राजस्थान की भाषाएँ एवं बोलियाँ: संपूर्ण Master Guide
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स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।
राजस्थान की भाषाएँ एवं बोलियाँ: संपूर्ण Master Guide
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⚡ Quick Answer: राजस्थानी भाषा का विकास शौरसेनी अपभ्रंश की शाखा गुर्जरी अपभ्रंश से लगभग 8वीं-9वीं शताब्दी में माना जाता है। जालौर में रचित उद्योतन सूरि के प्राकृत ग्रंथ ‘कुवलयमाला’ (778–779 ई.) में वर्णित 18 देशी भाषाओं में ‘मरु भाषा’ का उल्लेख इसका प्राचीनतम प्रमाण है। भाषा-वैज्ञानिक जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने ‘लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया’ (1908) में राजस्थानी का पहला वैज्ञानिक वर्गीकरण किया और इसे 5 वर्गों में बाँटा। प्रमुख बोलियाँ — मारवाड़ी (सबसे अधिक क्षेत्र), मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती, अहीरवाटी, मालवी, शेखावाटी, बागड़ी, वागड़ी। साहित्यिक रूप — डिंगल (पश्चिमी, चारण) और पिंगल (पूर्वी, भाट)। राजस्थान विधानसभा ने 25 अगस्त 2003 को राजस्थानी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने का संकल्प पारित किया।
1. राजस्थानी भाषा — परिचय
“राजस्थान की भाषा क्या है” — सरकारी कामकाज की भाषा हिंदी है, पर जन-जीवन की भाषा राजस्थानी है, जो अनेक बोलियों का समूह है। राजस्थानी का अपना समृद्ध साहित्य है — वीर-रस के डिंगल काव्य से लेकर संत-वाणी, लोकगाथाएँ और आधुनिक कहानी तक। केंद्रीय साहित्य अकादमी राजस्थानी को एक स्वतंत्र साहित्यिक भाषा के रूप में मान्यता देकर हर वर्ष पुरस्कार देती है, किंतु यह अभी संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय से उत्पत्ति, ग्रियर्सन का वर्गीकरण, बोलियों के क्षेत्र और डिंगल-पिंगल पर सबसे अधिक प्रश्न आते हैं।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| उत्पत्ति | शौरसेनी अपभ्रंश → गुर्जरी अपभ्रंश → राजस्थानी (8वीं-9वीं सदी के आसपास) |
| प्राचीनतम उल्लेख | ‘मरु भाषा’ — कुवलयमाला (उद्योतन सूरि, जालौर, 778–779 ई.) |
| पहला वैज्ञानिक वर्गीकरण | जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन — लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया (खंड IX, भाग II — 1908) |
| ग्रियर्सन के मानक | पश्चिम में मारवाड़ी, पूर्व में जयपुरी (ढूंढाड़ी) |
| सबसे अधिक क्षेत्र वाली बोली | मारवाड़ी |
| साहित्यिक रूप | डिंगल (मारवाड़ी आधारित), पिंगल (ब्रज-मिश्रित पूर्वी राजस्थानी) |
| पारंपरिक व्यापारिक लिपि | महाजनी / मुड़िया (परीक्षा-पुस्तकों में आविष्कार — टोडरमल) |
| वर्तमान लिपि | देवनागरी |
| 8वीं अनुसूची हेतु संकल्प | राजस्थान विधानसभा — 25 अगस्त 2003 (सर्वसम्मति) |
| प्रमुख संस्था | राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर (1983); पत्रिका ‘जागती जोत’; सर्वोच्च पुरस्कार — सूर्यमल्ल मिश्रण शिखर पुरस्कार |
2. राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति एवं विकास
- संस्कृत → प्राकृत → अपभ्रंश: उत्तर भारत की आधुनिक भाषाएँ अपभ्रंश से विकसित हुईं; पश्चिमी भारत में शौरसेनी अपभ्रंश प्रमुख था।
