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राजस्थान के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी रचनाएँ

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
3 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 3 अक्टूबर 2026
8 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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राजस्थान के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी रचनाएँ

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⚡ Quick Answer: राजस्थान के प्रमुख साहित्यकार काल-क्रम में — प्राचीन/रासो काल: चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो), नरपति नाल्ह (बीसलदेव रासो), दलपति विजय (खुमाण रासो); मध्यकाल: पद्मनाभ (कान्हड़दे प्रबंध), शिवदास गाडण (अचलदास खींची री वचनिका), पृथ्वीराज राठौड़ (वेलि क्रिसन रुकमणी री), मुहणोत नैणसी (नैणसी री ख्यात), बांकीदास (बांकीदास री ख्यात), दयालदास, करणीदान कविया (सूरज प्रकाश); आधुनिक-पूर्व: सूर्यमल्ल मिश्रण (वंश भास्कर, वीर सतसई), श्यामलदास (वीर विनोद), केसरीसिंह बारहठ (चेतावनी रा चूँगट्या, 1903), शिवचंद्र भरतिया (केसर विलास 1900 — पहला राजस्थानी नाटक; कनक सुंदर 1903 — पहला उपन्यास); आधुनिक: कन्हैयालाल सेठिया (धरती धोरां री, लीलटांस), विजयदान देथा (बातां री फुलवाड़ी), रानी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत, चंद्रसिंह बिरकाली, मेघराज मुकुल।

1. राजस्थानी साहित्य — परिचय एवं काल-विभाजन

“राजस्थान के प्रमुख साहित्यकार और उनकी रचनाएँ” — यह राजस्थान GK का सबसे अधिक पूछा जाने वाला विषय है, क्योंकि रचना–रचनाकार मिलान सीधे अंक देता है। राजस्थानी साहित्य लगभग एक हज़ार वर्ष पुराना है — वीर-रस के रासो, चारणों के डिंगल काव्य, ख्यात-वात का इतिहास-लेखन, संत-वाणी और आधुनिक कविता-कहानी-उपन्यास तक। अध्ययन की सुविधा के लिए इसे चार कालों में बाँटा जाता है।

कालसमय (लगभग)प्रमुख प्रवृत्ति
प्राचीन / आदिकाल11वीं–14वीं सदीरासो काव्य, जैन साहित्य, वीर-गाथाएँ
पूर्व-मध्यकाल15वीं–17वीं सदीप्रबंध काव्य, वचनिका, वेलि, भक्ति (मीरा, संत)
उत्तर-मध्यकाल17वीं–19वीं सदीख्यात, बात, विगत — इतिहास-लेखन; दरबारी काव्य
आधुनिक काल19वीं सदी उत्तरार्द्ध सेराष्ट्रीय चेतना, समाज-सुधार, कहानी-उपन्यास-नाटक

राजस्थानी भाषा व डिंगल-पिंगल: राजस्थान की भाषाएँ एवं बोलियाँ — Master Guide

2. प्राचीन / रासो काल के साहित्यकार

साहित्यकाररचनाविशेष
चंदबरदाईपृथ्वीराज रासोपिंगल; पृथ्वीराज चौहान तृतीय के दरबारी कवि; हिंदी का आदिकाव्य माना जाता है
नरपति नाल्हबीसलदेव रासोअजमेर के चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) व राजमती की कथा
दलपति विजयखुमाण रासोमेवाड़ के गुहिल शासकों की गाथा
जोधराजहम्मीर रासोरणथंभौर के हम्मीर देव चौहान
नयनचंद्र सूरिहम्मीर महाकाव्य (संस्कृत)हम्मीर देव का जीवन

पृथ्वीराज चौहान: पृथ्वीराज चौहान — जीवन व तराइन युद्ध | हम्मीर: रणथंभौर — हम्मीर देव

