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राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र एवं उनके प्रमुख वादक

Sudhir SirSudhir Sir (इतिहास विशेषज्ञ)
2 अक्टूबर 2026
अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026
8 मिनट पठन

कैसे बना: यह नोट सुयोग अकादमी के लेखक ने परीक्षा सिलेबस के अनुसार लिखा/संपादित किया है। अंतिम समीक्षा तिथि ऊपर है। त्रुटि दिखे तो संपर्क करें। टीम परिचय

स्रोत आधार: RPSC / RSMSSB कला-संस्कृति इकाई (लोक कला, मेले, किले)। सिलेबस विषय; कॉपीराइट सामग्री का पेस्ट नहीं।

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राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र एवं उनके प्रमुख वादक

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⚡ Quick Answer: राजस्थान के प्रमुख वाद्य और उनके प्रसिद्ध वादक — कमायचा: साकर खाँ मांगणियार (पद्मश्री 2012); सिंधी सारंगी: लाखा खाँ (पद्मश्री 2021); सारंगी: उस्ताद सुल्तान खाँ (सीकर, पद्मभूषण 2010); मोहन वीणा: पं. विश्वमोहन भट्ट (जयपुर — ग्रैमी 1994, पद्मश्री 2002, पद्मभूषण 2017); सात्विक वीणा: पं. सलिल भट्ट; भपंग: जहूर खाँ मेवाती, उमर फ़ारूख़ मेवाती; खड़ताल: सद्दीक खाँ मांगणियार; नड़: करणा भील (जैसलमेर); नगाड़ा: रामकिशन सोलंकी (पुष्कर); रावणहत्था: पाबूजी के भोपे; जंतर: देवनारायणजी के गुर्जर भोपे; तंदूरा-मंजीरा: कामड़ (तेरहताली)।

1. वाद्य और वादक — परीक्षा दृष्टि से

लोक वाद्यों के प्रश्न अब केवल ‘कौन-सा वाद्य किस वर्ग का’ तक सीमित नहीं हैं; ‘किस वाद्य के लिए कौन-सा कलाकार प्रसिद्ध’ और ‘किस समुदाय का पारंपरिक वाद्य कौन-सा’ जैसे प्रश्न भी बढ़ रहे हैं। राजस्थान में वाद्य-वादन दो धाराओं में चलता है — (क) समुदाय-आधारित पारंपरिक वादन (भोपे, मांगणियार, लंगा, कामड़, जोगी) और (ख) व्यक्तिगत रूप से प्रसिद्ध कलाकार (पद्म सम्मानित वादक)।

वाद्यों की बनावट के लिए राजस्थान के लोक वाद्य और चार वर्गों के लिए लोक वाद्यों का वर्गीकरण देखें। यह नोट केवल ‘वाद्य → वादक/वादक समुदाय’ संबंध पर केंद्रित है।

2. प्रसिद्ध वादक — व्यक्तिगत कलाकार

वादकवाद्यक्षेत्रसम्मान/विशेष तथ्य
पं. विश्वमोहन भट्टमोहन वीणा (स्वयं विकसित — गिटार का भारतीयकृत रूप)जयपुर‘A Meeting by the River’ (राई कूडर के साथ) के लिए ग्रैमी पुरस्कार 1994; पद्मश्री 2002; पद्मभूषण 2017
पं. सलिल भट्टसात्विक वीणा (स्वयं विकसित)जयपुरविश्वमोहन भट्ट के पुत्र
उस्ताद सुल्तान खाँ (1940–2011)सारंगीसीकरपद्मभूषण 2010; सारंगी वादन व गायन
साकर खाँ मांगणियार (1938–2013)कमायचाहमीरा, जैसलमेरपद्मश्री 2012
लाखा खाँसिंधी सारंगीरानेरी, जोधपुरपद्मश्री 2021
सद्दीक खाँ मांगणियारखड़तालजैसलमेर-बाड़मेर‘खड़ताल का जादूगर’ के रूप में प्रसिद्ध
जहूर खाँ मेवातीभपंगअलवर (मेवात)भपंग को राष्ट्रीय पहचान
उमर फ़ारूख़ मेवातीभपंगमेवातभपंग-वादन की मेवाती परंपरा
करणा भीलनड़जैसलमेरनड़ वादन; लंबी मूँछों के लिए भी विश्व-प्रसिद्ध
रामकिशन सोलंकीनगाड़ापुष्कर (अजमेर)‘नगाड़ा सम्राट’; अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ

3. पारंपरिक वादक समुदाय और उनके वाद्य

समुदायप्रमुख वाद्यसंदर्भ
पाबूजी के भोपे (नायक/थोरी)रावणहत्था; माटापाबूजी की फड़ व पवाड़े
गुर्जर भोपेजंतरदेवनारायणजी की फड़ — बगड़ावत गाथा
गोगाजी/भैरूजी के भोपेडेरू; मशकगोगाजी के गीत; भैरूजी की आराधना
कामड़तंदूरा, मंजीरारामदेवजी के भजन; तेरहताली नृत्य
मांगणियारकमायचा, खड़ताल, ढोलकजैसलमेर-बाड़मेर; राजपूत यजमान
लंगासिंधी सारंगी, गुजरातण सारंगी, सतारा, मुरलाबाड़मेर-जोधपुर; सिंधी सिपाही यजमान
मेव जोगीभपंग, सारंगीमेवात — पंडून का कड़ा, भरथरी
नाथ जोगीजोगिया सारंगी, इकताराभरथरी-गोपीचंद गाथा
कालबेलियापूंगी (बीन), खंजरी, चिमटासपेरा समुदाय; कालबेलिया नृत्य
भील, गरासियामादल, थाली, अलगोजागवरी, वालर नृत्य
ढोली, दमामीढोल, नगाड़ामांगलिक अवसर, राजदरबार
सरगड़ाबांकियाविवाह के अवसर

फड़-परंपरा के लिए फड़ चित्रकला और तेरहताली के लिए तेरहताली लोकनृत्य देखें।

4. वाद्य → वादक: त्वरित सुमेलन सूची

वाद्यवर्गप्रसिद्ध वादक / वादक समुदाय
रावणहत्थातत्पाबूजी के भोपे
जंतरतत्गुर्जर भोपे (देवनारायण)
कमायचातत्मांगणियार — साकर खाँ
सिंधी सारंगीतत्लंगा; लाखा खाँ
सारंगी (शास्त्रीय)तत्उस्ताद सुल्तान खाँ
भपंगतत्जहूर खाँ मेवाती, उमर फ़ारूख़
तंदूरातत्कामड़
मोहन वीणातत्पं. विश्वमोहन भट्ट
सात्विक वीणातत्पं. सलिल भट्ट
नड़सुषिरकरणा भील
पूंगीसुषिरकालबेलिया
सतारा, मुरलासुषिरलंगा
मशकसुषिरभैरूजी के भोपे
नगाड़ाअवनद्धरामकिशन सोलंकी
मादलअवनद्धभील, गरासिया
डेरूअवनद्धगोगाजी के भोपे
खड़तालघनसद्दीक खाँ मांगणियार
मंजीरा (13)घनकामड़ स्त्रियाँ — तेरहताली

5. मोहन वीणा — राजस्थान की वैश्विक पहचान

  • आविष्कारक: पं. विश्वमोहन भट्ट (जयपुर) — पाश्चात्य हवाईयन गिटार में तारों व तुंबे जैसे परिवर्तन कर भारतीय शास्त्रीय संगीत के अनुरूप बनाया।
  • ग्रैमी (1994): अमेरिकी गिटारवादक राई कूडर के साथ एल्बम ‘A Meeting by the River’ के लिए — राजस्थान से जुड़े कलाकार की बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि।
  • सम्मान: पद्मश्री (2002), पद्मभूषण (2017)।
  • उनके पुत्र पं. सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा विकसित की।