- गुर्जरी अपभ्रंश: शौरसेनी की पश्चिमी शाखा — इसी से राजस्थानी और गुजराती दोनों निकलीं; इसलिए प्रारंभिक काल में दोनों को मिलाकर ‘मरु-गुर्जर’ या पुरानी पश्चिमी राजस्थानी कहा जाता है।
- 8वीं सदी: कुवलयमाला में ‘मरु भाषा’ का उल्लेख — राजस्थानी की अलग पहचान का प्रमाण।
- 12वीं–15वीं सदी: रासो साहित्य, जैन कवियों की रचनाएँ; राजस्थानी व गुजराती का धीरे-धीरे अलगाव।
- 16वीं–19वीं सदी: डिंगल काव्य का स्वर्णकाल — वेलि, ख्यात, वचनिका, संत-वाणी।
- 20वीं सदी: आधुनिक राजस्थानी कविता-कहानी (सेठिया, देथा, लक्ष्मीकुमारी चूंडावत); साहित्य अकादमी पुरस्कार।
3. ग्रियर्सन का वर्गीकरण — 5 वर्ग (सबसे महत्वपूर्ण)
| वर्ग | प्रमुख बोलियाँ | क्षेत्र |
|---|---|---|
| 1. पश्चिमी राजस्थानी | मारवाड़ी (उपबोलियाँ — मेवाड़ी, बीकानेरी/थली, शेखावाटी, बागड़ी, ढटकी, गोड़वाड़ी, देवड़ावाटी, खैराड़ी) | जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, नागौर, पाली, जालौर, सिरोही, उदयपुर |
| 2. उत्तर-पूर्वी राजस्थानी | मेवाती, अहीरवाटी (राठी) | अलवर, भरतपुर, कोटपूतली-बहरोड़ |
| 3. मध्य-पूर्वी राजस्थानी | ढूंढाड़ी (जयपुरी) व उपबोलियाँ — तोरावाटी, राजावाटी, काठैड़ा, चौरासी, नागरचोल, अजमेरी, किशनगढ़ी; हाड़ौती | जयपुर, दौसा, टोंक, अजमेर, कोटा, बूंदी, बारां |
| 4. दक्षिण-पूर्वी राजस्थानी | मालवी (रांगड़ी, सोंधवाड़ी) | झालावाड़, कोटा-प्रतापगढ़ का मालवा-सीमांत |
| 5. दक्षिणी राजस्थानी | निमाड़ी | मध्यप्रदेश सीमांत (राजस्थान के बाहर अधिक) |
ध्यान दें: ग्रियर्सन ने वागड़ी को भीली भाषा-समूह से जुड़ा माना; इसलिए वागड़ी (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) को राजस्थानी के पाँच वर्गों के बजाय भीली के साथ पढ़ा जाता है। वागड़ी पर अलग लेख: वागड़ी बोली
ट्रिक: “प-उ-म-द-द” → पश्चिमी (मारवाड़ी), उत्तर-पूर्वी (मेवाती), मध्य-पूर्वी (ढूंढाड़ी), दक्षिण-पूर्वी (मालवी), दक्षिणी (निमाड़ी)।
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4. प्रमुख बोलियाँ — एक नज़र में
| बोली | मुख्य क्षेत्र | एक-पंक्ति पहचान |
|---|---|---|
| मारवाड़ी | जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, नागौर, पाली, जालौर | सबसे अधिक क्षेत्र; साहित्यिक रूप डिंगल |
| मेवाड़ी | उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा | मारवाड़ी के बाद दूसरी महत्वपूर्ण बोली |
| ढूंढाड़ी (जयपुरी) | जयपुर, दौसा, टोंक, अजमेर का भाग | ब्रज व गुजराती का प्रभाव; दादू पंथ का साहित्य |
| हाड़ौती | कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ का भाग | ढूंढाड़ी की उपबोली (ग्रियर्सन) |
| मेवाती | अलवर, भरतपुर (डीग, कामां) | लालदासी-चरणदासी साहित्य |
| अहीरवाटी (राठी) | कोटपूतली-बहरोड़, अलवर का उत्तर-पश्चिम | हरियाणवी से निकटता |
| मालवी | झालावाड़, प्रतापगढ़ का भाग | मालवा से संबंध |
| शेखावाटी | सीकर, झुंझुनूं, चूरू का भाग | मारवाड़ी की उपबोली |
| बागड़ी | हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर | पंजाबी-हरियाणवी प्रभाव; स्वर-आधारित (tonal) बोली |
| वागड़ी | डूंगरपुर, बांसवाड़ा | भीली व गुजराती प्रभाव |