3. मध्यकाल के साहित्यकार

साहित्यकाररचनाविशेष
पद्मनाभकान्हड़दे प्रबंध (1455 के आसपास)जालौर के कान्हड़दे सोनगरा व अलाउद्दीन खिलजी का संघर्ष
शिवदास गाडणअचलदास खींची री वचनिकागागरोन के अचलदास खींची (1423 का साका); डिंगल
पृथ्वीराज राठौड़ (बीकानेर)वेलि क्रिसन रुकमणी रीडिंगल की श्रेष्ठ कृति; तेस्सितोरी ने ‘डिंगल का होरेस’ कहा
कुशललाभढोला मारू री चौपाई, माधवानल कामकंदलाजैसलमेर दरबार; प्रेम-काव्य
ईसरदास बारहठहरिरस, देवियाणभक्त-कवि
दुरसा आढ़ाविरुद छिहत्तरीमहाराणा प्रताप की प्रशंसा में 76 दोहे
मीराबाईपदावली, नरसीजी रो माहेरोकृष्ण-भक्ति
मुहणोत नैणसीनैणसी री ख्यात, मारवाड़ रा परगना री विगतजोधपुर के दीवान; इतिहास-लेखन

नैणसी पर विस्तृत लेख: मुहणोत नैणसी | मीराबाई: मीराबाई — जीवन एवं भक्ति साहित्य | संतों की रचनाएँ: राजस्थान के प्रमुख संत एवं उनकी रचनाएँ

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4. उत्तर-मध्यकाल — ख्यात एवं दरबारी साहित्य

साहित्यकाररचनाविशेष
बांकीदासबांकीदास री ख्यातजोधपुर महाराजा मानसिंह के कविराजा
दयालदासदयालदास री ख्यातबीकानेर राज्य का इतिहास
करणीदान कवियासूरज प्रकाशजोधपुर महाराजा अभयसिंह की प्रशस्ति
वीरभाणराजरूपकमारवाड़ का इतिहास-काव्य
मान कविराजविलासमेवाड़ के महाराणा राजसिंह
रणछोड़ भट्टराजप्रशस्ति (संस्कृत)राजसमंद झील की शिलाओं पर अंकित

5. आधुनिक-पूर्व काल — राष्ट्रीय चेतना

साहित्यकाररचनाविशेष
सूर्यमल्ल मिश्रण (बूंदी)वंश भास्कर, वीर सतसई, बलवंत विलास, छंदोमयूखबूंदी के राजकवि; वीर सतसई (1857) में अंग्रेज-विरोधी स्वर
कविराजा श्यामलदासवीर विनोदमेवाड़ का इतिहास
केसरीसिंह बारहठचेतावनी रा चूँगट्या (1903)महाराणा फतेहसिंह को दिल्ली दरबार में न जाने की प्रेरणा
शिवचंद्र भरतिया (1853–1918)केसर विलास (1900), कनक सुंदर (1903)पहला राजस्थानी नाटक व पहला राजस्थानी उपन्यास

सूर्यमल्ल मिश्रण पर विस्तृत लेख: सूर्यमल्ल मिश्रण

6. आधुनिक काल के साहित्यकार

साहित्यकारप्रमुख रचनाएँसम्मान/विशेष
कन्हैयालाल सेठिया (सुजानगढ़, चूरू)धरती धोरां री, पातल अर पीथल, लीलटांस, मींझरसाहित्य अकादमी (1976, लीलटांस); पद्मश्री (2004)
विजयदान देथा ‘बिज्जी’ (बोरूंदा, जोधपुर)बातां री फुलवाड़ी (14 खंड), दुविधा, अलेखूं हिटलरपहला राजस्थानी साहित्य अकादमी पुरस्कार (1974); पद्मश्री (2007)
रानी लक्ष्मीकुमारी चूंडावतराजस्थानी लोककथाओं व बातों का संकलन-संपादनपद्मश्री (1984)
चंद्रसिंह बिरकालीबादळी, लूप्रकृति-काव्य
मेघराज मुकुलसेनाणीहाड़ी रानी के बलिदान पर प्रसिद्ध कविता
सीताराम लालसराजस्थानी सबद कोसविशाल राजस्थानी शब्दकोश
कोमल कोठारीलोक-संगीत व लोक-संस्कृति का दस्तावेज़ीकरण (रूपायन संस्थान)पद्म भूषण (2004)

