइक (b) पावलोव (c) कोहलर (d) बंडूरा; (i) चिंपैंज़ी (ii) बिल्ली (iii) बोबो गुड़िया (iv) कुत्ता" — उत्तर: a-ii, b-iv, c-i, d-iii।
पैटर्न 2 — पुनर्बलन की पहचान: "शिक्षिका कहती है, 'जो बच्चे पूरा कक्षा-कार्य कर लेंगे उन्हें आज गृहकार्य नहीं मिलेगा।' यह क्या है?" — उत्तर: नकारात्मक पुनर्बलन।
पैटर्न 3 — शास्त्रीय अनुबंधन: "एक छात्र को गणित के शिक्षक से डाँट पड़ती रही; अब गणित की किताब देखते ही उसे घबराहट होती है। यहाँ 'गणित की किताब' क्या है?" — उत्तर: अनुबंधित उद्दीपक (CS)।
पैटर्न 4 — अवलोकनात्मक अधिगम: "कक्षा 2 के बच्चे अपनी शिक्षिका की तरह 'धन्यवाद' कहने लगे। यह किस सिद्धांत से समझाया जा सकता है?" — उत्तर: बंडूरा का सामाजिक अधिगम।
पैटर्न 5 — पठार: "टंकण सीखते हुए एक छात्र की गति कई दिनों से नहीं बढ़ रही। इसे क्या कहते हैं और शिक्षक को क्या करना चाहिए?" — उत्तर: पठार; विधि बदलना, विश्राम, प्रोत्साहन।
पैटर्न 6 — रचनावाद: "रचनावादी कक्षा में शिक्षक की भूमिका क्या है?" — उत्तर: सुगमकर्ता, जो बच्चों को पूर्व-ज्ञान से जोड़कर ज्ञान-निर्माण के अवसर देता है।
17. इसे आसानी से याद कैसे रखें?
1. प्राणी-सूत्र — "बिल्ली थॉर्न पर, कुत्ता पाव पर, चूहा-कबूतर स्किन पर, चिंपू कोहली पर, बच्चा बोबो पर": थॉर्नडाइक–बिल्ली, पावलोव–कुत्ता, स्किनर–चूहा/कबूतर, कोहलर–चिंपैंज़ी, बंडूरा–बच्चे।
2. थॉर्नडाइक के नियम — "तैयार, अभ्यास, असर" (त-अ-अ): तत्परता, अभ्यास, प्रभाव।
3. पुनर्बलन-दंड — "बढ़ाना = बलन, घटाना = दंड; जोड़ = धन, हटाना = ऋण।"
4. बंडूरा की प्रक्रियाएँ — "ध्या-धा-पु-अ" (ध्यान से धारो, पुनः करो, अभिप्रेरित रहो)।
5. शास्त्रीय अनुबंधन — "भोजन असली (UCS), घंटी नकली (CS)": जो पहले से लार लाता है वह अनानुबंधित; जिसे सिखाया वह अनुबंधित।
6. अनुसूचियाँ — "लॉटरी में लत": परिवर्तनशील अनुपात सबसे टिकाऊ।
7. पठार — "सीढ़ी का चबूतरा": थोड़ी देर समतल, फिर चढ़ाई।
18. कथन अभ्यास
अधिगम अनुभव और अभ्यास से व्यवहार में होने वाला अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है। — सही।
थॉर्नडाइक ने अपने प्रयोग कुत्ते पर किए थे। — गलत (बिल्ली पर; कुत्ता पावलोव का)।
प्रभाव के नियम के अनुसार संतोषजनक परिणाम वाली अनुक्रिया दोहराई जाती है। — सही।
पावलोव के प्रयोग में घंटी अनानुबंधित उद्दीपक है। — गलत (घंटी अनुबंधित उद्दीपक है; भोजन अनानुबंधित)।
CS के बाद बार-बार UCS न देने पर अनुबंधित अनुक्रिया का समाप्त होना विलोपन कहलाता है। — सही।
नकारात्मक पुनर्बलन दंड का ही दूसरा नाम है। — गलत (नकारात्मक पुनर्बलन व्यवहार बढ़ाता है, दंड घटाता है)।
स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन में व्यवहार उसके परिणाम से नियंत्रित होता है। — सही।
परिवर्तनशील अनुपात अनुसूची से सीखा व्यवहार विलोपन के प्रति सबसे कम प्रतिरोधी होता है। — गलत (सबसे अधिक प्रतिरोधी)।