विस्तृत लेख: प्रमुख बोलियाँ — मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती | शेखावाटी बोली | बागड़ी बोली | वागड़ी बोली | सभी बोलियों की क्षेत्र-तालिका: राजस्थानी की बोलियाँ एवं क्षेत्र — तालिका
5. डिंगल एवं पिंगल — राजस्थानी साहित्य की दो शैलियाँ
| आधार | डिंगल | पिंगल |
|---|---|---|
| आधार-भाषा | मारवाड़ी (पश्चिमी राजस्थानी) का साहित्यिक रूप | ब्रजभाषा मिश्रित पूर्वी राजस्थानी |
| रचनाकार | मुख्यतः चारण | मुख्यतः भाट |
| प्रमुख रस | वीर रस | श्रृंगार, भक्ति, वीर |
| ध्वनि | ओजपूर्ण, कठोर वर्ण | मधुर, कोमल |
| उदाहरण | वेलि क्रिसन रुकमणी री, अचलदास खींची री वचनिका, ढोला मारू रा दूहा | पृथ्वीराज रासो (चंदबरदाई) |
ग्रंथ-लेखक विस्तार से: राजस्थान के प्रमुख ग्रंथ एवं लेखक | लेखक–रचना–भाषा–विधा तालिका: लेखक–रचना–भाषा–विधा तालिका
6. राजस्थानी भाषा की मान्यता — वर्तमान स्थिति
- साहित्य अकादमी (केंद्रीय): राजस्थानी में वार्षिक पुरस्कार; पहला राजस्थानी पुरस्कार 1974 में विजयदान देथा को ‘बातां री फुलवाड़ी’ के लिए।
- राजस्थान विधानसभा संकल्प — 25 अगस्त 2003: राजस्थानी को 8वीं अनुसूची में शामिल करने हेतु सर्वसम्मति से संकल्प; केंद्र को प्रस्ताव भेजे गए।
- 8वीं अनुसूची: राजस्थानी अभी शामिल नहीं; मान्यता की माँग जारी।
- संस्थाएँ: राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर (1983); राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर (हिंदी साहित्य हेतु); राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी (जोधपुर)।
- भाषा-मान्यता से जुड़े नए निर्णय करेंट अफेयर्स में आते रहते हैं — डेली करेंट अफेयर्स पढ़ते रहें।
7. लिपि एवं शब्दकोश
- महाजनी / मुड़िया लिपि: व्यापारियों की बही-खाता लिपि; शीघ्र लिखने हेतु मात्राएँ कम; परीक्षा-पुस्तकों में इसका आविष्कार राजा टोडरमल से जोड़ा जाता है।
- देवनागरी: आधुनिक राजस्थानी साहित्य व शिक्षा की लिपि।
- राजस्थानी सबद कोस: सीताराम लालस द्वारा संपादित विशाल राजस्थानी शब्दकोश — भाषा-मानकीकरण का आधार-ग्रंथ।
🔎 लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask)
राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति किस अपभ्रंश से हुई?
राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति शौरसेनी अपभ्रंश की पश्चिमी शाखा गुर्जरी अपभ्रंश से मानी जाती है।
‘मरु भाषा’ का उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?
उद्योतन सूरि द्वारा जालौर में रचित प्राकृत ग्रंथ ‘कुवलयमाला’ (778–779 ई.) में वर्णित 18 देशी भाषाओं में ‘मरु भाषा’ का उल्लेख मिलता है।
ग्रियर्सन ने राजस्थानी को कितने वर्गों में बाँटा?
ग्रियर्सन ने लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया (1908) में राजस्थानी को पाँच वर्गों — पश्चिमी, उत्तर-पूर्वी, मध्य-पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी और दक्षिणी — में बाँटा।
राजस्थान में सबसे अधिक बोली जाने वाली बोली कौन-सी है?
क्षेत्रफल की दृष्टि से मारवाड़ी राजस्थान की सबसे अधिक बोली जाने वाली बोली है।
क्या राजस्थानी भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में है?