विस्तृत लेख: कन्हैयालाल सेठिया | विजयदान देथा

7. इतिहासकार साहित्यकार

इतिहासकाररचनाविशेष
कर्नल जेम्स टॉडAnnals and Antiquities of Rajasthanराजस्थान के इतिहास का प्रसिद्ध अंग्रेज़ी ग्रंथ
मुहणोत नैणसीनैणसी री ख्यात‘राजपूताने का अबुल फ़ज़ल’ (मुंशी देवीप्रसाद)
कविराजा श्यामलदासवीर विनोदमेवाड़ का इतिहास
गौरीशंकर हीराचंद ओझाराजपूताने का इतिहासआधुनिक वैज्ञानिक इतिहास-लेखन

8. राजस्थानी साहित्य को बढ़ावा देने वाली संस्थाएँ

संस्थास्थानभूमिका
राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमीबीकानेर (1983)राजस्थानी साहित्य; पत्रिका ‘जागती जोत’; सूर्यमल्ल मिश्रण शिखर पुरस्कार
राजस्थान साहित्य अकादमीउदयपुरहिंदी साहित्य का प्रोत्साहन
राजस्थानी शोध संस्थानचौपासनी (जोधपुर)प्राचीन पांडुलिपियों का संग्रह-शोध
रूपायन संस्थानबोरूंदा (जोधपुर)लोककथा-लोक संगीत का दस्तावेज़ीकरण (देथा-कोठारी)
साहित्य अकादमी (केंद्रीय)नई दिल्लीराजस्थानी में वार्षिक पुरस्कार

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राजस्थान के प्रमुख साहित्यकार कौन हैं?

चंदबरदाई, पृथ्वीराज राठौड़, मुहणोत नैणसी, सूर्यमल्ल मिश्रण, केसरीसिंह बारहठ, कन्हैयालाल सेठिया, विजयदान देथा और रानी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत राजस्थान के प्रमुख साहित्यकार हैं।

पहला राजस्थानी उपन्यास कौन-सा है?

शिवचंद्र भरतिया का ‘कनक सुंदर’ (1903) पहला राजस्थानी उपन्यास माना जाता है; उनका ‘केसर विलास’ (1900) पहला राजस्थानी नाटक है।

‘चेतावनी रा चूँगट्या’ किसने लिखा?

‘चेतावनी रा चूँगट्या’ ठाकुर केसरीसिंह बारहठ ने 1903 में महाराणा फतेहसिंह को दिल्ली दरबार में न जाने की प्रेरणा देने हेतु डिंगल में लिखा।

‘डिंगल का होरेस’ किसे कहा जाता है?

बीकानेर के पृथ्वीराज राठौड़ (‘वेलि क्रिसन रुकमणी री’ के रचयिता) को इतालवी विद्वान तेस्सितोरी ने ‘डिंगल का होरेस’ कहा।

राजस्थानी में पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार किसे मिला?

राजस्थानी में पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार 1974 में विजयदान देथा को ‘बातां री फुलवाड़ी’ के लिए मिला।

📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)

  1. पृथ्वीराज रासो — चंदबरदाई
  2. बीसलदेव रासो — नरपति नाल्ह
  3. खुमाण रासो — दलपति विजय
  4. कान्हड़दे प्रबंध — पद्मनाभ
  5. अचलदास खींची री वचनिका — शिवदास गाडण
  6. वेलि क्रिसन रुकमणी री — पृथ्वीराज राठौड़
  7. विरुद छिहत्तरी — दुरसा आढ़ा
  8. सूरज प्रकाश — करणीदान कविया
  9. बांकीदास री ख्यात — बांकीदास
  10. वंश भास्कर — सूर्यमल्ल मिश्रण
  11. वीर विनोद — श्यामलदास
  12. चेतावनी रा चूँगट्या — केसरीसिंह बारहठ
  13. पहला राजस्थानी उपन्यास — कनक सुंदर
  14. धरती धोरां री — कन्हैयालाल सेठिया
  15. बातां री फुलवाड़ी — विजयदान देथा