6. वाद्य-परंपरा के संरक्षण की चुनौतियाँ व प्रयास

  • चुनौतियाँ: यजमानी व्यवस्था का कमजोर होना, युवा पीढ़ी का पलायन, वाद्य-निर्माता कारीगरों की कमी, इलेक्ट्रॉनिक संगीत की प्रतिस्पर्धा।
  • प्रयास: राजस्थान संगीत नाटक अकादमी (जोधपुर) के पुरस्कार व प्रशिक्षण; रूपायन संस्थान (बोरूंदा) का दस्तावेज़ीकरण; पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (उदयपुर) के उत्सव; RIFF (जोधपुर) व मरु महोत्सव (जैसलमेर) जैसे मंच; गुरु-शिष्य परंपरा योजनाएँ।
  • संग्रहालय: लोक वाद्यों का संग्रह — भारतीय लोक कला मंडल (उदयपुर) व राजस्थान संगीत नाटक अकादमी (जोधपुर)।

7. क्षेत्र-वार वाद्य मानचित्र

क्षेत्रप्रमुख वाद्यप्रमुख वादक समुदाय
पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर)कमायचा, खड़ताल, सिंधी सारंगी, सतारा, मुरला, नड़मांगणियार, लंगा, मेघवाल, भील
मारवाड़ (जोधपुर, पाली, नागौर)रावणहत्था, तंदूरा, मंजीरा, ढोलभोपे, कामड़, ढोली
शेखावाटी, बीकानेरचंग, डफ, झांझ, बाँसुरीहोली मंडलियाँ
मेवात (अलवर, खैरथल-तिजारा)भपंग, सारंगी, चिकारामेव जोगी, मिरासी
ब्रज-डांग (भरतपुर, धौलपुर, करौली)नगाड़ा, ढोलक, झाँझ, हारमोनियमतालबंदी मंडलियाँ
मेवाड़ व आदिवासी क्षेत्रमादल, थाली, अलगोजा, कुंडीभील, गरासिया
भीलवाड़ा-अजमेर क्षेत्रजंतर, रावणहत्थागुर्जर भोपे, फड़ वाचक

भौगोलिक तर्क: पश्चिमी मरुस्थल में चरवाहा जीवन व लंबी यात्राओं ने सुषिर (बाँसुरी, सतारा, नड़) व तार वाद्यों (कमायचा, सारंगी) को जन्म दिया, जबकि आदिवासी व कृषक क्षेत्रों में सामूहिक नृत्य के लिए अवनद्ध व घन वाद्य (मादल, थाली, चंग) अधिक प्रचलित हुए।

📝 One-Liner Revision — वाद्य एवं वादक (24 प्रश्न)