नहीं; राजस्थान विधानसभा ने 25 अगस्त 2003 को इसे आठवीं अनुसूची में शामिल करने का संकल्प पारित किया, पर अभी यह शामिल नहीं है। साहित्य अकादमी इसे साहित्यिक भाषा के रूप में मान्यता देती है।
📝 One-Liner Revision (15 प्रश्न)
- राजस्थानी की उत्पत्ति — गुर्जरी अपभ्रंश
- ‘मरु भाषा’ का उल्लेख — कुवलयमाला
- कुवलयमाला के रचयिता — उद्योतन सूरि
- कुवलयमाला की रचना — 778–779 ई., जालौर
- राजस्थानी का पहला वैज्ञानिक वर्गीकरण — ग्रियर्सन (1908)
- ग्रियर्सन के वर्ग — 5
- सबसे अधिक क्षेत्र वाली बोली — मारवाड़ी
- मारवाड़ी के बाद दूसरी महत्वपूर्ण बोली — मेवाड़ी
- डिंगल — मारवाड़ी का साहित्यिक रूप (चारण)
- पिंगल — ब्रज-मिश्रित (भाट)
- पृथ्वीराज रासो की भाषा — पिंगल
- व्यापारियों की लिपि — मुड़िया (महाजनी)
- 8वीं अनुसूची हेतु विधानसभा संकल्प — 25 अगस्त 2003
- राजस्थानी भाषा अकादमी — बीकानेर (1983)
- अकादमी की पत्रिका — जागती जोत
✅ मुख्य बिंदु (Key Points)
- शौरसेनी → गुर्जरी अपभ्रंश → राजस्थानी; ‘मरु भाषा’ — कुवलयमाला।
- ग्रियर्सन (1908) — 5 वर्ग; मानक: मारवाड़ी (पश्चिम), जयपुरी (पूर्व)।
- डिंगल (चारण, वीर रस) बनाम पिंगल (भाट, ब्रज-मिश्रित)।
- 2003 संकल्प; बीकानेर अकादमी (1983); 8वीं अनुसूची में अभी नहीं।
🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें
- पृथ्वीराज रासो पिंगल में है, डिंगल में नहीं।
- बागड़ी (हनुमानगढ़-गंगानगर) और वागड़ी (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) — सबसे बड़ा भ्रम; अलग-अलग बोलियाँ।
- हाड़ौती को ग्रियर्सन ने ढूंढाड़ी (मध्य-पूर्वी) वर्ग में रखा — इसे मारवाड़ी की उपबोली न मानें।
- राजस्थान साहित्य अकादमी (उदयपुर) हिंदी की है; राजस्थानी भाषा अकादमी बीकानेर में है।
🧠 मेमोरी ट्रिक
“डिंगल-चारण-वीर, पिंगल-भाट-ब्रज”।
“बागड़ी ऊपर (उत्तर), वागड़ी नीचे (दक्षिण)”।
👨🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी
भाषा खंड में सबसे अधिक प्रश्न ‘बोली–क्षेत्र’ मिलान और ‘ग्रियर्सन’ पर आते हैं। RPSC प्रथम/द्वितीय श्रेणी (हिंदी) में डिंगल-पिंगल और रासो साहित्य अलग से पूछे जाते हैं। RAS मुख्य परीक्षा में ‘राजस्थानी भाषा की मान्यता का प्रश्न’ पर उत्तर लिखते समय 2003 का संकल्प, साहित्य अकादमी मान्यता और बीकानेर अकादमी — तीनों का उल्लेख करें।
✍️ अभ्यास करें — क्विज़ व टेस्ट सीरीज़
राजस्थान की भाषाएँ एवं बोलियाँ व राजस्थान की अन्य लोक-कलाओं पर अपनी तैयारी जाँचने के लिए नीचे दिए अभ्यास सेट हल करें:
- राजस्थान कला एवं संस्कृति प्रश्नोत्तरी
- राजस्थान लोककला एवं संस्कृति अभ्यास
- RPSC RAS Prelims 2026 टेस्ट सीरीज़
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📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत
- G. A. Grierson — Linguistic Survey of India, Vol. IX, Part II (1908) — ‘Rajasthani and Gujarati’।
- RajRAS — ‘भाषा एवं साहित्य’ (rajras.in)।
- राज्यसभा प्रश्नोत्तर (24.11.2010) — राजस्थान विधानसभा का 25.08.2003 का संकल्प (rsdebate.nic.in)।
- राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर — परिचय।

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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)
Q1. राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति किस अपभ्रंश से मानी जाती है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q2. ‘कुवलयमाला’ में वर्णित 18 देशी भाषाओं में राजस्थानी के लिए किस नाम का प्रयोग हुआ है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q3. ग्रियर्सन ने राजस्थानी को कितने वर्गों में विभाजित किया?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q4. पृथ्वीराज रासो की भाषा है —
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026Q5. राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी कहाँ स्थित है?
सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
राजस्थानी भाषा शौरसेनी अपभ्रंश की पश्चिमी शाखा गुर्जरी अपभ्रंश से लगभग 8वीं-9वीं शताब्दी में विकसित हुई।
जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया (1908) में राजस्थानी बोलियों का पहला वैज्ञानिक वर्गीकरण कर उन्हें पाँच वर्गों में बाँटा।
डिंगल मारवाड़ी आधारित पश्चिमी राजस्थानी का साहित्यिक रूप है, जिसमें मुख्यतः चारणों ने वीर-रस काव्य रचा; पिंगल ब्रजभाषा मिश्रित पूर्वी राजस्थानी है, जिसमें मुख्यतः भाटों ने रचना की।
राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर में है, जिसकी स्थापना 1983 में हुई; इसकी पत्रिका ‘जागती जोत’ है।
राजस्थान विधानसभा ने 25 अगस्त 2003 को राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का सर्वसम्मत संकल्प पारित किया।
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