कोहलर के अंतर्दृष्टि अधिगम में समाधान अचानक सूझता है। — सही।
बोबो गुड़िया प्रयोग स्किनर से संबंधित है। — गलत (बंडूरा से)।
रचनावादी कक्षा में बच्चा ज्ञान का सक्रिय निर्माता होता है। — सही।
अधिगम-वक्र में पठार स्थायी होता है और उसके बाद प्रगति संभव नहीं। — गलत (पठार अस्थायी है; उपायों से प्रगति फिर शुरू होती है)।
19. एक दिन पहले — 15 रेखाएँ
- अधिगम = अनुभव/अभ्यास से व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन
- थॉर्नडाइक — बिल्ली, पहेली-बक्सा, मछली; प्रयास-त्रुटि; संबंधवाद
- थॉर्नडाइक के नियम — तत्परता, अभ्यास (उपयोग-अनुपयोग), प्रभाव (सुख-दुःख)
- पावलोव — कुत्ता, घंटी, भोजन, लार; शास्त्रीय अनुबंधन
- भोजन = UCS, लार = UCR, घंटी = CS, घंटी पर लार = CR
- विलोपन, स्वतः पुनर्प्राप्ति, सामान्यीकरण, विभेदन
- वाटसन — लिटिल अल्बर्ट; भय का अनुबंधन
- स्किनर — चूहा, कबूतर, स्किनर-बॉक्स; क्रियाप्रसूत अनुबंधन
- पुनर्बलन बढ़ाता, दंड घटाता; नकारात्मक पुनर्बलन = अप्रिय हटाना
- परिवर्तनशील अनुपात सबसे टिकाऊ; स्किनर — अभिक्रमित अनुदेशन, Shaping
- कोहलर — चिंपैंज़ी सुल्तान, छड़ियाँ/बक्से; अंतर्दृष्टि; गेस्टाल्ट; अचानक समाधान
- बंडूरा — बोबो गुड़िया; ध्यान, धारण, पुनरुत्पादन, अभिप्रेरणा; प्रतिनिधिक पुनर्बलन
- रचनावाद — पियाजे, वाइगोत्स्की, ब्रूनर; शिक्षक सुगमकर्ता; NCF 2005
- अंतरण — धनात्मक, ऋणात्मक, शून्य; समान तत्व (थॉर्नडाइक), सामान्यीकरण (जड)
- पठार — अधिगम-वक्र का समतल भाग; थकान, अरुचि, गलत विधि; अस्थायी
20. अभ्यास
अब नीचे दिए 25 प्रश्नों का क्विज़ हल करें। पुनर्बलन वाले हर प्रश्न में दो बातें लिखें — क्या जोड़ा/हटाया गया और व्यवहार बढ़ाना है या घटाना। पूरे शिक्षाशास्त्र खंड के मिश्रित अभ्यास के लिए REET लेवल 1 टेस्ट सीरीज़ या RSSB REET मुख्य परीक्षा लेवल 1 टेस्ट सीरीज़ हल करें।
21. निष्कर्ष: परीक्षा के लिए क्या याद रखें?
अधिगम के सिद्धांत एक ही प्रश्न के अलग-अलग उत्तर हैं — मनुष्य कैसे सीखता है? थॉर्नडाइक ने कहा प्रयास और परिणाम से, पावलोव ने कहा उद्दीपकों के जुड़ने से, स्किनर ने कहा व्यवहार के परिणाम से, कोहलर ने कहा पूरी स्थिति को समझने से, बंडूरा ने कहा दूसरों को देखकर, और रचनावाद ने कहा अपने अनुभव से स्वयं ज्ञान रचकर। कक्षा में ये सब एक साथ काम करते हैं — प्रशंसा पुनर्बलन है, शिक्षक का व्यवहार मॉडल है, सुरक्षित माहौल सकारात्मक अनुबंधन है और खोजपूर्ण गतिविधि रचनावाद है। परीक्षा का सबसे बड़ा जाल नकारात्मक पुनर्बलन और दंड का अंतर है; उसे "बढ़ाना या घटाना" की कसौटी से हल करें।
थॉर्नडाइक–बिल्ली–प्रयास-त्रुटि | पावलोव–कुत्ता–शास्त्रीय | स्किनर–चूहा/कबूतर–क्रियाप्रसूत | कोहलर–चिंपैंज़ी–अंतर्दृष्टि | बंडूरा–बोबो–अवलोकन | पुनर्बलन बढ़ाता, दंड घटाता
इस टॉपिक का क्विज़ कहाँ दें?