  1. प्रश्न: मोहन वीणा के आविष्कारक?
    उत्तर: पं. विश्वमोहन भट्ट
  2. प्रश्न: विश्वमोहन भट्ट को ग्रैमी कब?
    उत्तर: 1994
  3. प्रश्न: ग्रैमी किस एल्बम के लिए?
    उत्तर: A Meeting by the River
  4. प्रश्न: विश्वमोहन भट्ट को पद्मभूषण?
    उत्तर: 2017
  5. प्रश्न: सात्विक वीणा के आविष्कारक?
    उत्तर: पं. सलिल भट्ट
  6. प्रश्न: कमायचा के प्रसिद्ध वादक?
    उत्तर: साकर खाँ
  7. प्रश्न: सिंधी सारंगी के पद्मश्री वादक?
    उत्तर: लाखा खाँ (2021)
  8. प्रश्न: सारंगी वादक सुल्तान खाँ का जिला?
    उत्तर: सीकर
  9. प्रश्न: भपंग के प्रसिद्ध वादक?
    उत्तर: जहूर खाँ मेवाती
  10. प्रश्न: ‘खड़ताल का जादूगर’?
    उत्तर: सद्दीक खाँ मांगणियार
  11. प्रश्न: नड़ के प्रसिद्ध वादक?
    उत्तर: करणा भील
  12. प्रश्न: ‘नगाड़ा सम्राट’?
    उत्तर: रामकिशन सोलंकी (पुष्कर)
  13. प्रश्न: रावणहत्था कौन बजाते हैं?
    उत्तर: पाबूजी के भोपे
  14. प्रश्न: जंतर कौन बजाते हैं?
    उत्तर: देवनारायण के गुर्जर भोपे
  15. प्रश्न: तंदूरा कौन बजाते हैं?
    उत्तर: कामड़
  16. प्रश्न: मशक कौन बजाते हैं?
    उत्तर: भैरूजी के भोपे
  17. प्रश्न: डेरू कौन बजाते हैं?
    उत्तर: गोगाजी के भोपे
  18. प्रश्न: पूंगी कौन बजाते हैं?
    उत्तर: कालबेलिया
  19. प्रश्न: मादल कौन बजाते हैं?
    उत्तर: भील, गरासिया
  20. प्रश्न: सतारा कौन बजाते हैं?
    उत्तर: लंगा (व मेघवाल)
  21. प्रश्न: बांकिया कौन बजाते हैं?
    उत्तर: सरगड़ा
  22. प्रश्न: जोगिया सारंगी पर कौन-सी गाथा?
    उत्तर: भरथरी
  23. प्रश्न: तेरहताली के 13 मंजीरे कौन बाँधती हैं?
    उत्तर: कामड़ स्त्रियाँ
  24. प्रश्न: माटा किस गाथा के साथ?
    उत्तर: पाबूजी के पवाड़े
  25. प्रश्न: उमर फ़ारूख़ किस वाद्य के वादक?
    उत्तर: भपंग
  26. प्रश्न: सुल्तान खाँ को पद्मभूषण?
    उत्तर: 2010
  27. प्रश्न: साकर खाँ का गाँव?
    उत्तर: हमीरा (जैसलमेर)
  28. प्रश्न: मेवात में भपंग के साथ गाई जाने वाली गाथा?
    उत्तर: पंडून का कड़ा
  29. प्रश्न: सिंधी सारंगी किस समुदाय का वाद्य?
    उत्तर: लंगा
  30. प्रश्न: चंग किस त्योहार पर?
    उत्तर: होली
  31. प्रश्न: कुंडी वाद्य किस क्षेत्र में?
    उत्तर: मेवाड़ के आदिवासी क्षेत्र
  32. प्रश्न: लोक वाद्यों का संग्रह (उदयपुर)?
    उत्तर: भारतीय लोक कला मंडल

✅ मुख्य बिंदु (Key Points) — एक नज़र में

  • मोहन वीणा — विश्वमोहन भट्ट (ग्रैमी 1994); सात्विक वीणा — सलिल भट्ट।
  • कमायचा — साकर खाँ; सिंधी सारंगी — लाखा खाँ; सारंगी — सुल्तान खाँ।
  • भपंग — जहूर खाँ मेवाती; खड़ताल — सद्दीक खाँ; नड़ — करणा भील; नगाड़ा — रामकिशन सोलंकी।
  • भोपे — रावणहत्था (पाबूजी), जंतर (देवनारायण), डेरू (गोगाजी), मशक (भैरूजी)।
  • कामड़ — तंदूरा, मंजीरा; कालबेलिया — पूंगी।

🎯 Exam Trap — इन गलतियों से बचें

  1. मोहन वीणा व सात्विक वीणा के आविष्कारक बदलना — मोहन = विश्वमोहन; सात्विक = सलिल।
  2. जहूर खाँ को खड़ताल से जोड़ना — जहूर खाँ = भपंग; खड़ताल = सद्दीक खाँ।
  3. मशक को गोगाजी के भोपों से जोड़ना — मशक = भैरूजी; डेरू = गोगाजी।
  4. करणा भील को ‘करणा’ वाद्य से जोड़ना — करणा भील नड़ वादक थे; ‘करणा’ अलग पीतल वाद्य है।