✅ मुख्य बिंदु (Key Points)

  • रासो: चंदबरदाई, नरपति नाल्ह, दलपति विजय, जोधराज।
  • मध्यकाल: पद्मनाभ, शिवदास गाडण, पृथ्वीराज राठौड़, दुरसा आढ़ा, नैणसी।
  • आधुनिक-पूर्व: सूर्यमल्ल, श्यामलदास, केसरीसिंह बारहठ, शिवचंद्र भरतिया।
  • आधुनिक: सेठिया, देथा, लक्ष्मीकुमारी चूंडावत, बिरकाली, मुकुल।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  • पृथ्वीराज राठौड़ (वेलि) और पृथ्वीराज चौहान (रासो के नायक) अलग व्यक्ति हैं।
  • हम्मीर रासो (जोधराज) और हम्मीर महाकाव्य (नयनचंद्र सूरि) — दोनों हम्मीर पर, लेखक अलग।
  • वीर सतसई सूर्यमल्ल की है; ‘वीर विनोद’ श्यामलदास की — ‘वीर’ शब्द से भ्रम।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“चंद-नाल्ह-दलपति — रासो के रथी; पद्म-शिव-पृथ्वी — मध्य के सारथी”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

साहित्यकारों पर प्रश्न लगभग हमेशा ‘रचना–रचनाकार’ मिलान होते हैं। इस लेख की तालिकाओं को काल-क्रम में दोहराएँ, फिर ‘लेखक–रचना–भाषा–विधा’ तालिका वाले लेख से अंतिम रिवीजन करें। पुरस्कार-वर्ष (1974, 1976, 1984, 2004, 2007) अलग से याद रखें।

✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़

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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • Sahitya Akademi — Rajasthani award list (विजयदान देथा 1974, कन्हैयालाल सेठिया 1976)।
  • Indianetzone — Modern Rajasthani prose/drama (शिवचंद्र भरतिया — केसर विलास 1900, कनक सुंदर 1903)।
  • Chetavani ra Chungatya — सार्वजनिक संदर्भ (केसरीसिंह बारहठ, 1903)।
  • पद्म पुरस्कार सूची — लक्ष्मीकुमारी चूंडावत (1984), कोमल कोठारी (पद्म भूषण 2004)।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी रचनाएँ

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक, Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस, LDC एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: रासो ग्रंथों के रचना-काल और प्रामाणिकता पर विद्वानों में मतभेद है; यहाँ परीक्षा में प्रचलित लेखक-रचना संबंध दिए गए हैं। पुरस्कार-वर्ष आधिकारिक सूचियों से मिलाए गए हैं।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 3 अक्टूबर 2026
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Sudhir Sirइतिहास विशेषज्ञलेखक परिचय
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. ‘अचलदास खींची री वचनिका’ के रचयिता हैं —

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Q2. ‘कान्हड़दे प्रबंध’ किसकी रचना है?

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Q3. ‘चेतावनी रा चूँगट्या’ किस शासक को संबोधित है?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. पहला राजस्थानी उपन्यास ‘कनक सुंदर’ के लेखक हैं —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. ‘सूरज प्रकाश’ के रचयिता हैं —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

पृथ्वीराज रासो के रचयिता चंदबरदाई हैं, जो पृथ्वीराज चौहान तृतीय के दरबारी कवि माने जाते हैं; इसकी भाषा पिंगल है।

‘वेलि क्रिसन रुकमणी री’ बीकानेर के पृथ्वीराज राठौड़ की डिंगल रचना है।

शिवचंद्र भरतिया का ‘केसर विलास’ (1900) पहला राजस्थानी नाटक माना जाता है।

‘विरुद छिहत्तरी’ दुरसा आढ़ा ने महाराणा प्रताप की प्रशंसा में लिखी।

राजस्थानी साहित्य में योगदान के लिए रानी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत को 1984 में पद्मश्री मिला।

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