“अधिगम के सिद्धांत — थॉर्नडाइक, पावलोव, स्किनर, कोहलर, बंडूरा, रचनावाद, अधिगम-अंतरण व पठार — REET” पढ़ने के बाद इन क्विज़ से तुरंत दोहराएँ — गलत उत्तर वाले बिंदु नोट में दोबारा देखें।
- अधिगम के सिद्धांत — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों से खुद को परखें
- व्यक्तित्व और अभिप्रेरणा के सिद्धांत — अभ्यास क्विज़अभ्यास शुरू करें
- बुद्धि के सिद्धांत, IQ और बहु-बुद्धि — अभ्यास क्विज़25 प्रश्नों का क्विज़ दें
- पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत — अभ्यास क्विज़अपनी तैयारी जाँचें
पूरे सिलेबस का अभ्यास: राजस्थान REET लेवल-1 (हिंदी माध्यम) संपूर्ण टेस्ट सीरीज़ — पहला टेस्ट फ्री आज़माएँ

यह टॉपिक पढ़ लिया? अब असली परीक्षा जैसे मॉक टेस्ट में खुद को परखें
राजस्थान REET लेवल-1 (हिंदी माध्यम) संपूर्ण टेस्ट सीरीज़
- नवीनतम परीक्षा पैटर्न, समय-सीमा और नेगेटिव मार्किंग के साथ
- रैंक, कमजोर टॉपिक विश्लेषण और हर प्रश्न की हिंदी व्याख्या
- वेबसाइट एवं एंड्रॉइड ऐप दोनों पर तुरंत एक्सेस
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
अनुभव, अभ्यास और प्रशिक्षण से व्यवहार में होने वाला अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन अधिगम है। थकान, दवा या परिपक्वता से होने वाले परिवर्तन अधिगम नहीं माने जाते।
तत्परता का नियम, अभ्यास का नियम (उपयोग-अनुपयोग) और प्रभाव या परिणाम का नियम। प्रभाव के नियम के अनुसार संतोषजनक परिणाम वाली अनुक्रिया मज़बूत होती है।
भोजन अनानुबंधित उद्दीपक (UCS), भोजन पर लार अनानुबंधित अनुक्रिया (UCR), घंटी अनुबंधित उद्दीपक (CS) और केवल घंटी पर लार अनुबंधित अनुक्रिया (CR) है।
नकारात्मक पुनर्बलन में अप्रिय उद्दीपक हटाकर वांछित व्यवहार को बढ़ाया जाता है, जबकि दंड का उद्देश्य किसी व्यवहार को घटाना होता है। इसलिए नकारात्मक पुनर्बलन दंड नहीं है।
स्किनर ने स्किनर-बॉक्स में चूहों (लीवर दबाना) और कबूतरों (चोंच मारना) पर प्रयोग किए। उनका सिद्धांत क्रियाप्रसूत अनुबंधन कहलाता है।
गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिक कोहलर के अनुसार प्राणी पूरी स्थिति के संबंधों को समझकर अचानक समाधान पा लेता है। चिंपैंज़ी सुल्तान ने दो छड़ियाँ जोड़कर केला प्राप्त किया था।
अल्बर्ट बंडूरा ने यह प्रयोग किया। इससे सिद्ध हुआ कि बच्चे वयस्क मॉडल के आक्रामक व्यवहार को देखकर उसका अनुकरण करते हैं, अर्थात् अधिगम अवलोकन से भी होता है।
ध्यान (Attention), धारण (Retention), पुनरुत्पादन (Reproduction) और अभिप्रेरणा (Motivation)।
धनात्मक (पहला अधिगम दूसरे में सहायक), ऋणात्मक (पहला अधिगम दूसरे में बाधक) और शून्य (कोई प्रभाव नहीं)। इसके अलावा क्षैतिज, ऊर्ध्व और द्विपार्श्विक अंतरण भी बताए जाते हैं।
अभ्यास जारी रहने पर भी कुछ समय तक प्रगति न होना और अधिगम-वक्र का समतल हो जाना पठार है। थकान, अरुचि, अभिप्रेरणा की कमी या गलत विधि इसके कारण हो सकते हैं; यह अस्थायी होता है।
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