🧠 मेमोरी ट्रिक

“पाबू का रावण, देव का जंतर, गोगा का डेरू, भैरू की मशक, रामदेव का तंदूरा” — भोपे व वाद्य।

“जहूर का भपंग, सद्दीक की खड़ताल, करणा का नड़, सोलंकी का नगाड़ा”।

👨‍🏫 शिक्षक की परीक्षा टिप्पणी

‘वाद्य–वादक’ प्रश्नों में दो प्रकार की गलतियाँ सबसे आम हैं — (1) लोकदेवताओं के भोपों के वाद्य बदल देना, और (2) नाम-साम्य से भ्रम (करणा भील बनाम करणा वाद्य)। ऊपर की ‘भोपे वाली ट्रिक’ एक बार बोलकर याद करें। विश्वमोहन भट्ट से जुड़े तीन तथ्य — मोहन वीणा, ग्रैमी 1994, पद्मभूषण 2017 — लगभग हर परीक्षा में किसी न किसी रूप में आते हैं।

📚 संबंधित नोट्स (आगे क्या पढ़ें?)

📖 प्रामाणिक संदर्भ एवं स्रोत

  • पद्म पुरस्कार सूची — गृह मंत्रालय, भारत सरकार।
  • The Recording Academy (Grammy) — 1994 Best World Music Album।
  • राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर; रूपायन संस्थान, बोरूंदा।

Author Byline

लेखक: सुयोग अकादमी कला एवं संस्कृति संपादकीय टीम

तथ्य जाँच एवं संपादन: सुधीर ढाका (BSc-BEd), सुयोग अकादमी

विषय: राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र एवं उनके प्रमुख वादक

परीक्षा उपयोगिता: RAS/RTS, RPSC स्कूल व्याख्याता/वरिष्ठ अध्यापक (कला/इतिहास), Rajasthan CET, पटवारी, VDO, REET Mains, राजस्थान पुलिस एवं अन्य RSMSSB परीक्षाएँ

संपादकीय नोट: व्यक्तिगत वादकों के सम्मान-वर्ष आधिकारिक सूचियों पर आधारित हैं; पारंपरिक समुदाय-आधारित वादन में किसी एक ‘प्रसिद्ध वादक’ के स्थान पर समुदाय को उत्तर माना जाता है।

अंतिम समीक्षा: 2 अक्टूबर 2026

अंतिम संशोधन (Last Updated): 2 अक्टूबर 2026
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🎯 विगत वर्षों के प्रश्न (Interactive PYQs)

Q1. मोहन वीणा के आविष्कारक हैं —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q2. भपंग वादक के रूप में प्रसिद्ध —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q3. मशक वाद्य कौन बजाते हैं?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q4. सिंधी सारंगी वादक लाखा खाँ को पद्मश्री कब मिला?

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

Q5. ‘नगाड़ा सम्राट’ के रूप में प्रसिद्ध कलाकार —

सुयोग अभ्यास प्रश्न (RPSC/RSMSSB पैटर्न) 2026

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

मोहन वीणा का आविष्कार जयपुर के पं. विश्वमोहन भट्ट ने किया; उन्हें 1994 में ‘A Meeting by the River’ के लिए ग्रैमी पुरस्कार मिला।

मेवात (अलवर) के जहूर खाँ मेवाती और उमर फ़ारूख़ मेवाती भपंग के प्रसिद्ध वादक हैं।

जैसलमेर के हमीरा गाँव के साकर खाँ मांगणियार कमायचा के प्रसिद्ध वादक थे; उन्हें 2012 में पद्मश्री मिला।

जैसलमेर के करणा भील नड़ वाद्य के प्रसिद्ध वादक थे।

पाबूजी की फड़ के साथ रावणहत्था और देवनारायणजी की फड़ के साथ जंतर बजाया जाता है।

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